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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 के परिणाम के बारे में भ्रामक दावों का विज्ञापन करने के लिए श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग पर भ्रामक विज्ञापन के लिए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए लिया गया था और यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी वस्तु या सेवा का कोई गलत या भ्रामक विज्ञापन न किया जाए जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का उल्लंघन करता हो।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन के संदर्भ में सीसीपीए की मुख्य आयुक्त, श्रीमती निधि खरे और आयुक्त श्री अनुपम मिश्रा ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 के बारे में भ्रामक विज्ञापन के लिए श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग संस्थान के खिलाफ एक आदेश जारी किया है।

कोचिंग संस्थान और ऑनलाइन एडटेक मंच संभावित उम्मीदवारों (उपभोक्ताओं) को प्रभावित करने के लिए एक ही सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रमों और इस तरह के पाठ्यक्रम की अवधि का खुलासा किए बिना उनकी तस्वीरों और नामों का उपयोग करते हैं।

श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग संस्थान ने अपने विज्ञापन में निम्नलिखित दावे किए-

  1. “यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 200 से अधिक चयन”
  2. “हम भारत के नंबर 1 प्रतिष्ठित यूपीएससी/आईएएस कोचिंग संस्थान हैं”

सीसीपीए ने पाया कि श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग संस्थान ने विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रमों का विज्ञापन दिया था, लेकिन उपर्युक्त यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा परिणामों में विज्ञापित सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रम के संबंध में जानकारी जानबूझकर विज्ञापन में छिपाई गई थी। इसका प्रभाव यह हुआ कि उपभोक्ता गलत तरीके से यह मान लेते हैं कि संस्थान द्वारा दावा किए गए सभी सफल उम्मीदवारों ने संस्थान द्वारा अपनी वेबसाइट पर विज्ञापित सशुल्क पाठ्यक्रमों का विकल्प चुना था।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा-2(28) (iv) जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के लिए भ्रामक विज्ञापन के सम्बन्ध मे कार्रवाही को दर्शाती है। सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रम की जानकारी उपभोक्ताओं के लिए जानना महत्वपूर्ण है ताकि वे यह तय करते समय सूचित विकल्प बना सकें कि किस पाठ्यक्रम और कोचिंग संस्थान में शामिल होना है।

श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग संस्थान ने अपने जवाब में यूपीएससी सीएसई 2022 में 200 से अधिक चयनों के अपने दावे के खिलाफ केवल 171 सफल उम्मीदवारों का विवरण प्रस्तुत किया। इन 171 उम्मीदवारों में से 102 मुफ्त साक्षात्कार मार्ग दर्शन कार्यक्रम (आईजीपी) से थे, 55 मुफ्त परीक्षा श्रृंखला से थे, 9 सामान्य अध्ययन कक्षा पाठ्यक्रम से थे और 5 उम्मीदवार राज्य सरकार और संस्थान के बीच मुफ्त कोचिंग प्रदान करने के लिए हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत विभिन्न राज्यों से थे। इस तथ्य का खुलासा उनके विज्ञापन में नहीं किया गया था, जिससे उपभोक्ताओं को धोखा दिया गया।

यह एक सर्वविदित तथ्य है कि सिविल सेवा परीक्षा के सफल उम्मीदवारों को परीक्षा के सभी 3 चरणों प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण (पीटी) को पास करना होता है। प्रारंभिक परीक्षा एक स्क्रीनिंग परीक्षा है, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण दोनों में प्राप्त अंकों को अंतिम रूप से चयनित होने के लिए गिना जाता है। मुख्य परीक्षा और पीटी के लिए कुल अंक क्रमशः 1750 और 275 हैं। इस प्रकार व्यक्तित्व परीक्षण का योगदान कुल अंकों में 13.5 प्रतिशत है। अधिकांश उम्मीदवारों ने पहले ही प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा स्वंय ही पास कर ली थी, जिसमें श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग संस्थान का कोई योगदान नहीं था। श्रीराम ग्रुप के आईएएस कोचिंग संस्थान द्वारा इस महत्वपूर्ण तथ्य को बताया नही गया कि संस्थान ने केवल ऐसे सफल उम्मीदवारों को मार्गदर्शन दिया है जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पहले ही पास कर ली है, इस तरह के झूठे और भ्रामक विज्ञापन द्वारा यूपीएससी परीक्षा के इच्छुक उम्मीदवारों पर गलत प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार, विज्ञापन ने उपभोक्ता के सूचित किए जाने के अधिकार का उल्लंघन किया है ताकि अनुचित व्यापार व्यवहार से खुद को बचा सके।

सीसीपीए की मुख्य आयुक्त श्रीमती निधि खरे ने इस बात पर जोर दिया कि एक विज्ञापन में महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करके तथ्यों का सत्य और ईमानदार प्रतिनिधित्व होना चाहिए ताकि वे स्पष्ट, प्रमुख हों और उपभोक्ताओं के लिए उन्हें नज़रअंदाज़ करना बेहद मुश्किल हो। उन्होंने उपभोक्ता अधिकारों के महत्व तथा उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विज्ञापनदाताओं के दायित्व पर प्रकाश डाला।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेन्नई में कलैग्नार एम करुणानिधि की जन्म शताब्दी के अवसर पर स्मारक सिक्का जारी किया

रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त, 2024 को चेन्नई में तमिलनाडु के पांच बार के पूर्व मुख्यमंत्री कलैग्नार एम करुणानिधि की जन्म शताब्दी के अवसर पर एक स्मारक सिक्का जारी किया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में, उन्हें देश के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक नेता, भारतीय राजनीति के दिग्गज, एक सक्षम प्रशासक, सामाजिक न्याय के समर्थक और एक सांस्कृतिक दिग्गज बताया।

रक्षा मंत्री ने जनता की भलाई के लिए तमिलनाडु के पूर्व मुख्य मंत्री के योगदान का स्मरण करते हुए कहा, “तमिल पहचान में गहराई से शामिल होने के बावजूद, थिरु करुणानिधि ने कभी भी क्षेत्रवाद को राष्ट्र की एकता को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने समझा कि भारतीय लोकतंत्र की ताकत विविध आवाजों और पहचानों को समायोजित करने की क्षमता में निहित है। राज्य के अधिकारों पर उनका आग्रह संघ के भीतर सत्ता के अधिक संतुलित और न्यायसंगत वितरण का आह्वान था। संघवाद के प्रति यह प्रतिबद्धता भारतीयता का एक प्रमुख पहलू है। भारत की विविधता इसकी ताकत है और संघीय संरचना इस विविधता को एक एकीकृत ढांचे के भीतर पनपने की अनुमति देती है।”

श्री राजनाथ सिंह ने कलैग्नार करुणानिधि को एक ऐसा नेता बताया जिनकी राष्ट्रीय शासन में भूमिका और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की वकालत ने भारतीय लोकतंत्र पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि भारतीय पहचान की समावेशी प्रकृति तिरु करुणानिधि की नीतियों में परिलक्षित होती है, जो हाशिए पर रहने वाले कमज़ोर लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि महिलाओं और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहायता मिले।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “कलैग्नार करुणानिधि महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले कमज़ोर समुदायों के अधिकारों के लिए एक प्रखर समर्थक थे। उन्होंने ऐसे सुधारों का नेतृत्व किया, जिन्होंने लैंगिक समानता को प्रोत्साहन दिया और महिलाओं को सशक्त बनाया। उनकी सरकार ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला कानून बनाया और उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कृषि मजदूरों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कल्याण बोर्ड बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका काम एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है कि किसी राष्ट्र की प्रगति का असली माप इस बात में निहित है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है।”

तिरु करुणानिधि को एक कुशल प्रशासक बताते हुए श्री राजनाथ सिंह ने उनके कार्यक्रम ‘मनु निधि थित्तम’ का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने जिला अधिकारियों को हर सप्ताह एक दिन केवल लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया था। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करना था। उनकी दृष्टि केवल तमिलनाडु तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने माना कि किसी एक राज्य की प्रगति समग्र रूप से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देती है। उनका कार्य आत्मनिर्भरता और प्रगति की भारतीय भावना का प्रमाण है। उनकी विरासत यह याद दिलाती है कि क्षेत्रीय विकास राष्ट्रीय विकास का अभिन्न अंग है। यह सहकारी संघवाद के विचार का सबसे अच्छा उदाहरण है।”

रक्षा मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लोकतंत्र और सहकारी संघवाद की शक्ति में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपने 1.4 अरब लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर रहा है, बल्कि यह लोगों को यह आशा भी दे रहा है कि लोकतंत्र विकास प्रदान करता है और लोगों को सशक्त बनाता है।

श्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु दोनों में रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित करने के निर्णय का उदाहरण बताते हुए इस बात पर बल दिया कि विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पक्षपातपूर्ण राजनीति से परे है। उन्होंने कहा, “इन गलियारों का उद्देश्य घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। इन्हें निवेश आकर्षित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और भारत में रक्षा उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।” उन्होंने दक्षिण भारत के साथ उत्तर और पश्चिम भारत के सांस्कृतिक एकीकरण का उत्सव मनाने के उद्देश्य से काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम पहल पर भी प्रकाश डाला।

