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राजनीति

सेना प्रमुख ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में वास्तविक नियंत्रण रेखा-एलएसी पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की

थल सेनाध्यक्ष, जनरल मनोज पांडे वर्तमान में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में वास्तविक नियंत्रण रेखा-एलएसी पर अग्रिम क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। भारतीय थल सेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद सेनाध्यक्ष का इस सेक्टर का यह पहला दौरा है। मध्य कमान के सेना कमांडर और उत्तर भारत क्षेत्र के जीओसी भी सेना प्रमुख के साथ इस दौरे पर हैं।

अग्रिम चौकियों के दौरे के दौरान, थल सेना प्रमुख को स्थानीय कमांडरों द्वारा सीमाओं पर मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी जा रही है। अग्रिम क्षेत्रों में परिचालन तैयारियों का प्रत्यक्ष मूल्यांकन करते हुए, सेना प्रमुख के पर्वतारोहण कौशल और लंबी दूरी की गश्त सहित तैनात संरचनाओं की अधिक ऊंचाई वाली परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन देखने की योजना है। इस दौरान थल सेना प्रमुख इस क्षेत्र में जारी बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों और अग्रिम क्षेत्रों में सेना-नागरिक संपर्क की भी समीक्षा कर रहे हैं।

अपनी यात्रा के दौरान कमांडरों के साथ बातचीत करते हुए, सेना प्रमुख ने सीमाओं पर सतर्कता और चौकसी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रक्षात्मक मुद्रा में तेजी से सुधार और संरचनाओं की परिचालन तैयारी पर संतोष व्यक्त किया। सेना प्रमुख ने लगातार निगरानी करने में आधुनिक तकनीक के समावेश की सराहना की।

थल सेनाध्यक्ष ने अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों के साथ बातचीत के दौरान उनके उच्च मनोबल की सराहना की और उनसे पेशेवर उत्कृष्टता के उच्च मानकों को बनाए रखने का आह्वाह्न किया। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में परिचालन प्रभावशीलता और सतत विकास की दिशा में सेना, सीएपीएफ, नागरिक प्रशासन और पुलिस के बीच उत्कृष्ट तालमेल की भी सराहना की।

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कानपुर स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड के बोर्ड ने 14वीं बोर्ड बैठक में कई अहम फैसला लिया

कानपुर 14 जून, कानपुर स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड के बोर्ड ने 14वीं बोर्ड बैठक में कई अहम फैसला लिया है।

बोर्ड की बैठक आयुक्त कानपुर मंडल की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी और इसमें श्री विशाख जी (डीएम कानपुर नगर) श्री शिव शरणप्पा (नगर आयुक्त और सीईओ स्मार्ट सिटी), श्री अरविंद सिंह (वीसी केडीए), श्री बीजीटीएस मूर्ति (डीसीपी यातायात)), श्री नीरज श्रीवास्तव जी और अन्य अधिकारी ने भाग लिया ।

बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:

1) पूरा होने के बाद स्मार्ट सिटी कानपुर की परियोजनाओं के “संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम)” के लिए व्यय के लिए एक अलग बैंक खाता खोला और संचालित किया जाएगा।

2) बोर्ड ने लगभग ₹ 100 करोड़ की 31 परियोजनाओं की निर्माण / लागू करने की अनुमति को पारित किया है।
प्रमुख परियोजनाएं हैं:

-बड़ा चौराहा का विकास (₹ 3.5 करोड़)

-कानपुर नगर निगम में “फ़ेशल रेकग्निशन मेकनिज़म” ( चेहरे पहचान हेतु अटेंडन्स सॉफ़्टवेर) के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने और प्रत्येक दिन शहर की बेहतर साफ़ सफ़ाई सुनिश्चहित करने की प्रणाली (धनराशि अगले १५ दिनो में तय किया जायेगा)

-ग्रीन पार्क विज़िटर गैलरी (चरण 2) (₹ 3.57 करोड़)

– ग्रीन पार्क में बैडमिंटन / टेबल टेनिस और जिम हॉल का विकास (₹ 5.5 करोड़)

– ठोस कचरा प्रबंधन के लिए बीस वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन (₹ 2 करोड़)

-चुन्नीगंज कन्वेंशन सेंटर के आसपास / चारों तरफ़ स्मार्ट रोड का निर्माण (₹3 करोड़)

– 10 पार्कों में ओपन जिम और पार्कों का विकास (₹ 5 करोड़)

– एबीडी क्षेत्र में ६ सरकारी भवनों में स्थापित बड़े सोलर बिजली उत्पादन सैयंत्र की स्थापना (₹ 3.5 करोड़)

– आनंदेश्वर मंदिर के पास सार्वजनिक स्थानों का जन सुविधा विकास (₹ 6 करोड़)

– 30 स्मार्ट बस स्टॉप का निर्माण और विकास (₹ 4 करोड़, सार्वजनिक निजी भागीदारी के साथ, केएससीएल ₹ 50 लाख का भुगतान करेगा)

