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राजनीति

उपभोक्ता आयोगों ने वर्ष 2022 और 2023 के दौरान 100 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा किया

उपभोक्ता कार्य विभाग प्रगतिशील कानून बनाकर उपभोक्ता संरक्षण और उपभोक्ताओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रहा है। वैश्वीकरण, प्रौद्योगिकियों, ई-कॉमर्स बाजारों आदि के नए युग में उपभोक्ता संरक्षण को नियंत्रित करने वाले ढांचे को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को निरस्त कर दिया गया और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 को अधिनियमित किया गया।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 90 और 91 में बिक्री के लिए विनिर्माण या भंडारण अथवा बिक्री या वितरण या आयात करने के लिए सजा का प्रावधान है, जिसमें उपभोक्ता को होने वाली क्षति की सीमा के आधार पर कारावास या जुर्माना शामिल है।

अधिनियम में विशेष तीन स्तरीय अर्ध-न्यायिक एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण का प्रावधान है, जिन्हें अब आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर पर ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी)’, राज्य स्तर पर ‘राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एससीडीआरसी)’ और जिला स्तर पर ‘जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (डीसीडीआरसी)’ के रूप में जाना जाता है।

अधिनियम में अन्य बातों के साथ-साथ उपभोक्ता आयोगों में न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रावधान; उपभोक्ता द्वारा उस उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करने का प्रावधान, जिसका अधिकार क्षेत्र शिकायतकर्ता के निवास/कार्य के स्थान या जहां कार्रवाई का कारण उत्पन्न होता है, या विपरीत पक्षों के व्यवसाय या निवास के स्थान पर हो, ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, शिकायतों की स्वीकार्यता मानी जाए, यदि दाखिल करने के 21 दिनों के भीतर स्वीकार्यता तय नहीं की जाती है; उत्पाद दायित्व आदि का प्रावधान शामिल है।

मामलों के त्वरित और परेशानी मुक्त समाधान के लिए जिला और राज्य स्तर पर एनसीडीआरसी और 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के उपभोक्ता आयोगों में ई-दाखिल के माध्यम से ऑनलाइन मामले दर्ज करने का प्रावधान शुरू किया गया है।

उपभोक्ता आयोगों के भौगोलिक विस्तार और दूरी, समय और लागत के कारण सुनवाई में शामिल होने में उपभोक्ताओं को होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर उपभोक्ता आयोगों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा प्रदान की गई है। यह पहल भारतीय कानूनी प्रणाली के डिजिटल परिवर्तन के अनुरूप है, जो न्याय को उपभोक्ता के दरवाजे तक पहुंचा रही है।

उपभोक्ता कार्य विभाग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) को नया रूप दिया है, जो मुकदमे-पूर्व चरण में शिकायत निवारण के लिए देश भर के उपभोक्ताओं के लिए एकल पहुंच बिंदु के रूप में उभरी है। यह देश के सभी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध है, जिसमें उपभोक्ता देश भर से 17 भाषाओं (अर्थात हिंदी, अंग्रेजी, कश्मीरी, पंजाबी, नेपाली, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मैथली, संथाली, बंगाली, ओडिया, असमिया, मणिपुरी) में एक टोल-फ्री नंबर 1915 के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। इन शिकायतों को एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईएनजीआरएएम), एक ओमनी-चैनल आईटी सक्षम केंद्रीय पोर्टल, जैसे व्हाट्सएप, एसएमएस, ई-मेल, एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल, उमंग ऐप पर अपनी सुविधा के अनुसार दर्ज कराया जा सकता है।

विभाग इलेक्ट्रॉनिक, आउटडोर और सोशल मीडिया सहित विभिन्न मीडिया के माध्यम से “जागो ग्राहक जागो” अभियान के तत्वावधान में उपभोक्ता जागरूकता पैदा करने और उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए “उपभोक्ता जागरूकता” नामक एक विशेष योजना को लागू कर रहा है। विभाग प्रमुख मेलों/त्योहारों/कार्यक्रमों में भाग लेता है जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो सकते हैं। विभाग स्थानीय स्तर पर जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अनुदान सहायता भी प्रदान करता है।

