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युवा जगत

भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने को लेकर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की ओर से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया

नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित विवेकानंद हॉल में 27 फरवरी 2026 को सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) की ओर से ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना : नीतियां, चुनौतियां और अवसर’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में अनुसंधान एवं विकास संस्थान, सरकार, शिक्षा और उद्योग जगत के विशेषज्ञों को एक मंच पर साथ लाया गया ताकि भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए नीतियों, चुनौतियों और रणनीतिक अवसरों पर विचार-विमर्श किया जा सके। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में वैश्विक सेमीकंडक्टर नीतियों और रणनीतियों का तुलनात्मक विश्लेषण’ पर हाल ही में किए गए अध्ययन को मजबूती प्रदान करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला का आयोजन भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के वर्तमान परिदृश्य का आकलन करने, चुनौतियों की पहचान करने, सहयोग के अवसरों का पता लगाने, वैश्विक पद्धतियों और नीतिगत जानकारियों की पहचान करने, नीतिगत पहल पर संवाद को सुगम बनाने और भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने में सहायता के लिए व्यावहारिक सिफारिशें विकसित करने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया गया था।

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इस कार्यशाला में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, बीआईटीएस पिलानी; नीति आयोग; सीएसआईआर-सीईआरआई पिलानी; सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (एसएसपीएल), डीआरडीओ, एनआईईएलआईटी, नई दिल्ली; सीएसआईआर-सीएसआईओ, चंडीगढ़; सीएसआईआर-एनपीएल, नई दिल्ली; आईआईटी जोधपुर; आईआईटी दिल्ली; विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस); दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय; सीएसआईआर-एनएएल, बेंगलुरु; अमृता विश्वविद्यालय; इंटेल इंडिया; लैम रिसर्च, एप्लाइड मैटेरियल्स, सेमीवर्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड; सहस्रा सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली; और वेरसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (पी) लिमिटेड, नोएडा के प्रतिभागियों ने भाग लिया और भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अपने विचार साझा किए।

उद्घाटन सत्र में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला और भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए संवाद के महत्व पर जोर दिया। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी विरोधाभासी स्थिति, मजबूत वैश्विक डिजाइन नेतृत्व के बावजूद 95% आयात पर निर्भरता और साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों पर प्रकाश डाला। साथ ही भारत को 2030 तक एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों, आईएसएम 2.0 नवाचार प्रोत्साहन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

बीआईटीएस पिलानी के ग्रुप वाइस चांसलर और ईएस मैन्युफैक्चरिंग कमेटी के पदेन सदस्य प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने मुख्य अतिथि के रूप में भाषण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टरों के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्नत फाउंड्री की मेजबानी करने के बजाय स्वदेशी प्रौद्योगिकी, मिशन-मोड कार्यक्रमों और डीप-टेक स्टार्टअप पर केंद्रित रणनीति को अपनाने पर बल दिया। प्रो. राव ने नवाचारों को निम्न से उच्च टीआरएल में प्रगति करने और ‘वैली ऑफ डेथ’ से उबरने में मदद करने के लिए उत्कृष्टता केंद्रों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं के विस्तार की सिफारिश की।

तकनीकी चर्चा को तीन विषयगत सत्रों में संरचित किया गया था। पहला सत्र ‘अनुसंधान एवं विकास और नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र’ पर केंद्रित था। इस सत्र के वक्ताओं ने आईएसएम 2.0 से आग्रह किया कि वह पायलट फैब्स, विशिष्ट रक्षा सेमीकंडक्टर, स्वदेशी सामग्रियों/उपकरणों, डिजाइन-आधारित अनुसंधान एवं विकास, फोटोनिक्स/एआई फोकस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन, उत्पादन, उपयोग और निपटान को उनके पूरे जीवनचक्र में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संसाधन-कुशल तरीके से करने, विविध विनिर्माण, मजबूत आईपी, कौशल, बुनियादी ढांचे, वैश्विक साझेदारी और अनुकूल रणनीतियों के माध्यम से शिक्षा और उद्योग जगत के बीच की खाई को कम करने का प्रयास करे। “कुशल कार्यबल और प्रतिभा विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र” पर द्वितीय सत्र की अध्यक्षता भारत सेमीकंडक्टर मिशन के निदेशक (प्रौद्योगिकी) डॉ. मनीष के हुडा ने की। इस सत्र के वक्ताओं ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए संतुलित डिजाइन-विनिर्माण विकास, सीएमओएस-केंद्रित शैक्षणिक कार्यक्रमों, संरचित कौशल विकास पहल, उद्योग जगत से सहयोग और कार्यबल विकास पर जोर दिया।

