

इस अवसर पर मंत्री ने कहा, “पूर्वी समुद्री गलियारे (ईएमसी) के संचालन से भारत और रूस के बीच व्यापार संबंधों के एक नए युग की शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत अभिनव समाधान तैयार करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है, जो हमारे दो महान राष्ट्रों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाएगा तथा और आगे बढ़ाएगा। चूंकि हमारी टीमों ने ईएमसी के शीघ्र संचालन के लिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया था, व्लादिवोस्तोक, वोस्तोचन, नखोदका और कोज़मिनो की यात्रा विशेष रूप से सहायक रही। इसे आगे बढ़ाते हुए, मैं भारत के चेन्नई में सभी हितधारकों की एक कार्यशाला के आयोजन का प्रस्ताव देता हूं और इस कार्यशाला के लिए निमंत्रण देता हूं, जहां हम ईएमसी के सुचारू और तेज संचालन के लिए मिल सकते हैं, बातचीत कर सकते हैं और चर्चा कर सकते हैं।
रूसी सरकार ने भी अपने भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय चर्चा के माध्यम से अवसरों और संभावनाओं का पता लगाने के लिए एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ चेन्नई बंदरगाह का दौरा करने की इच्छा व्यक्त की है। रूसी प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व रूसी संघ के ऊर्जा मंत्री के उप मंत्री श्री सर्गेई मोचलनिकोव और रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के मैक्सिम रेशेतनिकोव ने किया। सत्र का संचालन एसोसिएशन ऑफ कमर्शियल सीपोर्ट्स के निदेशक मंडल के अध्यक्ष डेनिस इलातोव्स्की ने किया।
भारत के समुद्री कार्यक्रम और इसके प्रमुख कार्यक्रम सागरमाला के बारे में मंत्री ने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, 2015 में, भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के प्रदर्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सागरमाला की हमारी परिवर्तनकारी पहल शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य भारत की तटरेखा और जलमार्गों की पूरी क्षमता का उपयोग करना है। सागरमाला का विज़न, पत्तन के नेतृत्व वाले विकास के माध्यम से अधिकतम अवसंरचना निवेश के साथ घरेलू और एक्जिम कार्गो दोनों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है। वर्तमान में, सागरमाला कार्यक्रम के तहत 2035 तक कार्यान्वयन के लिए 65 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की 802 परियोजनाएं हैं। इनमें से 14.6 बिलियन डॉलर की 228 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 27 बिलियन डॉलर की 260 परियोजनाएं कार्यान्वयन के चरण में हैं। इसके अलावा, 24 बिलियन डॉलर की 314 परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इसके अलावा, तटीय जिलों के समग्र विकास के तहत, लगभग 7 बिलियन डॉलर की अनुमानित लागत वाली कुल 567 परियोजनाओं की पहचान की गई है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान कार्यक्रम के तहत रेलवे, सड़क मार्ग, जलमार्ग और वायुमार्ग के विकास के माध्यम से एकीकृत दृष्टिकोण के साथ उत्पादकता और रोजगार के अवसरों में सुधार के लिए समग्र अवसंरचना के विकास की परिकल्पना की है। गतिशक्ति योजना नए युग की तकनीक और अत्याधुनिक नवाचार का उपयोग करके विश्व स्तरीय उत्पादों के निर्माण के लिए भारत के कायाकल्प का आधार बन गई है।
प्रिमोर्ये क्षेत्र की सरकार के उपाध्यक्ष वालेरी प्रोकोपचुक; पावेल काल्मिचेक, द्विपक्षीय सहयोग विकास विभाग, आर्थिक विकास मंत्रालय, रूसी संघ; रुस्कॉन एलएलसी के सीईओ सर्गेई बेरेज़किन ने भी सत्र को संबोधित किया। पवन कपूर, रूस में भारत के राजदूत; एस.के. मेहता, अध्यक्ष, दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण; व्लादिमीर पनोव, आर्कटिक विकास के लिए रोसाटॉम के विशेष प्रतिनिधि; रूसी निर्यात केंद्र जेएससी के विदेशी नेटवर्क विकास निदेशक दिमित्री प्रोखोरेंको ने भी सत्र में भाग लिया। दोनों पक्षों ने बंदरगाहों में आधुनिक अवसंरचना और पोत परिवहन उद्योग के लिए कार्गो सुनिश्चित करने के तरीकों और उपायों पर भी चर्चा की। चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी के उपाध्यक्ष, एस विश्वनाथन ने “भारतीय बंदरगाहों की क्षमता और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर के संचालन की संभावना” पर एक प्रस्तुति दी। व्लादिवोस्तोक वाणिज्यिक समुद्री बंदरगाह के वाणिज्यिक निदेशक एलेना कज़ारिना ने भी “फेस्को के गहरे समुद्री मार्गों का विकास और रूस और भारत के बीच परिवहन और लॉजिस्टिक्स संबंधों को आगे की दिशा देना” पर एक प्रस्तुति दी। एसोसिएशन ऑफ कमर्शियल सीपोर्ट्स के निदेशक मंडल के अध्यक्ष डेनिस इलातोव्स्की ने स्वागत भाषण के साथ-साथ समापन भाषण भी दिया।
