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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की 7.62 x 51 एमएम असॉल्ट राइफलों के लिए एडवांस्‍ड नाइट साइट की खरीद हेतु 659.47 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की 7.62 x 51 एमएम असॉल्ट राइफलों के लिए एडवांस्‍ड नाइट साइट की खरीद हेतु 659.47 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए

रक्षा मंत्रालय ने 15 अक्टूबर, 2025 को भारतीय सेना के लिए 7.62 x 51 एमएम असॉल्ट राइफल के लिए नाइट साइट (इमेज इंटेंसिफायर) की खरीद के साथ-साथ सहायक उपकरण के लिए 659.47 करोड़ रुपये के अनुबंध समझौते पर हस्ताक्षर किए। नाइट साइट सैनिकों को एसआईजी 716 असॉल्ट राइफल की लंबी प्रभावी रेंज का पूरी तरह से फायदा उठाने में सक्षम बनाएगी।

ये साइट स्‍टारलिट कंडिशन में भी 500 मीटर की प्रभावी दूरी तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हैं और मौजूदा पैसिव नाइट साइट (पीएनएस) की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार प्रदान करते हैं। इस खरीद को 51 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ (भारतीय-आईडीडीएम) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह खरीद रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस पहल से कल-पुर्जों के निर्माण और कच्चे माल की आपूर्ति से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी लाभ होगा।

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दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाए गए दीवाली के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में दिव्यांग डेवलपमेंट सोसायटी, महाविद्यालय के “दिव्यांग सहायता क्लब” एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान द्वारा दिव्यांग बच्चों के द्वारा बनाए गए दीवाली के सुंदर उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्राचार्या प्रो. पूनम विज ने दिव्यांग बच्चों के द्वारा बनाए गए उत्पादों की भूरि भूरि प्रशंसा की और कई उत्पादों की खरीदारी कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। प्राचार्या जी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें दूसरों की सहायता करनी चाहिए। जब हम सभी ऐसा करेंगे, तभी एक अच्छे समाज का निर्माण हो सकेगा । हमारे महाविद्यालय में इसकी पहल, महाविद्यालय में दिव्यांग सहायता क्लब को स्थापित करके तथा समाजशास्त्र विभाग द्वारा दिव्यांग डेवलपमेंट सोसाइटी के साथ समझौता ज्ञापन करके की गई है। जो समय समय पर दिव्यांग बच्चों के लिए भी प्रशंसनीय कार्य करता रहता है। जिससे महाविद्यालय के बच्चों के मन में दिव्यंगता के प्रति सहयोग की भावना उत्पन्न हुई है। इस प्रदर्शनी में सभी शिक्षिकाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग लिया। प्रदर्शनी को सफल बनाने हेतु समुचित आयोजन डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, विभागाध्यक्ष,समाजशास्त्र विभाग के द्वारा किया गया।

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‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर सुरक्षा जागरूकता पर कार्यशाला’ आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं साइबर सुरक्षा जागरूकता पर एक कार्यशाला का सफल आयोजन 15 अक्टूबर 2025 को छत्रपति शाहू जी महाराज नवाचार फाउंडेशन (CSJMIF), छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर द्वारा, C3i HUB, IIT कानपुर एवं कलाम एस.पी.एस. रिसर्च सेंटर के सहयोग से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ऑडिटोरियम, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में किया गया।

इस कार्यक्रम में कानपुर नगर के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के पाठ्यक्रम समन्वयकों एवं सह-समन्वयकों की सक्रिय भागीदारी रही। उद्घाटन सत्र की शुरुआत डॉ. आशुतोष द्विवेदी के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने शिक्षा एवं उद्योग जगत में AI और साइबर सुरक्षा के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया। क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के प्राचार्य प्रो. विनय जे. सेबेस्टियन ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए डिजिटल नैतिकता एवं जागरूकता की महत्ता को रेखांकित किया।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कार्यशाला के संरक्षक प्रो. विनय कुमार पाठक ने ऑनलाइन संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने इस प्रकार की क्षमतावर्धन पहलों की आवश्यकता एवं सामयिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए ऐसे सहयोगात्मक प्रयासों को समर्थन प्रदान किया।

