कानपुर 16 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय, स्वरूप नगर कानपुर में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) इकाई (सीनियर विंग) का समारोह आयोजित किया गया l जिसमे स्नातक कला, विज्ञान एवं वाणिज्य की प्रथम सेमेस्टर की छात्राओं ने प्रतिभाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ. पूनम विज़ ,कमांडिंग ऑफिसर कर्नल वेंकटेशन, मेज़र भावना, सचिव डॉ. डी.सी. गुप्ता जी के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया गया। प्राचार्या ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुक्छ एवम शब्द सुमनो द्वारा स्वागत किया तथा महाविद्यालय में राष्ट्रीय कैडेट कोर इकाई के शुभारंभ पर कर्नल वेंकटेशन आर एवं उनकी टीम के सहयोग की सराहना की तथा बताया कि कैसे यह कोर्स महाविद्यालय की छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए छात्राओं को बधाई भी दी। कर्नल वेंकेटशन आर एवम मेज़र भावना लोहनी ने छात्राओं को बताया कि जीवन में अनुशासन की महत्ता क्या है तथा नेशनल कैडेट कोर के कारण कैसे व्यक्तित्व में प्रभावशाली बनता है। प्रिया मालवीय के कुशल निर्देशन में छात्राओं ने गीत एवं नृत्य कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में छात्राओं की शारीरिक एवं मानसिक दक्षता परीक्षण के आधार पर उनका चयन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ आंचल तिवारी ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कैडेट कोर की प्रभारी डॉ. सोनम सिंह, सह-प्रभारी नेहा सिंह, डॉ स्निग्धा मिश्र, डॉ शालिनी गुप्ता, नम्रता भट्टाचार्या, ऋतु नारंग एवम अन्य शिक्षिकाएं तथा छात्राएं उपस्थित उपस्थित रहीं।
महिला जगत
हिंदी भाषा का महत्व
हमारा देश विविध भाषाओं वाला देश है। हर प्रांत की अपनी एक बोली है, महत्व है फिर भी हिंदी एक ऐसी भाषा है जो सभी जगह आपसी संवाद के लिए सुगम्य है और अधिकांश लोगों द्वारा बोली जाती है और समस्त भारत में आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक संपर्क के माध्यम के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। सुमित्रानंदन पंत ने कहा था कि “हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिसके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। “हर साल में विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन भारत में 14 सितंबर को होता है।अलग-अलग तारीखों पर हिंदी दिवस मनाने का क्या औचित्य? विश्व हिंदी दिवस और राष्ट्रीय हिंदी दिवस में क्या अंतर है? हालांकि दोनों का उद्देश्य हिंदी का प्रसार करना ही है फिर भी दोनों में यह अंतर क्यों? यह अंतर भौगोलिक स्तर पर है और राष्ट्रीय हिंदी दिवस भारत में हिंदी को आधिकारिक दर्जा प्राप्त होने की खुशी में मनाया जाता है तो वहीं विश्व हिंदी दिवस दुनिया में हिंदी को वही दर्जा दिलाने के प्रयास में मनाया जाता है। पहला हिंदी दिवस नागपुर में 10 जनवरी 1974 में मनाया गया था। यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर का था, जिसमें 30 देश के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। आजादी के बाद हिंदी को राजभाषा बनाने के लिए कई बहसें हुईं। अहिंदी भाषी राज्य हिंदी को राजभाषा मानने के पक्ष में नहीं थे। दक्षिणी राज्य के लोग इसे अपने साथ अन्याय मान रहे थे इसलिए हिंदी भाषा राज्यों का विरोध देखते हुए संविधान निर्माता ने हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा दे दिया और इस तरह 1953 को राजभाषा प्रचार समिति वर्धा ने 14 सितंबर को भारत में हिंदी दिवस मनाने का प्रस्ताव दिया।
