राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविंद ने तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय महिला विधायक सम्मेलन-2022 का उद्घाटन किया। सम्मेलन का आयोजन केरल विधानसभा ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत किया है। सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब राष्ट्र स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत हम पिछले एक साल से अधिक समय से स्मारक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। विभिन्न समारोहों में लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, अतीत से जुड़ने और अपने हित में, हमारे गणतंत्र की नींव को फिर से खोजने के उनके उत्साह को दर्शाती है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक शोषक औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों से आजाद होने के भारत के प्रयास बहुत पहले ही शुरू हो गए थे, और सबसे पहले 1857 में हमें इसकी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। 19वीं सदी के मध्य के समय में भी, जबकि दूसरी ओर केवल पुरुष थे, भारतीय पक्ष में कई महिलाएं शामिल थीं। रानी लक्ष्मीबाई उनमें से सबसे उल्लेखनीय थीं, लेकिन उनके जैसी कई और भी थीं, जो अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ बहादुरी से लड़ रही थीं। गांधी जी के नेतृत्व वाले ‘असहयोग आंदोलन से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन’ तक कई सत्याग्रह अभियान चलाए गए, जिनमें महिलाओं की व्यापक भागीदारी थी। पहली महिला सत्याग्रहियों में कस्तूरबा शामिल थीं। जब गांधीजी को गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने दांडी तक के नमक मार्च का नेतृत्व सरोजिनी नायडू को सौंपने का फैसला किया। कमलादेवी चट्टोपाध्याय चुनाव लड़ने वाली देश की पहली महिला थीं। राष्ट्रपति ने मैडम भीकाजी कामा के साहसपूर्ण बलिदान और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में इंडियन नेशनल आर्मी की कैप्टन लक्ष्मी सहगल और उनकी सहयोगियों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब हम राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी का उदाहरण देते हैं, तो प्रेरणा देने वाले बहुत से नाम दिमाग में आते हैं, लेकिन उनमें से कुछ का ही उल्लेख कर पाते हैं। अपने सभी वयस्क नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के सार्वभौमिक मताधिकार प्रदान करने की भारत की उपलब्धि के बारे में बताते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे पुराने आधुनिक लोकतंत्र में भी महिलाओं को देश की स्वतंत्रता की एक सदी के बाद तक वोट का अधिकार प्राप्त करने का इंतजार करना पड़ा। यूनाइटेड किंगडम में रहने वाली उनकी बहनों ने भी लगभग उतना ही लंबा इंतजार किया। इसके बाद भी, यूरोप के कई आर्थिक रूप से उन्नत देशों में महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं दिया गया। लेकिन भारत में ऐसा समय कभी नहीं आया जब पुरुषों को मताधिकार मिला हो, और महिलाओं को नहीं। इससे दो बातें सिद्ध होती हैं। पहली, कि हमारे संविधान निर्माताओं का लोकतंत्र में और जनता के विवेक में गहरा विश्वास था। वे प्रत्येक नागरिक को एक नागरिक के तौर पर मानते थे, न कि एक महिला या किसी जाति और जनजाति के सदस्य के रूप में, और वह मानते थे कि हमारे समन्वित भविष्य को आकार देने में उनमें से हर एक की आवाज सुनी जानी चाहिए। दूसरा, प्राचीन काल से ही इस धरती ने स्त्री और पुरुष को समान माना है- निस्संदेह एक दूसरे के बिना अधूरे। राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं एक के बाद एक विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति कर रही हैं। नवीनतम है, सशस्त्र बलों में उनकी बढ़ती भूमिका। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित और प्रबंधन के पारंपरिक रूप से पुरुषों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में भी, जिन्हें एसटीईएमएम कहा जाता है, उनकी संख्या बढ़ रही है। कोरोना संकट के समय में जिन लोगों ने आगे बढ़कर राष्ट्र के लोगों की सुरक्षा का जिम्मा उठाया, उन योद्धाओं में भी पुरुषों से ज्यादा महिलाएं ही रही होंगी। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा करने वाले लोगों की बात आती है तो केरल ने हमेशा अपनी ओर से अधिक से अधिक योगदान दिया और इस राज्य की महिलाओं ने संकट की इस अवधि के दौरान व्यक्तिगत जोखिम उठा कर भी निस्वार्थ सेवा का उदाहरण स्थापित किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है, ऐसे में इस तरह की उपलब्धियां हासिल करना उनके लिए स्वाभाविक होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। हमें यह स्वीकार करना होगा कि वे हमारे समाज में बहुत गहरी पैंठ बनाए बैठे सामाजिक पूर्वाग्रहों का शिकार हैं। देश के कार्यबल में उनका अनुपात उनकी क्षमता के मुकाबले कुछ नहीं है। यह दुखद स्थिति, निश्चित रूप से पूरे विश्व में व्याप्त है। उन्होंने कहा कि भारत में तो कम से कम एक महिला प्रधानमंत्री हुई हैं और राष्ट्रपति भवन में भी उनके प्रतिष्ठित पूर्ववर्तियों में से एक महिला थीं, जबकि कई देशों में अभी तक कोई महिला राज्य या सरकार की प्रमुख नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे को वैश्विक परिदृश्य में देखने से हमें यह महसूस करने में मदद मिलती है कि हमारे सामने चुनौती मानसिकता को बदलने की है- यह एक ऐसा कार्य है, जो बिल्कुल भी आसान नहीं है। इसमें अपार धैर्य और समय की जरूरत है। हम निश्चित रूप से इस तथ्य से राहत महसूस कर सकते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन ने भारत में लैंगिक समानता के लिए एक ठोस नींव रखी, कि हमने एक महान शुरुआत की थी और हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि अब यह मानसिकता बदलनी शुरू हो गई है, और लैंगिक संवेदनशीलता- तीसरे लिंग और अन्य लिंग की पहचानों सहित तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार भी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ जैसी केंद्रित पहलों के साथ इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दशकों से केरल राज्य महिलाओं की तरक्की की राह में आने वाली बाधाओं को दूर कर एक शानदार उदाहरण पेश करता रहा है। राज्य की आबादी की उच्च स्तरीय संवेदनशीलता के चलते राज्य ने महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपनी क्षमता हासिल करने में मदद करने के लिए नए रास्ते तैयार किए हैं। यह वह भूमि है जिसने भारत को सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एम. फातिमा बीवी दीं। यही वजह है कि केरल आज राष्ट्रीय महिला विधायक सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘लोकतंत्र की ताकत’ के अंतर्गत आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन एक बड़ी सफलता हासिल करेगा। उन्होंने इस सम्मेलन का आयोजन करने के लिए केरल विधानसभा और उसके सचिवालय को बधाई दी।
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संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की 7वीं बैठक में भाग लिया
संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की 7वीं बैठक में भाग लिया। इस बैठक को चीन गणराज्य द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गया था।
ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रगति और विस्तार के लिए “ब्रिक्स के बीच समावेश और आपस में ज्ञान का साझा करने वाली सांस्कृतिक साझेदारी स्थापित करने” के थीम पर इस बैठक में चर्चा हुई। चर्चा का मुख्य फोकस क्षेत्र में सांस्कृतिक डिजिटलीकरण पर विकास और सहयोग को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर सहयोग को मजबूत करना और ब्रिक्स देशों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्लेटफार्मों के निर्माण को आगे बढ़ाना था। मंत्रियों ने सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने और 2015 में हस्ताक्षरित ब्रिक्स सांस्कृतिक सहयोग समझौते को लागू करने के लिए ब्रिक्स कार्य योजना 2022-2026 को अपनाया।
श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और अपने संबोधन में निम्नलिखित बिंदुओं को सामने रखा:
(i) भारत अपनी विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के साथ संगीत, रंगमंच, कठपुतली का खेल, विभिन्न आदिवासी कला और नृत्य के विशेष रूप से शास्त्रीय और लोक क्षेत्र में आदान-प्रदान कार्यक्रमों/गतिविधियों के माध्यम से ब्रिक्स देशों को सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराने के लिए एक मंच प्रदान करना सुनिश्चित करता है।
(ii) कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के कारण पिछले ढाई साल के दौरान फीजिकल मूवमेंट संभव नहीं हो पाया है। इसके बावजूद संस्कृति सहित सभी मोर्चों पर जीवन को आगे बढ़ाने में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
(iii) सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में मूल्यवान संग्रह को डिजिटाइज करना और उन्हें खुले सूचना स्थान में प्रस्तुत करना भारत की प्राथमिकता है क्योंकि यह संग्रहालयों और पुस्तकालयों जैसे सांस्कृतिक संस्थानों में संग्रहीत सांस्कृतिक सामग्री के लिए लंबी अवधि के लिए संग्रहण और व्यापक पहुंच प्रदान करता है। ब्रिक्स देशों की आभासी प्रदर्शनियों के माध्यम से ब्रिक्स देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का पता लगाया जा सकता है।
