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कानपुर

कानपुर नगर में मेगा कोविड-19 टीकाकरण अभियान का आयोजन कल : मुख्य चिकित्सा अधिकारी

कानपुर 26 सितंबर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया है कि कल 27 सितंबर 2021 को जनपद कानपुर नगर में मेगा कोविड-19 टीकाकरण अभियान का आयोजन किया जा रहा है| उक्त अभियान के अंतर्गत जनपद में दिनांक 27 सितंबर 2021 को 150000 डोज(128000 लक्ष्य + 22000 मेगा सिटी लक्ष्य) लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है| जनपद में ग्रामीण क्षेत्र में 257 कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में 283 टीमों के द्वारा 97050 डोज एवं नगरी क्षेत्र में 98 कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में 149 टीमों द्वारा 53150 डोज लगाया जाएगा| इसी प्रकार मेगा अभियान में जनपद के 355 कोविड वैक्सीनेशन सेंटर पर 432 टीमों के द्वारा टीकाकरण शस्त्र का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 150200 डोज लगाया जाना निर्धारित किया गया है| आम जनता से अपील है कि अभी भी जिन लोगों ने कोविड-19 टीकाकरण नहीं कराया है, अवसर का लाभ उठाते हुए अपने नजदीकी टीकाकरण सत्र पर पहुंचकर टीकाकरण कराएं| टीकाकरण हेतु ऑनलाइन एवं ऑन स्पॉट दोनों माध्यम से पंजीकरण कराकर टीकाकरण कराया जा सकता है| कोविड टीकाकरण के संबंध में किसी भी जानकारी हेतु डॉ0 ए0के0 कनौजिया, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी-9793746044, डॉ0 राजेश शर्मा, चिकित्सा अधिकारी-9936773141 एवं श्री शैलेंद्र मिश्रा, जिला स्वा0शि0 एवं सू0 अधिकारी के नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं|
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क़बीरा खड़ा बाज़ार में सब की माँगें ख़ैर

क़बीरा खड़ा बाज़ार में सब की माँगें ख़ैर .. न किसी से दोस्ती न ही किसी से बैर, संत कबीर दास जी की ये पंक्तियाँ मेरे दिल के बहुत क़रीब है।

ये सोच किसी साधु महात्मा या पीर की ही हो सकती है आम तौर पर ऐसी हमारी धारणा है मेरे विचार में हर इक इन्सान की ऐसी सोच हो सकती है बशर्ते ..उसको ये समझना होगा कि कुछ भी हमारी ज़िंदगी में होता है किसी का आना जाना,किसी से लेना देना ,किसी से नुक़सान ,किसी से फ़ायदा ,किसी से मान और अपमान मिलना ..ये सब पहले ही से तय हो चुका होता है हमारे पिछले जन्मों के करमो के अनुसार ।जैसा बीज हम बोते है वही काटते है
अब अगर ये बात हमें समझ में आ जाये कि हमें अपना किया हुआ ही मिल रहा है तो हम कभी किसी और को दोष नहीं दे पायेंगे।किसी से अच्छा किया होता है तो वो दोस्त बन कर आ जाता है और अगर किसी से बुरा किया हो तो वह किसी न किसी रूप में आ कर दुश्मनी ही निभायेगा।

मन से ज़्यादा कुछ और उपजाऊ नही है ।वहाँ जो भी बोयेंगे वही उगेगा ,चाहे वो विचार नफ़रत का हो या फिर प्रेम का।
इक सकून भरा जीवन जीने के लिए अच्छा और पोजीटिव ही सोचना बेहतर है।

इक सच्चा इन्सान..पीर.. साधु महात्मा ऐसी ही सोच का मालिक होता हैं हमे अपने ही करमो पर लगातार नज़र ,अपनी सोच पर निरन्तर वार करने से ही इक सुन्दर सोच का निर्माण होगा। हमे खुद अपने को ही देखना है किसी दूसरे को नही .. तभी हमारी वो अवस्था बन सकेगी।

