उड़ान 5.0 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- उड़ान का यह चरण, श्रेणी-2 (20-80 सीटों) और श्रेणी-3 (>80 सीटों) पर केंद्रित है।
- पहले चरण की 600 किमी की सीमा को समाप्त कर दिया गया है और उड़ान के मूल और गंतव्य के बीच की दूरी के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है।
- प्रदान की जाने वाली व्यावहारिक अंतर वित्तीय सहायता (वायबिलिटी गैप फंडिंग -वीजीएफ) को प्राथमिकता और गैर-प्राथमिकता वाले दोनों क्षेत्रों के लिए ऊपरी सीमा 600 किमी की दूरी पर निर्धारित की जायेगी, जबकि पहले ऊपरी सीमा 500 किमी थी।
- कोई पूर्व निर्धारित रूट पेश नहीं किया जाएगा। केवल एयरलाइंस द्वारा प्रस्तावित नेटवर्क और व्यक्तिगत रूट के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
- एयरलाइनों को एलओए जारी होने के 2 महीने बाद एक कार्य/व्यवसाय योजना प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें वे तकनीकी प्रस्ताव के समय अपनी विमान अधिग्रहण योजना/विमान की उपलब्धता, चालक दल, स्लॉट आदि प्रस्तुत करेंगे।
- एक रूट, एक एयरलाइन को एक से अधिक बार नहीं दिया जाएगा, चाहे वह अलग-अलग नेटवर्क में हो या एक ही नेटवर्क में।
- एक रूट पर एकाधिकार को रोकने के लिए, यदि चार लगातार तिमाहियों में औसत तिमाही पीएलएफ 75% से अधिक है, तो विशिष्टता वापस ले ली जाएगी।
- त्वरित संचालन को और प्रोत्साहित करने के लिए 4 महीने तक की देरी होने पर, प्रत्येक महीने के लिए प्रदर्शन गारंटी का 25% भुना लिया जाएगा।
- एयरलाइंस को रूट दिए जाने के 4 महीने के भीतर परिचालन शुरू करना होगा। पहले यह समय सीमा 6 महीने थी।
- हवाई अड्डों की एक सूची – जो संचालन के लिए तैयार हैं, या जल्द ही संचालन के लिए तैयार होंगे – को योजना में शामिल किया गया है, ताकि योजना के तहत मार्गों के त्वरित संचालन को सुविधाजनक बनाया जा सके।
- एक ऑपरेटर द्वारा रूट को दूसरे ऑपरेटर को दिए जाने से जुड़ी नवीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और इसे प्रोत्साहित किया गया है।
उड़ान 5.0 के लॉन्च के अवसर पर नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “उड़ान कई क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है, जो अब देश भर के स्थानों से अच्छी तरह से जुड़ गई हैं। योजना का यह नया और मजबूत संस्करण गति को बढ़ाएगा, नए मार्गों को जोड़ेगा और हमें निकट भविष्य में 1000 मार्गों तथा 50 अतिरिक्त हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और जल हवाई अड्डों के संचालन के लक्ष्य के करीब लाएगा। अब उड़ेगा देश का हर आम नागरिक!”
उड़ान योजना ने हितधारकों के एक विविध समूह को लाभान्वित किया है। यात्रियों को हवाई संपर्क का लाभ मिला है, एयरलाइनों को क्षेत्रीय मार्गों के संचालन के लिए रियायतें मिली हैं, हवाई संपर्क से जुड़े नए क्षेत्रों को उनके आर्थिक विकास के लिए हवाई संपर्क का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिला है। किफायती और रियायती हवाई किराए पर आम आदमी हवाई यात्रा करे– इस बात से जुड़े प्रधानमंत्री के विजन की दिशा में यह एक और कदम है।
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर

दर्जनों लोगों को तड़पा-तड़पा कर मारने का आरोपी जिन टीवी कैमरों को अपना अभेद्य सुरक्षा कवच समझता था, जिन कैमरों के साये में उसके चहरे पर मृत्यु का खौफ तो दूर, रंच मात्र का शक भी नहीं था| उन्हीं कैमरों के बीच से हुई गोलियों की बौछार ने माफिया और उसके भाई का पल भर में काम तमाम कर दिया| यह सब अचानक हुआ या पूर्व नियोजित साजिश के तहत, इसकी चर्चा इस समय गाँव की गलियों से लेकर शहर के नुक्कड़ों तक हो रही है| किसी भी निष्कर्ष पर न पहुँच पाने के बाद लोग यह कहते हुए बातचीत का विषय बदल देते हैं कि सच जल्द ही