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राजनीति

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कार्यान्वयन

सरकार ने 2021-22 से 2025-26 तक की अवधि के लिए 69,515.71 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ 2025-26 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) को जारी रखने की अनुमति दे दी है।

देश में खरीफ 2016 सीजन से शुरू की गई पीएमएफबीवाई सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उपलब्ध है। यह राज्यों के साथ-साथ किसानों के लिए भी स्वैच्छिक है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी जोखिम धारणा और वित्तीय विचारों आदि को ध्यान में रखते हुए इस योजना के तहत सदस्यता लेने के लिए स्वतंत्र हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने एक या अधिक मौसमों में इस योजना को लागू किया है। वर्तमान में 23 राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश इस योजना का कार्यान्वयन कर रहे हैं।

बीमा मॉडल का चयन, पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से बीमा कंपनियों का चयन, किसानों का नामांकन, स्वीकार्य दावों की गणना के लिए फसल उपज/फसल हानि का आकलन जैसे सभी प्रमुख कार्य संबंधित राज्य सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों और संबंधित बीमा कंपनी की संयुक्त समिति द्वारा किए जा रहे हैं। इस योजना के उचित कार्यान्वयन के लिए प्रत्येक हितधारक की भूमिका और जिम्मेदारियां योजना के परिचालन दिशानिर्देशों में परिभाषित की गई हैं।

बीमा कंपनियों द्वारा योजना के परिचालन दिशानिर्देशों के तहत निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिकांश दावों का निपटारा किया जाता है। हालांकि, पीएमएफबीवाई के कार्यान्वयन के दौरान, बीमा कंपनियों के खिलाफ दावों का भुगतान न करने और/या देरी से भुगतान करने, बैंकों द्वारा बीमा प्रस्तावों को गलत/देरी से प्रस्तुत करने के कारण दावों का कम भुगतान करने, उपज के आंकड़ों में विसंगति और इसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार और बीमा कंपनियों के बीच विवाद, राज्य सरकार के हिस्से की धनराशि प्रदान करने में देरी, बीमा कंपनियों द्वारा पर्याप्त कर्मियों की तैनाती न करने आदि के बारे में कुछ शिकायतें पहले प्राप्त हुई थीं, जिन्हें योजना के प्रावधानों के अनुसार उचित रूप से दूर किया गया।

चूंकि यह योजना राज्य सरकार द्वारा कार्यान्वित की जाती है, इसलिए बीमित किसानों के दावों से संबंधित शिकायतों सहित शिकायतों के समाधान के लिए, योजना के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देशों में स्तरीकृत शिकायत निवारण तंत्र अर्थात जिला स्तरीय शिकायत निवारण समिति (डीजीआरसी), राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी) का प्रावधान किया गया है। इन समितियों को परिचालन दिशा-निर्देशों में उल्लिखित विस्तृत अधिदेश दिए गए हैं, ताकि शिकायतों की सुनवाई की जा सके और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका निपटान किया जा सके।

शिकायत निवारण तंत्र को और बेहतर बनाने के लिए, कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन (केआरपीएच) विकसित की गई है। अखिल भारतीय टोल फ्री नंबर 14447 शुरु किया गया है और इसे बीमा कंपनियों के डेटाबेस से जोड़ा गया है, जहाँ किसान अपनी शिकायतें/मुद्दे उठा सकते हैं। इन शिकायतों/मुद्दों के समाधान के लिए समयसीमा भी तय की गई है।

विभाग सभी हितधारकों के साथ साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंस, व्यक्तिगत बैठक तथा राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलनों के माध्यम से दावों के समय पर निपटान सहित बीमा कंपनियों के कामकाज की नियमित निगरानी कर रहा है।

प्राप्त अनुभव, विभिन्न हितधारकों के विचारों के आधार पर तथा बेहतर पारदर्शिता, जवाबदेही, किसानों के दावों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और योजना को अधिक किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से, सरकार ने समय-समय पर पीएमएफबीवाई के परिचालन दिशा-निर्देशों को व्यापक रूप से संशोधित किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजना के तहत पात्र लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचे।

यह जानकारी आज लोकसभा में लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने दी।

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अमरीकी टैरिफ का प्रभाव

अमरीकी ने 12 मार्च 2025 से सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (एमएफएन) के आधार पर इस्‍पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत सरकार पारस्परिक रूप से लाभकारी और निष्पक्ष तरीके से द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को बढ़ाने और व्यापक बनाने के लिए अमरीकी सरकार के साथ बातचीत जारी रखे हुए है।

इस्पात एक विनियमन-मुक्त क्षेत्र है और सरकार देश में इस्पात क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल बनाकर एक सुगमताप्रदानकर्ता के रूप में कार्य करती है। व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) घरेलू उद्योग द्वारा दायर विधिवत प्रमाणित आवेदन के आधार पर कस्‍टमज़ टैरिफ अधिनियम, 1975 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत डंपिंग रोधी जांच करता है, जिसमें देश में माल की डंपिंग के कारण घरेलू उद्योग को नुकसान होने का आरोप लगाया जाता है। डंपिंग रोधी उपायों का मूल उद्देश्य डंपिंग के अनुचित व्यापार व्यवहार से घरेलू उद्योग को होने वाली क्षति को खत्म करना और घरेलू उद्योग के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना है।

