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शिक्षा

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय लगभग 1 एकड़ भूमि पर “मातृ वन” स्थापित करेगा-शिवराज सिंह चौहान

  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) कैंपस पूसा में पौधारोपण किया। श्री चौहान ने बताया कि मंत्रालय लगभग 1 एकड़ भूमि में “मातृ वन” स्थापित करेगा। कार्यक्रम में राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर, सचिव डेयर एवं महानिदेशक आईसीएआर डॉ. हिमांशु पाठक, कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के लगभग 200 अधिकारी/कर्मचारी और स्कूली छात्र भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्ल्यू) के सभी अधीनस्थ कार्यालय, आईसीएआर संस्थान, सीएयू, केवीके और एसएयू भी अपने-अपने स्थानों पर इसी तरह का वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। श्री चौहान ने यह भी बताया कि आज कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत 800 से अधिक संस्थानों ने भाग लिया और उम्मीद है कि कार्यक्रम के दौरान 3000-4000 पौधे लगाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वैश्विक अभियान #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother का शुभारंभ किया था और प्रधानमंत्री के संकल्प को सुनिश्चित करने के लिए आज हमारे मंत्रालयों ने जन आंदोलन के रूप में #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान की शुरुआत की है। चौहान ने इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों/कर्मचारियों और स्कूली विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इस अभियान में भाग लें और वृक्षारोपण करके अपनी माँ और धरती माँ के प्रति सम्मान प्रकट करें। वैश्विक अभियान के हिस्से के रूप में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है कि सितंबर 2024 तक देशभर में 80 करोड़ पौधे और मार्च 2025 तक 140 करोड़ पौधे लगाए जाएं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 20 जून 2024 को असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में वृक्षारोपण गतिविधि शुरू की, जिसमें व्यक्तियों ने अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाए। पेड़ लगाने से सरकार द्वारा शुरू किए गए मिशन लाइफ (Mission LiFE) के उद्देश्य को भी पूरा किया जाता है जो पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली का एक जन आंदोलन है। कृषि में, पेड़ उगाना टिकाऊ खेती को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। पेड़ मिट्टी, पानी की गुणवत्ता में सुधार करके और जैव विविधता को बढ़ाकर कृषि उत्पादकता में सुधार करने में मदद करते हैं। पेड़ किसानों को लकड़ी और गैर-लकड़ी उत्पादों से अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्रदान करते हैं। अभियान में भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण को रोकने और उलटने की अपार क्षमता है।

 

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उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी) 2024 के लिए उच्च शैक्षिक संस्थानों और पॉलिटेक्निक से 16 शिक्षकों का चयन किया

शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी) 2024 के लिए उच्च शैक्षिक संस्थानों (एचईआईएस) और पॉलिटेक्निक के 16 शिक्षकों का चयन किया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार विद्यार्थियों, संस्थान और शिक्षा व्यवसाय की उन्नति के लिए प्रेरित, ऊर्जावान और सक्षम संकाय महत्वपूर्ण है।  इसमें शिक्षा इकोसिस्टम में उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करने के लिए पुरस्कार और मान्यता जैसे प्रोत्साहनों की भी परिकल्पना की गई है। ऐसे में, वर्ष 2023 में, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी) की छत्रछाया में उच्च शैक्षिक संस्थानों (एचईआई) और पॉलिटेक्निक के लिए पुरस्कारों की दो श्रेणियां स्थापित करने का निर्णय लिया गया। अब तक यह पुरस्कार केवल स्कूल शिक्षकों तक ही सीमित थे।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी) निम्नलिखित श्रेणियों के अनुसार उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के अनुकरणीय शिक्षकों/संकाय सदस्यों को प्रदान किया जाता है:

श्रेणी I: उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक:

उप-श्रेणी (i): इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, वास्तुकला।

उप-श्रेणी (ii): गणित, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, फार्मेसी सहित शुद्ध विज्ञान

उप-श्रेणी (iii): कला और सामाजिक विज्ञान, मानविकी, भाषाएँ, कानूनी अध्ययन, वाणिज्य, प्रबंधन।