तृतीय सत्र का मुख्य विषय ‘नीति, शासन और संस्थागत ढांचा’ रहा। इस सत्र में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया।  इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की। वक्ताओं ने वैश्विक नीति मॉडलों की तुलना की, एकीकृत शासन और एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र की आवश्यकता पर बल दिया। एआई-चिप स्टार्टअप के अवसरों पर प्रकाश डाला। साथ ही सेमीकंडक्टर कूटनीति, दुर्लभ खनिजों तक पहुंच, आपूर्ति शृंखला में अनुकूलन और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। तृतीय सत्र: नीति, शासन और संस्थागत ढांचा में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की।

‘रणनीतिक मार्ग : भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य के लिए एक रोडमैप’ पर एक पैनल चर्चा और समापन सत्र के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। सत्र की अध्यक्षता भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी, बेंगलुरु) के अंतःविषय विज्ञान प्रभाग के डीन और नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र के प्रोफेसर नवकांत भट ने की। विशेषज्ञों ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम 1.0 और 2.0) के माध्यम से भारत सरकार की निरंतर प्रगति पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि अगले चरण में बेहतर क्रियान्वयन, नवाचार और विस्तार की आवश्यकता है। उद्योग जगत के दृष्टिकोण ने भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ साझेदारी सहित शिक्षा-उद्योग सहयोग के माध्यम से उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और संरचित कार्यबल के विकास पर जोर दिया।

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वक्ताओं ने स्वदेशी एनालॉग (अनुरूप), सेंसर और एप्लीकेशन-विशिष्ट उत्पादों में भारत की ताकत पर जोर दिया, साथ ही विशिष्ट सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में उच्च विशिष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया। चिप-टु-चिप-लेस आर्किटेक्चर और क्वांटम-इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर सिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों को अभूतपूर्व प्रगति के अवसरों के रूप में रेखांकित किया गया। कार्यशाला के समापन पर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. चारू वर्मा ने अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं ने सामूहिक रूप से वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास, डिजाइन, विनिर्माण, कौशल और नीतिगत समर्थन में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इन चर्चाओं ने साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव प्रदान करने और रणनीतिक एसएंडटी डोमेन पर बहु-हितधारक संवाद को सुविधाजनक बनाने में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की भूमिका को भी रेखांकित किया।

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आईएनएसवी कौंडिन्या को मुंबई बंदरगाह में ध्वजारोहण के साथ उतारा गया

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Pic(2)(4)O091.jpegभारतीय नौसेना के नौकायन पोत (आईएनएसवी) कौंडिन्या को मुंबई बंदरगाह पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा औपचारिक रूप से ध्वजारोहण किया गया

यह ध्वजारोहण समारोह ओमान सल्तनत के लिए पोत की पहली विदेशी यात्रा के सफल समापन तथा अरब सागर को पार कर की गई उसकी ऐतिहासिक वापसी यात्रा का प्रतीक है, जो भारत की चिरस्थायी समुद्री विरासत और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-ओमान संबंधों की सुदृढ़ता की पुष्टि करता है।

आईएनएसवी कौंडिन्या एक पारंपरिक विधि से निर्मित सिलाईदार पोत है, जिसे प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण तकनीकों का पूर्णतः अनुसरण करते हुए बनाया गया है। इसमें लकड़ी के तख्तों को नारियल की रस्सी से हाथों द्वारा सिला गया है तथा प्राकृतिक रेज़िन से सील किया गया है। यह पोत भारत की सदियों पुरानी समुद्री शिल्प परंपरा के पुनरुद्धार का प्रतीक है और भारतीय ज्ञान प्रणालियों की पुनः खोज एवं संरक्षण के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अजंता गुफाओं में पाँचवीं शताब्दी ईस्वी के एक चित्रण से प्रेरित होकर तथा भारतीय नौसेना की देखरेख में पारंपरिक कारीगरों के सहयोग से निर्मित यह पोत, पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक नौसेना अभियांत्रिकी के सामंजस्य का सशक्त उदाहरण है।

आईएनएसवी कौंडिन्या 29 दिसंबर 2025 को पोरबंदर से मस्कट के लिए रवाना हुई और भारतीय नाविकों द्वारा प्राचीन काल से प्रयुक्त समुद्री मार्गों का अनुसरण किया। यह 14 जनवरी 2026 को पोर्ट सुल्तान काबूस पहुँची, जहाँ ओमान के गणमान्य व्यक्तियों तथा भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों की उपस्थिति में इसका औपचारिक स्वागत किया गया। अपने प्रवास के दौरान यह पोत आम आगंतुकों के लिए खुला रहा और समुद्री विरासत तथा सांस्कृतिक कूटनीति के एक तैरते प्रतीक के रूप में कार्य करता रहा। इस यात्रा ने भारत-ओमान संबंधों को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया, जिनकी जड़ें मसालों, वस्त्रों और लोबान के व्यापार में हजारों वर्षों से निहित हैं, तथा अरब सागर क्षेत्र में साझा समुद्री परंपराओं को और मजबूत किया।