– नाना राव पार्क में ऑटोमेटेड फुट ओवर ब्रिज का निर्माण (₹4 करोड़)

– एबीडी क्षेत्र में नौका विहार का विकास (₹ 2 करोड़)

– स्लम क्षेत्रों में सार्वजनिक सुविधाओं का विकास (₹ 4 करोड़)

-तुलसी उपवन का सौंदर्यीकरण (₹ 3.5 करोड़)

– एबीडी क्षेत्र में सड़कों के सुरक्षित सड़क संकेत, चिह्न और अन्य सुरक्षा उपाय (₹ 5 करोड़)

– सिटी ई-बस एप्लिकेशन का विकास और इसे स्मार्ट सिटी के आईसीसीसी से जोड़ना (₹ 80 लाख)

– कारगिल पार्क में नौका विहार सुविधाओं का विकास (₹50 लाख)

– वेब आधारित एलआईडीएआर (LIDAR) प्रौद्योगिकी आधारित संपत्ति मानचित्रण का विकास (₹ 1.75 करोड़)

3) बोर्ड ने अगले 2 वर्षों के लिए कानपुर स्मार्ट सिटी की ICCC परियोजना के लिए IIT कानपुर को “तकनीकी सहायता समूह” (TSG) के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह ICCC में उपलब्ध सुविधाओं का सर्वोत्तम संभव उपयोग सुनिश्चित करने में मदद करेगा और ITMS और यातायात प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग भी करेगा।

4) स्मार्ट सिटी बोर्ड ने “गैर-पुनर्नवीनीकरण योग्य प्लास्टिक कचरे (एनसीपीडब्ल्यू)” को प्रयोग करने योग्य में परिवर्तित करने के लिए और उससे फर्नीचर और अन्य निर्माण सामग्री बनाने के तकनीकी हेतु आईआईटी कानपुर की एक गैर-लाभकारी कंपनी “फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (FIRST) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

5) कानपुर स्मार्ट सिटी बोर्ड ने पालिका स्टेडियम सुविधाओं के बेहतर संचालन, प्रबंधन और रख रखाव के लिए ओपन टेंडर द्वारा स्मार्ट सिटी द्वारा चयनित ओ एंड एम प्रबंधन निजी एजेन्सी के चयन को भी मंजूरी दे दी है।
बोर्ड ने अग्रीमेंट के प्रावधानों की समीक्षा के लिए और पालिका स्टेडियम में सुविधाओं के संचालन और प्रबंधन की निगरानी के लिए एक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया।

बोर्ड ने विजिटर गैलरी की निजी भागीदारी के माध्यम से सुविधाओं का बेहतर संचालन और रख रखाव के लिए आगामी दिनो में निर्माणाधीन कन्वेंशन सेंटर, कलेक्ट्रेट में मल्टी लेवल पार्किंग, मोतीझील में वेंडर कियोस्क, बैडमिंटन कोर्ट और ग्रीन पार्क में जिम और नई स्विमिंग पूल को निजी O&M संस्था के माध्यम से बेहतर संचालन और प्रबंधन (ओ एंड एम) शुरू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

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भारत अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) परिषद के लिए फिर से चुनाव लड़ेगा

विश्व सूचना समाज सम्मेलन (वर्ल्ड समिट ऑफ इंफॉर्मेशन सोसाइटी – डब्ल्यूएसआईएस) 2022 के दौरान केंद्रीय संचार राज्य मंत्री श्री देवुसिंह चौहान ने कहा कि “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत वैश्विक डिजिटल परिवर्तन, विकास में उत्कृष्टता प्राप्त करने और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग में सबसे आगे रहा है।” श्री देवुसिंह चौहान ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 31 मई से 3 जून 2022 तक आयोजित डब्ल्यूएसआईएस 2022 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

डब्ल्यूएसआईएस को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू), संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (अंकटाड) द्वारा सभी डब्ल्यूएसआईएस एक्शन लाइन सह-/सुविधाकर्ता और संयुक्त राष्ट्र के अन्य संगठनों के निकट सहयोग से किया जाता है। विश्व समुदाय के लिए सूचना समाज के निर्माण में पहल करने के लिए 2003 में डब्ल्यूएसआईएस शिखर सम्मेलन के बाद से यह एक अनवरत प्रक्रिया है।

भारत आईटीयू परिषद के लिए 2023-2026 की अवधि के लिए फिर से चुनाव लड़ रहा है। भारत 1869 से आईटीयू का सदस्य रहा है और इसके कार्यों और गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है और वैश्विक समुदाय के हक में दूरसंचार/आईसीटी की वृद्धि और विकास में यथासंभव योगदान देता रहा है।

भारत की रेडियो विनियमन बोर्ड (आरआरबी) उम्मीदवार और आईटीयू परिषद के लिए फिर से चुनाव लड़ने की भारत की उम्मीदवारी के स्वागत समारोह में अपने संबोधन में श्री देवुसिंह चौहान ने कहा कि भारत दुनिया को एक जुड़े समाज के रूप में महसूस करने और सतत विकास लक्ष्यों – 2030 को पूरा करने में आईसीटी को सक्षम करने के लिए आईटीयू की सोच और दृष्टि का प्रसार करता है।