श्रेणी II: पॉलिटेक्निक संस्थानों के शिक्षक: कुल 10 पुरस्कार

चयनित 16 शिक्षक पॉलिटेक्निक, राज्य विश्वविद्यालयों और केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों से हैं।

चयन शिक्षण अधिगम प्रभावशीलता, जनसंपर्क गतिविधियों, अनुसंधान और नवाचार, प्रायोजित अनुसंधान / संकाय विकास कार्यक्रम / परामर्श शिक्षण जैसे मापदंडों के आधार पर शिक्षक के प्रदर्शन पर आधारित है। उपरोक्त में से, सीखने की प्रभावशीलता और जनसंपर्क गतिविधियों का प्रमुख महत्व है।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी)-2024 के लिए चयन प्रक्रिया में दो चरणों वाली प्रक्रिया शामिल है; (i) नामांकित व्यक्तियों की प्रारंभिक छंटनी के लिए प्रारंभिक खोज-सह-स्क्रीनिंग समिति द्वारा मूल्यांकन और (ii) छंटनी किए गए नामांकित व्यक्तियों में से पुरस्कार विजेताओं के चयन के लिए ‘निर्णायक’ समिति द्वारा मूल्यांकन।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी), 2024 के लिए नामांकन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल @www.awards.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन माध्यम से आमंत्रित किए गए थे और इसमें जनभागीदारी के हिस्से के रूप में स्वयं, संस्थागत और सहकर्मी नामांकन के प्रावधान शामिल थे।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी) 2024 के पुरस्कार विजेताओं का विवरण – उच्च शिक्षा विभाग(डीओएचई)

 

क्रम संख्या संस्थान का नाम राज्य
1 डॉ. गांधीमठी ए

 

त्यागराजर पॉलिटेक्निक कॉलेज, जंक्शन मेन रोड, सेलम- 636005, तमिलनाडु

 

तमिलनाडु
2. प्रोफेसर परमार रंजीतकुमार खिमजीभाई

राजकीय पॉलिटेक्निक खड़िया, बिलखा रोड, जूनागढ़, गुजरात-362263

 

गुजरात
3. प्रो. निधि जैन

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली,

हौज़ खास, नई दिल्ली-110016

 

 

दिल्ली
4. डॉ. स्मिलाइन गिरिजा

सविता डेंटल कॉलेज और अस्पताल, सविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज [एसआईएमएटीएस], सविता यूनिवर्सिटी

नंबर 162: पीएच रोड, वेलप्पन्चवाडी, चेन्नई, तमिलनाडु- 600077

तमिलनाडु
5. प्रो. बिरिंची कुमार सर्मा

कवक विज्ञान और पादप रोग विज्ञान विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान,

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश- 221005

 

उत्तर प्रदेश
6. प्रो. श्रीनिवास होथा

 

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान पुणे,

डॉ. होमी भाभा रोड, पुणे, महाराष्ट्र- 411 008

 

महाराष्ट्र
7. डॉ. एसआर केशव

 

अर्थशास्त्र विभाग,

बैंगलोर विश्वविद्यालय, ज्ञान भारती परिसर, केंगेरी, बैंगलोर, कर्नाटक – 560056

 

कर्नाटक
8. प्रो. शिल्पागौरी प्रसाद

गणपुले

 

पुणे जिला शिक्षा संघ के प्रो. रामकृष्ण मोरे कला, वाणिज्य और विज्ञान

कॉलेज, गंगानगर, सेक्टर नंबर 28, निगड़ी प्राधिकरण, पुणे, महाराष्ट्र- 411044

 

महाराष्ट्र
9. डॉ. छायापुरम जया शंकर बाबू

 

पांडिचेरी विश्वविद्यालय, आर. वेंकट रमन नगर, कलापेट, पुद्दुचेरी – 605 014

 

पुद्दुचेरी
10. प्रो. नीलाभ तिवारी

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय

भोपाल परिसर

बागसेवनिया, भोपाल, मध्य प्रदेश

पिन -462043

 

मध्य प्रदेश
11। प्रो. विनय शर्मा

 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की, रुड़की, हरिद्वार, उत्तराखंड-247667

 

उत्तराखंड
12. डॉ. नंदवरम मृदुला

राजकीय महिला महाविद्यालय, मयूर मार्ग, बेगमपेट, हैदराबाद, तेलंगाना 500016

तेलंगाना
13. डॉ. शिमी एस.एल.