रक्षा मंत्री ने कलैग्नार करुणानिधि को एक विपुल लेखक, कवि और नाटककार बताया, जिनके कार्यों ने तमिल साहित्य और सिनेमा को समृद्ध किया। उन्होंने कहा, “तमिल भाषा और संस्कृति को प्रोत्साहन देने के उनके प्रयास उनके इस विश्वास पर आधारित थे कि किसी की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना और उसका उत्सव मनाना व्यापक भारतीय पहचान के लिए आवश्यक है।“ यह कार्यक्रम तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित किया गया था और इसमें मुख्यमंत्री श्री एमके स्टालिन और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेन्नई में नवनिर्मित अत्याधुनिक भारतीय तटरक्षक बल समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के भवन का उद्घाटन किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त, 2024 को तमिलनाडु के चेन्नई में नवनिर्मित अत्याधुनिक भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने वर्चुअल माध्यम से पुदुचेरी में क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र का भी शुभारंभ किया।  समुद्री बचाव समन्वय केंद्र चेन्नई बंदरगाह परिसर में और क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र पुदुचेरी में तटरक्षक एयर एन्क्लेव में स्थित है। इन इमारतों की स्थापना मजबूत समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपात स्थिति में कुशल प्रतिक्रिया प्रदान करने, समुद्री सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए की गई है।

समुद्री बचाव समन्वय केंद्र

इस अत्याधुनिक समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के निर्माण का उद्देश्य समुद्र में संकट में फंसे नाविकों और मछुआरों के लिए समुद्री बचाव कार्यों के समन्वय एवं प्रभावशीलता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है। यह जीवन की रक्षा करने और गंभीर परिस्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है। यह केंद्र स्थलीय और उपग्रह प्रणालियों के माध्यम से संकट की निगरानी के लिए नवीनतम उपकरणों के साथ स्थापित किया गया है और बचाव विमानों, जहाजों और अन्य के साथ खोज एवं बचाव प्रक्रियाओं में विशेषज्ञता वाले भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के उच्च प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा चेतावनी के वास्तविक समय प्रबंधन के लिए उन्नत संचार प्रणालियों और अन्य सुविधाओं से सुसज्जित है।

क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र

क्षेत्रीय समुद्री प्रदूषणरोधी कार्रवाई केंद्र का यह प्रतिष्ठान हिंद महासागर क्षेत्र में तटीय राज्यों से सटे समुद्री जल में समुद्री प्रदूषण, विशेष रूप से तेल और रासायनिक प्रदूषण को समाप्त करने की कार्रवाई के समन्वय के लिए अपनी तरह का पहला केंद्र है। इस केंद्र के निर्माण की घोषणा पहली बार रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 22 नवंबर, 2022 को कंबोडिया में आयोजित पहली भारत-आसियान बैठक के दौरान की थी।

इस केंद्र की स्थापना का नेतृत्व भारतीय तटरक्षक बल के पूर्वी क्षेत्रीय मुख्यालय ने चेन्नई बंदरगाह के परिसर में किया था। इसमें एक आपातकालीन सहायता केंद्र है जो समुद्री तेल प्रदूषण की घटनाओं की निगरानी के लिए भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों द्वारा चौबीसों घंटे कार्रवाई के लिए उपलब्ध रहेगा। यह केंद्र बंदरगाहों, तेल प्रबंधन एजेंसियों, सरकारी संगठनों और निजी प्रतिभागियों जैसे विभिन्न संगठनों को प्रदूषणरोधी कार्रवाई की तकनीकों में प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। यह समुद्र में तेल प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए मित्र देशों के कर्मियों को भी प्रशिक्षित करेगा। व्यावहारिक प्रशिक्षण में वास्तविक समय तेल रिसाव परिदृश्यों के अधिकतम जोखिम के लिए विभिन्न तेल प्रबंधन उपकरणों की वास्तविक तैनाती शामिल होगी।

भारतीय तटरक्षक बल एयर एन्क्लेव

यह सुविधा भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और पुदुचेरी और तमिलनाडु के दक्षिणी तट पर समुद्री सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एयर एन्क्लेव चेतक और एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन से सुसज्जित होगा। ये दोनों हेलीकॉप्टर स्वदेश निर्मित हैं और जमीन से तथा समुद्र में गश्त करने वाले तटरक्षक जहाजों से समुद्री गश्त, खोज एवं बचाव तथा ऐसे अन्य अभियानों को पूरा करने में सक्षम हैं।

इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकारों के गणमान्य व्यक्ति और मित्र देशों के अतिथि सम्मिलित हुए।

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गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद, गुजरात में अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की लगभग ₹1003 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद, गुजरात में अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (AMC) की लगभग ₹1003 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम से पहले केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने अहमदाबाद के थलतेज में ‘ऑक्सीजन पार्क’ का उद्घाटन किया और वेजलपुर में ‘मिशन 3 मिलियन ट्री योजना’ के तहत वृक्षारोपण किया। वहीं, उन्होंने मकरबा में नवनिर्मित स्विमिंग पुल एवं जिम का भी उद्घाटन किया।

AMC के विकास कार्यों के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज अहमदाबाद शहर में जिन विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया है, उनमें ₹730 करोड़ के विकास कार्य गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र और बाकी कार्य दो अन्य लोकसभा क्षेत्रों में किए गए हैं। श्री अमित शाह ने कहा कि लोकसभा सांसद के तौर पर पिछले पांच साल के उनके कार्यकाल में एक भी साल ऐसा नहीं बीता जिसमें म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और गुजरात सरकार ने गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र में एक वर्ष में ₹5,000 करोड़ के विकास कार्य नहीं किए हों। उन्होंने कहा कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र विकास के नए-नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है।