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2019 में व्लादिवोस्तोक में पूर्वी आर्थिक मंच के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति श्री पुतिन की उपस्थिति में व्लादिवोस्तोक और चेन्नई के दो बंदरगाहों के बीच समुद्री संचार के विकास पर एक आशय पत्र का आदान-प्रदान किया गया था। अध्ययन में पाया गया कि ईएमसी का उपयोग करके दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए कोकिंग कोयला सबसे उपयुक्त वस्तु है। आने वाले समय में, ईएमसी के माध्यम से परिवहन की जाने वाली वस्तुओं की सूची में तेल, एलएनजी, उर्वरक जैसी अन्य वस्तुओं को जोड़ा जाएगा।
अनुमान है कि पूर्वी समुद्री गलियारा (ईएमसी); सुदूर-पूर्व क्षेत्र के रूसी बंदरगाहों और भारतीय बंदरगाहों के बीच माल परिवहन की यात्रा-अवधि को 16 दिनों तक कम कर देगा, यानि, वर्तमान में भारत से यूरोप होकर सुदूर पूर्व रूस तक माल परिवहन के लिए लगने वाले 40 दिनों की तुलना में 24 दिन। भारत में मुंबई और रूस में सेंट पीटर्सबर्ग के बीच वर्तमान व्यापार मार्ग 8,675 समुद्री मील का है, जिसमें लगभग 35 से 40 दिन लगते हैं। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग (ईएमसी) लगभग 5,600 समुद्री मील की दूरी तय करेगा। एक बड़ा कंटेनर जहाज जो 20-25 नॉट (37-46 किमी/घंटा) की सामान्य क्रूज़िंग गति से यात्रा करता है, इस दूरी को लगभग 10 से 12 दिनों में तय करने में सक्षम होगा। इस गलियारे के माध्यम से व्यापार और सहयोग के नए अवसरों के खुलने की अपार संभावनाएं हैं। सोनोवाल ने भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हाल ही में संपन्न जी20 शिखर सम्मेलन की प्रमुख बातों पर भी प्रकाश डाला। अफ्रीकी संघ (एयू) को जी20 में शामिल करना ‘सबका साथ, सबका विकास’ दर्शन को रेखांकित करता है। जलवायु कार्रवाई और सतत विकास को आगे बढ़ाने, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार को बढ़ावा देने, वैश्विक स्वास्थ्य और महामारी संबंधी तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ बहुपक्षवाद और सहयोग को बढ़ाने का समर्थन करते हुए भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में भी सफलतापूर्वक अपनी बातें सामने रखीं। उन्होंने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक एकजुटता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हुए भारत के “वसुधैव कुटुंबकम” (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) के संदेश को प्रभावी ढंग से संप्रेषित किया है। श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जी20 की अध्यक्षता भारत की वैश्विक स्थिति में एक ऐतिहासिक क्षण रही है। इसने वैश्विक मुद्दों पर नेतृत्व करने और अंतरराष्ट्रीय एजेंडे को आकार देने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया है। भारतीय अध्यक्षता की उपलब्धियां आने वाले वर्षों में जी20 को प्रेरित करती रहेंगी और मार्गदर्शन देती रहेंगी।” सोनोवाल रूस की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। कल, वे अपने रूसी समकक्ष, रूस के परिवहन मंत्री श्री विटाली सेवेलिव से भेंट करेंगे तथा अन्य महत्वपूर्ण द्विपक्षीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे। भारत के पत्तन मंत्री कल व्लादिवोस्तोक बंदरगाह का भी दौरा करेंगे।
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कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बालिका महाविद्यालय में दिनाँक 09/09/2023 से दिनाँक 12/09/2023 तक सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया। इसीमें विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस (World First Aid Day) के अवसर पर छात्राओं हेतु एक कार्यशाला का आयोजन किया गया
जिसका संयोजन व संचालन महाविद्यालय की शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रोफेसर प्रीति पांडे तथा उनकी वैष्णवी रेंजर्स टीम के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन समारोह का शुभारंभ आज मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. सफर, प्राचार्य प्रोफेसर सुमन तथा प्रोफेसर प्रीति पांडेय द्वारा मां शारदे को माल्यार्पण कर किया गया। कार्यशाला में छात्रों को प्राथमिक चिकित्सा से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई कि किसी भी व्यक्ति को हार्ट अटैक के समय CPR देकर कैसे सुरक्षित किया जा सकता है, सड़क पर किसी घायल व्यक्ति की कैसे मदद की जा सकती है, जलने पर कैसे उपचार किया जाए की व्यक्ति की जान पर कोई खतरा न आए। इसी तरह की और व्यवहारिक जानकारियां छात्रों को दी गई| रेड क्रॉस मास्टर ट्रेनर और डिजास्टर मैनेजर लखन शुक्ला ने प्राथमिक चिकित्सा सहायता के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की पट्टियों को बाँधना सिखाया तथा आकस्मिकता में First Aid Use करने की विभिन्न प्रायोगिक विधियां छात्राओं को सिखाई| इस अवसर पर प्रीति तिवारी (लाइफ मेंबर रेड क्रॉस सोसाइटी), राम (सदस्य, रेड क्रॉस), तथा राम प्रकाश, (कार्यकर्ता) कार्य शाला में उपस्थित रहें। छात्राओं ने उत्साहपूर्ण सहभागिता की तथा समस्त शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं|
