केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 23 सितंबर 2023 को गोवा के पणजी में ऐतिहासिक किले अगौड़ा में ‘भारतीय प्रकाश स्तंभ उत्सव’ या भारतीय लाइटहाउस महोत्सव के पहले संस्करण का उद्घाटन किया।

इस महोत्सव का उद्देश्य भारत के 75 प्रतिष्ठित प्रकाशस्तंभों के समृद्ध समुद्री इतिहास को पुनर्जीवित करना और दुनिया के सामने उनकी शानदार गाथाओं को सामने लाना है। इस प्रकार के पहले आयोजन के प्रमुख स्थल, फोर्ट अगौड़ा में आयोजित बैठक में गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सावंत; केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और पर्यटन राज्य मंत्री, श्रीपद नाइक और गोवा सरकार के पर्यटन मंत्री श्री रोहन खौंटे ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधायक माइकल लोबो भी उपास्थित थे।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा, “इस महोत्सव के शुभारंभ के साथ, हम इन प्रतिष्ठित स्थलों की समृद्ध विरासत को उजागर करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ समुद्र तटीय भारत में 75 प्रकाश स्तंभों में सदियों पुराने क्लासिक्स को फिर से जीवंत करने की प्रक्रिया और उन्हें दुनिया के सामने पेश करने के लिए सक्षम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारा देश आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र प्रयास में हम प्रतिष्ठित प्रकाश स्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के प्रमुख केन्द्रों का उत्प्रेरक बनाकर मोदी की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। आज, हम अपने दूरदर्शी नेता, मोदी की दूरदर्शिता और नेतृत्व के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमारे विशिष्ट प्रकाशस्तंभों को मनोरम विरासत पर्यटन स्थलों में बदलने का समर्थन किया है। बहुत लंबे समय तक, अंधेरी रातों के बीच सैकड़ों नाविकों और जहाजों को आशा की रोशनी प्रदान करते समय समुद्र तटों के मूक प्रहरी को नजरअंदाज कर दिया गया था। “प्रकाश स्तंभ उत्सव” इसे बदलने का हमारा प्रयास है। इन ऐतिहासिक प्रकाशस्तंभों ने हमारे देश के इतिहास में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उसके बारे में आप सभी को सूचित करना, उससे जोड़ना और शिक्षित करना हमारा मिशन है।
भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य ऐतिहासिक स्थलों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों में विकसित करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी मार्ग के लिए आधार तैयार करने के लिए भारतीय प्रकाश स्तंभ महोत्सव का लाभ प्राप्त करना है। प्रकाश स्तंभ और लाइटशिप महानिदेशालय ने पहले ही 75 ऐसे प्रकाश स्तंभों की पहचान कर ली है और यह उत्सव हमारी समुद्री विरासत का जश्न मनाने और संरक्षित करने की सरकार की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री महोदय ने कहा, “प्रकाश स्तंभ महोत्सव” एक शानदार उत्सव है जो समय और सुंदरता के माध्यम से एक मनोरम यात्रा होने का वादा करता है। यह एक ऐसी यात्रा है जो हमारे समुद्री इतिहास के छिपे हुए रत्नों को उजागर करेगी और हमारे ऐतिहासिक प्रकाश स्तंभों की अनकही गाथाओं को उजागर करेगी। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने परिवर्तन के लिए सुधार की पहल के एक हिस्से के रूप में, भारत में पोत परिवहन क्षेत्र में सहायता के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए एक रूपरेखा प्रदान करने के लिए लाइटहाउस अधिनियम, 1927 को निरस्त करके समुद्री परिवहन के लिए समुद्री सहायता अधिनियम, 2021 लागू किया। इसके अंतर्गत हमने विरासत प्रकाश स्तंभ की नई अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें केंद्र सरकार अपने नियंत्रण में समुद्री परिवहन के लिए किसी भी सहायता को विरासत प्रकाश स्तंभ के रूप में नामांकित कर सकती है। समुद्री परिवहन में सहायता के रूप में उनके कार्य के अलावा, ऐसे प्रकाशस्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटक उद्देश्यों के लिए विकसित किया जाएगा। यह महोत्सव सिर्फ ज्ञान का नहीं है; यह मूल्यों और अवसरों को पैदा करने के बारे में है। महोत्सव से अलग, हमारी परिकल्पना प्रकाशस्तंभों को पर्यटन स्थलों के रूप में बढ़ावा देना, इन ऐतिहासिक संरचनाओं पुनर्जीवन प्रदान करना और स्थानीय समुदायों और व्यवसायों के लिए अवसर पैदा करना है।”