 

पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (मानद विश्वविद्यालय), विद्या पथ, सेक्टर 12, चंडीगढ़ 160012

चंडीगढ़
14. प्रो. कपिल आहूजा

 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, खंडवा रोड, सिमरोल, इंदौर, मध्य प्रदेश 453552

 

मध्य प्रदेश
15. डॉ. अनिता सुसीलन

 

स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर, केंगेरी कैंपस, क्राइस्ट डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, केंगेरी-कैंपस, कनमिनिके, कुंबलगोडु, मैसूर रोड, बैंगलोर, कर्नाटक- 560074

 

कर्नाटक
16. प्रो. डॉ. शाहनाज़ अयूब

 

बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कानपुर रोड, झांसी-284128, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश

 

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अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ बिहार के नालंदा में गुरु पद्मसंभव के जीवन और विरासत पर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित करेगा

अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ बिहार के नालंदा में नव नालंदा महाविहार के सहयोग से गुरु पद्मसंभव के जीवन और उनके जीवंत विरासत पर 28 और 29 अगस्त, 2024 को दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा। गुरु रिनपोछे नाम से भी प्रसिद्ध गुरु पद्मसंभव आठवीं शताब्दी में प्राचीन भारत में रहते थे। बुद्ध धम्म में आज सबसे सम्मानित लोगों में से एक गुरु पद्मसंभव को हिमालय क्षेत्र में बुद्ध धम्म के प्रसार का श्रेय दिया जाता है।

बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। लुंबिनी डेवलपमेंट ट्रस्ट, नेपाल के उपाध्यक्ष परम श्रद्धेय खेनपो चिमेद और रॉयल भूटान मंदिर, सेंट्रल मोनास्टिक बॉडी, भूटान के सचिव/मुख्य भिक्षु खेनपो उगयेन नामग्याल सम्मेलन में सम्मानित अतिथि होंगे। दूसरे बुद्ध के रूप में माने जाने वाले गुरु पद्मसंभव को गुरु रिनपोछे भी कहा जाता है, वे हिमालय के प्रसिद्ध ऋषि रहे जो प्राचीन भारत में आठवीं शताब्दी में रहते थे।

इस सम्मेलन के प्रमुख विषयों में उनका जीवन और शिक्षाएं, हिमालय भर में उनकी यात्राएं और, सबसे खास, वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता शामिल होगी। गुरु पदमसंभव योगिक और तांत्रिक प्रथाओं से लेकर ध्यान, कला, संगीत, नृत्य, जादू, लोककथाओं और धार्मिक शिक्षाओं तक संस्कृति के कई पहलुओं के एकीकरण का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। सम्मेलन में पांडुलिपियों, अवशेषों, चित्रों और स्मारकों के माध्यम से उनकी धम्म विरासत का जश्न मनाने का एक ठोस प्रयास किया जाएगा।

सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल हैं:

1. जीवनी संबंधी अंतर्दृष्टि और पौराणिक कथाएं

2. वज्रयान बुद्ध धम्म और तंत्र की शिक्षाएं

3. सांस्कृतिक एवं कलात्मक योगदान

4. यात्राएं और क्षेत्रीय प्रभाव

5. विरासत और समसामयिक प्रासंगिकता

बुद्ध धम्म के मूल सिद्धांतों को फैलाने का प्रयास करते हुए गुरु पदमसंभव ने एक स्थान की विशिष्टताओं और लोगों की संवेदनाओं को समझा। इस प्रकार, उन्होंने अपनी शिक्षाओं को स्थानीय मुहावरे और संस्कृति में ढाला, जिससे आस्था को आत्मसात करना बहुत आसान हो गया। उनके जीवन और समय को याद करते हुए, सम्मेलन में भगवान बुद्ध के उत्कृष्ट संदेश को प्रसारित करने के लिए स्थानीय प्रतीकों और यहां तक ​​कि अनुष्ठानों को माध्यम के रूप में उपयोग कर विभिन्न संस्कृतियों और धार्मिक परंपराओं के साथ उनके तालमेल बिठाने का जो दृष्टिकोण था, उसकी अंतर्दृष्टि मिलने की उम्मीद है।

