भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के द्वारा शासन के निर्देशानुसार स्वच्छ उत्सव ‘अभियान’ के अंतर्गत स्वच्छता रैली का आयोजन किया गया।
रैली का उद्घाटन प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने झंडा दिखाकर किया , उन्होंने बताया कि स्वच्छता के द्वारा हम सभी प्रकार की बीमारियों से दूर रह सकते हैं , सभी नागरिकों को इसमें अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए। रैली महाविद्यालय से लेकर फूलबाग तक निकाली गई। कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर डॉ श्वेता रानी ने बताया की रैली के माध्यम से हम जागरूकता का संदेश प्रसारित कर रहे हैं क्योंकि स्वच्छता एक व्यक्ति का कार्य नहीं है इसके लिए प्रत्येक नागरिक को जागरूक होना होगा। रैली में स्वयंसेविका कोमल दिवाकर, नंदिका श्रीवास्तव,मन्तशा आयोजन में सहयोग किया। रैली में मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह, डॉ रिचा सिंह, डॉ कोमल दिवाकर डॉ रश्मि, डॉ संगीता सिंह , डॉ अनामिका तथा अन्य शिक्षिकाएं उपस्थित रही।
एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में मिशन शक्त के अंतर्गत “शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण व महिला स्वास्थ्य” हेतु व्याख्यान आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत *’शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण व महिला स्वास्थ्य :मासिक धर्म संबंधी जानकारी’* हेतु एक व्याख्यान का आयोजन कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण द्वारा किया गया। इसके पश्चात प्राचार्य प्रो. सुमन ने स्वागत संबोधन के साथ ही मिशन शक्ति 5.0 की श्रृंखला में कराए जा रहे कार्यक्रमों की सराहना की और कहा कि, शासन द्वारा चलाए जा रहे हैं मिशन शक्ति कार्यक्रमों की सफलता तभी है, जब वास्तविक रूप से बालिकाओं और महिलाओं में अपने अधिकारों, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधित जागरूकता उत्पन्न हो।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. मोनिका शुक्ला ने अपने वक्तव्य एवं पी.पी.टी. प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्राओं को मासिक धर्म संबंधी जानकारी प्रदान की और साथ ही स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
मिशन शक्ति 5.0 की प्रभारी प्रोफेसर चित्रा सिंह तोमर ने मिशन शक्ति 5.0 की श्रृंखला में कराए जा रहे कार्यक्रमों और आगामी कराए जाने हेतु कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। साथ ही उन्होंने छात्राओं से रूबरू होते हुए कहा कि, उन्हें भी देश सेवा हेतु अपनी बराबर की भागीदारी निभानी चाहिए तथा सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सफल बनाने में अपना संपूर्ण योगदान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्राचार्या महोदया, मुख्य वक्ता, सभी शिक्षिकाओं एवं छात्राओं का कार्यक्रम में अपना सक्रिय योगदान और भागीदारी के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की शिक्षिकाएं, छात्राएं एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एन.एस.एस. की स्वयंसेविका छात्राओं ने सक्रिय योगदान दिया।
सशक्त नारी – समृद्ध प्रदेश : मिशन शक्ति का पाँचवाँ चरण
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 29 सितम्बर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर में “मिशन शक्ति” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मिशन शक्ति कोऑर्डिनेटर प्रो. मीत कमल ने आए हुए सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम में डीजीसी क्राइम दिलीप अवस्थी एसीपी आशुतोष कुमार, SHO जगदीश पांडे, पो श्रेया मिश्रा, आराध्या मिश्रा ने विशेष रूप से छात्राओं को महिला सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं और शासन द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। इनमें प्रमुख रूप से —