(iv) भारत सांस्कृतिक विरासत और इन्टर्कल्चरल डायलग की विविधता में विश्वास करता है। यह पर्यावरण संबंधी चिंताओं के लिए नवीन और संस्कृति-आधारित समाधानों में विरासत और पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत करने वाले स्थायी और लचीले पर्यावरण की पुरजोर वकालत करता है।
(v) भारत की कला अपनी समृद्ध विरासत और अपने आधुनिक इतिहास का एक मिश्रण है। इसने निस्संदेह भारत को एक सक्रिय और रचनात्मक इकाई के रूप में स्थापित किया है जो आज कला जगत का एक अभिन्न अंग है।
(vi) आज की पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के आलोक में, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विकास प्रतिमानों की दिशा में काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय की मांग एक रोडमैप है जो सांस्कृतिक विरासत, सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों और लोगों की सहज कल्पना और सामूहिक बुद्धि की समझ को एकीकृत करना चाहिए।
उन्होंने अध्यक्ष को धन्यवाद दिया और सभी क्षेत्रों में प्रगतिशील और व्यापक ब्रिक्स सहयोग की कामना की।
बैठक के अंत में, ब्रिक्स राज्यों की सरकारों के बीच संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग (2022-2026) के बीच समझौते के कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना पर सहमति हुई और सभी ब्रिक्स राष्ट्रों के संस्कृति मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए।
Read More »प्रधानमंत्री मोदी की जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक
प्रधानमंत्री मोदी ने आज जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक की। प्रधानमंत्री श्री किशिदा ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का भी आयोजन किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के साथ-साथ कुछ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर सार्थक विचार विमर्श किया।
दोनों नेता रक्षा उत्पादन सहित द्विपक्षीय सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अगली 2+2 विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तर की बैठक शीघ्र ही जापान में आयोजित की जा सकती है।
दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों की सराहना की। वे इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को अगले पांच वर्षों में जापान की ओर से भारत में 5 ट्रिलियन येन के सार्वजनिक एवं निजी निवेश और वित्त पोषण से संबंधित अपने निर्णय को लागू करने की दिशा में संयुक्त रूप से काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने गतिशक्ति पहल के माध्यम से व्यवसाय करने में आसानी और लॉजिस्टिक्स में सुधार के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों पर प्रकाश डाला और प्रधानमंत्री श्री किशिदा से भारत में जापानी कंपनियों द्वारा अधिक से अधिक निवेश का समर्थन करने का आग्रह किया। इस किस्म के निवेश से सशक्त आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में मदद मिलेगी और यह पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात की सराहना की कि जापानी कंपनियां भारत में अपना निवेश बढ़ा रही हैं और 24 जापानी कंपनियों ने विभिन्न पीएलआई योजनाओं के तहत सफलतापूर्वक आवेदन किया है।
दोनों नेताओं ने मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना के कार्यान्वयन में हुई प्रगति को रेखांकित किया और इस परियोजना के लिए तीसरी किश्त ऋण के एक्सचेंज ऑफ नोट पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और इस संबंध में अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों के विकास में दोनों पक्षों के निजी क्षेत्रों के बीच अधिक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमत हुए। उन्होंने 5जी, बियॉन्ड 5जी और सेमीकंडक्टर्स जैसी महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने हरित हाइड्रोजन सहित स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में गहरे सहयोग पर भी सहमति व्यक्त की तथा इस संबंध में दोनों देशों के व्यापारिक संस्थानों के बीच और अधिक पारस्परिक सहयोग को प्रोत्साहित किया।