भारत में अन्य देशों से इस्पात की बढ़ती डंपिंग से संबंधित चिंताओं को संबोधित करने के लिए, कुछ इस्पात उत्पादों जैसे कि सीमलेस ट्यूब, पाइप और आयरन लोहे के हॉलो प्रोफाइलज़, मिश्र धातु या गैर-मिश्र धातु इस्पात (कच्चा लोहा और स्टेनलेस स्टील के अलावा) (चीन से), इलेक्ट्रो-गैल्वेनाइज्ड इस्‍पात (कोरिया आरपी, जापान, सिंगापुर से), स्टेनलेस-स्टील सीमलेस ट्यूब और पाइप (चीन से), वेल्डेड स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब (वियतनाम और थाईलैंड से) से संबंधित डंपिंग रोधी ड्यूटी संबंधी उपाय (एडीडी) वर्तमान में लागू हैं।

सरकार ने घरेलू इस्पात निर्माताओं की सुरक्षा और भारत के इस्पात उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:-

i. चीन और वियतनाम से वेल्डेड स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब के लिए प्रतिसंतुलक शुल्‍क (सीवीडी) लागू है।

ii. केंद्रीय बजट 2024-25 में, घरेलू विनिर्माताओं को समर्थन देने और घरेलू इस्पात विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित उपाय किए गए:-

a. फेरो-निकेल और मोलिब्डेनम अयस्कों और सांद्रों पर मूल कस्‍टमज़ ड्यूटी (बीसीडी) को 2.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है, जो इस्पात उद्योग के लिए कच्चा माल हैं।

b. फेरस स्क्रैप पर बीसीडी छूट 31.03.2026 तक जारी रखी गई है।

c. कोल्ड रोल्ड ग्रेन ओरिएंटेड (सीआरजीओ) इस्‍पात के निर्माण के लिए निर्दिष्ट कच्चे माल पर छूट 31.3.2026 तक जारी रखी गई है। इसके अतिरिक्‍त, टैरिफ मद 7226 11.00 के अंतर्गत आने वाले सीआरजीओ इस्‍पात के निर्माण के लिए ऐसे निर्दिष्ट कच्चे माल पर भी छूट बढ़ा दी गई है।

iii. सरकारी खरीद के लिए ‘मेड इन इंडिया’ इस्‍पात को बढ़ावा देने के लिए घरेलू रूप से निर्मित लौह एवं इस्पात उत्पाद (डीएमआई एंड एसपी) नीति।

iv. देश के भीतर ‘स्पेशलिटी स्टील’ के विनिर्माण को बढ़ावा देने और पूंजी निवेश को आकर्षित करके आयात को कम करने के लिए स्पेशलिटी स्टील के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना। स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना के तहत अनुमानित अतिरिक्त निवेश 27,106 करोड़ रुपये है, जिसमें स्पेशलिटी स्टील के लिए लगभग 24 मिलियन टन (एमटी) की डाउनस्ट्रीम क्षमता का निर्माण शामिल है।

v. इस्‍पात गुणवत्ता नियंत्रण आदेश की शुरूआत, जिससे घरेलू बाजार में घटिया/दोषपूर्ण इस्‍पात उत्पादों के साथ-साथ आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सके, ताकि संबंधित उद्योग, उपयोगकर्ताओं और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण इस्‍पात की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इस आदेश के अनुसार, यह सुनिश्चित किया गया कि अंतिम उपयोगकर्ताओं को प्रासंगिक बीआईएस मानकों के अनुरूप केवल गुणवत्ता वाले इस्‍पात ही उपलब्ध कराए जाएं। आज की तारीख तक, कार्बन इस्‍पात, मिश्र धातु इस्‍पात और स्टेनलेस स्टील को शामिल करते हुए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के तहत 151 भारतीय मानक अधिसूचित हैं।

सरकार एमएसएमई के संवर्धन और विकास के लिए विभिन्न योजनाएं/कार्यक्रम कार्यान्वित कर रही है, जिनमें सूक्ष्म और लघु उद्यम – परिवर्तन के लिए हरित निवेश और वित्तपोषण योजना (एमएसई-जीआईएफटी योजना), परिपत्र अर्थव्यवस्था में संवर्धन और निवेश के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यम योजना (एमएसई-एसपीआईसीई योजना), एमएसएमई चैंपियंस योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), एमएसएमई समाधान, सूक्ष्म और लघु उद्यम – क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) आदि शामिल हैं।

इस्पात एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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सरकार ने इस्पात आयात आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू इस्पात निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के लिए कदम उठाए

इस्पात एक विनियमन-मुक्त क्षेत्र है। और इस्पात की कीमतें बाजार की शक्तियों की मांग-आपूर्ति गतिशीलता द्वारा निर्धारित होती हैं। सरकार देश में छोटे और मध्यम उत्पादकों सहित इस्पात क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल बनाकर एक सुविधाकर्ता के रूप में कार्य करती है। सरकार ने इस्पात आयात में कमी लाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू इस्पात निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:-

(i) देश के भीतर ‘स्पेशलिटी स्टील’ के विनिर्माण को बढ़ावा देने और पूंजी निवेश को आकर्षित करके आयात को कम करने के लिए स्पेशलिटी स्टील के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का शुभारंभ।

