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शिक्षा

बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने ग्रीन हाइड्रोजन के कुशल उत्पादन के लिए एक नया मिश्र धातु-आधारित उत्प्रेरक विकसित किया

पानी के इलेक्ट्रोलिसिस  द्वारा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में रूपांतरण के जरिए बेहतर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विकसित एक नया, कुशल मिश्र धातु-आधारित उत्प्रेरक, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए एक समाधान की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

उच्च-एंट्रॉपी मिश्र धातु (एचईए) का उपयोग करने वाला यह नवोन्मेषी दृष्टिकोण, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए प्लेटिनम जैसी महंगी सामग्रियों पर निर्भरता को कम कर सकता है।

आमतौर पर, मिश्र धातुएं दो या दो से अधिक तत्वों से बनी धातु पदार्थ होती हैं, जिन्हें एक प्राथमिक धातु में अपेक्षाकृत कम मात्रा में द्वितीयक तत्वों को मिलाकर तैयार किया जाता है। दूसरी ओर, उच्च एंट्रॉपी मिश्र धातुएं (एचईए), उन्नत सामग्री हैं जिनमें लगभग समान सांद्रता में कई तत्व (आमतौर पर पांच या अधिक) होते हैं। यहां, कुल मुक्त ऊर्जा में एन्ट्रापिक (डिसआर्डर की स्थिति) का योगदान एन्ट्रापिक (आंतरिक ऊर्जा का योग और इसके प्रैशर व वाल्यूम का गुणनफल) योगदान को दूर करता है, और इस प्रकार, मिश्र धातु के गठन को स्थिर करता है। इन एचईए को पानी को विभाजित करने वाले अनुप्रयोगों में वाणिज्यिक उत्प्रेरक को बदलने की उनकी बहुमुखी प्रतिभा और क्षमता के लिए जाना जाता है। इस संदर्भ में, नीचे से ऊपर की रासायनिक सिंथेटिक विधियों द्वारा किसी भी अशुद्धता फेज से रहित एकल फेज एचईए नैनोकणों की तैयारी अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है।

सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, के शोधकर्ताओं ने एक नया उच्च-एंट्रॉपी मिश्र धातु (एचईए) उत्प्रेरक विकसित किया है, जिसे PtPdCoNiMn (प्लैटिनम, पैलेडियम, कोबाल्ट, निकल और मैंगनीज का मिश्रण) कहा जाता है। इन घटक धातुओं का चयन अमेरिका के एएमईएस नेशनल लेबोरेटरी के स्टाफ वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत सिंह द्वारा डिज़ाइन और विकसित किए गए दिशानिर्देशों के आधार पर किया गया था। एक बार अंतिम संरचना की पहचान हो जाने के बाद, सीईएनएस शोधकर्ताओं ने दो अलग-अलग तरीकों से एचईए तैयार किया – कमरे के तापमान और वायुमंडलीय दबाव पर इलेक्ट्रोडपोजिशन और (दिए गए साल्वेंट में उच्च तापमान और दबाव के तहत रासायनिक संश्लेषण जिसे सॉल्वोथर्मल प्रक्रियाएं कहा जाता है।

इलेक्ट्रोडपोजिशन के लिए, एचईए को विकसित करने के लिए साल्वेंट का चयन और डिपोजिशन क्षमता को अनुकूलित किया गया था। सॉल्वोथर्मल विधि में, अनुकूलन चरणों की एक श्रृंखला के माध्यम से, शोधकर्ताओं ने प्रतिक्रिया दर और संश्लेषण प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए सटीक अनुपात में सही साल्वेंट और कम करने वाले एजेंट का सावधानीपूर्वक चयन किया। इन विधियों ने एकल-चरण या बहु-चरण रूपों में दो, तीन, चार, या सभी पांच तत्वों वाले मिश्र धातुओं के उत्पादन की अनुमति दी। प्लैटिनम (Pt), पैलेडियम (Pd), कोबाल्ट (Co), निकल (Ni), और मैंगनीज (Mn) को मिलाकर बनाए गए PtPdCoNiMn HEA उत्प्रेरक, न्यूनतम ऊर्जा हानि, उच्च स्थायित्व और दीर्घकालिक स्थिरता के साथ कुशल हाइड्रोजन उत्पादन का नतीजा दिया। सैद्धांतिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि उत्प्रेरक सतह पर प्रतिक्रिया मध्यवर्ती के इष्टतम बंधन ही हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विकसित एचईए की वाणिज्यिक उत्प्रेरक पर श्रेष्ठता का कारण है।