उपरोक्त अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना 24.07.2020 से उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार प्रथाओं और झूठे या भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामलों को विनियमित करने के लिए की गई है, जो जनता और उपभोक्ताओं के हितों के लिए हानिकारक हैं। अधिनियम की धारा 18(2)(1) के अंतर्गत, सीसीपीए को अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार है।

सीसीपीए ने 9 जून, 2022 को भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के समर्थन के लिए दिशानिर्देश, 2022 को अधिसूचित किया है। ये दिशानिर्देश अन्य बातों के साथ-साथ; (ए) किसी विज्ञापन के गैर-भ्रामक और वैध होने की शर्तें; (बी) चारा विज्ञापनों और मुफ्त दावा विज्ञापनों के संबंध में कुछ शर्तें; और (सी) निर्माता, सेवा प्रदाता, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसी के कर्तव्य प्रदान करते हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान दायर और निपटाए गए मामलों का विवरण इस प्रकार है:

वर्ष वर्ष के दौरान दर्ज किये गये मामले वर्ष के दौरान निपटाए गए मामले (पिछले वर्षों में दायर किए गए निपटाए गए मामले भी शामिल हैं) निपटान प्रतिशत
2019 178153 140860 79.06
2020 120018 60884 50.73
2021 148422 99095 66.77
2022 174280 183779 105.45
2023 171468 186902 109.00

 

केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बी एल वर्मा ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ, बेवजह बदसलूकी न हो इसका रखें ध्यान : पुलिस कमिश्नर

कानपुर प्रेस क्लब ने सौंपा ज्ञापन, पुलिस कमिश्नर ने डीसीपी, एसीपी व समस्त थाना प्रभारियों को दिए निर्देश*

भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित पर दर्ज हुए मुकदमों व गिरफ्तारी के बाद निष्पक्ष जांच व बेवजह पत्रकारों का उत्पीड़न न हो इस मुद्दे को लेकर बुधवार को कानपुर प्रेस क्लब के प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार से मुलाकात की। इस दौरान प्रेस क्लब अध्यक्ष सरस बाजपेई व महामंत्री शैलेश अवस्थी की तरफ से पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन भी सौंपा गया। प्रतिनिधि मंडल ने कमिश्नर से मांग की कि प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच हो। पत्रकारों के घरों पर बेवजह छापे न मारे जाएं। जरूरी हो तो पूछताछ के लिए अवगत करा दिया जाए ताकि किसी पत्रकार की बेवजह छवि न खराब हो। इसके साथ ही फील्ड पर काम कर रहे पत्रकारों का उत्पीड़न और बेवजह बदसलूकी न की जाए। मंगलवार रात कल्याणपुर थाना क्षेत्र में कवरेज के दौरान एक पत्रकार से की गई बदसलूकी से भी पुलिस कमिश्नर को अवगत कराया गया। इसपर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने तत्काल समस्त जोन के डीसीपी, एसीपी और सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि बेवजह किसी पत्रकार से बदसलूकी न की जाए। अगर पत्रकारों से अभद्रता की शिकायतें मिलीं तो यह ठीक नहीं होगा। पत्रकार लोकतंत्र के स्तम्भ हैं, उन्हें अपना काम करने दिया जाए। ज्ञापन देने वालों में पूर्व महामंत्री कुशाग्र पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव सारस्वत, कोषाध्यक्ष सुनील साहू, वरिष्ठ मंत्री मोहित दुबे, मंत्री शिवराज साहू, कार्यकारिणी सदस्य कौस्तुभ शंकर मिश्रा, गगन पाठक, दीपक सिंह, मयंक मिश्रा, उत्सव शुक्ला, नौशाद खान, अंकित शुक्ला आदि मौजूद रहे।

