भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 8 अगस्त क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के इतिहास विभाग द्वारा रसायन विज्ञान सेमिनार कक्ष में ‘काकोरी दिवस’ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन का स्मरण करते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उसके महत्व को रेखांकित करना था।
कार्यक्रम का संचालन अपराजिता सिंह ने किया। इतिहास विभाग की अंतिम वर्ष की बी.ए. छात्रा सुश्री उन्नति मेहरोत्रा ने काकोरी की घटनाओं और उनसे मिलने वाली प्रेरणाओं पर प्रकाश डाला। इतिहास विभाग की शिक्षिका सुश्री उज्मा मुमताज ने काकोरी ट्रेन एक्शन तथा विशेष रूप से राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान की क्रांतिकारी मित्रता पर विस्तार से चर्चा की, मुख्य वक्ता डॉ. हरेंद्र नारायण सिंह ने स्थानीय इतिहास के अध्ययन के महत्व पर बल देते हुए विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के योगदान का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में डॉ. श्वेता चंद, उप-प्राचार्य, डॉ. रामाशंकर सिंह, शिक्षकगण एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. रामाशंकर सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
शिक्षा
नशा मुक्त भारत पखवाड़ा के अन्तर्गत पदयात्रा कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन महाविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान के पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत प्राचार्या डॉ सुमन के निर्देशन में पदयात्रा का आयोजन किया गया। एनएसएस इकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ श्वेता रानी के नेतृत्व में महाविद्यालय से पदयात्रा प्रारम्भ की गयी। पदयात्रा में डॉ गार्गी यादव, कैप्टन ममता अग्रवाल, डॉ प्रीति पांडे, डॉ संगीता सिंह, डॉ अनामिका राजपूत, डॉ पूजा गुप्ता, डॉ प्रीता अवस्थी सहित समस्त शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। कुछ छात्राओं द्वारा महाविद्यालय परिसर में स्लोगन चस्पा कर के जागरुकता फैलाई। स्वयंसेविका माही मिश्रा, शैली यादव,रानू यादव, दिव्यांशी तिवारी सहित 80 से अधिक NSS, NSS, Rangers की छात्राओं द्वारा प्रतिभाग किया जाएगा।
क्राइस्ट चर्च कॉलेज ने राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस मनाया
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 3 अगस्त : क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस का आयोजन भारत के महान वैज्ञानिक एवं आधुनिक रसायन विज्ञान के अग्रदूत आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय की 165वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। यह कार्यक्रम केमिकल सोसायटी 2026–27 के तत्वावधान में विभागीय सेमिनार कक्ष में प्रातः 11:00 बजे से 12:00 बजे तक आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रो. मीत कमल के स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, प्राचार्य, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत किया। इसके पश्चात मोहम्मद मुनीर द्वारा मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
रसायन विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रो. अनिंदिता भट्टाचार्य ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए केमिकल सोसायटी के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों की घोषणा की तथा उन्हें वैज्ञानिक सोच और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
इसके उपरांत प्रो.ज्योत्सना लाल ने राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के महत्व एवं केमिकल सोसायटी की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। साथ ही, आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय के जीवन, उनके वैज्ञानिक योगदान तथा भारतीय रसायन विज्ञान के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर आधारित एक लघु वीडियो भी प्रस्तुत किया गया।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल देते हुए विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में समर्पण एवं जिज्ञासा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि प्रो. अमर श्रीवास्तव, प्राचार्य, हर सहाय कॉलेज, कानपुर का परिचय डॉ. धनंजय डे ने कराया। अपने प्रेरणादायक व्याख्यान में प्रो. श्रीवास्तव ने आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय के अमूल्य योगदान, समकालीन वैश्विक चुनौतियों के समाधान में रसायन विज्ञान की भूमिका तथा युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा अत्यंत सराहा गया।
व्याख्यान के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक रसायन विज्ञान एवं अनुसंधान से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे।