सदस्य, आरआरबी के लिए भारत की उम्मीदवार के रूप में सुश्री एम. रेवती के नाम का प्रस्ताव करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि सुश्री रेवती के पास पेशेवर विशेषज्ञता, नेतृत्व क्षमता, समय पर किसी कार्य को संपन्न करने की प्रतिबद्धता, व्यवस्थित तौर पर समस्या का समाधान निकालने की क्षमता और समावेशी आईसीटी विकास के लिए विनियम तैयार करने का एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड है।

श्री देवुसिंह चौहान ने आईटीयू के लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान करने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया और प्रतिभागियों से आईटीयू परिषद के लिए भारत की उम्मीदवारी और आरआरबी के लिए सुश्री रेवती की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान “ब्रिजिंग द डिजिटल डिवाइड” पर उच्च स्तरीय नीति सत्र, कल्याण, समावेशन और लचीलापन के लिए आईसीटी पर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर उच्च स्तरीय वार्ता सहित कई सत्रों में भाग लिया। डिजिटल डिवाइड पर उच्च स्तरीय नीति वक्तव्य देते हुए उन्होंने भारत के सभी 6 लाख गांवों को कवर करने के लिए भारतनेट, सभी गांवों के लिए अम्ब्रेला मोबाइल कवरेज, सभी के लिए हाई स्पीड इंटरनेट एक्सेस और कई अन्य उपायों के बारे में भारत सरकार की पहल के बारे में वैश्विक मंच को अवगत कराया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को सफलतापूर्वक उचित मानकों की मंजूरी मिल गई है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में 5जी के प्रसार में मदद मिलेगी।

आईसीटी और एआई पर उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान श्री देवुसिंह चौहान ने प्रतिभागियों को भरोसोमंद आईसीटी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारत द्वारा की गई पहलों और एआई की क्षमता का पता लगाने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एआई की विघटनकारी प्रकृति और अर्थव्यवस्थाओं को बदलने की इसकी क्षमता को देखते हुए, सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के नाते भारत के पास एआई क्रांति में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।

डब्ल्यूएसआईएस 2022 के इतर, केंद्रीय संचार राज्य मंत्री श्री देवुसिंह चौहान ने कई द्विपक्षीय बैठकें कीं और आईटीयू के उप सचिव श्री मालकॉम जॉनसन, ईरान के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री इस्सा ज़ारेपोर, जापान के नीति समन्वय उप मंत्री श्री यूजी सासाकी, आईटीयू के महासचिव श्री हाओलिन झोउ जैसे कई गणमान्य व्यक्तियों और महानुभावों से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री ने उन्हें विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा द स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (श्री सरदार वल्लभभाई पटेल) का एक लघु स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।

आईटीयू के महासचिव श्री हाओलिन झोउ ने आईसीटी में भारत की पहल की सराहना की। डब्ल्यूआईएसएस के अध्यक्ष प्रोफेसर ईसा अली इब्राहिम ने भारत को एक सफल केस स्टडी के रूप में दर्ज किया।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इजरायल के रक्षा मंत्री बेंजामिन गैंट्ज ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 02 जून, 2022 को नई दिल्ली में इजरायल के रक्षा मंत्री श्री बेंजामिन गैंट्ज के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और रक्षा औद्योगिक सहयोग से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच मौजूदा सैन्य गतिविधियों की समीक्षा की, जोकि कोविड – 19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद बढ़ी हैं। उन्होंने भविष्य की प्रौद्योगिकियों तथा रक्षा सह-उत्पादन में अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान देने के साथ-साथ रक्षा से संबंधित सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

दोनों मंत्रियों ने पारस्परिक सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और सामरिक एवं रक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर आपसी तालमेल को रेखांकित किया। उन्होंने सभी मंचों पर सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। भारत-इजरायल रक्षा सहयोग के मौजूदा ढांचे को और अधिक मजबूत करने के इरादे से, दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग से संबंधित भारत-इजरायल विजन को अपनाया। दोनों मंत्रियों के बीच भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के संबंध में एक आशय पत्र का आदान-प्रदान भी किया गया।

इससे पहले दिन में, इज़राइल के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का दौरा किया और स्मारक पर माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले उन्हें पारंपरिक रूप से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

इज़राइल के रक्षा मंत्री 02 जून, 2022 की सुबह भारत की आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह उनकी पहली भारत यात्रा है। रक्षा सहयोग द्विपक्षीय सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक रहा है। इस वर्ष भारत और इज़राइल के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना की 30वीं वर्षगांठ है।

