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पर्यटन

बंदरगाहों तक रेल और सड़क की कनेक्टिविटी

देश के सभी प्रमुख बंदरगाह रेल और चार लेन सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े हुए हैं। राज्य सरकारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्गो हैंडलिंग वाले प्रमुख बंदरगाहों (गैर-प्रमुख बंदरगाहों) के अलावा, 66 बंदरगाहों में से 13 रेल से जुड़े हुए हैं, जबकि 24 चार लेन सड़क/राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े हुए हैं।

देश में, राज्यवार, बंदरगाह जो कोयला, सीमेंट, उर्वरक, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद की ढुलाई करते हैं, के विवरण संलग्न हैं [अनुलग्नक]।

वर्ष 2022-23 में भारतीय बंदरगाहों पर हैंडल किए गए कुल 1129.63 मिलियन टन कार्गो यातायात में से, गुजरात और आंध्र प्रदेश राज्य के बंदरगाहों ने क्रमशः 493.85 मिलियन टन और 133.32 मिलियन टन का प्रबंधन किया।

अनुलग्नक

क्र.सं राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कोयले की हैंडलिंग करने वाले बंदरगाहों की संख्या उर्वरकों की हैंडलिंग करने वाले बंदरगाहों की संख्या, सीमेंट की हैंडलिंग करने वाले बंदरगाहों की संख्या पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की हैंडलिंग करने वाले बंदरगाहों की संख्या
1 गुजरात 15 6 7 9
2 महाराष्ट्र 7 3 5 3
3 गोवा 2 1 0 1
4 कर्नाटक 1 1 2 2
5 केरल 0 0 2 2
6 तमिलनाडु 2 1 2 7
7 आंध्र प्रदेश 4 4 1 2
8 ओडिशा 3 2 0 1
9 पश्चिम बंगाल 2 2 2 2
10 पुडुचेरी 1 0 1 2
11 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह 0 0 9 2

 

यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में दी।

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प्रधानमंत्री मोदी ने राजकोट में नए अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का शुभारम्भ किया

प्रधानमंत्री  मोदी आज राजकोट में नए अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र रजनीकांत पटेल, केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

यह ऐतिहासिक पहल देश के विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गुजरात के राजकोट में 236 एकड़ में बने मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमताएं इसके चारों ओर घने आवासीय और वाणिज्यिक विकास के कारण बाधित हैं और इसमें आगे विस्तार एवं नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं को पूरा करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

इसलिए, हीरासर, राजकोट में एक नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा प्रस्तावित किया गया और इसे भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण को सौंप दिया गया। प्रस्तावित नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के चालू होने के बाद मौजूदा राजकोट हवाई अड्डा काम करना बंद कर देगा। पूर्ण और उपलब्ध बुनियादी ढांचे के साथ हवाई अड्डे को संचालित करने के लिए एक अंतरिम टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है। नया टर्मिनल भवन फिलहाल निर्माणाधीन है। एक बार इसके पूरा हो जाने पर अंतरिम टर्मिनल का उपयोग कार्गो टर्मिनल के रूप में किया जाएगा।

अपने संबोधन में श्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने कहा कि इस हवाई अड्डे की कल्पना हमारे प्रधानमंत्री ने लगभग सात साल पहले की थी। आज वह राजकोट की जनता को यह ऐतिहासिक उपहार समर्पित करने के लिए यहां उपस्थित हैं। नया हवाई अड्डा राजकोट के मौजूदा हवाई अड्डे से दस गुना बड़ा है। वहां एक नया टर्मिनल भवन भी बनाया जा रहा है, जिसकी क्षमता प्रति घंटे 1800 यात्रियों को सेवाएं देने की होगी। इस नए टर्मिनल भवन में राजकोट की कला और संस्कृति को दर्शाया जाएगा।

श्री सिंधिया ने कहा कि वर्ष 2014 में राजकोट से हर हफ्ते सिर्फ 56 उड़ानों का परिचालन होता था, जो संख्या आज दोगुनी से भी ज्यादा होकर प्रति सप्ताह 130 हो गई है। वर्तमान में, राजकोट का मुंबई, दिल्ली, पुणे, गोवा और बेंगलुरु से हवाई संपर्क है। आने वाले हफ्तों में हम राजकोट को उदयपुर और इंदौर से भी जोड़ने जा रहे हैं। 2014 में, गुजरात का संपर्क केवल 19 शहरों से था; आज यह 50 शहरों से जुड़ा है।

नया टर्मिनल भवन और हवाई क्षेत्र का बुनियादी ढांचा कुल 2,534 एकड़ भूमि क्षेत्र में और 1405 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इस विकास में रनवे, एप्रन, समानांतर टैक्सी ट्रैक आदि का निर्माण शामिल है।