कार्यक्रम का समापन प्रो. श्वेता चन्द द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, प्राचार्य, शिक्षकों, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन रसायन विज्ञान विभाग की वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने तथा आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय के प्रेरणादायी योगदान को स्मरण करने की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
Read More »जवाहर नवोदय विद्यालय, कानपुर नगर में कक्षा-6 प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि 07 अगस्त तक बढ़ी*
दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर (जिला सूचना कार्यालय) नगर, दिनांक 02 अगस्त, 2026* पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सरसौल, कानपुर नगर के प्रभारी प्राचार्य आर. के. सिंह ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा-2027 के अंतर्गत कक्षा-6 में प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 07 अगस्त, 2026 कर दी गई है। ऐसे अभ्यर्थी, जिन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है, वे निर्धारित तिथि तक अपना ऑनलाइन आवेदन पूर्ण कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न की जाएगी। प्रथम चरण में अभ्यर्थी को राज्य, जनपद, विकास खंड, विद्यालय का नाम, वास्तविक पता, अभ्यर्थी का नाम, अभिभावक का मोबाइल नंबर तथा जन्मतिथि सहित आवश्यक विवरण दर्ज करना होगा। इसके पश्चात पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त यूजर आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से द्वितीय चरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी।
द्वितीय चरण में अभ्यर्थी का नवीनतम पासपोर्ट आकार का फोटो, हस्ताक्षर, माता-पिता के हस्ताक्षर तथा कक्षा-5 में अध्ययनरत होने का विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। सभी विवरण एवं आवश्यक अभिलेख सफलतापूर्वक अपलोड होने के बाद आवेदन पत्र का प्रिंट सुरक्षित रख लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रवेश हेतु अभ्यर्थी की जन्मतिथि 01 मई, 2015 से 31 जुलाई, 2017 (दोनों तिथियां सम्मिलित) के मध्य होनी चाहिए। अभ्यर्थी www.navodaya.gov.in तथा https://cbseitms.rcil.gov.in/nvs/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा शनिवार, 28 नवम्बर, 2026 को आयोजित की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि अंतिम तिथि की प्रतीक्षा किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, जिससे किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा से बचा जा सके। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी एवं अभिभावक उपरोक्त वेबसाइटों का अवलोकन कर सकते हैं।
डी जी कॉलेज में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत : संकल्प अभियान” का आयोजन को सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु प्रेरित करना था। इस अवसर पर “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसमें प्रो रुचिमिता पांडे ने युवाओं को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों जैसे मेडिटेशन सत्र, जागरूकता कार्यक्रम, कला प्रतियोगिता , मेडिटेशन, खेलकूद एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस अभियान के शुभारंभ का सजीव प्रसारण छात्राओं ने उत्साहपूर्वक देखा तथा नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं एवं उपस्थित जनसमूह को यह शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करेंगी तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगी। इस अवसर पर “Say No to Drugs, Say Yes to Life” तथा “युवा शक्तिशाली बनेगी, विकसित भारत गढ़ेगी” जैसे प्रेरणादायक संदेशों का प्रसार किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन डॉ. संगीता सिरोही (कार्यक्रम अधिकारी, एन.एस.एस.) के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम तथा निदेशक (स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम) प्रो. अर्चना वर्मा तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेन्द्र श्रीवास्तव का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, माय भारत वॉलंटियर्स, एन.सी.सी. इंचार्ज प्रो. शुभ्रा राजपूत, प्रेंजर प्रभारी प्रो. स्वाति सक्सेना, डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ पूजा श्रीवास्तव, डॉ कुमुद लता, डॉ उमा अवस्थी, डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ साधना सिंह, डॉ सुषमा शर्मा, डॉ वंदना द्विवेदी, डॉ पिंकी द्विवेदी, डॉ दीपाली सक्सेना, समस्त एनएसएस समिति एवं सांस्कृतिक समिति का विशेष योगदान सराहनीय रहा।
Read More »निपुण भारत मिशन और मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता
यह मिशन, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, समग्र शिक्षा की केंद्र प्रायोजित योजना — स्कूली शिक्षा के लिए एक समेकित योजना — के तत्वावधान में लॉन्च किया गया है। सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश निपुण भारत मिशन का कार्यान्वयन कर रहे हैं। यह पहली बार है कि 3-6 वर्ष के आयु वर्ग को 5+3+3+4 संरचना के प्रारंभिक चरण में, जिसमें 3 वर्ष की बालवाटिका तथा कक्षा 1 एवं 2 शामिल हैं, विद्यालयी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रारंभिक चरण के लिए राज्य-वार नामांकन का विवरण अनुबंध-I में दिया गया है।
समग्र शिक्षा के अंतर्गत निपुण भारत मिशन सहित, विभिन्न हस्तक्षेपों के कार्यान्वयन के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनकी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तैयार की गई समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट (एडब्ल्यूपी एंड बी) के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इन योजनाओं का मूल्यांकन तथा अनुमोदन/आकलन योजना के कार्यक्रमगत एवं वित्तीय मानकों के अनुसार राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के साथ परामर्श करके परियोजना अनुमोदन बोर्ड (पीएबी) द्वारा किया जाता है।
समग्र शिक्षा के लिए निधि एक समग्र रूप में जारी की जाती है। इन्हें कुछ शर्तों की पूर्ति के आधार पर जारी किया जाता है, जैसे व्यय की प्रगति, राज्यांश की अनुरूप प्राप्ति, लेखापरीक्षित लेखे, संचयी राज्यांश का विवरण, लंबित अग्रिमों का विवरण, अद्यतित व्यय विवरण तथा लेखापरीक्षित उपयोगिता प्रमाण-पत्र। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत (समग्र शिक्षा के भाग के रूप में) पिछले तीन वर्षों तथा चालू वर्ष के दौरान आवंटित निधियों का राज्य-वार विवरण अनुबंध-II में दिया गया है।
सार्वभौमिक मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) प्राप्त करने तथा अधिगम (लर्निंग) परिणामों में सुधार के लिए निपुण भारत मिशन के अंतर्गत निम्नलिखित विभिन्न पहलें की गई हैं:-
- कक्षा 1 के लिए खेल-आधारित तीन माह का ‘स्कूली तैयारी मॉड्यूल एवं दिशानिर्देश’, जिसका नाम ‘विद्या प्रवेश’ है, 29 जुलाई, 2021 को प्रारंभ किया गया। विद्या प्रवेश कार्यक्रम का उद्देश्य विविध पृष्ठभूमियों (बालवाटिका, आंगनवाड़ी केंद्र (एडब्ल्यूसी), घर, निजी प्ले स्कूल आदि) से कक्षा 1 में आने वाले सभी बच्चों में स्कूली तैयारी को बढ़ावा देना है, जिससे उनका कक्षा 1 में सहज अंतरण सुनिश्चित हो सके। यह आनंददायक एवं प्रेरक वातावरण में खेल-आधारित, आयु तथा विकास के अनुरूप अधिगम अनुभव प्रदान करता है, जिससे बच्चे की पूर्व-साक्षरता, पूर्व-संख्यात्मकता, संज्ञानात्मक तथा सामाजिक कौशलों के साथ-साथ समग्र विकास को सुदृढ़ किया जा सके। यह कार्यक्रम पूरे देश में लागू किया जा रहा है। वर्ष 2022-23 से अब तक 8.8 लाख विद्यालयों के 5 करोड़ से अधिक विद्यार्थी इससे लाभान्वित हो चुके हैं।
- 3 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री (एलटीएम) के संग्रह ‘जादुई पिटारा’ (जेपी) का शुभारंभ 20 फरवरी, 2023 को किया गया। यह एक बॉक्स है, जिसमें प्रारंभिक चरण के लिए 53 शिक्षण-अधिगम सामग्री शामिल हैं, जैसे खिलौने, खेल, पहेलियां, कठपुतलियां, पोस्टर, फ्लैशकार्ड, कहानी कार्ड, विद्यार्थियों के लिए प्ले बुक सेट तथा शिक्षकों के लिए पुस्तिकाएं। जादुई पिटारा की उपयोगकर्ता पुस्तिका तथा सभी गतिविधि कार्ड, चित्र पठन पोस्टर, कहानी कार्ड और निर्देशों का 22 भाषाओं में अनुवाद किया गया है। इसमें प्रशिक्षकों के लिए ‘उन्मुख’ नामक एक प्रशिक्षक पुस्तिका भी शामिल है, जो प्रशिक्षकों के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका है और जिसमें 3-6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए गतिविधियों का संकलन उपलब्ध है।
- जादुई पिटारा (जेपी) पर आधारित ई-जादुई पिटारा (ई-जेपी) का शुभारंभ 10 फरवरी, 2024 को किया गया। ई-जेपी एक मोबाइल-आधारित एप्लिकेशन और वेबसाइट है, जो खेल-आधारित शिक्षण पद्धति पर आधारित है तथा 3 से 8 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षण-अधिगम सामग्री (एलटीएम) के संग्रह ‘जादुई पिटारा’ के अधिगम को व्यापक रूप से प्रसारित करने का माध्यम है। इसे https://ejaaduipitara.ncert.gov.in/ पर देखा जा सकता है।
- कक्षा 1 और 2 के लिए खेल एवं गतिविधि-आधारित पाठ्य-पुस्तकें भी तैयार की गई हैं और उन्हें राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है (हिंदी– “सारंगी”, अंग्रेज़ी– “मृदंग”, गणित– “जॉयफुल मैथमेटिक्स” एवं “आनंदमय गणित”, तथा उर्दू– “शहनाई”), जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा प्रारंभिक चरण के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एफएस) की अनुशंसाओं के अनुरूप हैं।
