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राजनीति

उपराष्ट्रपति ने साइबर अपराध के शिकार लोगों के लिए तत्काल कानूनी सहायता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज साइबर अपराध के शिकार लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, को कानूनी सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। देश में बढ़ती डिजिटल पहुंच के साथ-साथ साइबर अपराध की घटनाओं में वृद्धि का संज्ञान लेते हुए उन्होंने कहा कि यह एजेंसियों, जांचकर्ताओं, नियामकों और कानूनी समुदाय के लिए चिंता का एक नया क्षेत्र है, और इससे निपटने के लिए तकनीकी और मानवीय विशेषज्ञता विकसित करने का आह्वान किया।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आज वैश्विक आतंकवाद निरोधक परिषद (जीसीटीसी) द्वारा आयोजित तीसरे साइबर सुरक्षा सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि निर्दोष लोगों को धोखेबाज तत्वों द्वारा ठगा जा रहा है, और उन्होंने देश के सुदूर कोने में भी डेटा सुरक्षा जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।

वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी डिजिटल सोसाइटियों में से एक के रूप में भारत की प्रमुख स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, श्री धनखड़ ने जोर देकर कहा कि भारत में 820 मिलियन से अधिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और इसने 500 मिलियन से अधिक व्यक्तियों के लिए बैंकिंग समावेशन हासिल किया है। उन्होंने इस तथ्य की ओर भी ध्यान आकर्षित किया कि वर्ष 2023 तक वैश्विक डिजिटल लेन-देन में देश की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत होगी।

प्रौद्योगिकी की पहुंच सुनिश्चित करने में भारत की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया भारत में सेवा वितरण में प्रौद्योगिकी के बड़े पैमाने पर उपयोग को देखकर दंग है, निस्सन्देह गांव स्तर तक भी। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी आम आदमी के बीच एक प्रचलित शब्द बन रहा है, वह अपने लेन-देन को डिजिटल होने का आनंद लेता है।”

बाधाकारी प्रौद्योगिकियों की अपार संभावनाओं की चर्चा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी प्रौद्योगिकी का न केवल अर्थव्यवस्था, व्यवसाय या व्यक्तिगत उत्पादकता पर बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यह कहते हुए कि इन उभरती प्रौद्योगिकियों से उत्पन्न चुनौतियों को अवसरों में बदला जाना चाहिए, श्री धनखड़ ने उनकी सकारात्मक क्षमता का दोहन करने के लिए प्रणालियों को अद्यतन करने का आह्वान किया। उन्होंने देश के लाभ के लिए इन प्रगतियों को एकीकृत करने के लिए सक्रिय उपायों की आवश्यकता पर भी जोर दिया

आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए, श्री धनखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध पारंपरिक सीमाओं को पार कर गया है, जो भूमि, अंतरिक्ष और समुद्र से आगे बढ़कर नए तकनीकी क्षेत्रों में फैल गया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में किसी राष्ट्र की तैयारी उसकी वैश्विक क्षमता और रणनीतिक ताकत को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने यह भी बताया कि नरम कूटनीतिक शक्ति तेजी से किसी राष्ट्र की तकनीकी क्षमता पर निर्भर करती है।

भारत की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार के सक्रिय उपायों पर प्रकाश डालते हुए, श्री धनखड़ ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम की स्थापना और सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 को अपडेट करने सहित महत्वपूर्ण पहलों के कार्यान्वयन का उल्लेख किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये पहल, बढ़ी हुई सार्वजनिक-निजी भागीदारी के साथ, देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत देती हैं।

इस अवसर पर जीसीटीसी के सलाहकार प्रोफेसर वी.एम.बंसल, जीसीटीसी के कार्यकारी परिषद सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.सिंह और सुश्री नीरू अबरोल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण ने वित्त वर्ष 2024-25 के पहले 100 दिनों में जलपोत पर लदे 41.12 मिलियन मीट्रिक टन सामान का उत्कृष्ट प्रबंधन करने के साथ नया रिकॉर्ड बनाया

पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण (पीपीए) ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के पहले 100 दिनों के भीतर जलपोत पर लदे अभूतपूर्व 41.12 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) सामान का गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन करके अपने परिचालन इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस बंदरगाह के लिए कार्य क्षमता का यह उत्कृष्ट प्रदर्शन एक नया रिकॉर्ड स्थापित करता है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसी अवधि के दौरान प्राप्त 39.25 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो हैंडलिंग की तुलना में 4.78 प्रतिशत की बढ़ोतरी को प्रदर्शित करता है।

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इस तरह की शानदार सफलता भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने में बंदरगाह की महत्वपूर्ण भूमिका तथा इसकी परिचालन दक्षता और क्षमता बढ़ाने के लिए प्राधिकरण की अटूट प्रतिबद्धता को उजागर करती है।

पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण ने केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के गतिशील नेतृत्व व दूरदर्शी मार्गदर्शन में अपने परिचालन कार्यक्रम में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है और उत्कृष्ट दक्षता को प्रदर्शित करते हुए अपने पिछले मानदंडों को पार कर लिया है।

पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष पी.एल. हरनाध ने केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री की कार्य कुशलता के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय श्री सर्बानंद सोनोवाल के लगातार सहयोग और रणनीतिक मार्गदर्शन को दिया है।

यह उपलब्धि पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण की कार्गो हैंडलिंग व्यवस्था में नए मानक स्थापित करने और देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चूंकि पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण अपनी क्षमताओं को विस्तार देने तथा अपनी सेवाओं में सुधार करना जारी रखे हुए है, इसलिए यह भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को सहयोग देने और देश के आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के लिए समर्पित है।

