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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सर्वोच्च न्यायालय के 75 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट जारी किया

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आज भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जिला न्यायाधीशों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान इस डाक टिकट का अनावरण किया गया।

इस कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉडीवाईचंद्रचूड़ केन्द्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

यह स्मारक टिकटभारत की न्यायिक प्रणाली में सर्वोच्च न्यायालय के अमूल्य योगदान तथा राष्ट्र के कानूनी परिदृश्य को स्वरुप प्रदान करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है। 28 जनवरी1950 को स्थापित सर्वोच्च न्यायालय कानून के शासन को बनाए रखनेनागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने तथा पूरे देश में न्याय प्रशासन सुनिश्चित करने में अग्रणी रहा है।

संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभागयह स्मारक डाक टिकट जारी करते हुए गर्व का अनुभव कर रहा हैजो भारत के न्यायिक इतिहास में सर्वोच्च न्यायालय की स्थायी विरासत का प्रमाण है।

यह आयोजनभारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हैजिसके तहत देश में न्याय और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिबद्धता के साढ़े सात दशकों का उत्सव मनाया जा रहा है।

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भारतीय सेना ने प्रोजेक्ट नमन का शुभारंभ किया: पूरे भारत में स्पर्श-केंद्रित कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जाएंगे

भारतीय सेना ने थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और सैनिकों की पत्नियों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्‍था (एडब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूए) की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता द्विवेदी की उपस्थिति में प्रोजेक्ट नमन के पहले चरण का शुभारंभ किया। यह परियोजना रक्षा पेंशनभोगियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सहयोग और सेवाएं प्रदान करने के लिए बनाई गई है, प्रोजेक्ट नमन स्पर्श (सिस्‍टम फॉर पेंशन एडमिन्‍सट्रेशन रक्षा), डिजिटल पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन पर केंद्रित है, जो रक्षा पेंशनभोगियों के लिए पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं को सुगम बनाती, देश भर के पूर्व सैनिकों और उनके निकटतम परिजनों (एनओके) के लिए सुलभ सुविधा केन्‍द्रों की महत्वपूर्ण आवश्यकता संभव बनाती है।

इसके शुभारंभ के अवसर पर, जनरल उपेन्‍द्र द्विवेदी ने कहा कि इस सेवा की शुरूआत से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को वह देखभाल और सहायता मिलेगी जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने सैन्य स्टेशनों और आसपास के इलाकों की पूरी आबादी तक इन आवश्यक सेवाओं को पहुंचाने और उनका विस्तार करने में परियोजना की भूमिका पर प्रकाश डाला।

इस परियोजना में स्वागत और सुविधा केन्‍द्रों की स्थापना शामिल है। इसके लिए पिछले वर्ष सितम्‍बर 2023 में भारतीय सेना के डायरेक्‍टरेट ऑफ इंडियन आर्मी वैटरंस (एडजुटेंट जनरल की शाखा), कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई-गवर्नेंस इंडिया लिमिटेड और एचडीएफसी बैंक लिमिटेड के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए गए थे। ये कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पूर्व सैनिकों, पेंशनभोगियों, शहीदों की विधवाओं और शहीदों के परिजनों को स्पर्श-सक्षम पेंशन सेवाएं, सरकार से नागरिक (जी2सी) सेवाएं और व्यवसाय से उपभोक्ता (बी2सी) सेवाएं, सभी एक ही सुविधाजनक स्थान पर प्रदान करते हैं।

प्रोजेक्ट नमन के पहले चरण में, भारत भर में प्रमुख स्थानों पर 14 सीएससी स्थापित किए गए हैं, जिनमें नई दिल्ली, जालंधर, लेह, देहरादून, लखनऊ, जोधपुर, बेंगलुरू, गोरखपुर, झांसी, सिकंदराबाद, सागर, गुंटूर, अहमदाबाद और बेंगलुरु शामिल हैं। अगले 2-3 वर्षों में देश भर में लगभग 200 केन्‍द्र स्थापित करने की योजना के साथ, इस परियोजना का काफी विस्तार होना है। बैंकिंग भागीदार, एचडीएफसी बैंक ने सीएससी को चालू करने के लिए आवश्यक आईटी बुनियादी ढांचा प्रदान किया है, जबकि स्थानीय सैन्य स्टेशनों ने आवश्यक बुनियादी ढांचा और सुविधाएं उपलब्‍ध कराई हैं।