- मातृभाषा में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के अधिगम के लिए 121 स्थानीय भाषाओं में प्रारंभिक पठन-पुस्तिकाएं (प्राइमर्स) विकसित की गई हैं। ये वे भाषाएं हैं, जिन्हें कम-से-कम 10,000 लोग बोलते हैं।
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के आधार पर अधिगम परिणामों के अनुरूप बालवाटिका से लेकर कक्षा 2 तक के लिए बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के लक्ष्य विकसित किए गए हैं।
- शिक्षकों के सतत् व्यावसायिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अक्टूबर, 2020 में दीक्षा (ज्ञान साझाकरण हेतु डिजिटल अवसंरचना) मंच पर ऑनलाइन निष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के विकासात्मक लक्ष्यों और अधिगम परिणामों के अनुरूप पाठ्य तथा वीडियो सामग्री सहित बहुभाषी प्रशिक्षण मॉड्यूल उपलब्ध कराता है। दीक्षा पर एफएलएन के लिए एक समर्पित अनुभाग भी उपलब्ध है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले अधिगम संसाधन देशभर में, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित जिलों सहित, उपलब्ध हैं। वर्तमान में दीक्षा पर 133 भाषाओं (126 भारतीय भाषाएं और 7 विदेशी भाषाएं) में सामग्री उपलब्ध है, तथा निष्ठा एफएलएन एवं ईसीसीई के अंतर्गत 15.57 लाख से अधिक उपयोगकर्ता ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
अनुबंध-I
राज्यसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1142, जिसका उत्तर 29.07.2026 को दिया गया, के भाग (क) एवं (ख) के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध-I; माननीय सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी, श्री बृज लाल, डॉ. संदीप कुमार पाठक तथा श्री केसरिदेवसिंह झाला द्वारा पूछे गए “निपुण भारत मिशन और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता” संबंधी प्रश्न के संदर्भ में
| सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रारंभिक चरण के लिए राज्य-वार नामांकन | ||||
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | 2022-23 | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 |
| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 11,291 | 11,042 | 10,913 | 11,474 |
| आंध्र प्रदेश | 6,40,500 | 6,64,776 | 5,82,824 | 5,44,883 |
| अरुणाचल प्रदेश | 48,179 | 46,616 | 40,359 | 37,964 |
| असम | 13,14,702 | 12,22,654 | 11,15,213 | 10,35,658 |
| बिहार | 36,35,668 | 25,90,376 | 25,11,248 | 24,28,158 |
| चंडीगढ़ | 30,164 | 29,309 | 26,925 | 30,343 |
| छत्तीसगढ़ | 7,21,279 | 7,23,579 | 6,76,804 | 6,24,948 |
| दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव | 20,347 | 22,362 | 22,464 | 24,704 |
| दिल्ली | 4,50,703 | 4,16,484 | 3,85,120 | 3,54,797 |
| गोवा | 58,296 | 57,245 | 55,037 | 52,387 |
| गुजरात | 13,89,600 | 13,35,387 | 12,69,636 | 17,25,726 |
| हरियाणा | 3,90,089 | 3,04,590 | 3,15,643 | 3,24,882 |
| हिमाचल प्रदेश | 1,57,190 | 1,56,867 | 1,45,519 | 1,43,975 |
| जम्मू और कश्मीर | 4,02,784 | 4,18,042 | 3,90,012 | 3,60,676 |
| झारखंड | 11,24,858 | 10,56,983 | 9,11,220 | 8,54,140 |
| कर्नाटक | 12,31,328 | 9,96,359 | 9,14,375 | 8,91,573 |
| केरल | 9,08,195 | 8,79,307 | 8,14,291 | 7,49,451 |
| लद्दाख | 8,934 | 8,357 | 8,314 | 8,166 |
| लक्षद्वीप | 3,322 | 3,403 | 3,409 | 3,423 |
| मध्य प्रदेश | 17,37,576 | 15,28,342 | 12,45,396 | 11,82,094 |
| महाराष्ट्र | 25,85,858 | 24,19,182 | 22,26,691 | 22,06,774 |
| मणिपुर | 81,599 | 77,863 | 75,344 | 66,876 |
| मेघालय | 2,96,253 | 2,88,573 | 2,77,943 | 3,00,931 |
| मिजोरम | 45,663 | 43,612 | 39,308 | 38,971 |
| नागालैंड | 61,265 | 53,689 | 51,483 | 47,521 |
| ओडिशा | 10,64,315 | 10,08,836 | 9,17,659 | 10,51,011 |
| पुदुचेरी | 24,007 | 21,877 | 20,329 | 20,109 |
| पंजाब | 7,99,946 | 7,97,689 | 7,24,138 | 6,96,921 |
| राजस्थान | 16,49,319 | 13,24,618 | 10,54,543 | 10,53,570 |
| सिक्किम | 14,292 | 12,731 | 12,556 | 12,526 |
| तमिलनाडु | 9,78,945 | 8,81,865 | 7,93,853 | 7,65,646 |
| तेलंगाना | 5,07,830 | 4,08,333 | 3,69,732 | 3,86,831 |
| त्रिपुरा | 94,516 | 90,103 | 85,881 | 84,963 |
| उत्तराखंड | 48,81,250 | 37,37,647 | 28,95,290 | 30,32,603 |
| उत्तर प्रदेश | 1,64,080 | 1,40,936 | 1,06,552 | 77,636 |
| पश्चिम बंगाल | 34,85,224 | 35,19,543 | 32,71,717 | 31,33,498 |
| अखिल भारतीय | 3,10,19,367 | 2,72,99,177 | 2,43,67,741 | 2,43,65,809 |
स्रोत: यूडीआईएसई+
अनुबंध-II
राज्यसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1142, जिसका उत्तर 29.07.2026 को दिया गया, के भाग (ग) के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध-II; माननीय सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी, श्री बृज लाल, डॉ. संदीप कुमार पाठक तथा श्री केसरिदेवसिंह झाला द्वारा पूछे गए “निपुण भारत मिशन और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता” संबंधी प्रश्न के संदर्भ में
