भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत *’शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण व महिला स्वास्थ्य :मासिक धर्म संबंधी जानकारी’* हेतु एक व्याख्यान का आयोजन कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण द्वारा किया गया। इसके पश्चात प्राचार्य प्रो. सुमन ने स्वागत संबोधन के साथ ही मिशन शक्ति 5.0 की श्रृंखला में कराए जा रहे कार्यक्रमों की सराहना की और कहा कि, शासन द्वारा चलाए जा रहे हैं मिशन शक्ति कार्यक्रमों की सफलता तभी है, जब वास्तविक रूप से बालिकाओं और महिलाओं में अपने अधिकारों, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधित जागरूकता उत्पन्न हो।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. मोनिका शुक्ला ने अपने वक्तव्य एवं पी.पी.टी. प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्राओं को मासिक धर्म संबंधी जानकारी प्रदान की और साथ ही स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
मिशन शक्ति 5.0 की प्रभारी प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर ने मिशन शक्ति 5.0 की श्रृंखला में कराए जा रहे कार्यक्रमों और आगामी कराए जाने हेतु कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। साथ ही उन्होंने छात्राओं से रूबरू होते हुए कहा कि, उन्हें भी देश सेवा हेतु अपनी बराबर की भागीदारी निभानी चाहिए तथा सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सफल बनाने में अपना संपूर्ण योगदान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्राचार्या महोदया, मुख्य वक्ता, सभी शिक्षिकाओं एवं छात्राओं का कार्यक्रम में अपना सक्रिय योगदान और भागीदारी के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की शिक्षिकाएं, छात्राएं एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एन.एस.एस. की स्वयंसेविका छात्राओं ने सक्रिय योगदान दिया।
शिक्षा
सशक्त नारी – समृद्ध प्रदेश : मिशन शक्ति का पाँचवाँ चरण
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 29 सितम्बर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में “मिशन शक्ति” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मिशन शक्ति कोऑर्डिनेटर प्रो. मीत कमल ने आए हुए सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम में डीजीसी क्राइम दिलीप अवस्थी एसीपी आशुतोष कुमार, SHO जगदीश पांडे, पो श्रेया मिश्रा, आराध्या मिश्रा ने विशेष रूप से छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं और शासन द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। इनमें प्रमुख रूप से —
• 1090 : वूमेन पावर लाइन
• 1930 : साइबर हेल्पलाइन
• 181 : महिला हेल्पलाइन
• 1098 : चाइल्ड लाइन
• 108 : एम्बुलेंस सेवा
• 112 : आपातकालीन पुलिस सेवा
• 101 : अग्निशमन सेवा
एसीपी आशुतोष कुमार, छात्राओं को भरोसा दिलाया कि पुलिस विभाग हमेशा उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने छात्राओं से सुरक्षा के प्रति सजग रहने और हेल्पलाइन नंबरों का सही समय पर प्रयोग करने की अपील वक्ताओं ने कहा कि “मिशन शक्ति” का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना, उन्हें हर स्तर पर सुरक्षा व सम्मान दिलाना और आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित करना है।
Read More »दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में स्वच्छता शपथ एवं रैली आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 29 सितंबर स्वच्छता पखवाड़ा के तहत महाविद्यालयों में एनएसएस एवं एनसीसी के संयुक्त तत्वाधान में स्वच्छता शपथ एवं रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ प्राचार्या का शुभारंभ प्राचार्या प्रो वंदना निगम तथा निदेशक प्रो अर्चना वर्मा ने झंडी दिखाकर किया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को स्वच्छता के महत्व एवं उसकी आवश्यकता तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत चलाए जाने वाले विभिन्न स्वच्छता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारियां प्रदान की। छात्राओं ने स्वच्छता से संबंधित पोस्टर बनाकर रैली निकाली तथा स्वच्छता की शपथ भी ली।
