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जन कल्याणकारी नीतियों एवं योजनाओं से उत्तर प्रदेश बना अग्रणी प्रदेश

भारतीय स्वरूप संवददाता, उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है। इसकी जनसंख्या विश्व के अनेक देशों से भी बहुत ज्यादा है। इस दृष्टिकोण से देंखें तो प्रदेश की वर्तमान सरकार के विगत साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश ने विकास के नए कीर्तिमान गढ़े हैं एवं अनेक क्षेत्रों में प्रदेश ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सफलता हासिल की है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन ’सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’ को प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशन में ’विकास की रीत-सबकी जीत’ के माध्यम से पूर्णता हासिल हो रही है। यह प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की ही मेहनत तथा सरकार के सम्मिलित प्रयासों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश विभिन्न केन्द्रीय योजनाओं में नम्बर एक बना है। साथ ही उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा कई नई पहलें की गयी हैं जो अन्य प्रदेशों के लिए नजीर बन रही है।

उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार के अबतक के साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अन्तर्गत 17.23 लाख से भी ज्यादा आवास बनाए जा चुके हैं एवं इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान पर है। इसी प्रकार ग्रामीण स्वच्छ शौचालय निर्माण में भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में सर्वाधिक आवास निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी राज्य है। प्रदेश के लाखों लोगों के पास अब अपना पक्का मकान है।
कृषि एवं कृषकों के हित में भी उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं और योजनाएं लागू की गई हैं। जिसके कारण कृषि निवेशों पर किसानों को देय अनुदान को डी0बी0टी0 के माध्यम से भुगतान करने वाला, उत्तर प्रदेश देश में पहला राज्य बना है। इस प्रकार कृषको को देय विभिन्न अनुदानों में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है एवं बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया गया है। इसी प्रकार किसानों के लिए बाजार को व्यापक बनाने के दृष्टिकोण से मण्डी अधिनियम में संशोधन करने वाला उत्तर प्रदेश देश में पहला राज्य बना है। इस संशोधन से कृषकों के लिए उपज को कहीं भी बेचने की आजादी मिली है एवं उनकी आय में वृद्धि होने की संभावनाएं भी बलवती हुयी हैं। दुग्ध उत्पादन, गन्ना एवं चीनी उत्पादन तथा तिलहन उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी है तथा इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 1,38,000 करोड़ रूपये से अधिक का गन्ना मूल्य, गन्ना किसानों को भुगतान किया गया है जो एक रिकार्ड है। समाज के निर्धनतम वर्ग को पेंशन की सुविधा दिलाने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही अटल पेंशन योजना के अन्तर्गत पंजीकरण कराने में उत्तर प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। इसी प्रकार पिछड़े, वंचित लोगों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही बीमा योजना प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना में भी उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी है। देश भर में सर्वाधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना, उत्तर प्रदेश में की गई है और लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को पारम्परिक चूल्हों के स्थान पर गैस कनेक्शन प्रदान करने वाली उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के 1.47 करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। जो देश में सर्वाधिक है। इस प्रकार प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सम्मान की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रदेश के महोबा जनपद से उज्ज्वला 2.0 की शुरूआत की गई है जिसके अन्तर्गत गैस कनेक्शन प्रदान करने के लक्ष्य को और बढ़ा दिया गया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशन में उत्तर प्रदेश में कई नीतियां ऐसी लागू की गयी हैं जो देश में किसी राज्य सरकार द्वारा प्रथम बार लागू की गयी है। इनमें कौशल विकास नीति तथा राज्य स्वास्थ्य नीति प्रमुख है। इन नीतियों के माध्यम से प्रदेश के व्यापक वर्ग के विकास के माध्यम से राज्य के समग्र विकास का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रदेश सरकार के विगत साढ़े चार वर्ष के कार्यों का ही प्रतिफल है कि प्रदेश सरकार को कई अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इनमें ई-टेन्डरिंग प्रणाली में सर्वोत्तम परफारमेंस के लिए बेस्ट परफार्मेन्स अवार्ड, ईज आफ डूइंग बिजनेस में उ0प्र0 को देश में द्वितीय स्थान साथ ही सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं पारदर्शिता में अग्रणी राज्य, उ0प्र0 परिवहन निगम को सर्वश्रेष्ठ प्राफिट मेंकिंग एस0टी0यू0 का राष्ट्रीय पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप रैकिंग के तहत उ0प्र0 एस्पायरिंग लीडर का पुरस्कार, उ0प्र0 के खाद्य एवं रसद विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर एक्सीलेंस इन डिजीटल गवर्नेंस स्टेट श्रेणी में राज्य पुरस्कार आदि प्रमुख है। इसके अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन में उ0प्र0 को ’देश का बेस्ट स्टेट फार इनलैण्ड फिशरीज’ घोषित करते हुए भारत सरकार द्वारा प्रथम पुरस्कार दिया गया है। उत्तर प्रदेश में मैनुअल चालान व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है एवं अब ई-पेमेन्ट से जुर्माना भुगतान की सुविधा हेतु ई-चालान व्यवस्था लागू कर उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। वृक्षारोपण को अभियान के रूप में शुरूकर प्रदेश की वर्तमान सरकार के अबतक के कार्यकाल में 100 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण तथा पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में सराहनीय कार्य किया गया है।
अयोध्या में आयोजित भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम में 6.06 लाख से अधिक दीप जलाकर प्रदेश सरकार द्वारा इस आयोजन को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज किया गया। वर्ष 2019 में प्रयागराज में आयोजित ’दिव्यकुम्भ-भव्य कुम्भ’ के अन्तर्गत तीन-तीन विश्व रिकार्ड बनाकर प्रदेश की वर्तमान सरकार ने प्रदेश सरकार को विश्वपटल पर गौरवान्वित किया है।
उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों एवं योजनाओं से प्रदेश को न केवल देश के स्तर पर वरन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान व सम्मान मिल रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की प्रेरणा, मार्गदर्शन व दिशा-निर्देशन में प्रदेश लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त कर रहा है।