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प्रधानमंत्री 3 जून को उत्तर प्रदेश के दौरे पर जाएंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 3 जून, 2022 को उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 11 बजे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ पहुंचेंगे, जहां वे यूपी इन्वेस्टर्स समिट के ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी @3.0 में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 1:45 बजे कानपुर के परौंख गांव पहुंचेंगे, जहां वे माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद के साथ पथरी माता मंदिर के दर्शन करेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 2 बजे वे डॉ. बी. आर. अंबेडकर भवन जाएंगे, जिसके बाद दोपहर 2:15 बजे मिलन केंद्र का दौरा करेंगे। यह केंद्र माननीय राष्ट्रपति का पैतृक घर है, जिसे सार्वजनिक उपयोग के लिए दान कर दिया गया था और एक सामुदायिक केंद्र (मिलन केंद्र) में परिवर्तित कर दिया गया था। इसके बाद वे दोपहर 2:30 बजे परौंख गांव में एक सार्वजनिक समारोह में शामिल होंगे।

ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान प्रधानमंत्री 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की 1406 परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। परियोजनाओं में कृषि और संबद्ध, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स, एमएसएमई, विनिर्माण, अक्षय ऊर्जा, फार्मा, पर्यटन, रक्षा एवं एयरोस्पेस, हथकरघा तथा कपड़ा आदि जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं। इस समारोह में देश के उद्योग जगत के दिग्गज शामिल होंगे।

21-22 फरवरी, 2018 को यूपी इन्वेस्टर्स समिट 2018 आयोजित किया गया था, जबकि पहला ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 29 जुलाई, 2018 को और दूसरा ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी 28 जुलाई, 2019 को आयोजित किया गया था। पहले ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के दौरान, 61,500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 81 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया था और दूसरे ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में 67,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 290 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया।