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पीएलआई योजना के अंतर्गत दूरसंचार उपकरण विनिर्माण की बिक्री 50 हजार करोड़ रुपये के पार

प्रधानमंत्री मोदी के भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप, दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों तथा इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े पैमाने पर विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से देश में उत्पादन, रोजगार-सृजन, आर्थिक विकास और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

दूरसंचार पीएलआई योजना के तीन वर्षों के अंतराल में  इस योजना ने 3,400 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है। दूरसंचार उपकरण उत्पादन 50,000 करोड़ रुपये के उच्‍चतम स्‍तर को पार कर गया है, जिसमें लगभग 10,500 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। इससे 17,800 से अधिक प्रत्यक्ष और कई अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। यह उपलब्धि भारत के दूरसंचार विनिर्माण उद्योग की सुदृढ बढ़ोतरी और प्रतिस्पर्धात्मकता को रेखांकित करती है। यह सफलता सरकारी योजनाओं के माध्‍यम से मिली है, क्‍योंकि सरकार ने स्थानीय उत्पादन को प्रोत्‍साहन दिया और आयात निर्भरता को कम करने के लिए पहल की। पीएलआई योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना और भारत को दूरसंचार उपकरण उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह योजना भारत में निर्मित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री के आधार पर निर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान करती है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना मोबाइल फोन और उसके घटकों का विनिर्माण करती है। इस पीएलआई योजना के परिणामस्वरूप, भारत से मोबाइल फोन के उत्पादन और निर्यात दोनों में काफी तेजी आई है। 2014-15 में भारत, मोबाइल फोन का एक बड़ा आयातक था। उस समय देश में केवल 5.8 करोड़ यूनिट का उत्पादन होता था, जबकि 21 करोड़ यूनिट का आयात होता था, लेकिन सरकारी पहलों के माध्‍यम से 2023-24 में भारत में 33 करोड़ यूनिट का उत्पादन हुआ और केवल 0.3 करोड़ यूनिट का आयात हुआ और लगभग 5 करोड़ यूनिट का निर्यात हुआ। मोबाइल फोन के निर्यात का मूल्य 2014-15 में 1,556 करोड़ रुपये और 2017-18 में केवल 1,367 करोड़ रुपये था। यह 2023-24 में बढ़कर 1,28,982 करोड़ रुपये हो गया है। 2014-15 में मोबाइल फोन का आयात 48,609 करोड़ रुपये का था, जो 2023-24 में घटकर मात्र 7,665 करोड़ रुपये रह गया है।

भारत कई वर्षों से दूरसंचार उपकरणों का आयात करता रहा है, लेकिन मेक-इन-इंडिया और पीएलआई योजना के कारण संतुलन बदल गया है, जिससे देश में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के उपकरणों का उत्पादन हो रहा है।

मुख्य विशेषताएं दूरसंचार (मोबाइल को छोड़कर):

  • उद्योग वृद्धि : दूरसंचार उपकरण विनिर्माण क्षेत्र ने असाधारण वृद्धि की है, जिसमें पीएलआई कंपनियों की कुल बिक्री 50,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। आधार वर्ष (वित्त वर्ष 2019-20) की तुलना में वित्त वर्ष 2023-24 में पीएलआई लाभार्थी कंपनियों द्वारा दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों की बिक्री 370 प्रतिशत बढ़ी है।
  • रोजगार सृजन : इस पहल ने न केवल आर्थिक विकास में योगदान दिया है, बल्कि विनिर्माण से लेकर अनुसंधान और विकास तक मूल्य श्रृंखला में रोजगार के पर्याप्त अवसर भी सृजित किए हैं। इससे 17,800 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और कई अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।
  • आयात पर निर्भरता में कमी : स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देकर, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने आयातित दूरसंचार उपकरणों पर देश की निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप 60 प्रतिशत आयात पर असर पड़ा है और भारत एंटीना, गीगाबिट पैसिव ऑप्टिकल नेटवर्क (जीपीओएन) और ग्राहक परिसर उपकरण (सीपीई) में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है। आयात पर निर्भरता कम करने से राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ी है और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा : भारतीय निर्माता वैश्विक स्तर पर तेजी से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं तथा प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रस्‍तुत कर रहे हैं।

दूरसंचार उपकरणों में रेडियो, राउटर और नेटवर्क उपकरण जैसी जटिल वस्तुएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्‍त, सरकार ने कंपनियों को 5जी उपकरण बनाने के लिए कुछ अतिरिक्‍त लाभ दिए है। भारत में निर्मित 5जी दूरसंचार उपकरण वर्तमान में उत्तरी अमेरिका और यूरोप को निर्यात किए जा रहे हैं।

दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के लिए पीएलआई योजना और दूरसंचार विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित अन्य संबंधित पहलों के परिणामस्वरूप, दूरसंचार आयात और निर्यात के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। निर्यात की गई वस्तुओं (दूरसंचार उपकरण और मोबाइल दोनों को मिलाकर) का कुल मूल्य 1.49 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में आयात 1.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक था।

वास्‍तव में, पिछले पांच वर्षों में दूरसंचार (दूरसंचार उपकरण और मोबाइल दोनों को मिलाकर) में व्यापार घाटा 68,000 करोड़ रुपये से घटकर 4,000 करोड़ रुपये रह गया है। दोनों पीएलआई योजनाओं ने भारतीय निर्माताओं को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने, विशेष योग्यता और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने, दक्षता सुनिश्चित करने, उच्‍चतम स्‍तर की अर्थव्यवस्था निर्माण, निर्यात बढ़ाने और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला का अभिन्न अंग बनाने का शुभारंभ किया है। सरकार की पहल से शुरू की गई इन योजनाओं ने भारत के निर्यात बास्केट को पारंपरिक वस्तुओं से उच्च मूल्य वर्धित उत्पादों में परिवर्तित कर दिया है।