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कल होगा सर्किट हाउस में महिला जन सुनवाई का आयोजन

कानपुर 31 अगस्त, उ0प्र0 राज्य महिला आयोग की मा0 सदस्य श्रीमती पूनम कपूर ने बताया है कि कल दिनांक 01 सितम्बर, 2021 प्रातः 10 बजे सर्किट हाउस में महिला जन सुनवाई का आयोजन मिशन शक्ति फेस-3 के अन्तर्गत किया जायेगा। उन्होंने बताया है कि महिला जन सुनवाई में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीडन, मारपीट व अन्य महिलाओं से उत्पीडन संबंधी प्रकरणों को सुनते हुये उनका यथाशीघ्र निस्तारण किया जायेगा। उन्होंने कहा है कि महिला जन सुनवाई में कोई भी पीडित महिला अपनी समस्या को प्रस्तुत कर सकती है। इस महिला जन सुनवाई में महिला आयोग की मा0 सदस्य श्रीमती रंजना शुक्ला भी उपस्थित रहकर महिलाओं की समस्याओं को सुनेगी।
उन्होंने बताया है कि महिला जन सुनवाई में प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के हितों में संचालित विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जायेगी। महिला जन सुनवाई में पुलिस विभाग से संबंधित अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, महिला थानाध्यक्ष तथा वन स्टॉप सेन्टर की प्रभारी अधिकारी भी उपस्थित रहेगी। उन्होंने कहा है कि इस महिला जनसुनवाई में पीडित महिलायें आवश्यक रुप से उपस्थित होकर अपनी समस्याओं को रख कर इस अवसर का लाभ प्राप्त कर सकती है।

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नगर आयुक्त का विभिन्न समस्याओं के निराकरण का निर्देश

  1. कानपुर 31 अगस्त,  नगर आयुक्त द्वारा नगर भ्रमण के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय सम्बन्धित क्षेत्र के जोनल अधिकारी, जोनल स्वच्छता अधिकारी व जोनल अभियन्ता आदि सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे। निरीक्षण के समय नगर निगम से सम्बन्धित समस्याओं को देखा गया एवं मौके पर ही सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये गये, चुन्नीगंज ट्रान्सफर स्टेशन के पास मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण पाया गया। मौके पर उपस्थित जोनल अधिकारी को निर्देशित किया गया कि तत्काल एक अभियान प्रस्तावित कराकर इस मार्ग को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाये। आगे बढने पर इसी मार्ग पर बांयी ओर कूड़ा बिखरा मिला एवं लकड़ी, झाड़ियों के बड़े बड़े ढेर लगे पाये गये। इस पर जोनल स्व0 अधिकारी से जवाब तलब करते हुये अप्रसन्नता व्यक्त की गई एवं निर्देशित किया गया कि इस स्थल की पूर्णतयः सफाई कराने के उपरान्त जोनल अभियन्ता यहॉ एक व्यू कटर (टीन शेड द्वारा)लगाने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करें। आयुक्त, कानपुर मण्डल आवास के बाहर मुख्य मार्ग पर एक कूड़े का कण्टेनर भरा पाया गया। इस पर निर्देश दिये गये जोनल स्व0 अधिकारी इसे अविलम्ब खाली कराकर पुनः स्थापित कराना सुनिश्चित करें। सिविल लाइन स्थित महिला छात्रावास, नगर निगम का मुआयना किया गया। जोनल अभियन्ता श्री आर0 के0 सिंह द्वारा इस परिसर में निराश्रित महिलाओं कां निवास होना बताया गया। इस परिसर में काफी मात्रा मे कूड़ा लगा पाया गया। मौके पर उपस्थित जोनल स्व0 अधिकारी -1 को तत्काल कूड़ा उठान हेतु निर्देशित किया गया। माल रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा के सामने मुख्य मार्ग पर स्थित डिवाइडर की पेटिंग हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाये। जोनल अभियन्ता श्री आर0 के0 सिंह, को निर्देशित किया कि जोन-1 के सीमान्तर्गत स्थित सब्जी मण्डियों/फल मण्डियों पर कम्पोस्ट यूनिट/काम्पैक्टर स्थापित कराने हेतु एक कार्य योजना तैयार कर प्रस्तुत करें। परेड चौराहे से चुन्नीगंज तक मुख्य रोड पर स्थित डिवाइडर पर पेन्टिंग कार्य कराने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये।

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बैंक कर्मचारी परिवार पेंशन को अंतिम आहरित वेतन के 30% तक बढ़ाया जाएगा