चूंकि एचईए उत्प्रेरक ने वाणिज्यिक उत्प्रेरक की तुलना में सात गुना कम प्लैटिनम का उपयोग किया और शुद्ध प्लैटिनम की तुलना में बेहतर उत्प्रेरक दक्षता प्रदान की, इसलिए यह पारंपरिक उत्प्रेरकों का एक व्यवहारिक विकल्प हो सकता है। इन एचईए ने क्षारीय समुद्री जल सहित व्यावहारिक सेटिंग्स में भी अच्छा प्रदर्शन दिखाया व 100 घंटे से अधिक समय तक बिना क्षरण के स्थिरता और दक्षता बनाए रखी।

यह प्रगति स्वच्छ, अधिक किफायती हाइड्रोजन उत्पादन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, जिससे उद्योगों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को लाभ होगा। अनुसंधान को भारत के अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) द्वारा वित्त पोषित किया गया था, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) प्रशासनिक विभाग है। अनुसंधान से दो पेपर हाल ही में जर्नल एडवांस्ड फंक्शनल मटेरियल और स्मॉल में प्रकाशित हुए थे।

चित्र ए) एक तीन-इलेक्ट्रोड प्रणाली में कार्बन पेपर पर इलेक्ट्रोडपोजिटेड एचईए से हाइड्रोजन का उत्पादन।

चित्र बी) इलेक्ट्रोडपोजिटेड एचईए (एचईए-ईडी), सॉल्वोथर्मल विधि (एचईए-एसटी) का उपयोग करके तैयार किए गए एचईए और वाणिज्यिक Pt/C के हाइड्रोजन उत्पादन प्रदर्शन का एक तुलनात्मक प्लॉट।

बाएँ से दाएँ: डॉ. आशुतोष सिंह, प्रो. बी. एल. वी. प्रसाद और सुश्री अथीरा चंद्रन।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज द्वारा एक दिवसीय शिविर के अंतर्गत एन एस एस स्वयंसेवकों द्वारा स्वास्थ विषय पे कार्य किया गया

भारतीय स्वरूप संवाददाता क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की एनएसएस ईकाई द्वारा एक दिवसीय शिविर के अंतर्गत स्वयंसेवकों द्वार आज जूही टायर मंडी परंपुरवा में स्वयंसेवकों ने निजी स्वास्थ विषय पे कार्य किया जिसमें स्वयंसेवकों द्वार मासिक धर्म विषय पे महिलाओ को जागरुक किया और मुफ्त सैनिटरी पैड का वितरण किया और स्वच्छता को लेके सर्वे हुआ स्वयंसेवकों ने मुख्यता आयुष्मान कार्ड बनवाने पे जोर किया जिसमें हमने उनकी जानकारी प्राप्त करी और कई प्रकार की समस्याओं को लेकर निवासी लोगो से सर्वे किया और उनकी समस्याएं सुनी जिसमें अधिक समस्या स्वास्थ संबंधी सफाई और पानी को लेकर रही जिसको स्वयंसेवकों ने हर व्यक्ति से अच्छे से समझा इसके बाद लंच ब्रेक लिया गया जिसमें स्वयंसेवकों द्वारा स्वयं तहरी बनाया और आनंद से खाया गया इसके पश्चात अब इन समस्याओं के समाधान के लिए स्वयंसेवकों में विचार विमर्श हुआ जिससे अब आने वाले दिनों में इसका समाधान निकाला जाएगा और इसी के साथ एक दिवसीय शिविर का समापन हुआ। प्रोग्राम ऑफिसर डॉ अंकिता जैस्मीन लाल के साथ जॉय रसकिन वनस्पति विभाग की उपस्थित में कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। हेड आर्यन जायसवाल और आयुष कुमार भारती का अहम योगदान रहा।

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एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में बसंत पर्व पर सरस्वती माँ की मूर्ति स्थापित

कानपुर 26 जनवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में बसंत पर्व पर सरस्वती माँ की मूर्ति स्थापना तथा हवन पूजन का विधिवत् निर्वहन धूमधाम से किया गया कार्यक्रम के शुभारंभ में महाविद्यालय प्रबंध समिति के सचिव पी. के. सेन, प्राचार्या प्रो. सुमन, प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन, कोषाध्यक्ष दीपाश्री सेन द्वारा सरस्वती पूजा पर परम्परागत हवन – पूजा-अर्चना द्वारा सरस्वती प्रतिमा की विधिवत् स्थापना की गयी|

