पिछले कुछ समय से मौजूदा राजनीति ने लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचा रखी है। जिन वादों से सत्तायें हासिल की जातीं हैं उन्हीं वादों की धज्जियां सरकारें सरेआम उड़ाती है।
महिला सुरक्षा:- समाज में महिला सुरक्षा एक अहम मुद्दा है। जब सरकार यह वादा करती हैं कि बहू बेटियां निडर होकर रास्तों पर निकलेंगी तब वहीं यह देखने सुनने को मिलता है कि किसी सत्ताधारी दल के नेता या फिर किसी मंत्री के बेटे ने एक महिला के साथ दुष्कर्म किया और फिर हत्या कर दी। इस तरह के अपराध समाज में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं एसिड फेंकना, हत्या करना, जिन्दा जला देना, यौन हिंसा, जबरदस्ती वेश्यावृत्ति जैसे अपराध बढ़ते जा रहे हैं। लड़कियां, महिलाएं निडर होकर बाहर निकलने से डरती है। इन दिनों लव जिहाद जैसे मामले ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। और तो और महिला नेता, सांसद भी अब आपत्तिजनक फब्तियों से नहीं बच पाती हैं। महिलाएं लड़कियों के अलावा छोटी छोटी बच्चियां भी सुरक्षित नहीं है। यह घटनाएं रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी हैं।
युवावर्ग:- आज का युवा वर्ग कॉलेज में पढ़ने से ज्यादा नेतागिरी और नारेबाजी ज्यादा समय व्यतीत करता है। जहां देश के टाप-100 अमीरों की आमदनी के बराबर समूचे देश के 70 फीसद लोगों के आय हो, शिक्षा तो दूर लगभग एक तिहाई आबादी साक्षर भी नही है। मुफ्त का राशन, फ्री चीजों की लालसा और सुनहरे भविष्य का आश्वासन उन्हें शिक्षा से दूर कर रहा है। किसी भी देश का विकास उसकी शिक्षा पर आधारित है। भ्रष्ट अधिकारी और बिचौलियों द्वारा पेपर लीक करवा देना मेहनतकश बच्चों के साथ अन्याय है। प्रशासन व्यवस्था भी इस मामले पर आंखें मूंदे हुये रहती है।
धार्मिक उन्माद :- धर्म वो अफीम है जिसे चखने पर इसका नशा जल्दी उतरता नहीं है बल्कि और गहरा होता जाता है। कहीं पढ़ा था कि देश और धर्म को अलग रखा जाना चाहिए। अगर धर्म देश और समाज पर हावी हो गया तो उस देश का पतन निश्चित है। आज के परिदृश्य में यह बात सटीक बैठती है। धार्मिक होना, आस्थावान होना गलत नहीं है मगर अंधभक्ति में डूब कर सही गलत का फर्क ना कर पाना गलत है। आज ज्यादातर सरकारें धर्म का चोला पहनकर राजनीति करती है और मुद्दों से लोगों को भटका कर वोट की राजनीति कर रही है। धर्म से आगे लोग कुछ सोचना समझना नहीं चाहते। इसके आगे सारे मुद्दे फीके पड़ जाते हैं। मुफ्तखोरी, फ्री का लालच देकर जनता को अपाहिज बना दिया जा रहा है। यह मुफ्तखोरी आदमी को आगे बढ़ने और जुबान खोलने से रोकती है। आखिर क्यों चाहिए मुफ्त बिजली, राशन? जनता मुद्दों पर क्यों नहीं बात करती? सरकार से सवाल क्यों नहीं करती? जो वादे किए गए हैं ठंडे बस्ते में क्यों जा रहे है? क्यों नहीं कहती कि हमें फ्री चीजें नहीं चाहिए? हमें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराओ।
दबंगई:- चाहे पुलिस अधिकारी हो या नेता अपना दबदबा कायम रखने के लिए यह लोग अराजकता फैलाते हैं। अक्सर जातिवाद के हथियार कौन अपनाकर अपना दबदबा और सियासत दोनों पर पकड़ मजबूत करते हैं। प्रशासन की सांठगांठ से जंगलराज फैलता जा रहा है। पीड़ितों की गुहार नजरअंदाज कर दी जाती है। शिकायत दर्ज कराने आए लोगों के साथ निंदनीय व्यवहार किया जाता है। रक्षक ही भक्षक बने फिर रहे हैं। सत्ता की हनक कानून को ठेंगा दिखा रही हैं।
