अपनी तरह का यह पहला सहयोग भारत के सार्वजनिक प्रसारक की विरासत और देशव्यापी पहुंच को अगली पीढ़ी के मीडिया नेटवर्क के रचनात्मक नवाचार के साथ जोड़ता है। उन्नत एआई उपकरणों का उपयोग करते हुए, इस श्रृंखला में महाभारत महाकाव्य के व्यापक स्वरूप, उसके पात्रों, युद्धक्षेत्रों, भावनाओं और नैतिक दुविधाओं को सिनेमा के पैमाने और अद्भुत यथार्थवाद के साथ फिर से तैयार किया गया है। यह परियोजना मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया की भावना को मूर्त रूप देती है और यह दर्शाती है कि कैसे विरासत और नवाचार एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी इस सहयोग पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रसार भारती हमेशा से ही राष्ट्रीय और सांस्कृतिक महत्व की गाथाओं को हर भारतीय घर तक पहुंचाता रहा है। लॉकडाउन के दौरान मूल महाभारत के पुनः प्रसारण ने हमें याद दिलाया कि ये कथाएं परिवारों और पीढ़ियों को कितनी गहराई से एक साथ जोड़ती हैं। यह एआई-आधारित पुनर्कल्पना में भागीदारी दर्शकों को भारत के सबसे महान महाकाव्यों में से एक का नए सिरे से अनुभव करने का अवसर प्रदान करती है साथ ही इसमें परंपरा का सम्मान करते हुए कहानी बताने की अत्याधुनिक तकनीक को अपनाया गया है। यह आधुनिक प्रसारण में विकास और विरासत के एक साथ आने की अभिव्यक्ति है।
कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के संस्थापक और समूह सीईओ, विजय सुब्रमण्यम ने इस साझेदारी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लाखों भारतीयों की तरह, वह भी हर रविवार को टेलीविजन पर क्लासिक महाभारत देखकर बड़े हुए हैं। यह एक ऐसा अनुभव था जिसने हमारी कल्पना और संस्कृति से हमारे जुड़ाव को आकार दिया। महाभारत के साथ, हमारी आशा है कि आज की पीढ़ी को इसके माध्यम से एक ऐसा भावपूर्ण अनुभव दिलाना है जो उनके लिए गहन और एकीकृत भाव से परिपूर्ण हो और इसे आज की तकनीक की संभावनाओं के माध्यम से दिखाया गया है। यह भक्ति और प्रगति के साथ मिलकर कुछ ऐसा तैयार करने के संदर्भ में है जो न सिर्फ गहराई से परंपरा में निहित हो अपितु साहसपूर्वक दूरदर्शी भी हो।
प्रसार भारती का आधिकारिक ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म, वेव्स, भारत की संस्कृति, समाचार और मनोरंजन के समृद्ध ताने-बाने को एक डिजिटल मंच पर लाता है। वीडियो-ऑन-डिमांड, लाइव इवेंट और टीवी, रेडियो, ऑडियो और पत्रिका सामग्री के व्यापक संग्रह के साथ, वेव्स ने अपनी विश्वसनीय, परिवार-अनुकूल और बहुभाषी पेशकशों के साथ तेज़ी से लाखों उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया है। समावेशिता, नवाचार और विरासत के स्तंभों पर निर्मित, यह प्लेटफ़ॉर्म अत्याधुनिक कहानी कहने की कला के साथ भारत की कालातीत विरासत को जोड़ता है। कलेक्टिव एआई महाभारत के साथ इसका सहयोग इस बात का उदाहरण है कैसे तकनीक और परंपरा मिलकर शक्तिशाली, समकालीन आख्यान रच सकते हैं जो भारत और दुनिया भर के दर्शकों के साथ प्रतिध्वनित होते हैं
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
भारतीय स्वरूप संवाददाता
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भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। श्रीराम रामलीला सोसाइटी परेड में रामलीला शुरू हुई। लीला के पहले दिन नारद मोह, राम जन्म और बाल लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया।
प्रभु श्रीराम के जन्म लेते ही अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे। हर घर में लोग बधाइयां गाने लगे। महाराज दशरथ ने प्रभु राम को गोद में लेकर सभी अयोध्यावासियों को दर्शन कराए। लीला के मंचन में कलाकारों ने संवाद के माध्यम से ऐसा समा बांध की माहौल भक्तिमयीं हो गया । भगवान राम की जन्म और बाल लीला में प्रथम साहू सहित अन्य बच्चों ने अपनी लीला से सभी का मन मोह लिया । मंचन से पहले दोपहर में रामलीला भवन में मुकुट पूजन हुआ। शाम को बैंड बाजे के साथ रामलीला भवन से शोभायात्रा निकाली गई जो परेड रामलीला मैदान पहुंच कर समाप्त हुई । भगवान लक्ष्मी नारायण जी की आरती के बाद लीला का मंचन शुरू हुआ । व्यास महेश दत्त चतुर्वेदी के भजनों से भक्त भाव विभोर हो गए । इस दौरान सोसाइटी प्रधानमंत्री कमलकिशोर अग्रवाल, लाल जी शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गर्ग, संरक्षक राकेश गर्ग, मंत्री आलोक अग्रवाल, संयोजक जगत नारायण गुप्ता , अशोक अग्रवाल लोकेश अग्रवाल और वीरेंद्र अग्रवाल मौजूद थे ।
कार्यक्रम के रूप में, ‘जैसा उन्होंने देखा: भारत का विभाजन 1947’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसका संपादन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और भारतीय भाषा एवं साहित्य अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने किया है। यह पुस्तक इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण पर बहुमूल्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ‘द डर्वाल्स एंड पार्टीशन’ नामक एक डीवीडी भी लॉन्च की गई, जिसमें इस त्रासदी से जुड़े अनुभवों और आख्यानों का एक मार्मिक दृश्य ूप्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें विभाजन की मानवीय कीमत पर पुनर्विचार किया गया और विस्थापित हुए देशवासियों को गंभीरता से याद किया गया। अनगिनत पीड़ितों की स्मृति में एक मौन जुलूस भी निकाला गया, जो उनके धैर्य के प्रति एक सम्मानजनक श्रद्धांजलि थी। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) द्वारा मंचित और लोकेंद्र त्रिपाठी द्वारा निर्देशित ‘बतावारा’ नामक एक नाटक का भी मंचन किया गया।
भारतीय स्वरूप संवाददाता
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