बैंक कर्मचारियों के परिवारों को राहत देने के लिए, सरकार ने इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन के परिवार पेंशन को अंतिम आहरित वेतन के 30% तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस कदम से बैंक कर्मचारियों की प्रति परिवार पारिवारिक पेंशन 30,000 रुपये से 35,000 रुपये तक हो जाएगी। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने आज मुंबई में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संबोधित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की।

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सचिव ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के वेतन संशोधन पर 11वें द्विपक्षीय समझौते में, जिस पर इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने 11 नवंबर, 2020 को यूनियनों के साथ हस्ताक्षर किए थे, राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत पारिवारिक पेंशन वृद्धि और नियोक्ता के योगदान की बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव था। इसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि “पहले इस योजना में पेंशनभोगी के अंतिम आहृत वेतन का 15, 20 और 30 प्रतिशत का स्लैब था। इसकी अधिकतम सीमा 9,284/- रुपये थी। वह बहुत ही मामूली राशि थी जिसके बारे में वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण चिंतित थीं और चाहती थीं कि इसे संशोधित किया जाए ताकि बैंक कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को जीवन यापन के लिए एक बेहतर राशि मिल सके।

सरकार ने नई पेंशन योजना के तहत नियोक्ताओं के योगदान को मौजूदा 10% से बढ़ाकर 14% करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

बढ़ी हुई पारिवारिक पेंशन से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के हजारों परिवार लाभान्वित होंगे, जबकि नियोक्ताओं के योगदान में वृद्धि से नई पेंशन योजना के तहत बैंक कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा में बढ़ोतरी होगी।

वित्त मंत्री ने अपनी दो दिवसीय मुंबई यात्रा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज की समीक्षा की और स्मार्ट बैंकिंग के लिए ईज़ 4.0 सुधार एजेंडा लॉन्च किया।

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राष्‍ट्रपति भवन ने केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों के संकाय सदस्‍यों और छात्रों से आगंतुक पुरस्‍कार 2021 के लिए आवेदन आमंत्रित किए

राष्‍ट्रपति भवन ने केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों के संकाय सदस्‍यों और छात्रों से आगंतुक पुरस्‍कार 2021 के लिए विभिन्‍न श्रेणियों में आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन श्रेणियों में 1. नवाचार के लिए आगंतुक पुरस्‍कार, 2. (अ) मानविकी, कला और सामाजिक विज्ञान (ब) भौतिक विज्ञान और (स) जैविक विज्ञान में शोध के लिए आगंतुक पुरस्‍कार, 3. प्रौद्योगिकी विकास के लिए आगंतुक पुरस्‍कार।

आवेदक इसके लिए वेबसाइट www.presidentofindia.nic.in और ‘7वें विजिटर्स अवार्ड 2021’ लिंक पर क्लिक कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्‍टूबर, 2021 है और इसके लिए विस्‍तृत जानकारी https://rb.nic.in/visitorawards से ली जा सकती है।

इन पुरस्‍कारों की स्‍थापना 2014 में केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों के बीच स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा को बढ़ावा देने और उत्‍कृष्‍टता हासिल करने की दिशा में विश्‍व भर की बेहतर पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्‍य से की गई थी।

भारत के राष्‍ट्रपति केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों के विजिटर के रूप में इन पुरस्‍कारों को प्रदान करते हैं।

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वित्‍त वर्ष 2022 में आसियान को भारत का निर्यात 46 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान : अनुप्रिया पटेल

केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग राज्‍य मंत्री सुश्री अनुप्रिया पटेल ने विदेश मंत्रालय और वाणिज्‍य विभाग के सहयोग से इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (ईईपीसी) द्वारा आयोजित ‘भारत-आसियान इंजीनियरिंग भागीदारी शिखर सम्‍मेलन’ का उद्घाटन किया। आज का शिखर सम्‍मेलन इंजीनियरिंग क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित रहा। यह शिखर सम्‍मेलन इंजीनियरिंग व्‍यापार और निवेश में भारत-आसियान भागीदारी के संबंध में भारतीय उद्योग की साझेदारी के लिए महत्‍वपूर्ण मंच प्रस्‍तुत करता है। यह मंच इंजीनियरिंग के साथ ही साथ व्‍यापारिक वस्‍तुओं के निर्यात, दोनों के संदर्भ में सरकार द्वारा निर्धारित अभूतपूर्व निर्यात लक्ष्‍य को हासिल करने का माध्‍यम भी बनेगा।

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उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सुश्री अनुप्रिया पटेल ने सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक आसियान के साथ शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए ईईपीसी इंडिया को बधाई दी। सुश्री पटेल ने कहा कि व्यापार, भारत और आसियान के लिए विकास का महत्वपूर्ण वाहक है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग निर्यात व्यापारिक वस्‍तुओं के निर्यात का एक-चौथाई हिस्सा है और यह सभी निर्यात क्षेत्रों में से सबसे ज्‍यादा विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला है तथा पिछले कुछ वर्षों से इंजीनियरिंग निर्यात का प्रदर्शन शानदार रहा है। भारत के ग्‍लोबल इंजीनियरिंग शिपमेंट में आसियान की 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वर्ष 2021-22 के दौरान  लगभग 16 बिलियन डॉलर के निर्यात के लक्ष्य के लिए इस क्षेत्र पर मुख्‍य रूप से ध्‍यान केंद्रित किए जाने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि आसियान भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़े गंतव्यों में से एक है, इ‍सलिए वित्तीय वर्ष 2021-22 में 400 बिलियन डॉलर के वैश्विक निर्यात लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में 46 बिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य के साथ यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा। आसियान, एक क्षेत्र के रूप में यूरोपीय संघ और उत्तरी अमेरिका के बाद भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। आसियान के सदस्य देशों में से सिंगापुर और मलेशिया भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए प्रमुख निर्यात गंतव्य हैं।