मगर अक्सर सुनने में आता है “दुनिया ऐसी नहीं है जनाब !!
जैसी आप समझते हैं “बहुत ख़राब है वग़ैरह वग़ैरह..भले कोई कैसा भी हो “हम शुरूआत तो खुद से कर ही सकते है “दुनियाँ कोई नहीं बदल सका आज तक ,मगर खुद को बदलना हमारे ही हाथ है ..दोस्तों बुरा कोई भी नहीं मगर संस्कारों की कमी की वजह से ,हालातों की वजह से , हमारी अपनी परवरिश जिस तरह हुई हो हम वैसा ही व्यवहार करते हैं।
कई बार हर बुराई हम बेधड़क होकर करते जाते है बिना सोचे समझे और अंजाम हमारी आत्मा को भुगतना पड़ता है हमे खुद भी नहीं पता होता कि हम अनजाने में कितना ग़लत कर रहे होते है दूसरों से ज़्यादा हम खुद अपनी आत्मा को धोखा दे रहे होते हैं .. ऐसी स्थिति वाक़ई मे दयनीय है

“चला चली की बेला है यारा
न कोई दोस्त न कोई दुश्मन
तू तो बस अकेला है यारा “

कोशिश तो हमारी यही होनी चाहिए कि हमारा नाम
देने वालों में हो न की लेने वालों में,बचाने वालों मे हो न कि मारने वालो मे ,
बनाने वालों में हो ,न की तोड़ने वालों में ..
वो चाहे तो किसी का दिल हो ,किसी का घर हो ,किसी का विश्वास हो या फिर किसी का व्यापार ।
मेरी रब से यही दुआ है दोस्तों
कि हम किसी का बुरा न माँग कर
सब की खैर ही माँगे ।इसमें हमारा कुछ भी घटेगा नहीं बल्कि मन मे
शांति और सकून बढ़ ज़रूर जायेगा ..जिस शान्ति के लिये हम कहाँ कहाँ नहीं भटकते यें कहीं बाहर नहीं है दोस्तों .. ये हमारे सब के अन्दर ही है जिसे सिर्फ़ जगाने की ज़रूरत है।

दोस्तों
ये इतना मुश्किल है भी नहीं ।
बस अधरों पर सुन्दर मुस्कान,आँखें बंद और अपने माथे से सलवटो को हटा कर पवित्र मन से ,खुले दिल से सब की खैर ही तो माँगनी है ।
फिर देखिए कमाल !
मन भी सुन्दर और तन भी सुन्दर होगा । बिना इत्र लगाये मन भी महकेगा और तन भी।

