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नवंबर 2022 के दौरान सकल जीएसटी राजस्व संग्रह 1,45,867 करोड़ रुपए रहा, साल-दर-साल 11% की रिकॉर्ड वृद्धि

नवंबर 2022 के महीने में एकत्र किया गया सकल जीएसटी राजस्व 1,45,867 करोड़ रुपए रहा, जिसमें से सीजीएसटी 25,681 करोड़ रुपए, एसजीएसटी 32,651 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 77,103 करोड़ रुपए (माल के आयात पर एकत्रित 38,635 करोड़ रुपए सहित) और 10,433 करोड़ रुपए (माल के आयात पर एकत्रित 817 करोड़ रुपए सहित) उपकर है।

सरकार ने आईजीएसटी से 33,997 करोड़ रुपए सीजीएसटी के लिए और 28,538 करोड़ रुपए एसजीएसटी के लिए तय किए हैं। नवंबर 2022 के महीने में नियमित निपटान के बाद केंद्र और राज्यों का कुल राजस्व सीजीएसटी के लिए 59678 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 61189 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, केंद्र ने नवंबर 2022 में राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को जीएसटी मुआवजे के रूप में 17,000 करोड़ रुपये भी जारी किए थे।

नवंबर 2022 के महीने का राजस्व पिछले साल इसी महीने में जीएसटी राजस्व से 11% अधिक है, जो 1.31,526 करोड़ रुपये था। महीने के दौरान, माल के आयात से राजस्व 20% अधिक था और घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से राजस्व पिछले वर्ष इसी महीने के दौरान इन स्रोतों से प्राप्त राजस्व से 8% अधिक है।

नीचे दिया गया चार्ट चालू वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्व में रुझान दिखाता है। तालिका नवंबर 2021 की तुलना में नवंबर 2022 के महीने के दौरान प्रत्येक राज्य में एकत्र किए गए जीएसटी के राज्य-वार आंकड़े दिखाती है।

 

 

नवंबर 2022 के दौरान जीएसटी राजस्व में हुई राज्यवार प्रगतिः [1]

राज्य

नवंबर-21

नवंबर-22

बढ़ोत्तरी

जम्मू-कश्मीर

383

430

12%

हिमाचल प्रदेश

762

672

-12%

पंजाब

1,845

1,669

-10%

चंडीगढ़

180

175

-3%

उत्तराखंड

1,263

1,280

1%

हरियाणा

6,016

6,769

13%

दिल्ली

4,387

4,566

4%

राजस्थान

3,698

3,618

-2%

उत्तर प्रदेश

6,636

7,254

9%

बिहार

1,030

1,317

28%

सिक्किम

207

209

1%

अरुणाचल प्रदेश

40

62

55%

नगालैंड

30

34

11%

मणिपुर

35

50

42%

मिजोरम

23

24

3%

त्रिपुरा

58

60

3%

मेघालय

152

162

6%

असम

992

1,080

9%

पश्चिम बंगाल

4,083

4,371

7%

झारखंड

2,337

2,551

9%

ओडिशा

4,136

4,162

1%

छत्तीसगढ़

2,454

2,448

0%

मध्य प्रदेश

2,808

2,890

3%

गुजरात

9,569

9,333

-2%

दमन और दीव

0

0

67%

दादरा और नगर हवेली

270

304

13%

महाराष्ट्र

18,656

21,611

16%

कर्नाटक

9,048

10,238

13%

गोवा

518

447

-14%

लक्ष्यद्वीप

2

0

-79%

केरल

2,129

2,094

-2%

तमिलनाडु

7,795

8,551

10%

पुदुचेरी

172

209

22%

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

24

23

-7%

तेलांगना

3,931

4,228

8%

आंध्र प्रदेश

2,750

3,134

14%

लद्दाख

13

50

273%

अन्य क्षेत्र

95

184

93%

केंद्रीय अधिकार क्षेत्र

180

154

-14%

कुल योग

98,708

1,06,416

8%

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गुजरात में भारी मात्रा में मादक दवाओं का पकड़ा जाना इस बात का परिचायक है कि राज्य विधानसभा चुनाव 2022 में खर्च पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है

भारत निर्वाचन आयोग ने कानून लागू करने वाली अनेक एजेंसियों के जरिये जो सटीक योजना बनाई, गंभीर समीक्षायें कीं और खर्च पर पैनी नजर रखी, उसकी बदौलत गुजरात में मौजूदा विधानसभा चुनावी प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड जब्ती करने में सफलता मिली है। ज़ब्ती की कार्रवाई लगातार चल रही है और इसी तरह की एक अहम कार्रवाई के दौरान एटीएस गुजरात के अधिकारियों के दल के नेतृत्व में मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप पकड़ी गई है। यह अभियान वडोदरा (ग्रामीण) और वडोदरा सिटी में चलाया जा रहा है। एटीएस के दल ने दो मेफेड्रोन दवा निर्माण इकाइयों का पता लगाया और लगभग 478 करोड़ रुपये की कीमत के बराबर मेफेड्रोन (सिंथेटिक दवा) की लगभग 143 किलोग्राम मात्रा जब्त की। टीम ने नादियाड और वडोदरा से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है तथा एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की विभिन्न धाराओं के तहत एटीएस पुलिस स्टेशन, अहमदाबाद में आपराधिक मामला दर्ज किया जा रहा है। अभियान लगातार जारी है और अभियान के पूरा हो जाने के बाद पूरा विवरण उपलब्ध करा दिया जायेगा।

गुजरात में अब तक (29.11.2022) की गई जब्ती का विवरण इस प्रकार हैः

राज्य नकदी शराब मादक दवायें कीमती धातुयें मुफ्त उपहार कुल ज़ब्ती
  (करोड़ रुपये में)  मात्रा और कीमत (करोड़ रुपये में) कीमत (करोड़ रुपये में) कीमत (करोड़ रुपये में) कीमत (करोड़ रुपये में) (करोड़ रुपये में)
गुजरात 27.0 411851.23 मात्रा, कीमत 14.88 61.96 (इस समय पकड़ी जाने वाली नशीली दवाओं के अतिरिक्त) 15.79 171.24 290.94