सुश्री पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और आसियान दोनों के पास कुशल लोग, सुदृढ़ सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा है तथा व्‍यापक सहयोग के लिए कई अन्योन्याश्रित क्षेत्र और उत्पाद उपलब्ध हैं। लगभग 5.8 ट्रिलियन डॉलर की मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ भारत और आसियान के बीच व्यापार और निवेश भागीदारी को बढ़ाने की महत्वपूर्ण संभावना मौजूद है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए भारत को और भी आकर्षक गंतव्य बनाने के लिए अनेक उपाय किए हैं। सुश्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 400 बिलियन डॉलर के व्यापारिक वस्‍तु निर्यात का लक्ष्य रखा है और इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए एक योजना की भी परिकल्पना की है। ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के एक भाग के रूप में निवेश को आकर्षित करने और भारत की विनिर्माण क्षमताओं को संवर्धित करने के लिए सरकार ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, सौर मॉड्यूल, विशेषकर इस्‍पात, ऑटोमोबाइल और चिकित्सा उपकरणों सहित 13 क्षेत्रों को शामिल  करते हुए 26 बिलियन डॉलर की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किए जा रहे चार दिवसीय भारत-आसियान इंजीनियरिंग भागीदारी शिखर सम्मेलन में भारतीय उद्योग जगत के 300 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। आसियान देशों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। शिखर सम्मेलन में बी 2 बी बैठकें, बातचीत आदि भी शामिल होंगे। विषय संबंधी सत्रों में देश के सत्र और उद्योग 4.0 जैसे सहयोग के उभरते क्षेत्रों, क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखला में एमएसएमई का एकीकरण सहित विविध विषयों को शामिल किया जाएगा। तमिलनाडु सरकार इस आयोजन में “भागीदार राज्‍य” के रूप में जबकि हरियाणा सरकार “फोकस राज्‍य” के रूप में शामिल होगी।

यह वर्ष दोनों भागीदारों के लिए खास है क्योंकि यह भारत-आसियान संवाद साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ और रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।

उद्घाटन सत्र के दौरान इंजीनियरिंग और एमएसएमई क्षेत्र पर जोर देते हुए भारत-आसियान व्यापार और निवेश पर एक ई-बुक भी लॉन्च की गई। इस पुस्तक में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है तथा यह भारत और दस आसियान देशों के बारे में विस्तृत जानकारी भी प्रदान करती है।

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कानपुर में मुंबई की तरह एमएसटी शुरू की जाए

कानपुर। यूपी दैनिक रेल यात्री कल्याण समिति के संरक्षक राजेश शुक्ल, सचिव राहुल शुक्ल, मनीष मिश्रा, श्रीधर कश्यप, अभिषेख सिंह, गौरव जायसवाल, अमन, रीतेश सिंह ने रविवार को सांसद सत्यदेव पचौरी से मुलाकात कर ट्रेनों में मुंबई की तर्ज पर एमएसटी खोलने की मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि लखनऊ, फतेहपुर, प्रयागराज तक हर दिन हजारों लोगों को अप-डाउन करना पड़ रहा है लेकिन रोज हर यात्री को चार सौ रूपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

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54 पैरालंपिक एथलीट भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और टोक्यो पैरालंपिक में पदक जीतने के लिए 25 अगस्त से अपनी यात्रा शुरू करेंगे

प्रमुख तथ्य :

•54 एथलीटों के साथ किसी भी पैरालंपिक में भारत द्वारा भेजी गई अब तक की यह सबसे बड़ी टीम है।

•भाविना और सोनलबेन पहले दिन यानी 25 अगस्त को टोक्यो में अपने अंतिम चयन प्रतिस्पर्धा (क्वालीफिकेशन राउंड) की शुरुआत करेंगी। वे टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) कोर ग्रुप का हिस्सा हैं।

•अरुणा महिलाओं के अंडर 49 किग्रा में के-44 वर्ग में भाग लेंगी। वे 2 सितंबर को राउंड ऑफ-16 राउंड्स से अपने प्रतिस्पर्धा की शुरुआत करेंगी। वे टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) का हिस्सा हैं।

•सकीना, जो महिलाओं के 50 किग्रा वर्ग में भाग लेंगी, राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला पैरालंपिक खिलाड़ी हैं।

भारत के 54 एथलीट; तीरंदाजी, एथलेटिक्स (ट्रैक एंड फील्ड), बैडमिंटन, तैराकी, भारोत्तोलन समेत 9 खेलों में भाग लेंगे। यह किसी भी पैरालंपिक में भारत द्वारा भेजी गई अब तक की सबसे बड़ी टीम है। सभी 54 एथलीट टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) का हिस्सा हैं।