इस अवसर पर चीफ प्रॉक्टर प्रो अर्चना श्रीवास्तव, डॉ अर्चना दीक्षित, एनसीसी प्रभारी प्रो शुभ्रा राजपूत, भूगोल विभाग से डॉ अंजना श्रीवास्तव, अंग्रेजी विभाग से डॉ दीप्ति शुक्ला, अर्थशास्त्र विभाग से डॉ साधना सिंह, डॉ पुष्पलता तिवारी सहित लगभग 80 छात्राओं ने सक्रिय प्रतिभागिता की।
Read More »“एन इंट्रोडक्शन टू द वर्ल्ड ऑफ इन्वेस्टिंग” विषय पर विशेष वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के जेंडर सेंसिटाइजेशन एवं महिला विकास प्रकोष्ठ (GSWDC) द्वारा एनएसई अकैडमी लिमिटेड के सहयोग से “एन इंट्रोडक्शन टू द वर्ल्ड ऑफ इन्वेस्टिंग” विषय पर महिला विशेष वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जे. सेबेस्टियन द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने वित्तीय साक्षरता को जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए विशेषकर महिलाओं के लिए इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता कविन्द्र द्विवेदी एवं शिल्पी ने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत वित्त एवं निवेश पर एक रोचक और संवादात्मक प्रस्तुति दी, जिसमें धन प्रबंधन के प्रभावी तरीकों और विवेकपूर्ण वित्तीय निर्णय लेने की व्यावहारिक जानकारियाँ शामिल थीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना, प्रतिभागियों को निवेश के विभिन्न अवसरों की जानकारी देना तथा महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरित करना था। सत्र का समन्वय प्रो. विभा दीक्षित, प्रकोष्ठ समन्वयक, द्वारा किया गया, जिन्होंने इस पहल को महिलाओं में आत्मविश्वास निर्माण और वित्तीय जागरूकता को प्रोत्साहित करने वाला बताया। प्रो. अनिंदिता ने कॉलेज प्रशासन के सहयोग की सराहना करते हुए सबका धन्यवाद किया.
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में गहरी रुचि दिखाई और प्रशिक्षण की व्यावहारिक उपयोगिता की सराहना की। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों में प्रो. फिरदौस, डॉ. अर्चना वर्मा, डॉ. अर्चना पाण्डेय डॉ. मनीषी तथा अनेक संकायों के विद्यार्थियों में छवि, अशरफ, श्रृष्टि, अपर्जिता ने सक्रिय सहभागिता की।
स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत सेहत चौपाल का आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 सितम्बर दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर में उजाला सिग्नस नोबल हॉस्पिटल, स्वरूप नगर के सौजन्य से राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा मिशन शक्ति,एनएसएस और रोवर रेंजर्स के संयुक्त तत्वाधान में “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार सप्ताह” के अंतर्गत एक स्वास्थ शिविर – मिशन शक्ति सेहत चौपाल का आयोजन किया गया गया जिसमें 200 से अधिक छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने भागीदारी की तथा विभिन्न प्रकार की जांच कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर वंदना निगम तथा निदेशक प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। महाविद्यालय की मिशन शक्ति कोर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि कार्यक्रम में महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता, जागरूकता एवं सशक्तिकरण पर सिग्नस अस्पताल से पधारे विशेषज्ञों रोहित शुक्ला, चिकित्सक विनस सचान, देवेंद्र सिंह, दिव्या राजपूत, पुष्पांजलि प्रीति पाल, गोविंद झा एवं रमन दिवाकर ने विस्तृत जानकारी दी। छात्राओं ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछकर लाभ लिया। शिक्षिकाओं ने सहयोग करते हुए जागरूकता संदेश प्रसारित किए। स्वास्थ्य परामर्श व मार्गदर्शन प्रदान कर महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम को सफ़ल बनाने में डॉ. अर्चना दीक्षित डॉ. अंजना श्रीवास्तव डॉ ज्योत्स्ना पांडे, डॉ विनीता श्रीवास्तव, डॉ. दीप्ति शुक्ला, डॉ. साधना सिंह, डॉ. पुष्पलता तथा पूजा श्रीवास्तव, डॉ श्वेता गोंड, डॉ कविता विश्नोई, कार्यलयाधिक्षक कृष्णेंद कुमार एवं समस्त अन्य एन एस एस वॉलेंटियर्स की विशेष भूमिका सराहनीय रही
