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“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी एआई-संचालित रक्त परीक्षण उपकरण का समर्थन किया”

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने मेसर्स प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के साथ “एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के लिए आईओटी-सक्षम पॉइंट-ऑफ-केयर रक्त परीक्षण उपकरण” नामक परियोजना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व छात्र श्री साहिल जगनानी और श्री अंकित चौधरी द्वारा स्थापित, यह कंपनी डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, प्रोफेसरों और छात्रों की एक बहु-विषयक टीम से उभरी है, जो वंचित आबादी के लिए किफायती नैदानिक तकनीकें विकसित करने के लिए काम कर रही है। उनके सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास, जिसे शुरू में बीआईआरएसी का सहयोग प्राप्त था, ने मोबिलैब डिवाइस का निर्माण किया—एक पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाला क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइज़र, आईओटी-सक्षम और एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित, जो किडनी, लिवर, हृदय, विटामिन और कैंसर से संबंधित 25 से अधिक मापदंडों का परीक्षण करने में सक्षम है।

कंपनी के पास आईआईटी गुवाहाटी से हस्तांतरित “पॉइंट-ऑफ-केयर क्वांटिफिकेशन के लिए एक ट्रांसमिटेंस-आधारित प्रणाली/किट” का पेटेंट है और उसने एकीकृत मिक्सर, परख विकास, सेंट्रीफ्यूज और प्रोपराइटरी ऑप्टिकल सिस्टम से संबंधित छह से ज़्यादा अतिरिक्त पेटेंट आवेदन दायर किए हैं। इस उपकरण का 10,000 मरीज़ों पर परीक्षण हो चुका है और हाल ही में इसे सीडीएससीओ से निर्माण लाइसेंस मिला है। यह परियोजना वर्तमान प्रोटोटाइप (एम1) को उन्नत बनाने पर केंद्रित होगी ताकि एक साथ पाँच परीक्षण किए जा सकें, रोगियों के प्रतीक्षा समय को कम किया जा सके और व्यावसायिक स्तर पर विनिर्माण स्थापित किया जा सके। इस अगली पीढ़ी के मोबिलैब में हीमोग्लोबिन, क्रिएटिनिन, बिलीरुबिन, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, यूरिक एसिड, ग्लूकोज और जीजीटी जैसे परीक्षण शामिल होंगे।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव, श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा:
“ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंच सुनिश्चित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह परियोजना न केवल सामर्थ्य और पहुंच को संबोधित करती है, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी, एआई-संचालित नैदानिक समाधान विकसित करने में देश की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।”

प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड का सहयोग प्रयोगशाला नवाचार से लेकर बड़े पैमाने पर तैनाती तक की हमारी यात्रा को गति देगा। मोबिलैब के साथ, हमारा लक्ष्य ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवा की कमी को पूरा करना है, और यह सुनिश्चित करना है कि देश में कहीं भी, देखभाल के बिंदु पर उन्नत निदान उपलब्ध हों।”

यह सहयोग टीडीबी की आत्मनिर्भर भारत के साथ स्वदेशी स्वास्थ्य सेवा नवाचारों को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर सस्ती चिकित्सा प्रौद्योगिकियों में देश की उपस्थिति को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  द्वारा राजधानी में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भव्य आयोजन

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त ट्रस्ट  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  ने 14 अगस्त को सेंट्रल पार्क, नई दिल्ली में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। नागरिकों को उन लोगों द्वारा सहन की गई असीमित पीड़ा से परिचित कराया, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने घरों, आजीविका और सम्मान का बलिदान दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र वर्ष 2022 से इसके तहत स्मारक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और स्वास्थ्य और रसायन और उर्वरक मंत्री श्री जेपी नड्डा, केन्‍द्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली के उपराज्यपाल श्री विजय कुमार सक्सेना, , इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और केन्‍द्रीय संस्‍कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के रूप में, ‘जैसा उन्होंने देखा: भारत का विभाजन 1947’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसका संपादन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और भारतीय भाषा एवं साहित्य अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने किया है। यह पुस्तक इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण पर बहुमूल्य दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। ‘द डर्वाल्स एंड पार्टीशन’ नामक एक डीवीडी भी लॉन्च की गई, जिसमें इस त्रासदी से जुड़े अनुभवों और आख्यानों का एक मार्मिक दृश्य ूप्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें विभाजन की मानवीय कीमत पर पुनर्विचार किया गया और विस्थापित हुए देशवासियों को गंभीरता से याद किया गया। अनगिनत पीड़ितों की स्मृति में एक मौन जुलूस भी निकाला गया, जो उनके धैर्य के प्रति एक सम्मानजनक श्रद्धांजलि थी। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) द्वारा मंचित और लोकेंद्र त्रिपाठी द्वारा निर्देशित ‘बतावारा’ नामक एक नाटक का भी मंचन किया गया।