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एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित

कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बी वी पी जी कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रबंध तंत्र के अध्यक्ष श्री पीके मिश्रा , संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन, प्राचार्य प्रो सुमन ने क्षण्डारोहन किया। संगीत विभाग की छात्राओं ने देश भक्ति गीत प्रस्तुत किया। एनसीसी, एनएसएस ,रोवर्स रेंजर्स के छात्राओं ने संयुक्त मार्च पास्ट प्रस्तुत किया। श्री शुभ्रो सेन ने ऊर्जा पूर्ण भाषण देते हुए सभी को देश प्रेम के प्रति सचेत किया। कैप्टन ममता अग्रवाल ने उच्च शिक्षा अधिकारी द्वारा प्राप्त पत्र का वाचन किया। प्राचार्य सुमन जी ने इस क्षण को गौरवपूर्ण बताते हुए सभी की सहभागिता के लिए धन्यवाद दिया। यह समस्त कार्यक्रम राष्ट्रीय पर्व प्रभारी प्रोफेसर रेखा चौबे के निर्देशन में हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर चित्रा सिंह ने किया। जानकारी देते हुए मीडिया प्रसार प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया कार्यक्रम में सभी शिक्षक कर्मचारी और छात्र उपस्थिति रहे।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

महाविद्यालय में 78वॉ स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉक्टर सुनील कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर ,एसजीएसटी, कानपुर द्वारा ध्वजारोहण से हुईं

ध्वजारोहण में प्राचार्य प्रोसेसर जोसेफ डेनियल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे । मुख्य अतिथि को एनएसएस, रोवर- रेंजर्स तथा एनसीसी विद्यार्थियों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया । तत्पश्चात डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत प्राचार्य दवारा मुख्य अतिथि को पौधा
प्रदान कर औपचारिक स्वागत -से हुई। प्राचार्य का स्वागत स्वामीनाथ वरिष्ठ कार्यालय सहायक ने और प्रोफेसर विनय सेबेस्टियन का स्वागत प्रोफेसर सुनीता वर्मा ने किया। सभागार
में रंगारंग देशभक्ति पूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें छात्र-छात्राओं द्वारा देशभक्ति पूर्ण नृत्य गायन संगीत माइम आदि का प्रदर्शन किया गया| इस अवसर पर मुख्य
अतिथि ने सबको स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए, अपने उदबोधन में कहा कि हम सबको खुद को पहचान कर राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान देने की जरूरत है। अपने लक्ष्य अध्यक्ष वक्‍तत्व में प्राचार्य प्रोफफसर जोसफ डेनियल ने स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुए जीवन में मूल्यो पर चलने व लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम में
उच्च शिक्षा निदेशक प्रयागराज का संदेश भी पढ़ा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन छात्र आयुष कुमार भारती ने किया। धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ कार्यालय सहायक , स्वामीनाथ ने किया। कार्यक्रम की सफलता में आर्यन , जानवी और कई छात्रों ने अहम भूमिका निभाई उनका सहयोग कार्यालय सहयोगी जॉय, निहारिका शालिनी गुप्ता एवं मीना द्वारा किया गया।

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डी जी कॉलेज में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