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राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय महिला विधायक सम्मेलन-2022 का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविंद ने तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय महिला विधायक सम्मेलन-2022 का उद्घाटन किया। सम्मेलन का आयोजन केरल विधानसभा ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत किया है। सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब राष्ट्र स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत हम पिछले एक साल से अधिक समय से स्मारक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। विभिन्न समारोहों में लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, अतीत से जुड़ने और अपने हित में, हमारे गणतंत्र की नींव को फिर से खोजने के उनके उत्साह को दर्शाती है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक शोषक औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों से आजाद होने के भारत के प्रयास बहुत पहले ही शुरू हो गए थे, और सबसे पहले 1857 में हमें इसकी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। 19वीं सदी के मध्य के समय में भी, जबकि दूसरी ओर केवल पुरुष थे, भारतीय पक्ष में कई महिलाएं शामिल थीं। रानी लक्ष्मीबाई उनमें से सबसे उल्लेखनीय थीं, लेकिन उनके जैसी कई और भी थीं, जो अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ बहादुरी से लड़ रही थीं। गांधी जी के नेतृत्व वाले ‘असहयोग आंदोलन से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन’ तक कई सत्याग्रह अभियान चलाए गए, जिनमें महिलाओं की व्यापक भागीदारी थी। पहली महिला सत्याग्रहियों में कस्तूरबा शामिल थीं। जब गांधीजी को गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने दांडी तक के नमक मार्च का नेतृत्व सरोजिनी नायडू को सौंपने का फैसला किया। कमलादेवी चट्टोपाध्याय चुनाव लड़ने वाली देश की पहली महिला थीं। राष्ट्रपति ने मैडम भीकाजी कामा के साहसपूर्ण बलिदान और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में इंडियन नेशनल आर्मी की कैप्टन लक्ष्मी सहगल और उनकी सहयोगियों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जब हम राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी का उदाहरण देते हैं, तो प्रेरणा देने वाले बहुत से नाम दिमाग में आते हैं, लेकिन उनमें से कुछ का ही उल्लेख कर पाते हैं। अपने सभी वयस्क नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के सार्वभौमिक मताधिकार प्रदान करने की भारत की उपलब्धि के बारे में बताते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे दुनिया के सबसे पुराने आधुनिक लोकतंत्र में भी महिलाओं को देश की स्वतंत्रता की एक सदी के बाद तक वोट का अधिकार प्राप्त करने का इंतजार करना पड़ा। यूनाइटेड किंगडम में रहने वाली उनकी बहनों ने भी लगभग उतना ही लंबा इंतजार किया। इसके बाद भी, यूरोप के कई आर्थिक रूप से उन्नत देशों में महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं दिया गया। लेकिन भारत में ऐसा समय कभी नहीं आया जब पुरुषों को मताधिकार मिला हो, और महिलाओं को नहीं। इससे दो बातें सिद्ध होती हैं। पहली, कि हमारे संविधान निर्माताओं का  लोकतंत्र में और जनता के विवेक में गहरा विश्वास था। वे प्रत्येक नागरिक को एक नागरिक के तौर पर मानते थे, न कि एक महिला या किसी जाति और जनजाति के सदस्य के रूप में, और वह मानते थे कि हमारे समन्वित भविष्य को आकार देने में उनमें से हर एक की आवाज सुनी जानी चाहिए। दूसरा, प्राचीन काल से ही इस धरती ने स्त्री और पुरुष को समान माना है- निस्संदेह एक दूसरे के बिना अधूरे। राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं एक के बाद एक विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति कर रही हैं। नवीनतम है, सशस्त्र बलों में उनकी बढ़ती भूमिका। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित और प्रबंधन के पारंपरिक रूप से पुरुषों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में भी, जिन्हें एसटीईएमएम कहा जाता है, उनकी संख्या बढ़ रही है। कोरोना संकट के समय में जिन लोगों ने आगे बढ़कर राष्ट्र के लोगों की सुरक्षा का जिम्मा उठाया, उन योद्धाओं में भी पुरुषों से ज्यादा महिलाएं ही रही होंगी। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा करने वाले लोगों की बात आती है तो केरल ने हमेशा अपनी ओर से अधिक से अधिक योगदान दिया और इस राज्य की महिलाओं ने संकट की इस अवधि के दौरान व्यक्तिगत जोखिम उठा कर भी निस्वार्थ सेवा का उदाहरण स्थापित किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है, ऐसे में इस तरह की उपलब्धियां हासिल करना उनके लिए स्वाभाविक होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। हमें यह स्वीकार करना होगा कि वे हमारे समाज में बहुत गहरी पैंठ बनाए बैठे  सामाजिक पूर्वाग्रहों का शिकार हैं। देश के कार्यबल में उनका अनुपात उनकी क्षमता के मुकाबले कुछ नहीं है। यह दुखद स्थिति, निश्चित रूप से पूरे विश्व में व्याप्त है। उन्होंने कहा कि भारत में तो कम से कम एक महिला प्रधानमंत्री हुई हैं और राष्ट्रपति भवन में भी उनके प्रतिष्ठित पूर्ववर्तियों में से एक महिला थीं, जबकि कई देशों में अभी तक कोई महिला राज्य या सरकार की प्रमुख नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे को वैश्विक परिदृश्य में देखने से हमें यह महसूस करने में मदद मिलती है कि हमारे सामने चुनौती मानसिकता को बदलने की है- यह एक ऐसा कार्य है, जो बिल्कुल भी आसान नहीं है। इसमें अपार धैर्य और समय की जरूरत है। हम निश्चित रूप से इस तथ्य से राहत महसूस कर सकते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन ने भारत में लैंगिक समानता के लिए एक ठोस नींव रखी, कि हमने एक महान शुरुआत की थी और हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि अब यह मानसिकता बदलनी शुरू हो गई है, और लैंगिक संवेदनशीलता- तीसरे लिंग और अन्य लिंग की पहचानों सहित तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार भी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ जैसी केंद्रित पहलों के साथ इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दशकों से केरल राज्य महिलाओं की तरक्की की राह में आने वाली बाधाओं को दूर कर एक शानदार उदाहरण पेश करता रहा है। राज्य की आबादी की उच्च स्तरीय संवेदनशीलता के चलते राज्य ने महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपनी क्षमता हासिल करने में मदद करने के लिए नए रास्ते तैयार किए हैं। यह वह भूमि है जिसने भारत को सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एम. फातिमा बीवी दीं। यही वजह है कि केरल आज राष्ट्रीय महिला विधायक सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘लोकतंत्र की ताकत’ के अंतर्गत आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन एक बड़ी सफलता हासिल करेगा। उन्होंने इस सम्मेलन का आयोजन करने के लिए केरल विधानसभा और उसके सचिवालय को बधाई दी।

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संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री  मीनाक्षी लेखी ने ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की 7वीं बैठक में भाग लिया

संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री  मीनाक्षी लेखी ने ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की 7वीं बैठक में भाग लिया। इस बैठक को चीन गणराज्य द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गया था।

ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रगति और विस्तार के लिए “ब्रिक्स के बीच समावेश और आपस में ज्ञान का साझा करने वाली सांस्कृतिक साझेदारी स्थापित करने” के थीम पर इस बैठक में चर्चा हुई। चर्चा का मुख्य फोकस क्षेत्र में सांस्कृतिक डिजिटलीकरण पर विकास और सहयोग को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर सहयोग को मजबूत करना और ब्रिक्स देशों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्लेटफार्मों के निर्माण को आगे बढ़ाना था। मंत्रियों ने सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने और 2015 में हस्ताक्षरित ब्रिक्स सांस्कृतिक सहयोग समझौते को लागू करने के लिए ब्रिक्स कार्य योजना 2022-2026 को अपनाया।

श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और अपने संबोधन में निम्नलिखित बिंदुओं को सामने रखा:

(i)            भारत अपनी विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के साथ संगीत, रंगमंच, कठपुतली का खेल, विभिन्न आदिवासी कला और नृत्य के विशेष रूप से शास्त्रीय और लोक क्षेत्र में आदान-प्रदान कार्यक्रमों/गतिविधियों के माध्यम से ब्रिक्स देशों को सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराने के लिए एक मंच प्रदान करना सुनिश्चित करता है।