डॉ. शुभा वाजपई के संयोजन में, प्रो. मीनाक्षी व्यास, डॉ. शैल वाजपई, डॉ. प्रीता अवस्थी, डॉ. सपना रॉय, डॉ. मोनिका शुक्ला के द्वारा बसंत उत्सव की तैयारियां पूर्ण मनोयोग से की गई। मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने जानकारी देते हुए बताया की डॉ. रचना निगम के निर्देशन में कला विभाग की छात्राओं अनुष्का, ओमाक्षी, वर्षा, संस्कृति, विधि, अनीता, अफरोज, स्नेहा, श्रेया, अमीषा, वैष्णवी, ने महाविद्यालय सभागार में वृहत तथा अद्भुत रंगोली का निर्माण किया। । महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाओं एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने बसंत उत्सव संस्कृति निर्वहन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

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सोशल रिसर्च फाउंडेशन के 15 वें वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर समसामयिक विषय “उच्च शिक्षा : दशा और दिशा” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता किदवई नगर स्थित सोशल रिसर्च फाउंडेशन के 15 वें वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर आज बहुत ही समसामयिक विषय “उच्च शिक्षा : दशा और दिशा” पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन होटल मन्दाकिनी रॉयल, साकेत नगर, कानपुर में किया गया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने विशिष्ट योगदान के लिए दिल्ली, पंजाब राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, उन्नाव, प्रयागराज, कानपुर आदि से आए लगभग 30 विद्वतजनों को सम्मानित भी किया गया।

संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश माननीय श्री योगेंद्र उपाध्याय जी के कर कमलो से हुआ। मुख्य अतिथि ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा के विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं– नई शिक्षा नीति ऐसे प्रयासों का प्रमाण है। हमारे प्रयासों से शीघ्र ही सकारात्मक परिणाम आने लगेंगे। उन्होंने शिक्षकों से सकारात्मक सहयोग का आवाहन भी किया।
सोशल रिसर्च फाउंडेशन की उपाध्यक्ष, महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ० आशा त्रिपाठी ने सभी सम्मानित अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उच्च शिक्षा में व्याप्त प्रदूषण की ओर नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह एक चिंतनीय यक्ष प्रश्न है जिसका उत्तर हमें खोजना होगा।
संस्था के संस्थापक सचिव राजीव मिश्रा ने संस्था की 15 वर्षों की गौरवमयी यात्रा का विस्तृत परिचय दिया और बताया कि संस्थान के साथ जुड़कर इस देश के लाखों शिक्षक गण लाभान्वित हो रहे हैं। संस्थान के 6 रिसर्च जर्नल विश्व के 25000 जनरल्स के मध्य स्थान रखते हैं जो कानपुर के लिए भी एक गौरवपूर्ण बात है।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर अशोक कुमार जी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर गहन प्रकाश डालते हुए कहा कि इस नीति का उद्देश्य शिक्षा को और ज्यादा समावेशी, प्रभावी और बेहतर बनाना है। यह 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है। इस नीति का उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है।
संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि और श्री कामतानाथ मंदिर चित्रकूट के पीठाधीश्वर डॉ० मदन गोपाल दास ने कहा
एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के स्टेटीशियन डॉ० संदीप मिश्रा ने कहा
एम० एल० सी० अरुण पाठक ने कहा कि नई शिक्षा नीति ऐसी शिक्षा प्रणाली की आधारशिला है जो विज्ञान के साथ-साथ ज्ञान से भी परिपूर्ण है।
सेमिनार की अध्यक्षता जाने माने ज्योतिषाचार्य पंडित के ए दुबे ‘पद्मेश’ जी ने की। उन्होंने नई शिक्षा नीति का भविष्य उज्जवल बताते हुए सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर भी काम करने की आवश्यकता पर बल दिया ।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ० निर्विकार कटियार, मध्य प्रदेश के डॉ० सी० एम० मेहता, राजस्थान से आए डॉ० राजेश कुमार शर्मा और भोपाल के डॉ० प्रभात पांडे जी ने नई शिक्षा नीति की विभिन्न संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए अपनी शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित परिवर्तन और सुधार लाने पर जोर दिया जिससे भारत शिक्षा के क्षेत्र में भी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
तकनीकी सभा में शोध पत्र प्रस्तुत किए गए जिनमें उच्च शिक्षा की दशा और संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। यह संगोष्ठी उच्च शिक्षा और नई शिक्षा नीति के संदर्भ में एक मील का पत्थर साबित हुई।
सोशल रिसर्च फाउंडेशन के संरक्षक और डीबीएस कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ० शिव कुमार दीक्षित द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। गोष्ठी का कुशल संचालन महिला महाविद्यालय की हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ० ज्योति किरण द्वारा किया गया। इस सेमिनार का संयोजन संस्थान की जनरल मैनेजर और जर्नल्स की उपसंपादक कुमारी भावना निगम द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में संस्थान की कोषाध्यक्ष दीप्ति मिश्रा, तेजस्वी मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर अर्चना दीक्षित, डॉक्टर मीत कमल द्विवेदी, अतुल दीक्षित, दिलीप कुमार मिश्रा, डॉ प्रदीप अवस्थी, अमन निगम, रचना गुप्ता, विनीशा मिश्रा, डॉ पी एन शर्मा, डॉ अनुराग सिंह, डॉ क्षमा त्रिपाठी, कार्तिकेय अवस्थी, शुभम तिवारी, कृष्ण गोपाल तिवारी, प्रकाश शुक्ला, राम द्विवेदी, अंजली शुक्ला, डॉ अक्षय शुक्ल, संगीता सिरोही सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहें।

