केंद्रीय बजट 2022-23 में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल (पीएम-डिवाइन) स्कीम को एक नई केंद्रीय क्षेत्र स्कीम के रूप में घोषित किया गया था। मंत्रिमंडल ने 12 अक्टूबर, 2022 को पीएम-डिवाइन स्कीम को मंजूरी दी। 100% केंद्रीय वित्त पोषण वाली इस स्कीम में वर्ष 2022-23 से 2025-26 (15वें वित्त आयोग की अवधि के शेष वर्ष) तक 4 साल की अवधि के लिए 6,600 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय होगा। पीएम-डिवाइन के उद्देश्य हैं: (i) पीएम गतिशक्ति की भावना के अनुरूप अवसंरचना को अभिसरण रूप से वित्त पोषित करना; (ii) पूर्वोत्तर क्षेत्र की महसूस की गई आवश्यकताओं के आधार पर सामाजिक विकास परियोजनाओं की सहायता करना; (iii) युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका कार्यकलापों को सक्षम बनाना; और (iv) विभिन्न क्षेत्रों में विकास अंतराल को भरना। पीएम-डिवाइन विद्यमान केंद्रीय और राज्य स्कीमों का एक विकल्प नहीं होगी। यह अवसंरचना का निर्माण करेगी, उद्योगों, सामाजिक विकास परियोजनाओं की सहायता करेगी और युवाओं तथा महिलाओं के लिए आजीविका गतिविधियों का निर्माण करने के साथ आय और रोजगार का सृजन करेगी। पीएम-डिवाइन स्कीम को उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर परिषद या केंद्रीय मंत्रालयों/एजेंसियों या राज्य सरकार की एजेंसियों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा। सरकार पर पड़ने वाले समय और लागत वृद्धि के निर्माण जोखिम को सीमित करने के लिए परियोजनाओं को इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) आधार पर यथासंभव कार्यान्वित किया जाएगा। पीएम-डिवाइन परियोजनाओं की संवहनीयता सुनिश्चित करने के लिए परिसंपत्तियों के प्रचालन और अनुरक्षण (ओ एंड एम) के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय या किसी अन्य मंत्रालय/विभाग की किसी भी अन्य स्कीम के साथ परियोजना सहायता का दोहराव न हो। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट 2022-23 में घोषित सात परियोजनाओं सहित ग्यारह परियोजनाओं (अनुबंध-I में विवरण) को मंजूरी के लिए चुना गया है।
| क्र.
सं. |
परियोजना का नाम | अनुमोदित लागत
(करोड़ रु. में) |
| 1 | पूर्वोत्तर भारत में बाल चिकित्सा और वयस्क हेमटोलिम्फोइड कैंसर के प्रबंधन के लिए समर्पित सेवाओं की स्थापना, डॉ. बी. बोरुआ कैंसर संस्थान (बीबीसीआई), गुवाहाटी | 129.00 |
| 2 | नैक्टर आजीविका सुधार परियोजना (बहु-राज्य): मूल्य वर्धित उत्पादों के लिए बनाना स्यूडो स्टेम के उपयोग पर मूल्य श्रृंखला | 67.00 |
| 3 | किसानों के क्षमता निर्माण और प्रमाणन की सुविधा के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीक और डिजिटल डेटा प्रबंधन का उपयोग करके पूर्वोत्तर भारत में वैज्ञानिक जैविक कृषि को बढ़ावा देना (बहु-राज्य) | 45.00 |
| 4 | मिजोरम में पश्चिमी किनारे पर आइजोल बाईपास का निर्माण | 500.00 |
| 5 | मिजोरम में 33.58 करोड़ रुपये की लागत से तुइरियल एयरफील्ड से नॉर्थ चाल्टलांग (18 किमी) तक; और 66.42 करोड़ रुपये की लागत से लेंगपुई से साईफल बांस बागान (41 किमी) तक बांस लिंक सड़कों का निर्माण और उन्नयन | 100.00 |
| 6 | पश्चिम सिक्किम में पेलिंग से सांगा-चोएलिंग तक यात्री रोपवे प्रणाली के लिए गैप फंडिंग | 64.00 |
| 7 | दक्षिण सिक्किम में धापर से भालेडुंगा तक यात्री रोपवे के लिए गैप फंडिंग | 58.00 |
| 8 | लोक निर्माण विभाग, असम सरकार द्वारा असम के कामरूप जिले में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में 20 स्कूलों का रूपांतरण | 132.86 |
