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Bharatiya Swaroop

भारतीय स्वरुप एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है। सम्पादक मुद्रक प्रकाशक अतुल दीक्षित (published from Uttar Pradesh, Uttrakhand & maharashtra) mobile number - 9696469699 : 9415153880

शिक्षा को रोजगार अवसरों के साथ जोड़ना

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 समग्र, बहुविषयक और लचीली उच्च शिक्षा को बढ़ावा देती है, जिससे विद्यार्थी एकल विषय से आगे बढ़कर ज्ञान और कौशल प्राप्त कर सकें तथा विविध शैक्षणिक और व्यावसायिक मार्गों को अपना सकें। यह नीति उद्योग और शिक्षा जगत के बीच संपर्क के महत्व पर जोर देती है तथा स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन केंद्रों की स्थापना, अनुसंधान के अग्रणी क्षेत्रों में केंद्रों की स्थापना, उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने और मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान सहित अंतरविषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करके अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देती है।

राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ), राष्ट्रीय उच्च शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ), अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) और मल्टीपल एंट्री एवं मल्टीपल एग्जिट प्रावधान अकादमिक, व्यावसायिक और अनुभवात्मक शिक्षा के एकीकरण, संचय और हस्तांतरण के लिए एक ढांचा प्रदान करते हैं।

अकादमिक शिक्षा और रोजगार की आवश्यकताओं के बीच संबंध को मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में परिणाम आधारित शिक्षा, कौशल आधारित मॉड्यूल, परियोजना आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप और उद्योग सहभागिता का प्रावधान किया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने उच्च शिक्षण संस्थानों और तकनीकी संस्थानों द्वारा संचालित किए जाने वाले अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

इसका उद्देश्य अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना, स्नातकों की दक्षताओं को बढ़ाना और उनकी रोजगार क्षमता में सुधार करना है। यूजीसी और एआईसीटीई अप्रेंटिसशिप घटक के मूल्यांकन के लिए उद्योग/प्रतिष्ठान, शिक्षा जगत और उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) को शामिल करते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाते हैं।

राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) का उद्देश्य भारतीय युवाओं को कार्यस्थल आधारित प्रशिक्षण और कौशल प्रदान करना है। इसे शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मुंबई, कानपुर, चेन्नई और कोलकाता स्थित चार क्षेत्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण बोर्डों/व्यावहारिक प्रशिक्षण बोर्डों (बीओएटी/बीओपीटी) के माध्यम से लागू किया जाता है।

पिछले पांच वर्षों (2021-2022 से 2025-2026) के दौरान एनएटीएस के अंतर्गत लगभग 17.22 लाख अप्रेंटिस शामिल किए गए हैं। इस अवधि के दौरान शिक्षा मंत्रालय ने अप्रेंटिस के लिए स्टाइपेंड सहायता के रूप में 2892.75 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

एनएटीएस 2.0 पोर्टल को अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण के पंजीकरण और प्रबंधन के लिए एक तकनीक आधारित मंच के रूप में शुरू किया गया है। इसमें अप्रेंटिसशिप अनुबंधों की डिजिटल प्रक्रिया, प्रशिक्षण और स्टाइपेंड संबंधी प्रक्रियाओं की निगरानी तथा अप्रेंटिस और प्रतिष्ठानों की बेहतर ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है।

एनएटीएस के अंतर्गत अब तक एईडीपी के कार्यान्वयन के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) के साथ लगभग 457 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 75,000 से अधिक अप्रेंटिस एआई अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम से लाभान्वित हुए हैं।

एआईसीटीई ने उभरते क्षेत्रों और प्रमुख इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रमों तथा शिक्षण पद्धतियों का व्यापक मूल्यांकन किया है, ताकि उन्हें बदलती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।

इस मूल्यांकन में डिग्री-केंद्रित शिक्षा से हटकर कौशल, अनुकूलन क्षमता, व्यावहारिक अनुभव और उद्योग प्रासंगिकता पर अधिक जोर दिया गया है। मॉडल पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के प्रमुख शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, सार्वजनिक संगठनों और अनुसंधान संस्थानों के परामर्श से विकसित किया गया है।

इन पाठ्यक्रमों में अनुभवात्मक शिक्षण, इंटर्नशिप, बहुविषयक अनुभव और उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित दक्षताओं को शामिल किया गया है, ताकि वर्तमान और भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