अमित शाह ने कहा कि आज हुए लोकोपयोगी कार्यों के तहत गांधीनगर लोकसभा में 21 परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ जबकि चार परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, वहीँ दो अन्य लोकसभा क्षत्रों में 18 परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ और दो के शिलान्यास हुए हैं। इनमें स्वच्छता से संबंधित, जन स्वास्थ्य से जुड़े काम, बच्चों को अच्छा प्लेटफॉर्म देनेवाले संस्थान की शुरुआत और पर्यावरण की रक्षा के लिए ऑक्सीजन पार्क के लोकार्पण जैसे विकास शामिल हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने आने वाली पीढ़ियों के लिए 100 दिनों में 30 लाख पेड़ लगाने का संकल्प किया है। उन्होंने कहा कि इस सराहनीय अभियान के साथ वे बहुत ही करीब से जुड़े हुए हैं। हर सोसाइटी के चेयरमैन, सेक्रेटरी, हर गांव के सरपंच, हर म्युनिसिपल काउन्सिलर और अन्य प्रबुद्ध जन को उन्होंने इस बारे में पत्र लिखे हैं और फ़ोन भी किए। श्री शाह ने अहमदाबाद के निवासियों से विनती की कि वह अपने परिवार के सदस्यों की संख्या के अनुसार अपनी सोसाइटी, आसपास की खाली जमीन या बच्चों के स्कूल में पेड़ लगाएं। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में हम जितनी कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं, उसके बदले हमें उतनी ही ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए पेड़ लगाने चाहिए। श्री शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वोर्मिंग – ये दोनों आज पृथ्वी और मानव के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा हैं। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश की जनता से ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि मां यदि जीवित हों तो उन्हें साथ रखकर वृक्षारोपण करें और यदि दिवंगत हो तो उनकी तस्वीर साथ रखकर वृक्षारोपण करना चाहिए। मातृऋण से मुक्त होने का इससे अच्छा कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता और ना ही इससे बड़ा कोई रास्ता हो सकता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने अहमदाबाद के निवासियों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चाहे कितने भी ऑक्सीजन पार्क बनाए, कितने भी मियावाकी जंगल बनाए, चाहे जितने पेड़ लगाए, लेकिन अगर हर अहमदाबादी एक पेड़ लगाएगा तो इनकी संख्या कई गुना अधिक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हम सबको हमारी जिम्मेदारी समझकर एक पेड़ लगाने का काम अवश्य करना चाहिए। पेड़ जब तक हमारी ऊँचाई से अधिक न हो जाए तब तक एक बच्चे की तरह उसका ध्यान रखकर इस काम को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का एक पेड़ माँ के नाम यह सिर्फ़ एक नारा नहीं है, यह जन आंदोलन है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 60 वर्ष बाद देश में किसी एक व्यक्ति को देश की जनता ने तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने का काम किया है और यह सौभाग्य श्री नरेन्द्र मोदी जी को मिला है। इसमें अहमदाबाद का भी योगदान है, अहमदाबाद की तीनों लोक सभा सीटें नरेन्द्रभाई की झोली में रख दी गई जबकि गुजरात ने 25 सीटें दी।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अहमदाबाद का भविष्य के अनुकूल विकास और विकसित अहमदाबाद हमारा संकल्प है। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद सम्पूर्ण विकसित शहर बनेगा, बिना धुएं का शहर होगा, हर एक घर में शौचालय वाला शहर बनेगा और हर एक के पास आरोग्य कार्ड होगा। अगले दो साल में हम ऐसा शहर बनाने का संकल्प पूरा करेंगे और अहमदाबाद को पूरे देश के शहरों में शीर्ष क्रम में लाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने सुंदर स्वीमिंग पुल, जिम बनाए हैं और साथ ही योग सिखाने की अच्छी व्यवस्था की है। इनके अलावा सुन्दर तालाब और ऑक्सीजन पार्क भी बनाए गए हैं।

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अंगदान मानव स्वभाव का सर्वोच्च नैतिक उदाहरण है – उपराष्ट्रपति

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री धनखड़ ने आज अंगदान की गहन महत्वपूर्णता को उजागर करते हुए इसे “एक आध्यात्मिक गतिविधि और मानव स्वभाव की सर्वोच्च नैतिक अभिव्यक्ति” के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि अंगदान केवल शारीरिक उदारता से परे जाता है और करुणा और निःस्वार्थता के गहरे गुणों को दर्शाता है।