हालांकि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा हासिल नहीं है। राजभाषा और राष्ट्रभाषा का अंतर लोग जल्दी से समझ नहीं पाते हैं। पहला अंतर इन्हें बोलने वाली संख्या से और दूसरा अंतर इनके प्रयोग करने का है। राष्ट्रभाषा जनसाधारण की भाषा होती है और राजभाषा सरकारी कार्यालय और सरकारी कर्मियों के द्वारा उपयोग में लाई जाती है। कुछ देशों में राजभाषा और राष्ट्रभाषा एक ही है लेकिन बहुभाषी देश में राजभाषा राष्ट्रभाषा अलग-अलग होती है। राष्ट्रभाषा किसी देश को एक करने के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि महात्मा गांधी ने वर्ष 1917 में गुजरात के भरूच में हुए गुजरात शैक्षिक सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की वकालत की थी- “भारतीय भाषाओं में केवल हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जिसे राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाया जा सकता है क्योंकि यह अधिकांश भारतीयों द्वारा बोली जाती है; यह समस्त भारत में आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक सम्पर्क माध्यम के रूप में प्रयोग के लिए सक्षम है तथा इसे सारे देश के लिए सीखना आवश्यक है।”
पूरे विश्व में 150 से अधिक देशों में फैले 2 करोड़ भारतीयों द्वारा हिंदी बोली जाती है इसके अलावा 40 देशों में 600 से अधिक विश्वविद्यालय और स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा मंदारिन है तो दूसरा स्थान हिंदी का आता है। यूनेस्को की मान्यता वाली सात भाषाओं में एक भाषा हिंदी है। आज हिंदी भाषा इस समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अब तक यह रोजगार की भाषा नहीं बन पाई है। आज तमाम मल्टीनेशनल कंपनियां के दैनिक कामकाज का प्रबंधन, संचालन का माध्यम अंग्रेजी है और अपनी निजी हितों को साधने के लिए सामाजिक और राजनीतिक संगठन भी हिंदी का विरोध करते हैं। अभी भी भारत में उच्च शिक्षा का माध्यम भी अंग्रेजी ही है। आज भी हिंदी की जागरूकता के लिए सम्मेलनों का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल से हिंदी भाषा को बढ़ावा मिल रहा है। गूगल के अनुसार भारत में अंग्रेजी भाषा में जहां विषय वस्तु निर्माण रफ्तार 19% है तो हिंदी के लिए यह आंकड़ा 94% है। भाषा वही जीवित रहती है जिसका प्रयोग जनता करती है। भारत में लोगों के बीच संवाद का सबसे बेहतर माध्यम हिन्दी है। इसलिए इसको एक-दूसरे में प्रचारित करना चाहिये।
चूंकि बहुसंख्यक भारतीय उपभोक्ता हिंदी भाषी हैं और बाजार में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां चलाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है, जिसके कारण इंटरनेट पर ज्यादातर सामग्री हिंदी में उपलब्ध करवाई जा रही है। यह भी हिंदी के विस्तार में मुख्य भूमिका निभा रहा है। इंटरनेट पर हिंदी सामग्री की मांग 5 गुना ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। स्मार्टफोन में औसतन एप्लीकेशंस 25 प्रतिशत हिंदी में हैं। कम्प्यूटर में लिखने के लिए हिंदी के विभिन्न फॉन्ट्स तथा टूल्स विकसित किए गए हैं। स्मार्टफोन में हिंदी के कुंजीपटल उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल इंटरनेट पर सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन सेवाओं में हिंदी लिखने के लिए किया जा सकता है।