वर्ष 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में 27.21 करोड़ रुपये की कुल जब्ती की गई थी। यदि 29.11.2022 का जब्ती चार्ट देखा जाये, जिसमें 290.24 करोड़ रुपये की कुल जब्ती दर्ज है, तो पता चलेगा कि 2017 में जो जब्ती हुई थी, इस बार उससे 10.66 गुना अधिक कीमत की जब्ती की गई है। इसके अलावा नशीली दवाओं की जब्ती जारी है, उसमें तो 28 गुना की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। जब्ती आंकड़ों में इस भारी छलांग के पीछे भारत निर्वाचन आयोग की समग्र रणनीति, विस्तृत योजना और कर्मठता का हाथ है।

बनासकांठा जिले में थराद पुलिस थाने में रखी पकड़ी गई शराब

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 की तिथियों की घोषणा के अवसर पर, मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार ने प्रलोभन-मुक्त चुनावों पर जोर दिया था और हिमाचल प्रदेश मे भारी कीमत की जब्ती का हवाला दिया था। 23 नवंबर, 2022 को आयोग ने गुजरात और पड़ोसी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों – राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दमन व दीव तथा दादर व नगर हवेली के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों, आबकारी आयुक्तों, डीजी (आयकर) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की थी। यह बैठक शांति-व्यवस्था की परिस्थिति की समीक्षा करने तथा मुक्त, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिये समन्वय के लिये बुलाई गई थी। इस अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार ने प्रभावकारी और कड़े उपाय करने का निर्देश दिया। यह व्यवस्था मतदान के दिन तक जारी रहेगी, ताकि दूसरे राज्यों से नकदी, शराब, मुफ्त की रेवडियां न आने पायें। उन्होंने मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को यह निर्देश भी दिया कि वे जब्ती का राज्यवार मूल्यांकन करें तथा उचित कार्रवाई करें। आयोग ने यह भी कहा कि जिन स्थानों से गैर-कानूनी शराब और मादक पदार्थ आते हैं, वहां कार्रवाई सुनिश्चित की जाये।

कड़ी निगरानी की तैयारियों में उस समय तेजी आई, जब मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त श्री अनूप चंद्र पाण्डेय के नेतृत्व में आयोग की टीम ने सितंबर में गुजरात का दौरा किया था तथा चुनावी तैयारियों का जायजा लिया था। समर्पित टीमों ने अक्टूबर में राज्य के विभिन्न इलाकों का दौरा किया और विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा की। अपने दौरे के समय आयोग ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों, जिला प्राधिकारों और पुलिस नोडल अधिकारियों से बातचीत की तथा उन्हें निर्देश दिया कि मतदाताओं को प्रभावित करने वाली सभी हरकतों पर कड़ी नजर रखी जाये।

अहमदाबाद में रामोल पुलिस थाने ने दूध-वाहन में ले जाई जाने वाली शराब की धड़-पकड़ की

खर्च पर निगरानी की प्रक्रिया चुनाव की घोषणा के पहले ही शुरू हो जाती है। इसमें तमाम गतिविधियां शामिल होती हैं, जैसे खर्च निरीक्षकों के रूप में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति, समग्र और सटीक निगरानी के लिये कानून लागू करने वाली एजेंसियों को जागरूक बनाना व उनकी समीक्षा करना, खर्च संवेदी निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान, निगरानी प्रक्रिया में मैदानी स्तर पर तैनात की जानी वाली टीमों की उचित उपलब्धता और उसकी योजना तथा चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने वाले धनबल की भूमिका को रोकने के इरादे से डीईओ/एसपी के साथ नियमित संपर्क। चुनावी तैयारियों की समीक्षा, केंद्रीय निरीक्षकों, डीईओ, एसपी के साथ समीक्षा के बाद समग्र निगरानी की जा रही है।

आम चुनावों से लेकर गुजरात विधानसभा चुनाव में धनबल पर अंकुश लगाने और उसकी कारगर निगरानी के लिये भारत निर्वाचन आयोग ने 69 व्यय निरीक्षकों को तैनात किया गया है। इसके अलावा 27 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को भी व्यय संवेदी निर्वाचन क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां कड़ी निगरानी की जा रही है। आयोग ने विशेष व्यय निरीक्षक श्री बी. मुरली कुमार (आईआरएस, 1983, सेवानिवृत्त अधिकारी) को नियुक्त किया है, जो इस मामले के विशेषज्ञ हैं। श्री कुमार को तैयारियों का जायजा लेने और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ समन्वय बैठाने के लिये तैनात किया गया है।

इसी तरह, हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव, 2022 में भी जब्ती की कार्रवाई की गई। राज्य में 12 नवंबर को मतदान पूर्ण हो गया। वहां 2017 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की तुलना में इस बार 500 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखा गया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनवा में 9.03 करोड़ रुपये की कीमत की जब्ती की गई थी, जिसकी तुलना में इस बार 57.24 करोड़ रुपये की कीमत की जब्ती की गई। वर्ष 2022 के जारी उप-चुवावों में एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र और बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान व उत्तरप्रदेश के छह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 5.40 करोड़ रुपये की कीमत की जब्ती की गई। कड़ी निगरानी चुनाव होने वाले राज्यों में जारी रहेगी, जब तक कि चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। अंदेशा है कि जब्ती के आंकड़े अभी और बढ़ेंगे।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्रेटर नोएडा में एक कार्यक्रम में युवा शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा- नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेकर एक मजबूत और आत्म-निर्भर ‘नए भारत’ का निर्माण करें