जयपुर में आज जैन सोशल ग्रुप्स (JSG) सेंट्रल संथान और दधीचि देहदान समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अंगदाता परिवारों को सम्मानित करते हुए उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से अंगदान की दिशा में सचेत प्रयास करने का आह्वान किया, इसे मानवता की सेवा की महान परंपरा से जोड़ते हुए एक मिशन बनाने की बात की।
विश्व अंगदान दिवस की थीम “Be the Reason for Someone’s Smile Today” पर प्रकाश डालते हुए श्री धनखड़ ने सभी से आह्वान किया है कि वे अपने समाज की परंपरा को कायम रखते हुए अंगदान को भी इसी भावना से जोड़ें। उन्होंने कहा, “आप ऐसे समाज के सदस्य हैं जो हर मौके पर हर किसी की मुस्कान का कारण बनते हैं। इस अवसर को भी इस भावना से जोड़ें और संकल्प लें कि हर सप्ताह आप कुछ ऐसा करेंगे जिससे आपका व्यक्तिगत और पारिवारिक योगदान अंगदान के इस पवित्र कारण में शामिल हो सके।”

प्राचीन ज्ञान, “इदम् शरीरम् परमार्थ साधनम्!” का उद्धरण देते हुए, श्री धनखड़ ने मानव शरीर की महत्ता को व्यापक सामाजिक भलाई के साधन के रूप में रेखांकित किया और कहा कि यह शरीर समाज के व्यापक कल्याण के लिए एक उपकरण बन सकता है।
प्रतिभाशाली व्यक्तियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए जो योगदान करने की मजबूत इच्छा से प्रेरित हैं लेकिन एक महत्वपूर्ण अंग की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं, उपराष्ट्रपति ने कहा, “जब आप उनकी मदद करते हैं, तो हम उन्हें समाज के लिए एक बोझ से बदलकर एक संपत्ति बना देंगे,” जो अंग दान के महत्व को रेखांकित करता है।

अंग दान में बढ़ते ‘व्यावसायीकरण के वायरस’ पर चिंता व्यक्त करते हुए, श्री धनखड़ ने जोर दिया कि अंगों को आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए सोचकर दान किया जाना चाहिए। चिकित्सा पेशे को “दैवीय व्यवसाय” के रूप में संदर्भित करते हुए और कोविड महामारी के दौरान ‘स्वास्थ्य योद्धाओं’ की निःस्वार्थ सेवा को उजागर करते हुए, उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशे में कुछ व्यक्ति अंग दान के महान स्वभाव को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा, “हम अंग दान को कमजोर लोगों के शोषण का क्षेत्र नहीं बनने दे सकते जो चालाक तत्वों के व्यावसायिक लाभ के लिए हो।”
उपराष्ट्रपति ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर की याद दिलाते हुए, सभी से आग्रह किया कि वे हमारे शास्त्रों और वेदों में निहित ज्ञान पर विचार करें, जो ज्ञान और मार्गदर्शन का विशाल भंडार हैं।
लोकतंत्र में राजनीतिक भिन्नताओं को मान्यता देने के महत्व को रेखांकित करते हुए, श्री धनखड़ ने चेतावनी दी कि ये भिन्नताएँ राष्ट्रीय हित पर कभी भी हावी नहीं होने चाहिए। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र के प्रति पिछले खतरों, विशेषकर आपातकाल के दौरान, और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सतर्कता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
उपराष्ट्रपति ने आज कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि आपातकाल का काला अध्याय चुनावों के बाद समाप्त हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, “आपातकाल के दौरान हुए अत्याचारों को याद रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने ‘संविधान हत्या दिवस’ की पहल की है, ताकि हमारी नई-पीढ़ी को यह पता चल सके कि एक ऐसा कालखंड था जब उनके मौलिक अधिकार नहीं थे और सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए थे।”
अपने संबोधन में, श्री धनखड़ ने विशेष रूप से कॉर्पोरेट्स, व्यापार संघों, और व्यापार नेताओं से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और आयात को केवल उन वस्तुओं तक सीमित करने का आह्वान किया जो अत्यावश्यक हैं।

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कानपुर मण्डल की द्वितीय पेंशन अदालत (88वीं) का आयोजन सितम्बर के चतुर्थ सप्ताह में

कानपुर 17 अगस्त (सू0वि0) अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन कानपुर मण्डल यशवन्त सिंह ने बताया है कि उ0प्र0सरकार के सेवानिवृत्त/मृत राजकीय सेवकों के सेवानवृत्तिक लाभों से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान हेतु मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2024-25 की कानपुर मण्डल की द्वितीय पेंशन अदालत (88वीं) का आयोजन माह सितम्बर, 2024 के चतुर्थ सप्ताह में किया जाना प्रस्तावित है। अतः कानपुर मण्डल के जनपदों से ऐसे सेवानिवृत्त अथवा मृत राजकीय सेवकों के आश्रितों से अपेक्षित है कि वह निम्नवत प्रारूप पर अपना वाद पत्र तीन प्रतियों में पंजीकृत डाक से अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन, कलेक्ट्रेट कम्पाउण्ड, कानपुर मण्डल, कानपुर को ऐसे भेजें कि वह दिनांक 05 सितम्बर, 2024 तक प्राप्त हो जाये। उक्त तिथि के पश्चात प्राप्त वाद पत्रों को पेंशन अदालत में नहीं रखा जायेगा।