स्वास्थ्य :- स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर नजर डालें तो स्वास्थ्य व्यवस्था प्रणाली बहुत ही खराब है। कोरोना का वक्त इस बात का सबूत है कि लोग किस तरह से अव्यवस्था और सुविधा के अभाव में मरे। यह माना कि स्थिति नियंत्रण के बाहर थी फिर भी यदि पहली लहर से ही सावधान हो जाते तो इतनी मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ता। डॉक्टरों ने भी आपदा में अवसर का लाभ उठाया। इस बुरे दौर में संवेदनाएं मर चुकी थी और जीवन का मूल्य खत्म हो गया था। ऐसी ही अव्यवस्था कुछ समय पहले दिखी थी जब अस्पताल में बच्चे ऑक्सीजन की कमी से मर गए थे और यह बयान आया था कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं। व्यक्ति का नैतिक कितना पतन हो गया है, जो बच्चों के लिए ऐसी मानसिकता रखते हैं।
मीडिया:- विगत कुछ समय से मीडिया भी निष्पक्ष नहीं रह पा रही है। एक वक्त था जब मीडिया घटनाओं की जानकारी अपनी जान जोखिम में डालकर सच बयान करती थी। आजकल चाटुकारिता का बोलबाला है और इसी चाटुकारिता के बल पर लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं। जिसकी भी हां में हां मिला हो वही बड़ा पत्रकार, न्यूज़ चैनल, एंकर होते हैं। एक भटकाव है कि मीडिया क्या सच कह रही है और क्या झूठ कह रही है।
स्थिति बदलने के बजाय बदलाव का सिर्फ ढोल पीटा जा रहा है। लोगों की सबसे कमजोर नस दबाकर उन्हें आस्था व धर्म के नाम पर मुद्दों से भटकाया जा रहा है। भारत एक कल्याणकारी राज्य है। इसलिए कमजोर वर्ग की सहायता की ही जानी चाहिए। लेकिन, हर वर्ग को मुफ्त की रेवड़ी बांटना भी कतई तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता। दुर्भाग्य से इसमें सभी राजनीतिक दलों में सिर्फ होड़ ही दिख रही, जनता की वास्तविक पीड़ा को समझने की नीयत नहीं। राजनेताओं बल्कि मेनस्ट्रीम मीडिया, इनके आईटी सेल से लेकर कार्यपालिका (यानी अफसरशाही) तक एक महामारी की तरह फैल चुकी है। इसी का नतीजा है कि दावों के विपरीत महिला, युवा, व्यापारी, नौकरी पेशा, किसान, मजदूर सभी वर्ग परेशान हैं। ~प्रियंका वर्मा महेश्वरी
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कानपुर 23 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज के जन्तु विज्ञान विभाग मे विश्व राइनोसरस दिवस के उपलक्ष में पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉ.) सुमन एवं मुख्य अतिथि एवं जज, पी.पी. एन कॉलेज के जन्तु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने द्वीप प्रज्वलन करके किया।
विषय की जानकारी देते हुए जन्तु विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिवांगी यादव ने बताया कि विश्व राइनो दिवस का महत्व और उसका संरक्षण कितना आवश्यक है। डॉ. शैल वाजपेयी ने मुख्य अतिथि एवं जज का परिचय दिया।
कानपुर 17 सितंबर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एसएन सेन महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के परामर्श केंद्र द्वारा दिनांक 16.09.22 को एक भाषण प्रतियोगिता एवं व्याख्यान का आयोजन “आत्महत्या रोकथाम सप्ताह ” के अंतर्गत किया गया, कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन से हुआ दीप प्रज्वलन के पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ सुमन ने अपने आशीर्वचन से कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि वर्तमान समय में आत्महत्या एक गंभीर समस्या है इस तरह के कार्यक्रमों द्वारा हम छात्राओं को जागरूक करते हैं इसके दुष्परिणामों से ताकि वह आत्महत्या करने का कदम कभी ना उठाएं l इसके बाद मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मोनिका सहाय ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि आत्महत्या एक अभिशाप है और हम छोटे-छोटे प्रयासों के द्वारा इस समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं,