CDC निदेशक, प्रो. आर. के. द्विवेदी ने उद्घाटन भाषण में युवाओं को AI और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कुशल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उद्घाटन सत्र के पश्चात एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें शैक्षणिक, शोध एवं उद्योग क्षेत्र के प्रमुख वक्ताओं ने AI और साइबर सुरक्षा से जुड़ी नवीनतम चुनौतियों और अवसरों पर अपने विचार साझा किए। कलाम फाउंडेशन, नई दिल्ली के CEO डॉ. सृजन पाल सिंह जी ने जनसेवा में AI के नैतिक उपयोग पर व्याख्यान दिया। लखनऊ स्थित कलाम फाउंडेशन की निदेशक सुश्री गुंजा कपूर ने नीति स्तर पर मौजूद कमियों और मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित किया।

C3iHUB, IIT कानपुर के साइबर सुरक्षा प्रशिक्षक श्री अमन राज ने वास्तविक दुनिया के साइबर खतरों और कमजोरियों पर एक प्रभावी सत्र लिया। वहीं, C3iHUB से ही श्री आदित्य सिंह ने AI के माध्यम से खतरों की पूर्व पहचान में इसकी भूमिका पर चर्चा की।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के CSJMIF में इनक्यूबेशन मैनेजर अनिल कुमार त्रिपाठी ने AI और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्टार्टअप एवं इनक्यूबेशन के अवसरों पर प्रकाश डाला। CSJMIF के इनोवेशन ऑफिसर शैलेन्द्र यादव ने तकनीकी क्षेत्र में नवाचार, इनक्यूबेशन और स्टार्टअप की संभावनाओं पर विचार साझा किए।

‘AI फॉर ऑल’ व्यावसायिक पाठ्यक्रम के जिला समन्वयक, कानपुर नगर, प्रो. मीत कमल ने भी कार्यशाला में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शुभी तिवारी एवं डॉ. अंकिता जैस्मिन लाल द्वारा किया गया।

कार्यशाला का समापन डॉ. आशुतोष कुमार द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, सहयोगियों, आयोजन टीमों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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एमएसएमई विशेषज्ञों द्वारा इंटरएक्टिव सत्र आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेल द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को छात्रों में नवाचार और उद्यमिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एमएसएमई विशेषज्ञों द्वारा एक इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किया गया। सत्र का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता में भूमिका को समझना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेल के संयोजक डॉ. मनीष कपूर के स्वागत भाषण एवं परिचय से हुआ, जिन्होंने एमएसएमई की नवाचार और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन ने अपने संबोधन में छात्रों को उद्यमिता को व्यक्तिगत और सामाजिक विकास का मार्ग मानने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान श्री दिव्यांशु शुक्ला ने सभा को संबोधित करते हुए कृषि-आधारित उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से सुगंधित एवं औषधीय फसलों के क्षेत्र में, जो युवाओं के लिए रोजगार एवं ग्रामीण विकास का एक उभरता हुआ क्षेत्र है।

इस अवसर पर श्री भक्ति विजय शुक्ला, उपनिदेशक, एमएसएमई, कन्नौज ने सरकारी योजनाओं, इनक्यूबेशन अवसरों एवं शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार की भूमिका पर अपने मूल्यवान विचार साझा किए। कार्यक्रम का समापन एक इंटरएक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र से हुआ, जिसमें छात्रों ने अपने विचार रखे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

सत्र में एमएसएमई पहल, नवाचार, और स्टार्टअप समर्थन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और नवाचार-आधारित एवं स्व-रोजगार के अवसरों की ओर प्रेरित हुए।

इस कार्यक्रम से छात्रों में एमएसएमई के प्रति जागरूकता बढ़ी, उद्यमिता के प्रति उनकी रुचि में वृद्धि हुई, और शिक्षा जगत तथा उद्योग के बीच संबंध मजबूत हुए। प्रतिभागियों ने इस सत्र की सराहना की और व्यावहारिक कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन का सुझाव दिया।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेता मिश्रा, संकाय सदस्य द्वारा किया गया, जिन्होंने अतिथियों, अध्यापकों और छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस आयोजन ने शैक्षणिक ज्ञान और उद्यमिक व्यवहार के बीच की खाई को सफलतापूर्वक पाटते हुए छात्रों को भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

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सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता  दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन रोड सेफ्टी क्लब की इंचार्ज डॉ. संगीता सिरोही के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।इस अवसर पर छात्राओं ने सड़क सुरक्षा विषय पर अपने सृजनात्मक विचारों को भाषण, निबंध, प्रश्नोत्तरी के माध्यम से प्रस्तुत किया।