निपुण भारत मिशन के अंतर्गत राज्य-वार आवंटित निधि
(लाख रुपये में)
| क्रम संख्या | राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 | 2026-27 |
| कुल योग | 3,83,290.85 | 4,60,780.93 | 2,81,690.24 | 4,19,572.53 | |
| 1 | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 866.74 | 764.23 | 836.32 | 837.88 |
| 2 | आंध्र प्रदेश | 6,184.48 | 7,842.35 | 3,732.30 | 7,455.05 |
| 3 | अरुणाचल प्रदेश | 3,596.81 | 3,704.90 | 3,514.69 | 839.3 |
| 4 | असम | 13,800.57 | 34,663.28 | 7,068.95 | 16,510.92 |
| 5 | बिहार | 48,337.02 | 65,361.86 | 25,385.06 | 60,614.96 |
| 6 | चंडीगढ़ | 483.79 | 406.52 | 372.62 | 450.92 |
| 7 | छत्तीसगढ़ | 15,886.90 | 17,678.32 | 7,506.32 | 11,841.47 |
| 9 | दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव | 1,046.74 | 1,018.90 | 1,003.29 | 928.55 |
| 8 | दिल्ली | 6,428.72 | 8,553.69 | 5,577.95 | 7,072.44 |
| 10 | गोवा | 296.94 | 293.58 | 49.49 | 43.99 |
| 11 | गुजरात | 11,135.59 | 13,461.54 | 13,120.29 | 13,438.93 |
| 12 | हरियाणा | 11,755.65 | 9,737.24 | 2,301.23 | 5,302.37 |
| 13 | हिमाचल प्रदेश | 11,526.46 | 15,288.30 | 14,986.39 | 14,158.11 |
| 14 | जम्मू और कश्मीर | 19,390.83 | 18,399.82 | 15,955.20 | 11,974.55 |
| 15 | झारखंड | 11,939.48 | 15,334.93 | 6,119.98 | 20,321.90 |
| 16 | कर्नाटक | 10,044.22 | 9,463.97 | 9,397.99 | 21,140.29 |
| 17 | केरल | 5,250.79 | 5,631.18 | 3,666.76 | 3,610.35 |
| 18 | लद्दाख | 2,131.85 | 752.75 | 758.37 | 681.35 |
| 19 | लक्षद्वीप | 30.7 | 44.21 | 46.36 | 36.66 |
| 20 | मध्य प्रदेश | 32,797.48 | 43,175.68 | 15,572.15 | 26,147.31 |
| 21 | महाराष्ट्र | 21,853.42 | 18,918.77 | 7,905.88 | 20,714.46 |
| 22 | मणिपुर | 4,121.95 | 4,589.13 | 1,895.21 | 2,105.18 |
| 23 | मेघालय | 4,884.50 | 1,082.32 | 1,203.50 | 143.6 |
| 24 | मिजोरम | 1,655.45 | 1,370.69 | 1,315.08 | 1,214.12 |
| 25 | नागालैंड | 4,591.07 | 982.64 | 389.16 | 665.65 |
| 26 | ओडिशा | 15,000.99 | 15,060.12 | 29,408.09 | 27,811.61 |
| 27 | पुदुचेरी | 775.64 | 174.87 | 113.65 | 307.72 |
| 28 | पंजाब | 10,162.88 | 14,894.76 | 12,281.56 | 11,970.94 |
| 29 | राजस्थान | 15,156.90 | 15,379.14 | 5,682.64 | 15,437.26 |
| 30 | सिक्किम | 1,835.15 | 1,157.59 | 753.7 | 883 |
| 31 | तमिलनाडु | 13,086.10 | 16,917.51 | 5,462.43 | 12,279.21 |
| 32 | तेलंगाना | 2,753.43 | 4,421.39 | 8,148.11 | 4,990.27 |
| 33 | त्रिपुरा | 1,939.47 | 2,166.86 | 1,241.07 | 1,762.33 |
| 34 | उत्तराखंड | 4,571.27 | 5,085.57 | 2,285.12 | 4,043.02 |
| 35 | उत्तर प्रदेश | 53,987.75 | 66,364.13 | 55,996.36 | 85,487.14 |
| 36 | पश्चिम बंगाल | 13,983.12 | 20,638.20 | 10,637.00 | 6,349.71 |
शिक्षा को रोजगार अवसरों के साथ जोड़ना
राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ), राष्ट्रीय उच्च शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ), अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) और मल्टीपल एंट्री एवं मल्टीपल एग्जिट प्रावधान अकादमिक, व्यावसायिक और अनुभवात्मक शिक्षा के एकीकरण, संचय और हस्तांतरण के लिए एक ढांचा प्रदान करते हैं।
अकादमिक शिक्षा और रोजगार की आवश्यकताओं के बीच संबंध को मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में परिणाम आधारित शिक्षा, कौशल आधारित मॉड्यूल, परियोजना आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप और उद्योग सहभागिता का प्रावधान किया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने उच्च शिक्षण संस्थानों और तकनीकी संस्थानों द्वारा संचालित किए जाने वाले अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
इसका उद्देश्य अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना, स्नातकों की दक्षताओं को बढ़ाना और उनकी रोजगार क्षमता में सुधार करना है। यूजीसी और एआईसीटीई अप्रेंटिसशिप घटक के मूल्यांकन के लिए उद्योग/प्रतिष्ठान, शिक्षा जगत और उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) को शामिल करते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाते हैं।
राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) का उद्देश्य भारतीय युवाओं को कार्यस्थल आधारित प्रशिक्षण और कौशल प्रदान करना है। इसे शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मुंबई, कानपुर, चेन्नई और कोलकाता स्थित चार क्षेत्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण बोर्डों/व्यावहारिक प्रशिक्षण बोर्डों (बीओएटी/बीओपीटी) के माध्यम से लागू किया जाता है।