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रूढ़ियां

आज मैं कुछ जल्दी ही घर आ गई थी। बरसात का मौसम था और मौसम में घनी बदली छाई हुई थी। हवा के झोंके रह-रहकर मेरे गालों को सहला जाते थे। इस वक्त मुझे चाय की बड़ी तलब लगी हुई थी तो अपने लिए चाय बना कर मैं फिर से बालकनी में आ गई। मैं इन पलों को खोना नहीं चाहती थी। मैं बाहर भागते हुए ट्रैफिक को देख रही थी, कभी किसी को एक दूसरे से उलझते हुए देख रही थी तो कभी यूं ही नजरें इधरउधर घुमा लेती। मुझे अचानक अपनी कमर पर दो हाथ घेरते हुए से महसूस हुए। सोनू ने बाहों में जकड़ कर कहा, “क्या बात है! आज बड़ी फुर्सत में हो”।
मैं:- “अरे तुम! हां आज जल्दी फ्री हो गई तो घर आ गई। तुम कैसे जल्दी आ गए।”
सोनू:- “तुम्हारे सेंटर पर फोन किया था तो पता चला कि तुम घर चली गई हो तो मैं तुम्हें सरप्राइज करने के लिए आ गया।”
मैं:- “रुको, मैं तुम्हारे लिए चाय लेकर आती हूं।”
सोनू:-  “चाय के साथ में कुछ नमकीन भी प्लीज।”
मैं:- “भुक्खड़”!
सोनू:- “चाय के साथ कुछ मीठा वगैरह भी लेती आना।”
मैं:- “चाय के साथ कोई मीठा भी खाता है क्या? नहीं है मीठा” और मैं चाय लेने चली गई। चाय के साथ मठरी चवाड़ा लेकर बालकनी में आ गई।
सोनू:- “तुम्हारी क्लास और बच्चे कैसे चल रहे है मतलब कि तुम्हारा सेंटर कैसा चल रहा है”।
मैं:- “बस ठीक ही चल रहा है। ऑफलाइन तो कुछ ऑनलाइन काम करना पड़ रहा है। नेटवर्क प्रॉब्लम तो है ही। बस चल रहा है।”
सोनू:- “सभी टीचर आ रहे हैं क्या?”
मैं:- “अब पढ़ाना है तो आना ही पड़ेगा। घर बैठे तो सैलरी मिलेगी नहीं।”
सोनू:- “हां यह भी सही है।”
मैं:- “और तुम कहां गायब रहते हो आजकल? दिखाई नहीं दिए कई दिनों से।”
सोनू:- “घर जाने की सोच रहा था, तुम्हारे और मेरे बारे में घर में बताना भी है और शादी की बात भी कर करनी है।
मैं:- “कब जा रहे हो ?”
सोनू:- “जाऊंगा वीकेंड पर।”
मैं:- “मुझे टेंशन रहेगा जब तक तुम मुझे बता नहीं दोगे कि तुम्हारे घर वालों ने क्या कहा।”
सोनू:- “परेशान मत हो, मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला। तुमने अपनी मां से बात की।”
मैं:- “हां, वह मिलना चाह रही थी तुमसे। अगले महीने वह यहां आ रही है।”
सोनू:- “ठीक है मिल लेंगे तभी।”
मैं:- “कास्ट अलग है हमारी, पता नहीं तुम्हारे घर वाले हमारे रिश्ते को स्वीकार करेंगे या नहीं”।
सोनू:- “देखता हूं यार, सब ठीक होगा। टेंशन ना लो।” मैं हंस देती हूं।
मुझे और सोनू को रहते हुए करीब दो साल हो रहा था और अब हम इस रिश्ते को समाज की रजामंदी की मोहर लगा देना चाहते थे । मैं और मेरी मां अकेले ही रहते थे। पापा को मैंने बचपन में ही खो दिया था। मेरी परवरिश मेरी मां के कांधों पर थी। उन्होंने मेरे लिए दूसरी शादी भी नहीं की और अब उम्र के इस पड़ाव पर मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी। हमारी जिंदगी सोनू के जवाब पर टिकी थी। इन्हीं विचारों में किचन के काम निपटाती रही। जब कमरे में आई तो देखा सोनू लेटा हुआ टीवी देख रहा है।
मैं:- अरे तुम गए नहीं अभी तक?”
सोनू:- “आज मूड नहीं हो रहा। बारिश भी देखो कितनी है, जरा हल्की हो फिर जाता हूं।” मैं सोनू की बगल में आकर बैठ गई।
मैं”:- “सुनो तुम्हारे घरवाले मान तो जाएंगे ना।”