छात्राओं ने सड़क सुरक्षा नियमों से संबंधित शपथ भी ली।इस अवसर पर छात्राओं के द्वारा रैली निकालकर पोस्टरों के माध्यम से ट्रैफिक नियमों का संदेश दिया ताकि छात्राओं, अभिभावकों एवं अध्यापकों के मध्य सड़क सुरक्षा जागरूकता का व्यापक प्रचार प्रसार हो।

विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता छात्राओं ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। भाषण प्रतियोगिता में उमरा ने प्रथम, वैष्णवी शर्मा ने द्वितीय तथा नाज़िया बेगम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता में श्रद्धा त्रिवेदी प्रथम , पंखुड़ी ओमर द्वितीय तथा रिधिमा तृतीय रही।प्रश्नोतरी प्रतियोगिता में सिमरन फिरदौस ने प्रथम, बुशरा ने द्वितीय तथा सिमरन कुशवाहा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, महाविद्यालय सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा तथा निर्णायक मंडल ने छात्राओं की रचनात्मकता की सराहना की और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

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कानपुर की शिक्षिका अंजनी अग्रवाल को मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर नगर की शिक्षिका अंजनी अग्रवाल को मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पुस्तक की भेंट अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर चौधरी केहर सिंह एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा बड़ौत बागपत द्वारा मेडिसिटी हॉस्पिटल बड़ौत के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु विभिन्न राज्यों से आए 111 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से आमंत्रित उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरुआ सरसौल की सहायक अध्यापिका शिक्षिका अंजनी अग्रवाल को प्रदेश के राज्य मंत्री कृष्ण पाल मालिक के द्वारा अंग वस्त्र , स्मृति चिन्ह , प्रशस्ति पत्र पोर्टफोलियो एवं पौधा देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम में श्री धर्मेंद्र कुमार आईएएस विनीत राठी उपनिदेशक प्रवर्तन निर्देशालय, राघवेंद्र सिंहजिला विद्यालय निरीक्षक बागपत, मनोज मालिक, नवनीत पाठक, डॉक्टर राजेंद्र कुमार, विजय तोमर सीओ बड़ौत, एवं डॉ. रघुनाथ सिंह जी की गरिमामाई उपस्थिति रही।
डॉ. अंजनी अग्रवाल ने अपनी लिखित पुस्तक,” प्रेरक द्वार” (बाल कहानी संग्रह) भी भेट की। जिसकी सभी ने भूरी भूरी प्रशंसा की।

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महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर मिशन शक्ति फेज़–5 के अंतर्गत आज कॉलेज परिसर में महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस दौरान छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी गई। साथ ही एनसीसी कैडेट्स एवं अन्य छात्राओं ने पुलिस टीम के साथ मिलकर सेल्फ डिफेंस, ट्रैफिक मैनेजमेंट तथा नुक्कड़ नाटक जागरूकता अभियान में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।

इस अवसर पर छात्राओं को सभी महिला हेल्पलाइन नंबरों के बारे में जागरूक किया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में छात्राओं के नाम भी दर्ज किए गए ताकि भविष्य में “नारी शक्ति अभियान” को और सशक्त बनाते हुए समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया जा सके।

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गोवा में पर्पल फेयर-2025 का शुभारंभ समावेशी, प्रतिभा और सशक्तीकरण का उत्सव

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट – सेलिब्रेटिंग डायवर्सिटी के तीसरे संस्करण का उद्घाटन किया और एक समावेशी और सुलभ समाज के प्रति गोवा की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव दिव्यांगजनों की प्रतिभा और क्षमता को प्रदर्शित करते हुए सशक्तीकरण का प्रतीक बन गया है। “समावेशी सोच” पर ज़ोर देते हुए, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दिव्यांगजन अब केवल लाभार्थी नहीं माने जाते। वे पेशेवरउद्यमी और समाज में सक्रिय योगदानकर्ता हैं। उन्होंने बहुप्रतीक्षित पर्पल फेयर-2025 पर कहा कि पर्पल फेयर न केवल प्रतिभा और समावेशिता का जश्न मनाता है बल्कि सामाजिक धारणा में एक बड़े बदलाव भी दर्शाता है – दिव्यांगता को एक सीमा के रूप में देखने से लेकर क्षमतायोगदान और उद्यमिता को मान्यता देने तक।