प्रोजेक्ट नमन की कल्पना रक्षा समुदाय से सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श और जानकारी हासिल करने के बाद की गई थी, जो सेवारत और सेवानिवृत्त सशस्त्र बलों के कर्मियों के बीच सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह पहल न केवल सम्मानित दिग्गजों को आवश्यक देखभाल और सहायता प्रदान करती है, बल्कि सैन्य स्टेशनों और आसपास के इलाकों की संपूर्ण आबादी को भी सेवाएं प्रदान करती है।

प्रत्येक सीएससी का प्रबंधन एक ग्राम स्तरीय उद्यमी (वीएलई) करता है, जिसे संबंधित स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए) द्वारा पूर्व सैनिकों या एनओके में से चुना जाता है। इन वीएलई को सीएससी ई-गवर्नेंस इंडिया लिमिटेड द्वारा शामिल किया जाता है और आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है। एचडीएफसी बैंक भी पहले 12 महीनों के लिए ₹ 20,000 का मासिक अनुदान प्रदान करता है, जिससे केंद्रों के स्थिरीकरण और स्थायित्व में सहायता मिलती है।

प्रोजेक्ट नमन भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति समर्पण का प्रमाण है। एक ही स्थान पर स्पर्श केंद्रित सुविधा, सामान्य रूप से आवश्यक ई-गवर्नेंस सेवाएं और बैंकिंग समाधान प्रदान करके, परियोजना दिग्गजों और एनओके के लिए उद्यमशीलता के अवसर भी पैदा करती है।

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इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘आपका बैंक, आपके द्वार’ के माध्यम से लोगों को विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान कर रहा है – पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव

डाक विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक उपक्रम के रूप में कार्यरत इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने ‘आपका बैंक, आपके द्वार’ कार्यक्रम को विस्तार देते हुए पिछले 6 वर्षों की अपनी यात्रा के दौरान कई अभूतपूर्व सफलताएं अर्जित की हैं। बैंक की ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाओं के विस्तार और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकार की अनेकों जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर रहने वाले लोगों तक भी आसानी से पहुंचाया जा रहा है। उत्तर गुजरात क्षेत्र, अहमदाबाद में बड़े डाकघर के पोस्टमास्टर जनरल  कृष्ण कुमार यादव ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के 7वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित किये गए कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक-आईपीपीबी की स्वतंत्र निदेशक सुश्री जयश्री वृजलाल दोशी, आईपीपीबी के सहायक महाप्रबंधक डॉ. राजीव अवस्थी, मुख्य प्रबंधक श्री कपिल मंत्री और मुख्य पोस्टमास्टर श्री रितुल गांधी के साथ केक काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। श्री कृष्ण कुमार यादव ने आईपीपीबी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 1 सितंबर, 2018 को इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया था। यह जानकारी देना महत्वपूर्ण है कि गुजरात मण्डल में 33 लाख से अधिक आईपीपीबी खाते संचालित हो रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में गुजरात में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के द्वारा अब तक 1.19 लाख खाता धारकों का सामान्य सुरक्षा बीमा, सीईएलसी के तहत 1.80 लाख लोगों का घर बैठे मोबाइल अद्यतन और 2571 बच्चों का आधार नामांकन किया गया है। इसके अलावा, 15 लाख से अधिक लोगों को 242 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए भुगतान भी हुआ है। इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने दूरदराज के इलाकों में भी अनेक लोगों को उनके द्वार पर ही कागज रहित, नकदी रहित और समयसीमा रहित बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करके बैंकिंग परिदृश्य को एक नया स्वरूप प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की विभिन्न सेवाओं का फायदा उठाने वाले प्रमुख लाभार्थी वित्तीय रूप से समाज के सबसे अधिक वंचित व कमजोर वर्ग के लोग हैं और बैंक ने किफायती नवाचार तथा सरल एवं सहज उपयोगकर्ता इंटरफेस के माध्यम से समाज के अंतिम छोर तक सहायक व आसान बैंकिंग को सुलभ बनाया है।  कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि आईपीपीबी की 44% ग्राहक महिलाएं हैं और यह संख्या महिला सशक्तिकरण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रदर्शित करती है। पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक पहुंचाने वाले हमारे डाकिये और ग्रामीण डाक सेवक आईपीपीबी के माध्यम से एक चलते-फिरते बैंक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक अपने डाकियों के माध्यम से घर-घर तक विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रहा है, जिनमें सीईएलसी सुविधा के माध्यम से 5 वर्ष तक के बच्चों का आधार नामांकन और मोबाइल अद्यतन करना, डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली, बिलों का भुगतान, वाहन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना आदि शामिल हैं। पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का खाता है तो डाकघर की सुकन्या योजना, आरडी, पीपीएफ और डाक जीवन बीमा में उनका धन ऑनलाइन भी जमा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आईपीपीबी उन लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रति वचनबद्ध है, जिन्हें बीमा और अन्य वित्तीय सेवाओं तक आसानी से पहुंच उपलब्ध नहीं है।