• 1090 : वूमेन पावर लाइन
• 1930 : साइबर हेल्पलाइन
• 181 : महिला हेल्पलाइन
• 1098 : चाइल्ड लाइन
• 108 : एम्बुलेंस सेवा
• 112 : आपातकालीन पुलिस सेवा
• 101 : अग्निशमन सेवा
एसीपी आशुतोष कुमार, छात्राओं को भरोसा दिलाया कि पुलिस विभाग हमेशा उनकी सुरक्षा और सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने छात्राओं से सुरक्षा के प्रति सजग रहने और हेल्पलाइन नंबरों का सही समय पर प्रयोग करने की अपील वक्ताओं ने कहा कि “मिशन शक्ति” का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना, उन्हें हर स्तर पर सुरक्षा व सम्मान दिलाना और आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित करना है।
Read More »दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में स्वच्छता शपथ एवं रैली आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 29 सितंबर स्वच्छता पखवाड़ा के तहत महाविद्यालयों में एनएसएस एवं एनसीसी के संयुक्त तत्वाधान में स्वच्छता शपथ एवं रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ प्राचार्या का शुभारंभ प्राचार्या प्रो वंदना निगम तथा निदेशक प्रो अर्चना वर्मा ने झंडी दिखाकर किया। कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने छात्राओं को स्वच्छता के महत्व एवं उसकी आवश्यकता तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत चलाए जाने वाले विभिन्न स्वच्छता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारियां प्रदान की। छात्राओं ने स्वच्छता से संबंधित पोस्टर बनाकर रैली निकाली तथा स्वच्छता की शपथ भी ली।
इस अवसर पर चीफ प्रॉक्टर प्रो अर्चना श्रीवास्तव, डॉ अर्चना दीक्षित, एनसीसी प्रभारी प्रो शुभ्रा राजपूत, भूगोल विभाग से डॉ अंजना श्रीवास्तव, अंग्रेजी विभाग से डॉ दीप्ति शुक्ला, अर्थशास्त्र विभाग से डॉ साधना सिंह, डॉ पुष्पलता तिवारी सहित लगभग 80 छात्राओं ने सक्रिय प्रतिभागिता की।
Read More »“एन इंट्रोडक्शन टू द वर्ल्ड ऑफ इन्वेस्टिंग” विषय पर विशेष वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के जेंडर सेंसिटाइजेशन एवं महिला विकास प्रकोष्ठ (GSWDC) द्वारा एनएसई अकैडमी लिमिटेड के सहयोग से “एन इंट्रोडक्शन टू द वर्ल्ड ऑफ इन्वेस्टिंग” विषय पर महिला विशेष वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जे. सेबेस्टियन द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने वित्तीय साक्षरता को जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए विशेषकर महिलाओं के लिए इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता कविन्द्र द्विवेदी एवं शिल्पी ने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत वित्त एवं निवेश पर एक रोचक और संवादात्मक प्रस्तुति दी, जिसमें धन प्रबंधन के प्रभावी तरीकों और विवेकपूर्ण वित्तीय निर्णय लेने की व्यावहारिक जानकारियाँ शामिल थीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना, प्रतिभागियों को निवेश के विभिन्न अवसरों की जानकारी देना तथा महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरित करना था। सत्र का समन्वय प्रो. विभा दीक्षित, प्रकोष्ठ समन्वयक, द्वारा किया गया, जिन्होंने इस पहल को महिलाओं में आत्मविश्वास निर्माण और वित्तीय जागरूकता को प्रोत्साहित करने वाला बताया। प्रो. अनिंदिता ने कॉलेज प्रशासन के सहयोग की सराहना करते हुए सबका धन्यवाद किया.