दोनों नेताओं ने दोनों देशों के लोगों के बीच पारस्परिक जुड़ाव को और बढ़ावा देने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री श्री किशिदा ने कहा कि इस तरह के जुड़ाव को द्विपक्षीय संबंधों की रीढ़ होना चाहिए। इस संबंध में, दोनों नेताओं ने निर्दिष्ट कुशल श्रमिक (एसएसडब्ल्यू) कार्यक्रम के कार्यान्वयन में प्रगति पर गौर किया और इस कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कोवैक्सिन और कोविशील्ड के टीकाकरण का प्रमाण-पत्र लेकर जाने वाले भारत के यात्रियों के लिए जापान में क्वारंटीन मुक्त प्रवेश की सुविधा हेतु यात्रा प्रतिबंधों में और अधिक ढील देने का मुद्दा उठाया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने की दृष्टि से उपयोगी है और इसके वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों द्वारा चिन्हित की गई विभिन्न परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन की उम्मीद जताई।
दोनों नेताओं ने हाल के वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार विमर्श किया। उन्होंने हिंद-प्रशांत से संबंधित अपने-अपने दृष्टिकोण में समानता को रेखांकित किया और एक स्वतंत्र, खुले व समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इस संदर्भ में, उन्होंने क्वाड के समकालीन और रचनात्मक एजेंडा जैसे कि टीके, छात्रवृत्ति, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और बुनियादी ढांचे के मामले में हुई प्रगति का स्वागत किया।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस यात्रा के दौरान उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को दिए गए गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री श्री किशिदा का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री श्री किशिदा ने अगले वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी को जापान आने का निमंत्रण दिया, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया गया।
Read More »केंद्र ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय आयोगों को एक महीने से अधिक के लिए स्थगन नहीं देने और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे में तेजी लाने के लिए कहा
उपभोक्ता कार्य विभाग (डीओसीए) ने उपभोक्ता शिकायतों का जल्द निपटाने सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला आयोगों के रजिस्ट्रारों और अध्यक्षों को पत्र लिखकर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत प्रदान की गई समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक महीने से अधिक के लिए स्थगन आदेश नहीं देने को कहा है। स्थगन अनुरोधों के कारण शिकायतों के समाधान में 2 महीने से अधिक की देरी के मामले में, आयोग पार्टियों पर लागत लगाने पर विचार कर सकता है। सचिव डीओसीए श्री रोहित कुमार सिंह ने अपने पत्र में उपभोक्ताओं को सस्ता, परेशानी मुक्त और जल्द न्याय दिलाने पर जोर दिया है। इस पत्र में कहा गया है कि बार-बार और लंबे समय तक स्थगन न केवल उपभोक्ता को उसके सुनने और उसके निवारण के अधिकार से वंचित करता है, बल्कि उस अधिनियम की भावना को भी खत्म कर देता है जिसका विधायिका ने इरादा किया था। इसलिए, उपभोक्ता आयोगों से अनुरोध है कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी परिस्थिति में लंबी अवधि के लिए स्थगन प्रदान नहीं किया जाए। इसके अलावा, किसी भी पक्ष द्वारा स्थगन के दो से अधिक अनुरोधों के मामले में, उपभोक्ता आयोग निवारक उपाय के रूप में पार्टियों पर लागत लगा सकता है। अधिनियम की धारा 38(7) के तहत शिकायत स्वीकार करने की प्रक्रिया पर उपभोक्ता आयोगों का ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र में जोर दिया गया है कि प्रत्येक शिकायत का यथासंभव शीघ्र निपटारा किया जाना आवश्यक है और विरोधी पक्ष द्वारा नोटिस प्राप्त होने की तारीख से 3 महीने की अवधि के भीतर जहां शिकायत के लिए वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है और यदि वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता होती है तो 5 महीने के भीतर शिकायत पर निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा, अधिनियम यह भी कहता कि कोई भी स्थगन आमतौर पर उपभोक्ता आयोगों द्वारा तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि पर्याप्त कारण नहीं दिखाया गया हो और स्थगन के कारणों को लिखित रूप में दर्ज नहीं किया गया हो। आयोगों को स्थगन से होने वाली लागतों के बारे में आदेश देने का भी अधिकार है। यह उल्लेख किया जा सकता है कि अधिनियम की धारा 38(2)(ए) के अनुसार आयोग स्वीकार की गई शिकायत की एक प्रति विरोधी पक्ष को 30 दिनों की अवधि के भीतर या विस्तारित 15 दिनों की अवधि के भीतर मामले पर अपना पक्ष देने का निर्देश देगा, जो इसके द्वारा दी जा सकती है। धारा 38(3)(बी)(ii) में