(ii) इस्पात गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों की शुरुआत, जिससे घरेलू बाजार में घटिया/दोषपूर्ण इस्पात उत्पादों के साथ-साथ आयात पर प्रतिबंध लगाया जा सके, ताकि उद्योग, उपयोगकर्ताओं और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण इस्पात मिल सके।

(iii) कुछ स्टील उत्पादों जैसे कि सीमलेस ट्यूब, पाइप और लोहे, मिश्र धातु या गैर-मिश्र धातु स्टील (कास्ट आयरन और स्टेनलेस स्टील के अलावा) (चीन पीआर से), इलेक्ट्रो-गैल्वेनाइज्ड स्टील (कोरिया आरपी, जापान, सिंगापुर से), स्टेनलेस-स्टील सीमलेस ट्यूब और पाइप (चीन पीआर से), वेल्डेड स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब (वियतनाम और थाईलैंड से) से संबंधित एंटी डंपिंग ड्यूटी (एडीडी) उपाय वर्तमान में लागू हैं।

(iv) चीन और वियतनाम से वेल्डेड स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब के लिए काउंटरवेलिंग ड्यूटी (सीवीडी) लागू है।

(v) फेरो-निकेल और मोलिब्डेनम अयस्कों और सांद्रता पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) को 2.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है जो इस्पात उद्योग के लिए कच्चा माल हैं।

इस्पात और भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी।

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कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस-95) के अंतर्गत लाभ

कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस-95) आकस्मिकताओं की एक विस्तृत श्रृंखला को शामिल करते हुए व्यापक लाभ प्रदान करती है, जो सदस्यों और उनके परिवारों की वृद्धावस्था के दौरान सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है। ईपीएस के तहत उपलब्ध पेंशन और निकासी लाभों की विभिन्न श्रेणियां इस प्रकार हैं:
  • 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति पर सदस्य पेंशन।
  • 50 वर्ष की आयु से प्रारंभिक सदस्य पेंशन।
  • सेवा के दौरान स्थायी एवं पूर्ण विकलांगता पर विकलांगता पेंशन।
  • सदस्य या पेंशनभोगी की मृत्यु पर विधवा/विधुर पेंशन।
  • सदस्य की मृत्यु पर 25 वर्ष की आयु तक एक समय में 2 बच्चों के लिए बाल पेंशन।
  • यदि परिवार में कोई जीवनसाथी न हो या जीवनसाथी की मृत्यु हो जाए तो सदस्य की मृत्यु पर 25 वर्ष की आयु तक एक बार में 2 अनाथ बच्चों को अनाथ पेंशन दी जाएगी।
  • विकलांग बच्चे/अनाथ के सम्पूर्ण जीवन के लिए विकलांग बच्चा/अनाथ पेंशन।
  • सदस्य की मृत्यु पर नामित व्यक्ति को पेंशन दी जाएगी तथा ईपीएस, 1995 के तहत यदि कोई परिवार नहीं है तो सदस्य द्वारा विधिवत् नामित व्यक्ति को आजीवन भुगतान किया जाएगा।
  • सदस्य की मृत्यु पर आश्रित पिता/माता को पेंशन, बशर्ते सदस्य का कोई परिवार या नामित व्यक्ति न हो।
  • सेवा से बाहर निकलने या सेवानिवृत्ति पर निकासी लाभ, बशर्ते सदस्य ने पेंशन के लिए पात्र सेवा प्रदान न की हो।

कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस-95) के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने वाले कुल पेंशनभोगियों की वर्षवार संख्या का विवरण नीचे दिया गया है:

वर्ष ईपीएस-95 के अंतर्गत कुल पेंशनभोगी
2019-20 6682717
2020-21 6919823
2021-22 7273898
2022-23 7558913
2023-24 7849338

 

यह जानकारी केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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होली पर खुशियों का उपहार, डबल इंजन की सरकार

*होली पर खुशियों का उपहार, डबल इंजन की सरकार*

*होली और दीपावली पर निःशुल्क सिलेण्डर रिफिल की सुविधा।*

*जनपद कानपुर नगर में उज्ज्वला योजना के लाभार्थी 1,90,356*

*जनपद में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को कुल 15,57,11,208 करोड़ की सिलेंडर रिफिल सब्सिडी दी गई है*

मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा आज दिनांक 12.03.2025 को प्रातः 10:00 बजे से लोकभवन, लखनऊ में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को निःशुल्क गैस सिलेण्डर रिफिल सब्सिडी के वितरण कार्यक्रम का सजीव प्रसारण सरसैया घाट नवीन सभागार में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में जनपद के उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
उक्त कार्यक्रम में मा० मंत्री, उच्च शिक्षा, विभाग, उत्तर प्रदेश/प्रभारी मंत्री कानपुर नगर ( योगेन्द्र उपाध्याय जी) द्वारा प्रतिभाग किया गया। मंत्री द्वारा जनपद के 10 प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को निःशुल्क गैस सिलेण्डर रिफिल की सब्सिडी का प्रतीकात्मक चेक वितरण किया गया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य स्वप्निल वरुण, बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा,
पूर्व विधायक रघुनंदन भदौरिया,जिला अध्यक्ष,उत्तर दीपू पांडे,जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, अपर जिलाधिकारी आपूर्ति, जिला आपूर्ति अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

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विकास की गति को बढ़ावा देने वाला बजट है सर्वव्यापी : केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र