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में गहरी रुचि दिखाई और प्रशिक्षण की व्यावहारिक उपयोगिता की सराहना की। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों में प्रो. फिरदौस, डॉ. अर्चना वर्मा, डॉ. अर्चना पाण्डेय डॉ. मनीषी तथा अनेक संकायों के विद्यार्थियों में छवि, अशरफ, श्रृष्टि, अपर्जिता ने सक्रिय सहभागिता की।
भारत – रूस व्यापार को और बढ़ाने तथा कृषि क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत
बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने आपसी हित के व्यापक मुद्दों पर सार्थक चर्चा की, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार और कृषि क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। बातचीत के प्रमुख क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार को बढ़ाना शामिल था। इसमें विशेष रूप से भारत के कृषि उत्पादों के निर्यात के विस्तार के माध्यम से कृषि व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया गया। रूस के उप प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए, कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत और रूस के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की विशेषता वाले पारस्परिक विश्वास और समझ के अनुकरणीय स्तर पर ज़ोर दिया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं को साझा किया, जिनमें खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और सभी के लिए सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन तक पहुँच को बढ़ावा देना शामिल है। वसुधैव कुटुम्बकम – अर्थात् विश्व एक परिवार है – के सिद्धांत के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, श्री चौहान ने किसानों के कल्याण और नागरिकों की खाद्य सुरक्षा में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर ज़ोर दिया।
श्दिमित्री पात्रुशेव ने कृषि सहित कई क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच दीर्घकालिक और सुदृढ़ सहयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने में रूस की गहरी रुचि व्यक्त की और एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के माध्यम से इस साझेदारी को औपचारिक रूप देने में रुचि दिखाई।
चर्चा कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करने और दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया। भारतीय पक्ष ने रूसी संघ में प्रमुख कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाज़ार पहुँच के महत्व पर ज़ोर दिया और लंबित मुद्दों के समय पर समाधान के प्रति आशा व्यक्त की।
दोनों पक्ष शैक्षणिक आदान-प्रदान और छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के अवसरों में सहयोग को गहरा करने और कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने तथा प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बीज ट्रेसेबिलिटी प्रणालियों में संयुक्त पहलों की संभावना तलाशने पर भी सहमत हुए।
दोनों पक्षों ने कृषि क्षेत्र में सतत और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि व्यापार, शिक्षा, अनुसंधान और विकास में सहयोग को मज़बूत करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
उप प्रधानमंत्री के अलावा, रूसी प्रतिनिधिमंडल में कृषि उप मंत्री श्री मक्सिम मार्कोविच; भारत में रूस के राजदूत श्री डेनिस अलीपोव और रूसी संघ के पशु चिकित्सा एवं पादप स्वच्छता निगरानी हेतु संघीय सेवा के प्रमुख श्री सर्गेई डंकवर्ट शामिल थे।
भारत का प्रतिनिधित्व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी, विदेश मंत्रालय के अपर सचिव, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रभाग (आईसी) और पौध संरक्षण (पीपी) के संयुक्त सचिव, व्यापार सलाहकार, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के फसल विज्ञान के उप महानिदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के अधिकारी और अन्य वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।
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“भारत 3 लाख कार्यबल के साथ नाविकों के शीर्ष 3 वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है”: सर्बानंद सोनोवाल