उन्होंने बताया है कि वादी से यह भी अपेक्षित है कि अपने वाद पत्र की एक प्रति अपने संबंधित कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष जहां अन्तिम तैनाती के समय कार्यरत थे, को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दें। पेंशन अदालत में किसी न्यायालय/शासन द्वारा निर्णीत मामले तथा किसी माननीय न्यायालय/शासन स्तर पर विचाराधीन एवं नीतिगत मामलों से संबंधित वाद पत्र पर विचार नहीं किया जायेगा। पेंशन अदालत में केवल पूर्णतः राजकीय कार्मिकों के प्रकरण ही स्वीकार किये जायेंगे।
उन्होंने बताया है कि सेवानिवृत्त अथवा मृत राजकीय सेवकों के आश्रितों से की वह प्रार्थी का नाम (पदनाम सहित), पिता/पति का नाम, कार्यालय जहां से सेवानिवृत्त हुये हैं, विभागाध्यक्ष का नाम, जन्म तिथि, सेवा में आने की तिथि, मृत्यु/से0नि0 तिथि, कार्यालयाध्यक्ष को पेंशन स्वीकृति/पुनरीक्षण हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की तिथि (साक्ष्य सहित), कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रकरण पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी को भेजे जाने की तिथि, पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी द्वारा आपत्ति का विवरण यदि कोई उठाया गया हो (प्रति संलग्न करे), यदि आपत्ति का उत्तर भेजा गया हो,तो विवरण दें (प्रति भी संलग्न करें), पेंशन अदालत से जो राहत चाहते हों, उसका विवरण औचित्य सहित दें, पत्र व्यवहार का पता (पिन कोड सहित), कोषागार का नाम जहां से पेंशन प्राप्त करते हों, अथवा चाहते हों, मैं भलीभांति समझता हूं/समझती हूं कि नीतिगत मामले अदालत में नहीं सने जायेंगे काननी मामले जैसे उत्तराधिकारी/संरक्षक प्रमाण पत्र के विवाद एवं कोर्ट केसेज से संबंधित मामले आदि पेंशन अदालत में नहीं उठाये जायेंगे। इसके अतिरिक्त यदि किसी मामले में शासन स्तर पर विभागीय मंत्री के अनुमोदन से निर्णय हो चुका है एवं संविदा मामले भी नहीं सने जायेगें। न्यायालय में विचाराधीन मामले भी तब तक ग्राहय नहीं होंगे जब तक कि याची द्वारा शपथ पत्र के साथ यह घोषणा न की जाये कि वह न्यायालय से बाहर समझौता चाहता है तथा अपना वाद पापस लेने हेतु सहमत है।

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प्रदेश के राजकीय/निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक सत्र अगस्त 2024 हेतु प्रवेश प्रक्रिया अन्तिम तिथि 16 अगस्त

कानपुर 17 अगस्त, 2024 (सू0वि0)*
प्रधानाचार्य राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पाण्डु नगर कानपुर ने बताया कि प्रदेश के राजकीय/निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक सत्र अगस्त 2024 हेतु प्रवेश प्रक्रिया अन्तिम तिथि 16 अगस्त, 2024 तक निर्धारित थी, को राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद अलीगंज लखनऊ द्वारा जनहित में पुनरीक्षित कर प्रवेश की अंतिम तिथि दिनांक 20 अगस्त, 2024 रात्रि 12ः00 तक (अवकाश सहित) विस्तारित किया गया है। अतः प्रथम चरण चयन परिणाम में चयनित अभ्यर्थी जिनके द्वारा निर्धारित समयावधि में प्रवेश नहीं लिया गया है, वे अभ्यर्थी अब दिनांक 20 अगस्त, 2024 तक प्रवेश ले सकते हैं।

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महानिदेशक प्रान्तीय रक्षक दल/विकास दल एवं युवा कल्याण उ0प्र0 ने जनपद कानपुर नगर में 28वें युवा उत्सव 2024 के आयोजन हेतु दिशा- निर्देश जारी किए

