Breaking News

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने पीएम-सेतु योजना के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन के लिए उद्योग जगत को आमंत्रित किया

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने देश में कार्यबल को आधुनिक बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और प्रशिक्षण महानिदेशालय के माध्यम से उद्योग जगत को पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री-औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन द्वारा कौशल एवं रोजगार क्षमता उन्नयन कार्यक्रम) योजना में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। यह पहल व्यावसायिक प्रशिक्षण के तौर-तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव है, जो सरकार संचालित नीति से विस्तारित होकर एक ऐसे मॉडल की ओर अग्रसर है, जिसमें प्रशिक्षण के प्रबंधन और क्रियान्वयन में उद्योग अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

मंत्रालय ने राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन के लिए मुख्य उद्योग साझेदारों -एआईपी की तलाश हेतु रुचि की अभिव्यक्ति- ईओआई जारी की है। इसके साथ ही, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने भी चुने हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उन्नत बनाने में सहयोग के लिए साझेदारों की पहचान हेतु ईओआई जारी करना आरंभ कर दिया है। इस सिलसिले में अब तक कर्नाटक, गुजरात, असम और चंडीगढ़ ने ईओआई जारी की है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2025 में प्रधानमंत्री-सेतु योजना को 60 हजार करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ स्वीकृति दी थी। प्रधानमंत्री ने आधुनिक रोजगार बाजार के अनुरूप प्रशिक्षण और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों-आईटीआई को अधिक प्रासंगिक बनाने और उनकी मौजूदा कमियों को दूर करने के उद्देश्य से 4 अक्टूबर, 2025 को इस योजना का शुभारंभ किया था। सरकार की योजना हब-एंड-स्पोक मॉडल का उपयोग कर एक हजार सरकारी आईटीआई को उन्नत बनाना है। इस केन्द्रीकृत मॉडल में 200 मुख्य (हब) आईटीआई लगभग चार स्पोक आईटीआई को अत्याधुनिक मशीनरी और उपकरण सहायता प्रदान करेंगे। इसके अलावा इस योजना के तहत भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

पीएम-एसईटीयू की विशेषता इसका उद्योग-नेतृत्व में संचालन है। प्रत्येक उन्नत आईटीआई का प्रबंधन एक विशेष प्रयोजन वाहन-एसपीवी द्वारा किया जाएगा। इसमें उद्योग जगत की 51 प्रतिशत और सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इस सह-निवेश मॉडल में सरकार की 83 प्रतिशत तक सह-वित्तपोषण से कंपनियों पर व्यापक उन्नयन का दायित्व होगा। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने यह प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है, जिससे उन्नत विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिकी, गतिशीलता और प्रचालन क्षेत्रों में भागीदारी के द्वार खुल गए हैं।

प्रमुख उद्योग साझेदार के तौर पर कंपनियां रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम तैयार करने और उन्नत प्रयोगशालाओं तथा डिजिटल प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कंपनियां उद्योग अनुभवों के आधार पर प्रशिक्षकों के कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी और संस्थान परिसर में नवाचार केंद्र भी स्थापित करेंगी। इससे उद्योगों को व्यवसाय में कुशल श्रमिकों और प्रशिक्षुओं की विश्वसनीय और मापनीय प्रतिभा प्राप्त होगी, जो उनके व्यवसाय प्रगति रणनीति के प्रतिभावर्धन से सीधे तौर पर जुड़ेंगे। इसके साथ ही उद्योगों को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व-सीएसआर संबंधी लाभ भी मिलेंगे। इस संरचनात्मक सुधार का उद्देश्य भारत के कौशल विकास तंत्र को उन्नत बनाकर देश की कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करना है।

आवेदन करने के लिए लिंक: https://linktr.ee/Skill_India

Read More »

कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो की फेज V (A) परियोजना के हिस्से के रूप में तीन नए कॉरिडोर को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली मेट्रो के फेज-V (ए) परियोजना के हिस्से के रूप में तीन नए कॉरिडोर को मंजूरी दी है: 1. आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी), 2. एरोसिटी से आई.जी.डी. एयरपोर्ट टी-1 (2.263 किमी) और 3. तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (3.9 किमी)। यह 16.076 किलोमीटर लंबी परियोजना राष्ट्रीय राजधानी के भीतर कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगी। दिल्ली मेट्रो के फेज-V (ए) की कुल लागत 12014.91 करोड़ रुपये है, जिसे भारत सरकार, दिल्ली सरकार और अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा।

सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर सभी कर्तव्य भवनों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे इस क्षेत्र के कार्यालय जाने वालों और आगंतुकों को सीधे ऑफिस तक पहुंचने में आसानी होगी। इस कनेक्टिविटी से दैनिक आधार पर लगभग 60,000 कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और 2 लाख आगंतुकों को लाभ होगा। ये कॉरिडोर प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को और कम करेंगे, जिससे जीवन जीने की सुगमता में वृद्धि होगी।

विवरण:

आर.के. आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ सेक्शन, बॉटनिकल गार्डन – आर.के. आश्रम मार्ग कॉरिडोर का विस्तार होगा। यह सेंट्रल विस्टा क्षेत्र को मेट्रो कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिसका वर्तमान में पुनर्विकास किया जा रहा है। एयरोसिटी – आईजीडी एयरपोर्ट टर्मिनल 1 और तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज सेक्शन, एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर का विस्तार होंगे। यह विस्तार हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी को राष्ट्रीय राजधानी के दक्षिणी हिस्सों जैसे तुगलकाबाद, साकेत, कालिंदी कुंज आदि क्षेत्रों के साथ मजबूत करेगा। इन विस्तारों में कुल 13 स्टेशन शामिल होंगे, जिनमें से 10 स्टेशन भूमिगत और 03 स्टेशन एलिवेटेड होंगे।

पूरा होने के बाद, कॉरिडोर-1 यानी आर.के. आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी) पश्चिमी, उत्तरी और पुरानी दिल्ली की सेंट्रल दिल्ली के साथ कनेक्टिविटी में सुधार करेगा। वहीं अन्य दो कॉरिडोर— एयरोसिटी से आईजीडी एयरपोर्ट टी-1 (2.263 किमी) और तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (3.9 किमी)— दक्षिण दिल्ली को साकेत, छतरपुर आदि के माध्यम से घरेलू हवाई अड्डे टर्मिनल-1 से जोड़ेंगे, जिससे राष्ट्रीय राजधानी के भीतर कनेक्टिविटी में जबरदस्त वृद्धि होगी।

फेज-V (ए) परियोजना के ये मेट्रो विस्तार मध्य दिल्ली और घरेलू हवाई अड्डे तक दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की पहुंच बढ़ाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। मजेंटा लाइन और गोल्डन लाइन के ये विस्तार सड़कों पर भीड़भाड़ को कम करेंगे। इस प्रकार, मोटर वाहनों के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

आरके आश्रम मार्ग – इंद्रप्रस्थ सेक्शन पर जो स्टेशन बनेंगे, वे हैं: आर.के. आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल – हाई कोर्ट, बड़ौदा हाउस, भारत मंडपम, और इंद्रप्रस्थ।

तुगलकाबाद – कालिंदी कुंज सेक्शन के स्टेशन सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर और कालिंदी कुंज होंगे, जबकि एयरोसिटी स्टेशन को आगे आईजीडी टी-1 स्टेशन से जोड़ा जाएगा।

फेज-IV का निर्माण कार्य, जिसमें 111 किमी लंबाई और 83 स्टेशन शामिल हैं, वर्तमान में प्रगति पर है। आज की स्थिति के अनुसार, फेज-IV के (3 प्राथमिकता वाले) कॉरिडोर का लगभग 80.43 प्रतिशत सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। फेज-IV के इन तीनों प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के दिसंबर 2026 तक चरणों में पूरा होने की संभावना है।

आज, दिल्ली मेट्रो प्रतिदिन औसतन 65 लाख यात्रियों को सर्विस देती है। अब तक की सर्वाधिक यात्रा का रिकॉर्ड 8 अगस्त 2025 को 81.87 लाख दर्ज किया गया है। दिल्ली मेट्रो समयपालन, विश्वसनीयता और सुरक्षा जैसे एमआरटीएस के मुख्य मानकों में उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर शहर की जीवनरेखा बन गई है।