कानपुर 17 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता केंद्रीय बजट विषय पर कानपुर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार दादानगर में आयोजित संगोष्ठी में केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार खटिक ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की । इस दौरान सांसद रमेश अवस्थी सहित बड़ी संख्या में उद्यमी, व्यापारी व चार्टर्ड अकाउंटेंट ने विशेष रूप से शिरकत की। मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डाक्टर वीरेंद्र कुमार खटिक ने कहा कि सरकार आम लोगो के लिए क्या कदम उठा रही है और क्या लाभकारी योजनाएं चला रही है इसको आम जनमानस को रूबरू कराने के मकसद से संपूर्ण देश में अलग अलग स्थानों पर संगोष्ठियां आयोजित की जा रही है । उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बजट विकास की गति को बढ़ावा देने वाला बजट है , इससे देश का परिदृश्य बदला है । मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार के मुताबिक 2013-14 में अनुसूचित जाति कल्याण वर्ग का बजट जो 4031 करोड़ पर था , वह इस बार 10378 करोड रुपए का रखा गया है । यह दर्शाता है की मोदी जी की अगुवाई वाली सरकार सभी के लिए कितनी गतिशील और प्रयत्नशील है । उन्होंने कहा कि लोगों में अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है । शिक्षा का क्षेत्र हो या रेलवे हो । कृषि की बात हो या एमएसएमई सेक्टर हो चाहे मध्यम वर्ग । सरकार सभी की सुख सुविधाओं का ध्यान रख रही है इसलिए यह साफ़ तौर पर कहा जा सकता है की इस बार का बजट सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी बजट है

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा के लिए आज नई दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की। ये बैठकें 4 और 5 फरवरी 2025 को भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठकों की कड़ी में आयोजित की गईं। केंद्रीय गृह सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठकों में शामिल हुए।

 

 

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ‘आतंकवाद मुक्त जम्मू-कश्मीर’ के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आतंक मुक्त जम्मू-कश्मीर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अर्धसैनिक बलों की भूमिका पर बल दिया। गृह मंत्री ने बीएसएफ को कड़ी निगरानी, बॉर्डर ग्रिड को मजबूत करने और निगरानी तथा सीमा सुरक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से ‘जीरो घुसपैठ’ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

 

अमित शाह ने सीआरपीएफ को भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ तालमेल जारी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने सीआरपीएफ की शीतकालीन कार्य योजना की समीक्षा की और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि एरिया डोमिनेशन में कोई कमी न रहे। श्री शाह ने जम्मू क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने और ऊँचाई वाले क्षेत्रों पर दबदबा बनाने का भी निर्देश दिया।

 

गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे खुफिया तंत्र की भी समीक्षा की और उन्हें गुणवत्तापूर्ण खुफिया जानकारी उत्पन्न करने के लिए कवरेज और पैठ बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने ख़ुफ़िया जानकारी उत्पन्न करने के लिए प्रौद्योगिकी के महत्व को दोहराया। श्री शाह ने कहा कि आतंक-वित्तपोषण की निगरानी, नार्को-आतंकवादी मामलों पर कड़ी पकड़ और जम्मू-कश्मीर में पूरे terror ecosystem को खत्म करना मोदी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ‘Zero Terror Plan’ के लिए मजबूत कदम उठाये जा रहे हैं।

 

गृह मंत्री ने राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा किए जा रहे नकारात्मक प्रचार का मुकाबला करने पर ध्यान केंद्रित करने का भी निर्देश दिया ताकि लोगों के सामने सही तस्वीर पेश की जा सके। उन्होंने एजेंसियों के बीच तालमेल जारी रखने के निर्देश दिए और टेक्नोलॉजी अपनाने तथा इंटेलिजेंस बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया।

 

अमित शाह ने सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने के लिए तालमेल के साथ काम जारी रखने का निर्देश दिया। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि इस प्रयास में सभी संसाधन उपलब्ध कराये जाएंगे।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वार्षिक एनसीसी पीएम रैली को संबोधित किया

प्रधानमंत्री मोदी ने आज दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में वार्षिक राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) पीएम रैली को संबोधित किया। श्री मोदी ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का अवलोकन किया और सर्वश्रेष्ठ कैडेट पुरस्कार प्रदान किये। एनसीसी दिवस के अवसर पर उपस्थित लोगों को बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 18 मित्र देशों के लगभग 150 कैडेट यहां उपस्थित हैं और उन्होंने उनका स्वागत किया। उन्होंने मेरा युवा भारत (माई भारत) पोर्टल के माध्यम से वर्चुअली जुड़ने वाले देश भर के युवाओं को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा, “गणतंत्र दिवस परेड के लिए चुना जाना अपने आप में एक उपलब्धि है।” उन्होंने कहा कि इस वर्ष का गणतंत्र दिवस विशेष है क्योंकि एक गणतंत्र के रूप में भारत ने 75 वर्ष पूरे कर लिये हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये यादें जीवन भर  साथ रहेंगी और कैडेट इस महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनने पर गर्व महसूस करेंगे। उन्होंने पुरस्कार जीतने वाले कैडेटों को बधाई दी। यह बताते हुए कि आज उन्हें एनसीसी के कई अभियानों को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे अभियान भारत की विरासत को युवाओं की आकांक्षाओं से जोड़ते हैं। उन्होंने इन अभियानों में शामिल सभी कैडेटों को शुभकामनाएं दीं।