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एस. एन, सेन, बा, वि.पी. जी. कॉलेज के चित्रकला विभाग द्वारा कला प्रदर्शनी आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन.सेन.बा.वि.पी.जी. कॉलेज के चित्रकला विभाग द्वारा एक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें 1953 से लेकर अभी तक की सभी छात्राओ की कृतियों का प्रदर्शन किया गया। डॉक्टर सचिव गौतम (सहायक आचार्य) स्कूल का क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट,छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर द्वारा लाइव डेमोंसट्रेशन दिया गया साथ ही अंतर महाविद्यालय प्रकृति चित्रण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रोबीर कुमार सेन, सचिव प्रबंध समिति तथा अध्यक्ष प्रवीण कुमार मिश्रा , संयुक्त सचिव शुभो् सेन, दीपाश्री सेन , प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने दीप प्रज्वलित कर किया

 कार्यक्रम संयोजिका डॉ. रचना निगम विभागाध्यक्ष चित्रकला विभाग ने सभी सम्मानित सदस्यों का स्वागत व अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में चित्रकला विभाग की पूर्व छात्राओं और वर्तमान छात्रों की कलाकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया इसके उपरांत सीएसजेएमयू ललित कला विभाग से आए सहायक प्रवक्ता डॉ सचिव गौतम जी के द्वारा एक लाइव डेमोंसट्रेशन दिया गया जिससे छात्राओं ने अनेक कला की बारीकियां को देखा और सीखा। कार्यक्रम में अंतर-महाविद्यालीय प्रकृति चित्रण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया इसमें प्रो ज्योति अग्निहोत्री, प्रो राज किशोरी ,प्रो कुमुद बाला ने निर्णायक की भूमिका निभाई। इसमें सभी महाविद्यालयों से छात्राओं ने प्रतिभागिता की और सुंदर चित्रण और प्रकृति से सभी को परिचित कराया ।

महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो (डॉ.) सुमन ने कार्यक्रम मे विभाग की पूर्व और वर्तमान छात्राओं के चित्रों को देखा और सराहा आपने कहा कि लाइव डेमोंसट्रेशन से छात्रों को कला के विविध आयामों से अवगत होने का अवसर मिलता है ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए जिससे छात्राओं का सर्वांगीण विकास हो सके।

 कार्यक्रम में सभी महाविद्यालय की प्रवक्ता, महाविद्यालय की वरिष्ठ प्रवक्ता प्रो. निशि प्रकाश, प्रो रेखा चौबे, प्रो अलका टंडन,प्रो गार्गी यादव, कैप्टन ममता अग्रवाल, प्रो प्रीति पांडे, प्रो मीनाक्षी व्यास, प्रचार प्रसार प्रभारी डॉ प्रीति सिंह व सभी प्रवक्ता गण , लिपिक वर्ग ने उपस्थित होकर अपनी रुचि दिखाई, तथा छात्राओं के कार्य को सराहा व प्रोत्साहित किया।              

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डी जी कॉलेज द्वारा निकाली गई गणतंत्र दिवस परेड झांकी

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 जनवरी, 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर के द्वारा छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में महाकुंभ थीम पर झांकी निकाली गई। साथ ही छात्राओं ने महाकुंभ थीम पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओ में भी हिस्सा लिया। जिनमें रंगोली प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता, गायन प्रतियोगिता आदि प्रमुख है। छात्राओं ने अत्यधिक जोश, उत्साह एवं उमंग के साथ हिस्सा लिया। समस्त कार्यक्रम छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक जी की प्रेरणा से संपन्न हुए। कार्यक्रमों को सफल बनाने में कार्यक्रम समन्वयक डॉ श्याम मिश्रा, महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम, कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही, गृह विज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ विनीता श्रीवास्तव समेत डॉ अलका त्रिपाठी डॉ अपर्णा शुक्ला, डॉ साधना सिंह एवं डॉ रश्मि शुक्ला का सहयोग सराहनीय रहा