इस अभियान ने भारतीय नौसेना की भूमिका को केवल समुद्री सुरक्षा प्रदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत समुद्री विरासत के संरक्षक के रूप में भी रेखांकित किया। प्रसिद्ध नाविक कौंडिन्य के नाम पर नामित यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की प्राचीन समुद्री नौवहन परंपरा और समुद्री पहुंच का प्रतीक है। इसकी सफल यात्रा पारंपरिक जहाज निर्माण पद्धतियों की दृढ़ता तथा चालक दल के उच्च स्तर के पेशेवर कौशल का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत करती है।

मुंबई में आयोजित ध्वजारोहण समारोह एक ऐतिहासिक समुद्री विरासत पुनरुद्धार परियोजना की परिणति का प्रतीक होगा तथा समुद्री पहुंच, सांस्कृतिक कूटनीति और पारंपरिक समुद्री शिल्पकला के संरक्षण के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा।

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एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज के विज्ञान संकाय के रसायन विज्ञान,वनस्पति विज्ञान एवं जंतु विज्ञान विभाग ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया ।महाविद्यालय की मुख्य प्रॉक्टर कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो गार्गी यादव,डॉ प्रीति सिंह तथा डॉ शैल बाजपेयी ने माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । इस अवसर पर इस वर्ष की थीम “विज्ञान में महिलाओं का योगदान “ तथा अपने पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों पर पोस्टर एवं मॉडल बनाकर छात्राओं ने प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया । छात्राओं ने ५० पोस्टर और मॉडल प्रदर्शित किये और उनके विषय में बताया ।इस प्रदर्शनी का मूल्यांकन कैप्ट ममता अग्रवाल, प्रो प्रीति पांडे और प्रो मीनाक्षी व्यास ने किया ।

परिणाम इस प्रकार रहा –बी एस सी द्वितीय सेमेस्टर प्रथम कीर्ति गुप्ता, द्वितीय- सृष्टि पाल तथा अंजलि सिंह, तृतीय-आयना ,सांत्वना-इशिता 

बी एस सी चतुर्थ सेमेस्टर –प्रथम-काजोल गौतम, द्वितीय-ज़िया, तृतीय-सदा 

बी एस सी षष्ठ सेमेस्टर –प्रथम समरीन अनवर, द्वितीय मुस्कान, तृतीय एकता तथा लक्ष्मी सभी विजेता छात्राओं को मेडल प्रदान किए गए और सभी प्रतिभागी छात्राओं को उत्साह वर्धन करते हुए अल्प पुरस्कार दिए गए। 

कार्यक्रम में डॉ प्रीता अवस्थी ,डॉ प्रीति यादव, डॉ अनामिका डॉ समीक्षा डॉ श्वेता आदि उपस्थित रहे  अवधेश तथा रेखा ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में युवा संसद आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा सरवेपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑडिटोरियम में युवा संसद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक संसदीय कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. विनय जॉन सेबास्टियन तथा विशिष्ट निर्णायकगण — प्रो. आशुतोष सक्सेना (पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान), प्रो. साधना सिंह (पूर्व प्राचार्य एवं अर्थशास्त्र विभाग, डी.जी. कॉलेज) एवं प्रो. संजय सक्सेना (प्रभारी, इतिहास विभाग) — के आगमन से हुआ। राजनीति शास्त्र विभाग के सदस्यों एवं छात्रों ने ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा पर्यावरण संरक्षण के संदेश स्वरूप उन्हें पौधा भेंट किया गया।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। स्वागत भाषण में प्रो. विभा दीक्षित ने युवा संसद के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि प्रो. सेबास्टियन ने विद्यार्थियों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के संप्रेषण कौशल एवं नेतृत्व क्षमता के विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। इस अवसर पर निर्णायकगण को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र के पश्चात छात्र संयोजकों पूर्वी, कृतिका एवं आदर्श ने संसदीय कार्यवाही का संचालन संभाला। विद्यार्थियों ने बारह मंत्रालयों का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय संसद की कार्यप्रणाली का प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया। प्रश्नकाल एवं वाद-विवाद के दौरान पर्यावरण संरक्षण, कर नीति, नागरिक शिष्टाचार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते तथा सुशासन जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई।
विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात एक विधेयक प्रस्तुत किया गया, जिस पर धारा-वार चर्चा के बाद बहुमत से पारित किया गया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु, अभिव्यक्ति, वक्तृत्व कौशल, उच्चारण एवं समग्र प्रस्तुति के आधार पर किया तथा विद्यार्थियों के आत्मविश्वास एवं संसदीय प्रक्रिया के प्रभावी प्रदर्शन की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन डॉ. मनीषी त्रिवेदी द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम में अन्य विभागों के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों में डॉ. अर्चना पांडेय, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. अंकिता पांडेय, डॉ. रुक्मणी दुबे, डॉ. अर्चना वर्मा सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। यह आयोजन पूर्णतः सफल एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।