गुजरात राज्य की भाविना पटेल और सोनलबेन पटेल दोनों पैरालंपिक खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने की कोशिश करेंगी। यह जोड़ी क्रमशः पैरा टेबल टेनिस महिला एकल व्हीलचेयर वर्ग 4 श्रेणी और महिला एकल व्हीलचेयर वर्ग 3 श्रेणी में भाग ले रही है। वे महिला युगल स्पर्धा में भी जोड़ी के रूप में भाग लेंगी।

(चित्र: सोनलबेन पटेल)

भाविना और सोनलबेन अपने क्वालीफिकेशन राउंड की शुरुआत टोक्यो में पहले दिन यानी 25 अगस्त को करेंगी। क्वालीफाइंग राउंड 25, 26 और 27 अगस्त को होंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल क्रमशः 28 और 29 अगस्त को होंगे।

 

(चित्र: भाविना)

दोनों खिलाड़ियों ने अहमदाबाद स्थित ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन में प्रशिक्षक ललन दोषी की देख-रेख में प्रशिक्षण लिया है। भाविना जहां इस समय अपने वर्ग में दुनिया में 8वें स्थान पर हैं, वहीं सोनलबेन 19वें स्थान पर हैं। दोनों सरदार पटेल पुरस्कार और एकलव्य पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं और एशियाई खेलों में पदक विजेता रही हैं।

दोनों खिलाड़ी टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) कोर ग्रुप का हिस्सा हैं और दोनों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के मामले में भारत सरकार से महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है। भाविना को व्यक्तिगत प्रशिक्षण के लिए टीटी टेबल, रोबोट और टीटी व्हीलचेयर तथा आगामी टोक्यो पैरालंपिक खेलों की तैयारी के लिए फिजियोथेरेपी, आहार विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और प्रशिक्षण शुल्क के साथ-साथ प्रशिक्षण के लिए टेबल टेनिस बॉल, प्लाई, रबर, गोंद आदि जैसे उनके खेल से जुड़े विशिष्ट उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता भी मिली है।

पैरा टीटी से जुड़ी अपनी बड़ी बहनों के नक्शेकदम पर चलते हुए पैरालंपिक खेलों में पैरा ताइक्वांडो में भारत की एकमात्र प्रतिनिधि 21 वर्ष की अरुणा तंवर होंगी। हरियाणा की अरुणा महिलाओं के 49 किलोग्राम से कम भार के के-44 वर्ग में भाग लेंगी। वो 2 सितंबर को राउंड- ऑफ-16 राउंड्स में अपना जौहर दिखायेंगी।

 

(चित्र:अरुणा तंवर)

अरुणा इस समय के-44 वर्ग में 30वें स्थान पर हैं और वो 2018 में वियतनाम में आयोजित एशियाई पैरा ताइक्वांडो चैम्पियनशिप में रजत पदक विजेता रही हैं। साथ ही, वो 2019 में तुर्की में आयोजित विश्व पैरा ताइक्वांडो चैम्पियनशिप में कांस्य पदक विजेता रही हैं। वो टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) का एक हिस्सा हैं और उन्हें उनके खेल से जुड़े विशिष्ट उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता भी मिली है।

(चित्र:अरुणा तंवर)

पैरा पावरलिफ्टिंग के लिए भारत जय दीप और सकीना खातून के रूप में दो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को वहां भेज रहा है। जहां एक ओर पश्चिम बंगाल में जन्मी सकीना बेंगलुरु स्थित साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण ले रही हैं, वहीं दूसरी ओर हरियाणा के रहने वाले जय दीप रोहतक स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये दोनों ही टॉप्‍स कोर टीम का हिस्सा हैं।

सकीना, जो महिलाओं के 50 किग्रा तक के वर्ग में भाग लेंगी, अब तक की एकमात्र भारतीय महिला पैरालिंपियन हैं, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में कोई पदक जीता है। उन्‍होंने वर्ष 2014 में ग्लासगो में यह पदक जीता था। वह पैरा एशियन गेम्स 2018 की रजत पदक विजेता भी हैं। बचपन में हुई पोलियो की गंभीर बीमारी की वजह से ही सकीना दिव्‍यांगता से ग्रस्‍त हो गई हैं। मैट्रिक तक पढ़ाई कर लेने के बाद उन्होंने दिलीप मजूमदार और अपने वर्तमान कोच फरमान बाशा से प्राप्‍त वित्तीय सहायता की बदौलत वर्ष 2010 में पावरलिफ्टिंग प्रशिक्षण शुरू किया।

(चित्र:सकीनाखातून)

जय दीप, जो पुरुषों के 65 किग्रा तक के वर्ग में भाग ले रहे हैं, भारतीय खेल प्राधिकरण में सहायक कोच हैं। इन दोनों ही खिलाडि़यों को तीन से भी अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने और खेल किट से युक्‍त खेल विज्ञान सहायता के साथ राष्ट्रीय कोचिंग शिविरों में भाग लेने में भारत सरकार की ओर से महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्‍त हुआ है। ये दोनों ही खिलाड़ी 27 अगस्त को अपने-अपने फाइनल राउंड में टोक्यो में खेलेंगे।

(चित्र:जय दीप)

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कोविड-19 के कारण लगे प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने अप्रैल-जून (2021-22)तिमाही में कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में 44.3प्रतिशतसे अधिक का रिकॉर्ड निर्यात अर्जितकरना जारी रखा

