क़बीरा खड़ा बाज़ार में सब की माँगें ख़ैर .. न किसी से दोस्ती न ही किसी से बैर, संत कबीर दास जी की ये पंक्तियाँ मेरे दिल के बहुत क़रीब है।
ये सोच किसी साधु महात्मा या पीर की ही हो सकती है आम तौर पर ऐसी हमारी धारणा है मेरे विचार में हर इक इन्सान की ऐसी सोच हो सकती है बशर्ते ..उसको ये समझना होगा कि कुछ भी हमारी ज़िंदगी में होता है किसी का आना जाना,किसी से लेना देना ,किसी से नुक़सान ,किसी से फ़ायदा ,किसी से मान और अपमान मिलना ..ये सब पहले ही से तय हो चुका होता है हमारे पिछले जन्मों के करमो के अनुसार ।जैसा बीज हम बोते है वही काटते है
अब अगर ये बात हमें समझ में आ जाये कि हमें अपना किया हुआ ही मिल रहा है तो हम कभी किसी और को दोष नहीं दे पायेंगे।किसी से अच्छा किया होता है तो वो दोस्त बन कर आ जाता है और अगर किसी से बुरा किया हो तो वह किसी न किसी रूप में आ कर दुश्मनी ही निभायेगा।
मन से ज़्यादा कुछ और उपजाऊ नही है ।वहाँ जो भी बोयेंगे वही उगेगा ,चाहे वो विचार नफ़रत का हो या फिर प्रेम का।
इक सकून भरा जीवन जीने के लिए अच्छा और पोजीटिव ही सोचना बेहतर है।
इक सच्चा इन्सान..पीर.. साधु महात्मा ऐसी ही सोच का मालिक होता हैं हमे अपने ही करमो पर लगातार नज़र ,अपनी सोच पर निरन्तर वार करने से ही इक सुन्दर सोच का निर्माण होगा। हमे खुद अपने को ही देखना है किसी दूसरे को नही .. तभी हमारी वो अवस्था बन सकेगी।
मगर अक्सर सुनने में आता है “दुनिया ऐसी नहीं है जनाब !!
जैसी आप समझते हैं “बहुत ख़राब है वग़ैरह वग़ैरह..भले कोई कैसा भी हो “हम शुरूआत तो खुद से कर ही सकते है “दुनियाँ कोई नहीं बदल सका आज तक ,मगर खुद को बदलना हमारे ही हाथ है ..दोस्तों बुरा कोई भी नहीं मगर संस्कारों की कमी की वजह से ,हालातों की वजह से , हमारी अपनी परवरिश जिस तरह हुई हो हम वैसा ही व्यवहार करते हैं।
कई बार हर बुराई हम बेधड़क होकर करते जाते है बिना सोचे समझे और अंजाम हमारी आत्मा को भुगतना पड़ता है हमे खुद भी नहीं पता होता कि हम अनजाने में कितना ग़लत कर रहे होते है दूसरों से ज़्यादा हम खुद अपनी आत्मा को धोखा दे रहे होते हैं .. ऐसी स्थिति वाक़ई मे दयनीय है
“चला चली की बेला है यारा
न कोई दोस्त न कोई दुश्मन
तू तो बस अकेला है यारा “
कोशिश तो हमारी यही होनी चाहिए कि हमारा नाम
देने वालों में हो न की लेने वालों में,बचाने वालों मे हो न कि मारने वालो मे ,
बनाने वालों में हो ,न की तोड़ने वालों में ..
वो चाहे तो किसी का दिल हो ,किसी का घर हो ,किसी का विश्वास हो या फिर किसी का व्यापार ।
मेरी रब से यही दुआ है दोस्तों
कि हम किसी का बुरा न माँग कर
सब की खैर ही माँगे ।इसमें हमारा कुछ भी घटेगा नहीं बल्कि मन मे
शांति और सकून बढ़ ज़रूर जायेगा ..जिस शान्ति के लिये हम कहाँ कहाँ नहीं भटकते यें कहीं बाहर नहीं है दोस्तों .. ये हमारे सब के अन्दर ही है जिसे सिर्फ़ जगाने की ज़रूरत है।
दोस्तों
ये इतना मुश्किल है भी नहीं ।
बस अधरों पर सुन्दर मुस्कान,आँखें बंद और अपने माथे से सलवटो को हटा कर पवित्र मन से ,खुले दिल से सब की खैर ही तो माँगनी है ।
फिर देखिए कमाल !