बदले में सोनू ने मेरा हाथ अपने हाथ में दबाकर आश्वासन दिया। सोनू टीवी देखते-देखते सो गया फिर मैं भी उसी के बगल में सो गई। सुबह उठते ही सोनू बोला, “रात को कुछ खाने को नहीं दिया। बड़ी जोर की भूख लगी है, कुछ अच्छा खाने को दो”।
मैं:- “दस मिनट रुको जल्दी से पोहा बना देती हूं।”
सोनू:- “ठीक है! जल्दी से दो।”
और मैं जल्दी से किचन में जाकर पोहा बनाने की तैयारी में जुट गई। आधे घंटे के बाद सोनू नाश्ता करके जाने लगा। सोनू:- “मैं जा रहा हूं, कल सुबह ही घर के लिए निकल जाऊंगा। शायद शाम को ना आ पाऊं।” मैंने सहमति में सिर हिलाया फिर सेंटर जाने के लिए तैयारी करने लगी।
मेरे दो दिन उहापोह में बीते कि सोनू के माता पिता ने क्या जवाब दिया होगा। ट्यूशन में भी काम का प्रेशर बढ़ रहा था, बच्चों के एग्जाम करीब आ रहे थे सो उनके लिए पेपर बनाने का भी टेंशन था लेकिन दिमाग में यही चल रहा था कि सोनू जल्दी से जवाब दे दे तो सर से बोझ हल्का हो। तभी फोन बजता है स्क्रीन पर देखा तो मां का फोन था। मै:- “हेलो! कैसी हो मां ? सब ठीक तो है ना ?
मां:- “हां.. हां सब ठीक है। तुम कैसी हो? आज अपने सेंटर नहीं गई क्या?”
मैं:- “बस कुछ देर हुआ मैं घर पहुंची हूं।”
मां:- “अच्छा सुन मैं तेरे पास आ रही हूं। मन नहीं लग रहा था। तेरी चिंता हो रही थी। कुछ दिन के लिए आ जाती हूं तेरे पास।”
मै:- “ऐसे तो सब ठीक है मां यहां पर लेकिन तुम आना चाहती हो तो आ जाओ। तुम्हें भी चेंज मिल जाएगा।”
मां:- “ठीक है, दो दिन बाद निकलूंगी। कुछ लाना है तो बोल देना।”
मैं:- “नहीं किसी चीज की जरूरत नहीं है। ठीक है। बाय मां।”
मां को सोनू से मिलवाने का समय आ रहा था लेकिन सब कुछ सोनू के जवाब पर निर्भर था। मुझे कुछ भूख सी महसूस हुई और मैं किचन में मैगी बनाने लगी।
चार दिन बाद सोनू वापस आया। उसका मुंह उतरा हुआ था। उसे देखकर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई।
मैं:- “क्या हुआ ? ऐसे क्यों हो? मां पिताजी ने क्या कहा?” सोनू:- “कुछ नहीं जिसका डर था वही हुआ उन्होंने मना कर दिया, बोले कि अपने समाज में ही शादी करेंगे। बहुत समझाया लेकिन नहीं मानते वो।”
मैं कुछ बोल नहीं पायी। आज के वक्त में जब समय इतना बदल गया है, स्त्री पुरुष के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है तब ऐसी मानसिकता पर गुस्सा आने लगता है लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी। मैं रोआंसी हो गई।
सोनू:- “कोई बात नहीं हम कोर्ट मैरिज कर लेंगे।
मैं:- ” नहीं घरवालों को नाराज करके शादी नहीं करनी है हमें। मैं उन्हें मनाने की कोशिश करूंगी।”
सोनू :- “कोई फायदा नहीं। मैं बहुत कोशिश कर चुका हूं।” मैं:- “फिर भी मैं एक बार और कोशिश करूंगी। मम्मी आने वाली है सोच रही हूं तुमको मिलाऊं या नहीं।”
सोनू:- “क्यों मम्मी से मिलने में क्या हर्ज है?”
मैं:- “हर्ज तो कुछ नहीं लेकिन कहूंगी क्या तुम्हारे बारे में। तुम्हारे मम्मी पापा से मिलने के बाद ही मैं तुम्हारे बारे में मम्मी से बात करूंगी।”
सोनू:- “जैसा ठीक लगे तुम्हें।”
मैं:- “मम्मी को जाने दो फिर तुम्हारे मम्मी पापा से बात करती।
अगले दिन सुबह-सुबह बस स्टाप पर मां को लेने पहुंची। उन्हें लेकर घर आई और ऑनलाइन क्लासेस लेने के लिए लैपटॉप के सामने बैठ गई। घंटे भर बाद देखा कि मां चाय के लिए मेरी राह देख रही है।