हवाई अड्डे की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • नया टर्मिनल भवन 23,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • यह इमारत बेहद व्यस्त घंटों के दौरान 2800 यात्रियों को सेवा प्रदान कर सकती है।
  • टर्मिनल में 20 चेक-इन काउंटर और 5 कन्वेयर बेल्ट हैं।
  • रनवे की लंबाई 3,040 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर है।
  • हवाई अड्डे के एप्रन की माप 334 मीटर x 152 मीटर है।
  • एप्रन एक साथ दस (10) कोड-सी टाइप और चार (4) कोड-बी टाइप के विमानों के बेड़े को समायोजित कर सकता है।
  • 2 लिंक टैक्सी ट्रैक हैं, प्रत्येक की माप 428 मीटर x 23 मीटर है।
  • हवाई अड्डे के साथ 300 कारों और 75 दोपहिया वाहनों को समायोजित करने की क्षमता वाला एक पार्किंग क्षेत्र विकसित किया गया है।

हीरासर हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग डबल इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, ऊर्जा बचत के लिए कैनोपी, एलईडी लाइटिंग, लो हीट गेन डबल ग्लेज़िंग यूनिट, फव्वारों का निर्माण, एचवीएसी, वाटर ट्रीटमेंट संयंत्र, सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र और पुनर्नवीनीकृत पानी के उपयोग, गृह-IV रेटिंग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र जैसी कई स्थायी विशेषताओं से युक्त है।

विमानन उद्योग की बढ़ती मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से हीरासर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई और विकास किया गया है। यात्रियों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, हवाई अड्डे में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त जगह है। इसके अलावा, डिज़ाइन सुगम्य भारत अभियान मानदंडों के अनुरूप है, जो सभी यात्रियों के लिए पहुंच सुनिश्चित करती है, साथ ही अलग-अलग दिव्यांग व्यक्तियों के अनुभव को बढ़ाने के लिए स्पर्श पथों को शामिल करती है।

उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपस्थिति भारत के विमानन क्षेत्र को बढ़ाने और वैश्विक विमानन मानचित्र पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज आंध्रप्रदेश के कुरनूल में 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत की भगवान श्री राम की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने आज आंध्रप्रदेश के कुरनूल में भगवान श्री राम की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री अमित शाह ने कहा कि आज कुरनूल के मंत्रालयम में 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत की श्री राम की भव्य पंचलोहा प्रतिमा का शिलान्यास हुआ है। उन्होंने कहा कि मंत्रालयम में स्थापित यह 108 फीट ऊंची प्रभु श्री राम की प्रतिमा युगों-युगों तक समग्र दुनिया को हमारे सनातन धर्म का संदेश देगी और वैष्णव परंपरा को देश और दुनिया में मजबूत करेगी। श्री शाह ने कहा कि 108 हमारी हिन्दू संस्कृति में बहुत ही पवित्र संख्या है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित मंत्रालयम गाँव में 10 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ यह प्रोजेक्ट ढाई साल में पूरा होगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालयम गाँव राघवेन्द्र स्वामी के मंदिर के लिए बहुत प्रसिद्ध स्थान है। साथ ही इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व भी है, इसी तुंगभद्रा के किनारे महान विजय नगर साम्राज्य का उद्भव हुआ था जिसने आक्रान्ताओं को खदेड़ कर स्वदेश और स्वधर्म को पुनर्स्थापित किया। श्री शाह ने कहा कि मंत्रालयम दास साहित्य प्रकल्प के तहत आवास, अन्‍न दानम, प्राण दानम, विद्या दानम, पेयजल और गौ संरक्षण के कई सारे विषयों को आगे बढ़ाया गया है। 

अमित शाह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अयोध्या में कई वर्षों से लंबित श्री राम मंदिर का शिलान्यास कर उसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है। अब जल्द ही श्री राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की स्थापना होगी और सैकड़ों वर्षों के बाद एक बार फिर प्रभु श्री राम अपने निज गृह में विराजमान होंगे। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने मंत्रालयम में श्री राम की भव्य प्रतिमा के शिलान्यास के अवसर पर मठ के मठाधीश, परम पूजनीय संत माध्वाचार्य जी, संत राघवेन्द्र स्वामी जी तथा दक्षिण की बहुत समृद्ध वैष्णव परंपरा व उसके सभी संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। 

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प्रधानमंत्री मोदी ने पोर्ट ब्लेयर में वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया

नया एकीकृत टर्मिनल भवन 710 करोड़ रुपए की लागत से 40,837 वर्ग मीटर क्षेत्र में निर्मित किया गया है
  • नए एकीकृत टर्मिनल भवन में व्यस्त समय में 1200 यात्रियों की सेवा करने की क्षमता होगी
  • श्री ज्योतिरादित्य सिधिंया ने हवाई अड्डे परिसर के भीतर स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आज केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया, नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जनरल(सेवानिवृत्त) विजय कुमार सिंह,अंडमान और निकाबोर द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल(सेवानिवृत) डी.के.जोशी और नागरिक उड्डयन सचिव श्री राजीव बंसल की उपस्थिति में वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया।

हवाईअड्डे के नए टर्मिनल भवन का निर्माण 40,837 वर्ग मीटर क्षेत्र में 710 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। इसमें व्यस्त समय में 1200 यात्रियों की सेवा करने की क्षमता होगी,जो कि वर्तमान क्षमता से तीन गुना से अधिक होगा। मनमोहक अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता से प्रेरणा लेकर पोर्ट ब्लेयर टर्मिनल बिल्डिंग का डिजाइन शंख के आकार का है,जो समुद्र और द्वीप की सुंदरता को दर्शाता है। टर्मिनल भवन का डिजाइन दिन के समय प्राकृतिक रुप से प्रकाशित रहने के लिए बनाया गया है। हवाई अड्डे में स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

कार्यक्रम का आयोजन हाईब्रिड मोड में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिग के द्वारा रिमोट बटन दबा कर टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अन्य गणमान्य अतिथि भी हवाई अड्डे पर उपस्थित थे। नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्यमंत्री जनरल (सेवानिवृत) विजय कुमार तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने महान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को श्रद्धांजलि स्वरुप उनकी प्रतिमा का अनावरण किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री सिंधिया ने कहा कि अंडमान ओर निकोबार हमारे देश के सबसे खूबसूरत रत्नों में से है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास में यह कई अहम घटनाओं का साक्षी रहा है। वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जीव जंतुओ और वनस्पति की अतुलनीय जैव विविधता को दर्शाता है। शंख के आकार में डिजाइन किए गए हवाई अड्डे को दिन के समय बाहरी प्रकाश स्रोत की आवश्यकता नहीं होगी। निरंतरता के संबंध में हवाई अड्डे में दोहरी इंसुलेटिंग प्रणाली, एलईडी प्रकाश व्यवस्था,वर्षाजल संचयन और सौर जल संयंत्र की व्यवस्था की गई है।

 सिधिंया ने कहा कि इस हवाई अड्डे के अतिरिक्त केंद्र सरकार 150 करोड़ रुपए के निवेश से शिबपुर,कार निकोबार और कैंपबेल में 3 अतिरिक्त हवाई अड्डे और शहीद द्वीप,स्वराज द्वीप और पोर्ट ब्लेयर में 4 जल एयरोड्रोम की स्थापना करेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम सेवा,सुशासन और गरीब कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। आगामी समय में यह हवाई अड्डा रोजगार,शिक्षा और निवेश का एक मार्ग बनेगा।

पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे के नाम से भी जाने जाने वाला वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा,अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में पोर्ट ब्लेयर से दो किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित है। प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के नाम पर निर्मित यह हवाई अड्डा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का एकमात्र व्यवसायिक हवाई अड्डा है। दक्षिण अंडमान द्वीप के पूर्वी तट पर स्थित पोर्ट ब्लेयर 500 से अधिक प्राचीन द्वीपो का मार्ग है। यह एक उभरता हुआ व्यवसायिक केंद्र है और यहां अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सरकारी कार्यालय भी स्थित हैं। पोर्ट ब्लेयर, जल पर आधारित स्नोर्कलिंग,स्कूबा डाईविंग,स्कूबा क्रूज गतिविधि के साथ क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति की झलक भी प्रदर्शित करता है।

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अयोध्या हवाईअड्डे का विकास कार्य सितंबर 2023 तक पूरा हो जायेगा

अयोध्या हवाईअड्डे का विकास कार्य सितंबर 2023 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। यह नया हवाईअड्डा ए-321/बी-737 प्रकार के विमानों के परिचालन के लिये उपयुक्त होगा और इसे 350 करोड़ रूपये (लगभग) की लागत से तैयार किया जा रहा है।

इसके विकास कार्यों में आईएफआर कंडीशन के तहत कोड-सी प्रकार के विमानों के परिचालन के लिये मौजूदा रनवे को 1500 मीटर x 30 मीटर से 2200 मीटर x 45 मीटर तक विस्तार करना शामिल है। इसमें एक अंतरिम टर्मिनल भवन, एक एटीसी टावर, एक फायर स्टेशन, कार पार्किंग, कोड ‘सी’ प्रकार के 03 विमानों की पार्किंग के लिये नये एप्रन तथा शहर और एयर-साइड में सभी ढांचागत सुविधायें होंगी।