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एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज में 76 वाँ गणतंत्र दिवस मनाया गया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 जनवरी एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज में 76 वां गणतंत्र दिवस मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ वंदना पाठक आयुर्वेदाचार्य ,महाविद्यालय प्रबंध तंत्र के अध्यक्ष पी के मिश्रा,सचिव पी के सेन ,सयुक्त सचिव शुभ्रों सेन, कोषाध्यक्ष दीपाश्री सेन, सदस्य भूतपूर्व क्रिकेटर गोपाल शर्मा प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने झंडारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात प्राचार्या प्रो सुमन ने अतिथिगण तथा प्रबंध समिति का सम्मान किया। महाविद्यालय की चीफ़ प्रॉक्टर कप्तान ममता अग्रवाल ने उच्च शिक्षा अधिकारी का संदेश पढ़ा। एन सी सी, रोवर रेंजर तथा एन एस एस की छात्राओ ने मार्च पास्ट किया और तलानी दी। कार्यक्रम में महाविद्यालय का नाम रोशन करने वाली मेधावी छात्राओं का सम्मान किया गया जिसमे कु सृष्टि राजपाल बी एस सी तृतीय वर्ष की छात्रा जिसका
जी एस वी एम, लखनऊ मेडिकल कालेज में सेलेक्शन हुआ, कु निकिता सविता ,कु सृष्टि रावत तथा कु ऋतुजा रही।देश भक्ति के गीत संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संकलन एवं संचालन डॉ प्रीति सिंह ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की समस्त शिक्षिकाएं तथा तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपस्थित रहे ।

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डी जी कॉलेज द्वारा 15वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर शपथ एवं रैली का आयोजन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 25 जनवरी दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर में 15वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर बीएड विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पुष्पलता तिवारी एवं डॉ उमा अवस्थी के कुशल निर्देशन में मतदाता शपथ एवं रैली का आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही मुहिम “वोट जैसा कुछ नहीं, वोट जरुर डालेंगे हम” के अंतर्गत समस्त छात्राओं को स्वयं अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए तथा अपने परिवार, रिश्तेदार एवं आस पड़ोस को भी मतदान करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। महाविद्यालय निदेशक प्रो अर्चना वर्मा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि मतदान करना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है हमें बिना किसी लालच तथा जाति, धर्म आदि के भेदभाव के बिना योग्य व्यक्तियों का चुनाव करना चाहिए ताकि एक अच्छी लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो सके।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश शासन तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा निदेशक, कानपुर मंडल, कानपुर नगर श्री मुरलीधर राम जी एवं मतदाता जागरूकता कार्यक्रम प्रभारी प्रो अपर्णा सिंह के निर्देशानुसार चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित मतदाता जागरूकता कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह में महाविद्यालय की 100 छात्राओं ने प्रतिभाग किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की मतदाता जागरूकता अभियान – निर्वाचन साक्षरता क्लब कोऑर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही, बीएड विभाग प्रभारी डॉ सबीहा अंजुम, समस्त प्राध्यापिकाओं तथा कार्यालय अधीक्षक कृष्णेंद्र श्रीवास्तव का विशेष योगदान सराहनीय रहा।

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भारत की बेटियों को सशक्त बनाना

हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई प्रत्येक विकास पहल में हम बालिकाओं को सशक्त बनाने और अपनी नारी शक्ति को मजबूत करने को अत्यधिक प्राथमिकता देते हैं। हमारा ध्यान बालिकाओं के लिए सम्मान के साथ-साथ अवसर सुनिश्चित करने पर है।‘-  नरेन्द्र मोदीप्रधानमंत्रीभारत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 22 जनवरी2015 को हरियाणा के पानीपत में शुरू की गई बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना कार्यान्वयन का एक दशक पूरा कर रही है। भारत सरकार की इस प्रमुख पहल का उद्देश्य घटते बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) को दूर करना और लिंग-आधारित लिंग-चयनात्मक उन्मूलन को रोकना और बालिकाओं के अस्तित्व, संरक्षण और शिक्षा को बढ़ावा देना है। यह योजना भारत सरकार की सबसे प्रभावशाली सामाजिक उपक्रमों में से एक बन गई है।

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मिशन शक्ति के साथ एकीकरण

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बीबीबीपी योजना अब 2021-2022 से 2025-2026 तक 15वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान कार्यान्वयन के लिए महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक कार्यक्रम मिशन शक्ति के साथ एकीकृत है। मिशन शक्ति में दो व्यापक उप-योजनाएं शामिल हैं।