कोविड-19 के कारण लगेप्रतिबंधों के बावजूद, विशेष रूप से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान,महामारी की दूसरी लहर केप्रकोप के कारण, भारत ने 2021-22 (अप्रैल-जून) में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में2020-21 की इसी अवधि की तुलना में 44.3 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की।

चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों के दौरान कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में तेज बढ़ोत्तरी, वित्तीय वर्ष 2020-21 में निर्यात मेंआईवृद्धि की निरंतरता में है।

विश्व व्यापार संगठन के व्यापार मानचित्र के अनुसार, वर्ष 2019 में 37 बिलियन अमेरिकीडॉलर के कुल कृषि निर्यात के साथ, भारत विश्व रैंकिंग में 9वें स्थान पर है।

वाणिज्य मंत्रालय के तहत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा)द्वारा की गई पहलों ने देश को ऐसे समय में इस उपलब्धि को अर्जित करने में मदद की जब महामारी का प्रकोप अपने चरमपर था।

वाणिज्यिक आसूचनाऔर सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएंडएस) द्वारा जारी त्वरित अनुमानों के अनुसार, अप्रैल-जून 2021 के दौरान एपीडा उत्पादों के कुल निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अमेरिकी डॉलर के हिसाब से44.3प्रतिशतकी वृद्धि देखी गई है। एपीडा उत्पादों का कुल निर्यात अप्रैल-जून 2020 में 3338.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर अप्रैल-जून 2021 में 4817.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

भारतीय कृषि-निर्यात केहिसाब से, देश ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 (अप्रैल-मार्च) में डॉलर के हिसाब से 25.02 प्रतिशत और रुपये के हिसाब से 29.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, यह अनुमान लगाया गया है कि चालू वर्ष (2021-22) में भी देश के कृषि निर्यात में लगभग 15 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की जाएगी।

त्वरित अनुमानों के अनुसार, ताजे फलों और सब्जियों के निर्यात में 9.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों जैसे सुखाए या फुलाए गए अनाजों(सीरियल प्रीपेरेशन)और विविध प्रसंस्कृत वस्तुओं के निर्यात में 69.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-जून, 2020-21 में, ताजे फल और सब्जियों का निर्यात 584.5 मिलियन अमेरिकीडॉलर का था जो अप्रैल-जून 2021-22 में बढ़कर 637.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

भारत ने अन्य अनाजों के निर्यात में 415.5 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरीदर्ज की, जबकि मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात में चालू वित्त वर्ष (2021-22) के पहले तीन महीनों में 111.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। अन्य अनाजों का निर्यात अप्रैल-जून 2020 में 44.9 मिलियन अमेरिकीडॉलर से बढ़कर अप्रैल-जून 2021 में 231.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया और मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात अप्रैल-जून 2020 में 483.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर अप्रैल-जून 2021में 1022.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

 

चावल का निर्यात, जिसने 25.3 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, अप्रैल-जून 2020 के 1914.5 मिलियन अमेरिकीडॉलर से बढ़कर अप्रैल-जून 2021 में 2398.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में वृद्धि,कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न देशों में बी 2 बी प्रदर्शनियों का आयोजन भारतीय दूतावासों की सक्रिय भागीदारीसे उत्पाद विशिष्ट और सामान्य विपणन अभियानों के माध्यम से नए संभावित बाजारों की खोज जैसी एपीडा की विभिन्न पहलों का परिणाम है।

एपीडा ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ कृषि और खाद्य उत्पादों पर और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हस्तशिल्प सहित जीआई उत्पादों पर वर्चुअल क्रेता-विक्रेता बैठकका आयोजन करके भारत में पंजीकृत भौगोलिक संकेत (जीआई) वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की हैं। एपीडानेनिर्यात की जाने वाली प्रमुख कृषि वस्तुओं के जीआई उत्पादों को लोकप्रिय बनाने के लिए संभावित आयातक देशों के साथ वर्चुअल क्रेता-विक्रेता बैठक (वीबीएसएम) आयोजित करने की अपनी पहल जारी रखी है।

निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के निर्बाध गुणवत्ता प्रमाणन को सुनिश्चित करने के लिए, एपीडा ने उत्पादों और निर्यातकों की एक विस्तृत श्रृंखला को परीक्षण की सेवाएं प्रदान करने के लिए पूरे भारत में 220 प्रयोगशालाओं को मान्यता दी है।

एपीडा निर्यात परीक्षण और अवशेष निगरानी योजनाओं के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के उन्नयन और सुदृढ़ीकरण में भी सहायता करता है। एपीडा कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा विकास, गुणवत्ता सुधार और बाजार विकास की वित्तीय सहायता योजनाओं के तहत भी सहायता प्रदान करता है।

एपीडाअंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में निर्यातकों की भागीदारी का आयोजन करता है, जिसने निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अपने खाद्य उत्पादों के विपणन के लिए एक मंच प्रदान कियाहै। एपीडा कृषि-निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आहार, ऑर्गेनिक वर्ल्ड कांग्रेस, बायोफैच इंडिया आदि जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है।