नया अंतरिम टर्मिनल भवन 6250 वर्गमीटर क्षेत्र में होगा और सबसे व्यस्त समय में यह 300 यात्रियों के प्रबंधन में सक्षम होगा। यात्री सुविधाओं में आठ चेक-इन- काउंटर होंगे, तीन कनवेयर बेल्ट (01 प्रस्थान और 02 आगमन हॉल), 75 कारों, और दो बसों के लिये पार्किंग सुविधा होगी। हवाईअड्डा पीआरएम- यानी कम गतिशीलता/दिव्यांग यात्रियों की सुविधा से सुसज्जित होगा।

हवाईअड्डे में वह तमाम सुविधायें होंगी जिससे इसे अधिक टिकाउ और वहनीय बनाया जा सकेगा। इसमें छत की डबल इंसुलेटेड प्रणाली, उर्जा बचत के जरूरी प्रावधान, एलईडी लाइटिंग, लो हीट गेन डबल ग्लेजिंग यूनिट, भूजल रिचार्ज के लिये वर्षा जलसंचयन, फव्वारे, एचवीएसी, जलशोधन संयंत्र, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और लैंडस्केपिंग के लिये रिसाइकल्ड पानी का इस्तेमाल, जीआरआईएचए- वी रेटिंग्स पूर्ति के लिये 250 केडब्ल्यूपी क्षमता का सौर उर्जा संयंत्र शामिल है। टर्मिनल भवन का डिजाइन अयोध्या, उत्तर प्रदेश राज्य की संस्कृति और विरासत वाला होगा ताकि यहां आने वाले यात्रियों को इसकी अनुभूति मिले।

टर्मिनल भवन की बाहरी दीवारें (शहर की तरफ और हवाईपट्टी दोनों तरफ) अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की वास्तुकला के अनुरूप होगा। हवाईअड्डे की प्रस्तावित टर्मिनल बिल्डिंग में भव्य राम मंदिर का ही चित्रण होगा जिससे यहां आने वाले यात्रियों को आध्यात्मिक अनुभूति होगी। टर्मिनल वास्तुकला का बेजोड़ नमूना होगा जिसमें अलग अलग उंचाई के शिखर होंगे जो कि इस भवन की शान को और बढ़ायेंगे। छोटे-बड़े शिखर के साथ ही टर्मिनल भवन में सजावटी खंबे इसकी भव्यता को और बढ़ायेंगे जिससे यहां आने वाले यात्रियों और पर्यटकों को नया अनुभव होगा। नये टर्मिनल भवन के अंदरूनी हिस्से को स्थानीय कला, पेंटिंग और भगवान श्री राम के जीवन चक्र से जुड़े भित्ती चित्रों से सजाया जा रहा है।

केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने अयोध्या हवाईअड्डे में जारी विकास कार्यों पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘अयोध्या हवाईअड्डे में जारी विकास कार्यों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के भारत में ढांचागत सुविधाओं के विकास को लेकर दूरदर्शिता का पता चलता है। यह अत्याधुनिक हवाईअड्डा हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने और पवित्र धार्मिक शहर अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इस परियोजना से न केवल क्षेत्रीय विकास तेज होगा बल्कि भगवान राम से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का भी मान बढ़ेगा। मुझे विश्वास है कि यह हवाईअड्डा अयोध्या के विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।’’ श्री सिंधिया ने हवाईअड्डे में हो रही प्रगति के बारे में ट्वीट भी किये। ये ट्वीट यहां देखे जा सकते हैंः

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प्रधानमंत्री ने पांच वंदे भारत ट्रेनों को झंडी दिखाकर रवाना किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आज मध्य प्रदेश के भोपाल में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को झंडी दिखा कर रवाना किया। पांच वंदे भारत ट्रेनें भोपाल (रानी कमलापति)-इंदौर वंदे भारत एक्सप्रेस;  भोपाल (रानी कमलापति)-जबलपुर वंदे भारत एक्सप्रेस;  रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस;  धारवाड़-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस और गोवा (मडगांव)-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस हैं।

प्रधानमंत्री ने रानी कमलापति-इंदौर वंदे भारत एक्सप्रेस के पहले कोच का निरीक्षण किया। उन्होंने ट्रेन में यात्रा कर रहे बच्चों और चालक दल के सदस्यों से भी बातचीत की।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया-आज भोपाल में पांच वंदे भारत ट्रेनों को एक साथ शुरू करने का सौभाग्य मिला। यह दिखाता है कि देशभर में इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के तेज विकास को लेकर हमारी सरकार कितनी प्रतिबद्ध है।