यह उल्लेखनीय है कि देश के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई, कई लोगों को अपनी अचल संपत्ति से हाथ धोना पड़ा और अनगिनत महिलाओं को अपनी गरिमा के साथ खिलवाड़ का सामना करना पड़ा। विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों की पीढ़ियाँ आज भी इसके घाव सह रही हैं। भारत का विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है। हालांकि लोगों का पलायन अगस्त 1947 से पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव विभाजन की औपचारिक घोषणा के बाद देखा गया। इस दर्दनाक घटना के सबसे गंभीर परिणाम पंजाब, बंगाल और सिंध में हुए, फिर भी इसका प्रभाव पूरे देश में महसूस किया गया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इस अभूतपूर्व मानवीय संकट में लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए और लगभग 20 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई। प्रदर्शनी और कार्यक्रम ने जनता की काफ़ी रुचि आकर्षित की, ख़ासकर इस त्रासदी के सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक आयामों के विस्तृत चित्रण के कारण, जिससे आगंतुकों को व्यक्तिगत स्मृतियों को सामूहिक इतिहास से जोड़ने का अवसर मिला। पुस्तक विमोचन, डीवीडी लॉन्च के माध्यम से दृश्य दस्तावेज़ीकरण और गरिमापूर्ण जनभागीदारी के रूप में विद्वत्ता के इस एकीकरण के माध्यम से, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  स्मृति की संस्कृति को मज़बूत करना चाहता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विभाजन के सबक आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्र की साझा चेतना का एक स्थायी हिस्सा बने रहें।

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तीन दशक की जद्दोजहद का अंत, सुदामा को मिला मेहनत का पूरा हक

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर 19 अगस्त जिलाधिकारी की सक्रियता से हुआ 1996 से लंबित प्रकरण का समाधान, 29 साल बाद मिली जीपीएफ की राशि*

लगभग तीन दशक की लंबी जद्दोजहद, धैर्य और उम्मीद के बाद सेवानिवृत्त संग्रह सेवक सुदामा प्रसाद को आखिरकार उनकी मेहनत की कमाई मिल गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की सक्रिय पहल और लगातार निगरानी के चलते सामान्य भविष्य निधि का वह भुगतान संभव हुआ, जो वर्ष 1996 से अटका था। आखिरकार ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये सुदामा के खाते में पहुंच गए।

फरवरी की एक सुबह जिलाधिकारी कार्यालय में जनता दर्शन चल रहा था। अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे लोगों की भीड़ में एक बुज़ुर्ग भी खड़े थे। साधारण पैंट-शर्ट पहने, हाथ में पुरानी फाइल और थैला थामे, चेहरे पर धैर्य और आंखों में उम्मीद की चमक। यह थे 89 वर्षीय सुदामा प्रसाद, जो उनतीस वर्षों से अपनी मेहनत की पाई-पाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे थे। कितने ही दफ्तरों के चक्कर, कितनी ही बार फाइलें चलीं और लौटीं, अधिकारी बदलते गए, नियमावली के पन्ने पलटते रहे लेकिन मेहनत की कमाई तक पहुंच नहीं बन सकी। खास बात यह रही कि उन्होंने कभी न्यायालय का दरवाज़ा नहीं खटखटाया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखा।

प्रकरण की जड़ सेवानिवृत्ति अभिलेखों में छूटे एक महत्वपूर्ण तथ्य में छिपी थी। पारिवारिक न्यायालय बांदा ने सुदामा को पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन 1995 में उनकी पत्नी का निधन हो चुका था। यह जानकारी अभिलेखों में दर्ज न हो पाने से भुगतान वर्षों तक थमा रहा।