आगे प्रावधान है कि यदि विरोधी पक्ष कोई कार्रवाई करने में या निर्धारित समय के भीतर अपने मामले को पेश करने में विफल रहता है, तो आयोग साक्ष्य के आधार पर एक पक्षीय निर्णय लेने के लिए आगे बढ़ सकता है। इसके अलावा, पत्र में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम हिली मल्टीपर्पज कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के 04.03.2020 को दिए फैसला का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि उपभोक्ता आयोगों के पास शिकायतों का जवाब दाखिल करने के लिए अधिनियम की धारा 13 में उल्लिखित 30 दिनों के अतिरिक्त 15 दिनों की अवधि के अलावा और समय बढ़ाने की कोई शक्ति नहीं है। मेसर्स डैडीज बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य बनाम मनीषा भार्गव और अन्य के मामले में 11.02.2021 को दिए गए फैसले तथा डायमंड एक्सपोर्ट्स और अन्य बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एंड ओर्स मामले में 14.12.2021 को दिए गए फैसले में भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसी निर्णय की पुष्टि की गई है। सचिव डीओसीए ने सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और सभी उपभोक्ता आयोगों को पत्र लिखकर उपभोक्ताओं को ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। पत्र में, इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों ने ई-दाखिल तंत्र स्थापित किया है जिसमें ई-नोटिस, केस डॉक्यूमेंट डाउनलोड लिंक और वर्चुअल हियरिंग लिंक, विपरीत पक्ष द्वारा लिखित प्रतिक्रिया दाखिल करने, शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्तर दाखिल करने और एसएमएस/ई-मेल के माध्यम से अलर्ट पाने सहित कई विशेषताएं हैं। आयोगों से अनुरोध किया गया है कि वे ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों को दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करें। उपभोक्ता कार्य विभाग 31.05.2022 को राष्ट्रीय, राज्य और जिला आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ-साथ राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में उपभोक्ता मामलों के प्रभारी सचिव के साथ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन भी कर रहा है। इसमें उपभोक्ताओं के लिए विवाद निवारण तंत्र को अधिक प्रभावी, तेज और परेशानी मुक्त बनाने पर चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा।
Read More »केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कन्हेरी गुफाओं में विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया
केन्द्रीय पर्यटन, संस्कृति और उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर) श्री जी. किशन रेड्डी ने आज बोरीवली के नजदीक संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित कन्हेरी गुफाओं में पर्यटकों के लिए विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया। संस्कृति मंत्री ने कहा, “कन्हेरी गुफाएं हमारी प्राचीन विरासत का हिस्सा हैं क्योंकि वे हमारे उद्भव और अतीत का प्रमाण प्रदान करती हैं। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर किए गए कार्यों का उद्घाटन करना सौभाग्य की बात है। बुद्ध का संदेश संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए आज भी महत्वपूर्ण है।”

श्री रेड्डी ने कहा कि हमारी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण में रुचि दिखाना और उसकी जिम्मेदारी लेना प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। संस्कृति मंत्री ने कहा कि हमारी विरासत की रक्षा, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कॉरपोरेट और सिविल सोसाइटी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां इन खजानों तक पहुंच सकें। इंडियन ऑयल फाउंडेशन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के हिस्से के रूप में कन्हेरी में उन्नत पर्यटक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के कार्य में शामिल है। वर्तमान इमारत में आगन्तुक मंडप, रखवाली करने वालों के आवास, बुकिंग ऑफिस को अपग्रेड करने के साथ उनका नवीनीकरण किया गया है। बुकिंग काउंटर से लेकर कस्टोडियन क्वार्टर तक के क्षेत्र को प्राकृतिक दश्यों से सुशोभित किया गया है। चूंकि गुफाएं जंगल के मुख्य क्षेत्र में आती हैं, बिजली और पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है, इसके बावजूद सौर ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बिजली की व्यवस्था की गई है। आगंतुकों की रुचि बनाए रखने के लिए सरल और सुविधाजनक विवेचना केन्द्र की स्थापना की गई