बावजूद इसके आज सोशल मीडिया पर हिंदी का उपयोग जिस टूटे-फूटे अंदाज में किया जा रहा है, वह चिंतनीय विषय है। इससे भाषा का स्वरूप व सुंदरता ही समाप्त हो जाती है। एक समय वह था, जब स्कूली शिक्षा की शुरुआत हिंदी माध्यम से होती थी और दूसरी ओर वर्तमान की स्थिति है जहां इसकी शुरुआत अंग्रेजी से होती है। भाषा वही जीवित रहती है जिसका प्रयोग जनता करती है। भारत में लोगों के बीच संवाद का सबसे बेहतर माध्यम हिन्दी है। इसलिए इसको एक-दूसरे में प्रचारित करनी चाहिए ताकि हिंदी को सेमिनार और सम्मेलनों का सहारा ना लेना पड़े।
~प्रियंका वर्मा महेश्वरी
एस एन सेन बालिका विद्यालय पी .जी .कॉलेज में प्रायोजनमूलक हिंदी का वैश्विक महत्व विषय पर व्याख्यान एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित
कानपुर 14 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी .जी .कॉलेज कानपुर के हिंदी विभाग ने वर्तमान में प्रायोजनमूलक हिंदी का वैश्विक महत्व विषय पर एक व्याख्यान एवं भाषण प्रतियोगिता करवाई कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता प्रोफेसर सुमन सिंह हिंदी विभाग दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर, प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार मिश्रा ,सचिव प्रोबीर कुमार सेन, संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन, महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुमन ,समाजशास्त्र विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर निशि प्रकाश, प्रमुख अनुशासक कप्तान ममता अग्रवाल तथा हिंदी विभाग की प्रभारी डॉक्टर शुबा बाजपेई ने दीप प्रज्वलन कर किया।
वर्तमान में भारत के अमृतकाल प्रयोजनमूलक हिंदी का वैश्विक महत्व विषय पर मुख्य वक्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के दौरान विश्व श्रृंखल भारत को एक सूत्र में बांधने का कार्य भी हिंदी नहीं किया था ।विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक छोटे से कालखंड में हिंदी को जो अहर्ता और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई वह अकल्पनीय है ।महाविद्यालय की प्राचार्य जी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि आज हिंदी जीवकोपार्जन से जुड़े सभी कार्य -व्यापारो के मध्य की भाषा बन गई है और यही उसकी प्रयोजनपरकता है ।वह प्रशासन, शिक्षा, उद्योग ,व्यापार विज्ञान की भाषा बन गई है। तब एक राष्ट्र ,एक भाषा की बात हो वहां हिंदी की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है ।प्रबंध तंत्र समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार मिश्रा जी ,सचिव प्रोबीर कुमार सेन ,संयुक्त सचिव सुब्रोसेन तथा प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने मुख्य वक्ता प्रोफेसर सुमन सिंह को विघ्न विनाशक गणेश की प्रतिमा व प्रशस्ति पत्र स्मृति स्वरूप प्रदान किया ।प्रबंध तंत्र ने संयुक्त सचिव सुब्रोसेन से अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी हमारे देश की समन्वय की भाषा है और हमारी राजभाषा के सम्मान के लिए युवाओं को सक्रिय प्रयास करते रहने चाहिए। हमें अपनी हिंदी भाषा बोलने लिखने में गर्व करना चाहिए ।भाषण प्रतियोगिता के प्रतिभागी छात्राओं के नाम रेशमा ने प्रस्तुत किया जिसमें छात्राओं ने उत्साह के साथ प्रतिभाग किया इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्रवक्ता गण कर्मचारी गण एवं छात्रों को पुरस्कार स्वरूप पुस्तक एवं प्रमाण पत्र प्रबंध समिति एवं प्राचार्या द्वारा प्रदान किए गए कार्यक्रम का संचालन विभाग की प्रभारी डॉक्टर शुबा वाजपेई ने तथा आभार ज्ञापन समाजशास्त्र विभाग की विभागा अध्यक्ष प्रोफेसर निशी प्रकाश ने किया ।प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार हैं प्रथम स्थान अंशिका दीप बी ए प्रथम वर्ष।द्वितीय स्थान हिना बानो एम ए प्रथम वर्ष। तृतीय स्थान अमृता शुक्ला एम ए प्रथम वर्ष।