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज चेन्नई में भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के समुद्री क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय परिवर्तन और इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवाओं के लिए उपलब्ध रोजगार के अवसरों का उल्लेख किया। सर्बानंद सोनोवाल ने 2,196 स्नातक विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने हुए कहा, “आप एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जो पिछले एक दशक में पुनर्जीवित हुआ है और भारत की आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं का केंद्र है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में समुद्री क्षेत्र में वैश्विक नेताओं में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ते हुए, पत्तन, पोत परिवहन, जहाज निर्माण, लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान और हरित समुद्री प्रौद्योगिकियों में करियर पहले कभी इतने विविध या मांग वाले नहीं रहे।”भारत के बंदरगाहों का वर्ष 2014 से व्यापक आधुनिकीकरण और मशीनीकरण हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप इनका “टर्नअराउंड टाइम” केवल 0.9 दिन रह गया है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर जैसे उन्नत समुद्री देशों के बंदरगाहों से आगे निकल गया है। नौ भारतीय बंदरगाह अब वैश्विक स्तर पर शीर्ष 100 बंदरगाहों में शामिल हैं। 76,000 करोड़ रुपये के निवेश से वधावन बंदरगाह का निर्माण दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाहों में से एक होगा। पिछले दशक में अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से माल की आवाजाही सात गुना बढ़ गई है और तटीय नौवहन की मात्रा में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
‘समुद्री अमृत काल परिकल्पना 2047’ भारत के समुद्री पुनरुत्थान के लिए एक दीर्घकालिक रूपरेखा प्रदान करता है। कुल 80 लाख करोड़ रुपये का निवेश बंदरगाह अवसंरचना, तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्ग, जहाज निर्माण और हरित नौवहन पहलों पर केंद्रित किया जा रहा है। सरकार ने प्रमुख बंदरगाहों पर हरित गलियारे, हरित हाइड्रोजन बंकरिंग की स्थापना की है और टिकाऊ समुद्री परिचालन को प्रोत्साहित करने के लिए मेथनॉल-ईंधन वाले जहाजों को प्रोत्साहन दिया है।
सरकार ने जहाज निर्माण और जहाज पुनर्चक्रण को पुनर्जीवित करने के लिए 70,000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक पैकेज भी शुरू किया है। 25,000 करोड़ रुपये के कोष वाला समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) भारत की टन भार और जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रोत्साहन देने के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करेगा। एक संशोधित जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस) घरेलू जहाज निर्माण में लागत संबंधी कमियों को दूर करती है, जिसमें जहाज-तोड़ने के लिए क्रेडिट नोट भी शामिल हैं, जबकि जहाज निर्माण विकास योजना (एसबीडीएस) ग्रीनफील्ड क्लस्टर, ब्राउनफील्ड यार्ड विस्तार और जोखिम कवरेज का समर्थन करती है। विशाखापत्तनम में 305 करोड़ रुपये के निवेश के साथ भारतीय जहाज प्रौद्योगिकी केंद्र (आईएसटीसी) डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, इंजीनियरिंग और कौशल विकास के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगा।
भारत का नाविक कार्यबल एक दशक पहले के 1.25 लाख से बढ़कर आज तीन लाख से अधिक हो गया है, जिससे देश प्रशिक्षित नाविकों के शीर्ष तीन वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। इससे भारत और विदेशों में नौवहन, जहाज संचालन, रसद और संबद्ध समुद्री उद्योगों में व्यापक अवसर पैदा होते हैं।
श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इन पहलों की रोजगार क्षमता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “इन परिवर्तनकारी उपायों से जहाज निर्माण, बंदरगाहों, नौवहन, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध उद्योगों में 25-30 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है। भारत का समुद्री पुनरुत्थान केवल आर्थिक विकास के बारे में ही नहीं है, बल्कि एक विकसित भारत और एक आत्मनिर्भर भारत में हमारे युवाओं के लिए सार्थक करियर बनाने के बारे में भी है।”
श्री सोनोवाल ने कहा, “इस क्षेत्र में कदम रखने वाले स्नातकों पर नैतिकता को बनाए रखने, नवाचार को अपनाने और तकनीकी एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने का दायित्व होता है, जो भारत के एक समुद्री महाशक्ति और समुद्री अर्थव्यवस्था में एक वैश्विक नेतृत्व के रूप में उभरने में सीधे योगदान करते हैं।”