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भारतीय मजदूर संघ का 70 वां स्थापना दिवस संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, “भारतीय मजदूर संघ” के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर 23 जुलाई को निर्माणी गेट पर कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारतीय मजदूर संघ की स्थापना के संबंध में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर ऑर्डनेन्स पैराशूट निर्माणी कानपुर के गेट पर सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ के महासचिव श्री साधू सिंह ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ के स्थापना के पूर्व कई ट्रेड यूनियन संगठन देश में कार्य कर रहे थे लेकिन यह श्रम संगठन कर्मचारियों के बीच में राष्ट्रीय विचारधारा से अलग हो चुके थे। कुछ संगठन अंतर्राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत थे और एक संगठन सरकार का पिछलग्गू था। ऐसे में कर्मचारियों में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रेरित करने हेतु एक गैर राजनीतिक संगठन की आवश्यकता थी। इसी भावना को लेकर 23 जुलाई 1955 को भोपाल में भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की गई। स्थापना के समय केवल नौ लोग ही इसके संस्थापक थे। भारतीय मजदूर संघ ने शून्य से अपना काम प्रारंभ किया आज भारतीय मजदूर संघ पहले स्थान पर प्रतिस्थापित है और राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारतीय मजदूर संघ किसी राजनीतिक विचारधारा से ओतप्रोत नहीं है। कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर निरंतर अपना कार्यक्रम चला रहा है। आज भारतीय मजदूर संघ की सभी उद्योगों में और सभी प्रदेशों में यूनियन और महासंघ कार्यरत है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज ट्रेड यूनियन आंदोलन काफी कमजोर हुआ है। हमें और अधिक काम करना है। केंद्र में और राज्यों में किसी भी दल की सरकार हो उसकी परवाह किए बगैर हम अपना कार्य कर रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा के नाम पर जो पेंशन की सुविधा प्राप्त थी उसे समाप्त कर नई पेंशन प्रणाली लागू की गई। इसमें कर्मचारियों का अहित हुआ है। उन्हें गारंटीड पेंशन स्कीम के अंतर्गत लाने के लिए हमारे आंदोलन जारी है और कर्मचारियों को जब तक न्याय नहीं मिल जाता तब तक हम आंदोलन करते रहेंगे। इसी प्रकार आज देश में बेरोजगारी की समस्या अपने चरम पर है। सरकार संविदा कर्मचारियों और ठेका कर्मचारियों को बढ़ावा दे रही है जिनका शोषण सर्वाधिक है। इसलिए हमारी मांग है कि केंद्र राज्य कर्मचारियों के लाखों रिक्त स्थानों को अविलंभ भर जाए। इसी प्रकार कर्मचारियों के वेतन भत्तो को संशोधित करने के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग को लेकर हम आंदोलन रत हैं। रक्षा क्षेत्र में आयुध निर्माणियों का निगमीकरण किया जा चुका है, कर्मचारियों की सेवा शर्तें सुरक्षित रहें अर्थात सेवा निवृत के समय तक उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। इसके लिए भी हमारा आंदोलन चल रहा है। हम मांग कर रहे हैं कि प्रसार भारती की तरह कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। सरकार ने मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देना बंद कर रखा है वह फिर से प्रारंभ किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि आज हमारे महान स्वतंत्रता सेनानी माननीय बाल गंगाधर तिलक और माननीय चंद्रशेखर आजाद जी का जन्म दिवस है उनके महान कार्यों को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं में साधू सिंह, शिव कुमार शर्मा,  निर्मल कुमार, सुधीर त्रिपाठी, सचिन वर्मा, वेद प्रकाश शर्मा, प्रेम कुमार, जय यादव, दीपक यादव, वीरेंद्र यादव, संजीव कश्यप, अजय जयसवाल आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता श्री सचिन वर्मा ने की।

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सरकार ने 21 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू संसद के बजट सत्र से पहले संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। यह सर्वदलीय बैठक 21 जुलाई, 2024 को सुबह 11 बजे मुख्य समिति कक्ष, संसदीय सौध, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।

संसद का बजट सत्र 22 जुलाई, 2024 को शुरू होगा जो सरकारी कामकाज की अनिवार्यता के अधीन, 12 अगस्त, 2024 को समाप्त हो सकता है।