जनता दर्शन में जब उन्होंने जिलाधिकारी के सामने अपनी व्यथा रखी तो जिलाधिकारी ने तुरंत गंभीरता से सुनवाई की। वर्षों पुरानी फाइलें मंगाई गईं, रिकॉर्ड खंगाला गया। डीएम ने निर्देश दिया कि अब इस मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए। जनपद बांदा से आवश्यक अभिलेख मंगाए गए। इसके बाद कोषाधिकारी ने रिपोर्ट दी कि खाते में जमा राशि पर चालू वित्तीय वर्ष तक ब्याज जोड़कर पूरा भुगतान अनुमन्य है और अब तक कोई आंशिक भुगतान भी नहीं हुआ है। इसके बाद उपजिलाधिकारी सदर की जांच रिपोर्ट में ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये देय पाए गए।

सामान्य भविष्य निधि नियमावली 1985 के तहत आदेश जारी हुए और जिलाधिकारी ने प्रगति पर स्वयं नज़र रखी। आखिरकार 18 अगस्त को वह दिन आया जब भुगतान सुदामा प्रसाद खाते में पहुंच गया। लगभग तीस साल की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद उन्हें अपनी मेहनत का हक मिला।

राशि खाते में आने की ख़बर मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं लेकिन होंठों पर सुकून की मुस्कान थी। उन्होंने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी का आभार व्यक्त करते हुए बस इतना कहा कि देर है, पर अंधेर नहीं। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह रकम केवल पैसे भर नहीं थी, बल्कि आत्मसम्मान और विश्वास की वापसी है।

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महादान का आयोजन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 18 अगस्त प्रज्ञा परिवार सेवा संस्थान एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वाधान में श्याम नगर स्थित छप्पन भोग बैंक्वेट हाल में रक्त दान हेतु कैंप लगाया गया जिसमें करीब 85 लोगों ने इस महादान में हिस्सा लिया,
लोगों की रक्त जरूरत समय पर पूरी हो खून की कमी से किसी की जान पे संकट न आए इसलिए समय समय पर ऐसा आयोजन संस्थान द्वारा  कराया जाता है, गायत्री परिवार के सुरेश जोशी एवं अवनीश शुक्ल ने रक्त दान कर कैंप का शुभारंभ किया

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एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज में एंटी रैगिंग वीक के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 18 अगस्त एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज महाविद्यालय, माल रोड ,में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार एंटी रैगिंग वीक के अंतर्गत एक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया, जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं ने भाग लिया। जिसमें से प्रथम स्थान स्नेहा सिंह ,द्वितीय स्थान भूमि गुप्ता तथा तृतीय स्थान शुभेका खान ने प्राप्त किया। शिक्षा शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर ने एंटी रैगिंग विषय पर अपना विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर निशि प्रकाश ने की। मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया यह कार्यक्रम कैप्टन ममता अग्रवाल तथा प्रो मीनाक्षी व्यास के निर्देशन में संपन्न हुआ। प्रोफेसर रेखा चौबे ,प्रोफेसर अलका टंडन ,डॉक्टर रेनू कुरील आदि उपस्थिति रही।

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हर घर तिरंगा अभियान – म्यूज़िक कॉन्सर्ट एवं एच जी टी सेल्फी कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 13 अगस्त दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई , कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में छात्राओं के द्वारा “हर घर तिरंगा अभियान – 2025” द्वितीय चरण के अंतर्गत आयोजित “म्यूजिकल कंसर्ट एवं एच जी टी सेल्फी” गतिविधि में हिस्सा लिया गया। जिसमें छात्राओं के द्वारा स्वतंत्रता दिवस, तिरंगा आदि की थीम से संबंधित गानों का प्रस्तुतिकरण किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की 100 से अधिक छात्राएं उपस्थित रही तथा सभी ने उत्साह एवं उमंग के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संगीत विभाग प्रभारी प्रो संगीता श्रीवास्तव, प्रो शालिनी त्रिपाठी, प्रो रुचिमिता पांडे, डॉ अलका सिंह, श्री निशांत कुमार सिंह समेत समस्त टीम का सहयोग सराहनीय रहा।
महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम तथा सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर ने छात्राओं के द्वारा की गई समस्त गतिविधियों की सराहन की। कार्यालय अधीक्षक कृष्णेन्द्र कुमार ने सभी छात्राओं से “हर घर तिरंगा अभियान” में उत्साह के साथ हिस्सा लेने का आह्वान किया।