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राष्ट्रपति ने पीडी हिंदुजा अस्पताल के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुंबई के लोक भवन में पीडी हिंदुजा अस्पताल द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी अभियान ‘जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ’ का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले एक दशक में यह सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं कि सभी नागरिक स्वस्थ रहें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। देश भर में 180,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत योजना के तहत, लगभग 12 करोड़ परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्राप्त होती है। मिशन इंद्रधनुष, टीबी मुक्त भारत अभियान और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम नागरिकों को बीमारियों से बचाने में योगदान दे रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण डॉक्टरों और पैरामेडिकल पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कई राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। इन प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। हालांकि, एक स्वस्थ भारत के निर्माण में सरकार के साथ-साथ सभी हितधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। “जीवन बचाओ और एक स्वस्थ भारत बनाओ” अभियान इसी दिशा में एक प्रयास है।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी की जान बचाना सबसे बड़ा परोपकार है। आपातकालीन चिकित्सा सुविधा तक पहुंच जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि उचित चिकित्सा देखभाल समय-सीमा के भीतर प्रदान करने से अधिकांश लोगों की जान बचाई जा सकती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान न जाए, प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का नकद उपचार प्रदान किया जाता है। एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटरों के साथ-साथ, गंभीर दुर्घटनाओं और चिकित्सा आपात स्थितियों में जीवन बचाने के लिए जागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वस्थ नागरिक एक मजबूत राष्ट्र की नींव हैं। लोगों को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उन्हें समय पर और समुचित चिकित्सा देखभाल प्रदान करना उन्हें स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवा राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग है। नागरिकों का स्वास्थ्य एक सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी हितधारकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सबसे गरीब लोगों को भी समय पर और उचित चिकित्सा देखभाल मिले। ‘सभी को किफायती विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं’ उपलब्ध कराना हम सभी का मिशन होना चाहिए।राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य क्षेत्रों की तरह ही प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इनकी भूमिका और भी बढ़ेगी और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। भारत सरकार नवाचार और नई प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। इंडियाएआई मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित स्वास्थ्य सेवा में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक अग्रणी दवा उत्पादक देश है। हमारे देश में निर्मित दवाएं विश्व भर के लोगों के इलाज में योगदान दे रही हैं। हालांकि, हम अभी भी कई चिकित्सा उपकरणों और महत्वपूर्ण दवाओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। ये आयातित उपकरण और दवाएं आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डालती हैं। अपने नागरिकों को सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए देश में दवाओं और उपकरणों का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी पहलें इस दिशा में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने चिकित्सा जगत और व्यापार जगत से इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करके राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वस्थ नागरिक एक मूलभूत आवश्यकता हैं। नागरिक तभी स्वस्थ रह पाएंगे जब उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे सामूहिक प्रयासों से हमारे नागरिकों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी और भारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में अधिक मान्यता प्राप्त करेगा।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

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मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ राज्य के नाम को बदलकर “केरलम” करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, राष्ट्रपति द्वारा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को केरल राज्य विधानसभा को संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत विचार-विमर्श हेतु भेजा जाएगा। केरल राज्य विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार आगे की कार्रवाई करेगी और संसद में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने हेतु केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को लागू करने के लिए राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त की जाएगी।

केरल विधानसभा ने 24.06.2024 को एक प्रस्ताव पारित कर राज्य का नाम बदलकर “केरलम” करने का निर्णय लिया, जो इस प्रकार है:

मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम केरलम‘ है। नवंबर, 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हुआ था। केरल पिरवी दिवस भी नवंबर को ही मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए संयुक्त केरल के गठन की प्रबल मांग रही है। लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल‘ ही दर्ज है। यह विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद के अनुसार तत्काल कदम उठाकर राज्य का नाम बदलकर केरलम‘ करने की अपील करती है।”