मॉडल पाठ्यक्रम में अधिक लचीलापन प्रदान करने के लिए क्रेडिट आवश्यकताओं को कम किया गया है और रोजगार क्षमता पर केंद्रित “मूल्यवर्धित” पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है।

एआईसीटीई ने सितंबर 2025 में प्रोजेक्ट प्रैक्टिस शुरू किया है, जिसका उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के एआईसीटीई अनुमोदित संस्थानों में सैद्धांतिक रटने वाली शिक्षा से हटकर व्यावहारिक परियोजना आधारित शिक्षण और उद्योग से जुड़े कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है।

इसके अतिरिक्त, एआईसीटीई ने कैंपस कार्यक्रमों में कार्य आधारित शिक्षण, परियोजना पोर्टफोलियो और एआई से संबंधित दक्षताओं को शामिल करने के लिए कई प्रमुख सुधार शुरू किए हैं। इन सुधारों में पाठ्यक्रमों में उभरती और एआई आधारित प्रौद्योगिकियों का समावेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), मशीन लर्निंग (मशीन अधिगम), रोबोटिक्स और साइबर-फिजिकल सिस्टम (साइबर-भौतिक प्रणाली) से संबंधित पाठ्यक्रमों एवं वैकल्पिक विषयों को शामिल करना शामिल है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सामुदायिक महाविद्यालयों, बी.वोक. डिग्री कार्यक्रमों और दीन दयाल उपाध्याय ज्ञान अर्जन एवं कौशल मानव क्षमताओं और आजीविका उन्नयन केंद्रों के माध्यम से कौशल आधारित शिक्षा को समर्थन दिया है।

रोजगारपरक कौशल मॉड्यूल को पाठ्यक्रम में जॉब रोल्स/स्वयम् (एसडब्ल्यूएवाईएएम) के एक भाग के रूप में शामिल किया गया है, जिनमें संचार कौशल, स्व-प्रबंधन कौशल, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) कौशल, उद्यमिता कौशल और हरित कौशल शामिल हैं।

कौशल विकास को समर्थन देने के लिए स्वयम् प्लस (एसडब्ल्यूएवाईएएम प्लस) पोर्टल भी शुरू किया गया है, जो कार्यबल के अपस्किलिंग (कौशल उन्नयन) और रीस्किलिंग (पुनः कौशल विकास) पर केंद्रित है। 17 क्षेत्रों में 89 उद्योग भागीदारों से तैयार किए गए 500 से अधिक पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं और इन्हें एआई, डेटा एनालिस्ट (डेटा विश्लेषक) जैसे उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध कराया गया है।

यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीएम श्री योजना का कार्यान्वयन

प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य देशभर के 14,500 से अधिक विद्यालयों को सुदृढ़ करना है। वर्तमान में, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों तथा केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) सहित कुल 13,092 विद्यालयों का चयन पीएम श्री विद्यालयों के रूप में किया गया है। ये पीएम श्री विद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 की सभी पहलों को प्रदर्शित करते हैं, आदर्श विद्यालयों के रूप में कार्य करते हैं तथा आसपास के अन्य विद्यालयों के लिए मानक स्थापित करने वाला नेतृत्व प्रदान करते हैं। ये विद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 की परिकल्पना के अनुरूप समतामूलक, समावेशी एवं आनंदमय विद्यालयी वातावरण में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने में अपने-अपने क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करते हैं। साथ ही, वे बच्चों की विविध सामाजिक पृष्ठभूमि, बहुभाषी आवश्यकताओं तथा विभिन्न शैक्षणिक क्षमताओं का ध्यान रखते हुए उन्हें अपनी सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाते हैं।

पीएम श्री योजना के कार्यान्वयन की अवधि वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक है। इसके अतिरिक्त, पीएम श्री योजना की कार्यान्वयन रूपरेखा निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है:

https://pmshri.education.gov.in/assets/pdf/part1_pmshri.pdf

पीएम श्री योजना के अंतर्गत निधियों का आवंटन एवं निर्गमन वित्त वर्ष 2023-24 से प्रारंभ हुआ। वित्त वर्ष 2023-24, वित्त वर्ष 2024-25, वित्त वर्ष 2025-26 तथा वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान पीएम श्री योजना के अंतर्गत आवंटित एवं जारी की गई निधियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी-वार विवरण संलग्नक में दिया गया है।