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इस स्वतंत्रता दिवस ज़ी सिनेमा में देखिए `आज़ादी एक्सप्रेस’ के साथ. जाट, द साबरमती रिपोर्ट और द केरल स्टोरी का प्रीमियर

भारतीय स्वरूप संवाददाता मुंबई, अगस्त 2025: इस स्वतंत्रता दिवस, ज़ी सिनेमा लेकर आ रहा है तीन ऐसी कहानियां, जो सच्चाई, हिम्मत और जज़्बे से भरी हैं। ये तीनों प्रीमियर सुबह 10 बजे से एक के बाद एक लगातार दिखाए जाएंगे। सबसे पहले बात करते हैं ‘जाट’ की, जिसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर दोपहर 12:30 बजे होगा। इसमें सनी देओल ‘गदर 2’ की बड़ी कामयाबी के बाद एक और दमदार रोल में लौटे हैं। इस फिल्म में सनी एक फौजी का किरदार निभा रहे हैं, जो लोगों की मदद के लिए ज़ुल्म के ख़िलाफ डटकर खड़े होते हैं और अपनी जान की परवाह किए बिना सबकी हिफ़ाज़त करते हैं। इसके साथ ही लाइनअप में है ‘द साबरमती रिपोर्ट’ – सच की तलाश करने वाली एक बेहद दिलचस्प थ्रिलर जो सुबह 10 बजे शुरू होगी और फिर शाम 3:30 बजे आएगी ‘द केरल स्टोरी’ – एक दिल झकझोर देने वाली कहानी, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। देश की मिट्टी से जुड़ी ये तीनों कहानियां, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिंदुस्तान के सच्चे जज़्बे को दर्शाती हैं।

सनी देओल की दमदार ‘ढाई किलो का हाथ’ वाली परफॉर्मेंस देखने के लिए तैयार हो जाइए दोपहर 12:30 बजे, फ़िल्म ‘जाट’ में। ये सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है बल्कि ये उस इंसान की कहानी है जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल देता है। सनी का किरदार सच्चा, निडर और मदद करने वाला है जो बड़ी से बड़ी मुश्किल से टकराता है ताकि देशवासियों की हिफ़ाज़त कर सके। इस फिल्म में सनी देओल ने अपने सारे एक्शन सीन खुद किए हैं, और हर सीन में उनका असली जोश नज़र आता है, और वो फिर याद दिलाते हैं कि क्यों उन्हें पर्दे का सबसे वजनदार हीरो कहा जाता है।

सुबह 10 बजे आएगी ‘द साबरमती रिपोर्ट’, जिसमें हैं विक्रांत मैसी। ये कहानी है उस हादसे की जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था – गोधरा ट्रेन में आग की घटना। ये एक पत्रकार की लड़ाई है, जो हर हाल में सच तक पहुंचना चाहता है। फ़िल्म की कहानी तेज़, असरदार और सच्चे जज़्बातों से भरी है – जो बताती है कि आज़ादी का मतलब सिर्फ़ बोलने की नहीं, सच जानने की भी आज़ादी है; झूठ और फरेब से आज़ादी!

शाम 3:30 बजे देखिए ‘द केरल स्टोरी’ – वो फ़िल्म जिसने दो नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए हैं और जिसे खूब सराहा गया है। इसमें अदा शर्मा ने एक ऐसी लड़की का रोल निभाया है, जो धोखे से आतंक के जाल में फंस जाती है। लेकिन वो हार नहीं मानती और हिम्मत के साथ उस अंधेरे से बाहर निकलने की लड़ाई लड़ती है। ये कहानी है एक लड़की की जिद और हौसले की जो अपनी ज़िंदगी को फिर से जीने की कोशिश करती है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