वर्तमान में दिल्ली और एनसीआर में डीएमआरसी द्वारा लगभग 395 किमी लंबाई वाली कुल 12 मेट्रो लाइनों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें 289 स्टेशन शामिल हैं। आज, दिल्ली मेट्रो भारत का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है और दुनिया के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्कों में से भी एक है।

Read More »

एलवीएम3 ने सबसे भारी पेलोड की सफलता के साथ विश्व स्तरीय विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया -डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम3-एम6 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर इसरो टीम को बधाई दी। केन्द्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में इसरो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती ताकत, विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत करते हुए लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत में एलवीएम3-एम6 मिशन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन में भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा अब तक के सबसे भारी उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में देश की स्थिति को और मजबूत करता है और भारी-भारित प्रक्षेपण क्षमता हासिल करने की उल्लेखनीय सफलता दर्शाता है।

अंतरिक्ष विभाग के सचिव और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसए) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने घोषणा की कि एलवीएम3-एम6 प्रक्षेपण यान ने सफल प्रदर्शन करते हुए ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को उसकी निर्धारित निम्न पृथ्वी कक्षा में सटीक रूप से स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी प्रक्षेपण यान का उपयोग करके भारतीय धरती से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है और एलवीएम3 का तीसरा पूर्णतः वाणिज्यिक मिशन है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मिशन प्रक्षेपण यान की उत्कृष्ट विश्वसनीयता और विश्वस्तरीय प्रदर्शन को दर्शाता है, इससे यह वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हो गया है। इस मिशन में उपयोग किया गया उपग्रह, ब्लू बर्ड ब्लॉक-2, अगली पीढ़ी के उपग्रह समूह का हिस्सा है। इसे विशेष उपयोगकर्ता उपकरणों की आवश्यकता के बिना, सामान्य मोबाइल स्मार्टफोन को सीधे अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच एक वाणिज्यिक समझौते के तहत शुरू किया गया है। यह उन्नत वैश्विक संचार मिशनों के लिए एक विश्वसनीय प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

लॉन्च व्हीकल मार्क-3 की सफल उड़ान के साथ, भारत ने एक बार फिर जटिल भारी-भरकम मिशनों में अपनी तकनीकी परिपक्वता का प्रदर्शन किया है। इससे स्वदेशी प्रक्षेपण प्रणालियों में विश्वास मजबूत हुआ है और वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की प्रतिष्ठा और बढ़ी है।

 

Read More »

भारतीय तटरक्षक बल ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में विकसित अपने पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत – समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजीने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएलकी 2 पीसीवी परियोजना के तहत 23 दिसंबर 2025 को पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी)– समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया। 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से युक्त इस पोत का आईसीजी बेड़े में शामिल होना सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहलों के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।

‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक बल का स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है। यह तटरक्षक बल के बेड़े का सबसे बड़ा पोत है, जो तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है। 114.5 मीटर लंबा और 16.5 मीटर चौड़ा, 4,170 टन विस्थापन क्षमता वाला यह पोत अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, जिसमें 30 मिमी सीआरएन91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली से लैस दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोटनियंत्रित तोपें, स्वदेशी रूप से विकसित एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली और एक उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशमन प्रणाली शामिल हैं।

प्रदूषण नियंत्रण पोत भारतीय तटरक्षक बल का पहला ऐसा पोत है जो डायनामिक पोजिशनिंग क्षमता (डीपी1) से लैस है और इसे एफआईएफआई2/एफएफवी2 प्रमाणन प्राप्त है। यह तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर और पीसी लैब उपकरण, जो विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और उसके बाहर व्यापक प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियानों को चला सकता हैं। यह उच्च परिशुद्धता संचालन करने, गाढ़े तेल से प्रदूषकों को पुनर्प्राप्त करने, संदूषकों का विश्लेषण करने और दूषित पानी से तेल को अलग करने में सक्षम है।

दीक्षांत समारोह में डीआईजी वीके परमार, पीडी (एमएटी), आईसीजी; श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जीएसएल और आईसीजी तथा जीएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Read More »