भारतीय स्वरूप संवाददाता राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। प्राचार्या प्रो वंदना निगम जी ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हुए “समर्थ युवा सशक्त भारत” से संबंधित उद्बोधन दिया तथा उन्हें देश की तरक्की में हर संभव प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। महाविद्यालय की एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला नोडल अधिकारी, कानपुर नगर डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि इस अवसर पर छात्राओं ने रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया। जिसमें एन एस एस वॉलिंटियर सिमरन सिद्दीकी ने अपनी दिलकश आवाज में “तेरी मिट्टी में मिल जावां” गीत गया तथा श्रद्धा, सानिया एवं चंचल ने नृत्य प्रस्तुत कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। संगीत विभाग की छात्राओं के द्वारा भी देशभक्ति गान गया गया। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में मेरी माटी मेरा देश – हर घर तिरंगा अभियान 2024 के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें सेल्फी विद तिरंगा तिरंगा यात्रा, तिरंगा झंडों का वितरण, रैली, भाषण, पोस्टर प्रतियोगिता, रील्स बनाना आदि प्रमुख हैं। संपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रोफेसर अर्चना वर्मा, चीफ प्रॉक्टर प्रो अर्चना श्रीवास्तव, प्रो अर्चना दीक्षित, प्रो उपासना वर्मा, प्रो शुभ्रा राजपूत एवम् कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव समेत महाविद्यालय की समस्त प्राध्यापिकाओं, शिक्षणेतर कर्मचारियों, एनएसएस वॉलिंटियर्स, एन सी सी कैडेट्स, रोवर रेंजर्स एवम् छात्राओं का विशेष सहयोग रहा।

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एस.एन. सेन बी. वी. पी.जी. कॉलेज में अँग्रेजी विभाग द्वारा मनाई गई अरबिंदो घोष की 152 वर्ष वर्षगांठ

भारतीय स्वरूप संवाददाता 13 अगस्त 2024 को एस.एन. सेन बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज में अँग्रेजी विभाग द्वारा श्री अरबिंदो घोष जी के 152 वीँ जयंती पर एक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुमन, समाजशास्त्र की प्रोफेसर रेखा चौबे, अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा प्रोफेसर अलका टंडन एवं निर्णायक मंडल के रूप में उपस्थित अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्षा प्रो निशा वर्मा और संगीत विभाग की कैप्टन ममता अग्रवाल के द्वारा किया गया। 10 प्रतिभागी छात्राओं ने श्री अरविंदो घोष के जीवन परिचय, उनके राष्ट्रीय, राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यिक योगदान तथा घोष जी के योगी स्वभाव पर प्रकाश डाला। छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्या प्रो सुमन ने कहा कि साहित्यिक विदुषियों से सम्बंधित जयंतियों का आयोजन प्रत्येक वर्ष मनाया जाना चाहिए और उन्होंने इसमें छाआत्रों के अधिकतम सहभागिता पर भी बल दिया। कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्या डाँ कोमल सरोज और डाँ पूजा गुप्ता ने किया। विभागाध्यक्षा प्रो अलका टंडन ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मीडिया प्रसार प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जान्हवी ओमर, द्वितीय स्थान स्नेहा सिंह और तृतीय स्थान सताक्षी द्विवेदी ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में प्रो मीनाक्षी व्यास, डॉ शुभा बाजपेई, डॉ रश्मि गुप्ता एवं डॉक्टर प्रीता अवस्थी उपस्थित रहीं।

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दयानंद गर्ल्स कॉलेज द्वारा मेरी माटी मेरा देश – हर घर तिरंगा अभियान 2024 के अंतर्गत तिरंगा यात्रा रैली निकाल झंडों का वितरण किया

भारतीय स्वरूप संवाददाता राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के द्वारा महाविद्यालय की एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी तथा जिला नोडल अधिकारी, कानपुर नगर डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में मेरी माटी मेरा देश – हर घर तिरंगा अभियान 2024 के अंतर्गत तिरंगा यात्रा रैली निकाली गई। इस रैली के दौरान लगभग 100 छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नमामि गंगे विभाग, भाजपा, उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक श्री कृष्णा दीक्षित बड़े जी रहे। उनके साथ में अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्री अनूप चौधरी व फरहान भी रैली में सम्मिलित हुए। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व पर हम देश के वीर बलिदानी शहीदों को याद करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस तिरंगा यात्रा के दौरान 50 झंडो का वितरण छात्राओं तथा जन- सामान्य को किया गया। सभी न एस एस वॉलंटियर्स ने उत्साह के साथ देशभक्ति के गीत गए, नारे लगाए व झंडे के साथ सेल्फी भी ली जिसे मेरी माटी मेरा देश व युवा पोर्टल पर अपलोड किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस वॉलिंटियर्स अंतरा कश्यप , श्रद्धा, सान्या,, सिमरन, बुशरा, इन्नमा, अदिति व चंचल का विशेष सहयोग रहा।