तो इस 15 अगस्त, अपना दिन कीजिए ज़ी सिनेमा के नाम! देखिए तीन ज़बर्दस्त कहानियां जो सच्चाई, हिम्मत और इंसानियत को सलाम करती हैं – ‘द साबरमती रिपोर्ट’, ‘जाट’ और ‘द केरल स्टोरी’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ, सिर्फ़ ज़ी सिनेमा पर।

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वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.51 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर

वित्त वर्ष 2024-25 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन बढ़कर 1,50,590 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि पिछले वित्त वर्ष के 1.27 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन की तुलना में 18% की अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाती है। यह वित्त वर्ष 2019-20 के बाद से अब तक 90% की आश्चर्यजनक बढ़ोतरी को भी प्रदर्शित करती है, उस समय यह आंकड़ा 79,071 करोड़ रुपये था।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को हासिल करने में रक्षा उत्पादन विभाग और सभी हितधारकों यानी कि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, सार्वजनिक क्षेत्र के निर्माताओं और निजी उद्योग के सामूहिक प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने इस सफलता को भारत के सशक्त होते रक्षा औद्योगिक आधार का स्पष्ट संकेत बताया है।

रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) और अन्य पीएसयू का कुल उत्पादन में लगभग 77% योगदान रहा है, जबकि निजी क्षेत्र ने इसमें 23% की भागीदारी की है। भारत में रक्षा निवेश के लिए निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2024-25 में 23% हो गई है, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 21% बढ़त को प्रदर्शित करती है। यह वृद्धि देश के डिफेन्स इकोसिस्टम में इस क्षेत्र की बढ़ती हुई भूमिका को उजागर करती है।

रक्षा उद्योग जगत के कारोबार में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों ने वर्ष-दर-वर्ष लगातार वृद्धि प्रदर्शित की है, जिसका श्रेय दूरगामी नीतिगत सुधारों, व्यापार करने की सुगमता में तेजी और पिछले दशक में स्वदेशीकरण पर रणनीतिक ध्यान दिए जाने को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में डीपीएसयू और निजी क्षेत्र का समग्र उत्पादन क्रमशः 16% तथा 28% बढ़ा है।

यह रिकॉर्ड स्थापित करने वाली उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार के बढ़ते प्रयासों का महत्व बताती है। आयात पर निर्भरता कम करने और एक रक्षा औद्योगिक परिसर बनाने पर जोर देने से न केवल भारत की आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है, बल्कि इससे देश की निर्यात क्षमता भी बढ़ रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। यह वित्त वर्ष 2023-24 के 21,083 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात आंकड़ों की तुलना में 2,539 करोड़ रुपये अर्थात 12.04% का उछाल है।

भारत का रक्षा उत्पादन क्षेत्र सतत नीतिगत सहयोग, बढ़ी हुई निजी भागीदारी व विस्तारित निर्यात क्षमताओं के साथ आने वाले वर्षों में और भी तेजी से बढ़ने के लिए तैयार है।

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नवीनतम क्लाउड तकनीक से लैस, रेलवन मोबाइल ऐप आधुनिक यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) को यात्रियों की हथेली पर लाता है: अश्विनी वैष्णव

भारतीय रेलवे, रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सी.आर.आई.एस.) के माध्यम से यात्री आरक्षण प्रणाली (पी.आर.एस.) का पूर्ण नवीनीकरण कर रहा है। पी.आर.एस. के नवीनीकरण में हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, नेटवर्क उपकरण, सुरक्षा अवसंरचना और कार्यात्मकताओं का उन्नयन और प्रतिस्थापन शामिल है, जिसका डिज़ाइन नई सुविधाओं को संभालने में सक्षम है।

वर्तमान पीआरएस प्रणाली 2010 में स्थापित की गई थी और यह आइटेनियम सर्वर और ओपन वीएमएस (वर्चुअल मेमोरी सिस्टम) पर चलती है। वर्तमान पीआरएस प्रणाली को पारंपरिक प्रौद्योगिकी प्रणालियों से नवीनतम क्लाउड प्रौद्योगिकी-संगत प्रणालियों में अपग्रेड करने की आवश्यकता है। पिछले कुछ वर्षों में, यात्रियों की प्राथमिकताएँ और आकांक्षाएँ बदली हैं। आधुनिक पीआरएस का उद्देश्य यात्रियों की बढ़ी हुई आकांक्षाओं को पूरा करना है।

