उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम ज़ोनों के 949 नृत्य कलाकारों के 73 समूह‘वंदे भारतम्-नृत्य उत्सव’ के ग्रैंड फिनाले में पहुंच गये हैं। यह अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता है, जिसे आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित किया जा रहा है। फाइनल 19 दिसंबर, 2021 को नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम प्रेक्षागृह में होगा। रक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय ने आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में ‘वंदे भारतम्-नृत्य उत्सव’ की शुरुआत करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाना है। यह एक अनोखी पहल है, जो जनभागीदारी पर आधारित है। इसका मुख्य लक्ष्य है देशभर से सर्वोच्च नृत्य प्रतिभाओं का चयन करना तथा उन्हें गणतंत्र दिवस परेड 2022 के दौरान अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करना।
ग्रैंड फिनाले में नृत्य कलाकार इस सर्वोच्च सम्मान के लिये प्रतिस्पर्धा करेंगे। ऐसा अवसर जीवन में यदा-कदा ही मिलता है, जिसका लाभ उठाते हुये वे गणतंत्र दिवस परेड में अपनी प्रतिभा दिखायेंगे। इस परेड को न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में देखा जाता है।
दो सौ से अधिक टीमों में से 2400 से अधिक प्रतिभागियों को जोनल स्तरीय प्रतियोगिता के लिये चुना गया था, जहां 104 ग्रुपों ने विद्वान ज्यूरी के समक्ष अपनी नृत्य प्रतिभा प्रदर्शित की थी। प्रतिभागी समूहों नेकई नृत्य विधाओं का प्रदर्शन किया। इन विधाओं में शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, जनजातीय नृत्य और मिला-जुला नृत्य शामिल था। देशभर की प्रतिभाओं और रंगारंग पोशाकों का संयोजन देखने को मिला। समाज के सभी वर्गों ने पूरे हर्षोल्लास से हिस्सा लिया तथा सभी वर्गों ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को बलवती बनाया।
सर्वोच्च 480 नृत्य कलाकारों को ग्रैंड फिनाले के लिये चुना जायेगा और उन्हें 26 जनवरी, 2022 को नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में अपनी कला का प्रदर्शन करने का सुनहरा मौका मिलेगा।
वंदे भारतम् प्रतियोगिता 17 नवंबर को जिला स्तर पर शुरू हुई थी। इस दौरान 323 समूहों में 3,870 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। जो जिला स्तरीय प्रतियोगिता में सफल रहे, उन्हें 30 नवंबर, 2021 को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का अवसर मिला। वहां 20 से अधिक वर्चुअल आयोजन हुये। यह आयोजन चार दिसंबर, 2021 तक, यानी पांच दिन चला।
राज्य स्तर पर 300 समूहों को चुना गया, जिनमें तीन हजार से अधिक नृत्य कलाकार/प्रतिभागी थे। इस तरह एक महीने तक आयोजन में सभी आकांक्षी कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिये प्रदर्शन किया।
ग्रांड फिनाले को वंदे भारतम् के आधिकारिक फेसबुक पेज और यूट्यूब पर प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। साथ ही वेबसाइट (vandebharatamnrityautsav.in) और मोबाइल ऐप पर भी इसे देखा जा सकता है।
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इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री वीरेंद्रजीत सिंह, क्षेत्र संघ चालक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विशिष्ट अतिथि प्रो. राहुल गोयल, निदेशक, गौर हरि सिंघानिया मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, प्रो. पारुल गोयल, गौर हरि सिंघानिया मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, विशिष्ट अथिति डॉ. शालिनी वेद, निदेशक, लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी, महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार मिश्रा, सचिव श्री प्रोबीर कुमार सेन, संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन, सदस्या श्रीमती दीपा श्री सेन, समिति के गणमान्य सदस्य प्राचार्या डॉ. निशा अग्रवाल ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्जवलन तथा समीर सेन जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
विगत कई वर्षो की भांति इस वर्ष भी श्याम नगर स्थित एल आई सी पार्क में देव दीपावली उत्सव का आयोजन किया गया ! जिसमे दीप प्रज्वलन के बाद रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया !तत्पश्चात स्थानीय बच्चो ने अत्यंत मनमोहक रंगोली बनायीं जो बस देखते ही बनती थी, मुख्य अतिथि श्री आनन्द प्रकाश तिवारी एडिशनल कमिश्नर आफ पुलिस डा. अनुपम, प्रान्त प्रचार प्रमुख मुख्य वक्ता श्री राम जन्म पाठक अध्यक्ष, तथा अन्य गणमान्य नागरिक प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