इस अवसर पर इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहायक महाप्रबंधक डॉ. राजीव अवस्थी ने कहा कि उनका बैंक डाक विभाग के विस्तृत एवं भरोसेमंद नेटवर्क के माध्यम से अपने ग्राहकों को वृहद पैमाने पर वित्तीय समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) को नवरत्न का दर्जा प्राप्त हुआ

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) को वित्त मंत्रालय द्वारा 30 अगस्त, 2024 को नवरत्न का दर्ज़ा प्राप्त हुआ।

अपने गठन के 13 वर्ष पूरे करने के बाद, एसईसीआई एक अग्रणी सीपीएस  है जो भारत में अक्षय ऊर्जा क्षमता के विकास और विस्तार के लिए समर्पित है, जिसकी संचयी उत्पादन क्षमता 69.25 जीडब्ल्यू है और वार्षिक बिजली व्यापार मात्रा 42 बिलियन यूनिट से अधिक है। एसईसीआई भारत की अग्रणी अक्षय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसी (आरईआईए) है जो जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और सतत विकास के लिए प्रयासरत है।

कंपनी ने पिछले वर्ष की तुलना में 20.85% की वृद्धि दर्ज करते हुए 13,118.68 करोड़ रुपये का समेकित वार्षिक कारोबार और वित्तीय वर्ष 2023-24 में 34.89% की वृद्धि दर्ज करते हुए 510.92 करोड़ रुपये का कर-पश्चात लाभ (पीएटी) दर्ज किया है।

नवरत्न सीपीएसई के रूप में वर्गीकरण से एसईसीआई को वित्तीय और परिचालन मामलों में स्वायत्तता बढ़ाने में मदद मिलेगी और बेहतर चपलता, बेहतर भौगोलिक उपस्थिति और प्रौद्योगिकी फोकस के माध्यम से कंपनी के विकास पथ को गति मिलेगी। यह भारत के सतत ऊर्जा की ओर संक्रमण पर सरकार के फोकस का एक और संकेत है।

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9 फॉर्मों को मिलाकर एकल फॉर्म बनाया गया: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए नया एकल एकीकृत पेंशन फॉर्म जारी किया”