कानपुर 16 सितंबर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बा• वि• पी• जी• कॉलेज के विज्ञान संकाय में अंतरमहाविद्यालयीय मॉडल प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें 10 महाविद्यालयों ने प्रतिभाग किया।
कानपुर 15 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज, कानपुर में अंग्रेजी विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा निर्देशित स्वच्छता पखवाड़ा (०1-15 सितंबर 2022) के तत्वावधान में “Beat Plastic Pollution” विषय पर एक वेबीनार का आयोजन किया गया| कार्यक्रम का शुभारंभ अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापिका श्रीमती कोमल सरोज ने किया| अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) अलका टंडन ने विषय का परिचय दिया| महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ सुमन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं वक्ता रही| प्राचार्या महोदया ने अपने वक्तव्य में वर्तमान जीवन में प्लास्टिक के अतिशय प्रयोग पर प्रकाश डालते हुए एकल प्रयोग प्लास्टिक का बहिष्कार करने की बात कही| उन्होंने जीव, जंतुओं, नदियों एवं समुद्रों पर प्लास्टिक के भयानक दुष्प्रभाव को उजागर किया तथा कपड़े के बैग के प्रयोग पर जोर दिया| महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ निशा अग्रवाल ने आम जीवन में प्लास्टिक का प्रयोग न करने पर बल दिया| रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ गार्गी यादव ने प्लास्टिक के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाने की बात कही| शारीरिक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति पांडे ने प्लास्टिक के दुष्प्रभाव पर एक सुंदर कविता प्रस्तुत की| वनस्पति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ प्रीति सिंह ने गाय एवं मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्लास्टिक के परस्पर दुष्प्रभाव पर पीपीटी प्रस्तुत किया| समाजशास्त्र की डॉ मीनाक्षी व्यास ने प्रत्येक व्यक्ति को भावी पीढ़ी के भविष्य हेतु स्वयं प्लास्टिक का प्रयोग न करने का प्रण लेने की बात कही| शिक्षा विभाग की श्रीमती रिचा सिंह ने गाय एवं समुद्री जीव के कल्याण हेतु सरकार के प्रयास के बारे में हमें जागरूक किया| इस वेबिनार में महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया| श्रेया दीक्षित और ओमाक्षी पंडित ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये।अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ पूजा गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया|
हम गुलाम इसलिए हुए क्योंकि हमने अपने देश मे विदेशियों को आने दिया वो तो चले गये लेकिन उनकी भाषा का जाल इस कदर फैला है ।जिस वजह से हम आज हिन्दी दिवस मना रहे । कभी सुना है इंग्लिश डे मनाते हुए नही न? तो अपने देश अपनी भाषा का सम्मान करें जन जन मे यह जागरूकता फैलाए कि हिन्दी पढना ,बोलना ,लिखना आना ही चाहिए । अब बात ये है कि हम हिन्दुस्तानी अपनी ही भाषा हिन्दी को दिवस के रूप मे मनाने कि क्या जरूरत आ पड़ी? क्या हम मजबूर हैं अपने ही देश अपनी मात्र भाषा को बोलने ,पढने ,लिखने मे ? भाषा कोई त्योहार नही जो कुछ दिन मना कर हम भूल जायें।इसलिए मनाए नही इसे अपने जीवन मे गर्व से शामिल करें 💐🙏अपर्णा सिंह लखनऊ
भारतीय स्वरुप संवाददाता, विगत दिवस सर्व जागरूक संगठन की जिला अध्यक्ष व किरण क्लासेस की फाउंडर किरण बजाज को पैरामाउंट इंटरनेशनल स्कूल दिल्ली में शिक्षा रत्न सम्मान से नवाजा गया। परिवार के फाउंडर राजू गावरी को गेस्ट ऑफ ऑनर मिला, जिस तरह आज चारों तरफ शिक्षा के क्षेत्र में आशातीत प्रयास हो रहे हैं उसी तरह से जीनियस ब्रेन एवं एचआरडी मिशन में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए जीत तोड़ प्रयास कर रहे हैं, जिस प्रकार एक राष्ट्र के लिए पैसे व इकनोमिक की महत्वता होती है वह तभी प्राप्त हो सकती है जब वह शैक्षिक रूप से मजबूत हो