मां:- “चलो जल्दी! चाय तैयार है। हर काम धीरे करती हो। पता नहीं ससुराल में कैसे सब संभालोगी?  मुझे बाजार भी जाना है। किचन में सब अस्त-व्यस्त पड़ा है। कुछ जरूरत का सामान भी लाना है।”
मैं:- “आ रही हूं मां! आते ही शुरू हो गई। बाजार कल चलेंगे। कल मैं जल्दी फ्री हो जाऊंगी तब बाजार चलेंगे। आज बहुत बिजी शेड्यूल है।”
मां:- “ठीक है तेरी पसंद के आलू के पराठे बनाने वाली हूं। खाएगी ना?”
मैं:- “हां तुम्हारे हाथ का आलू का पराठा क्यों नहीं खाऊंगी मैं। रोज-रोज थोड़े ही मिलता है मुझे”। और मां की गोद में सर रख दिया
मां:- “क्या बात है कुछ परेशान लग रही हो? सब ठीक तो है?
मैं:- “नहीं बस ऐसे ही। सेंटर की परेशानी रहती है एग्जाम करीब आ रहे हैं तो काम का प्रेशर भी ज्यादा हो गया है।”
चार दिन बाद मां चली गई तब मैंने सोनू से उनके मम्मी पापा से बात करने के लिए कहा।
शाम में जब वह घर आया तो साथ में खाने का पार्सल भी लेता आया।
मैं:- “यह क्यों ले आए मैं घर में ही कुछ बना लेती थी।
सोनू:- “आ रहा था तो गरमा गरम समोसे दिखे तो ले लिया।”
मैं:- “फोन लगाओ अपनी मम्मी को।”
सोनू:-  “हूं” और नंबर मिलाने लगता है। कुछ देर बाद उसकी मां फोन उठाती है।
सोनू की मां:- “हेलो बेटा! बोलो।”
मैं:- “आंटी नमस्ते! मैं रितिका सोनू की दोस्त बोल रही हूं।” आंटी:- “बोलो बेटा।”
मैं:- “आंटी आपसे कुछ बात करनी थी। सोनू ने मेरे और अपने बारे में आपको बताया होगा।
आंटी:- “हां! बताया था और उसने तुम्हें हमारा जवाब भी बता दिया होगा।”
मैं:- “जी क्या सिर्फ एक उसी वजह से आप मुझे और सोनू को दूर कर देना चाहती हैं?  मैं पूरी कोशिश करूंगी कि मैं आपके परिवार में पूरी तरह ढल जाऊं। मुझे एक मौका तो मिलना ही चाहिए। हम दोनों काफी वक्त से साथ में हैं और एक दूसरे को खोना नहीं चाहते। आप एक बार सोचिए तो सही।”
आंटी:- “नहीं बेटा! मेरा एक ही बेटा है और उसकी शादी मैं अपने समाज में ही करना चाहती हूं। कल को कोई ऊंच-नीच हो गई तो मैं समाज में कहाँ मुंह दिखाऊंगी। बेहतर होगा कि तुम सोनू को छोड़ दो।”
मैं कुछ कह नहीं पायी। आंखों में से आंसू टपकने लगे।
सोनू:- “मैंने कहा था कि वो नहीं मानेंगी पर तुम भी जिद लेकर बैठी थी। हो गई तसल्ली।”
मैं:- “अच्छा एक बात बताओ। क्या शादी के बाद मुझे तुम्हारे घर में प्रेम और सम्मान मिल पायेगा? क्या हम दोनों शांति से जीवन बिता पायेंगे? मेरे और तुम्हारी मां के बीच तुम अपना व्यवहार कितना न्यायसंगत कर पाओगे? और मैं मेरी मां का ध्यान सही तरीके से रख पाऊंगी क्या ऐसी स्थिति में?”
मैंने सोनू से कहा कि, “तुम जाओ।”
सोनू कुछ बोलने जा रहा था कि मैंने उसके होंठों पर हाथ रख दिया और कहा कि जाओ बाद में मिलना।”
बाद में सोनू ने मुझसे मिलने की बहुत कोशिश की लेकिन मैं उससे नहीं मिली। कुछ समय बाद मैं मां के पास अपने शहर इंदौर वापस आ गई।
मैं कह नहीं पा रही थी यह रूढ़ियाँ अक्सर कितनी तकलीफ दे जाती है जीवन में। क्या मैं किसी और को आसानी से अपना पाऊंगी? क्या सोनू किसी दूसरी के साथ खुश रह पाएगा? समाज में इतनी जड़ता क्यों है आखिर? आखिर चाहतें भी तो कुछ मायने रखती हैं। सोनू का नंबर मैंने ब्लॉक कर रखा था और अकेलेपन के सफर को अकेली ही तय करना शुरू कर दिया था। ;~ प्रियंका वर्मा माहेश्वरी