भोपाल (रानी कमलापति)- इंदौर वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी के ट्वीट का जवाब देते हुए, प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के लोगों को बधाई दी और कहा कि इससे उज्जैन जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा आसान हो जाएगी।

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जी20 के अंतर्गत पर्यटन कार्य समूह की चौथी बैठक का उद्घाटन सत्र गोवा में आयोजित

पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित जी20 के अंतर्गत पर्यटन कार्य समूह की चौथी बैठक का उद्घाटन सत्र आज सुबह गोवा में आयोजित किया गया। केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। पर्यटन राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट, पर्यटन राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाईक और गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सावंत और पर्यटन मंत्री श्री रोहन खौंटे भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय संस्कृतिपर्यटन और उत्तर पूर्वी क क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी.के. रेड्डी ने कहा कि जी20 में भारत की अध्यक्षता में पिछले कुछ महीनों में पर्यटन कार्य समूह की बैठकें अलग-अलग स्थानों पर आयोजित हो रही हैं। पहली बैठक गुजरात में कच्छ के रण, दूसरी पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी और तीसरी बैठक जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर में आयोजित की गई है। दुनिया भर के विशेषज्ञों, नवोन्मेषकों और नेताओं के साथ पर्यटन से जुड़ें विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक, विचारशील और सकारात्मक चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि हमारी आध्यात्मिक शक्ति और देश के विभिन्न स्थानों की विविधता का सुंदरता और समृद्धि का अनुभव किए बिना भारत की यात्रा अधूरी होगी। उन्होंने कहा कि भारत में 50 से अधिक शक्तिपीठ हैं, जहां महिला शक्ति की दिव्यता की आराधना की जाती है। यह सिख धर्म की जन्मस्थली है। देश में भाईचारे और समानता का प्रतीक अमृतसर का स्वर्ण मंदिर है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत बौद्ध और जैन धर्म का उद्गम स्थल है, यहां लगभग 80 प्रतिशत हिंदू आबादी है। देश के 200 बड़े बौद्ध मठ हमें अहिंसा के बौद्ध सिद्धांतों और प्रकृति के साथ सद्भाव से रहने के जैन दर्शन का स्मरण कराते हैं। सरकार के मिशन लाइफ- पर्यावरण के लिए जीवनशैली (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) का आधार है।

उन्होंने भारतीय पर्यटन को वैश्विक स्तर पर ले जाने का श्रेय प्रधानमंत्री के नेतृत्व को देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने पर्यटन दूत के रूप में विश्व पटल पर भारत के पर्यटन क्षेत्र को गति दी है। उन्होंने कहा कि हमारी समृद्ध विरासत और संस्थागत शक्ति को पहचान मिली है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार 2014 से पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने रेखांकित करते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही भारत की यात्रा आत्म मंथन का एक अवसर था और भारत हमेशा विश्व के सभी कोनों से आने वाले यात्रियों के लिए लोकप्रिय गंतव्य रहा है। इसने 200 देशों और विभिन्न धर्मों के लोगों को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के अनुभव अवसर प्रदान किया है।  जी. किशन रेड्डी ने आगे बताया कि ‘अतिथि देवो भव’ के प्राचीन दर्शन की भावना निहित है। हमारे यहां अतिथि को दिव्य माना जाता है। कोविड महामारी के पश्चात देश में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उत्तरोतर वृद्धि हुई है और जनवरी से अप्रैल 2023 के बीच 2022 की इसी अवधि की तुलना में पर्यटकों की संख्या में 166 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आशा है कि इस वर्ष 2023 के कार्यकाल में पर्यटकों की संख्या महामारी से पूर्व देश में आने वाले पर्यटकों के बराबर हो जाएगी।उन्होंने कहा कि अंतिम बैठक में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय और अन्य राज्य सरकारों और पर्यटन हितधारकों के लिए कार्य प्रणाली और सिफारिशें प्रस्तुत की जाएंगी। जी. किशन रेड्डी ने बताया कि वर्तमान में हमारी सरकार की दो प्राथमिकताएं हैं- पर्यटकों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सतत बुनियादी ढांचे का निर्माण और पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को अपनाने के लिए पर्यटकों के बीच जागरूकता बढ़ाना जी20 टूरिज्म और सतत विकास लक्ष्य डैशबोर्ड की एक विरासत बनाई गई है, जो समावेशी और लचीले पर्यटन क्षेत्र के निर्माण में नीतियों और पहलों को बढ़ावा देगी। उन्होंने यह भी अपील की कि भावी पीढ़ी के लिए एकजुट होकर लचीले और टिकाऊ पर्यटन क्षेत्र का निर्माण करें।