(ii)           कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के कारण पिछले ढाई साल के दौरान फीजिकल मूवमेंट संभव नहीं हो पाया है। इसके बावजूद संस्कृति सहित सभी मोर्चों पर जीवन को आगे बढ़ाने में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

(iii)          सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में मूल्यवान संग्रह को डिजिटाइज करना और उन्हें खुले सूचना स्थान में प्रस्तुत करना भारत की प्राथमिकता है क्योंकि यह संग्रहालयों और पुस्तकालयों जैसे सांस्कृतिक संस्थानों में संग्रहीत सांस्कृतिक सामग्री के लिए लंबी अवधि के लिए संग्रहण और व्यापक पहुंच प्रदान करता है। ब्रिक्स देशों की आभासी प्रदर्शनियों के माध्यम से ब्रिक्स देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का पता लगाया जा सकता है।

(iv)         भारत सांस्कृतिक विरासत और इन्टर्कल्चरल डायलग की विविधता में विश्वास करता है। यह पर्यावरण संबंधी चिंताओं के लिए नवीन और संस्कृति-आधारित समाधानों में विरासत और पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत करने वाले स्थायी और लचीले पर्यावरण की पुरजोर वकालत करता है।

(v)          भारत की कला अपनी समृद्ध विरासत और अपने आधुनिक इतिहास का एक मिश्रण है। इसने निस्संदेह भारत को एक सक्रिय और रचनात्मक इकाई के रूप में स्थापित किया है जो आज कला जगत का एक अभिन्न अंग है।

(vi)         आज की पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के आलोक में, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विकास प्रतिमानों की दिशा में काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय की मांग एक रोडमैप है जो सांस्कृतिक विरासत, सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों और लोगों की सहज कल्पना और सामूहिक बुद्धि की समझ को एकीकृत करना चाहिए।

उन्होंने अध्यक्ष को धन्यवाद दिया और सभी क्षेत्रों में प्रगतिशील और व्यापक ब्रिक्स सहयोग की कामना की।

बैठक के अंत में, ब्रिक्स राज्यों की सरकारों के बीच संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग (2022-2026) के बीच समझौते के कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना पर सहमति हुई और सभी ब्रिक्स राष्ट्रों के संस्कृति मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए।

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प्रधानमंत्री मोदी की जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक

प्रधानमंत्री मोदी ने आज जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक की। प्रधानमंत्री श्री किशिदा ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का भी आयोजन किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने के साथ-साथ कुछ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर सार्थक विचार विमर्श किया।

दोनों नेता रक्षा उत्पादन सहित द्विपक्षीय सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अगली 2+2 विदेश एवं रक्षा मंत्री स्तर की बैठक शीघ्र ही जापान में आयोजित की जा सकती है।

दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों की सराहना की। वे इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को अगले पांच वर्षों में जापान की ओर से भारत में 5 ट्रिलियन येन के सार्वजनिक एवं निजी निवेश और वित्त पोषण से संबंधित अपने निर्णय को लागू करने की दिशा में संयुक्त रूप से काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने गतिशक्ति पहल के माध्यम से व्यवसाय करने में आसानी और लॉजिस्टिक्स में सुधार के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों पर प्रकाश डाला और प्रधानमंत्री श्री किशिदा से भारत में जापानी कंपनियों द्वारा अधिक से अधिक निवेश का समर्थन करने का आग्रह किया। इस किस्म के निवेश से सशक्त आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में मदद मिलेगी और यह पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात की सराहना की कि जापानी कंपनियां भारत में अपना निवेश बढ़ा रही हैं और 24 जापानी कंपनियों ने विभिन्न पीएलआई योजनाओं के तहत सफलतापूर्वक आवेदन किया है।

दोनों नेताओं ने मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना के कार्यान्वयन में हुई प्रगति को रेखांकित किया और इस परियोजना के लिए तीसरी किश्त ऋण के एक्सचेंज ऑफ नोट पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और इस संबंध में अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों के विकास में दोनों पक्षों के निजी क्षेत्रों के बीच अधिक सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमत हुए। उन्होंने 5जी, बियॉन्ड 5जी और सेमीकंडक्टर्स जैसी महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने हरित हाइड्रोजन सहित स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में गहरे सहयोग पर भी सहमति व्यक्त की तथा इस संबंध में दोनों देशों के व्यापारिक संस्थानों के बीच और अधिक पारस्परिक सहयोग को प्रोत्साहित किया।

