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महिला जगत

डी जी कॉलेज में छात्राओं द्वारा असाइनमेंट आधारित व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता भूगोल विभाग, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में परास्नातक अंतिम वर्ष की छात्राओं का ग्रामीण भूगोल पर असाइनमेंट आधारित व्याख्यान का आयोजन भगोल विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शशि बाला सिंह के निर्देशन में सम्पन्न कराया गया। डॉ. शशि बाला सिंह द्वारा समन्वित ग्रामीण विकास पर पीपीटी द्वारा व्याख्यान हुआ । तथा परास्नातक अंतिम वर्ष की छात्राओं द्वारा ग्रामीण भूगोल की विभिन्न इकाइयों : ग्रामीण भूगोल का अर्थ, परिभाषा एवं विषय क्षेत्र; ग्रामीण भूगोल के प्रकार; समन्वित ग्रामीण विकास; ग्रामीण अधिवावासों के प्रकार एवं प्रतिरूप; ग्रामीण आधारभूत संरचना एवं सुविधाएं आदि विषयों पर छात्रा शिवांशी, शिखा, मानसी, प्रज्ञा, श्रेया एवं कृति आदि के द्वारा पीपीटी बनाकर अपना प्रेजेंटेशन दिया गया। व्याख्यान की संयोजिका डॉ. शशि बाला सिंह ने व्याख्यान विषय पर प्रकाश डाला । व्याख्यान में प्रार्चाया प्रो० अर्चना वर्मा ने छात्राओं को डिजीटल प्रस्तुतिकरण के लिए प्रेरित किया, विभाग की असिस्टेंट प्रो. डॉ. अंजना श्रीवास्तव एवं श्रीमती श्वेता गोंड का सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम में शोध छात्र सुभाष, विकास, अतुल, विपुल, दीक्षा मालवीया, कल्पना, नेहा, निधि, जयललिता तथा विभाग की समस्त छात्राएं उपस्थित रही।

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घरेलू स्त्रियों का बायोडाटा नहीं होता.

घरेलू स्त्रियों का बायोडाटा नहीं होता….
उनकी तालीम और डिग्रियां कहीं धूल में सनी,
गर्द में दब जाती है….

वह खुद भूल जाती है कि उन्होंने तालीम हासिल की है
उन्हें याद रहता है बस पत्नी, बहू और मां की हासिल की हुई डिग्रियां

हर एक में अव्वल आना उनकी जिम्मेदारी है..
उनका कागजों का कोई औचित्य नहीं
जो ‘कागज’ कमा ना सके….

बहू के संस्कार से लेकर मां के संस्कार तक की तालीम में पीएचडी तो हो ही जाती है
यह जुदा है की ‘कमियां’ तो फिर भी रही जाती है…

अनपढ़, गंवार और तुम्हें कुछ मालूम नहीं है की डिग्रियां घर से ही मिल जाती है
इसीलिए उनका ‘बायोडाटा’ नहीं बस घरेलू स्त्री ही कहलाती है…

प्रियंका वर्मा माहेश्वरी 

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कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय कानपुर में ‘ स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के अंतर्गत स्मार्टफोन वितरित किए गए