शिक्षा समझो वही सफल, जो कर दे आचरण निर्मल”
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन.सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज कानपुर में शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत “नारी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान- एक सशक्त भविष्य का आधार”, विषय पर अतिथि व्याख्यान एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर सुमन, मुख्य वक्ता डॉ. स्वीटी श्रीवास्तव, वरिष्ठ आचार्य प्रो. निशी प्रकाश, निर्णायक मंडल में कैप्टन ममता अग्रवाल, किरन तथा शिक्षाशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण के साथ किय। उपस्थित सभी शिक्षिकाओं ने सरस्वती माँ के चरणों में पुष्प अर्पित किए। मुख्य अतिथि, प्राचार्या एवं निर्णायक मंडल का स्वागत उत्तरीय तथा स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया।
प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने विषय प्रवर्तन करते हुए महिला सशक्तिकरण में शिक्षा योगदान के विभिन्न पक्षों को उजागर किया तथा छात्राओं को स्वर्णिम भविष्य की ओर कदम बढ़ाने को प्रोत्साहित किया उन्होंने मिशन 5.0 की संपूर्ण रूपरेखा भी प्रस्तुत की। प्राचार्या प्रो. सुमन ने शिक्षाशास्त्र विभाग को नवरात्रि में आयोजित नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम हेतु शुभकामनाएं तथा बधाई दी। उन्होंने स्त्री और पुरुष एक दूसरे का पूरक बताया तथा मिशन 5.0 की सफलता के लिए समाज को सम्वेदनशील बनाने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिये।
मुख्य वक्ता डॉ. स्वीटी श्रीवास्तव, ने व्याख्यान के विषय को समसामयिक एवं कभी ना पुराना होने वाला बताया। उन्होंने नारी शिक्षा के लिए समाज में जागरूकता एवं अभिप्रेरणा को आवश्यक बताया। उन्होंने छात्राओं को परेशानी में भी मुस्कुराते रहने को कहा जिससे उनकी शक्ति बनी रहे। सफलता के लिए समय प्रबंधन, उत्तरदायित्व का निर्वाह, मूल्य शिक्षा, संयम, नियमित उपस्थिति, आदि के महत्त्व पर प्रकाश डाला |
प्रो. निशी प्रकाश ने बेटे-बेटी की एक समान शिक्षा और एक समान व्यवहार को नारी सम्मान के लिए अनिवार्य बताया
पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार स्नेहा सिंह,
द्वितीय पुरस्कार रोशनी निषाद, तृतीय पुरस्कार कुमकुम पांडेय और पावनी पांडेय ने संयुक्त रूप से तथा सांत्वना पुरस्कार मुस्कान थारू ने प्राप्त किया।
कैप्टन ममता अग्रवाल ने पाठ्य सहगामी क्रियाओं के महत्त्व को बताया तथा आंतरिक सुंदरता को ज्यादा महत्तवपूर्ण बताया। श्रीमती किरन ने पोस्टर से जुड़े तकनीकी बिंदुओं को बताया। स्वयं में ईमानदारी और नैतिकता बनाए रखें।
डाॅ. ऋचा सिंह तथा डाॅ. संगीता सिंह ने मंच संचालन का कार्य कुशलतापूर्वक किया। डाॅ. अनामिका ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय योगदान दिया। प्राचार्या, मुख्य अतिथि, शिक्षिकाओं तथा छात्राओं की कार्यक्रम में एक साथ उपस्थिति ही वास्तव में महिला सशक्तिकरण की ओर उनके बढ़ते हुए कदम हैं| इस अवसर पर प्रो. रेखा चौबे, प्रो. अलका टंडन, डाॅ. शुभा बाजपेयी, डाॅ. रोली मिश्रा, डाॅ. कोमल, डाॅ. रश्मि, डाॅ. शिवांगी, डाॅ. समीक्षा, डाॅ. शैल उपस्थित रहीं।
Read More »क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “आचार संहिता” पर व्याख्यान आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में आईक्यूएसी (IQAC) और वैल्यू एजुकेशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में “आचार संहिता पर प्रेरणादायी व्याख्यान” आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो सुजाता चतुर्वेदी(आईक्यूएसी संयोजक) के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद *प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन* ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा में अनुशासन और मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