एक दिन एक घंटा एक साथ

देश के कोने-कोने से नागरिक सुबह 8:00 बजे स्वैच्छिक श्रमदान के ऐतिहासिक एक घंटे के लिए एकजुट हुए। केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ में किरण थिएटर के पास सेक्टर 22 मार्केट में श्रमदान करके “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” अभियान का नेतृत्व किया। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री, श्री सी आर पाटिल ने नई दिल्ली के ओखला बैराज स्थित कालिंदी कुंज घाट पर श्रमदान किया। विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों ने अपने-अपने शहरों के विभिन्न हिस्सों में श्रमदान करके “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” पहल में भाग लिया। आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री, श्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के रतनपुर में स्वैच्छिक सेवा प्रदान करके राष्ट्रव्यापी स्वच्छता श्रमदान में सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस उल्लेखनीय राष्ट्रव्यापी पहल में समाज के विविध वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई, जिनमें स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायतें, राजनीतिक नेतृत्व, क्षेत्रीय विभाग कार्यालय, प्रमुख संगठन, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), गैर सरकारी संगठन और सभी क्षेत्रों के नागरिक शामिल थे।


अभियान के एक सप्ताह से भी अधिक समय बाद, एसएचएस 2025 एक सच्चे जन आंदोलन के रूप में विकसित हो गया है, जो नागरिक कार्रवाई, सामुदायिक भागीदारी और स्वच्छ भारत मिशन को मज़बूत करने के साझा संकल्प से प्रेरित है। सबसे चुनौतीपूर्ण और उपेक्षित क्षेत्रों – स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (सीटीयू) – को बदलने, कचरा-संवेदनशील बिंदुओं को हटाने और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता सुनिश्चित करने पर केंद्रित प्रयास किए गए हैं। एसएचएस 2025 अभियान में 5 करोड़ से अधिक नागरिक शामिल हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 7 लाख सीटीयू और 3 लाख सार्वजनिक स्थानों की सफाई हुई है।
स्वच्छ सार्वजनिक स्थान पहल के तहत, मीरा भयंदर में 4,000 से ज़्यादा छात्रों, गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और नागरिकों के साथ मिलकर प्लास्टिक कचरे को हटाने, स्वास्थ्य पहलों और स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाए गए। भारतीय तटरक्षक क्षेत्र (एनई) ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सफाई अभियान चलाया, जहाँ 2,500 से ज़्यादा स्वयंसेवकों ने 1,960 किलोग्राम समुद्री कूड़ा और 1,050 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया।
जैसे-जैसे स्वच्छता आंदोलन अपने उत्सवी दौर में प्रवेश कर रहा है, वैसे-वैसे स्थिरता पर ध्यान केंद्रित हो रहा है, और भारत भर के समुदाय शून्य-अपशिष्ट और प्लास्टिक-मुक्त तरीकों को अपना रहे हैं। पर्यावरण-अनुकूल पूजा पंडालों में टिकाऊ सजावट से लेकर नवरात्रि के दौरान फूलों से सजी कटरा स्थित वैष्णो देवी की खूबसूरती से सजी प्रतिमा तक, ये सभी उत्सव स्वच्छ और हरित उत्सवों के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। राजकोट में, स्वच्छता की भावना एक जीवंत रंगोली उत्सव के माध्यम से जीवंत हुई।


केंद्रीय मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने सूरत में 6,000 सफाई कर्मचारियों को सम्मानित किया और 10 करोड़ रुपये के कल्याण कोष की घोषणा की, जबकि नवी मुंबई, उज्जैन और रायगढ़ जैसे शहरों में स्वास्थ्य शिविर और स्वच्छता अभियान आयोजित किए गए, जिनमें रायगढ़ में 2,600 से अधिक और इंदौर में 15,000 से अधिक प्रतिभागियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया।
एनआईटी जमशेदपुर ने 1,090 किलो कबाड़ से बने ‘मेक इन इंडिया’ शेर का अनावरण किया, जिससे उसकी कुल कबाड़ कला 2,360 किलो हो गई। रेल मंत्रालय ने देश भर में ‘कचरे से कला’ प्रदर्शनियाँ आयोजित कीं। तिरुपति नगर निगम ने भी 500 पेड़ लगाकर, 30,000 पौधे और 25,000 कम्पोस्ट बैग वितरित करके शहर की हरियाली में योगदान दिया।