पिछले पांच वर्षों (2021-2022 से 2025-2026) के दौरान एनएटीएस के अंतर्गत लगभग 17.22 लाख अप्रेंटिस शामिल किए गए हैं। इस अवधि के दौरान शिक्षा मंत्रालय ने अप्रेंटिस के लिए स्टाइपेंड सहायता के रूप में 2892.75 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
एनएटीएस 2.0 पोर्टल को अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण के पंजीकरण और प्रबंधन के लिए एक तकनीक आधारित मंच के रूप में शुरू किया गया है। इसमें अप्रेंटिसशिप अनुबंधों की डिजिटल प्रक्रिया, प्रशिक्षण और स्टाइपेंड संबंधी प्रक्रियाओं की निगरानी तथा अप्रेंटिस और प्रतिष्ठानों की बेहतर ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है।
एनएटीएस के अंतर्गत अब तक एईडीपी के कार्यान्वयन के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) के साथ लगभग 457 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 75,000 से अधिक अप्रेंटिस एआई अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम से लाभान्वित हुए हैं।
एआईसीटीई ने उभरते क्षेत्रों और प्रमुख इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रमों तथा शिक्षण पद्धतियों का व्यापक मूल्यांकन किया है, ताकि उन्हें बदलती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
इस मूल्यांकन में डिग्री-केंद्रित शिक्षा से हटकर कौशल, अनुकूलन क्षमता, व्यावहारिक अनुभव और उद्योग प्रासंगिकता पर अधिक जोर दिया गया है। मॉडल पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के प्रमुख शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, सार्वजनिक संगठनों और अनुसंधान संस्थानों के परामर्श से विकसित किया गया है।
इन पाठ्यक्रमों में अनुभवात्मक शिक्षण, इंटर्नशिप, बहुविषयक अनुभव और उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित दक्षताओं को शामिल किया गया है, ताकि वर्तमान और भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
मॉडल पाठ्यक्रम में अधिक लचीलापन प्रदान करने के लिए क्रेडिट आवश्यकताओं को कम किया गया है और रोजगार क्षमता पर केंद्रित “मूल्यवर्धित” पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है।
एआईसीटीई ने सितंबर 2025 में प्रोजेक्ट प्रैक्टिस शुरू किया है, जिसका उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के एआईसीटीई अनुमोदित संस्थानों में सैद्धांतिक रटने वाली शिक्षा से हटकर व्यावहारिक परियोजना आधारित शिक्षण और उद्योग से जुड़े कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।
इसके अतिरिक्त, एआईसीटीई ने कैंपस कार्यक्रमों में कार्य आधारित शिक्षण, परियोजना पोर्टफोलियो और एआई से संबंधित दक्षताओं को शामिल करने के लिए कई प्रमुख सुधार शुरू किए हैं। इन सुधारों में पाठ्यक्रमों में उभरती और एआई आधारित प्रौद्योगिकियों का समावेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), मशीन लर्निंग (मशीन अधिगम), रोबोटिक्स और साइबर-फिजिकल सिस्टम (साइबर-भौतिक प्रणाली) से संबंधित पाठ्यक्रमों एवं वैकल्पिक विषयों को शामिल करना शामिल है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सामुदायिक महाविद्यालयों, बी.वोक. डिग्री कार्यक्रमों और दीन दयाल उपाध्याय ज्ञान अर्जन एवं कौशल मानव क्षमताओं और आजीविका उन्नयन केंद्रों के माध्यम से कौशल आधारित शिक्षा को समर्थन दिया है।
रोजगारपरक कौशल मॉड्यूल को पाठ्यक्रम में जॉब रोल्स/स्वयम् (एसडब्ल्यूएवाईएएम) के एक भाग के रूप में शामिल किया गया है, जिनमें संचार कौशल, स्व-प्रबंधन कौशल, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) कौशल, उद्यमिता कौशल और हरित कौशल शामिल हैं।
कौशल विकास को समर्थन देने के लिए स्वयम् प्लस (एसडब्ल्यूएवाईएएम प्लस) पोर्टल भी शुरू किया गया है, जो कार्यबल के अपस्किलिंग (कौशल उन्नयन) और रीस्किलिंग (पुनः कौशल विकास) पर केंद्रित है। 17 क्षेत्रों में 89 उद्योग भागीदारों से तैयार किए गए 500 से अधिक पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं और इन्हें एआई, डेटा एनालिस्ट (डेटा विश्लेषक) जैसे उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध कराया गया है।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीएम श्री योजना का कार्यान्वयन
पीएम श्री योजना के कार्यान्वयन की अवधि वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक है। इसके अतिरिक्त, पीएम श्री योजना की कार्यान्वयन रूपरेखा निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है:
https://pmshri.education.gov.in/assets/pdf/part1_pmshri.pdf