दिन भर चले कार्यक्रम के दौरान, ‘हमारे तटों के अग्ररक्षक: भारत के अतीत और वर्तमान के प्रमाण के रूप में प्रकाशस्तंभ’ शीर्षक से एक सत्र आयोजित किया गया था, जिसे शासन, नीतियां और राजनीति संस्थान की पहल, भारत प्रवाह द्वारा आयोजित किया गया था, जहां प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् जो राखीगढ़ी के रूप में ख्याति प्राप्त प्रो. वसंत शिंदे ने भारत के समुद्री इतिहास में प्रकाशस्तंभों के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बात की। डॉ. सुनील गुप्ता, समुद्री पुरातत्वविद् और नई दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में ओएसडी; और गोवा राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. वासु उस्पाकर ने भी सत्र में अपने विचार रखे। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने प्रकाश स्तंभ विरासत पर्यटन विकास के प्रति मंत्रालय के दृष्टिकोण और इस चरण में 75 प्रकाश स्तंभों में निवेश के अवसरों के बारे में एक केस प्रस्तुत किया।

भारत के पहले प्रकाश स्तंभ महोत्सव का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रदर्शनी सत्र, समुद्री इतिहास और संस्कृति पर प्रकाश और ध्वनि शो, ख्याति प्राप्त गायकों के साथ मधुर शामें, समुद्र तटों के जायको और सामुदायिक सहभागिता हैं।
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कानपुर 25 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर के समाजशास्त्र विभाग द्वारा एक संगोष्ठी श्रृंखला का शुभारंभ किया गया। जिसका विषय *” छात्राएं NEP 2020 में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें “* हैं। जिसमे महाविद्यालय की अधिकतम अंक प्राप्त करने वाली छात्रा निधि मुख्य वक्ता रहीं। जिन्होंने अपनी जूनियर छात्राओं बताया कि किस प्रकार से उन्होंने परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त किए तथा अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए सफल योजना को विस्तारपूर्वक बताया। जिसका उपयोग करके कोई भी छात्रा अच्छे अंक प्राप्त कर सकती हैं। छात्राएं इस संगोष्ठी श्रृंखला के आयोजन से बहुत प्रसन्न और उत्साहित हैं। समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ पूर्णिमा शुक्ला ने बताया कि यह श्रृंखला 4 सप्ताह तक प्रत्येक सोमवार को आयोजित की जाएगी। जिससे छात्राओं को अच्छे अंक प्राप्त करने की प्रेरणा प्राप्त होगी।
भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज सभागार में महाविद्यालय की placement cell तथा counselling cell के द्वारा “The Art of Success” विषय पर 23 सितंबर को counselling seminar आयोजित किया गया।
कनपुर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज महाविद्यालय में पिछले एक सप्ताह से चल रहे मंच कला वह फिल्म अभिनय का सफलतापूर्वक समापन प्राचार्य जोसेफ डेनियल के दिशा निर्देशन में किया गया। सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित की गई यह कार्यशाला संयोजक डॉ.संजय सक्सेना और सहसंयोजक प्रो.मीत कमल द्वारा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगीत नाटक पुरस्कार विजेता नाटक और संवाद लेखक विभांशु वैभव के नेतृत्व में यह एक सप्ताह की कार्यशाला की गई। इस कार्यशाला में महाविद्यालय के 40 से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया कार्यशाला के सप्ताह में वैभव ने मंच कला में अभिनय के इतिहास के बारे में बच्चों को बताया एवं इसकी उत्पत्ति कैसे हुई यह बताया, ध्यान केंद्रित करने के तरीके बताएं ।