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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: रक्षा मंत्रालय ने रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के लिए 346 वस्तुओं की पांचवीं सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित की

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (डीपीएसयू) द्वारा आयात को कम करने के लिए, रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) ने देश में ही निर्मित 346 वस्तुओं की पांचवीं सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (पीआईएल) अधिसूचित की है। इनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लाइन रिप्लेसमेंट यूनिट/सिस्टम/सब-सिस्टम/असेंबली/सब-असेंबली/स्पेयर और कंपोनेंट तथा कच्चा माल शामिल है, जिसका आयात मूल्य 1,048 करोड़ रुपये है। सृजन पोर्टल ( https://srijandefence.gov.in ) पर उपलब्ध सूची में दर्शाई गई समयसीमा के पश्चात भारतीय उद्योग जगत से ही इन वस्तुओं की खरीद की जाएगी। ये वस्तुएं संलग्न सूची में उपलब्ध हैं।

(डीपीएसयू के लिए 5वीं सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची – डीडीपी)

रक्षा मंत्रालय ने 2020 में सृजन पोर्टल लॉन्च किया था। इस पोर्टल पर, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) और सेवा मुख्यालय (एसएचक्यू) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा स्टार्ट-अप उद्योगों को स्वदेशीकरण के लिए रक्षा वस्तुओं के निर्माण का प्रस्ताव करते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ संकल्प के लिए विस्तृत पैमाने पर किए गए प्रयासों से रक्षा वस्तुओं के देश में ही निर्माण होने के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को साकार करने के प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।

रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) की पांचवीं जनहित याचिका में उल्लिखित वस्तुओं का देश में ही निर्माण विभिन्न तरीकों से करेंगे, जिसमें ‘मेक’ प्रक्रिया या एमएसएमई सहित अन्य उद्योगों को शामिल करते हुए इनका स्वदेश में ही विकास करना शामिल है। इससे अर्थव्यवस्था में वृद्धि को गति मिलेगी, रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे अकादमिक और शोध संस्थानों की भागीदारी के कारण घरेलू रक्षा उद्योग की डिजाइन क्षमताओं में वृद्धि होगी।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), बीईएमएल लिमिटेड, इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (आईओएल), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) पांचवीं जनहित याचिका के रक्षा मदों से जुड़े रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम हैं। इन कंपनियों ने अपनी-अपनी वेबसाइट पर रुचि की अभिव्यक्ति और प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, इस उद्देश्य के लिए डिज़ाइन किए गए सृजन पोर्टल डैशबोर्ड ( srijandefence.gov.in/DashboardForPublic ) पर एक लिंक दिया गया है, और उद्योग/एमएसएमई/स्टार्ट-अप बड़ी संख्या में भाग लेने के लिए आगे आ सकते हैं।

इससे पहले, रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) द्वारा डीपीएसयू के लिए 4,666 वस्तुओं से संबंधित चार जनहित याचिकाएँ अधिसूचित की गई थीं, जिनमें 2,972 का आयात प्रतिस्थापन मूल्य 3,400 करोड़ रुपये है। इनका पहले ही स्वदेशीकरण किया जा चुका है। डीपीएसयू के लिए ये पांच सूचियां सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) द्वारा अधिसूचित 509 वस्तुओं की पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों के अतिरिक्त हैं। इन सूचियों में अत्यधिक जटिल प्रणालियां, सेंसर, हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं।

जून 2024 तक, डीपीएसयू और एसएचक्यू द्वारा स्वदेश में ही निर्माण के लिए उद्योग को 36,000 से अधिक रक्षा वस्तुओं की पेशकश की गई थी। उनमें से, पिछले तीन वर्षों में 12,300 से अधिक वस्तुओं का स्वदेशीकरण किया गया है। परिणामस्वरूप, डीपीएसयू ने घरेलू विक्रेताओं को 7,572 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए हैं।

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‘केंद्रीय बजट 2024-25’ की तैयारियों का अंतिम चरण आज नई दिल्ली में ‘पारंपरिक हलवा समारोह’ के साथ शुरू हुआ