पूरे देश में वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों के जीवन को आसान बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नौ अलग-अलग प्रपत्रों (फॉर्म) को मिलाकर एक एकीकृत फॉर्म शुरू करने की घोषणा की। यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिससे वे अपने बहुमूल्य समय की बचत करते हुए अपनी ऊर्जा और विशेषज्ञता को संरक्षित करके “विकसित भारत” की सोच में प्रभावी रूप से अपना योगदान करने में सक्षम हो सकेंगे।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image00208E8.jpg
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग व अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री ने डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सुधार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एकल सरलीकृत पेंशन आवेदन फॉर्म और ई-एचआरएमएस के साथ भविष्य का डिजिटल एकीकरण‘ की शुरुआत पेंशन विभाग की एक और उपलब्धि है, जिसने हमारे वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार सुधार प्रस्तुत किए हैं। यह कदम केवल सुविधा के बारे में नहीं है, बल्कि यह हमारे बुजुर्गों के समय व अनुभव का सम्मान करने और यह सुनिश्चित करने के संबंध में है कि वे सम्मानजनक, कठिनाई मुक्त जीवन जी सकें।”

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्राथमिकता को साकार करने और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को लेकर दोनों विभागों को इन संयुक्त प्रयासों के लिए बधाई दी। पेंशन विभाग पिछले कुछ वर्षों में कई ऐतिहासिक सुधार लागू करने में अग्रणी रहा है। इनमें डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, पेंशन अदालतें, अनुभव पुरस्कार और सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श कार्यशालाएं शामिल हैं। ये पहल पूरे देश में पेंशनभोगियों के लिए पारदर्शिता, दक्षता और सुगम अनुभव सुनिश्चित करने में सहायक रही हैं। मंत्री ने पारिवारिक पेंशन शिकायतों के लिए विशेष अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने आगे बताया कि इसने 96 प्रतिशत निवारण दर का आंकड़ा पार कर लिया है, जिसमें आश्रित नाबालिग बच्चों, दिव्यांग बेटियों, विधवा/तलाकशुदा बेटियों, आश्रित माताओं और योद्धाओं की विधवाओं के लंबे समय से लंबित कई मामलों का समाधान शामिल है।

मंत्री ने विवरणों की व्याख्या की। उन्होंने कहा, “सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी, जो ई-एचआरएमएस पर हैं, वे ई-एचआरएमएस के माध्यम से प्रपत्र 6-ए भरेंगे (केवल पेंशन मामले) और सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी, जो ई-एचआरएमएस पर नहीं हैं, वे भविष्य पर प्रपत्र 6-ए भरेंगे। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पेंशनभोगी की ओर से एकल ई-साइन (आधार आधारित ओटीपी) के साथ प्रपत्र जमा करना पर्याप्त होगा।

डॉ. सिंह के अनुसार इस नए एकीकृत फॉर्म को पेंशनभोगियों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिससे विभिन्न फॉर्मों को संभालने की जटिलता कम होगी और जरूरी समय और प्रयास में भी काफी कमी आएगी। इस उपयोगकर्ता-अनुकूल दृष्टिकोण से लाखों वरिष्ठ नागरिकों को लाभ प्राप्त होने की आशा है, जिससे वे अपने पेंशन संबंधी मामलों को अधिक आसानी और सुविधा के साथ प्रबंधित कर सकेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “सरकार वरिष्ठ नागरिकों को सशक्त बनाने और राष्ट्र के विकास के लिए उनके ज्ञान व अनुभव का उपयोग करने के अपने दृष्टिकोण को लेकर प्रतिबद्ध है। यह नई पहल हमारी बुजुर्ग आबादी के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाली प्रणालियों को सुगम और बेहतर बनाने के निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।” चूंकि, सरकार इस तरह के सुधारों को निरंतर लागू कर रही है, डॉ. सिंह ने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि बुजुर्ग लोग सम्मान व मानसिक शांति के साथ अपने स्वर्णिम वर्षों का आनंद ले सकें और “विकसित भारत” के विकास में भी अपना योगदान कर सकें।

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पहला दो दिवसीय संयुक्त कमांडर सम्मेलन 4 सितंबर से लखनऊ में शुरू होगा