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने अगली पीढ़ी के खेल पेशेवरों को तैयार करने हेतु व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) ने आज युवा प्रतिभाओं को निखारने और   भारत के खेल इकोसिस्टम को मजबूत करने हेतु एक व्यवस्थित एवं बड़े पैमाने का प्लेटफॉर्म बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक इंटर्नशिप नीति की शुरुआत की।

‘युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और उसके स्वायत्त निकायों के लिए व्यापक इंटर्नशिप नीति’ कॉलेज व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को मंत्रालय और उसके स्वायत्त निकायों में सार्थक इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेगी, जिससे उन्हें खेलों से जुड़े शासन एवं  प्रशासन और संबंधित पेशेवर क्षेत्रों का सीधा अनुभव हासिल हो सकेगा।

केन्द्रीय  युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि यह पहल युवा प्रतिभाओं  को भारत की खेल यात्रा में सार्थक योगदान देने हेतु सशक्त बनाएगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “भारत के खेल इकोसिस्टम को बदलने के लिए कुशल पेशेवरों और युवा प्रतिभाओं के साथ-साथ मजबूत संस्थागत समर्थन की जरूरत है। इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के जरिए, हम अपने युवाओं के लिए खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन के दरवाजे खोल रहे हैं, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिल सके और वे खेल के जरिए राष्ट्र निर्माण में दीर्घकालिक असर डाल पायें।”

नई नीति के तहत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमओवाईएएस) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), राष्ट्रीय डोप-रोधी एजेंसी (नाडा) और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) जैसे इसके मुख्य संस्थानों में हर वर्ष 452 इंटर्नशिप प्रदान की जायेंगी।

इस पहल का उद्देश्य खेलों से जुड़े शासन एवं प्रशासन, खेल विज्ञान, डोपिंग-रोधी, प्रतियोगिता  प्रबंधन और एथलीट खेल सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिभाओं का एक मजबूत समूह तैयार करना है।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय खेल नीति और खेलो भारत नीति 2025 के उद्देश्यों के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें युवा सशक्तिकरण, क्षमता विकास और खेल प्रशासन को पेशेवर बनाने पर जोर दिया गया है।

यह नीति भारत के उस दीर्घकालिक विजन का भी समर्थन करती है, जिसमें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक ऐसा खेल इकोसिस्टम विकसित करना है जो बेहतरीन प्रदर्शन को बनाए रख सके और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर सके।

डॉ. मांडविया ने आगे कहा कि यह कार्यक्रम पेशेवर रूप से प्रशिक्षित जनशक्ति की बढ़ती जरूरत को पूरा करता है, क्योंकि भारत अपने खेल अवसंरचना का विस्तार कर रहा है, शासन संबंधी सुधारों को मजबूत कर रहा है और वैश्विक स्तर पर खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बढ़ा रहा है।

प्रशिक्षुओं को व्यवस्थित ऑनबोर्डिंग, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और नीतियां  बनाने एवं उन्हें लागू करने का वास्तविक अनुभव मिलेगा। वे खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप (टैग) जैसी प्रमुख पहलों में सीधे योगदान देंगे और साई स्टेडियम, क्षेत्रीय केन्द्रों (आरसी) और राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्रों (एनसीओई) में अनुभव प्राप्त करेंगे।

ये इंटर्नशिप खेल प्रबंधन, खेल विज्ञान, प्रतियोगिता संचालन, मीडिया एवं संचार, कानूनी मामले, आईटी प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन और डोपिंग-रोधी सहित 20 कार्यात्मक क्षेत्रों में होंगी। खेल विज्ञान अनुसंधान, प्रयोगशाला परीक्षण, आंकड़ों के विश्लेषण और एथलीटों को वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नाडा में रखे गए इंटर्न डोपिंग-रोधी  जागरूकता, कानूनी अनुपालन, मामलों का प्रबंधन और नीतिगत सहायता में सहयोग करेंगे, जबकि एनडीटीएल में काम करने वालों को नमूनों का विश्लेषण एवं शोध सहित उन्नत प्रयोगशाला-आधारित डोपिंग-रोधी प्रक्रियाओं का अनुभव मिलेगा।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी, डिजिटल जानकारी, रचनात्मकता और उद्यमिता  को बढ़ावा देना है। साथ ही, ऐसे प्रशिक्षित पेशेवरों की एक टीम तैयार करना है जो नीति, अवसंरचना विकास, मीडिया संपर्क, वैधानिक ढांचे, खेल विज्ञान और खेल प्रबंधन में योगदान दे सकें।