गोवा के समाज कल्याण मंत्री सुभाष फल देसाई ने कहा कि समावेश कोई दान-पुण्य का कार्य नहीं है; यह एक आंदोलन और शासन का सिद्धांत है जो गरिमा, स्वतंत्रता और मान्यता दिलाता है। इस तरह के उत्सव समावेशन को आनंदमय, सार्थक और दृश्यमान बनाते हैं।

इस अवसर पर केन्द्रिय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री विश्व स्तर पर सबसे सक्रिय और लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं, जो देश के विकास और प्रत्येक समुदाय के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

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दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्तों (एससीपीडी) की उभरती भूमिका के बारे में बताया। पिछले कुछ वर्षों में  दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्तों ने 50 हजार से ज़्यादा शिकायतों का निपटारा किया है, जिनकी संतुष्टि दर अच्छी रही है, और हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसलों ने उनके आदेशों की विश्वसनीयता को और मज़बूत किया है। उन्होंने सामाजिक आउटरीच कार्यक्रमों, 50 करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रमों और सैकड़ों याचिकाओं का निपटारा करने वाली मोबाइल अदालतों सहित अभिनव पहलों पर प्रकाश डाला।

यह महोत्सव समावेशी शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, विकलांग व्यक्तियों की प्रतिभा, उद्यमशीलता और योगदान का जश्न मनाता है, तथा एक ऐसे समाज को प्रेरित करता है जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और अवसर के साथ प्रगति कर सके।

दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त श्री गुरुप्रसाद पावस्कर ने इस महोत्सव को “दिव्यांग व्यक्तियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और लचीलेपन को प्रदर्शित करने के लिए एक अनूठा मंच” बताया।

श्री प्रमोद सावंत, मुख्यमंत्री, गोवा; डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री; श्री रामदास अठावले, सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री; श्री श्रीपद नाइक, नवीन नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, गोवा सरकार; श्री सदानंद शेत तनावड़े, सांसद (राज्यसभा); श्री सुभाष फल देसाई, दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री, गोवा; श्री राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग; डॉ. वी. कैंडावेलौ, गोवा के मुख्य सचिव; श्री प्रसन्ना आचार्य, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, गोवा; श्री शोम्बी शार्प, भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट समन्वयक; श्री गुरुप्रसाद पावस्कर, दिव्यांगजनों के लिए राज्य आयुक्त, गोवा; तथा श्री ताहा हाजीक, सचिव, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त, गोवा, उपस्थित गणमान्य व्यक्ति थे।

राष्ट्रीय दिव्यांगजन रोजगार संवर्धन केंद्र (एनसीपीईडीपी), सक्षम, बुकशेयर, डीएआईजी, राइजिंग फ्लेम, संयुक्त राष्ट्र भारत, विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी),  भारत सरकार और विकलांग व्यक्तियों के लिए राज्य आयुक्त के कार्यालय, गोवा में राजदूत सादिया बंदोदकर, साक्षी काले, ज़ेरिफ़ शेख, मंजू शर्मा, ललित पारगी, महादेव सावंत, क्रुणाल ठाकुर, केवाई वेंकटेश, जोसेफ, अंजलि व्यास, ज़मीर ढाले, धन्य रवि, संतोष वाणी, दीपश्री नरेंद्र, सुनील सहस्रबुद्धे, आरती बत्रा, प्रज्ञा सिंह, रक्षिता शेखर, निधि गोयल, जीजा घोष, उमेश सालगर और माया रानावरे भी उपस्थित थे।

यह कार्यक्रम गोवा के समाज कल्याण निदेशालय के दिव्यांगजन मामलों के राज्य आयुक्त, एंटरटेनमेंट सोसाइटी द्वारा भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस समारोह में सुश्री मनमीत कौर नंदाअतिरिक्त सचिव श्री राजेश शर्मासंयुक्त सचिवसुश्री ऋचा शंकरडीडीजीदिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग , श्री प्रवीण कुमार, सीएमडी, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ), श्री पीपी अंबष्ट, डिप्टी सीसीपीडी, एनसीपीटी राज्य आयुक्तोंएनजीओ प्रतिनिधियोंमीडिया कर्मियों और विशेष आमंत्रितों सहित कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया!