हमारे देश के अध्यापक राष्ट्र के निर्माण के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं आज पैरामाउंट इंटरनेशनल स्कूल दिल्ली के प्रांगण में जीनियस ब्रेन विद एचआरडी मिशन ने शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयास कर रहे एनजीओ, स्कूल, प्रिंसिपल, एजुकेटर को शिक्षा रत्न प्रदान करते हुए आज देश के राष्ट्र निर्माता यानी शिक्षक को सम्मानित किया गया| सर्व जागरूक संगठन व किरण क्लासेस की फाउंडर किरण बजाज जो कि बहुत से पिछड़े वर्ग के बच्चों व फिजिकल चैलेंज बच्चों को उठाने का निरंतर प्रयास कर रही हैं| उन्हें उनके सराहनीय प्रयास के लिए सम्मानित किया गया| वहीं हम सब साथ सम्मिलित परिवार जो कि एक ऐसा परिवार है जो तारक मेहता का उल्टा चश्मा से इंस्पायर्ड हुआ है| परिवार की ताकत को समझता हुआ वसुदेव कुटुंबकम को साबित करता है |जहां एक तरफ परिवार एकल हो रहे हैं और अपना मूल्य खो रहे हैं वही हम सब साथ सम्मिलित परिवार जो कि बढ़ चढ़कर परिवारिक रुप को महत्व देता हुआ सबका साथ व सबके विकास को सिद्ध करता हुआ आगे बढ़ रहा है| इनके फाऊंडर राजू गावरी जी जो कि सर्व जागरूक संगठन में भी सराहनीय कदम उठा रहे हैं| बाकी पूरे देश में से 100 स्कूल के शिक्षक वहां पर उपस्थित रहे| गुजरात से दिल्ली से सिरसा से हरियाणा से पंजाब से चंडीगढ़ से बहुत सारे जिलों से शिक्षक पहुंचे| वहां हम सब साथ सम्मिलित परिवार व सर्व जागरूक संगठन की टीम और किरण बजाज जिला अध्यक्ष व राजू गावरी फाउंडर चेयरपर्सन ऑफ हम सब साथ सम्मिलित परिवार, संदीप दीक्षित जी, प्राची अरोड़ा , मीना रानी जी, नीरज मलिक , कुसुमलता राठौर भी उस मौके पर मौजूद रहे
कानपुर 10 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज कानपुर में उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार शिक्षक दिवस के परिप्रेक्ष्य में दिनांक 5 सितंबर 2022 से 9 सितंबर 2022 तक मनाए जा रहे शिक्षक पर्व के पांचवे और अंतिम दिवस का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव एवम् प्रथम विशिष्ट अतिथि श्री प्रोबीर कुमार सेन, संयुक्त सचिव एवम् द्वितीय विशिष्ट अतिथि श्री शुभ्रो सेन, कोषाध्यक्ष एवम् आज की मुख्य अतिथि श्रीमति दीपाश्री सेन,
आज के कार्यक्रम की अध्यक्षा एवम् प्राचार्या प्रो. सुमन, समापन सत्र प्रभारी प्रो. निशी प्रकाश एवम् शिक्षक पर्व प्रभारी प्रो. रेखा चौबे ने मां सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के द्वारा किया। श्रीमति ऋचा सिंह ने अपनी मधुर वाणी में सरस्वती वंदन कर सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंचासीन अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ के द्वारा किया गया। प्रो. निशी प्रकाश ने स्वागत उद्बोधन दिया एवम् प्रो. रेखा चौबे ने पंच दिवसीय शिक्षक पर्व के अन्तर्गत संपादित कार्यक्रम – संकाय शिक्षकों का अभिवादन, अतिथि व्याख्यान, आशुवाचन प्रतियोगिता, वेबीनार, पोस्टर प्रदर्शनी, पुस्तक वाचन एवम् पैनल चर्चा आदि को समग्र रूप से सदन में प्रस्तुत किया जिसे श्रीमति रोली मिश्रा द्वारा एक वीडियो में संग्रहित कर प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम श्रृंखला में आज छात्राओं हेतु लघु चल चित्र प्रदर्शन में शैक्षिक फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई जिससे सभी छात्राएं आनन्दित थीं।