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने युवाओं से नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा लेने और भविष्य की सभी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम एक मजबूत और आत्मनिर्भर ‘नए भारत’ का निर्माण करने का आह्वान किया है। श्री राजनाथ सिंह ने यह विचार ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक सम्मेलन में युवा शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि देश की युवा जागृत सोच में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का निर्माण करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए और गहन शोध के माध्यम से नवीन विचारों के साथ आगे बढ़ते हुए देश को और ऊंचाइयों पर ले जाना चाहिए। आने वाले समय में प्रौद्योगिकी हर क्षेत्र में एक केंद्रीय भूमिका निभाएगी इस पहलू को ध्यान में रखते हुए श्री राजनाथ सिंह ने छात्रों से इंटरनेट जैसे नए तरीकों के अलावा पारंपरिक स्रोतों जैसे अनुसंधान संस्थानों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार के माध्यम से गहन शोध पर ध्यान केंद्रित करने का भी आह्वान किया।

श्री राजनाथ सिंह ने छात्रों से दुनिया भर में हो रहे नवीनतम विकास के साथ गति बनाए रखने का आग्रह करते हुए यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इसके साथ-साथ देश की सांस्कृतिक परंपराएं और मूल्य संरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में, दुनिया कई माध्यमों से आपस में जुड़ी हुई है। इसलिए, विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं, शिक्षा, आर्थिक और राजनीतिक प्रणालियों को समझना आवश्यक है। जबकि हम एक ‘नए भारत’ के निर्माण में दृढ़ हैं, हमारा मार्गदर्शक ‘अतीत का भारत’ और इसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भूमिका और दूरदृष्टि का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। कुछ लोग इसे इतिहास का पुनर्लेखन कहते हैं जबकि वह इसे पाठ्यक्रम में सुधार मानते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का ध्यान ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ल्ड’ के विजन के अनुरूप हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर आते हुए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ को हासिल करना है जिसका नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का सपना था।

श्री राजनाथ सिंह ने देश को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों की भी जानकारी दी। इनमें राजपथ से कार्तव्य पथ; इंडिया गेट परिसर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा की स्थापना; नेताजी को श्रद्धांजलि के रूप में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के तीन द्वीपों का नाम बदलना; मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी से प्रेरित भारतीय नौसेना की एक नई पताका और ब्रिटिश काल के सैकड़ों कानूनों को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत समृद्ध विविधता और अपार संभावनाओं का देश है और सरकार देश को मजबूत और ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के लिए उस क्षमता का दोहन करने के साथ आगे बढ़ रही है।

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भारत की जी20 की अध्यक्षता की पारी शुरू

जी20 की पिछली 17 अध्यक्षताओं के दौरान वृहद आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने, अंतरराष्ट्रीय कराधान को तर्कसंगत बनाने और विभिन्न देशों के सिर से कर्ज के बोझ को कम करने समेत कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए। हम इन उपलब्धियों से लाभान्वित होंगे तथा यहां से और आगे की ओर बढ़ेंगे।

अब, जबकि भारत ने इस महत्वपूर्ण पद को ग्रहण किया है, मैं अपने आपसे यह पूछता हूं- क्या जी20 अभी भी और आगे बढ़ सकता है? क्या हम समग्र मानवता के कल्याण के लिए मानसिकता में मूलभूत बदलाव को उत्प्रेरित कर सकते हैं?

मेरा विश्वास है कि हम ऐसा कर सकते हैं।

हमारी परिस्थितियां ही हमारी मानसिकता को आकार देती हैं। पूरे इतिहास के दौरान, मानवता अभाव में रही। हम सीमित संसाधनों के लिए लड़े, क्योंकि हमारा अस्तित्व दूसरों को उन संसाधनों से वंचित कर देने पर निर्भर था। विभिन्न विचारों, विचारधाराओं और पहचानों के बीच, टकराव और प्रतिस्पर्धा आदर्श बन गए।

दुर्भाग्य से, हम आज भी उसी शून्य-योग की मानसिकता में अटके हुए हैं। हम इसे तब देखते हैं जब विभिन्न देश क्षेत्र या संसाधनों के लिए आपस में लड़ते हैं। हम इसे तब देखते हैं जब आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को हथियार बनाया जाता है। हम इसे तब देखते हैं जब कुछ लोगों द्वारा टीकों की जमाखोरी की जाती है, भले ही अरबों लोग बीमारियों से असुरक्षित हों।

कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि टकराव और लालच मानवीय स्वभाव है। मैं इससे असहमत हूं। अगर मनुष्य स्वाभाविक रूप से स्वार्थी है, तो हम सभी में मूलभूत एकात्मता की हिमायत करने वाली इतनी सारी आध्यात्मिक परंपराओं के स्थायी आकर्षण को कैसे समझा जाए?

भारत में प्रचलित ऐसी ही एक परंपरा है जो सभी जीवित प्राणियों और यहां तक कि निर्जीव चीजों को भी एक समान ही पांच मूल तत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के पंचतत्व से बना हुआ मानती है। इन तत्वों का सामंजस्य – हमारे भीतर और हमारे बीच भी- हमारे भौतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कल्याण के लिए आवश्यक है।

भारत की जी-20 की अध्यक्षता दुनिया में एकता की इस सार्वभौमिक भावना को बढ़ावा देने की ओर काम करेगी। इसलिए हमारी थीम – ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ है।

ये सिर्फ एक नारा नहीं है। ये मानवीय परिस्थितियों में उन हालिया बदलावों को ध्यान में रखता है, जिनकी सराहना करने में हम सामूहिक रूप से विफल रहे हैं।

आज हमारे पास दुनिया के सभी लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन करने के साधन हैं।

आज, हमें अपने अस्तित्व के लिए लड़ने की जरूरत नहीं है – हमारे युग को युद्ध का युग होने की जरूरत नहीं है। ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए!