श्री मोदी ने कहा कि एनसीसी की स्थापना लगभग भारत की आजादी के समय ही हुई थी। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि एनसीसी की यात्रा देश के संविधान से भी पहले शुरू हो गयी थी। श्री मोदी ने कहा कि गणतंत्र के 75 वर्षों की अवधि में, संविधान ने लोकतंत्र को प्रेरित किया है और नागरिक कर्तव्यों के महत्व पर जोर दिया है। इसी तरह, एनसीसी ने भी भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दी है और उन्हें अनुशासन का महत्व सिखाया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सरकार ने हाल के वर्षों में एनसीसी के दायरे और जिम्मेदारियों का विस्तार करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। उन्होंने कहा कि एनसीसी का विस्तार सीमावर्ती क्षेत्रों और तटीय जिलों तक कर दिया गया है और 170 से अधिक सीमावर्ती तालुकाओं तथा लगभग 100 तटीय तालुकाओं में अब एनसीसी की उपस्थिति है। श्री मोदी ने इन जिलों में युवा एनसीसी कैडेटों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी लेने के लिए तीनों सशस्त्र बलों को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों युवाओं को लाभ हुआ है। यह बताते हुए कि एनसीसी में किए गये सुधारों का प्रभाव कैडेटों की बढ़ी हुई संख्या से स्पष्ट है, श्री मोदी ने कहा कि 2014 में लगभग 14 लाख एनसीसी कैडेट थे और आज यह संख्या 20 लाख तक पहुंच गई है। इनमें बालिका कैडेटों की संख्या 8 लाख से अधिक है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एनसीसी कैडेट आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और खेल की दुनिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि एनसीसी दुनिया का सबसे बड़ा वर्दीधारी युवा संगठन है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवा 21वीं सदी में देश और दुनिया के विकास का निर्धारण करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “भारत के युवा सिर्फ भारत के विकास में ही योगदान नहीं दे रहे हैं, बल्कि वे वैश्विक कल्याण की एक शक्ति भी हैं”। समाचार पत्रों में हाल ही में प्रकाशित इस आशय की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कि पिछले दशक में भारतीय युवाओं ने 1.5 लाख स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न बनाए हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि 200 से अधिक उन प्रमुख वैश्विक कंपनियों का नेतृत्व भारतीय मूल के लोग कर रहे हैं, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में खरबों रुपये का योगदान दे रहीं हैं और लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर रहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षक वैश्विक प्रगति को गति दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में, भारत के युवाओं की प्रतिभा एवं उनके सामर्थ्य के बिना दुनिया के भविष्य की कल्पना करना कठिन है और यही कारण है कि वह उन्हें ‘वैश्विक कल्याण की एक शक्ति’ के रूप में संदर्भित करते हैं।

इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि किसी व्यक्ति या देश की ताकत तभी बढ़ती है जब अनावश्यक बाधाएं दूर होती हैं, प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पिछले 10 वर्षों में, भारत में युवाओं के सामने आने वाली कई बाधाएं दूर की गईं हैं, जिससे युवाओं और देश, दोनों की क्षमताओं में वृद्धि हुई है।. उन्होंने कहा कि 2014 में, कई युवा लगभग 10-12 वर्ष के रहे होंगे और उन्हें अपने परिवार से उस समय की स्थितियों के बारे में पूछना चाहिए। प्रधानमंत्री ने दस्तावेज़ सत्यापन का एक उदाहरण दिया, जहां पहले प्रवेश, परीक्षा और भर्तियों के लिए दस्तावेज़ों को एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित करना पड़ता था, जिससे काफी परेशानी होती थी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने अब दस्तावेजों के स्व-सत्यापन की अनुमति देकर इस समस्या का हल कर दिया है। उन्होंने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने एवं उसे हासिल करने में युवाओं के सामने आने वाली कठिनाइयों और छात्रवृत्ति निधि के वितरण में आने वाली कई समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एकल-खिड़की प्रणाली की शुरूआत ने इन पुरानी समस्याओं को समाप्त कर दिया है। विषय चयन से संबंधित एक अन्य प्रमुख समस्या की ओर इशारा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि पहले बोर्ड परीक्षा के बाद एक बार विषय चुन लेने के बाद उसे बदलना कठिन होता था, लेकिन अब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यार्थियों को अपनी पसंद के अनुसार विषय बदलने की सुविधा प्रदान की है।

यह बताते हुए कि एक दशक पहले युवाओं के लिए बैंक से आसानी से ऋण प्राप्त करना कठिन  था क्योंकि बैंक ऋण देने से पहले गारंटी मांगते थे, श्री मोदी ने कहा कि जब वह 2014 में प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया कि वह देश के युवाओं के लिए इसकी जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुद्रा योजना शुरू की, जो बिना बैंक गारंटी के ऋण प्रदान करती है। इस योजना के बारे में विस्तार से बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि शुरुआत में, 10 लाख रुपये तक का ऋण बिना गारंटी के दिया जाता था और सरकार के तीसरे कार्यकाल में, यह सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछले 10 वर्षों में, मुद्रा योजना के तहत 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गई है, जिससे लाखों युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिली है।