| 9 | मेघालय सरकार के शहरी कार्य निदेशालय द्वारा न्यू शिलांग टाउनशिप में नई चार लेन की सड़क का निर्माण और साइकिलिंग ट्रैक, यूटिलिटी डक्ट्स, फुटपाथों आदि के साथ मौजूदा दो-लेन सड़क को चार-लेन में परिवर्तित करना | 146.79 |
| 10 | नागालैंड सरकार के अल्प विकसित क्षेत्र विभाग (डीयूडीए) द्वारा पूर्वी नागालैंड के विशेष विकास से संबंधित आजीविका परियोजनाएं | 180.00 |
| 11 | विद्युत विभाग, त्रिपुरा सरकार द्वारा त्रिपुरा में दूरस्थ बस्तियों को विद्युत की सुनिश्चित आपूर्ति के लिए सौर माइक्रो ग्रिड की स्थापना | 80.79 |
| कुल | 1503.44 |
यह जानकारी पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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ईएसआईसी की वित्त आयुक्त सुश्री टी. एल. यादेन ने बीमित महिलाओं के मातृत्व लाभ के ऑनलाइन दावे की सुविधा के लिए ईएसआईसी के प्रयासों की प्रशंसा की। इससे तकनीक की मदद से महिला लाभार्थियों को लाभ पाना आसान बनाकर सशक्त किया जा सकेगा। उन्होंने प्रौद्योगिकी के महत्व को दोहराया, जो भेदभाव कम कर और समाज के सभी सदस्यों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराकर महिलाओं को सशक्त बनाने का माहौल तैयार करने में सक्षम है। ईएसआईसी के सीवीओ श्री मनोज कुमार सिंह ने जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी और योगदान की चर्चा की।

1 मार्च, 2023 कानपुर नगर। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद के बैंकों की जिला स्तरीय समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान पी.एम.ई.जी.पी. योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना, पी०एम० स्वनिधि योजना, के.सी.सी.(फसली ऋण) योजना के साथ-साथ विगत बैठक में दिए गए निर्देशों की समीक्षा की गई।
मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार देश में ‘उच्च प्रदर्शन वाले जैव-विनिर्माण’ को आगे बढ़ाकर सर्कुलर-जैव-अर्थव्यवस्था को सक्षम करने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) हरित, स्वच्छ और समृद्ध भारत के लिए बायोई3 (यानी अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) के विभाग के एक प्रमुख लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को एक साथ लाने की परिकल्पना करता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आगामी ‘अमृतकाल’ में “हरित विकास” की कल्पना करता है और इसके लिए हमारे राष्ट्र के चल रहे आर्थिक विकास को और बढ़ावा देने के लिए मजबूत अभिनव जैव-आधारित पर्यावरण-अनुकूल समाधानों के कार्यान्वयन के लिए एक व्यवस्थित रूपरेखा योजना की आवश्यकता है। मंत्री ने कहा कि इसके अतिरिक्त, 20 अक्टूबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुभारंभ किया गया “मिशन लाइफ” यानी ‘लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट (लाइफ)’ हमें जलवायु और ऊर्जा लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने के लिए जीवन के हर पहलू में हरित और अनुकूल पर्यावरणीय समाधानों को आगे बढ़ाने का आग्रह करता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम घरेलू विनिर्माण (उद्योग 4.0) का समर्थन करके ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करेगा, क्योंकि यह देश भर में जैव-विनिर्माण के लिए हरित बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहायता करेगा। इसके अलावा, यह जैव-विनिर्माण के क्षेत्र में एक कुशल कार्यबल के विकास, विशेष रूप से दो और तीन-स्तरीय शहरों में रोजगार सृजन और उद्यमिता में वृद्धि और बाजार के अवसरों का विस्तार करने के लिए