रक्षा मंत्री ने जनता की भलाई के लिए तमिलनाडु के पूर्व मुख्य मंत्री के योगदान का स्मरण करते हुए कहा, “तमिल पहचान में गहराई से शामिल होने के बावजूद, थिरु करुणानिधि ने कभी भी क्षेत्रवाद को राष्ट्र की एकता को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने समझा कि भारतीय लोकतंत्र की ताकत विविध आवाजों और पहचानों को समायोजित करने की क्षमता में निहित है। राज्य के अधिकारों पर उनका आग्रह संघ के भीतर सत्ता के अधिक संतुलित और न्यायसंगत वितरण का आह्वान था। संघवाद के प्रति यह प्रतिबद्धता भारतीयता का एक प्रमुख पहलू है। भारत की विविधता इसकी ताकत है और संघीय संरचना इस विविधता को एक एकीकृत ढांचे के भीतर पनपने की अनुमति देती है।”
श्री राजनाथ सिंह ने कलैग्नार करुणानिधि को एक ऐसा नेता बताया जिनकी राष्ट्रीय शासन में भूमिका और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की वकालत ने भारतीय लोकतंत्र पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि भारतीय पहचान की समावेशी प्रकृति तिरु करुणानिधि की नीतियों में परिलक्षित होती है, जो हाशिए पर रहने वाले कमज़ोर लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि महिलाओं और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहायता मिले।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “कलैग्नार करुणानिधि महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले कमज़ोर समुदायों के अधिकारों के लिए एक प्रखर समर्थक थे। उन्होंने ऐसे सुधारों का नेतृत्व किया, जिन्होंने लैंगिक समानता को प्रोत्साहन दिया और महिलाओं को सशक्त बनाया। उनकी सरकार ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला कानून बनाया और उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कृषि मजदूरों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कल्याण बोर्ड बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका काम एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है कि किसी राष्ट्र की प्रगति का असली माप इस बात में निहित है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है।”
तिरु करुणानिधि को एक कुशल प्रशासक बताते हुए श्री राजनाथ सिंह ने उनके कार्यक्रम ‘मनु निधि थित्तम’ का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने जिला अधिकारियों को हर सप्ताह एक दिन केवल लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया था। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करना था। उनकी दृष्टि केवल तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने माना कि किसी एक राज्य की प्रगति समग्र रूप से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देती है। उनका कार्य आत्मनिर्भरता और प्रगति की भारतीय भावना का प्रमाण है। उनकी विरासत यह याद दिलाती है कि क्षेत्रीय विकास राष्ट्रीय विकास का अभिन्न अंग है। यह सहकारी संघवाद के विचार का सबसे अच्छा उदाहरण है।”
रक्षा मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लोकतंत्र और सहकारी संघवाद की शक्ति में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपने 1.4 अरब लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर रहा है, बल्कि यह लोगों को यह आशा भी दे रहा है कि लोकतंत्र विकास प्रदान करता है और लोगों को सशक्त बनाता है।
श्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु दोनों में रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने के निर्णय का उदाहरण बताते हुए इस बात पर बल दिया कि विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पक्षपातपूर्ण राजनीति से परे है। उन्होंने कहा, “इन गलियारों का उद्देश्य घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। इन्हें निवेश आकर्षित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और भारत में रक्षा उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।” उन्होंने दक्षिण भारत के साथ उत्तर और पश्चिम भारत के सांस्कृतिक एकीकरण का उत्सव मनाने के उद्देश्य से काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम पहल पर भी प्रकाश डाला।
रक्षा मंत्री ने कलैग्नार करुणानिधि को एक विपुल लेखक, कवि और नाटककार बताया, जिनके कार्यों ने तमिल साहित्य और सिनेमा को समृद्ध किया। उन्होंने कहा, “तमिल भाषा और संस्कृति को प्रोत्साहन देने के उनके प्रयास उनके इस विश्वास पर आधारित थे कि किसी की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना और उसका उत्सव मनाना व्यापक भारतीय पहचान के लिए आवश्यक है।“ यह कार्यक्रम तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित किया गया था और इसमें मुख्यमंत्री श्री एमके स्टालिन और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।