मुख्य व्याख्यान डॉ. विमल सिंह, शिक्षा विभाग, सीएसजेएम विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया। उन्होंने छात्रों को ईमानदारी, जिम्मेदारी और नैतिकता को जीवन और शिक्षा की दिशा में मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में रचनात्मकता जोड़ते हुए *”सेल्फी विद ग्रैंडपेरेंट्स”* प्रतियोगिता के परिणाम की घोषणा प्रो श्वेता चन्द (वैल्यू एजुकेशन सेल संयोजक) द्वारा की गई। अंत में डॉ. धनंजय डे ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही तथा यह संदेश दिया गया कि नैतिक आचरण व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।
Read More »सशक्त नारी – समृद्ध प्रदेश : मिशन शक्ति का पाँचवाँ चरण
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में “मिशन शक्ति” कार्यक्रम कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मिशन शक्ति कोऑर्डिनेटर प्रो. मीत कमल ने आए हुए सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम में थाना कोतवाली से एस.ओ. अंकिता तिवारी, एस.आई. चन्द्रा कुमारी और एस.आई. शिवम पांडेय ने विशेष रूप से छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं और शासन द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। इनमें प्रमुख रूप से —
• 1090 : वूमेन पावर लाइन
• 1930 : साइबर हेल्पलाइन
• 181 : महिला हेल्पलाइन
• 1098 : चाइल्ड लाइन
• 108 : एम्बुलेंस सेवा
• 112 : आपातकालीन पुलिस सेवा
• 101 : अग्निशमन सेवा
एस.ओ. अंकिता तिवारी ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि पुलिस विभाग हमेशा उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने छात्राओं से सुरक्षा के प्रति सजग रहने और हेल्पलाइन नंबरों का सही समय पर प्रयोग करने की अपील की।
कार्यक्रम की सफलता में मिशन शक्ति के छात्र-स्वयंसेवक — सुंदरम मिश्रा, कांची त्रिपाठी, वारिशा, आदर्श सिंह, विख्यात दुबे, महमूद आदि का विशेष योगदान रहा। वक्ताओं ने कहा कि “मिशन शक्ति” का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना, उन्हें हर स्तर पर सुरक्षा व सम्मान दिलाना और आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित करना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं ने “नारी शक्ति, नारी सुरक्षा, नारी सम्मान, नारी स्वावलंबन – मिशन शक्ति का अभियान।” जैसे नारों से माहौल गुंजायमान कर दिया
Read More »देश के आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने के लिए आदि युवा फेलोशिप एवं आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक की शुरुआत
आदि कर्मयोगी अभियान का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2025 को जनजातीय गौरव वर्ष (15 नवंबर 2024 – 15 नवंबर 2025) के भाग के रूप में किया था। इसका उद्देश्य 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 550 जिलों के एक लाख आदिवासी बहुल गांवों के 11 करोड़ नागरिकों को इसमें सीधे शामिल करना है। उत्तरदायी, जवाबदेह एवं नागरिक-केंद्रित शासन के सिद्धांतों पर आधारित यह अभियान शासन को एक जन अभियान बनाने एवं विकसित भारत 2047 की नींव रखने की कोशिश करता है।
इस पहल के एक भाग के रूप में, आदि सेवापर्व (17 सितंबर – 02 अक्टूबर 2025) चल रहा है, जिस दौरान जनजातीय समुदाय एवं सरकारी अधिकारी मिलकर जनजातीय ग्राम विजन 2030 कार्य योजना तैयार करेंगे ताकि समावेशी विकास की दिशा में स्थानीय विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।
आदि युवा फेलोशिप
संयुक्त राष्ट्र भारत द्वारा समर्थित आदि युवा फेलोशिप, अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है जिसे संरचित शिक्षा, मार्गदर्शन एवं कैरियर विकास के माध्यम से जनजातिय युवाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।
- चयनित जनजातीय युवा 12 महीने की वेतन फेलोशिप प्राप्त करेंगे, जो एक अनुकूलित शिक्षण योजना होगी जिसमें ज्ञान निर्माण, नौकरी के अनुभव एवं चिंतनात्मक अभ्यास के बीच का संतुलन स्थापित किया जाएगा।
- फेलो को मासिक भत्ते, व्यापक स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा तथा उच्च गुणवत्ता वाले संयुक्त राष्ट्र एवं वाणिज्यिक शिक्षण प्लेटफार्मों तक पहुंच प्राप्त होगी।