पीएम श्री योजना के अंतर्गत राज्य/संघ राज्य क्षेत्र केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करते हैं, जिसमें विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालयों के रूप में निर्धारित गुणवत्ता आश्वासन प्राप्त करने हेतु सहायता प्रदान करने संबंधी प्रतिबद्धताओं का उल्लेख होता है। इसके पश्चात, चैलेंज मोड के माध्यम से पीएम श्री विद्यालयों का चयन किया जाता है, जिसमें विद्यालय आदर्श विद्यालय बनने के लिए सहायता प्राप्त करने हेतु प्रतिस्पर्धा करते हैं।

पीएम श्री विद्यालयों में, सीबीएसई अथवा राज्य परीक्षा बोर्डों से संबद्धता के अनुसार सीबीएसई अथवा संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का पाठ्यक्रम अपनाया जाता है।

पीएम श्री विद्यालय रूपरेखा के विद्यालय परिवर्तन संबंधी पैरा 1.1 में की गई परिकल्पना के अनुसार, पीएम श्री विद्यालयों में पाठ्यचर्या राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ)/राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) के अनुरूप होगी, जिसे नई 5+3+3+4 पाठ्यचर्या एवं शिक्षाशास्त्रीय संरचना के अनुसार विकसित किया जाएगा। इसका प्रतिबिंब एनसीएफ-एफएस तथा एनसीएफ-एसई में दिखाई देगा। राज्यों को मूलभूत सिद्धांतों एवं संवैधानिक मूल्यों का पालन करते हुए अपनी राज्य-विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यचर्या को अनुकूलित करने की सुविधा प्रदान की गई है।

केरल राज्य ने 23 अक्टूबर 2025 को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद पीएम श्री विद्यालयों के चयन के लिए पारदर्शी चैलेंज मोड प्रक्रिया अपनाई जानी थी।

पीएम श्री योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सभी घटकों को प्रदर्शित करना है। यह योजना न केवल संज्ञानात्मक विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों से युक्त समग्र एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के निर्माण पर भी बल देती है।

यह योजना एक समतामूलक, समावेशी एवं आनंदमय शिक्षण वातावरण के निर्माण पर केंद्रित है, जो विविध सामाजिक पृष्ठभूमियों, बहुभाषी आवश्यकताओं और विभिन्न शैक्षणिक क्षमताओं वाले विद्यार्थियों की जरूरतों को पूरा करता है। इन विद्यालयों की परिकल्पना विद्यार्थियों को उनकी सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए की गई है, ताकि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण में स्वयं को स्वागत योग्य, देखभाल प्राप्त करने वाला तथा समर्थ महसूस कर सके।

इसलिए, जो राज्य एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं या योजना से बाहर हो जाते हैं, वे पीएम श्री योजना के इन लाभों से वंचित रह सकते हैं।

यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

पीके/केसी/एके

अनुलग्नक

राज्यसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 1155 के भाग (ख) के उत्तर में संदर्भित अनुलग्नक, जिसका उत्तर 29.07.2026 को श्री अब्दुल वहाब, माननीय सांसद द्वारा “पीएम श्री योजना का कार्यान्वयन” के संबंध में पूछे गए प्रश्न के संदर्भ में दिया गया।

पीएम श्री योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2023-24, वित्त वर्ष 2024-25, वित्त वर्ष 2025-26 और वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान जारी की गई निधियों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी-वार विवरण निम्नानुसार है:

(₹ करोड़ में)

NA – संबंधित वर्ष में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों/एनसीईआरटी द्वारा पीएम श्री योजना को अपनाया (ऑनबोर्ड) नहीं किया गया था।

वित्त वर्ष 2025-26 से पीएम श्री योजना को एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) पर ऑनबोर्ड किया गया है। इसलिए, इन संघ राज्य क्षेत्रों/केवीएस/एनवीएस/एनसीईआरटी को छोड़कर यह आंकड़ा जारी की गई मूल स्वीकृति (Mother Sanction) को दर्शाता है।

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उच्च शिक्षा में पद और रिक्तियां

शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थान (सीएचईआई), जिनमें केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थान जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) शामिल हैं, संसद के संबंधित केंद्रीय अधिनियमों के तहत स्थापित वैधानिक स्वायत्त संगठन हैं और इन अधिनियमों के अंतर्गत बनाए गए प्रावधानों, विधियों, अध्यादेशों और विनियमों द्वारा संचालित होते हैं। स्वायत्त संस्थानों के रूप में संकाय भर्ती संस्थानों के भीतर ही उनके अधिनियमों और विनियमों के अनुसार की जाती है। भर्ती संबंधी शक्तियां संबंधित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, कार्यकारी समिति और प्रबंधन बोर्ड में निहित होती हैं।

रिक्तियों का सृजन और उनका भरा जाना एक सतत प्रक्रिया है। पदोन्नति, सेवानिवृत्ति, इस्तीफा, मृत्यु, नए संस्थानों, योजनाओं या परियोजनाओं के आरंभ होने तथा मौजूदा संस्थानों में छात्रों की संख्या में वृद्धि और क्षमता विस्तार के कारण अतिरिक्त आवश्यकताओं के चलते रिक्तियां सृजित होती हैं।

अगस्त 2021 में, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सभी सीएचईआई से अनुरोध किया गया था कि वे मिशन मोड में अपने संस्थानों में लंबित रिक्तियों को भरने के लिए एक विशेष अभियान चलाएं। सीएचईआई ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सहित रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए। सितंबर 2022 में, शिक्षा मंत्रालय ने सभी सीएचईआई से मिशन मोड में रिक्तियों को भरने का आग्रह किया था। अक्टूबर 2025 में, सभी सीएचईआई से पुनः मिशन मोड में सभी लंबित रिक्तियों को भरने का अनुरोध किया गया। सितंबर 2022 से सभी सीएचईआई ने रिक्तियों को भरने के लिए मिशन मोड भर्ती अभियान चलाया है। 23 मई 2026 तक (अर्थात अंतिम रोजगार मेले की तिथि तक), सभी सीएचईआई द्वारा कुल 32,114 पद (3,851 एससी, 1,643 एसटी, 6,785 ओबीसी, 1,191 ईडब्ल्यूएस) भरे गए हैं, जिनमें मिशन मोड के तहत 18,757 संकाय पद (2,315 एससी, 910 एसटी, 3,986 ओबीसी, 568 ईडब्ल्यूएस) शामिल हैं।

सीएचईआई में पीएचडी प्रवेश की संख्या गतिशील है और प्रवेश चक्रों के अनुसार बदलती रहती है, जो संकाय पर्यवेक्षकों की उपलब्धता, विभागीय आवश्यकताओं और वित्तीय सहायता पर निर्भर करती है। इसके अलावा, पीएचडी पदों की उपलब्धता संस्थान की संकाय संख्या के साथ बदलती रहती है। नए संकाय सदस्य अतिरिक्त शोध पर्यवेक्षण क्षमता उत्पन्न करते हैं, जबकि उन संकाय सदस्यों के शोधार्थी जो इस्तीफा देते हैं, सेवानिवृत्त होते हैं या स्थानांतरित किए जाते हैं, उन्हें संस्थान के शैक्षणिक नियमों के अनुसार अन्य योग्य पर्यवेक्षकों को पुनः आवंटित किया जाता है। पीएचडी में नामांकन की संख्या 1,17,301 (एआईएसएचई रिपोर्ट 2014-15 के अनुसार) से बढ़कर 3,43,559 (एआईएसएचई रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार) हो गई है, जो 192.89% की वृद्धि दर्शाती है।

यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।

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शिक्षा में केंद्र–राज्य समन्वय के लिए केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड बैठकें

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के मसौदे पर विचार-विमर्श करने के लिए केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (सीएबीई) का एक विशेष सत्र 21 सितम्बर 2019 को आयोजित किया गया था। एनईपी 2020 में अन्य बातों के साथ यह परिकल्पना की गई है कि इसके सफल कार्यान्वयन के लिए दीर्घकालिक दृष्टि, सतत विशेषज्ञता और राष्ट्रीय, राज्य, संस्थागत तथा व्यक्तिगत स्तरों पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता होगी। तदनुसार, नीति में सीएबीई को सुदृढ़ और सशक्त बनाने की अनुशंसा की गई है, ताकि इसे परामर्श के लिए एक मंच के रूप में विस्तारित अधिकार-क्षेत्र के साथ कार्य करने और शिक्षा की दृष्टि को विकसित करने, अभिव्यक्त करने, मूल्यांकन करने एवं उसकी समीक्षा करने के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संस्थागत ढांचे की समीक्षा करने में सक्षम बनाया जा सके।