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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने जून 2024 के लिए केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों के प्रदर्शन की केन्‍द्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) पर 26वीं मासिक रिपोर्ट जारी की

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने जून, 2024 के लिए केन्‍द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) पर मासिक रिपोर्ट जारी की, जो लोक शिकायतों के प्रकार और श्रेणियों और निपटारे की प्रकृति का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करती है। यह डीएआरपीजी द्वारा प्रकाशित केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों पर 26वीं रिपोर्ट है।

जून, 2024 की प्रगति केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा 1,34,386 शिकायतों का निपटारा दर्शाती है। 1 जनवरी से 30 जून, 2024 तक केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों में औसत शिकायत निपटान समय 14 दिन है। ये रिपोर्ट 10-चरण की सीपीजीआरएएमएस सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसे निपटारे की गुणवत्ता में सुधार और समय सीमा को कम करने के लिए डीएआरपीजी द्वारा अपनाया गया था।

रिपोर्ट जून, 2024 के महीने में सभी चैनलों के माध्यम से सीपीजीआरएएमएस पर पंजीकृत नए उपयोगकर्ताओं का डेटा भी प्रदान करती है। जून, 2024 के महीने में कुल 64367 नए उपयोगकर्ता पंजीकृत हुए, जिनमें अधिकतम पंजीकरण असम (12467) से और उसके बाद उत्तर प्रदेश (8909) पंजीकरण हुए।

सीपीजीआरएएमएस को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पोर्टल के साथ जोड़ा गया है और यह 5 लाख से अधिक सीएससी पर उपलब्ध है, जो 2.5 लाख ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) से जुड़ा है। रिपोर्ट जून, 2024 में कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से पंजीकृत शिकायतों का राज्यवार विश्लेषण भी प्रदान करती है। जून, 2024 के महीने में सीएससी के माध्यम से 17,844 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें उन प्रमुख मुद्दों/श्रेणियों पर भी प्रकाश डाला गया है जिनके लिए सीएससी के माध्यम से अधिकतम शिकायतें दर्ज की गईं।

. जून, 2024 में फीडबैक कॉल सेंटर ने केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों के लिए 36905 जानकारियां एकत्र की, एकत्र की गई जानकारी में से, लगभग 52 प्रतिशत नागरिकों ने प्रदान किए गए समाधान पर संतुष्टि व्यक्त की। नागरिकों की संतुष्टि प्रतिशत के संबंध में पिछले 6 महीनों में केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों का प्रदर्शन भी उक्त रिपोर्ट में मौजूद है।

केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों की जून, 2024 के लिए डीएआरपीजी की मासिक सीपीजीआरएएमएस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  1. पीजी मामले:
  • जून 2024 में, सीपीजीआरएएमएस पोर्टल पर 139387 पीजी मामले प्राप्त हुए, 134386 पीजी मामलों का निवारण किया गया और 30 जून, 2024 तक 87323 पीजी मामले लंबित थे।
  • जून, 2024 में कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से कुल 17,844 शिकायतें दर्ज की गईं।
  1. पीजी अपीलें:
  • जून, 2024 में 15206 अपीलें प्राप्त हुईं और 14686 अपीलों का निपटारा किया गया।
  • जून 2024 के अंत तक केन्‍द्रीय सचिवालय में 23712 पीजी अपीलें लंबित थी।
  1. शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक (जीआरएआई) – जून, 2024
  • केन्‍द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग और डाक विभाग जून, 2024 के लिए ग्रुप ए (500 से अधिक शिकायतों के बराबर) के भीतर शिकायत निवारण मूल्यांकन और सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।
  • नीति आयोग, भूमि संसाधन विभाग और निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग जून, 2024 के लिए ग्रुप बी (500 से कम शिकायतें) के अंतर्गत शिकायत निवारण मूल्यांकन एवं सूचकांक में शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं।

रिपोर्ट में उन मंत्रालयों/विभागों की श्रेणियों पर भी प्रकाश डाला गया है जिनके लिए जून, 2024 के महीने में अधिकतम शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें ग्रामीण विकास विभाग, श्रम और रोजगार मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग (बैंकिंग प्रभाग), कृषि और किसान कल्याण विभाग, और केन्‍द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (आयकर) शामिल हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च रूसी नागरिक पुरस्कार मिलना अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कुशलता से संचालित करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में फिक्की की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के रूस के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित होने की उपलब्धि की सराहन की। श्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत किस तरह से अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कुशलता से संचालित करने में सक्षम रहा है। श्री गोयल ने उद्योग जगत से भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने को कहा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि वे हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते के तहत 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए स्विट्जरलैंड का दौरा करेंगे। श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि यह प्रतिबद्धता पूरी तरह से एफडीआई को लेकर हमारी प्रतिबद्धता है और इसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेश शामिल नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि साझेदारी बनाने में भारतीय उद्योग के सामूहिक प्रयास से एफडीआई से जुड़ी प्रतिबद्धता पर ईएफटीए समझौते से भी आगे बढ़कर कार्य किया जा सकता है।