युवाओं के भविष्य के लिए चुनावी प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि दो दिन पहले राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया और कई युवा पहली बार मतदाता बने। उन्होंने कहा कि मतदाता दिवस का उद्देश्य मतदाताओं की अधिकतम भागीदारी को प्रोत्साहित करना है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव कराया जाता है, लेकिन हर कुछ महीनों में होने वाले निरंतर चुनाव चुनौतियां पैदा करते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन यह पैटर्न बदल गया, जिससे देश के लिए महत्वपूर्ण समस्याएं पैदा हो गईं। श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लगातार चुनावों के लिए मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की आवश्यकता होती है और इसमें कई कार्य शामिल होते हैं, जिससे अक्सर शिक्षकों के कर्तव्य, पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनावों से शासन संबंधी कठिनाइयां भी पैदा होती हैं और इसलिए, देश में वर्तमान में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा को लेकर बहस चल रही है।  प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के युवाओं से इस बहस में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव उनके भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में नई सरकार बनाने की तारीख नियत होती है और हर चार साल में चुनाव होते हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह कॉलेजों या स्कूलों में छात्र परिषद के चुनाव एक ही बार में पूरे हो जाते हैं। उन्होंने युवाओं को हर कुछ महीनों में होने वाले चुनाव से उनकी पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सोचने और “एक राष्ट्र, एक चुनाव” को लेकर चल रही बहस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह बताते हुए कि 21वीं सदी की दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के साथ सामंजस्य बनाए रखना आवश्यक है, श्री मोदी ने इस परिवर्तन में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में, चाहे वह कला हो, अनुसंधान हो या फिर नवाचार, युवाओं को अपने अभिनव विचारों एवं रचनात्मकता के माध्यम से नई ऊर्जा का समावेश करना चाहिए।  प्रधानमंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में राजनीति के महत्व पर प्रकाश डाला और युवाओं को नए सुझावों एवं नवीन विचारों के साथ राजनीति में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है। उन्होंने लाल किले से एक लाख युवाओं को राजनीति में शामिल होने के अपने आह्वान को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं की शक्ति का उल्लेख किया, जैसा कि “विकसित भारत: युवा नेता संवाद” के दौरान देखा गया। उन्होंने कहा कि देश भर के लाखों युवाओं ने विकसित भारत के निर्माण के संबंध में बहुमूल्य सुझाव दिए हैं और अपने विचार व्यक्त किए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, हर पेशे के लोगों का एक ही लक्ष्य था – भारत की आजादी। उन्होंने कहा कि इसी तरह इस अमृत काल में ‘विकसित  भारत’ ही हमारा एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर निर्णय एवं कार्य को इस लक्ष्य की कसौटी पर कसना चाहिए। प्रधानमंत्री ने पंच प्रण को याद रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। ये प्रण हैं: विकसित भारत का निर्माण करना, गुलामी की मानसिकता से खुद को मुक्त करना, अपनी विरासत पर गर्व करना, भारत की एकता के लिए काम करना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना। उन्होंने कहा कि ये पांच प्रण हर भारतीय का मार्गदर्शन करेंगे और उन्हें प्रेरणा देंगे। श्री मोदी ने इस कार्यक्रम के दौरान पेश की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की प्रशंसा की और कहा कि ये प्रस्तुतियां “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को दर्शाती हैं, जो देश की एक महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने प्रयाग में चल रहे महाकुंभ को “एकता का कुंभ” बताते हुए कहा कि यह भी देश की एकता का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की प्रगति के लिए यह एकता आवश्यक है।

अपने कर्तव्यों को सदैव याद रखने के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि एक भव्य एवं दिव्य विकसित भारत की नींव कर्तव्यों के आधार पर ही रखी जायेगी। अपने संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने देश के कैडेटों एवं युवाओं को प्रेरित करने के लिए अपनी लिखी कुछ पंक्तियों को याद किया और सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर, केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री श्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह और रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

इस वर्ष गणतंत्र दिवस शिविर में कुल 2361 एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया, जिसमें 917 बालिका कैडेट शामिल थीं। यह बालिका कैडेटों की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी थी। पीएम रैली में इन कैडेटों की भागीदारी नई दिल्ली में एक महीने तक चलने वाले एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2025 के सफल समापन का प्रतीक है। इस वर्ष की एनसीसी पीएम रैली की थीम ‘युवा शक्ति, विकसित भारत’ थी।

इस दिन 800 से अधिक कैडेटों द्वारा राष्ट्र निर्माण के प्रति एनसीसी की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। 18 मित्र देशों के 144 युवा कैडेटों की भागीदारी ने इस वर्ष की रैली से संबंधित उत्साह में वृद्धि की।

एनसीसी पीएम रैली में देश भर से मेरा युवा (माई) भारत, शिक्षा मंत्रालय और जनजातीय कार्य के 650 से अधिक स्वयंसेवक भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

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पीएम सूर्याघर का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनने के लिए सशक्त बनाना है: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री सौरघर-मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य नागरिकों को ऊर्जा उत्पादक बनाकर उन्हें सशक्त बनाना है, साथ ही डिस्कॉम को बिजली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। मंत्री महोदय नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए आमंत्रित नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के 750 विशेष अतिथियों को संबोधित कर रहे थे।केंद्रीय मंत्री ने कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, आम लोग अब भारत की अक्षय ऊर्जा क्रांति के केंद्र में हैं। उनका काम, समर्पण और सफलता इस बात का सबूत है कि हम एक राष्ट्र के रूप में क्या हासिल कर सकते हैं। पीएम सूर्यघर और पीएम कुसुम के लाभार्थी भारत के अक्षय ऊर्जा आंदोलन के असली राजदूत हैं।” उन्होंने देश की अक्षय ऊर्जा यात्रा में नेतृत्व करने के लिए उनकी सराहना भी की।