इस अवसर पर अपने संबोधन में, पर्यटन राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाईक ने कहा कि गोवा छुट्टियां मनाने के लिए एक बेहद उपयुक्त जगह है। यहां शांत परिदृश्य, ताड़ के किनारे वाले समुद्रतट, सुनहरी रेत, हरे-भरे इलाके, अद्भुत सांस्कृतिक इतिहास का अद्भुत संगम और पूर्व और पश्चिम संस्कृतियों का एक अनूठा मिश्रण है।

श्री श्रीपाद येसो नाईक ने यह भी कहा कि तटीय क्षेत्रों और जल निकायों के साथ-साथ विकसित पर्यटन बुनियादी ढांचा देश में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक है। घरेलू और विदेशी पर्यटकों के बीच यह स्थल बहुत लोकप्रिय है।

उन्होंने कहा कि भारत को एक पसंदीदा साहसिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने और देश में साहसिक पर्यटन को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाई गई है। इसके तहत रोमांचक स्थलों का विकास, साहसिक पर्यटन में सुरक्षा में बढ़ावा, कौशल विकास, क्षमता निर्माण और विपणन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

श्री नाईक ने कहा कि पर्यटन के लिए गोवा रोडमैप एक स्थायी, समावेशी और लचीले पर्यटन क्षेत्र के निर्माण के लिए एक प्रमुख मार्गदर्शक होगा। गोवा रोडमैप पिछले तीन वर्षों में जी20 पर्यटन कार्य समूह के प्रयासों का प्रतिरूप है और जी20 की भारत की अध्यक्षता के तहत हरित पर्यटन, डिजिटलीकरण, कौशल विकास, पर्यटन सूक्ष्म, मध्यम और लघु उद्योगों और गंतव्य प्रबंधन के पांच परस्पर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करता है। सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए 2030 के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए अनुशंसित कार्रवाई करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि गोवा रोडमैप एक स्थायी, समावेशी और लचीले पर्यटन क्षेत्र के निर्माण के लिए एक प्रमुख मार्गदर्शक उपकरण होगा।

इस अवसर पर बोलते हुए पर्यटन राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट ने कहा कि पर्यटन लोगों को अन्य संस्कृतियों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है और समुदायों को सशक्त बनाता है, जिससे अर्थव्यवस्था वृद्धि में सहायता मिलती है।

इसके अलावा, सोशल मीडिया ने कम लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने में भी बहुत योगदान दिया है क्योंकि पर्यटक रोमांच, आनंद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के समृद्ध अनुभवों की खोज करता है।

तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन अभियान'(प्रसाद) योजना के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि भारत आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है। मुझे यह सूचित करते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्धन अभियान (पिलग्रिमेज रिवाइवल एंड स्पिरिचुअल एनरिचमेंट स्कीम – प्रसाद) योजना पर्यटन मंत्रालय ने 2014-2015 में तीर्थ स्थलों और विरासत शहरों के विकास के लिए शुरू की  थी।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय ग्रामीण पर्यटन स्थलों के विकास पर भी बहुत ध्यान देता है, इसका उद्देश्य सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करना और बढ़ावा देना और पर्यटन के सतत विकास को सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक पर्यटन प्लास्टिक पहल एकीकृत लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्लास्टिक प्रदूषण को उत्पति स्थल से ही समाप्त करने के लिए पर्यटन उद्योग को एकजुट करने की पहल है। इसके लिए सरकारों, प्रमुख उद्योग घरानों और अन्य पर्यटन हितधारकों के सहयोगी और समर्पित प्रयासों की आवश्यकता है।

उद्घाटन सत्र में को संबोधित करते हुए गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा एक ऐसा पर्टयन स्थल है जो पर्यटन से जुड़े विविध आयामों के कारण पूरे वर्ष पर्यटकों को आकर्षित करता है।

उन्होंने कहा कि हम आज गोवा में वसुधैव कुटुम्बकम विषय के तहत एकत्रित हुए हैं, हम अधिक समावेशी, टिकाऊ और समृद्ध दुनिया की दिशा में सामूहिक यात्रा शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोवा ‘पर्ल ऑफ द ओरिएंट’ के रूप में प्रसिद्ध है और सालाना लाखों घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि गोवा अपने खूबसूरत समुद्र तटों, जीवंत नाइटलाइफ़, रोमांचकारी साहसिक खेलों, प्राचीन पश्चिमी घाटों, मंत्रमुग्ध करने वाले झरनों, शांत बैकवाटर, योग और वेलनेस रिट्रीट, स्वादिष्ट व्यंजनों और अनूठी संस्कृति और विरासत के लिए जाना जाता है।