श्री पीयूष गोयल ने कहा कि उद्योग के तेजी से विकास के साथ-साथ सरकार 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात के लक्ष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। श्री गोयल ने कहा, “यह संभव है, इसे हासिल किया जा सकता है। हमारे पास सही आधारशिलाएं हैं, हमारे पास हमारा समर्थन करने के लिए मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक्स हैं। देश की मुद्रा स्थिर है और इसने अधिकांश अन्य उभरते बाजारों से बेहतर प्रदर्शन किया है।” उन्होंने कहा कि स्थिर सरकार, स्थिर बाजार, स्थिर अर्थव्यवस्था और सामूहिक ऊर्जा में पुनरुत्थान के साथ, देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिकांश वैश्विक मंचों पर एक उज्ज्वल स्थान के रूप में महत्व दिया जा रहा है।

श्री पीयूष गोयल ने कहा कि पिछले एक साल में 1 लाख से अधिक पेटेंट पंजीकृत किए गए हैं, जो 2014 से पेटेंट पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में नवाचार के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय प्रतिस्पर्धी मानकों के साथ गुणवत्ता मानक और गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जुड़े हुए हैं, जो भारत को लागत की दृष्टि से प्रतिस्पर्धी बनाने में सक्षम साबित करेंगे और सरकार को घटिया उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश करने से रोकने में मदद करेंगे।

श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए तीन गुना अधिक गति, तीन गुना अधिक काम और तीन गुना अधिक परिणाम लाने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि सरकार सुधार के कार्य पर दृढ़ता से प्रतिबद्ध है, जो नागरिकों की आय के स्तर को बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को विकसित करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगले पांच वर्षों के लिए जल जीवन मिशन के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सड़क और रेल संपर्क, बिजली, पाइप्ड गैस कनेक्शन, प्रत्येक घर के लिए पानी की कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया जा रहा है।

श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचे का तेजी से रोलआउट उद्योग की जरूरतों के साथ गहराई से मेल खाता है, क्योंकि रोजगार, अर्थव्यवस्था और विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग पर इसका कई गुना प्रभाव पड़ता है। उन्होंने विस्तार से बताया कि बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने से विनिर्माण और रसद में तेजी के मामले में भारत की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है, लेकिन इससे सरकार को कम सुविधा प्राप्त वर्गों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाकर समाज में एक बेहतर संतुलन लाने में मदद मिलेगी। यह एक एक ऐसा विजन है, जिस पर प्रधानमंत्री श्री मोदी पिछले दस वर्षों से काम कर रहे हैं।

श्री गोयल ने कहा कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवा का विस्तार, जल जीवन मिशन की सफलता, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन करोड़ मुफ्त घर और शहरी क्षेत्रों में मलिन बस्तियों के इन-सीटू पुनर्वास के प्रयास इस कार्यकाल के दौरान सरकार के एजेंडे का हिस्सा हैं। श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इंडिया पहल और विनिर्माण में निवेश से मिलने वाले रोजगार या उद्यमिता के अवसरों के साथ ये बुनियादी सुविधाएं जल्द ही भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देंगी।

उन्होंने कहा कि सरकार अनुपालन संबंधी अत्यधिक बोझ को कम करने, जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से कानूनों को अपराधमुक्त करने और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने के ऐसे अन्य उपायों के माध्यम से भारतीय निवेश यात्रा को आसान बनाने की कोशिश कर रही है। श्री गोयल ने उद्योग जगत से और अधिक सक्रिय होने तथा हितधारकों के समक्ष आने वाली बाधाओं को सामने लाने तथा भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार के साथ जुड़ने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के बारे में चर्चा करते हुए, श्री गोयल ने कहा कि सरकार स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा उन्होंने उपस्थित लोगों से पेड़ लगाने का आग्रह किया। श्री गोयल ने यह भी कहा कि बांस का स्थिरता पर कितना जबरदस्त प्रभाव है, क्योंकि यह ऑक्सीजन पैदा कर सकता है तथा कार्बन का अवशोषण भी करता है। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक पहलों पर गौर करने के लिए प्रोत्साहित किया, जो प्लास्टिक के उपयोग को कम करने में मदद करेंगे तथा उद्योग जगत से इस आंदोलन को देश के अंतिम व्यक्ति तक ले जाने के प्रयास में भागीदार बनने का आग्रह किया।

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वर्ष 2030 तक की अवधि के लिए रूस-भारत आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के संबंध में नेताओं का संयुक्त वक्तव्य

8-9 जुलाई, 2024 को मॉस्को में रूस और भारत के बीच आयोजित 22वें वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के बाद, रूसी संघ के राष्ट्रपति महामहिम श्री व्लादिमीर पुतिन और भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने,

द्विपक्षीय व्यावहारिक सहयोग और रूस-भारत विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के विकास के वर्तमान मुद्दों पर विचारों का गहन आदान-प्रदान करके,

पारस्परिक सम्मान और समानता के सिद्धांतों का दृढ़ता से पालन करते हुए, पारस्परिक रूप से लाभप्रद एवं दीर्घकालिक आधार पर दोनों देशों के संप्रभु विकास,

रूस-भारत व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देकर द्विपक्षीय बातचीत को गहरा करने हेतु अतिरिक्त प्रोत्साहन देने,

दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार की गतिशील वृद्धि के रूझान को बनाए रखने के इरादे और 2030 तक इसकी मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने की इच्छा से निर्देशित,

निम्नलिखित बातों की घोषणा की:

रूसी संघ और भारत गणराज्य, जिन्हें इसके आगे “दोनों पक्षों” के रूप में संदर्भित किया जाएगा, के बीच निम्नलिखित नौ प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करते हुए द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग विकसित करने की योजना है:

1. भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित गैर-शुल्क व्यापार बाधाओं को समाप्त करने की आकांक्षा। ईएईयू-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना की संभावना सहित द्विपक्षीय व्यापार के उदारीकरण के मामले में बातचीत जारी रखना। संतुलित द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को हासिल करने हेतु भारत से माल की आपूर्ति में वृद्धि सहित 2030 तक (पारस्परिक सहमति के अनुरूप) 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के पारस्परिक व्यापार की उपलब्धि को हासिल करना। दोनों पक्षों की निवेश संबंधी गतिविधियों को पुनर्जीवित करना, यानी विशेष निवेश संबंधी व्यवस्थाओं के ढांचे के भीतर।

2. राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करके द्विपक्षीय निपटान प्रणाली का विकास। आपसी निपटान में डिजिटल वित्तीय साधनों का निरंतर समावेश।

3. उत्तर-दक्षिण अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारे, उत्तरी समुद्री मार्ग और चेन्नई-व्लादिवोस्टक समुद्री लाइन के नए मार्गों के शुभारंभ के जरिए भारत के साथ कार्गो कारोबार में वृद्धि। माल की बाधा रहित आवाजाही हेतु कुशल डिजिटल प्रणालियों के अनुप्रयोग के जरिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का अधिकतम उपयोग।

4. कृषि उत्पादों, खाद्य और उर्वरकों के क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा में वृद्धि। पशु चिकित्सा, स्वच्छता और पादप स्वच्छता संबंधी प्रतिबंधों व निषेधों को हटाने के उद्देश्य से गहन संवाद को जारी रखना।

5. परमाणु ऊर्जा, तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल सहित प्रमुख ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग तथा ऊर्जा संबंधी बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकियों एवं उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग व साझेदारी का विस्तारित रूप में विकास। वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, पारस्परिक और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुविधाजनक बनाना।

6. बुनियादी ढांचे के विकास, परिवहन इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल उत्पादन एवं जहाज निर्माण, अंतरिक्ष तथा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बातचीत को ठोस रूप देना। सहायक कंपनियों एवं औद्योगिक समूहों का निर्माण करके भारतीय और रूसी कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों में प्रवेश की सुविधा प्रदान करना। मानकीकरण, माप-पद्धति (मेट्रोलॉजी) और अनुरूपता मूल्यांकन के क्षेत्र में दोनों पक्षों के दृष्टिकोण का समन्वय।

7. डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं अनुसंधान, शैक्षिक आदान-प्रदान के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश एवं संयुक्त परियोजनाओं और उच्च तकनीक वाली कंपनियों के कर्मचारियों के लिए इंटर्नशिप को बढ़ावा देना। अनुकूल राजकोषीय व्यवस्थाएं प्रदान करके नई संयुक्त (सहायक) कंपनियों के गठन को सुविधाजनक बनाना।

8. दवाओं और उन्नत चिकित्सा उपकरणों के विकास एवं आपूर्ति में व्यवस्थित सहयोग को बढ़ावा देना। रूस में भारतीय चिकित्सा संस्थानों की शाखाएं खोलने और योग्य चिकित्साकर्मियों की भर्ती के साथ-साथ चिकित्सा एवं जैविक सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय को मजबूत करने की संभावनाओं का अध्ययन करना।

9. मानवीय सहयोग का विकास, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, पर्यटन, खेल, स्वास्थ्य संबंधी देखभाल और अन्य क्षेत्रों में बातचीत का निरंतर विस्तार।

रूसी संघ के राष्ट्रपति और भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री ने व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से संबंधित रूसी-भारतीय अंतर-सरकारी आयोग को चिन्हित किए गए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का अध्ययन करने और अगली बैठक में इसकी प्रगति का आकलन करने का निर्देश दिया।

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भारत में रोजगार पर सिटीग्रुप की शोध रिपोर्ट का खंडन

कुछ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा उद्धृत भारत में रोजगार पर सिटीग्रुप की हालिया शोध रिपोर्ट, जिसमें अनुमान लगाया गया है कि भारत सात प्रतिशत की विकास दर के साथ भी पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए संघर्ष करेगा, उपलब्ध व्यापक और सकारात्मक रोजगार डेटा को ध्यान में रखने में विफल रही है। रिपोर्ट में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) और भारतीय रिजर्व बैंक के केएलईएमएस डेटा जैसे आधिकारिक स्रोतों से जानकारी नहीं ली गई है तथा ये स्रोत रिपोर्ट का खंडन करते हैं। अत: श्रम और रोजगार मंत्रालय ऐसी रिपोर्टों का दृढ़ता से खंडन करता है जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध सभी आधिकारिक डेटा स्रोतों का विश्लेषण नहीं करती हैं।

भारत के लिए रोजगार डेटा

भारतीय रिजर्व बैंक का केएलईएमएस डेटा 2017-18 से 2021-22 तक आठ करोड़ से अधिक रोजगार के अवसरों का संकेत देता है, जिसका मतलब प्रति वर्ष औसतन दो करोड़ से अधिक रोजगार है। उल्लेखनीय है कि इस तथ्य के बावजूद कि 2020-21 के दौरान विश्व अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुई थी, इसके मद्देनजर पर्याप्त रोजगार पैदा करने में भारत की असमर्थता के सिटीग्रुप के दावे का खंडन हो जाता है। यह महत्वपूर्ण रोजगार सृजन विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी पहलों की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है।