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देश के विभिन्न भागों से पीएम सूर्याघर और पीएम कुसुम के लाभार्थियों ने इस अवसर पर बात की। उन्होंने समय पर प्राप्त होने वाली सब्सिडी, बिना किसी हस्तक्षेप के पीएम सूर्याघर पोर्टल पर आसानी से पंजीकरण कराने और इसके कारण बिजली बिल शून्य होने और भारी बचत की सराहना की।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कर्नाटक के धारवाड़ में, पीएम सूर्य घर के एक लाभार्थी ने सौर ऊर्जा अपनाकर शून्य बिजली बिल प्राप्त किया। केंद्र सरकार से ₹78,000 की सब्सिडी के साथ, यह सफलता की कहानी पूरे देश में टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल समाधानों को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को उजागर करती है।”उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के पीएम कुसुम लाभार्थी राकेश रोही ने बताया कि पीएम कुसुम योजना से लाभान्वित होने के बाद उन्होंने अपने खेत में सोलर पंप लगवाए हैं। इससे उनकी उपज में काफी सुधार हुआ है।

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एमएनआरई के विशेष अतिथियों ने पीएम संग्रहालय का दौरा किया और गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव निधि खरे ने कहा कि मंत्रालय योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए लाभार्थियों से सीखने और उन्हें सुनने के लिए हमेशा तत्पर है। इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव ललित बोहरा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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भारत की बेटियों को सशक्त बनाना

हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई प्रत्येक विकास पहल में हम बालिकाओं को सशक्त बनाने और अपनी नारी शक्ति को मजबूत करने को अत्यधिक प्राथमिकता देते हैं। हमारा ध्यान बालिकाओं के लिए सम्मान के साथ-साथ अवसर सुनिश्चित करने पर है।‘-  नरेन्द्र मोदीप्रधानमंत्रीभारत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 22 जनवरी2015 को हरियाणा के पानीपत में शुरू की गई बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना कार्यान्वयन का एक दशक पूरा कर रही है। भारत सरकार की इस प्रमुख पहल का उद्देश्य घटते बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) को दूर करना और लिंग-आधारित लिंग-चयनात्मक उन्मूलन को रोकना और बालिकाओं के अस्तित्व, संरक्षण और शिक्षा को बढ़ावा देना है। यह योजना भारत सरकार की सबसे प्रभावशाली सामाजिक उपक्रमों में से एक बन गई है।

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मिशन शक्ति के साथ एकीकरण

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बीबीबीपी योजना अब 2021-2022 से 2025-2026 तक 15वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान कार्यान्वयन के लिए महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक कार्यक्रम मिशन शक्ति के साथ एकीकृत है। मिशन शक्ति में दो व्यापक उप-योजनाएं शामिल हैं।

1. संबल : सुरक्षा एवं संरक्षा

मिशन शक्ति की संबल उप-योजना वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) महिला हेल्पलाइन (181) और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह नारी अदालत की भी शुरुआत करता है, जो उत्पीड़न और अधिकारों के उल्लंघन जैसे छोटे मुद्दों को हल करने के लिए एक वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र प्रदान करता है।

2. सामर्थ्य : सशक्तिकरण

सामर्थ्य उप-योजना शक्ति सदनों, राहत और पुनर्वास घरों, सखी निवास के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाती है, जो शहरों में कामकाजी महिलाओं के लिए रहने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करती है। साथ ही पालना-क्रेच कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) अब दूसरे बच्चे के लड़की होने पर भी मदद करती है, जिससे मातृ स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह गर्भावस्था और प्रसव के कारण काम करने वाली महिलाओं को आर्थिक रूप से होने वाले नुकसान की भरपाई भी करता है।

यह योजना अब बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण पर जोर देती है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल विकास और सामुदायिक जागरूकता शामिल है। पिछले एक दशक में, बीबीबीपी ने कई मंत्रालयों के बीच सहयोग के माध्यम से अपना दायरा बढ़ाया है।

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प्रमुख उद्देश्य

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प्राथमिक उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • लिंग-पक्षपाती लिंग-चयनात्मक उन्मूलन को रोकना।
  • बालिकाओं का अस्तित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • बालिकाओं की शिक्षा एवं भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में हर साल दो अंक का सुधार।
  • संस्थागत प्रसव के प्रतिशत में सुधार या 95% या उससे अधिक की दर पर कायम रहना।
  • प्रति वर्ष पहली तिमाही प्रसव-रोधी देखभाल (एएनसी) पंजीकरण में 1% की वृद्धि।
  • माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के बीच स्कूल छोड़ने की दर की जांच करना।
  • सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

फोकस क्षेत्र और लक्ष्य समूह

यह योजना मुख्य रूप से निम्नलिखित पर केंद्रित है:

  • प्राथमिक लक्ष्य समूह:
  • युवा और नवविवाहित जोड़े, जो माता-पिता बनने की उम्मीद में हैं
  • किशोर (लड़कियां और लड़के) और युवा
  • घर-परिवार और समाज
  • द्वितीयक लक्ष्य समूह:
  • स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र (एडब्ल्यूसीएस),
  • मेडिकल डॉक्टर/पेशेवर, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर आदि।
  • पंचायत राज संस्थान (पीआरआई), शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी), अधिकारी, फ्रंटलाइन वर्कर्स
  • महिला समूह और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और नागरिक समाज संगठन
  • मीडिया, धार्मिक गुरु और उद्योग विशेषज्ञ

वित्तीय और परिचालन संरचना

बीबीबीपी एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसमें मिशन शक्ति के संबल वर्टिकल के तहत देश के सभी जिलों में केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषण किया जाता है।

वित्तीय सहायता जिलों में जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी) के आधार पर भिन्न होती है:

  • 918 से कम या उसके बराबर एसआरबी वाले जिलों के लिए 40 लाख रुपये प्रति वर्ष।
  • 919-952 के बीच एसआरबी वाले जिलों के लिए 30 लाख रुपये।
  • 952 से अधिक एसआरबी वाले जिलों के लिए 20 लाख रुपये।

प्रमुख विकास

अभियान की सफलता लैंगिक असमानताओं को दूर करने की दिशा में की गई प्रगति से स्पष्ट है, जिसमें समाज पर इसके सकारात्मक प्रभाव को दर्शाने वाले प्रभावशाली आंकड़े हैं।

1. जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार (एसआरबी)

  • 2014-15 में 918 के एसआरबी से, 2022-23 में राष्ट्रीय एसआरबी बढ़कर 933 हो गया (स्रोत: एचएमआईएस, एमओएचएफडब्ल्यू)। यह लगातार वृद्धि लिंग-अनुपात को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाली लिंग-पक्षपाती प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने में बीबीबीपी के सामूहिक प्रभाव को दर्शाती है।

2. माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों के नामांकन में वृद्धि

  • माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, लड़कियों के लिए सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2014-15 में 75.51% से बढ़कर 2021-22 में 79.4% हो गया है। (स्रोत: यू-डीआईएसई प्लस, एमओई)। यह बीबीबीपी के शैक्षिक प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।

3. संस्थागत प्रसव में वृद्धि

  • बीबीबीपी ने महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवा में सुधार पर भी जोर दिया। संस्थागत प्रसव 2014-15 में 87% से बढ़कर 2019-20 तक 94% से अधिक हो गया, जिससे कई क्षेत्रों में माताओं और शिशुओं के लिए सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हुआ, जो मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में आवश्यक रहा है।

4. जागरूकता अभियान

  • बालिकाओं वाले पिताओं पर लक्षित ‘सेल्फी विद डॉटर्स’ जैसे विशिष्ट अभियानों ने देशव्यापी लोकप्रियता हासिल की।
  • बालिकाओं के जन्म का उत्सव मनाने के लिए सामाजिक स्तर की गतिविधियां जैसे ‘बेटी जन्मोत्सव’।

5. महिलाओं का कौशल एवं आर्थिक सशक्तिकरण

  • कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से बीबीबीपी ने युवा लड़कियों और महिलाओं के बीच कौशल विकास को बढ़ावा देने, उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में प्रगति की है। व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए  हैं। इस योजना ने अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा और कौशल विकास के लिए विशिष्ट पहल भी शुरू की।
  • ‘खेलो इंडिया’ जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य लड़कियों के बीच खेल प्रतिभा की पहचान करना और उसका पोषण करना है।

प्रमुख प्रयास

यह योजना दो प्रमुख घटकों के माध्यम से संचालित होती है:

बहु-क्षेत्रीय प्रयास

लड़कियों के बीच खेल को बढ़ावा देना, आत्मरक्षा शिविर, लड़कियों के शौचालयों का निर्माण, विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना, पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के बारे में जागरूकता फैलाना है।

जागरूकता अभियान एवं सामुदायिक सहभागिता

राष्ट्रीय बालिका दिवस (एनजीसीडी) प्रतिवर्ष 24 जनवरी को अभियानों, कार्यशालाओं और रचनात्मक प्रतियोगिताओं के साथ मनाया जाता है। एक क्रॉस-कंट्री बाइक अभियान, “यशस्विनी” देश की महिला शक्ति या नारी शक्ति का उत्सव मनाने के लिए 150 सीआरपीएफ महिला बाइक सवारों का एक समूह है। यह लड़कियों को समग्र रूप से सशक्त बनाने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता, आत्मरक्षा और लैंगिक समानता पर ध्यान केंद्रित करता है। स्वच्छता किटों के वितरण के साथ मासिक धर्म स्वच्छता पर कार्यशालाएं जैसे सामुदायिक संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

निष्कर्ष

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना ने भारत में लड़कियों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसने जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार करने, शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, स्वास्थ्य देखभाल का विस्तार करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सहयोग करने में मदद की है। सरकारी निकायों, गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के साथ काम करके, इस योजना ने प्रत्येक बालिका को महत्व देने और उसकी सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। जैसे-जैसे बीबीबीपी अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है, समावेशी नीतियों, बेहतर कार्यान्वयन और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से दीर्घकालिक परिवर्तन करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे लैंगिक समानता और सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रगति सुनिश्चित होगी।

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