कानपुर नगर (सू0वि0)* मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने बताया कि महानिदेशक प्रान्तीय रक्षक दल/विकास दल एवं युवा कल्याण उ0प्र0 के द्वारा जनपद कानपुर नगर में 28वें युवा उत्सव 2024 के आयोजन हेतु दिशा- निर्देश दिये गये है।
राष्ट्रीय युवा उत्सव- 2024 हेतु युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों को Innovation in Science and Technology की थीम आवंटित की गयी है। जिसमें निम्न प्रतियोगिताओं का आयोजन जनपद स्तर से लेकर राज्य स्तर तक किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि थीमेटिक अवयव के अन्तर्गत प्रतिभागियों द्वारा Innovation in Science and Technology की थीम पर आधारित प्रोजेक्ट का प्रदर्शन किया जायेगा, जिसमें एकल एवं समूह दोनों अलग-अलग रूप में प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी।
सांस्कृतिक अवयव के अन्तर्गत 04 प्रतियोगिताओं Group Folk Dance, Group Folk Song, Solo Folk Dance, Solo Folk Song का आयोजन जनपद से राज्य स्तर पर कराया जायेगा। इसके अतिरिक्त जीवन कौशल अवयव के अन्तर्गत 04 प्रतियोगिताओं Story Writing, Poetry, Declamation, Painting का आयोजन जनपद स्तर से लेकर राज्य स्तर तक किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि युवा उत्सव 2024 के आयोजन के सम्बन्ध में भारत सरकार की गाईड लाइन के अनुसार प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की आयु 12 जनवरी, 2025 को 15 वर्ष से 29 वर्ष होनी अनिवार्य है एवं जनपद स्तर पर विजेता प्रतिभागी मण्डल स्तर पर प्रतिभाग करेंगें। जनपद स्तर के युवा उत्सव का आयोजन माह सितम्बर, 2024 में कराया जाना प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि जनपद में आयोजित होने वाले युवा उत्सव में आयोजित होने वाली विधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार अपने स्तर से कराकर अधिक से अधिक युवाओं की प्रतिभागिता आपसे अपेक्षित है। युवा उत्सव में प्रतिभागिता हेतु प्रतिभागियों के आवेदन दिनांक 10 सितम्बर, 2024 तक कार्यालय जिला युवा कल्याण एवं प्रा०वि०द० अधिकारी, विकास भवन, कानपुर नगर अथवा dywokanpurnagar@gmail.com पर प्रेषित कराना सुनिश्चित करें। जिससे कि इच्छुक प्रतिभागी जनपद स्तरीय युवा उत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग कर सकें।

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डा० अफ़रोज़ अहमद, सदस्य/न्यायाधीश राष्ट्रीय हरित अधिकरण,प्रधान न्यायपीठ की अध्यक्षता में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला पर्यावरण समिति की समीक्षा बैठक संपन्न

डा० अफ़रोज़ अहमद, सदस्य/न्यायाधीश मां० राष्ट्रीय हरित अधिकरण,प्रधान न्यायपीठ, नई दिल्ली की अध्यक्षता में आज सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिला पर्यावरण समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई।बै ठक में क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पॉवर प्वाइंट के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया गया। अध्यक्ष द्वारा जिला पर्यावरण समिति की बैठक में उपस्थित समस्त संबंधित विभागों के अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए:-

* नगर आयुक्त नगर निगम यह सुनिश्चित करे कि c&d waste, कंटामिनेटेड वेस्ट एवं legacy waste का निस्तारण उचित प्रकार से हो।

* मेट्रो निर्माण के दौरान रेन वाटर हार्वेस्टिंग रवेंसिंग सिस्टम का कार्य कराया जाए ।

* नगरीय क्षेत्र में नगर निगम तथा ग्रामीण क्षेत्रों में नगर पंचायतों से निकलें वाले कूड़े का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।

* वन विभाग यह सुनिश्चित करे कि प्राथमिक विद्यालयों में अधिक से अधिक वृक्षारोपण कराया जाए तथा बाल वन निर्मित किए जाने हेतु कॉलेजों तथा विश्विद्यालयों में जागरूकता कार्य्रकम आयोजित किए जाए ।

* चिकित्सा विभाग यह सुनिश्चित करे कि etp/stp तथा bio medical waste की निगरानी एवं निस्तारण उचित प्रकार से कराया जाए ।

* E वेस्ट के उचित निस्तारण हेतु e waste recyclers की निगरानी की जाय तथा ई वेस्ट जनित करने वाले उद्योगों द्वारा स्वयं निस्तारण की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए।

* यातायात विभाग द्वारा शहर में ध्वनि प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण की रोकथाम हेतु प्रभावी कार्यवाही करना सुनिश्चित किया जाए ।

* जल निगम द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए की शहर के शेष अनटैप्ड नालों को टैप किए जाने हेतु शीघ्र DPR प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें ।

* प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जाजमऊ क्षेत्र के भूगर्भ जल का नमूना लेकर लखनऊ स्थित प्रयोगशाला से टेस्ट कराना सुनिश्चित किया जाए ।

* नमामि गंगे २० एमएलडी CETP प्लांट एवं ३० एमएलडी panka STP plant में वृक्षारोपण करवाए।

* परियोजना प्रबंधक उत्तर प्रदेश जल निगम को निर्देशित करते हुए कहा कि सीवेज प्रबंधन हेतु समस्त एसटीपी का संचालन पूर्ण क्षमता एवम् नियमानुसार किया जाए ।

जिला वन अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि वेटलैंड एरिया में जियो टैगिंग के साथ पिलर्स लगाना सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह, नगर आयुक्त सुधीर कुमार , उपध्यक्ष, केडीए,क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,पर्यावरण अभियंता,पर्यावरण अभियंता, उ0प्र0 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड , मुख्य चिकित्सा अधिकारी, यूपी जलनिगम(नगरीय), परियोजना प्रबंधक यूपी जलनिगम(ग्रामीण) समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस आयोजित