जिसमें जनपद कानपुर के अतिरिक्त औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात के खिलाड़ियों ने खेल विधा एथलेक्टिक्स, कबड्डी, कुश्ती,वॉलीवाल, भारोत्तोलन में प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता का उदघाटन श्री अजय कुमार त्रिवेदी, उप निदेशक कानपुर मण्डल के द्वारा किया गया। मण्डल स्तरीय प्रतियोगिता के विजयी खिलाड़ी जोन स्तरीय प्रतियोगिता झाँसी में प्रतिभाग करेगें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भी अरुण पाठक, सदस्य विधान परिषद द्वारा खिलाडियों को मेडल, प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। उन्होने कहा कि युवाओं को खेल गतविधियों से लगातार जुड़ा रहना चाहिए इससे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का विकास होता है और युवा बुरी आदतों एवं व्यसन से दूर रहते हैं। कार्यक्रम की आयोजक आरती जायसवाल जिला युवा कल्याण अधिकारी एवं अनिल कुमार तिवारी प्रतियोगिता प्रभारी थे। इस अवसर पर अन्य जनपदों के जिला युवा कल्याण अधिकारी एवं धीरेन्द्र सिंह व्यायाम प्रशिक्षक, निधि पाण्डेय, स्मृता सिंह, अमित कुमार, यशस्वी रत्न मिश्रा, रिचा, राघवेन्द्र सिंह भदौरिया एवं अन्य जनपदों के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी जनपद के विभिन्न विद्यालयों से पी0टी0आई0 आदि मौजूद रहे। प्रतियोगिता में प्रथम आये खिलाड़ी/विजेता में सैफ अनीखॉ ने 100 मीटर दौड़ कानपुर देहात, विवेक यादव ने 200 मी0 दौड कानपुर नगर, विवेक कुमार ने 400 मी दौड़ कन्नौज, आशीष कुमार ने 800 मी0 दौड़ इटावा, शिवम ने 1500 मी दौड कन्नौज, शिवानंदपाल ने 3000 मी0 दौड़ कन्नौज, निर्भय सिंह,अनामिका शर्मा गोला फेक इटावा, आलम खॉ ने लम्बी कूद कन्नौज, माण्डवी ने 100मी/200मी, दौड़ फर्रुखाबाद, शीतल ने 400 मी दौड़ कानपुर नगर, श्वेता पाल ने 800 मी0/1500 मी0 दौड़ कन्नौज, शिवानी ने लम्बी कूद कानपुर देहात ने प्रतिभाग किया। कबड्डी मे महिला विजेता जनपद कन्नौज एवं उप विजेता कानपुर नगर, बॉलीवाल में पुरुष विजेता औरैया एवं उप विजेता कानपुर नगर, बॉलीवाल में महिला विजेता कानपुर देहात एवं उप विजेता औरेया प्रतियोगिता का परिणाम रहा।
कानपुर 05 नवम्बर(सू0वि0) प्रधानमंत्री मोदी द्वारा केदारनाथ धाम, उत्तराखण्ड में आदिगुरु शंकराचार्य जी की मूर्ति के अनावरण समारोह एवं आयोजित कार्यक्रम का जनपद के विभिन्न शिवालयों आन्देश्वर मंदिर परमट, जागेश्वर मंदिर नबावगंज, शिवाला मंदिर काकादेव, नागेश्वर मंदिर नयागंज में पर लाइव स्ट्रीमिंग एवं एलईडी के माध्यम से प्रसारण किया गया। आज गोवधर्न पूजा की सुबह जनपद के विभिन्न शिवालयों में मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के उत्तराखण्ड में बाबा केदारनाथ धाम में श्रीकेदारनाथ धाम की भव्यता को नया आयाम देने व आदिगुरु श्री शंकराचार्य जी की मूर्ति के साथ कई परियोजनाओं के लोकापर्ण कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। उन्होंने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य ने कहा था कि दुख व कष्ट की मुक्ति का मार्ग ज्ञान है। भारत के ज्ञान-विज्ञान की जो प्राचीन परम्परा है, उसे आदिगुरु शंकराचार्य ने हमें ग्रहण करने की प्रेरणा प्रदान की है। आदिगुरु शंकराचार्य जी ने समाज को सत्य से परचित कराने तथा चार धामों व मठों की स्थापना की। उन्होंने भारतीय सभ्यता को आगे बढाते हुये सब कुछ त्याग कर देश व समाज के लिये जीवन समर्पित करने की परम्परा स्थापित की है। शंकराचार्य जी के आदर्श व सिद्धान्त तथा उनकी परम्परा ने पीढी दर पीढी समाज को आगे मार्ग दिखाने का कार्य किया है।


किसी भी इन्सान को निःस्वार्थ प्यार के आधार पर अपने वश मे किया जा सकता है।बहुत दुख की बात है आज भी कुछ लोग दूसरो पर वशीकरण टूणा टोटका जैसी चीजे करते है।अगर किसी इन्सान का प्यार पाने के लिये आपको इस तरहा के टूणे टोटके करने पड़ते है तो समझ ले !आप ही के प्यार में खोट है जो आप किसी को अपने प्यार के ज़रिए नहीं बल्कि ग़लत तरीक़े से उसे अपना बनाना चाह रहे हैं यहाँ ये समझना बहुत ज़रूरी हो जाता है अगर आप को ऐसा करना पड़ रहा है तो यकीनन ही वह इन्सान आप को प्रेम नहीं करता आप ज़बरदस्ती उसे अपने वश में कर रहे हैं। प्रेम को हमेशा स्वतंत्र रहने दे।आप का होगा तो आप के पास ही आयेगा।ज़बरदस्ती से बांधने की कोशिश न करे।