है जिसमें ग्यारह व्याख्यात्मक पैनलों की मदद से प्रमुख गुफाओं की उत्कृष्ट विशेषताओं और अद्वितीयता को उजागर किया गया है। कन्हेरी का ट्रेल मैप यानी रास्ता दिखाने वाला नक्शा एक और महत्वपूर्ण विशेषता है जो आगंतुकों का समय बचाने में मदद करता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पूरे मठ परिसर के 3डी वर्चुअल टूर पर भी काम कर रहा है। कन्हेरी गुफाएं मुंबई के पश्चिमी बाहरी इलाके में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों में बड़े पैमाने पर बेसाल्ट आउटक्रॉप में गुफाओं का समूह और कटी हुई चट्टानों से बने स्मारकों का एक समूह है। इनमें बौद्ध मूर्तियां और राहत नक्काशी, पेंटिंग और शिलालेख हैं, जो पहली शताब्दी सीई से 10वीं शताब्दी सीई तक की हैं। पानी के अनेक जलाशयों के साथ खुदाई की सतह और क्षेत्र, शिलालेख, एक सबसे पुराना बांध, एक स्तूप दफन गैलरी और उत्कृष्ट वर्षा जल संचयन प्रणाली इसकी एक आश्रम और तीर्थ केन्द्र के रूप में लोकप्रियता का संकेत देती है। कन्हेरी सातवाहन, त्रिकुटक, वाकाटक और सिलहारा के संरक्षण में और क्षेत्र के धनी व्यापारियों द्वारा किए गए दान के माध्यम से फला-फूला।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक महामहिम शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान के असामयिक निधन पर सम्मान स्वरूप कल पूरे देश में एक दिवसीय राजकीय शोक मनाया जाएगा
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक महामहिम शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान का असामयिक निधन हो गया है। भारत सरकार ने दिवंगत गणमान्य व्यक्ति के सम्मान में पूरे देश में एक दिन का राजकीय शोक मनाने की घोषणा की है।
राजकीय शोक के दिन पूरे देश में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, जहां राष्ट्रीय ध्वज नियमित रूप से फहराया जाता है। इस दिन कोई भी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा।
Read More »स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिये असम और अरुणाचल प्रदेश में काष्ठशिल्प और अगरबत्ती उद्योग को गति देने में केवाईआईसी का बड़ा प्रयास
खादी और ग्रामीण उद्योग आयोग (केवाईआईसी)ने असम और अरुणाचल प्रदेश में 100 महिलाओं सहित 150 प्रशिक्षित खादी शिल्पकारों को स्व-रोजगार की विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा है। केवाईआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 50 शिल्पकारों को काष्ठकला की मशीनें वितरित कीं। इसी तरह उन्होंने गुवावाटी, असम में शिल्पकारों को अगरबत्ती बनाने वाली 50 मशीनें और अचार बनाने वाली 50 मशीनों का वितरण किया। पहली बार केवाईआईसी ने मशीनों द्वारा काष्ठकला का प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय युवाओं को दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य तवांग के स्थानीय जनजातीय युवाओं के लिये स्थायी रोजगार उत्पन्न हो सकें। इसका एक और उद्देश्य है राज्य की पारंपरिक काष्ठकला को दोबारा जीवित करना। सभी काष्ठ शिल्पकार बीपील परिवारों से सम्बंधित हैं तथा केवाईआईसी 20 दिनों का समग्र प्रशिक्षण देता है। प्रशिक्षण पूरा हो जाने के बाद इन शिल्पकारों को मशीनें प्रदान की जाती हैं।

शनिवार को, श्री सक्सेना ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएम-ईजीपी) के तहत 50 महिला शिल्पकारों को अगरबत्ती बनाने वाली 50 मशीनें वितरित कीं, ताकि वे अपनी अगरबत्ती निर्माण इकाइयां स्थापित कर सकें। इसका एक और उद्देश्य है कि स्थानीय अगरबत्ती उद्योग को मजबूत किया जाये। उल्लेखनीय है कि असम में अगरबत्ती निर्माण में बहुत रोजगार हैं। केवाईआईसी ने इसके लिये एक व्यापारिक साझीदार को भी जोड़ा है, जो असम का सफल स्थानीय अगरबत्ती निर्माता है। वह कच्चा माल उपलब्ध करायेगा तथा इन 50 महिला उद्यमियों को मजदूरी चुकाते हुये उनके द्वारा बनाई गई समस्त अगरबत्तियां खरीदेगा। केवाईआईसी अध्यक्ष श्री सक्सेना ने कहा कि पूर्वोत्तर में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुये खादी गतिविधियों को प्रधानमंत्री की परिकल्पना “आत्मनिर्भर भारत” के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने कहा, “केवाईआईसी ने पूर्वोत्तर में स्थायी रोजगार सृजन और पारंपरिक शिल्प को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया है। केवाईआईसी के समर्थन से काष्ठशिल्प, अगरबत्ती निर्माण और अचार बनाने जैसे कृषि व खाद्य-आधारित उद्योगों के बल पर स्थानीय युवा व महिलायें सशक्त बनेंगी तथा उनके घर में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे।” उल्लेखनीय है कि हाल में ही केवाईआईसी ने अरुणाचल प्रदेश में दो ‘अरि रेशम प्रशिक्षण और उत्पादन केंद्र’ खोलेहैं। साथ ही तवांग में मोनपा हस्तनिर्मित कागज उद्योग को दोबारा जीवित किया गया है। इसके अतिरिक्त केवाईआईसी ने पिछले दो वर्षों में अगरबत्ती और गोल बांस की छड़ी निर्माण सहित बांस उत्पादों की 430 इकाइयां असम और अरुणाचल प्रदेश में स्थापित की हैं।