इसके बाद, केरल सरकार ने भारत सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

संविधान के अनुच्छेद 3 में मौजूदा राज्यों के नाम परिवर्तन का प्रावधान है। अनुच्छेद 3 के अनुसार, संसद विधि द्वारा किसी भी राज्य का नाम बदल सकती है। अनुच्छेद 3 में आगे प्रावधान है कि इस उद्देश्य से कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना प्रस्तुत नहीं किया जाएगा, और यदि विधेयक में निहित प्रस्ताव किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमाओं या नाम को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को उस राज्य के विधानमंडल को निर्दिष्ट अवधि के भीतर या राष्ट्रपति द्वारा अनुमत अतिरिक्त अवधि के भीतर उस पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए संदर्भित किया जाना चाहिए और इस प्रकार निर्दिष्ट या अनुमत अवधि समाप्त हो जानी चाहिए।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के विषय पर विचार किया गया और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की स्वीकृति से, केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष मसौदा ज्ञापन को विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामलों और विधायी विभाग को उनकी टिप्पणियों के लिए भेजा गया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि और विधायी विभाग ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की है।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-ब्राजील के बीच 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के महत्वाकांक्षी व्यापार विस्तार और रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मज़बूत संबंधों का आह्वान किया

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित भारत-ब्राजील व्यापार मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच बढ़ते सहयोग पर का उल्लेख किया। पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह अब बढ़कर 15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने वर्तमान स्तर को अपर्याप्त बताया और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए अधिक महत्वाकांक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित उच्च मानकों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राष्ट्र तेजी से विकास कर सकते हैं, विस्तार कर सकते हैं और साझा समृद्धि के लिए एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत-ब्राजील साझेदारी का उल्लेख करते हुए वाणिज्य मंत्री ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बताया, जो लोकतंत्र, विविधता और विकास की साझा आकांक्षाओं से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध दोनो देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से प्रेरित एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुए हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और रक्षा, ऊर्जा, कृषि और कृषि रसायनों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।

श्री गोयल ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग और ब्रिक्स, आईबीएसए, जी-20 तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अंतर्गत सहयोग सहित साझेदारी के व्यापक आयामों पर भी जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया।

भारत की व्यापार रणनीति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री महोदय ने वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए भारत के एक विश्वसनीय स्थल के रूप में उभरने का उल्लेख किया, जिसने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया। यह एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में कई उच्च गुणवत्ता वाले मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं और कई अन्य समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। इन समझौतों के साथ, भारत को अब वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिकता की पहुंच प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इज़राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ संदर्भ की शर्तें तय कर ली गई हैं, कनाडा के साथ बातचीत शुरू हो गई है और निकट भविष्य में आगे की बातचीत शुरू होने की संभावना है।

उन्होंने मर्कोसुर क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत, बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने और खेल, शिक्षा तथा संस्कृति में भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए भारत-मर्कोसुर तरजीहीप्राथमिकता व्यापार समझौते का विस्तार करने के लिए काम कर रहा है।

श्री गोयल ने कहा कि यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों अर्थव्यवस्थाएं नई गति प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि वर्ष 2014 से संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है, जो कराधान, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, डिजिटल अवसंरचना, अनुपालन में कमी और व्यापार करने में सुगमता की दिशा में सुधारों से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सक्रिय रूप से बाहरी निवेश को बढ़ावा देता है और मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उद्योग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

श्री गोयल ने ब्राजील की शक्तियों का वर्णन करते हुए, इसके समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, जिनमें नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क शामिल हैं, का उल्लेख किया, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में ब्राजील की शक्तियों पर भी प्रकाश डाला और इन्हें महत्वपूर्ण सहयोग के क्षेत्रों के रूप में मान्यता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील मिलकर संसाधनों, नवाचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को नया रूप देने की क्षमता रखते हैं और ब्राजील की कंपनियों को रोजगार सृजन, मूल्यवर्धन और प्रौद्योगिकी का  लाभ उठाने में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और वैश्विक बौद्धिक संपदा ढांचे के भीतर समान पहुंच को बढ़ावा देने, विशेष रूप से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के संरक्षण के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्राजील की राजकीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा दोनों ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर सहमति व्यक्त की थी।

श्री गोयल ने अपने संबोधन के समापन में विश्वास व्यक्त किया कि यह वार्ता भविष्य के अनुकूल कार्ययोजना तैयार करने और द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहयोग और नवाचार के माध्यम से भारत-ब्राजील साझेदारी को और प्रगाढ़ करने का आह्वान किया, ताकि आने वाले वर्षों में पारस्परिक समृद्धि की साझा दृष्टि बनी रहे।