एक केन्द्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए हर वर्ष भर्ती के दो चक्र होंगे; जनवरी और जुलाई में, जिससे पारदर्शिता, समावेशन और योग्यता पर आधारित चयन सुनिश्चित होगा।

यह व्यापक इंटर्नशिप कार्यक्रम स्वच्छ खेल, पारदर्शी शासन और वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो निष्पक्ष खेल, एथलीटों के कल्याण और खेल प्रशासन में उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

इस व्यापक इंटर्नशिप नीति के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

Read More »

सीएक्यूएम ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह थर्मल पावर प्लांटों को बायोमास को-फायरिंग मानदंडों का पालन न करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है

एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (टीपीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस पर्यावरण (तापीय विद्युत संयंत्रों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के तहत अधिसूचित फसल अवशेषों से बने पेलेट या ब्रिकेट के सह-दहन से संबंधित अनिवार्य प्रावधानों का अनुपालन न करने के लिए जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर वित्त वर्ष 2024-25 के अनुपालन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा के बाद की गई है।

पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांट द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 के अनुसार, सभी कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयले के साथ फसल अवशेषों से बने बायोमास पेलेट्स या ब्रिकेट का न्यूनतम 5% मिश्रण उपयोग करना अनिवार्य है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सह-दहन की न्यूनतम सीमा 3% से अधिक निर्धारित की गई है ताकि पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) से बचा जा सके। इन वैधानिक प्रावधानों को धान के पराली के बहिर्गमन को बढ़ावा देने, पराली जलाने की घटनाओं को कम करने और एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था। आयोग ने 2021 से कई वैधानिक निर्देश जारी किए हैं, जिनमें 17.09.2021 का निर्देश संख्या 42 भी शामिल है, और आवधिक समीक्षाओं और निरीक्षणों के माध्यम से कार्यान्वयन की लगातार निगरानी की है।

इन उपायों के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान निम्नलिखित थर्मल पावर प्लांटों की अनुपालन स्थिति असंतोषजनक पाई गई है, जिसमें बायोमास सह-दहन का स्तर निर्धारित सीमा से काफी नीचे रहा है। परिणामस्वरूप, संबंधित संयंत्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें ईसी लागू करने का प्रस्ताव है, जैसा कि नीचे विस्तार से बताया गया है:

  • तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल – वेदांता), मानसा, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹33.02 करोड़;
  • पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस), पानीपत, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹8.98 करोड़;
  • दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर स्टेशन (डीसीआरटीपीएस), यमुनानगर, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹6.69 करोड़;
  • राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट (आरजीटीपीपी), हिसार, हरियाणा – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹5.55 करोड़;
  • पीएसपीसीएल – गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट, लेहरा मोहब्बत, पंजाब – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹4.87 करोड़;
  • हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन, यूपीआरवीयूएनएल, उत्तर प्रदेश – प्रस्तावित विद्युत अधिग्रहण (ईसी) लगभग ₹2.74 करोड़।
  • इन 6 थर्मल पावर प्लांट परियोजनाओं में प्रस्तावित कुल पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगभग ₹61.85 करोड़ है।

निर्देश संख्या 42 जारी होने के बाद से, आयोग ने थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) सहित सभी संबंधित हितधारकों के साथ इस मामले की गहन समीक्षा की। अनुपालन में भारी देरी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को देखते हुए, आयोग ने 2024 की शुरुआत में सीएक्यूएम अधिनियम, 2021 की धारा 14 के तहत 4 थर्मल पावर प्लांटों को नोटिस जारी किए, जिनका प्रदर्शन इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से लगातार खराब रहा है। आयोग ने 7 थर्मल पावर प्लांटों और सभी संबंधित अधिकारियों के समक्ष पर्यावरण (थर्मल पावर प्लांटों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग) नियम, 2023 का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने की चिंता भी व्यक्त की। यहां तक ​​कि वित्तीय वर्ष 2024-25 की अवधि के लिए गैर-अनुपालन करने वाले थर्मल पावर प्लांटों (यदि कोई हो) के अभ्यावेदनों की जांच के लिए एक समिति का गठन भी किया गया।