केंद्रीय बजट 2024-25 तैयार करने की प्रक्रिया के अंतिम चरण को रेखांकित करने वाला ‘हलवा समारोह’ आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

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बजट की तैयारी में शामिल अधिकारियों की ‘लॉक-इन’ प्रक्रिया शुरू होने से पहले हर साल ‘पारंपरिक हलवा समारोह’ आयोजित किया जाता है। ‘केंद्रीय बजट 2024-25’ को 23 जुलाई, 2024 को पेश किया जाएगा।

वार्षिक वित्तीय विवरण (जिसे आम तौर पर बजट के रूप में जाना जाता है), अनुदान मांग (डीजी), वित्त विधेयक, इत्‍यादि सहित समस्‍त केंद्रीय बजट दस्तावेज भी ‘केंद्रीय बजट मोबाइल ऐप’ पर उपलब्ध होंगे, ताकि डिजिटल सुविधा के सबसे सरल रूप का उपयोग करके बजट दस्तावेजों को सांसदों (एमपी) और आम जनता को बिना किसी परेशानी के सुलभ कराया जा सके। यह ऐप द्विभाषी (अंग्रेजी एवं हिंदी) है और यह एंड्रॉयड एवं आईओएस दोनों ही प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध होगा। इस ऐप को केंद्रीय बजट वेब पोर्टल (www.indiabudget.gov.in)  से भी डाउनलोड किया जा सकता है।

23 जुलाई, 2024 को संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री का बजट भाषण पूरा हो जाने के बाद ही समस्‍त बजट दस्तावेज इस मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होंगे।

हलवा समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ वित्त मंत्रालय के सचिव और बजट की तैयारी में शामिल भारत सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी मौजूद थे।

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इस समारोह के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री ने ‘बजट प्रेस’ का भी मुआयना किया और बजट की तैयारियों की समीक्षा करने के अलावा संबंधित अधिकारियों को अपनी शुभकामनाएं भी दीं।

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सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के क्षमता निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है: रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ

रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने सभी आवश्यक सहायता एवं सहयोग प्रदान करके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के क्षमता निर्माण को सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है। 16 जुलाई, 2024 को बेंगलुरु कॉम्प्लेक्स की अपनी यात्रा के दौरान भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि यह पीएसयू पर निर्भर है कि वे अपने प्रदर्शन को बेहतर बनायें और इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी युग में प्रतिस्पर्धी बने रहें।

बीईएल की उपलब्धियों और प्रदर्शन की सराहना करते हुए, श्री संजय सेठ ने कहा कि यह पीएसयू ‘मेक इन इंडिया’ पहल और आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के साथ साझेदारी में कई स्वदेशी उपकरण और प्रणालियां विकसित की हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष इसने आत्मनिर्भरता को मजबूत करते हुए 150 वस्तुओं के पेटेंट हासिल किए हैं।

केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री ने एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स नेवी (एडीएसएन) स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट (एसबीयू), मिलिट्री रडार एसबीयू और अत्याधुनिक ईएमआई/ईएमसी लैब में प्रिसिजन मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी का दौरा किया। उन्हें तटीय निगरानी प्रणाली और परिधि सुरक्षा प्रणाली की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने स्मार्ट सिटी एक्सपीरियंस सेंटर और प्रोडक्ट डेवलपमेंट एंड इनोवेशन सेंटर (पीडीआईसी) का दौरा किया, जो अत्याधुनिक रक्षा और सुरक्षा उपायों से संबंधित नवाचार, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देता है। उन्होंने अगली पीढ़ी की परियोजनाओं पर काम कर रहे इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से बातचीत की।

रक्षा राज्यमंत्री ने बीईएल की अपनी पहली यात्रा की स्मृति में पीडीआईसी परिसर में एक पौधा भी लगाया। इससे पहले, श्री मनोज जैन, सीएमडी, श्री भानु प्रकाश श्रीवास्तव, निदेशक (अन्य इकाइयां), श्री दामोदर भट्टड़, निदेशक (वित्त), श्री के वी सुरेश कुमार, निदेशक (विपणन) तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