आज भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के साथ साझेदारी में मेकिंग इंडिया ए हब फॉर क्रूज टूरिज्म‘ पर एक विषयगत चर्चा भी आयोजित की गई।

इस आयोजन में क्रूज पर्यटन के विभिन्न आयामों के संवर्धन और विकास के तरीकों पर चर्चा की गई।

श्री जी. किशन रेड्डी, श्री श्रीपाद येसो नाईक और श्री अजय भट्ट ने साइड इवेंट में ‘ड्राफ्ट स्ट्रैटेजी-विजन एंड इंटीग्रेटेड क्रूज टूरिज्म स्ट्रैटेजी फॉर इंडिया’ का अनावरण किया गया।

विषयगत चर्चा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि भारत सरकार क्रूज पर्यटन को प्रोत्साहित करने और इसमें सुधार के लिए सभी प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हम क्रूज पर्यटन में क्रांति लाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, हितधारकों और उद्योग के साथ समन्वय कर रहे हैं। श्री रेड्डी ने आगे कहा कि हमारे पास 7500 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री सीमा है, जिसे हम क्रूज टूरिज्म की संभावनाओं का विस्तार कर सकते हैं।

गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सामंत ने टिप्पणी की कि गोवा में अपार संभावनाएं हैं और एक सुदृढ़ जहाज निर्माण और क्रूज उद्योग है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन गोवा फॉर द ग्लोब’ दृष्टिकोण के साथ, गोवा क्रूज बुनियादी ढांचे के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और क्रूज पर्यटन उद्योग को सुदृढ़ बनाने के लिए इस क्षेत्र में निवेश करने को कहा है। गोवा में समुद्री उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट समुद्री क्लस्टर बनाया गया है।

पर्यटन राज्य मंत्री, श्री अजय भट्ट ने ‘मेकिंग इंडिया ए हब फॉर क्रूज टूरिज्म’ विषय पर चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत हितधारकों के बीच सक्रिय सहयोग और सरकार की पहल के साथ क्रूज पर्यटन के क्षेत्र में वैश्विक गंतव्य के रूप

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उपराष्ट्रपति 22 जून, 2023 को जम्मू-कश्मीर जाएंगे

उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ 22 जून, 2023 को पहली बार केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाएंगे, जहां वे जम्मू विश्वविद्यालय के विशेष दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।

विशेष दीक्षांत समारोह के बाद उपराष्ट्रपति माता वैष्णो देवी के पवित्र मंदिर में पूजा-अर्चना करने और दर्शन करने के लिए कटरा जाएंगे।

अपनी एक दिन की यात्रा के दौरान, उपराष्ट्रपति का जम्मू और कश्मीर राजभवन जाने का भी कार्यक्रम है।

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प्रधानमंत्री देहरादून से दिल्ली के बीच पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे

उत्तराखंड में यह पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन होगी। विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस यह एक्सप्रेस ट्रेन यात्रियों, विशेष रूप से राज्य की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए आरामदायक यात्रा अनुभव के एक नए युग की शुरुआत करेगी। ट्रेन पूरी तरह स्वदेश में निर्मित है और कवच तकनीक समेत सभी उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से लैस है।

प्रधानमंत्री के, सार्वजनिक परिवहन के स्वच्छ साधन उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेकर भारतीय रेल देश में रेल मार्गों को पूरी तरह से विद्युतीकृत करने की ओर बढ़ रही है। इसी प्रक्रिया के तहत प्रधानमंत्री उत्तराखंड में नव विद्युतीकृत रेल लाइन खंडों का लोकार्पण करेंगे। इससे राज्य का पूरा रेल मार्ग शत प्रतिशत विद्युतीकृत हो जाएगा। विद्युतीकृत खंडों पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन द्वारा चलाई जाने वाली ट्रेनों से न सिर्फ ट्रेनों की गति में वृद्धि होगी, बल्कि ढुलाई क्षमता भी बढेगी।

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कल मिलेगा कानपुर हवाई अड्डे को अधिक यात्री क्षमता वाला एक नया सिविल एन्क्लेव

डेवलपमेंट थ्रू कनेक्टिविटी’ यानी जुडाव से विकास की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कानपुर एक नया सिविल एन्क्लेव पाने के लिए तैयार है। कानपुर हवाई अड्डे पर नए सिविल एन्क्लेव का उद्घाटन 26 मई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मैनपुरी में स्वर्गीय माधवराव जीवाजीराव सिंधिया की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद एक साथ नए टर्मिनल के उद्घाटन के लिए कानपुर हवाई अड्डे जाएंगे।