पहला दो दिवसीय संयुक्त कमांडर सम्मेलन (जेसीसी) 04-05 सितंबर, 2024 को लखनऊ के मध्य कमान मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा। रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ‘सशक्त एवं सुरक्षित भारत: सशस्त्र बलों का रूपांतरण’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में भाग लेंगे और यह सम्मेलन सशस्त्र बलों के भीतर आंतरिक ‘प्रक्रिया सुधार’ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान 4 सितंबर को इस समारोह का उद्घाटन करेंगे, जिसमें रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के शीर्ष स्तरीय अधिकारी एक साथ उपस्थित होंगे।

इस दो दिवसीय विचार-विमर्श सम्मेलन में क्षेत्रीय एवं वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवधानों के प्रभाव का विश्लेषण करने तथा सशस्त्र बलों द्वारा किए जा रहे विभिन्न सुधारों हेतु संभावित मांगों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भविष्य के संघर्षों के लिए तैयारी, सैन्य सेवाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण तथा प्रौद्योगिकी उपयोग, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए सरकार की ‘आत्मनिर्भरता’ पहल पर आधारित कुछ ऐसे क्षेत्र होंगे, जिन पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाएगा।

संयुक्त कमांडर सम्मेलन को भारत के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के बीच विचारों, रणनीतियों तथा सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे एक सशक्त व सुरक्षित भविष्य के लिए देश की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक स्वायत्तता हासिल होगी।

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सरकार ने टेक्निकल टेक्सटाइल के क्षेत्र में 4 स्टार्ट-अप को मंजूरी दी

वस्त्र मंत्रालय के सचिव ने आज नई दिल्ली स्थित उद्योग भवन में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत आठवीं अधिकार प्राप्त कार्यक्रम समिति (ईपीसी) की बैठक की अध्यक्षता की। समिति ने ‘तकनीकी वस्त्र के क्षेत्र में उभरते अन्वेषकों के लिए अनुसंधान एवं उद्यमिता हेतु अनुदान (ग्रेट)’ योजना के तहत 4 स्टार्ट-अप को मंजूरी दी है और प्रत्येक स्टार्ट-अप को लगभग 50 लाख रुपये के अनुदान प्रदान किया है।

समिति ने ‘तकनीकी वस्त्रों से संबद्ध शैक्षणिक संस्थानों को सक्षम बनाने हेतु सामान्य दिशानिर्देश’ के तहत 5 शिक्षा संस्थानों को तकनीकी वस्त्रों से संबंधित पाठ्यक्रम शुरू करने हेतु लगभग 20 करोड़ रूपये के अनुदान को भी मंजूरी दे दी है।

अनुमोदित स्टार्ट-अप परियोजनाएं कंपोजिट्स, सस्टेनेबल टेक्सटाइल्स और स्मार्ट टेक्सटाइल्स के प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों पर केन्द्रित हैं। अनुमोदित शिक्षा संस्थानों ने जियोटेक्सटाइल्स, जियोसिंथेटिक्स, कंपोजिट्स, सिविल स्ट्रक्चर्स आदि सहित तकनीकी वस्त्रों के विभिन्न क्षेत्रों और अनुप्रयोगों में नए बी.टेक पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।

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पार्किंसंस रोग के प्रबंधन के लिए दवा की खुराक के समायोजन के लिए नया स्मार्ट सेंसर विकसित

वैज्ञानिकों ने एक किफायती, उपयोगकर्ता के अनुकूल, पोर्टेबल स्मार्टफोन-आधारित फ्लोरोसेंस टर्न-ऑन सेंसर प्रणाली विकसित की है जो पार्किंसंस बीमारी की रोकथाम में सहायता प्रदान कर सकती है। यह सेंसर शरीर में एल-डोपा की सांद्रता का सटीक पता लगाने में मदद करेगा, जिससे इस रोग की प्रभावी रोकथाम के लिए आवश्यक सटीक खुराक का निर्धारण करने में मदद मिलेगी।

पार्किंसंस रोग को न्यूरॉन कोशिकाओं में लगातार गिरावट से पहचाना जाता है जिससे हमारे शरीर में डोपामाइन (न्यूरोट्रांसमीटर) के स्तर में काफी कमी आ जाती है। एल-डोपा एक रसायन है जो हमारे शरीर में डोपामाइन में परिवर्तित हो जाता है, इसलिए यह एंटी-पार्किंसंस दवाओं के रूप में कार्य करता है।