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मिशन शक्ति के अंतर्गत “उत्तम आहार उत्तम विचार” कार्यक्रम संपन्न

कानपुर 24 सितंबर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर के मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत पोषण संबंधी वेबिनर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की उप प्राचार्या डॉ सबीना बोदरा द्वारा प्रार्थना से की गई। डॉ विभा दीक्षित ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ बी एन आचार्य जी का परिचय देकर उनका स्वागत किया।
इस वेबिनार में मुख्य वक्ता डॉ बी एन आचार्य (निर्देशक : आरोग्य भारती कानपुर महानगर ) ने सभी को “उत्तम आहार उत्तम विचार” की मानसिकता के प्रति जागरूक कर पोष्टिक आहार से जीवन को सहज बनाने को प्रेरित किया एवं स्वास्थ्य संबंधित बातों पर जोर देते हुए संतुलित पोषण को निरोगी जीवन का आधार बताया ।
मिशन शक्ति की प्रभारी डॉ मीतकमल ने बताया कि पोषड़ का ये कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण हैं और साथ ही साथ उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव द्वारा कार्यक्रम की समाप्ति की। कार्यक्रम का संचालन खुशी मल्होत्रा द्वारा किया गया। बदलाव के अभिकर्ता के स्वयं सेवक के रूप में शफक नाज़ , वेदांत मिश्रा ,नमन अग्रवाल ,अनिरुद्ध द्विवेदी, आदि ने प्रशंसनीय कार्य किया । यह पूरा कार्यक्रम प्राचार्य डॉ जोसेफ डेनियल के निर्देश नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में १०० से भी अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

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शक्ति कानपुर प्रांत, राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एवं क्राइस्टचर्च कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान अल्जाइमर नामक बीमारी के बारे में महिलाओं को एनएसएस यूनिट द्वारा इसके बचाव व रोकथाम की जानकारी दी गई

कानपुर 21 सितंबर, शक्ति कानपुर प्रांत एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई एवं क्राइस्टचर्च कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान द्वारा जूम प्लेटफार्म पर ऑनलाइन अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है जिसमें अल्जाइमर नामक बीमारी के बारे में महिलाओं को एनएसएस यूनिट द्वारा इसके बचाव व रोकथाम और कैसे यह बीमारी होती है इसके बारे में जानकारी दी जा रही है इस प्रोग्राम में क्राइस्टचर्च कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुनीता वर्मा एनएसएस प्रोग्राम आफिसर, डॉ के.एन. मिश्रा, डॉ. उमेश पालीवाल, डॉ. राज लक्ष्मी त्रिपाठी, डॉ जोसेफ डेनियल डॉ सबीना बोदरा एवं शक्ति कानपुर से मीडिया प्रभारी संध्या सिंह एवं मिथिलेश अवस्थी अर्चना सपना निषाद संजू शर्मा आज सभी लोग शामिल हुए