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में श्री विजय गोयल द्वारा लिखित कॉफी टेबल बुक ‘अटल बिहारी वाजपेयी: द इटरनल स्टेट्समैन’ का विमोचन किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को सम्मानजनक और भावनात्मक क्षण बताया और कहा कि यह पुस्तक भारत के एक महानतम नेताओं में से एक, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को अर्पित उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि यह प्रकाशन केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे राजनेता का उत्सव है, जिनका जीवन और विरासत राष्ट्र को निरन्तर प्रेरणा देती है।

श्री वाजपेयी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान 12वें और 13वें लोकसभा के सदस्य के रूप में सेवा देने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि 1974 में कोयंबटूर में उन्होंने एक जनसभा का आयोजन किया था, जिसे श्री वाजपेयी ने संबोधित किया था, इस स्मरण को साझा करते हुए उन्होंने इसे अपने सार्वजनिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों का अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद सदस्य से प्रधानमंत्री तक श्री वाजपेयी की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की ताकत को प्रतिबिंबित करती है। तीव्र राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान भी, उन्होंने अपनी निष्ठा, समावेशी दृष्टिकोण और गरिमापूर्ण आचरण के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच सम्मान अर्जित किया।

श्री वाजपेयी के नेतृत्व की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने पोखरण परमाणु परीक्षण और दिल्ली मेट्रो जैसी दूरदर्शी अवसंरचना पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी ने यह दिखाया कि ताकत और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं और वे हमेशा संवाद, लोकतंत्र और विकास को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते थे।

श्री वाजपेयी को एक उत्कृष्ट कवि, दूरदर्शी और संसद सदस्य के रूप में वर्णित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके भाषण संसद और देश दोनों को प्रभावित करते थे और उनमें बिना अप्रिय हुए असहमति जताने की दुर्लभ क्षमता थी — एक ऐसा गुण, जो सार्वजनिक जीवन में आवश्यक है।

कॉफी टेबल बुक की रचना के लिए श्री विजय गोयल की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह कार्य दुर्लभ तस्वीरों, व्यक्तिगत किस्सों और अभिलेखीय सामग्री के माध्यम से इतिहास को जीवंत स्मृति के रूप में संरक्षित करता है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक देशभर में घरों और संस्थानों तक पहुंचेगी, विशेष रूप से नई पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के आदर्शों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगी।

इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान; हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष; राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े; पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी; और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष श्री विजय गोयल सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

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“स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ऋण देना राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेश है: शिवराज सिंह चौहान

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 20 फरवरी 2026 को हैदराबाद में वित्तीय साक्षरता और लचीलेपन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में  नीति निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय संस्थानों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम) और सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया और ग्रामीण भारत में वित्तीय जागरूकता को मजबूत करने, घरेलू लचीलेपन को बढ़ाने और समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया।

इस सम्मेलन में वित्तीय साक्षरता, घरेलू स्तर पर वित्तीय सुदृढ़ता और आजीविका एवं उद्यमों के लिए ऋण तक पहुंच बढ़ाने जैसे विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न सत्रों के दौरान  निरंतर वित्तीय शिक्षा, व्यापक वित्तीय समावेशन और मजबूत संस्थागत समन्वय के महत्व पर बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उनके संघों जैसी सामुदायिक संस्थाओं को वित्तीय सेवाएं और वित्तीय साक्षरता संबंधी हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए विश्वसनीय और विस्तार योग्य मंच के रूप में मान्यता दी गई।

21 फरवरी 2026 को हैदराबाद में 25वीं केंद्रीय स्तरीय समन्वय समिति (सीएलसीसी) की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक ग्रामीण वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में नीतिगत संवाद को आगे बढ़ाने और समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री और सीएलसीसी के अध्यक्ष श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इसमें माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी और तेलंगाना सरकार की माननीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने भी भाग लिया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय और तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार, संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण और संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति शर्मा भी शामिल थे। तेलंगाना सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास के प्रधान सचिव श्री एन. श्रीधर और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास आयुक्त एवं एसईआरपी तेलंगाना की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती दिव्या देवराजन शामिल थीं, साथ ही नाबार्ड, आरबीआई, बैंकों, एशियाई विकास बैंक और विभिन्न राज्यों के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सम्मेलन से प्राप्त प्रमुख जानकारियों के सारांश के साथ हुई, जिसके बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती स्मृति शरण द्वारा “डेय-एनआरएलएम की रणनीतिक अंतर्दृष्टि और आगे का रोडमैप” विषय पर एक प्रस्तुति दी गई।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों, जिनमें बैंक सखी, बीसी सखी, वित्तीय साक्षरता सामुदायिक संसाधन व्यक्ति और बीमा सखी शामिल हैं, के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, स्वयं सहायता समूहों के लिए बैंक संपर्क को मजबूत करने और व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ऋण देना जोखिम नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक है। महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग से, “दीदी” लखपति से करोड़पति बन सकती हैं, जिससे महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण परिवर्तन में तेजी आएगी और विकसित भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