यह डोपामाइन की कमी को पूरा करने में मदद करता है। जब तक शरीर को एल-डोपा की सही मात्रा दी जाती है, तब तक यह रोग नियंत्रण में रहता है। हालांकि, पार्किंसंस की प्रगामी प्रकृति के कारण, जैसे-जैसे रोगी की उम्र बढ़ती है, न्यूरॉन्स की निरंतर हानि को पूरा करने के लिए अधिक एल-डोपा की आवश्यकता होती है।

हालांकि, एल-डोपा की अधिक मात्रा से रोगी में डिस्केनेसिया, गैस्ट्राइटिस, साइकोसिस, पैरानोया ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन जैसे गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जबकि एल-डोपा की बहुत कम मात्रा से पार्किंसंस के लक्षण वापस आ सकते हैं।

इस रोग की चिकित्सा में एल-डोपा के अधिकतम स्तर की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, जैविक तरल पदार्थों में एल-डोपा की निगरानी के लिए एक सरल, किफायती, संवेदनशील और त्वरित विधि विकसित करने की आवश्यकता है।

अभी हाल में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उन्नत अध्ययन संस्थान (आईएएसएसटी) ने जैविक नमूनों में एल-डोपा के निम्न स्तर का तुरंत पता लगाने के लिए फ्लोरोसेंस टर्न-ऑन मैकेनिज्म का उपयोग करते हुए एक किफायती, उपयोगकर्ता के अनुकूल, पोर्टेबल स्मार्टफोन-आधारित ऑप्टिकल सेंसर प्रणाली विकसित की है।

सेंसर को कम ग्रेफीन ऑक्साइड नैनोकणों की सतह पर बॉम्बेक्स मोरी सिल्क कोकून से प्राप्त किए गए सिल्क-फाइब्रोइन प्रोटीन नैनो-लेयर की कोटिंग करके बनाया गया है। यह प्रणाली उत्कृष्ट फोटोलुमिनेसेंस गुणों के साथ कोर-शेल ग्रेफीन-आधारित क्वांटम डॉट्स का निर्माण करती है, जो इसे 5 μM से 35 μM की रैखिक सीमा के अंदर रक्त प्लाज्मा, पसीने और मूत्र जैसे वास्तविक नमूनों में एल-डोपा का पता लगाने के लिए एक प्रभावी फ्लोरोसेंट टर्न-ऑन सेंसर जांच बनाती है। समतुल्‍य पहचान सीमा का निर्धारण क्रमशः 95.14 एनएम, 93.81 एनएम और 104.04 एनएम किया गया है।

शोधकर्ताओं ने एक स्मार्टफोन-आधारित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार किया है जिसमें एक इलेक्ट्रिक सर्किट 5 वी स्मार्टफोन चार्जर द्वारा संचालित 365 एनएम एलईडी से जुड़ा है। पूरे सेटअप को बाहरी प्रकाश से अलग करने के लिए एक अंधेरे कक्ष में रखा जाता है। यह सरल, किफायती और त्वरित स्क्रीनिंग उपकरण उन्नत उपकरणों की कमी वाले दूरदराज के क्षेत्रों में मौके पर ही विश्लेषक का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है।

रोगी के जैविक नमूनों में यह पता चलने पर कि क्या एल-डोपा का स्तर कम है, यह सेंसर रोग के प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक खुराक को समायोजित करने में मदद कर सकता है।

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भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने कानपुर कैंट में रोजगार मेले का आयोजन किया

भारतीय स्वरूप कानपुर रक्षा मंत्रालय के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने पूर्व सैनिकों और रोजगार प्रदाताओं को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य  उत्तर प्रदेश के कानपुर कैंट में एक रोजगार मेले का आयोजन किया। नौकरी के अवसर प्रदान करने वाले इस कार्यक्रम को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली क्योंकि उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों से 1,573 पूर्व सैनिकों ने इसमें भाग लिया। इस दौरान 41 कंपनियों ने 1,365 नौकरियों तथा 500 से अधिक उद्यमशीलता के अवसरों की पेशकश की।