1. संबल : सुरक्षा एवं संरक्षा

मिशन शक्ति की संबल उप-योजना वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) महिला हेल्पलाइन (181) और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह नारी अदालत की भी शुरुआत करता है, जो उत्पीड़न और अधिकारों के उल्लंघन जैसे छोटे मुद्दों को हल करने के लिए एक वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र प्रदान करता है।

2. सामर्थ्य : सशक्तिकरण

सामर्थ्य उप-योजना शक्ति सदनों, राहत और पुनर्वास घरों, सखी निवास के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाती है, जो शहरों में कामकाजी महिलाओं के लिए रहने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करती है। साथ ही पालना-क्रेच कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) अब दूसरे बच्चे के लड़की होने पर भी मदद करती है, जिससे मातृ स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह गर्भावस्था और प्रसव के कारण काम करने वाली महिलाओं को आर्थिक रूप से होने वाले नुकसान की भरपाई भी करता है।

यह योजना अब बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण पर जोर देती है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल विकास और सामुदायिक जागरूकता शामिल है। पिछले एक दशक में, बीबीबीपी ने कई मंत्रालयों के बीच सहयोग के माध्यम से अपना दायरा बढ़ाया है।

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प्रमुख उद्देश्य

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प्राथमिक उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • लिंग-पक्षपाती लिंग-चयनात्मक उन्मूलन को रोकना।
  • बालिकाओं का अस्तित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • बालिकाओं की शिक्षा एवं भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में हर साल दो अंक का सुधार।
  • संस्थागत प्रसव के प्रतिशत में सुधार या 95% या उससे अधिक की दर पर कायम रहना।
  • प्रति वर्ष पहली तिमाही प्रसव-रोधी देखभाल (एएनसी) पंजीकरण में 1% की वृद्धि।
  • माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के बीच स्कूल छोड़ने की दर की जांच करना।
  • सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

फोकस क्षेत्र और लक्ष्य समूह

यह योजना मुख्य रूप से निम्नलिखित पर केंद्रित है:

  • प्राथमिक लक्ष्य समूह:
  • युवा और नवविवाहित जोड़े, जो माता-पिता बनने की उम्मीद में हैं
  • किशोर (लड़कियां और लड़के) और युवा
  • घर-परिवार और समाज
  • द्वितीयक लक्ष्य समूह:
  • स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र (एडब्ल्यूसीएस),
  • मेडिकल डॉक्टर/पेशेवर, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर आदि।
  • पंचायत राज संस्थान (पीआरआई), शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी), अधिकारी, फ्रंटलाइन वर्कर्स
  • महिला समूह और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और नागरिक समाज संगठन
  • मीडिया, धार्मिक गुरु और उद्योग विशेषज्ञ

वित्तीय और परिचालन संरचना

बीबीबीपी एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें मिशन शक्ति के संबल वर्टिकल के तहत देश के सभी जिलों में केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषण किया जाता है।

वित्तीय सहायता जिलों में जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी) के आधार पर भिन्न होती है:

  • 918 से कम या उसके बराबर एसआरबी वाले जिलों के लिए 40 लाख रुपये प्रति वर्ष।
  • 919-952 के बीच एसआरबी वाले जिलों के लिए 30 लाख रुपये।
  • 952 से अधिक एसआरबी वाले जिलों के लिए 20 लाख रुपये।

प्रमुख विकास

अभियान की सफलता लैंगिक असमानताओं को दूर करने की दिशा में की गई प्रगति से स्पष्ट है, जिसमें समाज पर इसके सकारात्मक प्रभाव को दर्शाने वाले प्रभावशाली आंकड़े हैं।

1. जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार (एसआरबी)

  • 2014-15 में 918 के एसआरबी से, 2022-23 में राष्ट्रीय एसआरबी बढ़कर 933 हो गया (स्रोत: एचएमआईएस, एमओएचएफडब्ल्यू)। यह लगातार वृद्धि लिंग-अनुपात को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाली लिंग-पक्षपाती प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने में बीबीबीपी के सामूहिक प्रभाव को दर्शाती है।

2. माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों के नामांकन में वृद्धि

  • माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, लड़कियों के लिए सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2014-15 में 75.51% से बढ़कर 2021-22 में 79.4% हो गया है। (स्रोत: यू-डीआईएसई प्लस, एमओई)। यह बीबीबीपी के शैक्षिक प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।

3. संस्थागत प्रसव में वृद्धि

  • बीबीबीपी ने महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवा में सुधार पर भी जोर दिया। संस्थागत प्रसव 2014-15 में 87% से बढ़कर 2019-20 तक 94% से अधिक हो गया, जिससे कई क्षेत्रों में माताओं और शिशुओं के लिए सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हुआ, जो मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में आवश्यक रहा है।