- यह कार्यक्रम फेलो को राष्ट्रीय कौशल और रोजगारपरकता योजनाओं जैसे पीएमकेवीवाई 4.0, एनएपीएस और पीएम विकसित भारत रोजगार योजना से जोड़ेगा, जिससे दीर्घकालिक करियर के लिए मार्ग सुनिश्चित होगा।
- फेलो को संरचित मार्गदर्शन, सहकर्मी से सहकर्मी को सीखने और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों के संपर्क का भी लाभ प्राप्त होगा।
- अगले महीने एक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से 16 फेलो के पहले बैच का चयन किया जाएगा और उन्हें राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ रखा जाएगा।
आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक
- आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक पहल यूएनएफपीए द्वारा समर्थित है जो जनजातीय युवाओं को जमीनी स्तर पर परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक बनने तथा जनजातीय क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए सक्षम बनाएगी।
- 82 संयुक्त राष्ट्र सामुदायिक स्वयंसेवक आदि कर्मयोगी के रूप में यूएनएफपीए द्वारा समर्थित स्वयंसेवकों को दो महीने की गहन जमीनी स्तर की भागीदारी के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के 13 जिलों के 82 ब्लॉकों में तैनात किया गया है।
- स्वयंसेवक ग्राम विजन 2030 योजना, जागरूकता अभियान, आउटरीच तथा योजनाओं एवं सेवाओं तक बेहतर पहुंच में सहायता प्रदान करेंगे।
- उनके योगदान से गांव स्तर पर सामुदायिक भागीदारी और समावेशी शासन को मजबूती मिलेगी।
“आदि युवा एवं आदि कर्मयोगी फ़ेलोशिप समावेशी विकास के प्रति हमारी दृढ़ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब हैं, जिसका उद्देश्य युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने व नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के नेतृत्व में, हमें विविधता में भारत की शक्ति का समर्थन करने और 2030 एजेंडा और विकसित भारत 2047, दोनों की दिशा में गतिशील प्रगति देने पर गर्व है।”
-— शोम्बी शार्प, भारत में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्यवक
“यह साझेदारी आदिवासी युवाओं को अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व करने में सक्षम बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। यह न केवल समावेशी प्रगति को गति देगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आदिवासी समुदाय भारत की विकास गाथा के केंद्र में हों। मंत्रालय हमारे युवाओं को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि वे भारत के भविष्य के लिए नेतृत्वकर्ता, नवप्रवर्तक और परिवर्तन के वाहक के रूप में उभरें।”
— विभु नायर, सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार
आदि युवा फ़ेलोशिप और आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी युवाओं को भविष्य के नेता, नवप्रवर्तक और परिवर्तनकारी के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। कौशल, मार्गदर्शन और जमीनी स्तर पर जुड़ाव को बढ़ावा देकर, यह पहल सुनिश्चित करती है कि आदिवासी समुदाय अपने विकास को आकार देने में सक्रिय भागीदार बनें। भारत में जनजातीय कार्य मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के बीच इस साझेदारी के माध्यम से, यह अभियान समावेशी विकास, सहभागी शासन और विकसित भारत 2047 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
उच्च ऊर्जा परमाणु जुड़ाव नई दिशा प्रदान कर रहा है, जिससे अगली पीढ़ी के क्वांटम उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है
इतनी उच्च अवस्थाओं पर रिडबर्ग परमाणु संकेतों पर पहली बार देखी गई यह अनोखी विकृति भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