पीएम श्री योजना के अंतर्गत निधियों का आवंटन एवं निर्गमन वित्त वर्ष 2023-24 से प्रारंभ हुआ। वित्त वर्ष 2023-24, वित्त वर्ष 2024-25, वित्त वर्ष 2025-26 तथा वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान पीएम श्री योजना के अंतर्गत आवंटित एवं जारी की गई निधियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी-वार विवरण संलग्नक में दिया गया है।
पीएम श्री योजना के अंतर्गत राज्य/संघ राज्य क्षेत्र केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करते हैं, जिसमें विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालयों के रूप में निर्धारित गुणवत्ता आश्वासन प्राप्त करने हेतु सहायता प्रदान करने संबंधी प्रतिबद्धताओं का उल्लेख होता है। इसके पश्चात, चैलेंज मोड के माध्यम से पीएम श्री विद्यालयों का चयन किया जाता है, जिसमें विद्यालय आदर्श विद्यालय बनने के लिए सहायता प्राप्त करने हेतु प्रतिस्पर्धा करते हैं।
पीएम श्री विद्यालयों में, सीबीएसई अथवा राज्य परीक्षा बोर्डों से संबद्धता के अनुसार सीबीएसई अथवा संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का पाठ्यक्रम अपनाया जाता है।
पीएम श्री विद्यालय रूपरेखा के विद्यालय परिवर्तन संबंधी पैरा 1.1 में की गई परिकल्पना के अनुसार, पीएम श्री विद्यालयों में पाठ्यचर्या राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ)/राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) के अनुरूप होगी, जिसे नई 5+3+3+4 पाठ्यचर्या एवं शिक्षाशास्त्रीय संरचना के अनुसार विकसित किया जाएगा। इसका प्रतिबिंब एनसीएफ-एफएस तथा एनसीएफ-एसई में दिखाई देगा। राज्यों को मूलभूत सिद्धांतों एवं संवैधानिक मूल्यों का पालन करते हुए अपनी राज्य-विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यचर्या को अनुकूलित करने की सुविधा प्रदान की गई है।
केरल राज्य ने 23 अक्टूबर 2025 को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद पीएम श्री विद्यालयों के चयन के लिए पारदर्शी चैलेंज मोड प्रक्रिया अपनाई जानी थी।
पीएम श्री योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सभी घटकों को प्रदर्शित करना है। यह योजना न केवल संज्ञानात्मक विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से युक्त समग्र एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के निर्माण पर भी बल देती है।
यह योजना एक समतामूलक, समावेशी एवं आनंदमय शिक्षण वातावरण के निर्माण पर केंद्रित है, जो विविध सामाजिक पृष्ठभूमियों, बहुभाषी आवश्यकताओं और विभिन्न शैक्षणिक क्षमताओं वाले विद्यार्थियों की जरूरतों को पूरा करता है। इन विद्यालयों की परिकल्पना विद्यार्थियों को उनकी सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए की गई है, ताकि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण में स्वयं को स्वागत योग्य, देखभाल प्राप्त करने वाला तथा समर्थ महसूस कर सके।
इसलिए, जो राज्य एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं या योजना से बाहर हो जाते हैं, वे पीएम श्री योजना के इन लाभों से वंचित रह सकते हैं।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीके/केसी/एके
अनुलग्नक
राज्यसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1155 के भाग (ख) के उत्तर में संदर्भित अनुलग्नक, जिसका उत्तर 29.07.2026 को श्री अब्दुल वहाब, माननीय सांसद द्वारा “पीएम श्री योजना का कार्यान्वयन” के संबंध में पूछे गए प्रश्न के संदर्भ में दिया गया।
पीएम श्री योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2023-24, वित्त वर्ष 2024-25, वित्त वर्ष 2025-26 और वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान जारी की गई निधियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी-वार विवरण निम्नानुसार है:
(₹ करोड़ में)


NA – संबंधित वर्ष में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों/एनसीईआरटी द्वारा पीएम श्री योजना को अपनाया (ऑनबोर्ड) नहीं किया गया था।
वित्त वर्ष 2025-26 से पीएम श्री योजना को एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) पर ऑनबोर्ड किया गया है। इसलिए, इन संघ राज्य क्षेत्रों/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी को छोड़कर यह आंकड़ा जारी की गई मूल स्वीकृति (Mother Sanction) को दर्शाता है।
उच्च शिक्षा में पद और रिक्तियां
रिक्तियों का सृजन और उनका भरा जाना एक सतत प्रक्रिया है। पदोन्नति, सेवानिवृत्ति, इस्तीफा, मृत्यु, नए संस्थानों, योजनाओं या परियोजनाओं के आरंभ होने तथा मौजूदा संस्थानों में छात्रों की संख्या में वृद्धि और क्षमता विस्तार के कारण अतिरिक्त आवश्यकताओं के चलते रिक्तियां सृजित होती हैं।