एस. एन. सेन बालिका महाविद्यालय में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया
कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बालिका महाविद्यालय में दिनाँक 09/09/2023 से दिनाँक 12/09/2023 तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया। इसीमें विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस (World First Aid Day) के अवसर पर छात्राओं हेतु एक कार्यशाला का आयोजन किया गया
जिसका संयोजन व संचालन महाविद्यालय की शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रोफेसर प्रीति पांडे तथा उनकी वैष्णवी रेंजर्स टीम के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन समारोह का शुभारंभ आज मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. सफर, प्राचार्य प्रोफेसर सुमन तथा प्रोफेसर प्रीति पांडेय द्वारा मां शारदे को माल्यार्पण कर किया गया। कार्यशाला में छात्रों को प्राथमिक चिकित्सा से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई कि किसी भी व्यक्ति को हार्ट अटैक के समय CPR देकर कैसे सुरक्षित किया जा सकता है, सड़क पर किसी घायल व्यक्ति की कैसे मदद की जा सकती है, जलने पर कैसे उपचार किया जाए की व्यक्ति की जान पर कोई खतरा न आए। इसी तरह की और व्यवहारिक जानकारियां छात्रों को दी गई| रेड क्रॉस मास्टर ट्रेनर और डिजास्टर मैनेजर लखन शुक्ला ने प्राथमिक चिकित्सा सहायता के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की पट्टियों को बाँधना सिखाया तथा आकस्मिकता में First Aid Use करने की विभिन्न प्रायोगिक विधियां छात्राओं को सिखाई| इस अवसर पर प्रीति तिवारी (लाइफ मेंबर रेड क्रॉस सोसाइटी), राम (सदस्य, रेड क्रॉस), तथा राम प्रकाश, (कार्यकर्ता) कार्य शाला में उपस्थित रहें। छात्राओं ने उत्साहपूर्ण सहभागिता की तथा समस्त शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं|
एस.एन. बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में एक निबंध प्रतियोगिता एवं ध्यान सत्र आयोजित
कानपुर 9 सितम्बर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन. बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज कानपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में एक निबंध प्रतियोगिता एवं ध्यान सत्र का आयोजन किया गया।
सर्वप्रथम मां सरस्वती जी की वंदना कर दीप प्रज्वलन किया गया। उक्त अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो० सुमन एवं कार्यक्रम के निर्णायक मंडल प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर एवं डॉक्टर संगीता सिंह अतिथि वक्ता के रूप में मनोज शुक्ला (आना पान सती ध्यान विशेषज्ञ) उपस्थित रहे। प्राचार्या जी ने कहा कि यह दिवस एक माध्यम है आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए। देश में आत्महत्या करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है इसीलिए ऐसे कार्यक्रम का बहुत महत्व है, ताकि उसकी रोकथाम समय पर हो सके निबंध प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के रूप में प्रो० चित्रा सिंह तोमर विभागाध्यक्षा शिक्षा शास्त्र एवं डॉ संगीता सिंह प्रवक्ता शिक्षा शास्त्र विभाग थे। निर्णय इस प्रकार रहा
प्रथम पुरस्कार -अमरीन बी. ए. प्रथम वर्ष
द्वितीय पुरस्कार-महिमा यादव बी.ए. द्वितीय वर्ष
तृतीय पुरस्कार- प्रिया वर्मा बी.ए. प्रथम वर्ष
सांत्वना पुरस्कार – अंशिका बाजपेई बी.ए. प्रथम वर्ष तथा संजोली गुप्ता बी.ए. द्वितीय वर्ष