माननीय केंद्रीय मंत्री ने अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय पहुंच को मजबूत करने, उद्यम वित्तपोषण का विस्तार करने और ग्रामीण परिवारों के लिए जोखिम संरक्षण तंत्र में सुधार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस आयोजन के दौरान तीन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया गया:

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए व्यक्तिगत उद्यम बैंक ऋण प्रणाली*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए यूपीआई आधारित क्रेडिट लाइनें*

*• स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए वित्तीय साक्षरता पर डिजिटल मॉड्यूल*

इन पहलों का उद्देश्य ऋण वितरण को सरल बनाना, डिजिटल वित्त को अपनाने को बढ़ावा देना और ग्रामीण महिलाओं के बीच वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

ग्रामीण विकास सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने वित्तीय समावेशन, उद्यम विकास और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा देने में सामुदायिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा को अब उद्यम-नेतृत्व वाली सशक्तिकरण की ओर विकसित होना चाहिए, जिसमें वित्त तक पहुंच से ध्यान हटाकर उत्पादक ऋण, उद्यम प्रोत्साहन और सतत वित्तीय क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया जाए।

श्रीमती डी. अनुसूया सीताक्का ने कहा कि हालांकि तेलंगाना देश का सबसे युवा राज्य है, लेकिन यहां सबसे पुराना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) है, और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मिशन के नेतृत्व में किए गए हस्तक्षेप तेलंगाना की महिलाओं को उद्यम निर्माण के अगले चरण का नेतृत्व करने में सक्षम बनाएंगे।

इस कार्यक्रम में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकिंग संस्थानों को पुरस्कार देकर वित्तीय संस्थानों के योगदान को भी मान्यता दी गई।

बैठक का समापन हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करने, वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने और ग्रामीण भारत में समावेशी विकास को गति देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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अहमदाबाद में आयोजित चिंतन शिविर में भारत द्वारा 30 अरब डॉलर का आँकड़ा पार किए जाने पर औषधि निर्यात के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया

चिंतन शिविर श्रृंखला, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जा रहा है, के अंतर्गत “स्केलिंग अप फार्मा एक्सपोर्ट्स” विषय पर एक उद्योग संवाद आयोजित किया गया। यह संवाद उद्योग और नियामकों के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से भारत के निर्यात दायरे को विस्तार देने की सरकार की प्राथमिकता को प्रतिबिंबित करता है।

भारत का औषधि निर्यात प्रदर्शन निरंतर स्थिर वृद्धि दर्शा रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में औषधि निर्यात 30.47 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा, जो इसके पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के इस क्षेत्र का वर्ष 2030 तक 130 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। मात्रा के आधार पर भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है तथा 200 से अधिक बाज़ारों में दवाओं का निर्यात करता है। कुल निर्यात का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कठोर नियामक मानकों वाले बाज़ारों को जाता है। भारत के औषधि निर्यात में 34 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका की तथा 19 प्रतिशत की हिस्‍सेदारी यूरोप की है। संवाद में निरंतर निर्यात त्वरण हेतु अनुकूल परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने पर सरकार के विशेष बल को रेखांकित किया गया, जबकि उद्योग ने 2026–27 में द्विअंकीय वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी तत्परता व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ वाणिज्य विभाग के वाणिज्य सचिव के वीडियो संदेश से हुआ, जिसमें उन्होंने निर्यातकों और विनिर्माताओं के साथ सतत् संवाद बनाए रखने तथा विनियमित बाज़ारों में उत्पन्न चुनौतियों पर समयबद्ध प्रतिक्रिया देने के महत्व पर बल दिया। संदेश में एक विश्वसनीय व्यापार भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने, वैश्विक औषधि बाज़ारों में अपनी हिस्सेदारी का विस्तार करने तथा भारत से सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की विश्वभर में निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए विशेष जोर को पुनः रेखांकित किया गया।