एनईपी 2020 के कार्यान्वयन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर शिक्षा मंत्रालय को सलाह देने और विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नीति के व्यापक, समग्र, समन्वित एवं व्यवस्थित कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शिक्षा विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक शिक्षा सलाहकार परिषद का गठन किया है। परिषद का कार्य एनईपी के कार्यान्वयन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर मंत्रालय को सलाह देना, विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसके व्यापक, समग्र और समन्वित कार्यान्वयन को सुगम बनाना, एक व्यापक रोडमैप विकसित करना, पाठ्यक्रम सुधार के लिए हस्तक्षेपों की समीक्षा करना और सीएबीई को सुदृढ़ करने के उपायों की अनुशंसा करना है।

सरकार सहकारी संघवाद और शिक्षा से संबंधित मामलों पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ निरंतर एवं नियमित सहभागिता को अत्यधिक महत्व देती है। सीएबीई, 2020 की घोषणा के बाद से शिक्षा नीतियों और शैक्षिक सुधारों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श के लिए विभिन्न संस्थागत मंचों के माध्यम से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, शिक्षाविदों, उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ नियमित रूप से परामर्श किए गए हैं। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन (जून 2022), राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन (2022, 2023 और 2025), नीति आयोग की 7वीं, 9वीं और 11वीं शासी परिषद की बैठकें (क्रमशः 2022, 2024 और 2026), राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ परामर्श-सह-समीक्षा बैठकें (अक्टूबर और दिसंबर 2022), क्षेत्रवार परामर्श-सह-समीक्षा बैठकें (फरवरी, मार्च, मई और जून 2023), एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला और दो क्षेत्रीय कार्यशालाएं (नवंबर 2021), पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन समकक्षता तथा सीखने के परिणामों में सुधार पर राष्ट्रीय सम्मेलन (जुलाई 2025), अखिल भारतीय शिक्षा समागम (2022, 2023, 2024 और 2025), राज्यपालों का सम्मेलन (2021 और 2024), तथा राज्यों और  केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों के साथ उच्च एवं तकनीकी शिक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला (नवंबर 2024) शामिल हैं।

हाल ही में 22-23 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के प्रमुख नीति निर्माताओं ने अन्य विषयों के साथ, विद्यालयी शिक्षा में प्रमुख केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करने तथा बेहतर शैक्षिक परिणामों के लिए केंद्र- राज्य सहयोग और ज्ञान साझा करने को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया। ये सहभागिताएं शैक्षिक सुधारों के लिए सहयोगात्मक नीति निर्माण, समीक्षा और कार्यान्वयन हेतु एक नियमित मंच प्रदान करती हैं।

यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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प्रधानमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि गुरु ज्ञान देने के साथ-साथ अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और उन्हें सुविचारों एवं सुसंस्कारों से गढ़ते हैं। प्रधानमंत्री ने सभी लोगों से अपने गुरुजनों के आदर्शों को जीवन में मार्गदर्शक बनाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा—

“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।

शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”

इस सुभाषित में यह भाव व्यक्त किया गया है कि जो सही दिशा प्रदान करते हैं, ज्ञान एवं सत्य का बोध कराते हैं, सही मार्ग दिखाते हैं, शिक्षा प्रदान करते हैं तथा जीवन में सत्य की समझ विकसित कर आत्म-विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं, उन्हें ही गुरु के छह रूप माना गया है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं। आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।

प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।

शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”

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राजकीय पॉलिटेक्निक को मिलेगी नई पहचान, बन रहा टाटा टेक्नोलॉजीज का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

जिला सूचना कार्यालय कानपुर नगर। गुरुदेव चौराहा स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से स्थापित किए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्माणाधीन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर कार्य की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्र-छात्राओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।

निरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, निर्माण खंड कानपुर-01 के अधिशासी अभियंता फराज़ असलम ने बताया कि 706.75 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन इस परियोजना का कार्य 21 मई 2026 से प्रारंभ हुआ है। परियोजना को 20 मई 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। प्रथम किश्त के रूप में 353.37 लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं, जिनमें से अब तक 86.38 लाख रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग पांच प्रतिशत है तथा फाउंडेशन एवं पेडेस्टल कास्टिंग का कार्य प्रगति पर है।
प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जी प्लस टू प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें आधुनिक प्रयोगशालाएं, तकनीकी वर्कशॉप, डिजिटल प्रशिक्षण कक्ष, वीसैट स्टूडियो, कौशल विकास के लिए समर्पित लैब स्पेस तथा अन्य अत्याधुनिक आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक एवं रोजगारपरक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध होगा। इससे तकनीकी दक्षता और रोजगार क्षमता को मजबूती मिलेगी।

