स्वदेशी स्रोतों के माध्यम से कोयले की भविष्य की मांग को पूरा करने और कोयले के गैर-आवश्यक आयात को कम करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन अगले कुछ वर्षों में सालाना 6-7% बढ़कर 2029-30 तक लगभग 1.5 बिलियन टन तक पहुंचने की संभावना है।
कोल इंडिया लिमिटेड की वॉशरी के प्रदर्शन में गिरावट और इस्पात क्षेत्र में धोए गए कोकिंग कोयले की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने धोए गए कोकिंग कोयले की क्षमता बढ़ाने के लिए पुरानी वॉशरी के मुद्रीकरण का मार्ग अपनाया है। इसके अनुरूप सरकार ने ‘डब्ल्यूडीओ मार्ग के माध्यम से कोकिंग कोयले का उपयोग करने वाले इस्पात’ के नाम के साथ गैर-विनियमित क्षेत्र लिंकेज नीलामी के तहत एक नए उप-क्षेत्र के निर्माण को मंजूरी दी है। अनुबंध की पूरी अवधि के लिए चिह्नित खदानों से दीर्घकालिक कोयला लिंकेज के आश्वासन के साथ नए उप-क्षेत्र के निर्माण से कोकिंग कोयला वॉशरी का मुद्रीकरण होगा। इससे देश में धोए गए कोकिंग कोयले की उपलब्धता में वृद्धि होगी। यह भी उम्मीद की जाती है कि नए उप-क्षेत्र से देश में इस्पात उद्योग में घरेलू कोकिंग कोयले की खपत बढ़ेगी।
कोकिंग कोयले के आयात के स्थान पर इस्पात क्षेत्र द्वारा कोकिंग कोयले के वर्तमान घरेलू सम्मिश्रण को वर्तमान 10-12% से बढ़ाकर 30-35% किया जाएगा। कोयला मंत्रालय ने राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 में अनुमानित घरेलू कोकिंग कोयले की मांग को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2022 में मिशन कोकिंग कोल की शुरुआत की। प्रधानमंत्री की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत कोयला मंत्रालय द्वारा किए गए परिवर्तनकारी उपायों के बाद घरेलू कच्चे कोकिंग कोयले का उत्पादन 2030 तक 140 एमटी तक पहुंचने की संभावना है।
भारत सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों और निजी क्षेत्र के लिए कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण के रूप में 8500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक वित्तीय सहायता योजना को मंजूरी दी है। स्वीकृत योजना में 8500 करोड़ रुपये के कुल प्रोत्साहन भुगतान के साथ तीन श्रेणियों के तहत परियोजनाएं शामिल हैं।
- श्रेणी I, 4050 करोड़ के प्रावधान के साथ सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों के लिए है। वे वित्त पोषण सहायता के लिए प्रस्ताव पेश कर सकते हैं और तीन चयनित परियोजनाओं को अधिकतम 1350 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 15%, जो भी वीजीएफ के रूप में कम हो, प्राप्त होगा।
- श्रेणी II, ₹3850 करोड़ के साथ, निजी क्षेत्र और सरकारी सार्वजनिक उपक्रमों दोनों के लिए उपलब्ध है, जिसमें अधिकतम अनुदान 1000 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 15%, जो भी वीजीएफ के रूप में कम है।
- श्रेणी III, प्रदर्शन या लघु-स्तरीय परियोजनाओं के लिए ₹600 करोड़ आवंटित करती है, जिसमें प्रति परियोजना अधिकतम परिव्यय 100 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 15%, जो भी कम हो।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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कानपुर 29 जुलाई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में एनएसएस वालंटियर्स एवं अन्य छात्र छात्राओं को बजट 2024 में युवाओं के कौशल विकास , रोजगार एवं महिला सशक्तिकरण हेतु विशेष रूप से किए गए प्रावधानों पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें सभी वॉलिंटियर्स ने सक्रिय सहभागिता की तथा अपने-अपने विचार रखें। कार्यक्रम अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि आत्मनिर्भर भारत , मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया , एवम् स्किल इंडिया आदि योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए छात्राओं को बताया गया कि किस प्रकार से युवा खासकर महिलाएं एवं युवतियां किस प्रकार से , कहां से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं तथा अपना रोजगार (स्टार्टअप) प्रारंभ कर स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं तथा अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर देश के आर्थिक विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
कानपुर 26 जुलाई, भारतीय स्वरूप संवाददाता, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आज दिनांक 26 जुलाई 2024 को एन एस एस वॉलिंटियर्स के द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा जागरूकता अभियान चलाकर नशा मुक्त भारत बनाने का संदेश आम जन जन तक पहुंचाया गया। इस अवसर पर छात्राओं ने स्लोगन राइटिंग, डिबेट पोस्टर मेकिंग आदि प्रतियोगिताएं की। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो वंदना निगम तथा सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। वॉलिंटियर्स के द्वारा लोगों को नशे से होने वाली हानि जैसे रोड एक्सीडेंट्स तथा गंभीर रोगों कैंसर , टीवी, फेफड़ों के अन्य रोग, त्वचा संबंधी रोग तथा विभिन्न प्रकार की एलर्जी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी गई ।
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, “भारतीय मजदूर संघ” के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर 23 जुलाई को निर्माणी गेट पर कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारतीय मजदूर संघ की स्थापना के संबंध में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर ऑर्डनेन्स पैराशूट निर्माणी कानपुर के गेट पर सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ के महासचिव श्री साधू सिंह ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ के स्थापना के पूर्व कई ट्रेड यूनियन संगठन देश में कार्य कर रहे थे लेकिन यह श्रम संगठन कर्मचारियों के बीच में राष्ट्रीय विचारधारा से अलग हो चुके थे। कुछ संगठन अंतर्राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत थे और एक संगठन सरकार का पिछलग्गू था। ऐसे में कर्मचारियों में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रेरित करने हेतु एक गैर राजनीतिक संगठन की आवश्यकता थी। इसी भावना को लेकर 23 जुलाई 1955 को भोपाल में भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की गई। स्थापना के समय केवल नौ लोग ही इसके संस्थापक थे। भारतीय मजदूर संघ ने शून्य से अपना काम प्रारंभ किया आज भारतीय मजदूर संघ पहले स्थान पर प्रतिस्थापित है और राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारतीय मजदूर संघ किसी राजनीतिक विचारधारा से ओतप्रोत नहीं है। कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर निरंतर अपना कार्यक्रम चला रहा है। आज भारतीय मजदूर संघ की सभी उद्योगों में और सभी प्रदेशों में यूनियन और महासंघ कार्यरत है।
दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के स्वयंसेवकों द्वारा एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत वृहद पौधारोपण किया गया । इस वर्ष की थीम “पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ” के आधार पर समस्त वॉलिंटियर्स एवं प्राध्यापिकाओं ने पौधारोपण करते हुए निरंतर प्रयास से पेड़ो को बचाए रखने हेतु संकल्प लिया । इस अवसर पर उच्च शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार मातृ वाटिका का निर्माण भी किया गया। लगाए गए पौधों में मुख्यतः सागौन , आम , जामुन इमली, नीम , पीपल , पाखड़ , नींबू इत्यादि रहे। इस अवसर पर कुछ पौधे मातृ वाटिका में लगाए गए तथा कुछ पौधे छात्राओं को वितरित किए गए ताकि वह अपने घर, आंगन या प्रांगण में वह पौधा लगाकर उसकी रक्षा करें तथा उसे पाल पोसकर बड़ा करें।