सभी विजेता छात्रों को मेडल तथा सर्टिफिकेट वितरित हुआ इसके पश्चात श्री मनोज शुक्ला ने आना पान सती ध्यान करवाया। अंत में सबने अपने अनुभव साझा किये और ध्यान से संबंधित अपनी शंकाएं दूर किया इसके पश्चात मनोविज्ञान की अध्यक्षा डॉ मोनिका सहाय ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को ध्यान के लिए रोज समय निकालना बहुत जरूरी है ताकि हम मानसिक रूप से स्वस्थ रह सके । कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग विभाग की प्रवक्ताएं सुश्री प्रीति यादव, मयूरिका गुप्ता आदि का रहा।
एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज मे एक दिवसीय व्याख्यान आयोजित
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज के विज्ञान संकाय मे एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रबंध तंत्र के संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन प्राचार्या प्रो सुमन विशिष्ट अतिथि तिलक महाविद्यालय औरैया के प्राचार्य डा रवि कुमार तथा मुख्य वक्ता डॉ शशि बाला ने दीप प्रज्वलित करके किया एवं छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए किया। मंच का संचालन रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.गार्गी यादव ने किया। अतिथि वक्ता के रूप में रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की असिस्टैंट प्रोफेसर शशि बाला ने (Carbon capture and storage: A solution for environmental Carbon di oxide)कार्बन डाई आक्साइड के प्रपाशन एवं भंडारण के द्वारा ग्रीन हाउस गैसों से निपटने का एवं पर्यावरण को बचाने का मार्ग दिखाया , साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय में अभी उनका शोध कार्य चल रहा हैl
व्याख्यान से सभी छात्राओं मे जिज्ञासा एवं उत्साह दिखाई दिया। मंच पर आसीन सयुंक्त सचिव श्री शुब्रो सेन ने कार्यक्रम की प्रसंसा की। वनस्पति विभाग की विभागध्यक्ष डॉ प्रीति सिंह ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया साथ ही जंतु विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ शिवांगी यादव, वनस्पति विज्ञान की डॉ समीक्षा सिंह सहित महाविद्यालय की अन्य शिक्षका भी उपस्थित रहीं।
क्राइस्ट चर्च कॉलेज में सिविल सर्विसेज की तैयारी कैसे करें विषय पर कार्यक्रम आयोजित
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता आज क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में सिविल सर्विसेज की तैयारी कैसे करें विषय पर अवध ओझा के वक्तत्व का अयोजन कॉलेज के प्रचार्य जोसेफ डेनियल के दिशानिर्देशन में कैरियर काउंसिल सेल द्वारा आयोजित किया गया जिसकी संयोजिका प्रो मीत कमल है। कार्यक्रम में इकरा आईएएस के संस्थापक शाह फैसल एवं सदस्य सतेंद्र सिंह ,मयंक सिंह मोजूद रहे।
अवध ओझा सिर ने बताया बिना फाउंडेशन के कुछ नही हो सकता। आज के समय में जिसकी न्यूज पेपर में कमांड है वही आईएएस है। उन्होंने सबसे अच्छी बात कही की डर की आगे जीत नही डर के आगे डिप्रेशन है। पावर और अचीवमेंट जरूरी चीज है। एक प्रॉपर टाइम टेबल बनाओ जो सबसे ज्यादा जरूरी है। प्रैक्टिस इतनी गजब चीज है। शक्ति और उत्साह बहुत जरूरी है। ९८% लोग सेल्फ डिसीजन लेने की क्षमता नहीं रखते। जितने मानसिक ताकत होगी तो अच्छा रहेगा।