दोनों नेताओं ने दोनों देशों के लोगों के बीच पारस्परिक जुड़ाव को और बढ़ावा देने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री श्री किशिदा ने कहा कि इस तरह के जुड़ाव को द्विपक्षीय संबंधों की रीढ़ होना चाहिए। इस संबंध में, दोनों नेताओं ने निर्दिष्ट कुशल श्रमिक (एसएसडब्ल्यू) कार्यक्रम के कार्यान्वयन में प्रगति पर गौर किया और इस कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कोवैक्सिन और कोविशील्ड के टीकाकरण का प्रमाण-पत्र लेकर जाने वाले भारत के यात्रियों के लिए जापान में क्वारंटीन मुक्त प्रवेश की सुविधा हेतु यात्रा प्रतिबंधों में और अधिक ढील देने का मुद्दा उठाया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देने की दृष्टि से उपयोगी है और इसके वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों द्वारा चिन्हित की गई विभिन्न परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने हाल के वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार विमर्श किया। उन्होंने हिंद-प्रशांत से संबंधित अपने-अपने दृष्टिकोण में समानता को रेखांकित किया और एक स्वतंत्र, खुले व समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इस संदर्भ में, उन्होंने क्वाड के समकालीन और रचनात्मक एजेंडा जैसे कि टीके, छात्रवृत्ति, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और बुनियादी ढांचे के मामले में हुई प्रगति का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस यात्रा के दौरान उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को दिए गए गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री श्री किशिदा का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री श्री किशिदा ने अगले वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी को जापान आने का निमंत्रण दिया, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया गया।

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केंद्र ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय आयोगों को एक महीने से अधिक के लिए स्थगन नहीं देने और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे में तेजी लाने के लिए कहा

उपभोक्ता कार्य विभाग (डीओसीए) ने उपभोक्ता शिकायतों का जल्द निपटाने सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला आयोगों के रजिस्ट्रारों और अध्यक्षों को  पत्र लिखकर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत प्रदान की गई समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक महीने से अधिक के लिए स्थगन आदेश नहीं देने को कहा है। स्थगन अनुरोधों के कारण शिकायतों के समाधान में 2 महीने से अधिक की देरी के मामले में, आयोग पार्टियों पर लागत लगाने पर विचार कर सकता है। सचिव डीओसीए श्री रोहित कुमार सिंह ने अपने पत्र में उपभोक्ताओं को सस्ता, परेशानी मुक्त और जल्द न्याय दिलाने पर जोर दिया है। इस पत्र में कहा गया है कि बार-बार और लंबे समय तक स्थगन न केवल उपभोक्ता को उसके सुनने और उसके निवारण के अधिकार से वंचित करता है, बल्कि उस अधिनियम की भावना को भी खत्म कर देता है जिसका विधायिका ने इरादा किया था। इसलिए, उपभोक्ता आयोगों से अनुरोध है कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी परिस्थिति में लंबी अवधि के लिए स्थगन प्रदान नहीं किया जाए। इसके अलावा, किसी भी पक्ष द्वारा स्थगन के दो से अधिक अनुरोधों के मामले में, उपभोक्ता आयोग निवारक उपाय के रूप में पार्टियों पर लागत लगा सकता है। अधिनियम की धारा 38(7) के तहत शिकायत स्वीकार करने की प्रक्रिया पर उपभोक्ता आयोगों का ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र में जोर दिया गया है कि प्रत्येक शिकायत का यथासंभव शीघ्र निपटारा किया जाना आवश्यक है और विरोधी पक्ष द्वारा नोटिस प्राप्त होने की तारीख से 3 महीने की अवधि के भीतर जहां शिकायत के लिए वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है और यदि वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता होती है तो 5 महीने के भीतर शिकायत पर निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा, अधिनियम यह भी कहता कि कोई भी स्थगन आमतौर पर उपभोक्ता आयोगों द्वारा तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि पर्याप्त कारण नहीं दिखाया गया हो और स्थगन के कारणों को लिखित रूप में दर्ज नहीं किया गया हो। आयोगों को स्थगन से होने वाली लागतों के बारे में आदेश देने का भी अधिकार है। यह उल्लेख किया जा सकता है कि अधिनियम की धारा 38(2)(ए) के अनुसार आयोग स्वीकार की गई शिकायत की एक प्रति विरोधी पक्ष को 30 दिनों की अवधि के भीतर या विस्तारित 15 दिनों की अवधि के भीतर मामले पर अपना पक्ष देने का निर्देश देगा, जो इसके द्वारा दी जा सकती है। धारा 38(3)(बी)(ii) में आगे प्रावधान है कि यदि विरोधी पक्ष कोई कार्रवाई करने में या निर्धारित समय के भीतर अपने मामले को पेश करने में विफल रहता है, तो आयोग साक्ष्य के आधार पर एक पक्षीय निर्णय लेने के लिए आगे बढ़ सकता है। इसके अलावा, पत्र में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम हिली मल्टीपर्पज कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के 04.03.2020 को दिए फैसला का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि उपभोक्ता आयोगों के पास शिकायतों का जवाब दाखिल करने के लिए अधिनियम की धारा 13 में उल्लिखित 30 दिनों के अतिरिक्त 15 दिनों की अवधि के अलावा और समय बढ़ाने की कोई शक्ति नहीं है। मेसर्स डैडीज बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य बनाम मनीषा भार्गव और अन्य के मामले में 11.02.2021 को दिए गए फैसले तथा डायमंड एक्सपोर्ट्स और अन्य बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एंड ओर्स मामले में 14.12.2021 को दिए गए फैसले में भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसी निर्णय की पुष्टि की गई है। सचिव डीओसीए ने सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और सभी उपभोक्ता आयोगों को पत्र लिखकर उपभोक्ताओं को ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। पत्र में, इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों ने ई-दाखिल तंत्र स्थापित किया है जिसमें ई-नोटिस, केस डॉक्यूमेंट डाउनलोड लिंक और वर्चुअल हियरिंग लिंक, विपरीत पक्ष द्वारा लिखित प्रतिक्रिया दाखिल करने, शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्तर दाखिल करने और एसएमएस/ई-मेल के माध्यम से अलर्ट पाने सहित कई विशेषताएं हैं। आयोगों से अनुरोध किया गया है कि वे ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों को दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करें।  उपभोक्ता कार्य विभाग 31.05.2022 को राष्ट्रीय, राज्य और जिला आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ-साथ राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में उपभोक्ता मामलों के प्रभारी सचिव के साथ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन भी कर रहा है। इसमें उपभोक्ताओं के लिए विवाद निवारण तंत्र को अधिक प्रभावी, तेज और परेशानी मुक्त बनाने पर चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा।

