भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज कानपुर के इतिहास विभाग के तत्वाधान में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘कानपुर थ्रू दि एजेज अनवेलिंग द लेयर्स ऑफ़ हिस्ट्री ‘(युग -युगीन कानपुर) का उद्घाटन दिनाँक आज 28 मार्च 2025 को किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रवीण कुमार मिश्रा, सचिव प्रोबीर कुमार सेन, प्राचार्य प्रोफेसर सुमन, संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन तथा कोषाध्यक्ष दीपाश्री सेन, तथा संगोष्ठी की संयोजिका डाॅ. मनीषा दीवान ने सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से किया। प्रोफेसर सुमन ने अपने स्वागत उद्बोधन के द्वारा सभागार में उपस्थित सभी बुद्धिजीवी अतिथियों का महाविद्यालय संगोष्ठी में स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। डाॅ. मनीषा दीवान ने विषय प्रवर्तन के द्वारा कानपुर के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता बाल मुकुंद पांडेय (राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली), चेयर पर्सन संजयश्री हर्ष, (राष्ट्रीय संगठन सह- सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली), गेस्ट ऑफ़ ऑनर प्रोफेसर अनिल कुमार मिश्रा (संयोजक इतिहास विषय, सी. एस. जे. एम. यू. कानपुर), स्पेशल स्पीकर प्रोफेसर विग्नेश त्यागी (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ), ने अपनी गरिमामय उपस्थिति तथा उद्बोधन से संगोष्ठी को गौरवान्वित किया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम तथा द्वितीय तकनीकी सत्र में देश के विभिन्न भागों से आए हुए इतिहास के लगभग 80 अध्येताओं व शोधार्थियों द्वारा कानपुर के परंपरागत इतिहास की पुर्नव्याख्या करते हुए ऐतिहासिक कानपुर की विशिष्ट उपलब्धियों, चुनौतियों ,समस्याओं आदि विषयों का मंथन कर नई रोशनी डाली गई। शिक्षा शास्त्र विभागध्यक्षा प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने मंच संचालन की महती भूमिका का निर्वाह करते हुए संगोष्ठी को दिशा प्रदान की। प्रथम तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. प्रीति सिंह, तथा द्वितीय तकनीकी सत्र का संचालन प्रो. मीनाक्षी व्यास ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. निशी प्रकाश के निर्देशन में महाविद्यालय की सभी शिक्षिकाओं ने अभूतपूर्व सहयोग प्रदान किया।
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वर्ष 2025 के विश्व जल दिवस का विषय ग्लेशियर संरक्षण है। डॉ. राजेश वाजपेयी जी, फहद राज़ी जी, प्राचार्या प्रो सुमन, प्रो निशि प्रकाश, प्रो गार्गी यादव, डॉ प्रीति सिंह ने माँ सरस्वती के समक्ष माल्यार्पण किया। जल संरक्षण और भविष्य में इसके महत्व को पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्राओं को जागरूक किया गया । उन्होंने छात्राओं से साझा किया कि वॉटर फुटप्रिंट का किस प्रकार प्रबंधन किया जाना चाहिए। जल संरक्षण के चार महत्वपूर्ण उपाय के रूप में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वॉटर रिसाइकल, रियूज वॉटर और वॉटर फुटप्रिंट की मैपिंग की चर्चा की गई।
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अनुष्का बताती हैं, पहले मैंने लोगो को मैन्युअल रूप से ड्रा करके बनाया, मेरी प्रेरणा रानी लक्ष्मीबाई थी तो
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर
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