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नगर आयुक्त द्वारा कानपुर दक्षिण के प्रमुख स्थलों का निरीक्षण कर जलभराव का जायजा

संवाद सूत्र जिला सूचना, कानपुर 16 सितंबर, में भारी वर्षा के दौरान नगर आयुक्त द्वारा कानपुर दक्षिण का प्रमुख स्थलों कर निरीक्षण कर जलभराव का जायजा लिया गया । यहॉ मौके पर महाप्रबन्धक जलकल, व सम्बन्धित जोन के जोनल अधिकारी, जोनल अभियन्ता, जोनल स्व0 अधिकारी आदि अधिकारी/कर्मचारीगण मौके पर मौजूद रहे। इस दौरान किदवई नगर थाने के सामने, आर0बी0आई0 नाला, एच0 ब्लॉक किदवई नगर, मुख्य चौराहा, साइट नं0 01, पनकी इण्ड0 एरिया, श्याम नगर, जी0टी0 रोड, काशीराम अस्पताल, अफीम कोठी चौराहा, कम्पनी बाग चौराहा, जी0एस0वी0एम0 मेडिकल कालेज परिसर आदि जगहो पर जल जमाव को तत्काल दुरूस्त कराने के निर्देश दिये गये।

अपील
समस्त नगर वासियो से अपील है कि वर्षा के दृष्टिगत होने वाली जलभराव व सफाई समस्या के सम्बन्ध में नगर निगम कन्ट्रोल रूम 05122526004, 05122526005, 8601811111 पर किसी भी समय अवगत कराये, जिससे नगर निगम टीम त्वरित कार्यवाही करते हुये समस्याओं का गुणवत्तापरक निस्तारण सुनिश्चित करा सके। नगर निगम टीम पूरी तत्परता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेगी।

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मिशन शक्ति के अंतर्गत क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की टीम ने उच्चतम सामाजिक सोच को बढ़ावा देते हुए महिलाओं के बीच में सेनेटरी पैड का वितरण किया

कानपुर 15 सितंबर 2021 भारतिय स्वरूप संवाददाता, मिशन शक्ति के अंतर्गत क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर की टीम ने उच्चतम सामाजिक सोच को बढ़ावा देते हुए महिलाओं के बीच में सेनेटरी पैड का वितरण किया। बच्चों ने पेंसिल रबड़ शार्पनर और कुछ बुक्स वितरित की, कार्यक्रम की संचालक के रूप में डॉ सूफिया सहाब ( आईसीसी संयोजक ) एवं डॉ शिप्रा श्रीवास्तव ( वूमेन सेल संयोजक) ने नारियों के ऊपर किए जाने वाले उत्पीड़नो को न सहने को और उसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया एवं जरूरत पड़ने पर भारत सरकार द्वारा वुमन हेल्पलाइन नंबर से भी अवगत कराया । मिशन शक्ति प्रभारी डॉ मीत कमल ने महिलाओं को शिक्षित होने पर एवं उनके सशक्त होने पर जोर दिया। बदलाव के अभिकर्ता के स्वयंसेवक के रूप में अनिरुद्ध दिवेदी , अंजली सचान , तयबा अख्तर, विवेक पटेल, मैत्री पन्ना, वेदांत मिश्रा आदि इस कार्यक्रम के प्रतिभागी बनकर अत्यंत प्रशंसनीय कार्य किया । यह पूरा कार्यक्रम प्रिंसिपल डॉ जोसेफ डेनियल तथा वाइस प्रिंसिपल डॉ सबीना बोदरा के सफल मार्गदर्शन एवं निर्देश नेतृत्व में संपन्न हुआ

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मंडलायुक्त ने यूपीएफसी का लिया अतिरिक्त प्रभार

कानपुर 13 सितंबर,”श्रम आयुक्त यूपी” और “एमडी उत्तर प्रदेश वित्त निगम (यूपीएफसी)” का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करते हुए मंडलायुक्त राजशेखर_