इस आयोजन के माध्यम से चयनित हुए पूर्व सैनिकों के साक्षात्कार/स्क्रीनिंग की जाएगी और उसके बाद उन्हें वरिष्ठ पर्यवेक्षकों तथा मध्य/वरिष्ठ स्तर के प्रबंधकों से लेकर रणनीतिक योजनाकारों व परियोजना निदेशकों तक के पदों पर नियुक्त किया जाएगा। यह आयोजन कॉरपोरेट जगत और भूतपूर्व सैनिकों दोनों के लिए लाभदायक रहा है। इस कार्यक्रम से भूतपूर्व सैनिकों को अपनी तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता दिखाने के लिए एक मंच मिला है, वहीं दूसरी तरफ कॉरपोरेट जगत को अनुभवी, अनुशासित एवं प्रशिक्षित भूतपूर्व सैनिकों के समूह का लाभ उठाने का अवसर प्राप्त हुआ। इस मेले के दौरान विभिन्न कंपनियों द्वारा उद्यमिता मॉडल भी प्रस्तुत किए गए।

रोजगार मेले का उद्घाटन सचिव (भूतपूर्व सैनिक कल्याण) डॉ नितिन चंद्रा ने किया और इसमें मध्य कमान मुख्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश चड्ढा तथा पुनर्वास महानिदेशक मेजर जनरल एसबीके सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने पूरे भारत में रोजगार पाने योग्य हजारों युवाओं को नए कौशल सीखने (अप-स्किलिंग) के लिए फ्लिपकार्ट की आपूर्ति श्रृंखला संचालन अकादमी (एससीओए) के साथ एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने 2047 में विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप वैश्विक मांगों को देखते हुए युवाओं को कौशल युक्त बनाने पर सरकार के दृढ़निश्चय पर जोर दिया। उन्होंने भारत के कारीगरों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित भारत के घरेलू ई-कॉमर्स बाजार फ्लिपकार्ट के समर्थ प्रोग्राम की पांच साल की यात्रा का उत्सव मनाने के आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया।

समर्थ कार्यक्रम के दौरान फ्लिपकार्ट की आपूर्ति श्रृंखला संचालन अकादमी (एससीओए) ने कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया। इसका उद्देश्य पूरे भारत में रोजगार पाने योग्य हजारों युवाओं को कौशल युक्त बनाना है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 4.0 के तहत इस साझेदारी का लक्ष्य भारत भर में हजारों युवाओं को कौशल युक्त बनाना, ई-कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखला क्षेत्रों में उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। फ्लिपकार्ट की टीम उम्मीदवारों को 7-दिवसीय गहन क्लासरूम प्रशिक्षण के साथ एक समग्र अनुभव और प्रशिक्षण प्रदान करती है। इसके बाद फ्लिपकार्ट की फैसिलिटी (इन जगहों पर रोजमर्रा के काम होते हैं) में 45-दिवसीय व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है। इस सहयोग से देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है साथ ही विशेष प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रम के जरिए युवा शक्तियों को सफल करियर के लिए भी तैयार किया जाता है।