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय कानपुर में ‘ स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के अंतर्गत सत्र 2023- 2024 की स्नातक षष्ठम सेमेस्टर एवं सत्र 2022 – 2023 की स्मार्टफोन हेतु शेष रह गई स्नातक तृतीय वर्ष की अर्ह छात्राओं को स्मार्टफोन का वितरण किया गया । कुल 244 छात्राओं को स्मार्टफोन वितरित किए गए।उत्तर प्रदेश शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़कर उन्हें अधिक सशक्त एवं जागरूक बनाना है जिससे छात्राएं पढ़ाई के माध्यम से हर ऊंचाइयों को छू सकें। स्मार्टफोन न केवल छात्राओं की सीखने की क्षमता को बढ़ाता है अपितु उन्हें अपने भविष्य के लिए तैयार करने में भी मदद करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो.पूनम विज जी ने सर्वप्रथम प्रबंध समिति के सचिव महोदय डॉ.डी .सी .गुप्त जी का स्वागत किया एवं छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि स्मार्टफोन /टैबलेट का सकारात्मक तरीके से उपयोग किया जाए तो यह हमें शिक्षित एवं जागरूक बनाते हैं जिससे हम हर क्षेत्र में लाभान्वित हो सकते हैं। सचिव महोदय एवं प्राचार्या जी के द्वारा छात्राओं को स्मार्टफोन प्रदान किए गए । छात्राएं स्मार्टफोन प्राप्त कर हर्षोल्लास के साथ झूम उठीं।
महाविद्यालय की प्रो.निशा पाठक , प्रो.अनुपमा कुमारी ,डॉ.आंचल तिवारी ,डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, श्रीमती निक्की वेदी ,डॉक्टर सोनम सिंह इत्यादि समस्त शिक्षिकाओं एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सहयोग से स्मार्ट फोन वितरण कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संयोजन व संचालन उक्त योजना की नोडल अधिकारी सुश्री कल्पना देवी(असिस्टेंट प्रोफेसर ,हिंदी विभाग )द्वारा किया गया ।

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सुश्री शेफाली शरण ने पत्र सूचना कार्यालय के प्रधान महानिदेशक का पदभार संभाला

सुश्री शेफाली बी. शरण ने कल श्री मनीष देसाई की सेवानिवृत्ति के बाद आज पत्र सूचना कार्यालय के प्रधान महानिदेशक का पदभार ग्रहण कर लिया है। सुश्री शरण भारतीय सूचना सेवा के 1990 बैच की अधिकारी हैं।

तीन दशकों से अधिक के अपने शानदार करियर के दौरान, उन्होंने वित्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा सूचना और प्रसारण जैसे मंत्रालयों के लिए पत्र सूचना कार्यालय अधिकारी के रूप में बड़े पैमाने पर मीडिया प्रचार कार्यों को संभालने वाले कैडर संबंधी दायित्वों को निभाया है। वह भारत निर्वाचन आयोग की प्रवक्ता के रूप में भी काम कर चुकी हैं।

साथ ही, उन्होंने ओएसडी (सूचना और प्रसारण मंत्रालय में सूचना नीति, 2000-2002) के कैडर पोस्ट पर काम करने और 2007-2008 में एलएसटीवी, लोकसभा सचिवालय में निदेशक, प्रशासन एवं वित्त के रूप में दायित्व निभाने के अलावा केन्द्रीय कर्मचारी योजना प्रतिनियुक्ति के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय [पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली विभाग/आयुष विभाग (2002-2007)] और वित्त मंत्रालय (आर्थिक कार्य विभाग 2013-2017) में निदेशक के रूप में भी काम किया है।

पदभार संभालने पर, सुश्री शरण का पत्र सूचना कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वागत किया।

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डी जी कॉलेज द्वारा चलाया गया मतदान का पर्व देश का गर्व अभियान