एपीडा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बागवानी उत्पादों के लिए पैक-हाउस का पंजीकरण भी शुरू कियाहै।उदाहरण के लिए,मूंगफली के छिलके और ग्रेडिंग तथा प्रसंस्करण इकाइयों के लिए निर्यात इकाइयों केपंजीकरणका उद्देश्य यूरोपीय संघ और गैर-यूरोपीय संघ के देशों के लिए गुणवत्ता पालन सुनिश्चित करना है।

एपीडा वैश्विक खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आवश्यकताओं के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए मांस प्रसंस्करण संयंत्रों और बूचड़खानों का पंजीकरण करता है। एक अन्य प्रमुख पहल में ट्रेसिएबिलिटी सिस्टम का विकास और कार्यान्वयन शामिल है जो आयात करने वाले देशों की खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता अनुपालन सुनिश्चित करता है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय व्यापार विश्लेषणात्मक सूचनाओं का संकलन और प्रसार, निर्यातकों के बीच बाजार पहुंच की जानकारी साझा करना और व्यापार पूछताछका समाधानकरना भी उसी समग्र प्रेरकबल का हिस्सा हैजो एपीडा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उपलब्धकराता है।

भारत के निर्यात का तुलनात्मक विवरण एपीडा उत्पाद
उत्पाद शीर्ष जून, 2020 अप्रैलजून, 2020 जून, 2021 अप्रैलजून, 2021 बदलाव (जून,2021) बदलाव (अप्रैलजून,2021)
मिलियन अमेरिकी डॉलर मिलियन अमेरिकी डॉलर मिलियन अमेरिकी डॉलर मिलियन अमेरिकी डॉलर अमेरिकी डॉलर अमेरिकी डॉलर
फल एवं सब्जियां 189.8 584.5 204.9 637.7 8.0 9.1
सूखाए या फुलाए अनाज (सीरियल प्रीपरेशन तथा विविध प्रसंस्कृत मदें 143.2 311.1 198.0 527.7 38.3 69.6
मांस, डेयरी एवं पोल्ट्री उत्पाद 203.7 483.5 329.6 1022.5 61.8 111.5
चावल 681.3 1914.5 741.0 2398.5 8.8 25.3
अन्य अनाज 25.2 44.9 84.4 231.4 235.3 415.5
कुल 1243.1 3338.5 1558.0 4817.9 25.3 44.3
स्रोत:डीजीसीआईएस,त्वरित आकलन      

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प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सोमनाथ, गुजरात में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उद्घाटन की गई परियोजनाओं में सोमनाथ समुद्र दर्शन पथ, सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र और पुराने (जूना) सोमनाथ का पुनर्निर्मित मंदिर परिसर शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने श्री पार्वती मंदिर की आधारशिला भी रखी। इस अवसर पर श्री लाल कृष्ण आडवाणी, केन्द्रीय गृह मंत्री, केन्द्रीय पर्यटन मंत्री एवं गुजरात के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री उपस्थित थे।

दुनिया भर के श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित करने के लिये अदम्य इच्छाशक्ति दिखाई थी। सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर को स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र भावना से जोड़ा था। श्री मोदी ने कहा, “यह हमारा सौभाग्य है कि हम आजादी के 75वें वर्ष में सोमनाथ मंदिर को नई भव्यता प्रदान करने में सरदार साहब के प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।”प्रधानमंत्री ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को याद किया, जिन्होंने विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ तक कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि परंपरा और आधुनिकता का जो संगम उनके जीवन में था, आज देश उसे अपना आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ और गुजरात के कच्छ के परिवर्तन जैसी पहलों को गुजरात ने बहुत नजदीक से देखा है, आधुनिकता को पर्यटन से जोड़ने का परिणाम देखा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हर कालखंड की यह मांग रही है कि हम धार्मिक पर्यटन की दिशा में भी नई संभावनाओं को खोजें और लोकल अर्थव्यवस्था से तीर्थ यात्राओं का जो रिश्ता रहा है उसे और मजबूत करें।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये शिव ही हैं जो विनाश में भी विकास का बीज अंकुरित करते हैं, संहार में भी सृजन को जन्म देते हैं। शिव अविनाशी हैं, अव्यक्त हैं और अनादि हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “शिव में हमारी आस्था हमें समय की सीमाओं से परे हमारे अस्तित्व का बोध कराती है, हमें समय की चुनौतियों से जूझने की शक्ति देती है।”

 

पवित्र मंदिर के इतिहास का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने स्मरण किया कि मंदिर को बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर हमले के बाद वह कैसे फिर उठ खड़ा हुआ। उन्होंने कहा, “यह इस विश्वास का प्रतीक है कि असत्य कभी सत्य को पराजित नहीं कर सकता और आतंक कभी आस्था को कुचल नहीं सकता।” उन्होंने कहा, “जो तोड़ने वाली शक्तियां हैं, जो आतंक के बलबूते साम्राज्य खड़ा करने वाली सोच है, वह किसी कालखंड में कुछ समय के लिये भले हावी हो जाये, लेकिन उसका अस्तित्व कभी स्थायी नहीं होता, वह ज्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकती। यह उस समय भी सत्य था, जब कुछ आक्रमणकारी सोमनाथ के मंदिर को तोड़ रहे थे और आज भी उतना ही सत्य है, जब ऐसी सोच दुनिया के सामने खतरा बनी हुई है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से लेकर उसका भव्य जीर्णोद्धार सदियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और वैचारिक निरंतरता के कारण संभव हुआ है। राजेंद्र प्रसाद जी, सरदार पटेल और केएम मुंशी जैसे महापुरुषों को आजादी के बाद भी इस अभियान के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। लेकिन, अंततः 1950 में सोमनाथ मंदिर आधुनिक भारत के दिव्य स्तंभ के रूप में स्थापित हो गया। देश कठिन समस्याओं के सौहार्दपूर्ण समाधान की ओर बढ़ रहा है। राम मंदिर के रूप में आधुनिक भारत की महिमा का एक उज्ज्वल स्तंभ बनकर सामने आ रहा है।