4. जागरूकता अभियान

  • बालिकाओं वाले पिताओं पर लक्षित ‘सेल्फी विद डॉटर्स’ जैसे विशिष्ट अभियानों ने देशव्यापी लोकप्रियता हासिल की।
  • बालिकाओं के जन्म का उत्सव मनाने के लिए सामाजिक स्तर की गतिविधियां जैसे ‘बेटी जन्मोत्सव’।

5. महिलाओं का कौशल एवं आर्थिक सशक्तिकरण

  • कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से बीबीबीपी ने युवा लड़कियों और महिलाओं के बीच कौशल विकास को बढ़ावा देने, उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में प्रगति की है। व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए  हैं। इस योजना ने अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा और कौशल विकास के लिए विशिष्ट पहल भी शुरू की।
  • ‘खेलो इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य लड़कियों के बीच खेल प्रतिभा की पहचान करना और उसका पोषण करना है।

प्रमुख प्रयास

यह योजना दो प्रमुख घटकों के माध्यम से संचालित होती है:

बहु-क्षेत्रीय प्रयास

लड़कियों के बीच खेल को बढ़ावा देना, आत्मरक्षा शिविर, लड़कियों के शौचालयों का निर्माण, विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना, पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के बारे में जागरूकता फैलाना है।

जागरूकता अभियान एवं सामुदायिक सहभागिता

राष्ट्रीय बालिका दिवस (एनजीसीडी) प्रतिवर्ष 24 जनवरी को अभियानों, कार्यशालाओं और रचनात्मक प्रतियोगिताओं के साथ मनाया जाता है। एक क्रॉस-कंट्री बाइक अभियान, “यशस्विनी” देश की महिला शक्ति या नारी शक्ति का उत्सव मनाने के लिए 150 सीआरपीएफ महिला बाइक सवारों का एक समूह है। यह लड़कियों को समग्र रूप से सशक्त बनाने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता, आत्मरक्षा और लैंगिक समानता पर ध्यान केंद्रित करता है। स्वच्छता किटों के वितरण के साथ मासिक धर्म स्वच्छता पर कार्यशालाएं जैसे सामुदायिक संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

निष्कर्ष

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना ने भारत में लड़कियों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसने जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार करने, शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, स्वास्थ्य देखभाल का विस्तार करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सहयोग करने में मदद की है। सरकारी निकायों, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के साथ काम करके, इस योजना ने प्रत्येक बालिका को महत्व देने और उसकी सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। जैसे-जैसे बीबीबीपी अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है, समावेशी नीतियों, बेहतर कार्यान्वयन और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से दीर्घकालिक परिवर्तन करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे लैंगिक समानता और सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रगति सुनिश्चित होगी।

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न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) यू.यू. ललित ने विधि शिक्षा का आह्वान किया, जो अधिवक्ताओं को सामाजिक और आर्थिक न्याय के जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए सक्षम बनाती है

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) यू.यू. ललित ने विधि शिक्षा का आह्वान किया है, जो अधिवक्ताओं को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए सक्षम बनाती है। उन्होंने भारत सरकार के वाणिज्य विभाग द्वारा स्थापित व्यापार और निवेश कानून केंद्र (सीटीआईएल) के सहयता से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक ट्रेडलैब सम्मेलन के पूर्ण सत्र में अपने मुख्य भाषण के दौरान ये बातें कहीं। यह सत्र ट्रेडलैब नेटवर्क और डब्ल्यूटीओ चेयर्स प्रोग्राम के सहयोग से 13 और 14 दिसंबर, 2024 को नई दिल्ली में इंडियन हैबिटेट सेंटर के टैमरिंड हॉल में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का हिस्सा था।

 यू.यू. ललित ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख किया, जिसने सकारात्मक कार्रवाई और प्रत्येक बच्चे के लिए मुफ्त अनिवार्य प्राथमिक तथा अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा के मौलिक अधिकार के मुद्दे को सामने रखा। उन्होंने भारत के सशक्त सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को आकार देने में उदारीकरण नीति के साथ-साथ आर्थिक न्याय के महत्व पर भी उल्लेख किया। इस संदर्भ में, उन्होंने ट्रेडलैब पहल की सराहना की, जो कानून के विद्यार्थियों को नि:शुल्क आधार पर नैदानिक ​​​​शिक्षा प्रदान करती है। इस कार्यक्रम से भविष्य के अधिवक्ताओं और शिक्षाविदों को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून के दायरे में सामाजिक एवंआर्थिक न्याय के जटिल मुद्दों को हल करने के लिए तैयार कर सकती है।