भारतीय स्वरूप संवाददाता 29 मार्च डी जी कॉलेज, कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आज दिनांक 29 मार्च, 2024 को *मतदाता जागरूकता अभियान एवं नेकी की दीवार* कार्यक्रम के अन्तर्गत एक दिवसीय चतुर्थ शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वयंसेविकाओं द्वारा *मतदाता जागरूकता रैली* निकाली गई। जिसमें ‘मेरा पहला वोट देश के लिए’, ‘प्रजातंत्र से नाता है, हम भारत के मतदाता है’ आदि नारों के द्वारा मतदान की अपील की गई। वॉलिंटियर्स के द्वारा बस्तिवासियो को संदेश दिया गया कि सभी सम्मानित नागरिकों को जागरूक होकर सही चुनाव के लिए देश हित में मतदान करना चाहिए। युवाओं से मतदान करने की अपील करते हुए टीम लीडर वर्षा सिंह ने उन्हें प्रेरित करते हुए कहा कि जब हम पहली बाहर कोई काम करते हैं तो उसका उत्साह-उमंग कुछ अलग ही हो ती है, यह हमारे लिए किसी पर्व से कम नहीं। अतः देश के विकास के लिए, सुशासन के लिए मतदान ज़रूर करें। मतदान करना हम सब का अधिकार एवम् कर्तव्य दोनो है ताकि एक मज़बूत लोकतंत्र का निर्माण हो।देश के प्रत्येक नागरिक को, जो अट्ठारह वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, अपनी पसंद से प्रत्याशी चुनने का अधिकार है। आपके द्वारा दिया गया मत बेहतर कल के निर्माण में सहायक होगा। युवा देश के भावी कर्णधार है। अतः स्वस्थ एवं विकसित लोकतंत्र के लिए एक-एक वोट क़ीमती है। इस अवसर पर *मतदाता जागरूकता शपथ* भी दिलवाई गयी।तदुपरांत मलिन बस्ती में नेकी की दीवार कार्यक्रम के अन्तर्गत 30 बच्चो एवम् महिलाओं को पहनने योग्य साफ़ सुथरे वस्त्रों एवं दैनिक जीवन में प्रयोग आने वाली खाद्य सामग्री, साबुन आदि का दान कर सहायता एवं सेवा कार्य किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में में टीम लीडर्स वर्षा सिंह, आदित्री, रूपा, नेहा रावत, काजल, स्नेहा नीलू निषाद, सोनी निषाद, अभिवायंजना सिंह, आकांक्षा यादव एवम् दीपिका समेत समस्त वॉलिंटियर्स तथा बस्तीवासियों का सहयोग सराहनीय रहा।

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रंग दे गुलाल मोहे…

होली करीब आते जा रही थी और मेरे मन में उमंगे बढ़ती जा रही थी। इस बार पक्का सोच लिया था कि प्रतीक को ढेर सारा गुलाल लगाऊंगी और खुद लगवाऊंगी भी। मैं खास होली के लिए सफेद रंग की ड्रेस भी खरीद कर ले आई थी।