एसएचएस 2025 यह प्रदर्शित करता रहेगा कि किस प्रकार मंत्रालयों, नगर पालिकाओं, संस्थाओं और व्यक्तियों के साथ मिलकर काम करने से देश के स्वच्छता परिदृश्य को नया आकार दिया जा रहा है।
एफएसएसएआई ने फोस्कोस पोर्टल पर आयुर्वेद आहार के निर्माण के लिए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया
आयुर्वेद आहार के लिए नए ‘व्यापार का प्रकार’ (केओबी) ढांचे का उद्देश्य इस क्षेत्र को औपचारिक और सुव्यवस्थित बनाना है और प्रामाणिक आयुर्वेद ग्रंथों में वर्णित पारंपरिक नुस्खों को समकालीन खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के साथ संयोजित करना है। इस कदम का उद्देश्य इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एक विनियमित मार्ग बनाकर खाद्य और आयुर्वेद उद्योगों को बढ़ावा देना है।
यह विनियमन व्यक्तिगत पोषण के मूल आयुर्वेदिक सिद्धांत पर आधारित है, जो व्यक्ति की विशिष्ट संरचना (प्रकृति) के अनुसार आहार को अनुकूलित करता है। इन पारंपरिक सूत्रों का मानकीकरण करके, एफएसएसएआई के इस कदम से खाद्य और आयुर्वेद उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रामाणिक और विनियमित आयुर्वेद आहार की उपलब्धता निर्धारित आयुर्वेदिक उपचार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में काम करेगी।
उद्योग के लिए एक सुचारु परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए एफएसएसएआई ने 25 जुलाई 2025 के एक आदेश के माध्यम से 91 अनुमोदित आयुर्वेद आहार व्यंजनों की एक सूची पहले ही प्रकाशित कर दी है। इससे खाद्य व्यवसाय संचालकों को इस नई श्रेणी के अंतर्गत उत्पादों के निर्माण के लिए एक स्पष्ट, पूर्व-अनुमोदित संदर्भ प्राप्त होता है, जिससे प्रामाणिकता और नियामक अनुपालन दोनों सुनिश्चित होते हैं।
यह पहल, आयुष मंत्रालय के साथ करीबी सहयोग में विकसित की गई है, जो आयुर्वेद की गहन ज्ञान परंपरा को आधुनिक खाद्य सुरक्षा प्रथाओं के साथ एकीकृत करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे न केवल उद्योग से जुड़े हितधारकों को लाभ मिलेगा, बल्कि जनस्वास्थ्य को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।
फोस्कोस पोर्टल और स्वीकृत आयुर्वेद आहार की सूची से संबंधित आधिकारिक आदेश को निम्नलिखित लिंक के माध्यम से देखा जा सकता है:
- FoSCoS Portal: https://foscos.fssai.gov.in/
- Ayurveda Aahara Order and Approved List: https://fssai.gov.in/upload/advisories/2025/07/68835f872eaf4Order%20dated%2025-07-2025%20enclosing%20Ayurveda%20Aahara.pdf
हिंदी दिवस पर बाली “इंडोनेशिया” में लोकगायिका अपर्णा सिंह ने की शिरकत
भारतीय स्वरूप संवाददाता अपर्णा सिंह ने बताया ये मेरे लिए ये बहुत खुशी की बात है। #स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र बाली एवं शब्द यात्रा के संयुक्त तत्वाधान से चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक और सांस्कृतिक सम्मेलन में हमारे गुरुजनों, माता पिता, बड़े बुजुर्गों, मित्रों और जीवन साथी के आशीर्वाद और सहयोग से भारत का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य इंडोनेशिया के बाली द्वीप में प्राप्त हुआ। लखनऊ से गई अपर्णा सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ अपनी टीम के साथ स्वागत गीत से और फिर कजरी गा कर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस गीत के माध्यम से अपने देश की माटी उसकी सुगंध से पूरा वातावरण महक उठा। खचाखच भरा पूरा सभागार लोगों की तालियों से पूरा वातावरण गूंज उठा#। भारत और बाली के साथ ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आए अनेक प्रतिष्ठित लेखक और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के माननीय निदेशक आदरणीय नवीन मेघवाल और बाली के जनरल काउंसलर डॉ शशांक ने सभी प्रतिभागियों,साहित्यकारों को अंग वस्त्र और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया । विशिष्ट अतिथि के रूप में बाली से पद्मश्री इंद्रा आगुस उड्डियान तथा पद्मश्री आई वायन डिबिया ने मंच की शोभा बढ़ाई। इस आयोजन ने ना केवल साहित्य के नए आयाम प्रस्तुत किए बल्कि विभिन्न देशों के साहित्यिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विविधताओं को समझने का एक सुनहरा मंच भी प्रदान किया । इस प्रकार के आयोजन ना केवल साहित्य को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि देशों के बीच आपसी संबंधों और सौहार्द बढ़ाने में सहायक होते हैं।
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