आज हम जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और महामारी जैसी जिन सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनका समाधान आपस में लड़कर नहीं बल्कि मिलकर काम करके ही निकाला जा सकता है।

सौभाग्य से, आज की जो तकनीक है वह हमें मानवता के व्यापक पैमाने पर समस्याओं का समाधान करने का साधन भी प्रदान करती है। आज हम जिस विशाल वर्चुअल दुनिया में रहते हैं, वह डिजिटल प्रौद्योगिकियों की मापनीयता को प्रदर्शित करती है।

भारत इस सकल विश्व का सूक्ष्म जगत है जहां विश्व की आबादी का छठवां हिस्सा रहता है और जहां भाषाओं, धर्मों, रीति-रिवाजों और विश्वासों की विशाल विविधता है।

सामूहिक निर्णय लेने की सबसे पुरानी ज्ञात परंपराओं वाली सभ्यता होने के नाते भारत दुनिया में लोकतंत्र के मूलभूत डीएनए में योगदान देता है। लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत की राष्ट्रीय सहमति किसी फरमान से नहीं, बल्कि करोड़ों स्वतंत्र आवाजों को एक सुरीले स्वर में मिला कर बनाई गई है।

आज, भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारे प्रतिभाशाली युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा का पोषण करते हुए, हमारा नागरिक-केंद्रित शासन मॉडल एकदम हाशिए पर पड़े नागरिकों का भी ख्याल रखता है।

हमने राष्ट्रीय विकास को ऊपर से नीचे की ओर के शासन की कवायद नहीं, बल्कि एक नागरिक-नेतृत्व वाला ‘जन आंदोलन’ बनाने की कोशिश की है।

हमने ऐसी डिजिटल जन उपयोगिताएं निर्मित करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया है जो खुली, समावेशी और अंतर-संचालनीय हैं। इनके कारण सामाजिक सुरक्षा, वित्तीय समावेशन और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान जैसे विविध क्षेत्रों में क्रांतिकारी प्रगति हुई है।

इन सभी कारणों से भारत के अनुभव संभावित वैश्विक समाधानों के लिए अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं।

जी20 अध्यक्षता के दौरान, हम भारत के अनुभव, ज्ञान और प्रारूप को दूसरों के लिए, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए एक संभावित टेम्प्लेट के रूप में प्रस्तुत करेंगे।

हमारी जी20 प्राथमिकताओं को; न केवल हमारे जी20 भागीदारों, बल्कि वैश्विक दक्षिण में हमारे साथ-चलने वाले देशों, जिनकी बातें अक्सर अनसुनी कर दी जाती है, के परामर्श से निर्धारित किया जाएगा।

हमारी प्राथमिकताएं; हमारी ‘एक पृथ्वी’ को संरक्षित करने, हमारे ‘एक परिवार’ में सद्भाव पैदा करने और हमारे ‘एक भविष्य’ को आशान्वित करने पर केंद्रित होंगी।

अपने प्लेनेट को पोषित करने के लिए, हम भारत की प्रकृति की देख-भाल करने की परंपरा के आधार पर स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल जीवन शैली को प्रोत्साहित करेंगे।

मानव परिवार के भीतर सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए, हम खाद्य, उर्वरक और चिकित्सा उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति को गैर-राजनीतिक बनाने की कोशिश करेंगे, ताकि भू-राजनीतिक तनाव मानवीय संकट का कारण न बनें। जैसा हमारे अपने परिवारों में होता है, जिनकी जरूरतें सबसे ज्यादा होती हैं, हमें उनकी चिंता सबसे पहले करनी चाहिए।

हमारी आने वाली पीढ़ियों में उम्मीद जगाने के लिए; हम, बड़े पैमाने पर विनाश के हथियारों से पैदा होने वाली जोखिमों को कम करने और वैश्विक सुरक्षा बढ़ाने पर सर्वाधिक शक्तिशाली देशों के बीच एक ईमानदार बातचीत को प्रोत्साहन प्रदान करेंगे।

भारत का जी20 एजेंडा समावेशी, महत्वाकांक्षी, कार्रवाई-उन्मुख और निर्णायक होगा।

आइए हम भारत की जी20 अध्यक्षता को संरक्षण, सद्भाव और उम्मीद की अध्यक्षता बनाने के लिए एकजुट हों।

आइए हम मानव-केंद्रित वैश्वीकरण के एक नए प्रतिमान को स्वरुप देने के लिए साथ मिलकर काम करें।

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रक्षा मंत्रालय ने स्पर्श में स्थानांतरित हुए बैंकों के उन पेंशनभोगियों के लिए पेंशन भुगतान के तीन महीने के विस्तार को मंजूरी दी, जिनकी पहचान नवंबर 2022 में होनी थी

रक्षा मंत्रालय ने बैंकों के उन पेंशनभोगियों के लिए तीन महीने के लिए पेंशन भुगतान के विस्तार को मंजूरी दे दी है, जो स्पर्श, {सिस्टम फॉर पेंशन एडमिनिस्ट्रेशन (रक्षा)} में चले गए थे और जिनकी पहचान नवंबर 2022 में होनी थी। यह दोहराया जाता है कि वार्षिक पहचान की प्रक्रिया /जीवन प्रमाणन मासिक पेंशन के निरंतर और समयबद्ध क्रेडिट के लिए एक वैधानिक आवश्यकता है। इस प्रकार सभी रक्षा पेंशनभोगियों, जिन्होंने अभी तक अपनी वार्षिक पहचान पूरी नहीं की है, से अनुरोध है कि वे फरवरी 2023 तक अपनी वार्षिक पहचान/जीवन प्रमाणीकरण को पूरा करें ताकि उनकी पेंशन पात्रता को सुचारू रूप से दोबारा पक्का किए जाने का कार्य और उसका क्रेडिट सुनिश्चित किया जा सके।