नई-नई शादी और शादी के बाद मेरी पहली होली कुछ ज्यादा ही रोमांच था मेरे भीतर। मैं तरह-तरह के पकवान बनाने में व्यस्त हो गई। होली में गुझिया बहुत पसंद थी मुझे और हमारे यहां तो भांग की गुजिया भी बनाई जाती है। भाभियां अपने देवरों को भांग की गुझिया खिला देती और भांग भी बहुत पी जाती थी हमारे यहाँ। लेकिन मैंने इस सब का इंतजाम नहीं किया था क्योंकि मैं रंग में भंग नहीं डालना चाहती थी। मुझे बस प्रतीक के साथ होली खेलनी थी और उसके साथ समय बिताना था ताकि मेरी पहली होली की यादें हमेशा रंगीन रहे।
नीरजा! नीरजा ! कहां हो तुम? प्रतीक की आवाज आई।
मैं:- “आ रही हूं, बोलो क्या काम है? क्यों घर को सर पर उठा रखा है?”
प्रतीक:-  “चलो बाजार चलते हैं। रंग गुलाल और पूजा का सामान वगैरा ले आते हैं, फिर बाद में मेरे पास वक्त नहीं होगा।”
मैं:-  “अच्छा ठीक है! कुछ देर रुको मैं जरा हाथ का काम निपटा लूं फिर आती हूं।” दस मिनट बाद हम लोग बाजार सामान लेने के लिए निकल गए। रंगों को देखकर मेरा मन मचलने लगा। मन हुआ कि अभी प्रतीक को गुलाल मल दूं लेकिन मैंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखा। जरूरत की चीजें खरीद कर हम घर आ गए।
प्रतीक अगली सुबह ही दोस्तों के साथ बाहर चले गए। मैंने फोन किया तो उठाया नहीं और दोपहर में घर आए तो कुछ नशे की हालत में दिखे। मैंने कहा, “आज से ही पीना शुरू कर दिया? होली तो कल है?”
प्रतीक:- “अरे ! दोस्तों के साथ था तो थोड़ी ले ली। अब मुझे खाना दो बहुत भूख लगी है।
मैं:-  “तुम्हारे कपड़े खराब है तो पहले नहा लो और मैं नींबू पानी लाती हूं तुम्हारे लिए।”
प्रतीक:- “नहीं ! मुझे वापस जाना है सब मेरा इंतजार कर रहे हैं बाद में आकर नहाऊंगा मैं।”
मैं:- “प्रतीक तुम्हारी हालत ठीक नहीं है और अब तुम्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं है। आराम करो। कल होली खेलेंगे।”
प्रतीक :- “तुम चुप रहो! फालतू बातें मत किया करो, मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं यह तुम मत बताओ। जो कहा है वह करो।”
मुझे प्रतीक का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा लेकिन मैं चुप रही। मेरे बहुत मना करने के बाद भी प्रतीक अपने दोस्तों के पास चले गए। रात को भी बहुत देर से घर आये और बहुत नशे में थे। आते ही सो गये। मैं जो इतने सपना संजो कर बैठी थी वह टूटते दिखाई दे रहे थे। सुबह होली की पूजा थी और प्रतीक सो रहे थे। मैंने प्रतीक को आवाज दी।
मैं:- “प्रतीक उठो आठ बज गए हैं।”
प्रतीक हड़बड़ा कर उठ गया ।
प्रतीक:- “अरे आठ बज गए तुमने मुझे उठाया क्यों नहीं?”
मैं:- “मैंने उठाया था लेकिन तुम उठे नहीं। अब उठ जाओ मैं चाय लेकर आती हूं।”
प्रतीक हाथ मुंह धोने चला गया और चाय पीकर फ्रेश होकर कब चला गया मुझे मालूम ही नहीं पड़ा। मैंने फोन लगाया और पूछा, “अरे! कहां चले गए आप? नाश्ता भी नहीं किया?”
प्रतीक:- “हां! मैं मेरे दोस्तों के साथ हूं। एक दोस्त के फार्म हाउस पर जा रहे हैं हम सब लोग।”
मैं:- “आज के दिन मुझे आपके साथ होली खेलनी थी। मम्मी पापा के यहां जाना था।”
प्रतीक:- “देखो आज तो समय नहीं है कल जाएंगे वहां और मैं आता हूं तब खेल लेना होली। यही एक दो दिन का तो मौका मिलता है जो मैं दोस्तों के साथ बिता सकता हूं और तुम पास में भाभी और दीदी है ना खेल लेना उनके साथ। अच्छा खाने पर मेरा इंतजार मत करना।”
मैं दुखी हो गई और मुझे सारे रंग फीके लगने लगे। मैं काम में लग गई और फिर बाद में तबीयत ठीक नहीं है का बहाना करके कमरे में आ गई। बाहर होली है… होली है की आवाजें… बच्चों की चिल्लाने की आवाजें आ रही थी और मैं अंदर ही अंदर कुढ़ रही थी। थकावट के कारण मेरी आंख लग गई थी कि प्रतीक के आने की आहट हुई। प्रतीक पूरे रंग में रंगे हुए थे।
प्रतीक:- “अरे! लेटी क्यों हो तुम? गई नहीं कहीं?”
मैं:- “नहीं मन नहीं हुआ।”
प्रतीक:- “अच्छा कुछ ले आओ खाने के लिए बहुत भूख लग रही है।”
मैं:- “क्यों वहां कुछ खाया नहीं?”
प्रतीक:- “खाया पर पता नहीं क्यों भूख लग रही है फिर से।”
मैं:- “अच्छा आती हूं लेकर।” मैं गुझिया पापड़ लेकर कमरे में आ गई कि प्रतीक ने गुलाल की थैली मेरे ऊपर पलट दी और आगे बढ़कर अपना गाल मेरे गाल से लगाकर गुलाल लगा दिया और पास आकर कहा “होली है”। मैं खुशी और शर्म से लाल हो गई। मैं प्रतीक को देखे जा रही थी।
प्रतीक:-  “सुबह से तो कह रही थी कि आपके साथ होली खेलनी है, अब सब छोड़ कर आया हूं तो ऐसे क्यों खड़ी हो?”
खाने की प्लेट जो रंग से रंग गई थी मैंने बाजू में रख दी और हाथों में रंग लेकर प्रतीक को रंग दिया। मेरी होली रंगीन होने लगी थी और मन गा रहा था…. मल दे गुलाल मोहे…. कि आई होली आई रे…….। ~प्रियंका वर्मा माहेश्वरी 