एक छोटी सी मूवी – ए बॉय इन स्ट्रिप्ड पजामा के माध्यम से हमें ऑब्जर्वेशन के विषय में समझाया । वैभव ने विदोहम सिंफनी म्यूजिक में एक्ट भी कराया । सर ने कार्य दिया कि हमें अपने आसपास मौजूद किसी भी व्यक्ति को ध्यानपूर्वक ऑब्जर्व करना है ।उसे अगले दिन अपने एकल प्रस्तुति माध्यम द्वारा दिखाना है। कार्यशाला में एक्टर के लिए महत्वपूर्ण तत्वों पर बात की जैसे रिलैक्सेशन ,कंसंट्रेशन ऑब्जरवेशन ,बिलीव एंड इमोशन। सर ने अपनी रचित कविता भी लिखाई ।कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को चार समूह में विभाजित कर दिया एवं उनको समाज के कुछ ऐसे विषयों पर नाट्य प्रस्तुत करने का मौका दिया जैसे ड्रग्स, वृद्ध आश्रम, आतंकवादी हमले एवं एसिड अटैक इन्हीं कार्यक्रमों की फाइनल प्रस्तुति 22/09/2023 की कार्यक्रम द्वारा की गई। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जोसेफ डेनियल के मार्गदर्शन में किया गया मुख्य अतिथि संगीत नाटक अवार्ड विजेता विभांशु वैभव रहे ।इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभांशु वैभव ने बताया कि बच्चे न सिर्फ जिस तरह से रंगमंच में भाग लेते हैं बल्कि उनकी बहुमुखी प्रतिभा का भी विकास होता है ।कार्यक्रम में सभी का स्वागत डॉक्टर संजय सक्सेना संयोजक सांस्कृतिक समिति द्वारा किया गया। उक्त कार्यक्रम का संचालन नागेंद्र प्रताप सिंह एवं कावेरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्राचार्य द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया। गया कार्यक्रम का अंत प्रोफेसर मीत कमल सह संयोजक सांस्कृतिक समिति द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से किया गया । उक्त कार्यक्रम के अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक गण एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
इटावा, भारतीय स्वरूप संवाददाता। जीवन प्रतिपल कुछ न कुछ सीखने का अवसर लेकर आता है, ज्ञान प्राप्त करने के लिए वृक्ष की तरह झुकना सीखिए। ढूंढनी है मंजिल अगर, तो अपना रहनुमा खुद ही बन,जिन्होंने तलाशा सहारा, वे मझधार में ही रह गए। महोपाध्याय डॉक्टर विद्या कांत तिवारी जी के अभिनंदन समारोह में आ कर में खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। इनका ज्ञान और सानिध्य जिसे मिल जाए उसका जीवन तो धन्य हो ही जायेगा।
उनका कहना था कि नारी के धैर्य, त्याग, तपस्या जैसे सद्गुण अगर पुरुष में आ जाएं तो वह महात्मा बन जायेगा। नारी जगत का सम्मान नई पीढ़ी को सिखाए तो वे चरित्रवान बनेंगे। लड़कियां फेसबुक इंस्टाग्राम के फर्जी फोटो वालों के चक्कर में अपने जीवन को तबाह न करें और अपने परिजनों की सलाह का सम्मान करें तो ही कल्याण और प्रगति संभव है। अपने मां बाप का सम्मान न करने वाली नस्लें धिक्कारे जाने योग्य ही हैं।
जिसके कारण ही अपने कर्तव्य पथ पर गुरु धर्म के निर्वाह में असीम आनंद भरपूर संतुष्टि और अकल्पनीय यश कीर्ति प्राप्त हो सकी। मेरे समर्पण भाव का मूल्यांकन करने वाले आप सब मनीषी जनों की महानता को प्रणाम करना ही धर्म है।सभी के प्रति आजन्म श्रेणी और कृतज्ञ रहने की योग्यता विकसित करने में सफल होऊ, यही आकांक्षा है। सेवा निवर्ति के पन्द्रह वर्ष बाद भी आप सब ने याद रखा,असीम आत्म बल प्रदान किया। यह आप सब की महानता का ही घोतक हैजिसे विस्मृत किया जाना प्रबुद्ध सम्मान के लिए संभव नहीं होगा।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे भारत विकास परिषद के पांचाल प्रांत अध्यक्ष डॉक्टर रमेश चंद्र शुक्ला (औरैया) का समीक्षात्मक उद्बोधन प्रेरणा दायक रहा। उनकी कविता और पुलिस कप्तान दंपत्ति पर टिप्पणी उत्साह वर्धक रही।मंचासीन प्रसिद्ध कहानीकार प्रो दिनेश पालीवाल अपने अनुजवत तिवारी जी के सम्मान पर आत्म विभोर नज़र आए।
विकासखंड क्षेत्र स्थित हुसैनगंज मजरे पाराखुर्द से पुरासी वाया मोहनगंज व सुखलिया को जोड़ने वाले मार्ग का निर्माण आजादी से अब तक नहीं किया गया। करीब तीन किलोमीटर इस कच्चे रास्ते की नपाई तो पीडब्लूडी विभाग द्वारा कई बार कराई गई किन्तु नतीजा कागजों तक ही सीमित रहा।