जीवन में सब चढ़कर यूटिलिटी पर ध्यान दो। ओझा सर ने चार मुख्य चीजों पर ध्यान देने को कहा पहला अवेयरनेस ,रिस्पेक्ट साधना और फाउंडेशन । उन्होंने बताया कि जहां विकल्प है वहां कन्फ्यूजन है।सफल होने के लिए क्वेश्चन फ्रेमिंग बहुत जरूरी हैं ।सिविल सर्विस एग्जाम में मीडियम कोई भी हो सफलता मिलती है ।इस कार्यक्रम में कॉलेज की उपप्राचार्या सबीना बोदरा, डॉ अंकिता जैस्मिन लाल , प्रो अरुणेश शुक्ला , प्रो आशीष दुबे , प्रो आशीष ओमर, प्रो मनीष कपूर , प्रो शालिनी कपूर एवम करियर काउंसलिंग सेल के छात्र प्रतिनिधि अंजली सचान,उज्ज्वल त्रिवेदी , प्राची गुप्ता , वैष्णवी दीक्षित, सुंदरम मिश्रा ,अभिषेक श्रीवास्तव , कृष्णा कनौजिया, विवेक पॉल, वीर मूर्ति मल्होत्रा ,यश विश्वकर्मा, अनुराधा शर्मा आदि का सहयोग रहा ।
कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में प्रदर्शनी आयोजित
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया ।जिसमे पेडिलाइट कंपनी के श्री अनिल मल्होत्रा द्वारा छात्राओं को लिप्पन कला को विस्तार पूर्वक करके दिखाया। कार्यक्रम प्रभारी प्रो.अनुपम कुमारी द्वारा बताया कि यह बहुत पुरानी कच्छ,गुजरात की पारंपरिक शिल्प कला है। जिसको गोबर, मिट्टी के मिश्रण से शीशे लगाकर बनाते है जो घर के अंदरूनी हिस्सों को ठंडा रखती है। छात्राओं को इस तरह की कलाओं को सीख कर अपने अंदर छिपी प्रतिभा को प्रदर्शित करने की तरफ प्रेरित किया। इस प्रदर्शन में महाविद्यालय की लगभग 20 छात्राओं ने भाग लिया।
कानपुर विद्या मन्दिर महिला महाविद्यालय में “रोजगार मेला” आयोजित
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर विद्या मन्दिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर’ कानपुर में मुख्यता छात्राओं के लिये “रोजगार मेला” का आयोजन किया गया। जिनमें स्कोप लाइफ, जीवाथम, ए एस वर्ड ग्रुप आदि विभिन्न कंपनियों ने लगभग 200 से अधिक वेकैंसी के लिये जॉब ऑफर की। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से सम्बद्ध विभिन्न महाविद्यालयों की छात्राओं ने जॉब के लिये इंटरव्यू दिए। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर पूनम विज़ ने कहा कि बेटियो को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारा महाविद्यालय हमेशा ही प्रतिबद्ध रहा है । समय समय पर छात्राओं को ट्रेनिंग देकर रोजगार मेले का आयोजन करते रहेंगे। आयोजन करते रहेंगे।कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रोफेसर निशा पाठक, प्रोफेसर अनुपमा कुमारी ,डॉ. आंचल तिवारी, महाविद्यालय की मीडिया प्रभारी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला ,डॉ. शालिनी गुप्ता , डॉ. रमा कटियार, डॉ. जसमीत कौर, निक्की वेदी, डॉ.सोनम सिंह, डॉ. स्निग्धा मिश्रा, सुश्री नम्रता भट्टाचार्य, सुश्री कल्पना देवी, डॉ. ऋतु नारंग, सुश्री नेहा सिंह आदि शिक्षिकाओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। रोजगार मेला में लगभग 300 छात्राओं ने जॉब के लिये इंटरव्यू दिए।
कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में शिक्षक संघ की नई कार्यकारिणी का गठन
कानपुर 9 सितम्बर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय मे शिक्षक संघ इकाई की नई कार्यकारिणी का चुनाव हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. निशा पाठक उपस्थित रहीं। शिक्षक संघ इकाई की पूर्व अध्यक्षा प्रो अनुपमा कुमारी ने नई कार्यकारिणी सदस्यों को शपथ दिलवाई । नई कार्यकारिणी में अध्यक्ष पद हेतु डॉ आंचल तिवारी,सचिव पद हेतु डॉ पूर्णिमा शुक्ला, कोषाध्यक्ष पद हेतु निक्की वेदी
ने शपथ ग्रहण की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो निशा पाठक ने शिक्षक संघ इकाई से निष्पक्षता और ईमानदारी से कार्य करने की अपेक्षा की। कार्यक्रम में महाविद्यालय शिक्षक संघ इकाई के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
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