रेलवे ने हाल ही में रेलवन ऐप शुरू किया है। इस ऐप के ज़रिए यात्री अपने मोबाइल फ़ोन पर आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट बुक कर सकते हैं। इससे पी.आर.एस. सुविधा यात्रियों की पहुँच में आ गई है।

पहले, ट्रेनों में आरक्षित टिकट बुक करने के लिए 120 दिनों की अग्रिम आरक्षण अवधि (ए.आर.पी.) होती थी। 1 नवंबर 2024 से, यात्रा की तारीख को छोड़कर, ए.आर.पी. को घटाकर 60 दिन कर दिया गया है। यह बदलाव बुकिंग के रुझान को ध्यान में रखते हुए और अप्रत्याशित घटनाओं के कारण रद्दीकरण को कम करने के लिए किया गया है।

बुकिंग के रुझान और फीडबैक के आधार पर अग्रिम आरक्षण अवधि (ए.आर.पी.) में बदलाव एक सतत और जारी रहने वाली प्रक्रिया है। वर्तमान पी.आर.एस. प्रति मिनट लगभग 25,000 टिकट बुक कर सकता है और नई प्रणाली इस क्षमता से चार गुना अधिक क्षमता के लिए डिज़ाइन की गई है।

यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एनआईएबी, हैदराबाद में भारत के पहले अत्याधुनिक पशु स्टेम सेल बायोबैंक और प्रयोगशाला का उद्घाटन किया

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image003R6IJ.jpgकेंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएबी) में भारत के अपनी तरह के पहले अत्याधुनिक पशु स्टेम सेल बायोबैंक और पशु स्टेम सेल प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।

मंत्री महोदय ने एनआईएबी में एक नए छात्रावास ब्लॉक और टाइप-IV क्वार्टरों की आधारशिला भी रखी, जिसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने कुल ₹19.98 करोड़ की लागत से स्वीकृत किया है। यह बुनियादी ढाँचा शोधार्थियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की ज़रूरतों को पूरा करेगा और एक जीवंत शैक्षणिक एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा।

9,300 वर्ग फुट में फैले और ₹1.85 करोड़ की लागत से निर्मित, पशु बायोबैंक की अत्याधुनिक सुविधा पशुओं के लिए पुनर्योजी चिकित्सा और कोशिकीय उपचारों पर केंद्रित होगी। स्टेम सेल कल्चर यूनिट, 3डी बायोप्रिंटर, बैक्टीरियल कल्चर लैब, क्रायोस्टोरेज, ऑटोक्लेव रूम, उन्नत एयर हैंडलिंग सिस्टम और निर्बाध पावर बैकअप से सुसज्जित, यह प्रयोगशाला रोग मॉडलिंग, ऊतक इंजीनियरिंग और प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को आगे बढ़ाएगी।

डीबीटी-बीआईआरएसी के राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (एनबीएम) के समर्थन से, पशु स्टेम कोशिकाओं और उनके व्युत्पन्नों की बायोबैंकिंग को सक्षम करने के लिए सुविधा का विस्तार किया जाएगा।

मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भविष्यदर्शी दृष्टि की सराहना की, जिसके कारण जैव प्रौद्योगिकी बायोई3 नीति को लागू करना संभव हुआ, जिससे भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी होने का लाभ मिला।

इसके अलावा, कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने पशु स्वास्थ्य प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाने और ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए पांच नवीन पशु चिकित्सा निदान उपकरण शुरू किए:

  1. ब्रुसेलोसिस का त्वरित पता लगाना – ब्रुसेला प्रजातियों का शीघ्र और सटीक पता लगाने के लिए एक क्षेत्र-तैनात, डीआईवीए – सक्षम डायग्नोस्टिक किट।
  2. मैस्टाइटिस का पता लगाने की तकनीक – डेयरी मवेशियों में सबक्लिनिकल और क्लिनिकल मैस्टाइटिस के लिए एक लागत प्रभावी ऑन-साइट निदानात्मक परख।
  3. रोगाणुरोधी संवेदनशीलता परीक्षण उपकरण – एक पोर्टेबल उपकरण जो जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दो घंटे के भीतर परिणाम प्रदान करता है।
  4. टोक्सोप्लाज़मोसिस डिटेक्शन किट – पशुओं में टोक्सोप्लाज़मा गोंडी संक्रमण के लिए एक संवेदनशील और विशिष्ट परीक्षण।
  5. जापानी एन्सेफलाइटिस डिटेक्शन किट – पशुओं और मनुष्यों में बड़े पैमाने पर निगरानी के लिए स्वदेशी रूप से विकसित तीव्र पट्टी।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन नवाचारों से कृषि से जुड़ी जीडीपी को बढ़ावा मिलेगा, पशुधन उत्पादकता में वृद्धि होगी और पशुपालन क्षेत्र में “सदाबहार क्रांति” का मार्ग प्रशस्त होगा।

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “मुझे खुशी है कि डॉ. राजेश गोखले के नेतृत्व में पूरा जैव प्रौद्योगिकी विभाग भारत को भविष्य के लिए तैयार करने में योगदान दे रहा है। जैव प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित अगली औद्योगिक क्रांति के आने पर हम पीछे नहीं रहेंगे। अर्थव्यवस्था विनिर्माण से पुनर्योजी और आनुवंशिक प्रक्रियाओं की ओर बढ़ेगी, और भारत ने इस बदलाव की शुरुआत पहले ही कर दी है। नीति निर्माताओं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने जैव ई3 नीति जैसी पहलों की दीर्घकालिक प्रासंगिकता को समझा है, के समर्थन के साथ यह सबसे अच्छे समय में से एक है।”

उन्होंने कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन फंड (एएनआरएफ) के तहत हाल ही में घोषित 1 लाख करोड़ रुपये के आरडीआई फंड से निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को विशेष बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से शीर्ष रैंक की ओर बढ़ सकेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग पौधों, जानवरों और मानव जगत को एक ही छत के नीचे अनोखे ढंग से एकीकृत करता है। उन्होंने अंतरिक्ष विभाग के साथ सहयोग सहित अंतरिक्ष-आधारित प्रयोगों में भारत के योगदान का उल्लेख किया और अंतरिक्ष चिकित्सा एवं अंतरिक्ष शरीरक्रिया विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों की परिकल्पना की।

कृषि के मोर्चे पर, उन्होंने कहा, “ये रिलीज़ पशु-आधारित कृषि उत्पादकता के एक नए चरण—एक ‘सदाबहार क्रांति’—का प्रतीक हैं। कृषि से सकल घरेलू उत्पाद का 18% और हमारे कार्यबल का 60% कृषि पर निर्भर है, इसलिए पशु चिकित्सा स्वास्थ्य में नवाचारों का परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ेगा। कृषि अनुसंधान पर खर्च किया गया एक रुपया ₹13 का प्रतिफल देता है, और पहले दिन से ही उद्योग भागीदारों को जोड़ने से यह सुनिश्चित होता है कि ये तकनीकें ज़मीनी स्तर तक पहुँचें।”

उन्होंने ब्रुसेलोसिस, मैस्टाइटिस और टोक्सोप्लाज़मोसिस जैसी बीमारियों के बारे में किसानों के बीच जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया, और कहा कि कई पशुपालक अभी भी निदान और उपचार के विकल्पों से अनभिज्ञ हैं।

इस अवसर पर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने किसानों के साथ बातचीत की और किसान कल्याण एवं ग्रामीण समृद्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने पशुपालकों से आधुनिक निदान उपकरण और रोग निवारण उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रोग का शीघ्र पता लगाने से न केवल पशुओं की जान बचती है, बल्कि कृषि आय भी बढ़ती है।

उन्होंने भारत के पहले पशु स्टेम सेल बायोबैंक की स्थापना में उनकी भूमिका के लिए एनआईएबी की निदेशक डॉ. तरु शर्मा की भी सराहना की और कहा, “हमारे पास मानव स्टेम कोशिकाओं के लिए तो ऐसी सुविधाएँ थीं, लेकिन पशु कोशिकाओं के लिए शायद ही कोई सुविधा थी। एनआईएबी और भारतीय जैव प्रौद्योगिकी का सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है।”

 

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