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अत्यधिक छिद्रपूर्ण (हाइली पोरस) ज़ेरोजेल ड्रेसिंग रक्त का तेजी से थक्का (क्लोटिंग) बनाकर जीवन बचा सकती है

शोधकर्ताओं ने सिलिका नैनोकणों और कैल्शियम को शामिल करते हुए एक छिद्रपूर्ण समग्र ज़ेरोजेल ड्रेसिंग विकसित की है जो रक्त को तेजी से जमने में मदद कर सकती है और अनियंत्रित रक्तस्राव से राहत प्रदान कर सकती है। व्यावसायिक ड्रेसिंग की तुलना में इस मिश्रण ने रक्त के थक्के जमने (ब्लड क्लोटिंग) की दर में महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है । अनियंत्रित रक्तस्राव दुर्घटनाओं या चोटों और सैन्य या सर्जिकल ऑपरेशन के दौरान होने वाली दर्दनाक मृत्यु  के प्रमुख कारणों में से एक है। आघात से होने वाली 40% से अधिक मौतें गंभीर रक्त हानि के कारण होती हैं। रूई  (गॉज), सामान्यतः प्रयोग की जाने  वाली रूई (गॉज)  अथवा ऐसी ही अन्य  प्राथमिक चिकित्सा सामग्री या चोट वाली जगह पर रक्त के प्रवाह में कमी, फाइब्रिन सक्रियण द्वारा प्लेटलेट के थक्के प्लग) का  गठन और रक्त के अन्य थक्के मार्गों के सक्रियण के माध्यम से काम करने वाली मानव शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा गंभीर रक्तस्राव को रोकने के लिए अपर्याप्त है।  इसलिए, रक्त  की कमी को घटाने  के लिए बेहतर हेमोस्टैटिक सामग्रियों की तत्काल आवश्यकता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, अगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) पुणे ने एक अत्यधिक छिद्रपूर्ण (हाइली पोरस) स्पंजी ज़ेरोजेल हेमोस्टैटिक ड्रेसिंग विकसित की है जो सिलिका नैनोकणों (सिलिकॉन नैनोपार्टिकल्स –  एसआईएनपीएस) और कैल्शियम जैसे सेल (एगोनिस्ट) के अंदर एक प्राप्तकर्ता (रिसेप्टर) से बंधने वाले पदार्थों के साथ पूरक है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने मिश्रित सामग्री का अध्ययन किया और पाया कि इसने व्यावसायिक ड्रेसिंग क्लॉटिंग क्षमता की तुलना में रक्त के थक्के बनने के सूचकांक को 13 गुना बढ़ा दिया। अच्छी तरह से विशेषता वाले ज़ेरोजेल ने लगभग 30 माइक्रोन आकार के कई छिद्रों की उपस्थिति दिखाई जो ड्रेसिंग की उच्च अवशोषण क्षमता में योगदान करती है। इन पूरकों ने थक्के जमने की क्षमता में सुधार किया और परिणामस्वरूप रक्त का त्वरित अवशोषण (क्विक अब्सोर्बेंस) हुआ। प्लेटलेट्स रक्त का एक महत्वपूर्ण घटक हैं और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में योगदान करते हैं। प्लेटलेट आकार में परिवर्तन, कैल्शियम का स्राव और प्लेटलेट सतह पर रिसेप्टर्स की सक्रियता जैसे कई कारक रक्त के थक्के जमने की  जटिल प्रक्रिया  में महती भूमिका निभाते हैं। ज़ेरोजेल हेमोस्टैटिक ड्रेसिंग ने सक्रिय प्लेटलेट्स में अच्छी तरह से निर्मित  स्यूडोपोडिया के विकास के कारण प्लेटलेट एकत्रीकरण को बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप एग्लूटिनेशन हुआ जो थक्के बनने की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाता है। इसके अलावा, इस मिश्रित पदार्थ   ने कैल्शियम उत्सर्जन  और इसके निष्कासन को बढ़ाया। इसके अलावा, मानव प्लेटलेट्स में प्रोटीज सक्रिय (एक्टिव) रिसेप्टर जीन (प्लेटलेट झिल्ली में मौजूद पीएआर 1 जीन – थ्रोम्बिन सिग्नलिंग की सुविधा देता है) के सक्रिय रूप में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।  प्लेटलेट कैल्शियम रिलीज और प्लेटलेट सतह पर पीएआर 1 का उन्नत होना (अपग्रेडेशन) प्लेटलेट के  आकार परिवर्तन और एकत्रीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। जर्नल ऑफ एप्लाइड पॉलिमर साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि पीएआर 1 जीन सक्रियण और कैल्शियम स्टोर रिलीज के माध्यम से प्लेटलेट सक्रियण के अंतरकोशिकीय आणविक तंत्र (इंट्रासेल्युलर मॉलिक्यूलर मैकेनिज्म) – प्लेटलेट्स के सक्रियण (एक्टिवेशन) में एक महत्वपूर्ण घटना, ज़ेरोगेल कंपोजिट की हेमोस्टैटिक दक्षता के लिए उत्तरदायी हैं। ऐसी ड्रेसिंग सर्जरी और आघात देखभाल के दौरान रक्त की हानि, विकलांगता और मृत्यु दर को कम करने के लिए एक संभावित हेमोस्टैटिक समाधान प्रदान कर सकती है।