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केन्‍द्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कन्हेरी गुफाओं में विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया

केन्‍द्रीय पर्यटन, संस्कृति और उत्‍तर पूर्व क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर) श्री जी. किशन रेड्डी ने आज बोरीवली के नजदीक संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित कन्हेरी गुफाओं में पर्यटकों के लिए विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया। संस्‍कृति मंत्री ने कहा, “कन्हेरी गुफाएं हमारी प्राचीन विरासत का हिस्सा हैं क्योंकि वे हमारे उद्भव और अतीत का प्रमाण प्रदान करती हैं। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर किए गए कार्यों का उद्घाटन करना सौभाग्य की बात है। बुद्ध का संदेश संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए आज भी महत्‍वपूर्ण है।”

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श्री रेड्डी ने कहा कि हमारी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण में रुचि दिखाना और उसकी जिम्मेदारी लेना प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। संस्‍कृति मंत्री ने कहा कि हमारी विरासत की रक्षा, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कॉरपोरेट और सिविल सोसाइटी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां इन खजानों तक पहुंच सकें। इंडियन ऑयल फाउंडेशन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के हिस्से के रूप में कन्हेरी में उन्नत पर्यटक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के कार्य में शामिल है। वर्तमान इमारत में आगन्‍तुक मंडप, रखवाली करने वालों के आवास, बुकिंग ऑफिस को अपग्रेड करने के साथ उनका नवीनीकरण किया गया है। बुकिंग काउंटर से लेकर कस्टोडियन क्वार्टर तक के क्षेत्र को प्राकृतिक दश्‍यों से सुशोभित किया गया है। चूंकि गुफाएं जंगल के मुख्य क्षेत्र में आती हैं, बिजली और पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है, इसके बावजूद सौर ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बिजली की व्यवस्था की गई है। आगंतुकों की रुचि बनाए रखने के लिए सरल और सुविधाजनक विवेचना केन्‍द्र की स्‍थापना की गई है जिसमें ग्यारह व्‍याख्‍यात्‍मक पैनलों की मदद से प्रमुख गुफाओं की उत्कृष्ट विशेषताओं और अद्वितीयता को उजागर किया गया है। कन्हेरी का ट्रेल मैप यानी रास्‍ता दिखाने वाला नक्‍शा एक और महत्वपूर्ण विशेषता है जो आगंतुकों का समय बचाने में मदद करता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पूरे मठ परिसर के 3डी वर्चुअल टूर पर भी काम कर रहा है। कन्हेरी गुफाएं मुंबई के पश्चिमी बाहरी इलाके में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों में बड़े पैमाने पर बेसाल्ट आउटक्रॉप में गुफाओं का समूह और कटी हुई चट्टानों से बने स्मारकों का एक समूह है। इनमें बौद्ध मूर्तियां और राहत नक्काशी, पेंटिंग और शिलालेख हैं, जो पहली शताब्दी सीई से 10वीं शताब्दी सीई तक की हैं। पानी के अनेक जलाशयों के साथ खुदाई की सतह और क्षेत्र, शिलालेख, एक सबसे पुराना बांध, एक स्तूप दफन गैलरी और उत्कृष्ट वर्षा जल संचयन प्रणाली इसकी एक आश्रम और तीर्थ केन्‍द्र के रूप में लोकप्रियता का संकेत देती है। कन्हेरी सातवाहन, त्रिकुटक, वाकाटक और सिलहारा के संरक्षण में और क्षेत्र के धनी व्यापारियों द्वारा किए गए दान के माध्यम से फला-फूला।

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