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सार्वजनिक अभिलेख सुशासन, पारदर्शिता और ऐतिहासिक निरंतरता की आधारशिला हैं: श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) ने सुशासन माह के अंतर्गत, नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में सुशासन और अभिलेख 2025″ नामक एक प्रदर्शनी का आयोजन किया । इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया, जो सुशासन और अभिलेखीय संरक्षण के बीच तालमेल की खोज के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण आयोजन की शुरुआत है। यह प्रदर्शनी 12 अक्टूबर 2025 तक जनता के लिए खुली रहेगी !अपने उद्घाटन भाषण में, श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सुशासन, पारदर्शिता और ऐतिहासिक निरंतरता की आधारशिला के रूप में सार्वजनिक अभिलेखों के संरक्षण के महत्व पर बल दिया । उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटलीकरण परियोजनाओं में से एक को लागू करने में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के अग्रणी प्रयासों की सराहना की और कहा कि अब तक 15 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

प्रदर्शनी में दुर्लभ और महत्वपूर्ण अभिलेखीय अभिलेखों का एक संग्रह प्रदर्शित किया गया है जो पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी शासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी पहलों के तहत संरक्षित और व्यवस्थित ये अभिलेख प्रशासनिक दक्षता और अपनी दस्तावेजी विरासत के संरक्षण, दोनों को बनाए रखने के राष्ट्र के संकल्प को दर्शाते हैं। यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) की आधिकारिक वेबसाइट पर डिजिटल रूप से उपलब्ध है। वेबसाइट लिंक : https://nationalarchives.nic.in/sausaasana-aura-abhailaekha-2025

2021 और 2025 के बीच, 75,500 से अधिक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण दस्तावेजों की समीक्षा की गई और उन्हें भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार में स्थानांतरित कर दिया गया-जो देश की रिकॉर्ड-कीपिंग प्रणालियों को मजबूत करने और महत्वपूर्ण सार्वजनिक जानकारी के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

प्रदर्शनी में विभिन्न मंत्रालयों के योगदानों को प्रदर्शित किया गया, जिन्होंने भारत के प्रशासनिक ढाँचे और विकास पथ को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में विद्युत मंत्रालय, रेल मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय, आदि के अभिलेखीय अभिलेख भी शामिल थे।

प्रमुख प्रदर्शनियां निम्नलिखित ऐतिहासिक क्षणों पर केन्द्रित थीं:

  • भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की शुरूआत
  • जनरल एस.एच.एफ.जे. मानेकशॉ को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया
  • पंचायती राज और विजय दिवस समारोह पर गृह मंत्रालय की पहल प्रदर्शनी में भारत के दो सबसे सम्मानित नेताओं –  अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम – को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व ने शासन, प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय विकास में भारत के विकास को आकार दिया। अभिलेखीय तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से, प्रदर्शनी ने समावेशी विकास, युवा सशक्तिकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा देने में उनकी स्थायी विरासत को उजागर किया।

1891 में स्थापित, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार देश की दस्तावेजी विरासत का संरक्षक है, जिसमें 34 करोड़ से ज़्यादा सार्वजनिक अभिलेख संग्रहित हैं। इसके विशाल संग्रह में दुर्लभ पांडुलिपियाँ, संधियाँ, विधायी दस्तावेज़ और प्रशासनिक रिपोर्टें शामिल हैं—जो भारत के शासन, नीतिगत विकास और सामाजिक परिवर्तन के बारे में अद्वितीय जानकारी प्रदान करती हैं।

भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक श्री संजय रस्तोगी ने स्वागत भाषण दिया और संस्थान के आधुनिकीकरण एवं जन-जन तक पहुँच की दिशा में चल रही पहलों पर प्रकाश डाला। संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने राज्य और अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागारों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने भी उपस्थित लोगों को संबोधित किया और बोर्न डिजिटल अभिलेखों के संरक्षण में राष्ट्रीय अभिलेखागार की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

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इस प्रदर्शनी के माध्यम से, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने अभिलेखीय संरक्षण और सुशासन के बीच संबंध को मज़बूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रदर्शित अभिलेखों ने भारत के प्रशासनिक विकास — चुनावी और न्यायिक सुधारों से लेकर अवसंरचनात्मक और नीतिगत प्रगति तक — की बहुमूल्य जानकारी प्रदान की, जिससे एक पारदर्शी, जवाबदेह और दूरदर्शी शासन प्रणाली सुनिश्चित करने में दस्तावेज़ीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

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भारत के महाकाव्य महाभारत का राष्ट्रीय टेलीविजन पर नवीन स्‍वरूप में प्रसारण