वार्षिक पहचान/जीवन प्रमाणन निम्नलिखित माध्यमों से किया जा सकता है:

  1. एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण ऑनलाइन/जीवन प्रमाण फेस ऐप के माध्यम से।

· स्थापना और उपयोग का विवरण यहां पाया जा सकता है: https://jeevanpramaan.gov.in/package/documentdowload/JeevanPramaan_FaceApp_3.6_Installation

· स्पर्श पेंशनभोगी: कृपया स्वीकृति प्राधिकरण को “रक्षा – पीसीडीए (पी) इलाहाबाद” और वितरण प्राधिकरण को “स्पर्श – पीसीडीए (पेंशन) इलाहाबाद” के रूप में चुनें।

  1. पेंशनभोगी https://sparsh.defencepension.gov.in/ पर लॉग इन करके वार्षिक पहचान/जीवन प्रमाणन पूरा कर सकते हैं और निम्न का विकल्प चुन सकते हैं:

· अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित मैन्युअल लाइफ सर्टिफिकेट (एमएलसी) को डाउनलोड और अपलोड करें,

· आधार आधारित डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) का चयन करके

  1. पेंशनभोगी अपनी वार्षिक पहचान/जीवन प्रमाणन को पूरा करने के लिए आ भी सकते हैं

निम्नलिखित एजेंसियों पर स्थापित निकटतम सेवा केंद्र पर प्रमाणन की सुविधा है:

· सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) – अपने निकटतम सीएससी को खोजने के लिए यहां क्लिक करें: https://findmycsc.nic.in/

· निकटतम डीपीडीओ या रक्षा लेखा विभाग सेवा केंद्र।

· एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक द्वारा स्थापित सेवा केंद्र ।

· रक्षा खाता विभाग या बैंकों में उपलब्ध स्पर्श सेवा केंद्रों का पता लगाने के लिए यहां क्लिक करें – https://sparsh.defencepension.gov.in/?page=serviceCentreLocator

  1. लेगेसी पेंशनभोगी (2016 से पूर्व सेवानिवृत्त) जो अभी तक स्पर्श में माइग्रेट नहीं हुए हैं, वे अपना जीवन प्रमाणन ठीक उसी तरह कर सकते हैं जैसा कि पिछले वर्षों में उनके द्वारा किया जा रहा था। जीवन प्रमाण के माध्यम से जीवन प्रमाणन करने के लिए, उन्हें संबंधित स्वीकृति प्राधिकरण को “रक्षा – संयुक्त सीडीए (एएफ) सुब्रतो पार्क” या रक्षा – पीसीडीए (पी) इलाहाबाद” या “रक्षा – पीसीडीए (नौसेना) मुंबई के रूप में तथा संवितरण प्राधिकरण संबंधित पेंशन संवितरण बैंक/डीपीडीओ इत्यादि को चुनना होगा ।

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गड्ढा मुक्त सड़कों का अभियान दोबारा फेल

*कानपुर

गड्ढा मुक्त सड़कों का अभियान एक बार फिर हुआ फेल

कमिश्नर राज शेखर और जिलाधिकारी विशाखा जी ने बैठक कर सभी अधिकरियों को 30 नवंबर तक टूटी सड़कों को ठीक करने के दिए थे दिशानिर्देश

गोविंद नगर विधानसभा पनकी क्षेत्र की पनकी थाना रोड और स्वराज नगर रोड समेत तमाम सड़के आज भी गड्डो में है तब्दील

आवागमन में कई बार बाइक सवार गिर के हो चुके है चुटहिल जिम्मेदारों को नही है जनता की फिक्र

पनकी क्षेत्र में नमामि गंगे परियोजना के तहत बिछाई जा रही है सीवर लाइन

सीवर लाइन को डालने के लिए सड़कों को खोदा गया, सीवर लाइन पड़ने के बाद बनाई गई कुछ सड़के चंद महीनों में गड्डो में हुई तब्दील

क्षेत्रीय जनता का आरोप, ठेकेदार ने सड़क निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री का किया इस्तेमाल

मंत्री,सासंद,विधायक भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश सरकार का देते करते रहे दावा, ठेकेदार ने सड़क निर्माण कार्य मे भ्रष्टाचार कर डाला

भ्रष्ट अधिकारियों से मिलीभगत कर ठेकेदार ने सड़क निर्माण कार्य मे भ्रष्टाचार कर योगी सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश की मंशा को दिखाया ठेंगा

तेजतर्रार कमिश्नर राज शेखर और जिलाधिकारी विशाखा जी ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और ठेकेदार पर कब और क्या करेंगे कार्यवाही

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मातृ मृत्यु दर(एमएमआर) में महत्वपूर्ण गिरावट आई, प्रति लाख 2014-16 में 130 से घटकर 2018-20 में 97 जीवित प्रसव: डॉ. मनसुख मांडविया

देश में एक नया मील का पत्थर हासिल किया गया है और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस उपलब्धि पर देशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को प्रभावी ढंग से कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की प्रशंसा की और एक ट्वीट संदेश में कहा:
मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में महत्वपूर्ण गिरावट आई, प्रति लाख 2014-16 में 130 से घटकर 2018-20 में 97 जीवित प्रसव हो रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण मातृ और प्रसव देखभाल सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य नीतियों व पहल ने एमएमआर को नीचे लाने में जबरदस्त तरीके से सहायता की है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) द्वारा एमएमआर पर जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, भारत में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में 6 अंकों का शानदार सुधार हुआ है और अब यह प्रति लाख/97 जीवित प्रसव पर है। मातृ मृत्यु दर(एमएमआर) को प्रति 100,000 जीवित प्रसव पर एक निश्चित समय अवधि के दौरान मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है। नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, देश ने एमएमआर में प्रगतिशील तरीके से कमी देखी है। यह 2014-2016 में 130, 2015-17 में 122, 2016-18 में 113, 2017-19 में 103 और 2018-20 में 97 रहा है, जिस तरह से यह नीचे दर्शाया गया है:

चित्र 1: 2013 -2020 से एमएमआर दर में महत्वपूर्ण गिरावट

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image003U5TZ.png

इसे प्राप्त करने पर, भारत ने 100/लाख से कम जीवित प्रसव के एमएमआर के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) लक्ष्य को हासिल कर लिया है और 2030 तक 70/लाख जीवित प्रसव से कम एमएमआर के एसडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सही रास्ते पर है।
सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) लक्ष्य हासिल करने वाले राज्यों की संख्या के संदर्भ में हुई उत्कृष्ट प्रगति के बाद यह अब केरल (19) के साथ छह से बढ़कर आठ हो गई है, इसके बाद महाराष्ट्र (33), तेलंगाना (43), आंध्र प्रदेश (45), तमिलनाडु (54), झारखंड (56), गुजरात (57) और अंत में कर्नाटक (69) का स्थान है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत, वर्ष 2014 से भारत ने सुलभ गुणवत्ता वाली मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने के लिए एक ठोस प्रयास किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने विशेष रूप से निर्दिष्ट एमएमआर लक्ष्यों को पूरा करने हेतु मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निवेश किया है। “जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम” और “जननी सुरक्षा योजना” जैसी सरकारी योजनाओं को संशोधित किया गया है और इन्हें सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) जैसी अधिक सुनिश्चित एवं सम्मानजनक सेवा वितरण योजनाओं में अपग्रेड किया गया है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले गर्भधारण की पहचान करने और उनके उचित प्रबंधन को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित है। रोकी जा सकने वाली मृत्यु दर को कम करने पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। लक्ष्य और मिडवाइफरी पहल सभी गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने का विकल्प सुनिश्चित करते हुए एक सम्मानजनक तथा गरिमापूर्ण तरीके से गुणवत्तापूर्ण देखभाल को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
एमएमआर दर को सफलतापूर्वक कम करने में भारत के उत्कृष्ट प्रयास वर्ष 2030 के निर्धारित समय से पहले 70 से कम एमएमआर के एसडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने और सम्मानजनक मातृ देखभाल प्रदान करने वाले राष्ट्र के रूप में माने जाने पर एक आशावादी दृष्टिकोण उपलब्ध कराते हैं।

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संयुक्त सैन्य अभ्यास ”ऑस्‍ट्रा हिन्‍द–22” में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सेना की टुकड़ी भारत पहुंची

”ऑस्‍ट्रा हिन्द–22” द्विपक्षीय सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना की टुकड़ियों के बीच 28 नवंबर से 11 दिसंबर 2022 तक महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (राजस्थान) में आयोजित होने वाला है। ऑस्‍ट्रा हिन्‍द श्रृंखला का यह पहला अभ्यास है, जिसमें दोनों देशों की सेनाओं के सभी अंगों एवं सेवाओं की टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। ऑस्ट्रेलिया की सेना में सेकेंड डिवीजन की 13वीं ब्रिगेड के सैनिक अभ्‍यास स्थल पर पहुंच चुके हैं, जबकि भारतीय सेना का नेतृत्व डोगरा रेजिमेंट के सैनिक कर रहे हैं। ऑस्‍ट्रा हिन्द सैन्य अभ्यास प्रत्येक वर्ष भारत और ऑस्ट्रेलिया में बारी-बारी से आयोजित किया जाएगा।

इस द्विपक्षीय सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास का उद्देश्‍य सकारात्‍मक सैन्‍य संबंध बढ़ाना और एक-दूसरे की बेहतरीन सैन्य कार्य-प्रणालियों को अपनाना है। साथ ही इसका लक्ष्‍य संयुक्‍त राष्‍ट्र शांति स्‍थापना प्रतिबद्धता के तहत अर्ध-मरूस्‍थलीय देशों में शांति अभियानों को चलाने के लिए एक साथ कार्य करने की क्षमता को बढ़ावा देना है। यह संयुक्त अभ्यास दोनों सेनाओं को शत्रुओं के खतरों को बेअसर करने के उद्देश्य से कंपनी और प्लाटून स्तर पर सामरिक संचालन करने के लिए रणनीति, तकनीक एवं प्रक्रियाओं हेतु सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों को साझा करने में सक्षम बनाएगा। बटालियन/कंपनी स्तर पर आकस्मिक दुर्घटना प्रबंधन, दुर्घटना से उबरना एवं रसद नियोजन के अलावा स्थितिजन्य जागरूकता के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए स्निपर, निगरानी व संचार उपकरण सहित नई पीढ़ी के उपकरण तथा विशेषज्ञ हथियार संचालन के प्रशिक्षण की भी योजना है।

द्विपक्षीय सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक संयुक्त योजना, संयुक्त सामरिक अभ्यास, विशेष हथियारों के कौशल की मूल बातें साझा करने और शत्रुओं के लक्ष्य पर हमला करने जैसी विभिन्न गतिविधियों में शामिल होंगे। संयुक्त अभ्यास, दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ एवं पारस्परिकता को बढ़ावा देने के अलावा, भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों को मजबूत करने में और मदद करेगा।

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पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के साथ साझेदारी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के द्वारा महासागरों के अध्ययन के लिए तीसरी पीढ़ी के भारतीय उपग्रह, जिसे औपचारिक रूप से भू प्रेक्षण उपग्रह-6 (ईओएस-6) नाम दिया गया है, को लॉन्च किया गया

पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के साथ साझेदारी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) के अपने फर्स्ट लॉन्च पैड से अन्य उपग्रहों के साथ महासागरों पर नजर रखने के लिए तीसरी पीढ़ी के भारतीय उपग्रह जिसे औपचारिक रूप से भू प्रेक्षण उपग्रह-6  (ईओएस-6) का नाम दिया गया है, को लॉन्च किया।

महासागरों के अध्ययन का ये मिशन क्रमशः 1999 और 2009 में लॉन्च किए गए ओशनसैट-1 या आईआरएस-पी4 ​​और ओशनसैट-2 का अगला कदम है। भरोसेमंद प्रक्षेपण यान पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन) की 56वीं उड़ान (पीएसएलवी-एक्सएल संस्करण की 24वीं उड़ान) के जरिए उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया था। पीएसएलवी-सी54 के रूप में डिजाइन किए गए आज के प्रक्षेपण में ओशनसैट-3 के साथ अन्य छोटे उपग्रहों को भी भेजा गया।

ओशनसैट-3 को समुद्र तल से करीब 740 किलोमीटर की ऊंचाई पर ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया। करीब 1100 किलोग्राम के वजन के साथ जबकि यह ओशनसैट -1 की तुलना में सिर्फ थोड़ा सा ही भारी है, इस श्रृंखला में पहली बार इसमें 3 निगरानी सेंसर यानि ओशन कलर मॉनिटर (ओसीएम-3), सी सर्फेस टेंपरेचर मॉनिटर (एसएसटीएम) और केयू बैंड स्कैट्रोमीटर (एससीएटी-3) लगाए गए हैं। इसमें एक एआरजीओएस पेलोड भी है। भारत की ब्लू इकोनॉमी से जुड़ी आकांक्षाओं के लिए इन सभी सेंसर का अपना खास महत्व है।

360 मीटर स्थानिक रेज़लूशन और 1400 किमी चौड़ी पट्टी पर नजर रखने की क्षमता के साथ उन्नत 13 चैनल ओसीएम रोजाना पृथ्वी के दिन पक्ष का निरीक्षण करेगा और समुद्री शैवाल के वितरण पर महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करेगा जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर खाद्य श्रृंखला का आधार है। उम्मीद है कि उच्च सिग्नल-टू-नॉइज अनुपात के साथ ओसीएम-3 फाइटोप्लांकटन की दैनिक निगरानी, मत्स्य संसाधन के प्रबंधन, महासागरों के द्वारा कार्बन अवशोषण, हानिकारक शैवाल में तेज बढ़त की चेतावनी और जलवायु अध्ययन सहित परिचालन और अनुसंधान संबधी अनुप्रयोगों की विस्तृत श्रृंखला में पहले से बेहतर सटीकता प्रदान करेगा।

एसएसटीएम समुद्र की सतह के तापमान की जानकारी देगा जो मछलियों के समूह से लेकर चक्रवात उत्पत्ति और उनकी चाल सहित विभिन्न पूर्वानुमान प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण महासागरीय मानदंड है। प्रवाल भित्तियों के स्वास्थ्य की निगरानी और यदि आवश्यक हो, प्रवाल विरंजन की चेतावनी प्रदान करने के लिए तापमान एक प्रमुख मानदंड है। ईओएस-6 पर स्थापित केयू-बैंड पेंसिल बीम स्कैट्रोमीटर समुद्र की सतह पर उच्च रिजॉल्यूशन विंड वेक्टर (गति और दिशा) प्रदान करेगा, एक ऐसी जानकरी जिसके बारे में कोई भी नाविक जानना चाहेगा, चाहे वह मछुआरा हो या शिपिंग कंपनी। पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार के लिए समुद्र और मौसम के मॉडल में तापमान और हवा के आंकड़े जोड़ने बेहद महत्वपूर्ण हैं। एआरजीओएस एक संचार पेलोड है जिसे फ्रांस के साथ संयुक्त रूप से विकसित किया गया है और इसका उपयोग लो-पावर (ऊर्जा-कुशल) संचार के लिए किया जाता है, जिसमें समुद्र में मौजूद रोबोटिक फ़्लोट्स (ऑर्ग फ़्लोट्स), मछलियों पर लगने वाले टैग, ड्रिफ्टर्स और खोज और बचाव कार्यों के प्रभावी संचालन में उपयोगी संकट चेतावनी उपकरण शामिल हैं।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री, डॉ जितेंद्र सिंह ने जम्मू से एक संदेश में सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो और एमओईएस टीमों को बधाई और धन्यवाद दिया।

माननीय मंत्री ने कहा, जबकि इसरो उपग्रह की कक्षा और आंकड़े पाने और उन्हे सुरक्षित रखने आदि से जुड़ी मानक प्रक्रियाओं को जारी रखेगा, इस उपग्रह के प्रमुख परिचालन उपयोगकर्ता एमओईएस के संस्थान जैसे भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस), हैदराबाद और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र नोएडा होंगे जो कि देश भर में लाखों हितधारकों को हर दिन कई तरह की सेवाएं प्रदान करते हैं।

डॉ जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि इस उद्देश्य के लिए, आईएनसीओआईएस ने राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र (इसरो-एनआरएससी), हैदराबाद के तकनीकी सहयोग से अपने परिसर के भीतर एक अत्याधुनिक उपग्रह डेटा रिसेप्शन ग्राउंड स्टेशन भी स्थापित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह समुद्र का निरीक्षण भारत की ब्लू इकोनॉमी और ध्रुवीय क्षेत्र की नीतियों के लिए मजबूत आधार के रूप में काम करेगा।