_मंडलायुक्त राजशेखर ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और उत्तर प्रदेश सरकार के दिशा निर्देशों के तहत विभाग को सौंपे गए कार्यों में उत्साहजनक परिणाम देने के लिए हम अपनी पूरी कोशिश करेंगे_

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औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना की अध्यक्षता में मेडिकल कॉलेज सभागार में डेंगू , मलेरिया ओर कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी के संबंध में बैठक

कानपुर 12 सितंबर, औद्योगिक विकास मंत्री श्री सतीश महाना की अध्यक्षता में मेडिकल कॉलेज सभागार में जनपद में डेंगू मलेरिया व कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियो के सम्बंध में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कानपुर नगर को निर्देशित करते हुए कहा कि समस्त सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण बेहतर इलाज मिले, किसी भी प्रकार के कोई सनसाधनों की कोई कमी नहीं है बेहतर प्रबंधन से हम बड़ी से बड़ी महामारी पर कंट्रोल कर सकते हैं इसके लिए पूरी क्षमता से कार्य करना है और समस्त डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को कड़ी मेहनत करनी है आप लोगो की कड़ी मेहनत की वजह से ही कोरोना पर अंकुश लगा है ।उन्होंने कहा कि कहा कहा डेंगू की टेस्टिंग होगी इसके लिए लोगो को बताया जाए तथा नगर निगम के स्थापित कंट्रोल रूम नम्बर 18001805159 पर अब डेंगू, मलेरिया व वायरल फीवर से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी दी जाती रहे इसके लिए लोगो को बताया जाए।शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में साफ सफाई होती रहे इसके लिए कार्य योजना बना कर अभियान के तौर पर सफाई कराई जाए तथा लोगो को सफाई हेतु जागरूक भी किया जाता रहे । उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की सम्पूर्ण तैयारी कर ली जाए इसके लिए मार्च व अप्रैल माह में ऑक्सीजन की कितनी आवश्यकता थी उसका आकलन मुख्य चिकित्सा अधिकारी सरकारी व्यवस्था व समस्त प्राइवेट व्यवस्था के अनुसार कर ले ।जो ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होने है इसके लिए जो समस्या आ रही है उनका निस्तारण युद्ध स्तर पर करे ताकि प्लांट जल्दी स्थापित हो सके।उन्होंने हैलेट अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की तो उपस्थित डॉक्टर ने बताया कि हैलेट अस्पताल में 200 बेड तीसरी लहर के लिए बनाया गया था जिसमें वतर्मान में वारयल फीवर के मरीज भर्ती है। आने वाले मरीजों को बेहतर ईलाज किया जा रहा है ।उन्होंने कहा कि यहां आने वाले मरीज को प्रत्येक दशा में बेहतर इलाज मिले इसमे लापरवाही नही होनी चाहिए। बैठक में जिलाधिकारी कानपुर नगर, मुख्य विकास अधिकारी कानपुर नगर , नगर आयुक्त , मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आदि उपस्थित रहे।

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एसोसिएशन ऑफ एलाइंस क्लब कानपुर भूमिजा एवं कानपुर सृजन का अधिष्ठापन समारोह संपन्न

कानपुर 11 सितम्बर, शुक्रवार को होटल के. डी. पैलेस में एसोसिएशन ऑफ एलाइंस क्लब कानपुर भूमिजा एवं कानपुर सृजन का अधिष्ठापन समारोह संपन्न हुआ,

समारोह में शिक्षा ओर कला क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले करीब 30 शिक्षको को महापौर प्रमिला पांडेय द्वारा सम्मानित किया गया,

इस मौके पर राजीव शुक्ल, राजेंद्र गर्ग, नलिन श्रीवास्तव, डा शिप्रा श्रीवास्तव, डा प्रियंका सिंह, अंजू शुक्ल, डा राजकिशोर सिंह, आदि उपस्थित रहे।

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