संबंधित टीपीपी को कारण बताओ नोटिस जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसमें अधिनियम की धारा 14 के तहत कार्रवाई भी शामिल है।

आयोग इस बात को दोहराता है कि तापसंधि संयंत्रों में बायोमास का सह-दहन, फसल अवशेषों के प्रभावी बहिर्गमन प्रबंधन और एनसीआर तथा आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय है। आयोग सभी विनियमित संस्थाओं द्वारा समय पर और निरंतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक निर्देशों का कड़ाई से प्रवर्तन जारी रखेगा।

Read More »

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025” प्रदान किया

राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित दूसरे “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार” समारोह में प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित “राष्ट्रीय विज्ञान रत्न पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया। देश की चर्चित “पर्पल रिवोल्यूशन” और लैवेंडर उद्यमिता को गति प्रदान करने वाली उद्यमी विज्ञान टीम सीएसआईआर के नेतृत्व वाले अरोमा मिशन को “राष्ट्रीय विज्ञान टीम पुरस्कार 2025” या विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में विभिन्न क्षेत्रों के 24 वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को पुरस्कार प्रदान किए ।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की स्थापना मोदी सरकार द्वारा की गई थी।

‘X’ पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “विश्व को ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ की अवधारणा से परिचित कराने और ‘लैवेंडर’ को कृषि-उद्यमिता के एक नए मार्ग के रूप में प्रस्तुत करने में आपके योगदान को मान्यता देते हुए, प्रतिष्ठित #राष्ट्रीयविज्ञानपुरस्कार 2025 के लिए ‘टीम अरोमा’ को बधाई… हिमालय के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी आकर्षक आजीविका की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए।”

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत अरोमा मिशन टीम को हिमालयी क्षेत्र में सुगंधित फसलों, विशेष रूप से लैवेंडर की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर प्रयोगशाला अनुसंधान को जमीनी स्तर के परिणामों में परिवर्तित करने का श्रेय दिया जाता है। इसके कार्य ने जम्मू और कश्मीर के किसानों के लिए आजीविका के नए द्वार खोले, आवश्यक तेलों के आयात पर निर्भरता कम की और यह प्रदर्शित किया कि समन्वित वैज्ञानिक हस्तक्षेप किस प्रकार सामाजिक-आर्थिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

इस मान्यता से राष्ट्रीय पुरस्कारों के ढांचे के केंद्र में सहयोगात्मक, अनुप्रयोग-उन्मुख विज्ञान को स्थान मिलता है। जम्मू-कश्मीर के भदेरवाह और गुलमर्ग कस्बों से शुरू हुई लैवेंडर की खेती और उद्यमशीलता अब केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाई जा रही है।

पिछले वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की नई संरचना के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य जीवन भर की उपलब्धियों से लेकर प्रारंभिक करियर की उत्कृष्टता और टीम आधारित नवाचार तक, विज्ञान के सभी क्षेत्रों में किए गए कार्यों को मान्यता देना है। इस वर्ष का समारोह पुरस्कारों का दूसरा संस्करण था। यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एक संरचित, समकालीन प्रारूप में विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मान प्रदान करने के सरकार के इरादे को रेखांकित करता है।

प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए विज्ञान रत्न से सम्मानित किया गया और कई विज्ञान श्री और विज्ञान युवा पुरस्कारों ने भौतिकी, कृषि, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अंतरिक्ष विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यक्तिगत योगदान को मान्यता दी गई। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की पूरी सूची में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ-साथ 45 वर्ष से कम आयु के शोधकर्ता भी शामिल हैं, जो अनुभव और उभरती प्रतिभा दोनों पर पुरस्कार के जोर को दर्शाता है।

विशिष्ट क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती विज्ञान श्री श्रेणी के अंतर्गत डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान), डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा), डॉ. के. थंगराज (जीव विज्ञान), प्रो. प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान), प्रो. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान), डॉ. एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान), प्रो. महान एमजे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान), और श्री जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी) को पुरस्कार प्रदान किए गए। यह विभिन्न विषयों में उनके निरंतर और क्षेत्र-परिभाषित कार्य को उजागर करते हैं।

विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के वैज्ञानिकों के लिए है। यह नवोन्मेषी योगदान देने वाले उभरते शोधकर्ताओं को सम्मानित करता है। पुरस्कार पाने वालों में भौतिकी में प्रो. अमित कुमार अग्रवाल और प्रो. सुरहुद श्रीकांत मोरे; कृषि विज्ञान में डॉ. जगदीश गुप्ता कपुगंती और डॉ. सतेंद्र कुमार मंगरौथिया; जीव विज्ञान में डॉ. दीपा अगाशे और श्री देबरका सेनगुप्ता; रसायन विज्ञान में डॉ. दिब्येंदु दास; भूविज्ञान में डॉ. वलीउर रहमान; इंजीनियरिंग विज्ञान में प्रो. अर्कप्रवा बसु; गणित और कंप्यूटर विज्ञान में प्रो. सब्यसाची मुखर्जी और प्रो. श्वेता प्रेम अग्रवाल; चिकित्सा में डॉ. सुरेश कुमार; अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में श्री अंकुर गर्ग; और प्रौद्योगिकी और नवाचार में प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम शामिल हैं।

इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में महिला वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिका रही। इन्हें कई श्रेणियों और विषयों में मान्यता मिली। डॉ. दीपा अगाशे और प्रोफेसर श्वेता प्रेम अग्रवाल जैसी शोधकर्ताओं को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह देश के वैज्ञानिक परिवेश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यों में देश की वैज्ञानिक प्रतिभा की गहराई और विविधता झलकती है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया है।

राष्ट्रपति और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री की उपस्थिति को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और इसके सार्वजनिक उपयोग को दी जाने वाली राष्ट्रीय प्राथमिकता को सुदृढ़ करने वाला माना गया। पुरस्कारों के ढांचे का उद्देश्य आयु और उपलब्धि मानदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके श्रेणियों, विशेष रूप से युवा वैज्ञानिक वर्ग, में स्पष्टता लाना भी है।

अरोमा मिशन को मिली मान्यता के साथ, समारोह ने रेखाकिंत किया की कैसे सरकार समर्थित वैज्ञानिक कार्यक्रम, जब स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों और टीम वर्क के माध्यम से कार्यान्वित किए जाएं, तो प्रयोगशालाओं और पत्रिकाओं से परे परिणाम दे सकते हैं। भारत अपने विज्ञान-आधारित विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार अनुसंधान उत्कृष्टता को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जमीनी स्तर पर प्रभाव से जोड़ने वाले एक मंच के रूप में तेजी से उभर रहा है।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी)-2025 के लिए पुरस्कार विजेताओं की सूची

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image001W9WF.jpg

 

 

 

 

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/image006G9U5.jpg

Read More »

एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन, कानपुर जोन का त्रिवर्षीय चुनाव संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन, कानपुर जोन का त्रिवर्षीय चुनाव (2025–2028) संगठन के संविधान एवं नियमों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस चुनाव में पारस्परिक सौहार्द, एकता एवं सहयोग की भावना के परिणामस्वरूप निम्न सभी प्रत्याशी अपने-अपने पदों पर निर्विरोध निर्वाचित हुए।

अंचल अध्यक्ष~अतुल अग्रवाल~अंचल उपाध्यक्ष~विजय कुमार अवस्थित

अंचल सचिव ~सुरेश कुमार कपूर

सहायक अंचल सचिव~राहुल निगम

सहायक अंचल सचिव(वित्त)~अशोक चतुर्वेदी

कार्यकारिणी सदस्य ~सुरिंदर कुमार सुखीजा, सुरेश मिश्रा।

Read More »