उद्घाटन सत्र में वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन तथा खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन सहित उद्योग से जुड़े हितधारकों की प्रतिभागिता रही। चर्चाएँ नियामकीय प्रक्रियाओं, निर्यात सुगमता तथा नीतिगत उपायों और क्षेत्र की आगामी विकास अवस्था के बीच समन्वय पर केंद्रित रहीं, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के संदर्भ में, जिन्हें प्रायः अनुपालन, प्रलेखन तथा निरीक्षण संबंधी आवश्यकताओं का महत्वपूर्ण सामना करना पड़ता है।

संवाद में केंद्रीय बजट 2026–27 में निर्धारित दिशा को भी संज्ञान में लिया गया, जिसमें बायोफार्मा और जैविक औषधियों को भारत की भावी स्वास्थ्य तथा विनिर्माण प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा गया है। प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल, जिसे पाँच वर्षों में क्रियान्वित किया जाना है, का उद्देश्य जैविक औषधियों और बायोसिमिलर्स के लिए भारत की संपूर्ण पारितंत्र क्षमता को सुदृढ़ करना, आयात निर्भरता को कम करना तथा वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है, जिससे वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल बाज़ार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त करने के लक्ष्य के अनुरूप प्रगति की जा सके।

इस संदर्भ में तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित करने, सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन करने, 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल परीक्षण स्थलों का विकास करने तथा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की क्षमता को विशेषज्ञ वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति के माध्यम से सुदृढ़ करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इन उपायों को जटिल उत्पादों के त्वरित मूल्यांकन को सक्षम बनाने तथा भारत की नियामकीय व्यवस्था में विश्वास को सुदृढ़ करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।

पैनल चर्चाओं और विषयगत सत्रों में विनिर्माण अनुशासन से बाज़ार स्वीकृति तक की निर्यात यात्रा का परीक्षण किया गया। “स्केलिंग एक्सिलेंस थ्रू एंटरप्रेन्योरियल जर्नी,” “फ्रॉम कमोडिटी सप्लायर टु ट्रस्टेड ग्लोबल पार्टनर,” “वृद्धि का मंत्र – ग्रोथ का यंत्र,” तथा “स्केल अप मंत्र फॉर इमर्जिंग कंपनीज़” जैसे सत्रों में औषधि निर्यात के अगले दशक की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने गुणवत्ता प्रणालियों को सुदृढ़ करने, अनुपालन तत्परता सुनिश्चित करने तथा मूल्य श्रृंखला में उन्नयन के संबंध में अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए, साथ ही लागत और आपूर्ति में विश्वसनीयता बनाए रखने पर भी बल दिया।

निर्यातकों को प्रमुख साझेदारों, जिनमें यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, के साथ हालिया व्यापारिक सहभागिताओं से उत्पन्न अवसरों के बारे में भी अवगत कराया गया। यह उल्लेख किया गया कि अधिक निकट आर्थिक व्यवस्थाएँ बाज़ार पहुँच तथा स्थिर मांग के लिए स्पष्ट मार्ग सुनिश्चित करने में, विशेषकर बड़े, विनियमित बाज़ारों में, सहायक हो सकती हैं। 572.3 अरब अमेरिकी डॉलर के औषधि और चिकित्सा उपकरण बाज़ार के संदर्भ में यूरोपीय संघ के साथ सहभागिता पर चर्चा की गई, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था भारतीय औषधि कंपनियों के लिए बाज़ार पहुँच और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता को और सुदृढ़ कर सकती है।

भारत की औषधि निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) की गतिविधियों तथा 12वीं अंतरराष्ट्रीय औषधि एवं स्वास्थ्य सेवा उद्योग प्रदर्शनी (आईफेक्स) पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसके पश्चात निर्यातकों और हितधारकों के साथ एक खुला संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 200 निर्यातकों ने भाग लिया, जिनमें अधिकांश भारत के पश्चिमी क्षेत्र से थे।

अहमदाबाद में हुई चर्चाओं में निर्यातकों और व्यापक जनहित से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित रखा गया, जिनमें त्वरित और अधिक सुनिश्चित अनुमोदन, सुदृढ़ नियामकीय सहयोग और मात्रा-आधारित निर्यात से जैविक औषधियों, बायोसिमिलर्स और नवाचार-प्रेरित उत्पादों जैसे उच्च-मूल्य खंडों की ओर क्रमिक बदलाव शामिल हैं। वाणिज्य विभाग निर्यातकों, नियामक निकायों और विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ सतत् संवाद जारी रखेगा, जिससे समस्‍याओं की समय पर पहचान और समाधान सुनिश्चित किया जा सके तथा वैश्विक बाज़ारों में भारत के औषधि निर्यात की निरंतर वृद्धि को समर्थन मिले।

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