अगस्त 2021 में, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सभी सीएचईआई से अनुरोध किया गया था कि वे मिशन मोड में अपने संस्थानों में लंबित रिक्तियों को भरने के लिए एक विशेष अभियान चलाएं। सीएचईआई ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सहित रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए। सितंबर 2022 में, शिक्षा मंत्रालय ने सभी सीएचईआई से मिशन मोड में रिक्तियों को भरने का आग्रह किया था। अक्टूबर 2025 में, सभी सीएचईआई से पुनः मिशन मोड में सभी लंबित रिक्तियों को भरने का अनुरोध किया गया। सितंबर 2022 से सभी सीएचईआई ने रिक्तियों को भरने के लिए मिशन मोड भर्ती अभियान चलाया है। 23 मई 2026 तक (अर्थात अंतिम रोजगार मेले की तिथि तक), सभी सीएचईआई द्वारा कुल 32,114 पद (3,851 एससी, 1,643 एसटी, 6,785 ओबीसी, 1,191 ईडब्ल्यूएस) भरे गए हैं, जिनमें मिशन मोड के तहत 18,757 संकाय पद (2,315 एससी, 910 एसटी, 3,986 ओबीसी, 568 ईडब्ल्यूएस) शामिल हैं।
सीएचईआई में पीएचडी प्रवेश की संख्या गतिशील है और प्रवेश चक्रों के अनुसार बदलती रहती है, जो संकाय पर्यवेक्षकों की उपलब्धता, विभागीय आवश्यकताओं और वित्तीय सहायता पर निर्भर करती है। इसके अलावा, पीएचडी पदों की उपलब्धता संस्थान की संकाय संख्या के साथ बदलती रहती है। नए संकाय सदस्य अतिरिक्त शोध पर्यवेक्षण क्षमता उत्पन्न करते हैं, जबकि उन संकाय सदस्यों के शोधार्थी जो इस्तीफा देते हैं, सेवानिवृत्त होते हैं या स्थानांतरित किए जाते हैं, उन्हें संस्थान के शैक्षणिक नियमों के अनुसार अन्य योग्य पर्यवेक्षकों को पुनः आवंटित किया जाता है। पीएचडी में नामांकन की संख्या 1,17,301 (एआईएसएचई रिपोर्ट 2014-15 के अनुसार) से बढ़कर 3,43,559 (एआईएसएचई रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार) हो गई है, जो 192.89% की वृद्धि दर्शाती है।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।
शिक्षा में केंद्र–राज्य समन्वय के लिए केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड बैठकें
एनईपी 2020 के कार्यान्वयन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर शिक्षा मंत्रालय को सलाह देने और विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नीति के व्यापक, समग्र, समन्वित एवं व्यवस्थित कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शिक्षा विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक शिक्षा सलाहकार परिषद का गठन किया है। परिषद का कार्य एनईपी के कार्यान्वयन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर मंत्रालय को सलाह देना, विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसके व्यापक, समग्र और समन्वित कार्यान्वयन को सुगम बनाना, एक व्यापक रोडमैप विकसित करना, पाठ्यक्रम सुधार के लिए हस्तक्षेपों की समीक्षा करना और सीएबीई को सुदृढ़ करने के उपायों की अनुशंसा करना है।
सरकार सहकारी संघवाद और शिक्षा से संबंधित मामलों पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ निरंतर एवं नियमित सहभागिता को अत्यधिक महत्व देती है। सीएबीई, 2020 की घोषणा के बाद से शिक्षा नीतियों और शैक्षिक सुधारों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श के लिए विभिन्न संस्थागत मंचों के माध्यम से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, शिक्षाविदों, उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ नियमित रूप से परामर्श किए गए हैं। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन (जून 2022), राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन (2022, 2023 और 2025), नीति आयोग की 7वीं, 9वीं और 11वीं शासी परिषद की बैठकें (क्रमशः 2022, 2024 और 2026), राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ परामर्श-सह-समीक्षा बैठकें (अक्टूबर और दिसंबर 2022), क्षेत्रवार परामर्श-सह-समीक्षा बैठकें (फरवरी, मार्च, मई और जून 2023), एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला और दो क्षेत्रीय कार्यशालाएं (नवंबर 2021), पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन समकक्षता तथा सीखने के परिणामों में सुधार पर राष्ट्रीय सम्मेलन (जुलाई 2025), अखिल भारतीय शिक्षा समागम (2022, 2023, 2024 और 2025), राज्यपालों का सम्मेलन (2021 और 2024), तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों के साथ उच्च एवं तकनीकी शिक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला (नवंबर 2024) शामिल हैं।
हाल ही में 22-23 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के प्रमुख नीति निर्माताओं ने अन्य विषयों के साथ, विद्यालयी शिक्षा में प्रमुख केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करने तथा बेहतर शैक्षिक परिणामों के लिए केंद्र- राज्य सहयोग और ज्ञान साझा करने को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया। ये सहभागिताएं शैक्षिक सुधारों के लिए सहयोगात्मक नीति निर्माण, समीक्षा और कार्यान्वयन हेतु एक नियमित मंच प्रदान करती हैं।
यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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