साधारण परमाणु छोटे-से कण होते हैं, लेकिन रिडबर्ग परमाणु असाधारण रूप से विशाल होते हैं। जब वैज्ञानिक किसी परमाणु के सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा के बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाते हैं, तो उसका आकार सामान्य से कहीं बड़ा हो जाता है और वह अपने आस-पास के वातावरण के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है। यही अनोखे गुण रिडबर्ग परमाणुओं को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों और अति-सटीक सेंसरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। हालांकि, यही संवेदनशीलता उन्हें अप्रत्याशित भी बना देती है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) की एक टीम ने रुबिडियम परमाणुओं को लगभग परम शून्य तापमान तक ठंडा किया — इतना ठंडा कि वे मुश्किल से हिल पाते हैं। इन परमाणुओं को बाद में लेजर और चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से फंसा दिया गया। इसके बाद, प्रकाश किरणों का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने उन्हें रिडबर्ग अवस्था में उत्तेजित किया। आमतौर पर परमाणु अपनी उत्तेजना को एक स्पष्ट और मूलग्रंथ जैसे पैटर्न में प्रकट करते हैं, जिसे ऑटलर-टाउन्स स्प्लिटिंग कहा जाता है।

चित्र- फंसे हुए ठंडे परमाणु सेट-अप में रिडबर्ग उत्तेजना का एक कलात्मक प्रतिनिधित्व
हालांकि जब शोधकर्ताओं ने परमाणुओं को 100वें ऊर्जा स्तर से आगे धकेला, तो साफ और नियमित पैटर्न अचानक टूट गया। अब उनका व्यवहार धुंधला तथा विकृत दिखने लगा। यह कोई त्रुटि नहीं थी, बल्कि एक अद्भुत खोज थी: परमाणु अब अकेले नहीं, बल्कि एक साथ कार्य कर रहे थे। यह ऐसा था कि जैसे एक बड़ा झुंड तालमेल से नाच रहा हो, वे एक-दूसरे से जुड़ रहे थे, प्रभाव डाल रहे थे और सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया दे रहे थे।
रिडबर्ग परमाणुओं में उच्च ऊर्जा पर दिखने वाली ये विचित्र विकृतियां क्वांटम तकनीक के लिए एक संकेत की तरह हैं। ये वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती हैं कि किस समय परमाणु अकेले रहते हैं और कब वे एक साथ जुड़कर जटिल, आपस में उलझे समूह बनाते हैं, जो बड़ी एवं जटिल प्रणाली की नकल करने में सक्षम होते हैं। ये वास्तव में परिशुद्धता वाले प्रयोगों में उपयोगी हैं। यह जानना कि परमाणु कब और कैसे एक-दूसरे से ‘जुड़ना’ शुरू करते हैं, भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
आरआरआई में प्रोफेसर संजुक्ता रॉय और उनके पीएचडी विद्यार्थियों शिल्पा बी एस और शोवन के बारिक के नेतृत्व में आईआईएसईआर पुणे में प्रोफेसर रेजिश नाथ की टीम द्वारा सैद्धांतिक मॉडलिंग के साथ किये गए इस प्रयोग ने नाजुक इंजीनियरिंग को गहन भौतिकी अंतर्दृष्टि के साथ जोड़ा है। उनकी विशेष रूप से निर्मित पहचान प्रणाली इतनी संवेदनशील थी कि वह बहुत कम संख्या में फोटॉनों को भी पहचान सकती थी, जिससे उन्हें अत्यधिक उच्च ऊर्जा स्तरों पर रिडबर्ग परमाणुओं का अध्ययन करने में सहायता मिली, जहां अन्य विफल हो गए थे।
डॉ. रॉय के अनुसार, ‘हमारे प्रयोग में एक अत्यंत संवेदनशील पहचान प्रणाली स्थापित की गई, जो परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित कुछ ही फोटॉनों का भी पता लगाने में सक्षम है। इससे हमें अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं (n > 100) में मौजूद परमाणुओं का पता लगाने में मदद मिली, भले ही उनके संक्रमण की संभावनाएं बहुत कम रही हों। हमने अपने प्रयोग को इस तरह अनुकूलित किया है कि अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं से आने वाले सिग्नल को उच्च सिग्नल-टू-शोर अनुपात के साथ मापा जा सके।’
इस खोज ने भारतीय शोधकर्ताओं को वैश्विक क्वांटम अनुसंधान के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यह दिखाता है कि जब वैज्ञानिक परमाणुओं को लगभग पूरी तरह स्थिर अवस्था तक ठंडा करते हैं और फिर उन्हें अत्यधिक ऊर्जावान बनाते हैं, तो वे पदार्थ को व्यक्तिगत से सामूहिक रूप में बदलते हुए देख सकते हैं।
परमाणु व्यवहार को समझने यह नई खोज भविष्य की क्वांटम प्रौद्योगिकियों की सीमाएं निर्धारित करती है। इस नाजुक संतुलन पर ही क्वांटम प्रौद्योगिकियों का भविष्य आकार ले रहा है और यह ज्ञान आने वाले उपकरणों के निर्माण में मार्गदर्शन करेगा।
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