नई टर्मिनल बिल्डिंग की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • नया टर्मिनल भवन 6243 वर्गमीटर के क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये की परियोजना लागत पर बनाया गया है और ये मौजूदा टर्मिनल से 16 गुना बड़ा है।
  • पहले के 50 यात्रियों की तुलना में पीक ऑवर्स के दौरान 400 यात्रियों को संभालने के लिए तैयार किया गया है।
  • यात्रियों के लिए कुशल और त्वरित चेक-इन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए 08 चेक-इन काउंटर।
  • सामान के आसान रखरखाव और संग्रह की सुविधा के लिए 3 कन्वेयर बेल्ट जिसमें से एक प्रस्थान हॉल में स्थित है और दो आगमन हॉल में स्थित है।
  • 850 वर्ग मीटर में फैला एक विशाल कंसेशिनेयर एरिया, जो यात्रियों के लिए खरीदारी और भोजन की विविध रेंज पेश करता है।
  • दृष्टिबाधित यात्रियों की सुविधा के लिए स्पर्श पथ प्रावधान किए गए हैं।
  • टर्मिनल के शहर की ओर, 150 कार पार्किंग स्थान और 2 बस पार्किंग स्थान हैं, जो यात्रियों के लिए पर्याप्त पार्किंग सुविधाएं सुनिश्चित करते हैं।
  • नव विकसित एप्रन 713मी X 23मी के एक नए लिंक टैक्सी ट्रैक के साथ-साथ तीन ए-321/बी-737 प्रकार के विमानों की पार्किंग के लिए उपयुक्त है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन और सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री सेवानिवृत्त जनरल डॉ. वी. के. सिंह, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष  सतीश महाना, उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई और निवेश प्रोत्साहन मंत्री और सांसद नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, लोकसभा सांसद देवेंद्र सिंह, लोकसभा सांसद सत्यदेव पचौरी और कानपुर नगर निगम की मेयर श्रीमती प्रमिला पांडे तथा अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

कानपुर चमड़ा, कपड़ा और रक्षा संबंधी उत्पादन उद्योगों का एक प्रमुख केंद्र है। यहां कई ऐतिहासिक और पवित्र स्थान हैं और आईआईटी कानपुर, नेशनल शूगर इंस्टीट्यूट, यूपी लैदर एंड टैक्सटाइल टैक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट जैसे विभिन्न प्रमुख शैक्षणिक संस्थान हैं जो बड़ी संख्या में हवाई यात्रियों को आकर्षित करते हैं। वर्तमान में कानपुर मुंबई और बेंगलुरु एयरपोर्ट से सीधे जुड़ा हुआ है।  कानपुर, जिसे अक्सर ‘उत्तर प्रदेश का मैनचेस्टर’ कहा जाता है, के उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों और देश के दूसरे हिस्सों से जुड़ने की संभावना है।

कानपुर हवाईअड्डे पर नए सिविल एन्क्लेव का टर्मिनल भवन डबल इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, ऊर्जा की बचत के लिए कैनोपी का प्रावधान, एलईडी लाइटिंग, लो हीट गेन डबल ग्लेज़िंग यूनिट, भूजल तालिका को रिचार्ज करने के लिए वर्षा जल संचयन, जल उपचार संयंत्र, सीवेज उपचार संयंत्र और भूनिर्माण के लिए पुनर्नवीनीकरण पानी का उपयोग, 100 केडब्लूपी की क्षमता वाला एक सौर ऊर्जा संयंत्र जैसी विभिन्न स्थिरता सुविधाओं से सुसज्जित है। इसे जीआरआईएच-IV रेटिंग प्रदान की गई है, जो देश में सतत विकास और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन को दर्शाने वाली एक राष्ट्रीय ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग प्रणाली है।

टर्मिनल बिल्डिंग का अग्रभाग शहर और वायुमार्ग दोनों से कानपुर के प्रसिद्ध जेके मंदिर की मंदिर वास्तुकला को दर्शाता है। टर्मिनल बिल्डिंग के अंदरूनी हिस्सा विभिन्न स्थानीय विषयों जैसे कपड़ा, चमड़ा उद्योग और शहर की प्रसिद्ध हस्तियों जैसे कवि श्यामलाल गुप्ता और ऋषि महर्षि वाल्मीकि पर आधारित हैं। टर्मिनल को कानपुर और उत्तर प्रदेश राज्य की संस्कृति और विरासत को एक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे आगंतुकों के लिए क्षेत्र की संस्कृति और इतिहास के प्रति भावना जागृत हो सके।

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