इस अवसर पर जयंत चौधरी ने कहा कि भारत सरकार कारीगरों को सशक्त बनाने और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग विविध शिल्पों को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। फ्लिपकार्ट समर्थ की यात्रा के उत्सव में एमएसडीई और फ्लिपकार्ट की आपूर्ति श्रृंखला संचालन अकादमी (सप्लाई चेन ऑपरेशंस अकेडमी) {एससीओए} के बीच सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया। यह प्रयास हमारे युवाओं को आधुनिक बाजार में आगे बढ़ने के लिए कौशल से युक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पारंपरिक शिल्प को डिजिटल क्षेत्र में एकीकृत करके हम मजबूत साझेदारी बना रहे हैं और समर्थ कार्यक्रम के माध्यम से नवाचार को अपना रहे हैं। इससे भारत के एमएसएमई क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
उद्योग सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग के साथ साझेदारी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। इंटर्नशिप कार्यक्रमों और समर्थ जैसे प्रयासों के माध्यम से हम युवाओं के लिए विकसित हो रही कार्य संस्कृति के साथ जुड़ने और भविष्य के लिए आवश्यक दक्षता हासिल करने के अवसर खोल रहे हैं। वैश्विक आकांक्षाओं वाला एक घरेलू ब्रांड फ्लिपकार्ट ने महिला उद्यमियों और वंचित पृष्ठभूमि के व्यक्तियों को सशक्त बनाकर अपना प्रभाव प्रदर्शित किया है। इससे 1.8 मिलियन आजीविका (रोजगार) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और संबद्ध क्षेत्रों पर केंद्रित अपनी अकादमी के शुभारंभ के साथ फ्लिपकार्ट भारत के विकास को आगे बढ़ाते हुए व्यापक ई-कॉमर्स पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देना जारी रखे हुए है।

इस कार्यक्रम में 250 से अधिक उद्योग जगत के दिग्गजों, विक्रेताओं, कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और एसएचजी ने भाग लिया। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना और उसे उन्नत करना था। इसमें कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरीएमएसडीई के सचिव श्री अतुल कुमार तिवारी (आईएएस)एमएसडीई की संयुक्त सचिव श्रीमती सोनल मिश्रा (आईएएस) सहित सम्मानित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।  फ्लिपकार्ट समूह के मुख्य कॉरपोरेट मामलों के अधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि यह समर्थ 5-वर्षीय यात्रा मील का पत्थर उत्सव कार्यक्रम पूरे भारत में कारीगरोंबुनकरों और एमएसएमई को सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। अपनी समर्थ पहल के माध्यम से हमने अपनी यात्रा के पिछले वर्षों में 1.8 मिलियन आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। 100 से अधिक पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित किया है और हजारों विक्रेताओं की वृद्धि को बढ़ावा दिया है। हम भविष्य की ओर देखते हैं। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ हमारी साझेदारी भारत के युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक कौशल से युक्त करेगीजिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारे अतीत की विरासत भविष्य की पीढ़ियों के हाथों में फलती-फूलती रहेगी। फ्लिपकार्ट समर्थ कार्यक्रम में कारीगर सशक्तिकरण के भविष्य पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा भी हुई। पैनल में एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अतीश कुमार सिंह, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के मुख्य कार्यक्रम अधिकारी श्री महेंद्र पायल, बीयूनिक की सह-संस्थापक, निदेशक श्रीमती सिम्मी नंदा और अखिल भारतीय कारीगर और शिल्पकार कल्याण संघ की कार्यकारी निदेशक श्रीमती मीनू चोपड़ा ने आज के तेजी से विकसित हो रहे माहौल में भारत के कारीगर समुदाय के भविष्य, कौशल विकास के महत्व और बाजार पहुंच के विस्तार में ई-कॉमर्स की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में चर्चा की। फ्लिपकार्ट ने इवेंट के दौरान अपने ऐप पर ‘समर्थ स्टोरफ्रंट’ इंडियन रूट्स का अनावरण किया। यह वर्चुअल प्लैटफॉर्म कारीगरों, बुनकरों और एमएसएमई को राष्ट्रीय बाजार तक अभूतपूर्व पहुंच प्रदान करता है। इससे उन्हें पूरे भारत में 500 मिलियन से अधिक ग्राहकों को अपने अद्वितीय उत्पाद दिखाने में मदद मिलती है। इस कार्यक्रम ने सरकारी से जुड़े दिग्गजों, उद्योग विशेषज्ञों और प्रमुख हितधारकों के लिए डिजिटल युग में कारीगर सशक्तिकरण के भविष्य पर चर्चा करने और पता लगाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। सभा ने लाखों लोगों के लिए स्थायी आजीविका बनाने के लिए पारंपरिक शिल्प कौशल को आधुनिक तकनीक के साथ एकीकृत करने के महत्व को रेखांकित किया।

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