मन भी सुन्दर और तन भी सुन्दर होगा । बिना इत्र लगाये मन भी महकेगा और तन भी।
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
कानपुर 15 सितंबर 2021 भारतिय स्वरूप संवाददाता, मिशन शक्ति के अंतर्गत क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की टीम ने उच्चतम सामाजिक सोच को बढ़ावा देते हुए महिलाओं के बीच में सेनेटरी पैड का वितरण किया। बच्चों ने पेंसिल रबड़ शार्पनर और कुछ बुक्स वितरित की, कार्यक्रम की संचालक के रूप में डॉ सूफिया सहाब ( आईसीसी संयोजक ) एवं डॉ शिप्रा श्रीवास्तव ( वूमेन सेल संयोजक) ने नारियों के ऊपर किए जाने वाले उत्पीड़नो को न सहने को और उसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया एवं जरूरत पड़ने पर भारत सरकार द्वारा वुमन हेल्पलाइन नंबर से भी अवगत कराया । मिशन शक्ति प्रभारी डॉ मीत कमल ने महिलाओं को शिक्षित होने पर एवं उनके सशक्त होने पर जोर दिया। बदलाव के अभिकर्ता के स्वयंसेवक के रूप में अनिरुद्ध दिवेदी , अंजली सचान , तयबा अख्तर, विवेक पटेल, मैत्री पन्ना, वेदांत मिश्रा आदि इस कार्यक्रम के प्रतिभागी बनकर अत्यंत प्रशंसनीय कार्य किया । यह पूरा कार्यक्रम प्रिंसिपल डॉ जोसेफ डेनियल तथा वाइस प्रिंसिपल डॉ सबीना बोदरा के सफल मार्गदर्शन एवं निर्देश नेतृत्व में संपन्न हुआ
कानपुर, दिनांक 11 सितम्बर, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ निर्देशों के अनुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर के तत्वाधान एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर श्री में दीवानी न्यायालय परिसर कानपुर नगर में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुये राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें मोटर दुर्घटना प्रतिकर, सिविलवाद, लघुवाद, आपराधिक एवं वैवाहिक आदि वादों का तथा प्रीलिटीगेशन स्तर पर विभिन्न बैंको के वादों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार आर0 पी0 सिंह, की अध्यक्षता पर किया गया। दीवानी न्यायालय के पीठासीन अधिकारीगण द्वारा 11089 वादों का निस्तारण किया गया जिसमें मु० और 8.33.39.397.00 रु0 धनराशि दिलायी/वसूल की गयी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा 171 वादो का निस्तारण किया गया और 5,61,41,000.00 रु0 धनराशि दिलायी की गयी। कामर्शियल कोर्ट द्वारा 22 वादो का निस्तारण किया गया और 1.56,51,256.00 रु0 धनराशि दिलायी की गयी। प्रीलिटीगेशन स्तर पर 1028 वादो का निस्तारण किया गया 4,48,97.926.00 रु0 का समझौता बैंको द्वारा किया गया। विशेष उल्लेखनीय है कि, आर0 पी0 सिंह, जनपद न्यायाधीश, कानपुर नगर द्वार कुल-12 वादों का निस्तारण कर 25,000.00 रूपये वसूल/दिलाये गये। इस प्रकार कुल मिलाकर 12117 वादो का निस्तारण किया गया तथा कुल धनराशि 12,82,37,323.00 रु0 वसूल/दिलायी गयी। वैवाहिक प्रकृति के कुल 67 वादो का निस्तारण किया गया जिसमें प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, कानपुर नगर श्री रमेश चन्द्र-I, द्वारा 47 वादों का निस्तारण किया गया एवं कुल 09 पारिवारिक जोड़ों को महोदय द्वारा आशीर्वाद देकर एक दूसरे को गले मिलवाया गया व एक-दूसरे को मिठाई खिलवाकर विदा किया गया। मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट, कानपुर नगर श्री शैलेन्द्र यादव द्वारा सर्वाधिक 5057 मुकदमों का निस्तारण किया गया। आज राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन में रामगोपाल विधि महाविद्यालय के छात्र एवं छात्राओं द्वारा न्यायालय में उपस्थित होकर न्यायालयों की कार्यवाही का अवलोकन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का संचालन श्री प्रथम कान्त, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष सं0-04 एवं श्रीमती अंशू शुक्ला, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर द्वारा किया गया।
इस अवसर पर शिक्षक और अनुसन्धान के क्षेत्र मे शिक्षाविद, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ प्रीति को राजनीति विज्ञान और दलित व वनवासी अधिकारों के क्षेत्र में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान व दलित और वनवासी अधिकारों की आवाज़ बुलंद करने के लिए डॉ. राधाकृष्णन बेस्ट फैकल्टी अवार्ड इन सोशल इशूज एंड दलित राइट्स से सम्मानित किया गया l इस सन्दर्भ मे बात करते हुए डॉ. प्रीति ने कहा कि वह खुद को भाग्यशाली मानती है कि उन्हें शिक्षा के साथ साथ दलित और वनवासियों की आवाज़ उठाने के लिए शिक्षक दिवस जैसे अवसर पर डॉ राधाकृष्णन अवार्ड से सम्मानित किया गया, डॉ प्रीति का मानना है की भारत के विकास मे समाज के पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करना और राजनीती मे उनके योगदान को समाज के समक्ष लाना वास्तव मे ना सिर्फ दिलचस्प है अपितु आवश्यक भी है l
महाविद्यालय के गृहविज्ञान विभाग को असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मोनिका शुक्ला ने बालिकाओं को पोषण के सम्बन्ध में जागरूक करते हुए बताया की किस प्रकार वे अपने तथा अपने आस-पास के व्यक्तियों के खान-पान के प्रति जागरूक रह सकती हैं और उन्हें संतुलित भोजन के लाभ भी बता सकती है। साथ ही साथ परामर्श सत्र में छात्रों को उनकी अनेक आशंकाओं के निवारण के लिए भी उत्साहित किया गया। इस कारिक्रम में महाविद्यालय में मिशन शक्ति प्रभारी एवम ऍन एस एस प्रभारी डॉ चित्रा सिंह तोमर ने छात्राओं को खान-पान के प्रति जागरूक रहने के सम्भन्ध में निर्देशित किया।