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कोयला मंत्रालय द्वारा तीन कोयला खदानों के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर

 कोयला मंत्रालय ने आज 7वें दौर के दूसरे प्रयास के अंतर्गत नीलाम की गई तीन कोयला खदानों के लिए कोयला खनन विकास और उत्पादन समझौतों को सफलतापूर्वक निष्पादित किया। यह वाणिज्यिक कोयला खनन की सफलता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। तीन खदानों में से दो आंशिक रूप से खोजी गई हैं, जबकि एक पूरी तरह अन्वेषित है।

समझौते किए गए खदानों हैं मच्छकटा (संशोधित) कोयला खदान, कुडनाली लुबरी कोयला खदान और सखीगोपाल-बी काकुरही कोयला खदान। सफल बोलीकर्ता क्रमशः एनएलसी इंडिया लिमिटेड, गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड हैं।

इन तीन खदानों से वाणिज्यिक नीलामी के अंतर्गत अनुमानित वार्षिक राजस्व सृजन लगभग 2,991.20 करोड़ रुपए है, जो लगभग 30.00 एमटीपीए की कुल पीक रेट क्षमता उत्पादन पर आधारित है। इन खदानों के चालू होने पर लगभग 40,560 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, इन कोयला खदानों को चालू करने के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपए का कुल निवेश आवंटित किया जाएगा।यह पहल कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास, रोजगार सृजन में योगदान देने और राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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“भारत का लक्ष्य 2030 तक 4 बिलियन डॉलर के एमआरओ उद्योग के साथ अग्रणी विमानन केन्‍द्र बनना” – राममोहन नायडू

केन्‍द्रीय नागर विमानन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने सभी विमानों और विमान इंजन के कलपुर्जों पर 5 प्रतिशत की एकसमान आईजीएसटी दर लागू करने की घोषणा की है, जो आज 15 जुलाई 2024 से प्रभावी होगी। यह निर्णय घरेलू रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक विमानन केन्‍द्र बनाना है।

इस प्रगति पर टिप्पणी करते हुए, श्री नायडू ने कहा, “एमआरओ वस्तुओं पर एक समान 5 प्रतिशत आईजीएसटी दर की शुरूआत विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़ा प्रोत्‍साहन है। इससे पहले, विमान घटकों पर 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की अलग-अलग जीएसटी दरों ने चुनौतियां खड़ी की, जिसमें कर संरचना में भिन्‍नता और एमआरओ खातों में जीएसटी संचय शामिल था। यह नई नीति इन असमानताओं को समाप्त करती है, कर संरचना को सरल बनाती है और एमआरओ क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देती है।”

केन्‍द्रीय मंत्री ने इस बदलाव को संभव बनाने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में, हम आत्मनिर्भर भारत पहल के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत को एक प्रमुख विमानन केन्‍द्र में बदलने में उनका समर्थन इस नीति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रहा है।”

केन्‍द्रीय मंत्री ने नागर विमानन मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और अन्य हितधारकों के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने 22 जून 2024 को अपनी 53वीं बैठक में जीएसटी परिषद द्वारा अनुशंसित इस नीति समायोजन को प्राप्त करने के लिए लगन से काम किया है, एक समान 5 प्रतिशत आईजीएसटी दर का उद्देश्य परिचालन लागत को कम करना, कर क्रेडिट के मुद्दों को हल करना और निवेश को आकर्षित करना है।

भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए, श्री राममोहन नायडू ने कहा, “हमारा दृष्टिकोण भारत को एक अग्रणी विमानन केन्‍द्र में बदलना है। भारतीय एमआरओ उद्योग के 2030 तक 4 बिलियन डॉलर का उद्योग बनने का अनुमान है। यह नीति परिवर्तन एमआरओ सेवाओं के लिए एक मजबूत इकोसिस्‍टम बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और स्‍थायी विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

मंत्रालय को विश्वास है कि इस कदम से भारतीय एमआरओ क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, नवाचार और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा तथा एक मजबूत और कुशल विमानन क्षेत्र का निर्माण होगा।