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ऐस ऐन सेन बी वी पी जी कॉलेज की ऐन ऐस ऐस यूनिट द्वारा आयोजित ७ दिवसीय विशेष शिविर के पांचवें दिन महिलाओं के समाज में व्यवहार एवम सशक्त भूमिका के विषय में व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता 21 मार्च प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता  निमिषा त्रिपाठी, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत – कानपुर प्रांत महिला प्रमुख – सेवाभारती महानगर किशोरी विकास प्रमुख, ने स्वयंसेविकाओं को महिलाओं के समाज में व्यवहार एवम सशक्त भूमिका के विषय में व्याख्यान दिया साथ मुख्य वक्ता ने व्याख्यान का प्रारंभ गयात्रिमंत्र के उच्चारण से किया। प्रोग्राम ऑफिसर प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने पुष्पगुच्छ से मुख्य वक्ता का शिविर में स्वागत किया। अपने स्वयंसेविकाओं को किशोरी अवस्था में आने वाली शारीरिक, मानसिक एवम सामाजिक समस्याओं से अवगत कराते हुए उनके व्यवहारिक समाधानों पर प्रकाश डाला। व्याख्यान के अंत में स्वयंसेविकाओं ने कन्या भ्रूण हत्या तथा बेटी बचाओ पर सफल नुक्कड़ नाटक का मंधन किया।
भोजन अवकाश के पश्चात द्वातिये सत्र में वशिष्ठ सहायक उपनियंत्रक नागरिक सुरक्षा विमलेश कुमार यादव के द्वारा आग के बारे में जानकारी प्रदान की गई। आग क्या है, कितने प्रकार की होती है, तथा आग बुझाने के उपाय एवम डेमो के द्वारा आग बुझाने वाले उपकरणों का प्रयोग आदि के विषय में स्वयंसेविकाओं को जानकारी दी गई।
तत्पश्चात छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का अभ्यास किया एवम छटवे दिन की रूपरेखा बनाई। राष्ट्रगान के साथ सत्र का समापन हुआ।

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इण्डियन सांईस काँग्रेस एसोशियेशन, कानपुर चैप्टर और डी०ए०वी कालेज के संयुक्त तत्वाधान मे सतत विकास की चुनौतियों(Challenges for Sustainable Development) पर व्याख्यान माला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता 21 मार्च इण्डियन सांईस काँग्रेस एसोशियेशन, कानपुर चैप्टर और डी०ए०वी कालेज के संयुक्त तत्वाधान मे सतत विकास की चुनौतियों(Challenges for Sustainable Development) पर 21 मार्च, 2024 को एक व्याख्यान माला डी०ए०वी कालेज, प्रेक्षागार में आयोजित की गयी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डी०ए०वी कालेज की प्रबंध समिति की सचिव श्रीमती कुमकुम स्वरूप ने सतत विकास की चुनौतियों में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख किया। प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव ई0 गौरवेन्द्र स्वरूप ने प्राचीन भारत के गौरवशाली वैज्ञानिक योगदान पर चर्चा की। डा0 शक्ति विनय शुक्ला, निदेशक FFDC, कन्नौज ने रसायनिक प्रदूषण के निराकरण पर विचार व्यक्त किया।

डॉ. डी० एस० बाग, संयुक्त निदेशक, DMSRDE कानपुर ने पालीमर उद्योग का पर्यावरण पर प्रभाव पर चर्चा की। डा० सुधीर प्रताप सिंह, वैज्ञानिक-D,DBT-CAIB मोहाली ने जैव प्रौद्योगिकी का विकास में संभवनाओं का उल्लेख किया। प्रारम्भ में स्वागत प्राचार्य प्रो० अरुण दीक्षित द्वारा सम्पन्न हुआ एंव धन्यवाद प्रस्ताव प्रो० सुधीर कुमार श्रीवास्तव, कार्यक्रम के संयोजक द्वारा दिया गया।

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डी जी कॉलेज एनएसएस वॉलिंटियर्स ने लगाई बस्ती में बच्चों की पाठशाला