पीएलएफएस डेटा

वार्षिक पीएलएफएस रिपोर्ट निम्नलिखित से संबंधित श्रम बाजार संकेतकों में 2017-18 से 2022-23 के दौरान सुधार की प्रवृत्ति दर्शाती है: (i) श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर), (ii) श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) और (iii) 15 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर (यूआर)। तदनुसार डब्ल्यूपीआर 2017-18 में 46.8 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 56 प्रतिशत हो गया है। इसी तरह, देश में श्रम बल की भागीदारी भी 2017-18 में 49.8 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 57.9 प्रतिशत हो गई है। बेरोजगारी दर 2017-18 में 6.0 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 3.2 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई है।

पीएलएफएस डेटा से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान, श्रम बल में शामिल होने वाले लोगों की संख्या की तुलना में अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी दर में लगातार कमी आई है। यह रोज़गार पर सरकारी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव का एक स्पष्ट संकेतक है। जहां रिपोर्ट में रोजगार परिदृश्य को गंभीर बताया गया है, वहीं आधिकारिक डेटा भारतीय रोजगार बाजार की अधिक आशावादी परिदृश्य प्रस्तुत करता है।

ईपीएफओ डेटा

व्यापार सुगमता, कौशल विकास को बढ़ाने और सार्वजनिक व निजी, दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने के सरकारी प्रयासों से औपचारिक क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों को भी बढ़ावा मिल रहा है। ईपीएफओ डेटा से पता चलता है कि अधिक से अधिक कर्मचारी औपचारिक नौकरियों में शामिल हो रहे हैं। वर्ष 2023-24 के दौरान, 1.3 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर ईपीएफओ में शामिल हुए, जो वर्ष 2018-19 के दौरान ईपीएफओ में शामिल हुए 61.12 लाख की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसके अलावा, पिछले साढ़े छह वर्षों के दौरान (सितंबर, 2017 से मार्च, 2024 तक) 6.2 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर ईपीएफओ में शामिल हुए हैं।

एनपीएस के नए सब्सक्राइबर

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र और राज्य सरकारों के तहत 2023-24 के दौरान 7.75 लाख से अधिक नए सब्सक्राइबर एनपीएस में शामिल हुए हैं, जो 2022-23 के दौरान सरकारी क्षेत्र के तहत एनपीएस में शामिल होने वाले 5.94 लाख नए ग्राहकों से 30 प्रतिशत अधिक है। नए सब्सक्राइबरों में यह पर्याप्त वृद्धि सार्वजनिक क्षेत्र में रिक्तियों को समय पर भरने के लिए सरकार के सक्रिय उपायों को उजागर करती है।

फ्लेक्सी-स्टाफिंग क्षेत्र

श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव के साथ इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन (आईएसएफ) के सदस्यों की हालिया बातचीत में, आईएसएफ सदस्यों ने बताया कि वे लगभग 5.4 मिलियन औपचारिक अनुबंध श्रमिकों को रोजगार दे रहे हैं। प्रतिभा की कमी और श्रम गतिशीलता के कारण विनिर्माण, खुदरा, बैंकिंग क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत मांग अधूरी बनी हुई है।

अनेक नए अवसर

भारत में रोजगार बाजार की भविष्य की संभावनाएं अत्यधिक उत्साहजनक हैं, जैसा कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है। भारत में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है। गिग अर्थव्यवस्था देश में कार्यबल में उल्लेखनीय वृद्धि का भी भरोसा दिलाती है। विशेष रूप से, गिग अर्थव्यवस्था पर नीति आयोग की रिपोर्ट में प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों में पर्याप्त वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिसके वर्ष 2029-30 तक 2.35 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, जो गिग अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार को रेखांकित करता है। वर्ष 2029-30 तक भारत में गिग श्रमिकों के गैर-कृषि कार्यबल का 6.7 प्रतिशत या कुल आजीविका का 4.1 प्रतिशत होने की उम्मीद है। ये विकास सामूहिक रूप से भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और विविध रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता को दर्शाते हैं।

डेटा विश्वसनीयता

यह सर्वविदित है कि निजी डेटा स्रोत, जिन्हें रिपोर्ट/मीडिया अधिक विश्वसनीय बताता है, में कई कमियां हैं। ये सर्वेक्षण रोज़गार के संबंध में अपनी स्वयं की परिभाषा का उपयोग करते हैं-बेरोजगारी जो राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। पीएलएफएस जैसे आधिकारिक डेटा स्रोतों के समान मजबूत या प्रतिनिधि नहीं होने के कारण नमूना वितरण और कार्यप्रणाली की अक्सर आलोचना की जाती है। इसलिए, आधिकारिक आँकड़ों की तुलना में ऐसे निजी डेटा स्रोतों पर निर्भरता से भ्रामक निष्कर्ष निकल सकते हैं और इसलिए, इनका उपयोग सावधानी से किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, कुछ लेखक चुनिंदा डेटा का उपयोग करते हैं जो उनके विश्लेषण की विश्वसनीयता को कमजोर करता है और भारत में रोजगार परिदृश्य की सटीक तस्वीर पेश नहीं करता है। ऐसी रिपोर्टें आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सकारात्मक रुझानों और व्यापक आंकड़ों पर विचार करने में विफल रहती हैं।