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प्रधानमंत्री ने लुम्बिनी, नेपाल में मायादेवी मंदिर के दर्शन किये
गेट खुलने की आवाज़ सुन कर मीरा ने खिड़की से झांका तो देखा ,शेखर फ़ैक्ट्री से आ गये थे।शेखर मीरा के पति जो शहर के जाने माने बिज़नेसमैन है।मीरा एक घरेलू औरत जो नौकरों की मदद से घर को चला रही है।गर्मी से झुनझुनाइये शेखर ने अपने नौकर से पानी माँगा और सोफ़े पर बैठ गया।बाहर बहुत गर्मी है!ज़रा ऐ-सी तेज करो नौकर से ये कह कर आँखे बंद कर थोड़ा आराम करने के इरादे से लेट गया।सारा दिन काम करके थक जाता हूँ ,शेखर सोच रहा था कितने सालों से वो सारा बिज़नेस अकेले ही देख रहा है ,किस के लिए अपनी पत्नी और बच्चों
Read More »केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू के कठुआ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत रिकॉर्ड 68 सड़कों के निर्माण की समीक्षा की
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं पीएमओ, कार्मिक और लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू के कठुआ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत रिकॉर्ड 68 सड़कों के निर्माण कार्य पूरे होने की समीक्षा की और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल-नाहयान के निधन के सम्मान में आज मनाए गए राजकीय शोक के कारण औपचारिक उद्घाटन को टाल दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 547 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित 526 किलोमीटर तक की हर मौसम उपयुक्त सड़कों से एक लाख 20,000 से अधिक लोगों को लाभ हो सकता है, जिनमें से अधिकांश दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों के बावजूद कुछ को छोड़कर सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद देश में विकास की रफ्तार से, विशेष रूप से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में, समझौता में नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि सड़कें एक विकासशील राष्ट्र की जीवन रेखा होती हैं जिनसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादों के विपणन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लाभ मिलता है और साथ ही इससे समाज को अनेक फायदे मिलते हैं।
मंत्री ने 29.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22 पुलों के पूरा होने के कार्य की भी समीक्षा की जिनका जल्द ही लोकार्पण किया जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 7-8 वर्षों में देश में कार्य संस्कृति में भारी बदलाव आया है और परियोजनाओं को अब किसी अन्य बातों के बजाय आवश्यकता-आधारित जरूरतों को देखते हुए मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति में स्थानीय सांसदों या विधायकों द्वारा किए गए अनुरोध के बजाय सरपंचों और अन्य स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के विचारों को प्राथमिकता दी जाती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र उधमपुर-कठुआ-डोडा को 2014 के बाद से जम्मू-कश्मीर में पीएमजीएसवाई अनुदान का सबसे अधिक आवंटन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि नई परियोजनाओं के लिए पीएमजीएसवाई की केंद्रीय निधि के 4,175 करोड़ रुपये में से करीब 3,884 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो उधमपुर-कठुआ-डोडा के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों की निधि का लगभग दो-तिहाई है, समीक्षा बैठक में डॉ. जितेंद्र ने केंद्रशासित प्रदेश में सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में सरकार की पहल पर प्रकाश डाला और कहा कि वर्तमान सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता है कि जम्मू और कश्मीर के हर हिस्से को तेजी से विकास के लिए एक टिकाऊ सड़क नेटवर्क मिले। उन्होंने कहा कि सरकार पीएमएवाई, पीएमजीएसवाई और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ पंचायतों और ब्लॉकों और जम्मू-कश्मीर के अन्य कठिन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से पीआरआई सदस्यों के साथ समन्वय में काम करने और बेहतर समन्वय व तालमेल के लिए एसओपी बनाने का आग्रह किया ताकि समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। डीडीसी