*प्रदेश के अग्रणी राजकीय पॉलिटेक्निक को मिलेगा नया आयाम*

प्रदेश के अग्रणी राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में शामिल यह संस्थान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के बाद तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में और सशक्त होगा। आधुनिक प्रयोगशालाओं, उद्योग आधारित प्रशिक्षण सुविधाओं तथा व्यावहारिक शिक्षण व्यवस्था से विद्यार्थियों को बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का अवसर मिलेगा। संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और रोजगारपरक शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

*तकनीकी शिक्षा को उद्योगों से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल*

*जिलाधिकारी* जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राजकीय पॉलिटेक्निक पहले से ही प्रदेश के अग्रणी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल है। टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से स्थापित हो रहा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इसकी गुणवत्ता और उपयोगिता को नई ऊंचाई देगा। विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी वातावरण में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिलेगा। उनका कौशल विकास होगा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों एवं समयबद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। नियमित मॉनिटरिंग के साथ परियोजना निर्धारित अवधि में पूरी की जाए। विद्यार्थियों को इसका लाभ जल्द उपलब्ध कराया जाए।

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25 किलो रंगीन फिंगर चिप्स कराए गए नष्ट, दूध, पनीर समेत आठ खाद्य पदार्थों के नमूने

जिला सूचना कार्यालय कानपुर जिलाधिकारी के आदेश एवं सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय के निर्देश पर गुरुवार को जनपदभर में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने विशेष अभियान चलाकर विभिन्न प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के नमूने संग्रहित किए। अभियान के दौरान 25 किलोग्राम रंगीन फिंगर चिप्स को मौके पर ही नष्ट कराया गया तथा खाद्य कारोबारियों को वर्षा ऋतु के दृष्टिगत स्वच्छता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन के निर्देश दिए गए।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने ठाकुर दूध डेयरी, बर्रा से दूध एवं पनीर, गोवर्धन डेयरी, घाटमपुर से मिश्रित दूध, पांडेय स्वीट एंड नमकीन, घाटमपुर से पनीर, जवाहर नगर से कुल्फी, राठौर दूध डेयरी, पनकी से पनीर, गोपाल दूध भंडार, रामनारायण मार्केट से भैंस का दूध, गुलशन डेयरी, फजलगंज से दही तथा स्पाइसी फूड, किदवई नगर से सांभर एवं चिली पनीर के नमूने संग्रहित किए।

अभियान के दौरान स्पाइसी फूड, किदवई नगर में विक्रय के लिए भंडारित 25 किलोग्राम रंगीन फिंगर चिप्स को मौके पर ही नष्ट कराया गया।

सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय संजय प्रताप सिंह ने बताया कि नमूना संग्रहण के साथ-साथ खाद्य कारोबारियों को बारिश के मौसम में खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई बनाए रखने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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नशा मुक्त भारत पखवाड़ा कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन पी जी महाविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान के पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत प्राचार्या डॉ सुमन के निर्देशन में डाक्यूमेंट्री प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह अभियान कॉलेज की एनएसएस इकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ श्वेता रानी के द्वारा आयोजित किया गया। डॉ पूजा गुप्ता ने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया।

इस अवसर पर 80 से अधिक NSS, NCC, Rangers की छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