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भारत, मालदीव ने 1,000 सिविल सेवा अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और मालदीव के विदेश मंत्री श्री मूसा ज़मीर ने 9 अगस्त को मालदीव के माले  में दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी संवाद के तहत 2024-2029 की अवधि के दौरान मालदीव के 1,000 सिविल सेवा अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया।

विदेश मंत्रालय के मार्गदर्शन में, राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) अब तक बांग्लादेश, तंजानिया, गाम्बिया, मालदीव, श्रीलंका और कंबोडिया के सिविल सेवकों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के साथ-साथ लैटिन अमेरिकी देशों और भारत-प्रशांत द्वीप-समूह सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) तथा हिन्द महासागर तटीय सहयोग संघ (आईओआर) देशों के लिए बहु-देशीय कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन कर चुका है।

क्षमता निर्माण पहल के अंतर्गत, 8 जून, 2019 को मालदीव के 1000 सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी), और मालदीव गणराज्य के मालदीव सिविल सेवा आयोग  के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

2024 तक, राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) ने मालदीव के सिविल सेवकों के लिए क्षेत्रीय प्रशासन में कुल 32 क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में मालदीव के स्थायी सचिवों, महासचिवों और उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों सहित कुल 1000 सिविल सेवकों को प्रशिक्षित कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है। इसके तहत एक कार्यक्रम भ्रष्टाचार विरोधी आयोग (एसीसी) के लिए और एक कार्यक्रम मालदीव के सूचना आयोग कार्यालय (आईसीओएम) के लिए किया गया।

इस सहयोग की सफलता के मद्देनजर मालदीव के विदेश मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों के लिए समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण का अनुरोध किया। 9 अगस्त, 2024 को इस समझौता ज्ञापन को आधिकारिक रूप से नवीनीकृत किया गया, जिसमें 2029 तक मालदीव के 1,000 अन्य सिविल सेवकों को प्रशिक्षित करने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की गई। इस नवीनीकृत साझेदारी से न सिर्फ मालदीव के सिविल सेवकों की सार्वजनिक नीति, शासन और क्षेत्र प्रशासन में क्षमताओं में वृद्धि होगी बल्‍कि भारत और मालदीव के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

भारत सरकार का राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) कई देशों में सार्वजनिक नीति और शासन संबंधी ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके मध्य-करियर क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में नागरिक-केंद्रित शासन, सेवा वितरण में सुधार और शासन में नवाचारों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है। इन कार्यक्रमों से नागरिकों के डिजिटल सशक्तिकरण और संस्थानों के डिजिटल परिवर्तन के मामले में भारत के प्रयासों का पता चलता है ।

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