उन्होंने कहा कि हमारी सोच इतिहास से सीखकर वर्तमान को सुधारने की होनी चाहिए, एक नया भविष्य बनाने की होनी चाहिए। उन्होंने ‘भारत जोड़ो आंदोलन’के अपने मंत्र  का उल्लेख करते हुए कहा कि उसका भाव केवल भौगोलिक या वैचारिक जुड़ाव तक सीमित नहीं है बल्कि विचारों के संपर्क से भी है। प्रधानमंत्री ने कहा, “ये भविष्य के भारत के निर्माण के लिए हमें हमारे अतीत से जोड़ने का भी संकल्प है।” उन्होंने कहा, “हमारे लिए इतिहास और धर्म का सार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है।” प्रधानमंत्री ने भारत की एकता को रेखांकित करने में विश्वास और विश्वास प्रणाली की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘पश्चिम में सोमनाथ और नागेश्वर से लेकर पूरब में बैद्यनाथ तक, उत्तर में बाबा केदारनाथ से लेकर दक्षिण में भारत के अंतिम छोर पर विराजमान श्री रामेश्वर तक, ये 12 ज्योतिर्लिंग पूरे भारत को आपस में पिरोने का काम करते हैं। इसी तरह, हमारे चार धामों की व्यवस्था, हमारे शक्तिपीठों की संकल्पना, हमारे अलग अलग कोनों में अलग-अलग तीर्थों की स्थापना, हमारी आस्था की ये रूपरेखा वास्तव में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की ही अभिव्यक्ति है।’

राष्ट्र की एकता को मजबूत करने में आध्यात्मिकता की भूमिका का उल्लेख जारी रखते हुए, प्रधानमंत्री ने पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय क्षमता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश आधुनिक अवसंरचना का निर्माण कर प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित कर रहा है। उन्होंने रामायण सर्किट का उदाहरण दिया जो राम भक्तों को भगवान राम से संबंधित नए स्थानों से अवगत करा रहा है और उन्हें यह महसूस करा रहा है कि कैसे भगवान राम पूरे भारत के राम हैं। इसी तरह बुद्ध सर्किट दुनिया भर के भक्तों को सुविधाएं प्रदान करता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय स्वदेश दर्शन योजना के तहत 15 विषयों पर पर्यटन सर्किट विकसित कर रहा है, जिससे उपेक्षित क्षेत्रों में पर्यटन के अवसर पैदा होंगे। केदारनाथ जैसे पहाड़ी इलाकों में विकास, चार धामों के लिए सुरंग और राजमार्ग, वैष्णव देवी में विकास कार्य, पूर्वोत्तर में हाई-टेक बुनियादी ढांचा दूरियां पाट रहे हैं। इसी तरह, 2014 में घोषित प्रसाद योजना के तहत 40 प्रमुख तीर्थ स्थलों का विकास किया जा रहा है, जिनमें से 15 पहले ही पूरे हो चुके हैं। गुजरात में 100 करोड़ रुपये से अधिक की तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है। तीर्थ स्थलों को जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश न केवल आम नागरिकों को पर्यटन के माध्यम से जोड़ रहा है बल्कि आगे भी बढ़ रहा है। देश, यात्रा और पर्यटन प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में 2013 के 65वें स्थान से 2019 में 34वें स्थान पर पहुंच गया है।

सोमनाथ प्रोमनेड को प्रसाद (पिलग्रिमेज रेजुवेनेशन एंड स्पिरिचुअल, हेरीटेज ऑगमेंटेशन ड्राइव) योजना के तहत 47 करोड़ रुपये से अधिक की कुल लागत से विकसित किया गया है। ‘पर्यटक सुविधा केंद्र’ के परिसर में विकसित सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र, पुराने सोमनाथ मंदिर के खंडित हिस्सों और पुराने सोमनाथ की नागर शैली के मंदिर वास्तुकला वाली मूर्तियों को प्रदर्शित करता है।

पुराने (जूना) सोमनाथ के पुनर्निर्मित मंदिर परिसर को श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा कुल 3.5 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पूरा किया गया है। इस मंदिर को अहिल्याबाई मंदिर के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसे इंदौर की रानी अहिल्याबाई द्वारा बनाया गया था। रानी अहिल्याबाई ने पुराने मंदिर को जीर्ण शीर्ण अवस्था में पाने के बाद नया निर्माण कराया था। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और संवर्धित क्षमता के लिए पूरे पुराने मंदिर परिसर का समग्र रूप से पुनर्विकास किया गया है।

श्री पार्वती मंदिर का निर्माण 30 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय से किया जाना प्रस्तावित है। इसमें सोमपुरा सलात शैली में मंदिर निर्माण, गर्भगृह और नृत्य मंडप का विकास शामिल है।

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