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कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रबंध तंत्र के अध्यक्ष श्री पीके मिश्रा , संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन, प्राचार्य प्रो सुमन ने क्षण्डारोहन किया। संगीत विभाग की छात्राओं ने देश भक्ति गीत प्रस्तुत किया। एनसीसी, एनएसएस ,रोवर्स रेंजर्स के छात्राओं ने संयुक्त मार्च पास्ट प्रस्तुत किया। श्री शुभ्रो सेन ने ऊर्जा पूर्ण भाषण देते हुए सभी को देश प्रेम के प्रति सचेत किया। कैप्टन ममता अग्रवाल ने उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा प्राप्त पत्र का वाचन किया। प्राचार्य सुमन जी ने इस क्षण को गौरवपूर्ण बताते हुए सभी की सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया। यह समस्त कार्यक्रम राष्ट्रीय पर्व प्रभारी प्रोफेसर रेखा चौबे के निर्देशन में हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर चित्रा सिंह ने किया। जानकारी देते हुए मीडिया प्रसार प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया कार्यक्रम में सभी शिक्षक कर्मचारी और छात्र उपस्थिति रहे।
कानपुर 14 अगस्त, (सू0वि0)* विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के आडिटोरियम में किया गया।
इस अवसर पर अतिथिगणों द्वारा ऑडिटोरियम परिसर में विभाजन विभीषिका से सम्बन्धित लगायी गयी अभिलेख प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया तथा उपस्थित सभी ने विभाजन विभीषित से प्रभावित हुए लोगों के लिए 02 मिनट का मौन रखा। इसके पश्चात् विभाजन विभीषिका से पीड़ित परिवार के परिवारिकजनों को सम्मानित किया गया, जिसमें महेश मेघानी, लालचन्द्र, रमेश राजपाल, बालचंद लालवानी, शांति प्रकाश पूरास्वानी, राजेन्द्र आडवाणी, दिलीप बालानी, सरदार दलजीत सिंह, मुरलीधर आहूजा, नरेश तकवानी, शामिल रहे, इसी प्रकार सिख वेलफेयर सोसाइटी के गुरविंदर सिंह छाबड़ा (प्रदेश अध्यक्ष), डॉ0 मनप्रीत सिंह भट्टी (प्रदेश महामंत्री), हरमिंदर सिंह बिंद्रा (प्रदेश उपाध्यक्ष), हरमिंदर सिंह पुनी (प्रदेश उपाध्यक्ष), चरणजीत सिंह, गगनदीप सिंह, गगन सोनी, जसबीर जुनेजा, गुरविंदर सिंह छाबडा (विक्की) शामिल रहे।
कानपुर 14अगस्त भारतीय स्वरूप संवाद सूत्र सुभाष मिश्र केयर विद लव ने आर्य कन्या विद्यालय जूनियर हाईस्कूल रेल बाजार मे कराया मेहदी कार्यक्रम का आयोजन*..
भारतीय स्वरूप संवाददाता राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के द्वारा महाविद्यालय की एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला नोडल अधिकारी, कानपुर नगर डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में मेरी माटी मेरा देश – हर घर तिरंगा अभियान 2024 के अंतर्गत तिरंगा यात्रा रैली निकाली गई। इस रैली के दौरान लगभग 100 छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नमामि गंगे विभाग, भाजपा, उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक श्री कृष्णा दीक्षित बड़े जी रहे। उनके साथ में अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्री अनूप चौधरी व फरहान भी रैली में सम्मिलित हुए। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व पर हम देश के वीर बलिदानी शहीदों को याद करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस तिरंगा यात्रा के दौरान 50 झंडो का वितरण छात्राओं तथा जन- सामान्य को किया गया। सभी न एस एस वॉलंटियर्स ने उत्साह के साथ देशभक्ति के गीत गए, नारे लगाए व झंडे के साथ सेल्फी भी ली जिसे मेरी माटी मेरा देश व युवा पोर्टल पर अपलोड किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस वॉलिंटियर्स अंतरा कश्यप , श्रद्धा, सान्या,, सिमरन, बुशरा, इन्नमा, अदिति व चंचल का विशेष सहयोग रहा।





रेड्डी ने इस मौके पर पुरस्कार पाने वालों की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि भारतीय खनन उद्योग रणनीतिक सुधारों, तकनीकी और सतत प्रगति के साथ परिवर्तन के लिये तैयार है। आज का यह सम्मान समारोह खनन समुदाय के लचीलेपन, नवाचार और कड़ी मेहनत को दर्शाता है। उन्होंने उद्योग से राष्ट्रीय खनिज संसाधनों की पूरी क्षमता को प्रकट करने, खनन प्रभावित समुदायों की समृद्धि सुनिश्चित करने और एक उज्जवल और सतत भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने के लिये मिलकर काम करने का आग्रह किया। रेड्डी ने कहा कि भारत खनिज संसाधनों के समृद्ध भंडार से संपन्न है और इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये महत्वपूर्ण है। श्री रेड्डी ने सतत खनन, सामुदायिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण के लिये 5-स्टार रेटेड खदानों के सभी 68 विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने भारत के सतत भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने में योगदान दिया है। कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुये खनन गतिविधियों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद, औद्योगिक उन्नति ओर रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि संसाधनों की निकासी और उपयोग का पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जवाबदेही के साथ सामंजस्य स्थापित किया जाना चाहिये।