कानपुर 13 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, विकास भवन सभागार में सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में ‘आयुष्मान भवः’ अभियान की तैयारियों को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि 13 सितंबर को राष्ट्रपति द्वारा इसका वर्चुअल शुभारम्भ किया जाएगा तथा 17 सितंबर से अभियान शुरू होगा जो दो अक्तूबर तक संचालित किया जायेगा। चिकित्सा व स्वास्थ्य देखभाल संबंधी गतिविधियाँ सेवा पखवाड़ा, आयुष्मान आपके द्वार 3.0, आयुष्मान सभा, आयुष्मान मेला का आयोजन जनपद, विकासखण्ड, ग्राम पंचायत स्तरों पर किया जाएगा।




कानपुर 9 सितम्बर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन. बालिका विद्यालय पी.जी. कॉलेज कानपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के उपलक्ष्य में एक निबंध प्रतियोगिता एवं ध्यान सत्र का आयोजन किया गया।
सर्वप्रथम मां सरस्वती जी की वंदना कर दीप प्रज्वलन किया गया। उक्त अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो० सुमन एवं कार्यक्रम के निर्णायक मंडल प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर एवं डॉक्टर संगीता सिंह अतिथि वक्ता के रूप में मनोज शुक्ला (आना पान सती ध्यान विशेषज्ञ) उपस्थित रहे। प्राचार्या जी ने कहा कि यह दिवस एक माध्यम है आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए। देश में आत्महत्या करने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है इसीलिए ऐसे कार्यक्रम का बहुत महत्व है, ताकि उसकी रोकथाम समय पर हो सके निबंध प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के रूप में प्रो० चित्रा सिंह तोमर विभागाध्यक्षा शिक्षा शास्त्र एवं डॉ संगीता सिंह प्रवक्ता शिक्षा शास्त्र विभाग थे। निर्णय इस प्रकार रहा
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता एस. एन.सेन बालिका विद्यालय पी. जी. कॉलेज के विज्ञान संकाय मे एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रबंध तंत्र के संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन प्राचार्या प्रो सुमन विशिष्ट अतिथि तिलक महाविद्यालय औरैया के प्राचार्य डा रवि कुमार तथा मुख्य वक्ता डॉ शशि बाला ने दीप प्रज्वलित करके किया एवं छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए किया। मंच का संचालन रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.गार्गी यादव ने किया। अतिथि वक्ता के रूप में रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की असिस्टैंट प्रोफेसर शशि बाला ने (Carbon capture and storage: A solution for environmental Carbon di oxide)कार्बन डाई आक्साइड के प्रपाशन एवं भंडारण के द्वारा ग्रीन हाउस गैसों से निपटने का एवं पर्यावरण को बचाने का मार्ग दिखाया , साथ ही उन्होंने बताया कि इस विषय में अभी उनका शोध कार्य चल रहा हैl
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता आज क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में सिविल सर्विसेज की तैयारी कैसे करें विषय पर अवध ओझा के वक्तत्व का अयोजन कॉलेज के प्रचार्य जोसेफ डेनियल के दिशानिर्देशन में कैरियर काउंसिल सेल द्वारा आयोजित किया गया जिसकी संयोजिका प्रो मीत कमल है। कार्यक्रम में इकरा आईएएस के संस्थापक शाह फैसल एवं सदस्य सतेंद्र सिंह ,मयंक सिंह मोजूद रहे।
कानपुर 9 सितंबर भारतीय स्वरूप संवाददाता, कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय ,स्वरूप नगर के गृह विज्ञान विभाग द्वारा एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया ।जिसमे पेडिलाइट कंपनी के श्री अनिल मल्होत्रा द्वारा छात्राओं को लिप्पन कला को विस्तार पूर्वक करके दिखाया। कार्यक्रम प्रभारी प्रो.अनुपम कुमारी द्वारा बताया कि यह बहुत पुरानी कच्छ,गुजरात की पारंपरिक शिल्प कला है। जिसको गोबर, मिट्टी के मिश्रण से शीशे लगाकर बनाते है जो घर के अंदरूनी हिस्सों को ठंडा रखती है। छात्राओं को इस तरह की कलाओं को सीख कर अपने अंदर छिपी प्रतिभा को प्रदर्शित करने की तरफ प्रेरित किया। इस प्रदर्शन में महाविद्यालय की लगभग 20 छात्राओं ने भाग लिया।