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Mahabharat12QCI.JPGकलेक्टिव मीडिया नेटवर्क ने भारत के सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य ‘महाभारत’ के एक अभूतपूर्व एआई-आधारित पुनर्कल्पना के प्रसारण की घोषणा की है। इस श्रृंखला का विशेष डिजिटल प्रीमियर 25 अक्टूबर 2025 को वेव्स ओटीटी पर होगा। इसके बाद 2 नवंबर 2025 से हर रविवार सुबह 11:00 बजे दूरदर्शन पर इसका प्रसारण होगा। यह श्रृंखला भारत और दुनिया भर के डिजिटल दर्शकों के लिए वेव्स ओटीटी के माध्यम से एक साथ उपलब्ध होगी।

अपनी तरह का यह पहला सहयोग भारत के सार्वजनिक प्रसारक की विरासत और देशव्यापी पहुंच को अगली पीढ़ी के मीडिया नेटवर्क के रचनात्मक नवाचार के साथ जोड़ता है। उन्नत एआई उपकरणों का उपयोग करते हुए, इस श्रृंखला में महाभारत महाकाव्‍य के व्‍यापक स्‍वरूप, उसके पात्रों, युद्धक्षेत्रों, भावनाओं और नैतिक दुविधाओं को सिनेमा के पैमाने और अद्भुत यथार्थवाद के साथ फिर से तैयार किया गया है। यह परियोजना मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया की भावना को मूर्त रूप देती है और यह दर्शाती है कि कैसे विरासत और नवाचार एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

प्रसार भारती के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी इस सहयोग पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि प्रसार भारती हमेशा से ही राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व की गाथाओं को हर भारतीय घर तक पहुंचाता रहा है। लॉकडाउन के दौरान मूल महाभारत के पुनः प्रसारण ने हमें याद दिलाया कि ये कथाएं परिवारों और पीढ़ियों को कितनी गहराई से एक साथ जोड़ती हैं। यह एआई-आधारित पुनर्कल्पना में भागीदारी दर्शकों को भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक का नए सिरे से अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही इसमें परंपरा का सम्मान करते हुए कहानी बताने की अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया गया है। यह आधुनिक प्रसारण में विकास और विरासत के एक साथ आने की अभिव्यक्ति है।

कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के संस्थापक और समूह सीईओ, विजय सुब्रमण्यम ने इस साझेदारी पर अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि लाखों भारतीयों की तरह, वह भी हर रविवार को टेलीविजन पर क्लासिक महाभारत देखकर बड़े हुए हैं। यह एक ऐसा अनुभव था जिसने हमारी कल्पना और संस्कृति से हमारे जुड़ाव को आकार दिया। महाभारत के साथ, हमारी आशा है कि आज की पीढ़ी को इसके माध्‍यम से एक ऐसा भावपूर्ण अनुभव दिलाना है जो उनके लिए गहन और एकीकृत भाव से परिपूर्ण हो और इसे आज की तकनीक की संभावनाओं के माध्यम से दिखाया गया है। यह भक्ति और प्रगति के साथ मिलकर कुछ ऐसा तैयार करने के संदर्भ में है जो न सिर्फ गहराई से परंपरा में निहित हो अपितु साहसपूर्वक दूरदर्शी भी हो।

प्रसार भारती का आधिकारिक ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म, वेव्स, भारत की संस्कृति, समाचार और मनोरंजन के समृद्ध ताने-बाने को एक डिजिटल मंच पर लाता है। वीडियो-ऑन-डिमांड, लाइव इवेंट और टीवी, रेडियो, ऑडियो और पत्रिका सामग्री के व्यापक संग्रह के साथ, वेव्स ने अपनी विश्वसनीय, परिवार-अनुकूल और बहुभाषी पेशकशों के साथ तेज़ी से लाखों उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया है। समावेशिता, नवाचार और विरासत के स्तंभों पर निर्मित, यह प्लेटफ़ॉर्म अत्याधुनिक कहानी कहने की कला के साथ भारत की कालातीत विरासत को जोड़ता है। कलेक्टिव एआई महाभारत के साथ इसका सहयोग इस बात का उदाहरण है कैसे तकनीक और परंपरा मिलकर शक्तिशाली, समकालीन आख्यान रच सकते हैं जो भारत और दुनिया भर के दर्शकों के साथ प्रतिध्वनित होते हैं

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