भारतीय स्वरूप संवाददाता 21 मार्च डी जी कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर के पांचवे दिन प्रथम सत्र में शिविर स्थल की सफाई, योग एवं व्यायाम के पश्चात गणपति वंदना एवं पूजन के साथ एनएसएस गीत गाकर शिविर का आरंभ महाविद्यालय की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में किया गया। इस सत्र में वॉलिंटियर्स के द्वारा बस्ती के बच्चों की पाठशाला लगाई गई तथा उन्हें पौष्टिक आहार का वितरण भी किया गया। वॉलिंटियर्स ने बस्ती में घर-घर जाकर सर्वेक्षण का कार्य करने के उपरांत मध्याह्न भोजन ग्रहण किया उसके पश्चात सायंकालीन सत्र में डिजिटल इंडिया वर्कशॉप में रवि सी एस सी कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर से पधारे श्री अमर कुमार के द्वारा एनएसएस वॉलिंटियर्स तो ट्रेनिंग दी गई। महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने इस आदिवासी विशेष शिविर में छात्राओं के द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना में जिन मुद्दों पर कार्य किया जाता है वह छात्रों के व्यक्तित्व के विकास की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव, डॉ श्वेता गोंड, डॉ अंजना श्रीवास्तव तथा टीम लीडर्स समेत समस्त वॉलिंटियर्स का सराहनीय योगदान रहा।

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ऐस ऐन सेन बी वी पी जी कॉलेज की ऐन ऐस ऐस यूनिट के ७ दिवसीय शिविर के चतुर्थ चौथे दिन बस्ती वासियों को शिक्षा, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के विषय में जागरूक किया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 20 मार्च, ऐस ऐन सेन बी वी पी जी कॉलेज की ऐन ऐस ऐस यूनिट द्वारा ७ दिवसीय शिविर के चतुर्थ दिवस का शुभारंभ ईश्वंधना तथा ऐन ऐस ऐस के लक्ष्यागीत के साथ हुआ। सर्वप्रथम स्वयंसेविकाओं ने बस्ती का भ्रमण किया तथा बस्ती वासियों को शिक्षा, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के विषय में जागरूक किया। तत्पश्चात प्राकृतिक चिकित्सा एवम योग पर आधारित व्याख्यान में भाग लिया। नेचुरोपैथी एवम योग ट्रेनर मिस भूमि तिवारी ने स्वयंसेविकाओं को संतुलित आहार की प्राकृतिक चिकित्सा में उपयोगिता के विषय में बताया। साथ ही खान पान के महत्व से स्वयंसेविकाओं को अवगत कराया। योग अभ्यास के अंतर्गत सूर्यनामस्कर, ताड़ासन, वृक्षासन, मकरासन, त्रिकोणासन, प्राणायाम, कपालभाती, भ्रमरी, ॐ शब्द का उच्चारण, मेडिटेशन तथा गायत्री मंत्र, आदि का अभ्यास कराया। इससे पूर्व प्रथम सत्र का प्रारंभ मिस भूमि तिवारी का शिविर में प्रोग्राम ऑफिसर प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने अभिनंदन किया। भूमि तिवारी ६ बार की योग की नेशनल प्लेयर, खेलो इंडिया की कांस्य पदक विजेता, एशियन मेडलिस्ट एवम २००३ की ऐन सी सी गणतंत्र दिवस परेड की कैडेट रह चुकी है। इससे पूर्व शिविर में महाविद्यालय की प्राचार्य ने सर्वेक्षण किया तथा छात्राओं को भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए मिष्ठान वितरित किया। भोजनावकाश के पश्चात द्वातिय सत्र में स्वयंसेविकाओं ने नागरिक सुरक्षा से संबंधित विषयों जैसे सी पी आर, घरेलू आग, रोगों से बचाव, आदि पर अभ्यास किया तथा प्रश्नौत्रि में भाग लिया। तत्पश्चात स्वयंसेविकाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का अभ्यास किया जिसमे लोक नृत्य और गायन मुख्य रूप से रहे साथ ही दो टीम बना कर अधिग्रहित बस्ती का सर्वेक्षण किया। पंचम दिवस की रूपरेखा की तयारी तथा राष्ट्रगान के साथ द्वातिए सत्र का समापन हुआ।

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