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स्टार्ट-अप्स को अपनी स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत उद्योग प्रबंधन संपर्क आवश्यक हैः डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि स्टार्ट-अप्स को अपनी स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत उद्योग प्रबंधन संपर्क (लिंकेज) आवश्यक है।  उन्होंने कहा कि इसमें आईआईएम जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

 

   डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू शहर के बाहरी इलाके जगती में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के एमबीए छात्रों के नए बैच के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कहा कि अधिकतर सफल स्टार्ट-अप कहानियां मजबूत उद्योग संपर्क के कारण संभव हुई हैं। उन्होंने कहा- “उदाहरण के लिए, अरोमा मिशन में, सरकार लैवेंडर में कृषि स्टार्ट-अप में लगे लोगों की क्षमता सृजन सुनिश्चित करके और लैवेंडर से बने परफ्यूम और अन्य उत्पादों जैसे हिमालयी उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए बाजार पहुंच की सुविधा प्रदान करके एक सक्षमकर्ता बन गई है।”

मंत्री महोदय ने कहा कि हिमालय के जैव संसाधनों और तटीय क्षेत्रों में अनछुए खनिजों का दोहन भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा मूल्यवर्धन कर सकता है और ‘आत्मनिर्भरता’ को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने कहा- “भारत के तटीय राज्य और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश देश के भविष्य की अर्थव्यवस्था को बहुत कुछ दे सकते हैं”। डॉ. जितेंद्र सिंह ने महत्वाकांक्षी पीढ़ी के बारे में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बेहतर समय चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी महान समतलीकरण रही है, जिससे प्रत्येक क्षेत्र के सभी व्यक्ति को अवसर मिला है।” डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं को प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहिए, जिसने सामाजिक भलाई के लिए समान अवसर तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रौद्योगिकी कुछ लोगों का विशेषाधिकार थी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों से 2047 के भारत का नेतृत्व करने के लिए स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “2027 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी पूरी करेगा, तब युवा ही विकसित भारत के निर्माता होंगे।” उन्होंने कहा कि सरकार अपनी युवा पीढ़ी को नए कौशल और प्रशिक्षण तथा विश्व स्तरीय शिक्षा से लैस करने के लिए अथक प्रयास कर रही है, ताकि उन्हें विकसित भारत का निर्माता बनाया जा सके। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा लाई गई राष्ट्रीय शिक्षक नीति 2020 इस लक्ष्य में योगदान देगी।”  डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईआईएम-जम्मू की प्रगति के बारे में कहा कि अपनी स्थापना के कुछ ही वर्षों में यह देश में उच्च शिक्षा के ऐसे नए प्रमुख संस्थानों में से एक बन गया है। मंत्री महोदय ने कहा, “प्रारंभिक अवस्था से ही, जब हमें फैकल्टी खोजने में भी कठिनाई हो रही थी, इसने अपनी छोटी सी यात्रा में एक लंबा सफर तय किया है।” उन्होंने कहा, ‘‘आईआईएम जम्मू की स्थापना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और ऐसे नेताओं को तैयार करने के उनके सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्र को अभूतपूर्व विकास की ओर ले जाएंगे।’’

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विद्यार्थियों के अधिक लाभ के लिए संस्थानों के बीच सहयोग और तालमेल पर बल दिया। मंत्री महोदय ने कहा, “अलग-अलग काम करने का युग समाप्त हो गया है; सहयोग का युग आ गया है।” उन्होंने आईआईएम-जम्मू, एम्स-जम्मू, आईआईटी-जम्मू और जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय को अनुसंधान एवं विकास तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके साझेदारी के लिए प्रोत्साहित किया। इससे पहले डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आईआईएम-जम्मू के अत्याधुनिक परिसर का दौरा किया। उनके साथ निदेशक प्रो. बी.एस. सहाय और एम्स, जम्मू के निदेशक डॉ. शक्ति कुमार गुप्ता भी उपस्थित थे। उन्होंने इस अवसर पर एक पौधा लगाया।

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