अध्यक्ष, उधमपुर श्री लाल चंद, डीडीसी अध्यक्ष, डोडा श्री. धनतेर सिंह, डीडीसी अध्यक्ष, किश्तवाड़ पूजा ठाकुर, डीडीसी अध्यक्ष, रामबन डॉ. शमशाद शान, डीडीसी अध्यक्ष सांबा, श्री. केशव शर्मा, डीडीसी अध्यक्ष रजौरी एडवोकेट नसीम लियाकत और डीडीसी अध्यक्ष, रियासी श्री सराफ सिंह नाग भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में कठुआ के डीसी श्री राहुल पांडे, उधमपुर की डीसी कृतिका ज्योत्सना, सांबा की डीसी अनुराधा गुप्ता, रामबन के डीसी श्री मुसरत इस्लाम, किश्तवाड़ के डीसी श्री अशोक कुमार शर्मा, डोडा के डीसी श्री विकास शर्मा और रियासी डीसी बबीला रखवाल ने भी हिस्सा लिया।
गौरतलब है कि सितंबर, 2020 में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू क्षेत्र के कठुआ, डोडा, उधमपुर और रियासी जिलों में 23 सड़कों और पुलों की परियोजनाओं का अनावरण किया था। लगभग 73 करोड़ रुपये की लागत और 111 किलोमीटर की लंबाई वाली परियोजनाओं से इस क्षेत्र के 35,000 से अधिक लोगों को लाभ मिला। 23 परियोजनाओं में पीएमजीएसवाई के तहत संपर्क के लिए हर मौसम में उपयुक्त 15 सड़कें और लोगों को बेहतर संपर्क के लिए 8 पुल शामिल हैं।
Read More »केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने नासिक में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल की नींव रखी
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा और स्वास्थ्य एवम् परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती पवार ने महाराष्ट्र में नासिक के शिंदे में आज एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस) के निर्माण की नींव रखी। प्रस्तावित ईएमआर स्कूल का लक्ष्य नासिक के दूरदराज के आदिवासी गांवों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

उद्घाटन समारोह में बोलते हुए श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि शिंदे में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल की योजना जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आसपास के आदिवासी इलाकों में उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बनाई है। उन्होंने कहा, “ईएमआर स्कूल, सीबीएसई पाठ्यक्रम का पालन करेंगे।” केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि ईएमआरएस ऐसी योजना है, जिसके तहत पूरे भारत में आदिवासियों (एसटी) के लिए मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि उत्तरपूर्व, छत्तीसगढ़, गुजरात और ओडिशा समेत देश के दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही स्कूल खोले जाने की योजना है। श्री अर्जुन मुंडा ने आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और इसमें शिक्षा की भूमिका पर उनके विचारों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय आदिवासी इलाकों में छात्रों को उन्नत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी खुशी जताई कि आसपास के इलाके में आदिवासी किसान अंगूर, स्ट्रॉबेरी, प्याज आदि की खेती कर रहे हैं और उन्होंने आदिवासियों से उनके बच्चों को स्कूल भेजने की अपील भी की। नींव रखे जाने के बाद आदिवासी नृत्य और संगीत का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किया गया।
2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषणा की गई थी कि 50 प्रतिशत और कम से कम 20,000 से अधिक की आदिवासी आबादी वाले प्रखंडों में एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल बनाए जाएंगे। सरकार ने देशभर में 452 नए स्कूल बनाने की योजना बनाई है। एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए खोला जा रहा है, जिसमें न केवल अकादमिक शिक्षा पर जोर होगा, बल्कि इसमें आदिवासी छात्रों के संपूर्ण विकास पर जोर दिया जाएगा। इसमें कक्षा 6 से लेकर 12 तक के छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा और एक स्कूल की क्षमता 480 छात्रों की होगी। फिलहाल पूरे देश में नवोदय विद्यालय की तर्ज पर 384 एकलव्य स्कूल चलाए जा रहे हैं, जिनमें स्थानीय कला और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए बेहद उन्नत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के अलावा खेल और कौशल विकास में भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ईएमआरएस स्कूलों में छात्रों के समग्र विकास की जरूरतों को परिसर में ही पूरा करने की सुविधाएं मौजूद हैं और इनमें मुफ़्त रहने-खाने की व्यवस्था के साथ शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
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