सारांश

पीएलएफएस, आरबीआई, ईपीएफओ आदि जैसे आधिकारिक डेटा स्रोत प्रमुख श्रम बाजार संकेतकों में लगातार सुधार दिखाते हैं, जिसमें श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) और श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) में वृद्धि और पिछले पांच वर्षों के दौरान बेरोजगारी दर में गिरावट शामिल है। ईपीएफओ और एनपीएस डेटा सकारात्मक रोजगार रुझानों का समर्थन करते हैं। विनिर्माण, सेवा क्षेत्र के विस्तार, बुनियादी ढांचे के विकास के अलावा अन्य रुझान, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था और जीसीसी जैसे कई क्षेत्रों में उभरते अवसर शामिल हैं, भविष्य की मजबूत संभावनाओं का संकेत देते हैं।

श्रम और रोजगार मंत्रालय आधिकारिक डेटा की विश्वसनीयता और व्यापकता पर जोर देता है, निजी डेटा स्रोतों के चयनात्मक उपयोग के प्रति आगाह करता है जिससे भारत के रोजगार परिदृश्य के बारे में भ्रामक निष्कर्ष निकल सकते हैं।

सरकार एक मजबूत और समावेशी रोजगार बाजार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और मौजूदा स्थिति से साबित होता है कि इस दिशा में पर्याप्त प्रगति हो रही है।

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छावनी क्षेत्रों को अन्य नगर पालिकाओं के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज छावनी क्षेत्रों में पर्यावरण की देखभाल करने और वनस्पतियों का पोषण करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि समाज के व्यापक लाभ के लिए रक्षा संपदा भूमि पर संरचित तरीके से औषधीय पौधों और बागवानी को बढ़ावा देकर इसे प्राप्त किया जा सकता है।

आज उपराष्ट्रपति के एन्क्लेव में भारतीय रक्षा संपदा सेवा के 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि छावनी क्षेत्रों को स्वच्छता, हरियाली और नागरिक सुविधाओं के मामले में अन्य निकायों (जैसे नगर पालिकाओं) के लिए एक उदाहरण बनना चाहिए। विकसित हो रहे तकनीकी और भू-राजनीतिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को तेजी से बदलते परिदृश्य के साथ लगातार तालमेल बिठाने की सलाह दी। अधिकारियों से हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का आग्रह करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया, “रक्षा का सबसे अच्छा तरीका युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहना है।” रक्षा भूमि को हमारी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उपराष्ट्रपति महोदय ने रक्षा भूमि के प्रबंधन में आने वाली कई चुनौतियों जैसे अतिक्रमण और उसके बाद कानूनी विवादों का उल्लेख किया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को भूमि प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे आप किसी भी घुसपैठ की निगरानी कर सकेंगे और दृढ़ संकल्प के साथ त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई कर सकेंगे। उपराष्ट्रपति, जो प्रतिष्ठित अधिवक्ता भी रहे हैं, उन्होंने ऐसे मामलों में अदालती कार्रवाई के लिए तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उपराष्ट्रपति महोदय ने परिवीक्षार्थियों को कभी भी आसान रास्ता न अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि वे नैतिक आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करें तथा दूसरों के लिए आदर्श बनें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि “जब आप दबावों और चुनौतियों का सामना करें, तब भी दृढ़ रहें।” उन्होंने अधिकारियों से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए काम करने का आग्रह किया। यह देखते हुए कि रक्षा संपदा का ऐतिहासिक और विरासत संबंधी महत्व बहुत अधिक है, उपराष्ट्रपति महोदय ने इसकी योजना और विकास में दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। डॉ. सुदेश धनखड़, रक्षा मंत्रालय के सचिव श्री गिरिधर अरमाने, रक्षा संपदा के महानिदेशक श्री जी.एस. राजेश्वरन, राष्ट्रीय रक्षा संपदा प्रबंधन संस्थान के निदेशक श्री राजेंद्र पवार, प्रशिक्षु अधिकारी, भारतीय रक्षा संपदा सेवा और उपराष्ट्रपति सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र में जीका वायरस के मामलों को देखते हुए राज्यों को परामर्श जारी किया है

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. अतुल गोयल ने महाराष्ट्र में जीका वायरस के कुछ दर्ज किए गए मामलों को देखते हुए राज्यों को एक परामर्श जारी किया है। इसमें देश में जीका वायरस की स्थिति पर निरंतर सतर्कता बनाए रखने की जरूरत पर प्रकाश डाला गया है।

चूंकि जीका संक्रमित गर्भवती महिला के भ्रूण में माइक्रोसेफली और न्यूरोलॉजिकल प्रभाव आ जाता है, इसलिए राज्यों को सलाह दी गई है कि वे चिकित्सकों को कड़ी निगरानी के लिए सचेत करें। राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे संक्रमित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं या प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले मामलों की देखभाल करने वाले लोगों को निर्देश दें कि वे गर्भवती महिलाओं की जीका वायरस संक्रमण के लिए जांच करें, जीका से संक्रमित पाई गईं गर्भवती माताओं के भ्रूण के विकास की निगरानी करें और केंद्र सरकार के दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करें। राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे स्वास्थ्य सुविधाओं/अस्पतालों को एक नोडल अधिकारी की पहचान करने की सलाह दें जो अस्पताल परिसर को एडीज मच्छर से मुक्त रखने के लिए निगरानी और कार्य करें।

राज्यों को कीट विज्ञान निगरानी को मजबूत करने और आवासीय क्षेत्रों, कार्यस्थलों, स्कूलों, निर्माण स्थलों, संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों को तेज करने के महत्व पर जोर देते हुए निर्देश दिया गया है। राज्यों से समुदाय के बीच घबराहट को कम करने के लिए सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों पर एहतियाती आईईसी संदेशों के माध्यम से जागरूकता को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया गया है, क्योंकि जीका किसी भी अन्य वायरल संक्रमण की तरह ही है जिसके अधिकांश मामले लक्षणहीन और हल्के होते हैं। हालांकि, इसे माइक्रोसेफली से जुड़ा मामला बताया जाता है, लेकिन 2016 के बाद से देश में जीका से जुड़े माइक्रोसेफली की कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