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एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में ‘महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं आत्म-सशक्तिकरण’ कार्यशाला में ‘एपिजेनेटिक्स’ और आध्यात्मिक जीवन शैली में गहन मंथन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में ‘महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं आत्म-सशक्तिकरण’ कार्यशाला के दूसरे दिन ‘एपिजेनेटिक्स’ और आध्यात्मिक जीवन शैली पर हुआ गहन मंथन
​एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर के विज्ञान संकाय द्वारा शांतिकुंज, हरिद्वार एवं “आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी” (कानपुर, उ.प्र.) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला (20 से 28 जुलाई 2026) “Workshop on Women Health, Hygiene & Self Empowerment” के दूसरे दिन आज ‘एपिजेनेटिक्स’ विषय पर विशेष व्याख्यान एवं सत्र का सफल आयोजन किया गया।
​कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. संगीता सारस्वत ने अपने संबोधन में विज्ञान और अध्यात्म के अद्भुत समन्वय को रेखांकित करते हुए एपिजेनेटिक्स और जीवनशैली के प्रभावों पर प्रकाश डाला।
​सत्र के मुख्य बिंदु:
​गायत्री मंत्र, योग एवं ध्यान: डॉ. सारस्वत ने बताया कि किस प्रकार गायत्री मंत्र का जाप, योग, ध्यान और धारणा के सूत्र हमारे मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं और जीन अभिव्यक्ति में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
​मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण: शांतिकुंज के विचार-दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आत्म-साधना और अध्यात्म के माध्यम से मनुष्य में देवत्व का जागरण कर समाज में सुख-शांति स्थापित की जा सकती है।
​स्वामी विवेकानंद का वक्तव्य: स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध कथन “Every soul is potentially divine” (प्रत्येक आत्मा में अंतर्निहित देवत्व है) को संदर्भित करते हुए छात्राओं को अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने और सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया गया।
​जड़, चेतना एवं अध्यात्म संस्कार: मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच के महत्व प्रकाश डाला
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो सुमन ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे उपर्युक्त सीखी हुई बातो को अपने घर परिवार तक पहुचाकर स्वस्थ समाज के निर्माण मे योगदान दे।
कार्यशाला के द्वितीय सत्र का कुशल संचालन प्रो गार्गी यादव ने किया व कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्य डॉ प्रीति सिंह और डा शैल वाजपेई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं कार्यशाला में कॉलेज की वरिष्ठ प्रवक्ताएं प्रो निशि प्रकाश प्रो रेखा चौबे व अन्य सभी प्रवक्ताए उपस्थित थी। स्नातक व स्नातकोत्तर वर्ग की छात्राएं कार्यशाला मे प्रतिभाग कर रही है। महाविद्यालय के द्वितीय , तृतीय चतुर्थ कर्मचारीगण ने सकृय भूमिका निभाई ।

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फातिमा कान्वेंट स्कूल में “अभिभावक ओरिएंटेशन प्रोग्राम ” आयोजित

दैनिक भारतीय स्वरूप संवादसूत्र सुनील साहू कानपुर । फातिमा कान्वेंट स्कूल अशोक नगर में आज “अभिभावक ओरिएंटेशन प्रोग्राम ” का आयोजन किया गया । प्रिंसपल सिस्टर सोनी ए सी के विशेष प्रयासों से विद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रयागराज से आए फादर सेबेस्टियन फ्रांसिस ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की । छात्राओं और अभिभावकों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि फादर सेबेस्टियन फ्रांसिस और प्रिंसपल सिस्टर सोनी ए सी ने दीप जलाकर शुभारंभ किया । फादर सेबेस्टियन फ्रांसिस ने घर और स्कूल के बीच की साझेदारी को कैसे और मजबूत किया जाए इस पर अपने विचार रखे । उन्होंने ने कहा कि अक्सर अभिभावक बच्चों से ज्यादा मार्क्स और उनके अधिक परसेंटेज के लिए दबाव बनाते है । जबकि नंबरों से ज्यादा जरूरी है बच्चों का संस्कारी होना । फादर के मुताबिक वर्तमान समय में पूरे देश में बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावक भी हैं , जिनका अपने बच्चों से तालमेल उतना अच्छा नहीं है , जिस कारण अक्सर बच्चों और अभिभावकों में दूरियां बढ़ जाती हैं । इसलिए जरूरत इस बात की है कि पहले अभिभावक बच्चों से तालमेल बढ़ाएं , उनसे बातचीत करे , बच्चों की भावनाओं को समझे और उन्हें विश्वास दिलाए कि वह उनके साथ है । अभिभावक और छात्रों के बीच तालमेल अच्छा होने से बच्चों में सकारात्मक विचारो का प्रभाव बढ़ेगा । उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों को अच्छे संस्कार दें , जिससे घर और स्कूल के बीच साझेदारी तो मजबूत होगी साथ ही स्कूल की अपेक्षाए पूर्ण होने में मदद मिलेगी और आपके बच्चे के सर्वांगीण विकास भी होगा ।

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