बायोजेनिक उत्पादों के लिए नीतियों और विनियमों को कारगर बनाने का भी काम करेगा। मंत्री ने बताया कि यह नवीकरणीय संसाधनों से उच्च गुणवत्ता, पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं का निर्माण करके रासायनिक व्यवसायों को राजस्व सृजन के नए अवसर प्रदान करेगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-विनिर्माण नवोन्मेष, ऊर्जा कुशल और कम प्रदूषण के कारण एक बड़ी क्षमता प्रदान करता है, क्योंकि यह व्यावसायिक रूप से प्रासंगिक उत्पादों का उत्पादन करने के लिए रोगाणुओं, पौधों की कोशिकाओं और एंजाइमों सहित जैविक प्रणालियों को नियोजित करता है। उन्होंने बताया कि इस पहल की मुख्य चीज में जैव प्रौद्योगिकी के उन्नत उपकरण शामिल हैं जिनमें सिंथेटिक बायोलॉजी, जीनोम एडिटिंग, माइक्रोबियल बायो-रिसोर्सेज, मेटाबोलिक इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।
डीबीटी के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने अपने संबोधन में कहा कि भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आयातक और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का चौथा सबसे बड़ा आयातक है, जिसका एक बड़ा हिस्सा रासायनिक औद्योगिक निर्माण में उपयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जीवाश्म ईंधन के प्रमुख घटक हाइड्रोकार्बन को जलाने से सीओ2 एक प्रमुख उप-उत्पाद के रूप में निकलती है, जो ग्लोबल वार्मिंग में महत्वपूर्ण योगदान देती है। डॉ. गोखले ने कहा कि 2027 तक भारत को ‘नेट जीरो’ कार्बन इकोनॉमी’ बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण के संदर्भ में, हम बायो-मैन्युफैक्चरिंग के एक एकीकृत और समावेशी दृष्टिकोण को अपनाकर बायो-बेस्ड सर्कुलर कार्बन इकोनॉमी की ओर एक आदर्श बदलाव की उम्मीद करते हैं।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अलका शर्मा ने रेखांकित किया कि इस दृष्टिकोण के माध्यम से उद्योग 4.0 के लिए विनिर्माण का एक अभिनव ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल प्रस्तावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, इस पहल के केंद्र में बायोटेक्नोलॉजी के उन्नत उपकरण शामिल हैं जिनमें सिंथेटिक बायोलॉजी, जीनोम एडिटिंग, मेटाबोलिक इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।
कानपुर 24 फरवरी भारतीय स्वरूप संवाददाता, फिजियो कनेक्ट 3 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में सम्मानित हुए डॉ सुधीर कुमार द्विवेदी

कम आबादी वाले उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, निजी अस्पतालों/औषधालयों/नर्सिंग होम आदि की भारी कमी और पूर्वोत्तर राज्यों में कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए, कर्मचारी राज्य बीमा-ईएसआई निगम ने पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम को ईएसआई योजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना जारी रखने का फैसला किया। उत्तर पूर्वी राज्यों (असम को छोड़कर) के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 से लागू होने वाले अधिकतम सीमा तक का पूरा खर्च कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा वहन किया जाएगा, इसके अलावा, अतिरिक्त वित्तीय सहायता जिसके अंतर्गत राज्य सरकार को 40 लाख रुपये प्रति डिस्पेंसरी (10 लाख रुपये तिमाही) उपलब्ध करायी जाती है, उसे भी शुरू किया जायेगा। यह मानक चिकित्सा देखभाल के अंतर्गत नियमित फंड आवंटन के अलावा एक अतिरिक्त लाभ होगा। यह नए औषधालयों के लिए भी उपलब्ध रहेगा, यदि वे मौजूदा निर्देशों के अनुसार खोले जाते हैं।