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उबर टेक्नोलॉजीज के सार्वजनिक नीति प्रमुख श्री संजय चड्ढा ने कार्यक्रम में उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक कानून के महत्व पर जोर दिया, जो यह देखता है कि संप्रभु राष्ट्र कानूनी और आर्थिक दृष्टिकोणों को मिलाकर व्यापार में किस तरह से मुद्दों को हल करते हैं। संजय चड्ढा ने व्यापार वार्ता में अपने अनुभवों से वास्तविक जीवन के किस्से साझा किए। उन्होंने व्यापार समझौतों को समझने में अंतर और वार्ताकारों को बेहतर ढंग से सुसज्जित करने के लिए बातचीत कौशल एवं कानूनी विशेषज्ञता में अधिक क्षमता निर्माण की आवश्यकता जताई।

सम्मेलन का मुख्य विषय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश कानून के क्षेत्र में शिक्षण शिक्षण व नैदानिक ​​कानूनी शिक्षा को आगे बढ़ाना था। इस दौरान कानूनी क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न प्रासंगिक और वर्तमान में न्यायसंगत विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इसके अलावा, मूल्यवान प्रतिक्रिया अवसर प्रदान करने के लिए ट्रेडलैब कार्यकारी समिति के सदस्यों और अकादमिक पर्यवेक्षकों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए।

सम्मेलन के पहले दिन में ट्रेडलैब कार्यकारी समिति के सदस्यों के लिए एक विशेष सीमित सत्र आयोजित हुआ, जिसके बाद ट्रेडलैब इंडिया द्वारा अनुभव-साझाकरण सत्र सहित कई अन्य खुले सत्र भी संचालित हुए। अंतर्राष्ट्रीय कानूनी अभ्यास में नैदानिक ​​​​कानूनी शिक्षा के दायरे और इसके अवसरों पर सत्र तथा शिक्षण शिक्षण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ उठाने पर अंतिम सत्र भी कार्यक्रम का हिस्सा था। सम्मेलन के दूसरे दिन पिछले वर्ष के दौरान आयोजित एमएनएलयू मुंबई, जीएनएलयू व क्यूएमयूएल लंदन की ट्रेडलैब परियोजनाओं पर तीन पैनल चर्चाएं और तीन छात्र प्रस्तुतियां देखी गईं, जिसके बाद समापन सत्र हुआ।

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सम्मेलन ने ट्रेडलैब क्लीनिक के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि का प्रसार किया, जो नवीन दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश कानून में अभूतपूर्व अनुसंधान करने के लिए कानून के विद्यार्थियों के बीच क्षमता विकसित कर सकता है।

ट्रेडलैब इंडिया का नेतृत्व सीटीआईएल द्वारा हब और स्पोक मॉडल में कानून के विद्यालयों में ट्रेडलैब क्लीनिक स्थापित करके अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून में भारत की क्षमता विकसित करने के लिए किया जाता है। अब तक, सीटीआईएल ने लगभग 15 परियोजनाओं का निर्माण किया है और वर्तमान में 6 शीर्ष स्तरीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय सीटीआईएल के ट्रेडलैब क्लीनिक चला रहे हैं।

सीटीआईएल द्वारा संचालित ट्रेडलैब-इंडिया पहल, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून में कानूनी शिक्षा और अभ्यास की क्षमता निर्माण में सबसे आगे है। ट्रेडलैब-इंडिया ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव से सुसज्जित किया है और वैश्विक व्यापार एवं निवेश के मुद्दों के साथ भारत के भविष्य को आकार देने में योगदान दिया है।                  

ट्रेडलैब की शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय कानून के जानकार प्रोफेसर जोस्ट पॉवेलिन एवं प्रोफेसर सर्जियो पुइग द्वारा की गई थी और 2013 से सुश्री जेनिफर हिलमैन, प्रोफेसर डेबरा स्टीगर तथा प्रोफेसर वैलेरी ह्यूजेस जैसे प्रसिद्ध चिकित्सकों व शिक्षाविदों के इस पहल में शामिल होने के साथ कार्यक्रम में वैश्विक उपस्थिति दर्ज की गई। ट्रेडलैब को स्विस नागरिक संहिता के तहत स्विट्जरलैंड में एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में शामिल किया गया है। ट्रेडलैब के विद्यार्थियों ने 2023 और 2024 डब्ल्यूटीओ पब्लिक फोरम में सक्रिय रूप से भाग लिया है। ट्रेडलैब की सदस्यता केवल उन विश्वविद्यालयों/केंद्रों के लिए खुली हुई है, जो ट्रेडलैब नेटवर्क के कानूनी क्लिनिक या व्यावहारिक भाग में भाग लेते हैं या भाग लेना चाहते हैं।

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