इस समारोह के दौरान दंत चिकित्सा सेवा महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विनीत शर्मा और केंद्र के पूर्व कमांडेंट भी उपस्थित थे। कमांडेंट एडीसी आर एंड आर ब्रिगेडियर एसएस चोपड़ा ने दंत चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं रोगियों की देखभाल में एक अग्रणी संस्थान बनने के लिए आर्मी डेंटल सेंटर (आर एंड आर) की सभी उपलब्धियों तथा विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया।
आर्मी डेंटल सेंटर आर एंड आर सशस्त्र बलों का सबसे बड़ा दंत चिकित्सा संस्थान है, जो दंत चिकित्सा के लिए पांच विशिष्ट पाठ्यक्रमों में स्नातकोत्तर प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करता है। इनमें ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, प्रोस्थोडॉन्टिक्स और क्राउन एंड ब्रिज, पेरियोडॉन्टिक्स व ओरल इम्प्लांटोलॉजी, कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री तथा एंडोडॉन्टिक्स, ऑर्थोडॉन्टिक्स एवं डेंटोफेशियल ऑर्थोपेडिक्स की सुविधाएं शामिल हैं।
दंत चिकित्सा हेतु इस प्रतिष्ठान के दंत चिकित्सकों ने क्रैनियोप्लास्टी जैसी विभिन्न विशेषज्ञ प्रक्रियाओं को निष्पादित करके दंत चिकित्सा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं; इसे विशिष्ट शल्य चिकित्साओं में शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत टीएमजे आर्थ्रोस्कोपी; सिर में हड्डी के फ्लैप की मरम्मत या प्रतिस्थापन होता है, जो अक्सर आघात, पिछली सर्जरी या जन्मजात असामान्यताओं के कारण खोपड़ी में उत्पन्न दोषों को ठीक करने के लिए किया जाता है; टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (टीएमजे), जो जबड़े को कपाल से जोड़ता है और अन्य जटिल सर्जरी से संबंधित समस्याओं के निदान तथा उपचार के लिए एक छोटी व सरल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।
संस्थान ने सशस्त्र बलों हेतु सभी आयु वर्गों में सामान्य मुख शल्य चिकित्सा एवं पुनर्वास उपचार के दौरान एंग्जियोलिसिस और एनाल्जेसिया के लिए नाइट्रस ऑक्साइड-ऑक्सीजन अर्थात न्यूनतम बेहोशी की दवा के उपयोग की जद्दोजहद भी की है। यह सशस्त्र बलों में कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग (सीएडी), कंप्यूटर एडेड मैन्युफैक्चरिंग (सीएएम) प्रोस्थेसिस के निर्माण के लिए इंट्राओरल स्कैनर का उपयोग करने वाला एकमात्र केंद्र है। मैक्सिलोफेशियल दोषों के निवारण के लिए रोगियों के विशिष्ट प्रत्यारोपण यहां नियमित रूप से संपादित किए जाते हैं। इस संस्थान की लाइब्रेरी पत्रिकाओं और पुस्तकों की बड़ी डिजिटल पहुंच के साथ आरएफआईडी सक्षम है।
इस प्रतिष्ठित संस्थान के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हर वर्ष दंत चिकित्सा के विशेषज्ञों द्वारा दिया जाने वाला ‘मेजर जनरल आरएन डोगरा मेमोरियल भाषण’ आज मेरठ के स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल जीके थपलियाल, (सेवानिवृत्त) द्वारा “इंडिया दैट इज भारत” विषय पर दिया गया।
पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ ने सभी रैंक अधिकारियों के साथ बातचीत की और इस संस्थान द्वारा प्रदान की जा रही विशिष्ट सेवाओं की सराहना की। उन्होंने सभी रैंकों से सैनिकों, उनके परिवारों और पूर्व सैन्य कर्मियों को अत्याधुनिक विशिष्ट देखभाल सुविधाएं प्रदान करना जारी रखने का आग्रह किया तथा सभी को समान रूप से पेशेवर उत्साह के साथ अपना कार्य करना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ ने रोगियों की देखभाल सुविधाओं में निरंतर सुधार के लिए आर्मी डेंटल सेंटर (आर एंड आर) के कर्मचारियों की भी प्रशंसा की।
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बालकनी में दाल सूखने के लिए रखी हुई थी। शाम होने को आई सोचा उठा लूं, बहू को आने में पता नहीं अभी और कितना वक्त लगेगा? छत पर पहुंची ही थी कि पड़ोसन सीमा ने आवाज दी, “अरे सविता भाभी आजकल दिखाई नहीं देती? तबीयत तो ठीक है ना?”
भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग की आयोजना में वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस का अयोजन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक और तकनीकी उद्देश्यों के लिए हिंदी शब्दावली के प्रयोग को छात्रों और समाज के लाभ के लिए शिक्षादाताओं, शोधकर्ताओं और उद्योगपतियों को एक मंच पर लाना है।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने पिछले 64 वर्षों के दौरान संस्थान द्वारा प्राप्त की गई विभिन्न उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें नुमालीगढ़ वैक्स प्लांट, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, यूएस ग्रेड गैसोलीन, मेडिकल ऑक्सीजन इकाइयां, स्वीटिंग कैटलिस्ट, पीएनजी बर्नर, बेहतर गुड़ भट्टी आदि के सम्मिलित होने का उल्लेख है। मसूरी के ओक ग्रोव स्कूल के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी जिज्ञासा 2.0 कार्यक्रम के एक भाग के रूप में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। विद्यार्थियों ने संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं का दौरा किया और उनमें काम करने वाले वैज्ञानिकों और अनुसंधान विद्वानों के साथ बातचीत की। जिज्ञासा 2.0 कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों में वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करना है ताकि वे बड़े होकर देश में उभरते वैज्ञानिक बन सकें। समारोह का समापन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) के वरिष्ठ प्रशासन नियंत्रक श्री अंजुम शर्मा द्वारा दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) का दल ईमानदारी से उन सभी व्यक्तियों को धन्यवाद देती है जिन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में बिना शर्त सहयोग प्रदान किया।