किसी भी आसन्न उछाल/प्रकोप का समय पर पता लगाने और नियंत्रण के लिए, राज्य अधिकारियों को सतर्क रहने, तैयार रहने और सभी स्तरों पर उचित रसद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। राज्यों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे पहचान में आए जीका के किसी भी मामले के बारे में तुरंत एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडीसी) को बताएं।

जीका परीक्षण सुविधा राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे; राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), दिल्ली और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की कुछ चुनिंदा वायरस अनुसंधान और नैदानिक ​​प्रयोगशालाओं में उपलब्ध है। जीका संक्रमण के बारे में उच्च स्तर पर समीक्षा की जा रही है।

डीजीएचएस ने इस साल की शुरुआत में 26 अप्रैल को एक एडवाइजरी भी जारी की थी। एनसीवीबीडीसी के निदेशक ने भी फरवरी और अप्रैल, 2024 में दो एडवाइजरी जारी की हैं ताकि राज्यों को एक ही वेक्टर मच्छर से फैलने वाली जीका, डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी के बारे में पहले से चेतावनी दी जा सके।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा है।

पृष्ठभूमि:

डेंगू और चिकनगुनिया की तरह जीका भी एडीज मच्छर जनित वायरल बीमारी है। यह एक गैर-घातक बीमारी है। हालांकि, जीका संक्रमित गर्भवती महिलाओं से पैदा होने वाले शिशुओं में माइक्रोसेफली (सिर का आकार कम होना) से जुड़ा है, जो इसे एक बड़ी चिंता का विषय बनाता है।

भारत में 2016 में गुजरात राज्य में जीका का पहला मामला सामने आया था। तब से, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक जैसे कई अन्य राज्यों में भी बाद में जीका मामले दर्ज किए हैं।

वर्ष 2024 में (2 जुलाई तक), महाराष्ट्र के पुणे में 6, कोल्हापुर में 1 और संगमनेर 1 यानी पूरे आठ मामले दर्ज किए गए हैं।

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केरल में पंचायतों को (2020-21 से 2026-27 तक) 15वें वित्त आयोग के अनुदान के रूप में 5337.00 करोड़ रुपये जारी किए हैं

केरल मीडिया के कुछ वर्गों में आई रिपोर्टों का संदर्भ लें। केरल में ग्राम पंचायतों को 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुदान जारी करने में केंद्र सरकार की कथित लापरवाही पर पंचायती राज मंत्रालय ने निम्नलिखित जानकारी दी हैं :

(i) भारत सरकार ने केरल में ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त आयोग (2015-16 से 2019-20 तक) के अनुदान के रूप में 3,774.20 करोड़ रुपये और इन पंचायतों को 15वें वित्त आयोग (2020-21 से 2026-27 तक) के अनुदान के रूप में 5,337.00 करोड़ रुपये (28.06.2024 तक) जारी किए हैं।

(ii) 15वें वित्त आयोग की अवधि के लिए, केरल को ग्रामीण स्थानीय निकायों को बिना शर्त (बेसिक) और सशर्त अनुदान के रूप में धनराशि जारी की गई। 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटन और धनराशि जारी करने का विस्तृत वर्षवार सारांश नीचे दी गई तालिका 1 में दिया गया है :

तालिका नंबर-एक

ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए केरल राज्य को पंद्रहवें वित्त आयोग की धनराशि के आवंटन और धनराशि जारी करने की स्थिति

(करोड़ रुपए में)

क्रम सं. वर्ष बिना शर्त (बेसिक) अनुदान राशि सशर्त अनुदान राशि कुल
आवंटन जारी करना आवंटन जारी करना आवंटन जारी करना
1 2020–21 814.00 814.00 814.00 814.00 1628.00 1628.00
2 2021–22 481.20 481.20 721.80 721.80 1203.00 1203.00
3 2022–23 498.40 498.40 747.60 747.60 1246.00 1246.00
4 2023–24 504.00 504.00 756.00 756.00 1260.00 1260.00

(iii) 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, राज्यों के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि वे राज्य वित्त आयोग (एसएफसी) का गठन करें, उनकी सिफारिशों पर कार्य करें और मार्च 2024 तक या उससे पहले राज्य विधानमंडल के समक्ष की गई कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। मार्च 2024 के बाद, उस राज्य को कोई अनुदान जारी नहीं किया जाएगा, जिसने राज्य वित्त आयोग और इन शर्तों के संबंध में संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया है।

(iv) मंत्रालय ने 11 जून, 2024 और 24 जून, 2024 के अपने पत्र के माध्यम से राज्यों से राज्य वित्त आयोग का विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

(v) राज्य सरकार ने 7 जून 2024 के पत्र के माध्यम से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बिना शर्त अनुदान की दूसरी किस्त का अनुदान हस्तांतरण प्रमाणपत्र (जीटीसी) प्रस्तुत किया है। इसकी जांच पंचायती राज मंत्रालय कर रहा है और वित्त मंत्रालय को अगली किस्त (वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पहली किस्त) जारी करने की सिफारिश की जा रही है। हालांकि, 28 जून 2024 तक मंत्रालय को केरल से राज्य वित्त आयोग पर विवरण प्रस्तुत करने से संबंध में जवाब प्राप्त होना बाकी है, जो मार्च 2024 के बाद अनुदान जारी करने के लिए एक अनिवार्य शर्त है।

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