एमओईएस के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने इसरो को बधाई देते हुए कहा कि ओशनसैट-3 का आज का प्रक्षेपण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यूएन सतत विकास के लिए महासागर विज्ञान का दशक (यूएनडीओएसएसडी, 2021-2030) की शुरुआत के बाद से यह भारत की ओर से किया जाने वाला पहला प्रमुख महासागरीय उपग्रह प्रक्षेपण है। उन्होंने कहा, इस उपग्रह में महासागर के रंग, एसएसटी और समुद्री सतह की हवाओं का समवर्ती मापन करने की क्षमता होगी, और उम्मीद है कि ये महासागर दशक के उद्देश्यों को पूरा करने में दुनिया भर के वैज्ञानिक और परिचालन समुदायों की सागर को समझने की क्षमताओं को एक महत्वपूर्ण बढ़त प्रदान करेगा।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युवाओं से मजबूत और आत्मनिर्भर ‘न्यू इंडिया’ के लिए नवाचार करने: नई प्रौद्योगिकियों का विकास करने तथा कंपनियों की स्थापना करने का आह्वान किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री  मोदी के मजबूत एवं आत्मनिर्भर ‘न्‍यू इंडिया’ के सपने को साकार करने के लिए युवाओं से नवाचार करने, नई तकनीकों को विकसित करने और कंपनियों, अनुसंधान प्रतिष्ठानों तथा स्टार्ट-अप की स्थापना करने का आह्वान किया है। 18 नवंबर, 2022 को कर्नाटक के उडुपी में मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (एमएएचई) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया देश के उज्ज्वल युवा दिमाग की ताक़त को स्वीकार कर रही है एवं गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब व आईबीएम जैसी प्रमुख कंपनियां भारतीयों को सम्मानजनक पदों पर नियुक्त कर रही हैं।

रक्षा मंत्री ने यहां उपस्थित लगभग 5,000 छात्रों से पूछते हुए उनसे आत्मनिरीक्षण कर देश में एक सुधारवादी परिवर्तन लाने का आग्रह किया कि, “यदि भारतीय दुनिया भर में प्रमुख फर्मों को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं, तो हम यहां शीर्ष कंपनियों की स्थापना क्यों नहीं कर सकते?” उन्होंने भारतीय स्टार्ट-अप पारितंत्र की बढ़ती ताकत का श्रेय युवाओं की क्षमताओं, प्रतिभा एवं उज्ज्वल मस्तिष्क को दिया। उन्होंने कहा, “पहले देश में कोई स्टार्ट-अप इकोसिस्टम नहीं था। वर्ष 2014 से पहले लगभग 400-500 स्टार्टअप थे। आज यह संख्या 70,000 को पार कर गई है। इनमें से 100 से अधिक यूनिकॉर्न बन गए हैं।”

श्री राजनाथ सिंह ने छात्रों से केवल किताबों से जानकारी प्राप्त करने से अधिक ज्ञान प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “किताबों से ज्ञान प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है। बुद्धिमत्ता उस ज्ञान का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करती है, जो कि देश को अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण है। यह अक्षमता, गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन जैसी सीमाओं से मुक्त करती है। यह हमारी सोच और संवेदनाओं के दायरे को विस्तृत करती है। यह व्यक्ति को स्वार्थ से ऊपर उठकर सामाजिक, राष्ट्रीय व वैश्विक कल्याण के लिए काम करने में मदद करती है।”

रक्षा मंत्री ने छात्रों से देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होने और इसके गौरवशाली अतीत को पुनर्स्थापित करने का प्रयास करने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा, “भारत विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों में अग्रणी था। विदेशी आक्रमणों के कारण इसने धीरे-धीरे अपना गौरव खो दिया। हमें अपने अतीत के गौरव को बहाल करना चाहिए, जिसके लिए आर्थिक प्रगति केंद्रीय है।” राजनाथ सिंह ने वर्तमान युग को ज्ञान-प्रधान और निरंतर विकसित होने वाला युग बताते हुए देश के विकास के लिए  महत्वपूर्ण मानव पूंजी की गुणवत्ता और मात्रा को उन्नत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश को आगे ले जाने में तकनीकी क्षमताएं तथा नागरिकों की नवोन्मेषी प्रवृत्ति सबसे निर्णायक कारक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार युवाओं को उचित शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर रक्षा मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य पारंपरिक और आधुनिक ज्ञान के माध्यम से युवा पीढ़ी को वैश्विक नागरिक के रूप में अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि, “युवा हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति और विकास का इंजन है। हमारी युवा सेना 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अमेरिकी बैंकिंग समूह मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले 5-6 वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। भारत की इस उभरती शक्ति को ‘वंस इन ए जेनरेशन शिफ्ट’ की संज्ञा दी गई है। यह सिर्फ शुरुआत है। मुझे विश्वास है कि भारत 2047 तक सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।” प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की बदली हुई वैश्विक छवि पर अधिक प्रकाश डालते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नई दिल्ली को अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ध्यान और गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने कहा, “भारत ने आतंकवाद जैसे मुद्दों पर दुनिया का नेतृत्व किया है और इस खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए समर्थन हासिल करने में सफल रहा है। आतंकवाद को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाले देश अब भारत की क्षमताओं से भली-भांति परिचित हैं। भारत न तो किसी देश को भड़काता है और जो इसकी एकता एवं अखंडता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है उसको बख्शता भी नहीं है। “क्षा मंत्री ने शिक्षा एवं अनुसंधान में योगदान के लिए मणिपाल ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की सराहना की। उन्होंने स्नातक करने वाले छात्रों को बधाई दी,  उन्हें बेहतर भविष्य बनाने के लिए बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विश्वास जताते हुए छात्राओं को विशेष बधाई दी कि वे एक मजबूत और समृद्ध ‘न्यू इंडिया’ के स्तंभ होंगी।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य लोगों में एमएएचई के प्रो-चांसलर डॉ. हेब्री सुभाषकृष्ण बल्लाल, वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) एमडी वेंकटेश (सेवानिवृत्त) और महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नासिक के वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) माधुरी कानिटकर (सेवानिवृत्त) शामिल थे।

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