कानपुर 14 अगस्त,  (सू0वि0)* विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के आडिटोरियम में किया गया। इस अवसर पर अतिथिगणों द्वारा ऑडिटोरियम परिसर में विभाजन विभीषिका से सम्बन्धित लगायी गयी अभिलेख प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया तथा उपस्थित सभी ने विभाजन विभीषित से प्रभावित हुए लोगों के लिए 02 मिनट का मौन रखा। इसके पश्चात् विभाजन विभीषिका से पीड़ित परिवार के परिवारिकजनों को सम्मानित किया गया, जिसमें महेश मेघानी, लालचन्द्र, रमेश राजपाल, बालचंद लालवानी, शांति प्रकाश पूरास्वानी, राजेन्द्र आडवाणी, दिलीप बालानी, सरदार दलजीत सिंह, मुरलीधर आहूजा, नरेश तकवानी, शामिल रहे, इसी प्रकार सिख वेलफेयर सोसाइटी के गुरविंदर सिंह छाबड़ा (प्रदेश अध्यक्ष), डॉ0 मनप्रीत सिंह भट्टी (प्रदेश महामंत्री), हरमिंदर सिंह बिंद्रा (प्रदेश उपाध्यक्ष), हरमिंदर सिंह पुनी (प्रदेश उपाध्यक्ष), चरणजीत सिंह, गगनदीप सिंह, गगन सोनी, जसबीर जुनेजा, गुरविंदर सिंह छाबडा (विक्की) शामिल रहे।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि 14 अगस्त विभाजन विभीषिका दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के पश्चात् देश को दो भागों में विभाजित किया गया, जिसमें आबादी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना था। विभाजन विभीषिका के दौरान काफी परिवार उससे प्रभावित हुये तथा लाखों लोगों की जान गयी, ऐसे प्रभावित हुये लोगों की स्मृति में विभाजन विभीषिका दिवस मानाया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा विभाजन दोबारा न हो, इसके लिये हमे एक राष्ट्र की अवधारणा के साथ चलना है, हमे अपने अन्दर राष्ट्र प्रेम की भावना को जागाना होगा। उन्होंने कहा कि तुम यह न सोचो की देश तुम्हारे लिये क्या कर रहा है, तुम यह सोचो की देश के लिये तुम क्या कर रहे हो। हम सब को मिलकर देश को आगे बढाने में अपना योगदान देना है और देश में अमन, चैन कायम रखना है।
मा0 महापौर प्रमिला पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि विभाजन विभीषिका 14 अगस्त वह दिन है, जिसको भुलाया नही जा सकता, देश का किस प्रकार विभाजन हुआ और उसमें कितने परिवार प्रभावित हुये और इसमें सबसे ज्यादा सिख व पंजाबी समाज के लोग प्रभावित हुये उसका स्मरण कर जान गवानें वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनको नमन करने का दिन है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देशवासी के मन में देश प्रेम की भावना होनी चाहिये, आज का दिन राष्ट्र में एकता और भाईचारे के बंधन की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का दिन है। इसलिये हम सब मिलकर वही कार्य करें, जो देश हित में हो।
मा0 विधायक सरोज कुरील ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम उन अनगिनत लोगों को याद करते है, जो विभाजन की भयावहता के कारण प्रभावित व पीड़ित हुये यह उनके साहस को नमन् करने का दिन है।
मा0 विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि देश के लिये यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाना पड रहा है। हमे आजादी कैसे मिली, इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ी, किसको चुकानी पडी और विभाजन कैसे हुआ इसकी जानकारी हमारे देश की युवा पीढ़ी को देनी होगी।
उन्होंने कहा कि विद्यालय के बच्चों को यह जानना आवश्यक है कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 1947 की दुखद घटनाओं और प्रभावित हुये लोगों की दृढता का सम्मान करने के महत्व पर जोर दिया जाये। 14 अगस्त विभाजन की मानवीय कीमत की याद दिलाता है जिसके कारण भारत के इतिहास में सबसे बडा सामूहिक पलायन हुआ, जिससे करोडो लोग प्रभावित हुये। इस विभाजन की पुनरावृत्ति देश में दोबारा न हो ऐसा लगातार प्रयास किया जाना चाहिये।
इस अवसर पर सिख समाज के महेश मेघानी व विक्की छाबडा ने अपने परिवार पर बीते हुये दर्द को भी साझा किया।
कार्यक्रम में मा0 मेयर प्रमिला पाण्डेय, मा0 विधायक कल्याणपुर नीलिमा कटियार, मा0 विधायक घाटमपुर सरोज कुरील, मा0 जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, अपर जिलाधिकारी (नगर) डॉ0 राजेश कुमार, अपर नगर आयुक्त मो0 आवेश सहित सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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