मिशन शक्ति के अंतर्गत गुड टच एंड बैड टच जागरूकता सत्र आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। 18 दिसम्बर मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में गुड टच एंड बैड टच पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं सहायक आचार्य अपुर्वा बाजपेयी ने छात्राओं को “गुड टच–बैड टच से आगे: सीमाओं और सहमति की समझ” विषय पर संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए व्यक्तिगत सीमाओं और सहमति की स्पष्ट समझ अत्यंत आवश्यक है। कोई भी स्पर्श या व्यवहार तभी स्वीकार्य है, जब वह व्यक्ति की स्पष्ट इच्छा और सहजता के अनुरूप हो। असहजता भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसे कभी सहमति नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भय या तनाव की स्थिति में व्यक्ति तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे पाता, जिसे समाज अक्सर गलत रूप में समझ लेता है।
सत्र में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (POSH Act) का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम की संयोजिका मिशन शक्ति कोऑर्डिनेटर डॉ. संगीता सिरोही रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. वंदना निगम ने की। सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो. अर्चना वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. साधना सिंह, श्वेता गोंड एवं विमला देवी का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की लगभग 80 छात्राएँ उपस्थित रही। सत्र का उद्देश्य छात्राओं को जागरूक कर उन्हें आत्म-सुरक्षा, आत्म-सम्मान और स्वस्थ सामाजिक संबंधों के लिए सशक्त बनाना रहा।

Read More »

कानपुर स्मार्ट सिटी में मोटर वाहन अधिनियम की उड़ रहीं जमकर धज्जियां

स्मार्ट सिटी में कानून का हो रहा खुला उल्लंघन !

स्मार्ट सिटी की सड़कों पर ‘लोहे के अवैध कवच’ पहनकर दौड़ रहे सवारी वाहन

– करोड़ों खर्च कर लगाए गए कैमरों में क्यों नहीं कैद होती है मनमानी?

– चौराहों पर ड्यूटी में लगे यातायात पुलिस के जवान क्यों करते हैं अनदेखी ?

कानपुर। स्मार्ट सिटी कानपुर में सार्वजनिक परिवहन के नाम पर अराजकता का बोलबाला है। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों—कल्याणपुर, रावतपुर, पनकी, विजय नगर, बर्रा, गोविंद नगर, किदवई नगर, बाबूपुरवा, नौबस्ता, रामादेवी, बारादेवी, झकरकटी, फजलगंज, टाटमिल, चुन्नीगंज, जरीब चौकी सहित अधिकतर क्षेत्रों में चलने वाले विक्रम टेम्पो, ऑटो और ई-रिक्शा के मालिकों के मनमाने रवैये ने सड़कों को असुरक्षित बना दिया है। इन वाहनों की बॉडी के चारों ओर अवैध रूप से लगाए गए लोहे के भारी एंगल न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहे हैं।

मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के अनुसार, वाहनों की मूल संरचना (Structure) में इस तरह का बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act) की धारा 52 का स्पष्ट उल्लंघन है।

वहीं वाहन की लंबाई, चौड़ाई या वजन में कोई भी ऐसा बदलाव जो आरसी (Registration Certificate) के विपरीत हो, पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वहीं इन्हीं अवैध एंगलों की वजह से चालक, धारा 184 के तहत ‘खतरनाक ड्राइविंग’ को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि उन्हें अपने वाहन के क्षतिग्रस्त होने का डर नहीं रहता है।

स्मार्ट सिटी में चलने वाले ऑटो-विक्रम, ई रिक्शा चालक, अपने मनमुताबिक, लोहे के जालीदार एंगलों का इस्तेमाल ‘सुरक्षा कवच’ की तरह कर रहे हैं। जिसके कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आए दिन छोटी-मोटी भिड़ंत होती रहती है, जिससे कई बार विवाद पैदा हो जाता है और जाम की स्थिति पैदा होती है।

डिजिटल निगरानी पर सवाल ? आईटीएमएस (ITMS) के तहत लगे कैमरों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर ये ‘मोडिफाइड’ वाहन चालान की जद से बाहर कैसे और क्यों हैं? वहीं यातायात पुलिस के जवानों की नजर इस ओर क्यों नहीं जाती ?

ऐसे में जरूरी है कि संभागीय परिवहन विभाग व यातायात पुलिस, एक साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाये और ऑटो – विक्रम व ई – रिक्शाओं में लगे अवैध एंगलों को मौके पर ही कटवाकर जब्त किया जाए।

~प्रेषक श्याम सिंह पंवार सम्पादक दैनिक जन सामना

Read More »