कानपुर 8 सितंबर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस .एन. सेन बी. वी.पी.जी.कॉलेज, कानपुर में 5-09-2022 से 9 -09-2022 तक मनाए जाने वाले शिक्षक पर्व के चौथे दिन आज दिनांक 8 सितंबर 2022 को ‘ गुरु शिष्य संबंधों की वर्तमान शिक्षा नीति 2020 के परिदृश्य में प्रासंगिकता’ विषय पर पैनल चर्चा की गई जिसमें महाविद्यालय की शिक्षिकाओं और छात्राओं ने भाग लिया।
पैनल चर्चा में शामिल मुख्य सदस्य थे- कैप्टन ममता अग्रवाल,श्रीमती किरण,डॉ. प्रीति पांडे, प्रोफेसर मीनाक्षी व्यास, ,डॉ .प्रीति सिंह, डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ. संगीता सिंह,डॉ. शिवांगी यादव, डॉ.अमिता। सर्वप्रथम शिक्षक पर्व कार्यक्रम की प्रभारी डॉ. रेखा चौबे एवं अतिथिगण डॉ अलका टंडन, डॉ.गार्गी यादव, डॉ. निशा अग्रवाल ने सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम प्रभारी डॉ चित्रा सिंह तोमर ने गुरु को मां के समान बताया। कैप्टन ममता अग्रवाल जी ने प्राचीन वैदिक काल के गुरुकुल शिक्षा प्रणाली पर बल देते हुए तकनीकी परिवर्तन के महत्व को भी स्वीकारा। श्रीमती किरण ने बताया कि गुरु शिष्य परंपरा तभी संभव है जब गुरु के अंदर करुणा और शिष्य के अंदर विनम्रता का भाव हो। प्रोफेसर मीनाक्षी व्यास ने शिक्षक के महत्व को बताते हुए कहा कि आधुनिकता और परंपरा का समन्वय ही भारत को थिंक टैंक के रूप में विकसित कर सकता है। डॉ प्रीति पांडे ने NEP 2020 की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक -छात्र का संबंध किस तरह से हो कि छात्र गुरु से ज्ञान प्राप्त करें और समाज में आत्मनिर्भर बन सकें।डॉ. प्रीति सिंह ने बताया कि तकनीकी का प्रयोग करके शिक्षक अपने ज्ञान का हस्तांतरण दूर बैठे छात्र को कर सकता है।डॉ संगीता सिंह ने प्रश्न उठाया की आख़िर ऐसा क्या किया जाए की छात्र औपचारिक संस्थाओं में आए और हम शिक्षकों से जुड़ाव महसूस करे।डॉक्टर पूजा गुप्ता ने गुरु शिष्य परंपरा पर बल देते हुए कहा कि न केवल गुरु शिष्य को ज्ञान देता है बल्कि शिष्य भी नई तकनीकी को सीखने में गुरु की मदद करता है।डॉ. अमिता सिंह ने बताया की सिखाने के लिए आवश्यक नही है की हमें कोई गुरु ही सिखाए, हम जीवन अनुभवों से भी सीख सकते है। डॉक्टर शिवांगी यादव ने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए गुरु और शिष्य के महत्व पर प्रकाश डाला।प्राचार्य डॉ. सुमन ने इस कार्यक्रम के आयोजन की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए शिक्षक और छात्र के संबंध में आई दूरी को वजह बताया उन्होंने सभी छात्रों को शिक्षक के सहयोग से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम प्रभारी डॉ चित्रा सिंह तोमर ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया ।
कानपुर 7 सितंबर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज की एनएसएस इकाई के द्वारा पोषण एवं स्वास्थ्य के तहत मनाए जाने वाले *’राष्ट्रीय पोषण सप्ताह’* के अंतर्गत एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें रीजेंसी हॉस्पिटल से डॉ० जया अग्रवाल ने कुपोषण, उससे होने वाली बीमारियों, संतुलित आहार और पोषण के महत्व के बारे में अवगत कराया। प्राचार्य प्रो. सुनंदा दुबे ने रीजेंसी अस्पताल से आई टीम का स्वागत करते हुए भारत सरकार के द्वारा पोषण पूर्ति व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे अभियान *पोषण माह* की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम का संचालन भूगोल विभाग की असि. प्रो. डॉ अंजना श्रीवास्तव ने तथा धन्यवाद एनएसएस प्रभारी डॉ संगीता सिरोही ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. साधना सिंह, कु० श्वेता गौड़, आकांक्षा अस्थाना एवं सभी छात्राओं ने सक्रिय प्रतिभागिता की।