सबके सामने आएगा| वहीँ कुछ लोग यह भी आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि पकड़े गये तीनों हमलावरों को किसी बहाने से मौत के घाट उतारकर कहीं सत्य को सदा सर्वदा के लिए दफ़न ही न कर दिया जाए| आगे क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में है| लेकिन इस घटना के बाद से लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ पत्रकारिता, अब सन्देह की दृष्टि से देखा जाने लगा है| समाज के कुछ बुद्धिजीवियों ने अभी तक पत्रकारिता को विरोधी और गोदी मीडिया के रूप में वर्गीकृत कर रखा था| लेकिन अब वह गोली मीडिया के रूप में लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ का तीसरा वर्ग भी निर्धारित कर सकते हैं| टीवी चैनलों की आई बाढ़ और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन ने पत्रकारिता के मायने आज पूरी तरह बदल दिये हैं| टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में हल्ला बोल पत्रकारिता के शोरगुल के बीच मूल्यों की तिलांजलि न जाने कब दी जा चुकी है| लेकिन प्रयागराज की घटना ने पत्रकारिता का जो नवीन चेहरा प्रस्तुत किया है, उससे चिन्तित हुए बिना नहीं रहा जा सकता| वरिष्ठ पत्रकारों से अक्सर उनके जानने वाले प्रेस का परिचय-पत्र बनवाने के लिए निवेदन करते रहते हैं| ताकि वह अपने वाहन पर प्रेस लिखा सकें तथा सरकारी विभागों में पत्रकारिता का रौब जमाकर अपना व्यक्तिगत काम करवा सकें| रजिस्ट्रार ऑफ़ न्यूजपेपर्स फॉर इण्डिया से किसी तरह रजिस्ट्रेशन नम्बर हासिल करने वाले अनेक सम्पादक ऐसे हैं जिनके अख़बार का धरातल पर कहीं कोई बजूद नहीं है| ऐसे सम्पादक शौकिया लोगों से सदस्यता शुल्क के नाम पर अच्छी खासी रकम वसूल कर, अपने अख़बार का परिचय-पत्र प्रदान करके पत्रकारिता धर्म का निर्वहन कर रहे हैं| इसी सदस्यता शुल्क से ही सम्पादक जी के परिवार का खर्च चलता है| भले ही उनके अख़बार का पहचान-पत्र प्राप्त करने वाले उसका किसी भी हद तक दुर्पयोग क्यों न करते हों| यहाँ सदुपयोग के बारे में तो सोचना ही व्यर्थ है| अतीक और अशरफ के तीनों कातिलों के पास से जो डमी कैमरे बरामद हुए हैं| उनके बारे में अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि उनके माइक पर चिपका लोगो किस मीडिया संस्थान का है| लेकिन इससे इतना तो अनुमान लग ही जाता है कि कुछ टीवी चैनल भी फर्जी आईडी बनाने का कारोबार कर रहे हैं|
कानपुर 19 अप्रैल भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस. एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज कानपुर में मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग समारोह (MoU Ceremony) का आयोजन महाविद्यालय सभागार में किया गया। महाविद्यालय ने अपना प्रथम समझौता ज्ञाप (MoU) वरदान इंस्टीट्यूट ऑफ़ अल्टरनेटिव मेडिसिंस एंड एलाइड साइंसेज मेरठ के साथ किया। वरदान इंस्टीट्यूट की चेयरपर्सन डॉ. पल्लवी रस्तौगी, सेन महाविद्यालय के सचिव श्री प्रोबीर कुमार सेन, प्राचार्य प्रो. सुमन ने MoU पर हस्ताक्षर किए। प्रो. सुमन ने अपने वक्तव्य में कहा कि विद्यार्थी हित हेतु महाविद्यालय आगे भी ऐसी ही कड़ियां जोड़ता रहेगा। श्री पी. के. सेन जी ने इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार को बधाई एवम् शुभकामनाएं दी। डॉ. पल्लवी रस्तौगी ने छात्राओं को अवगत कराया कि वरदान इंस्टीट्यूट के सहयोग से सेन महाविद्यालय में व्यवसायपरक शिक्षा के अंतर्गत एक्यू फिजियो कोर्स, चक्र संतुलन, कलर थैरेपी, एक्यूप्रेशर व नेचुरोपैथी का बेसिक कोर्स, डाइट एंड न्यूट्रीशन कोर्स आदि विभिन्न पाठ्यक्रम तथा कार्यशालाएं संचालित की जाएंगी। साथ ही मेधावी छात्राओं को इन पाठक्रमों हेतु छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी। इस MoU सेरेमनी के अवसर पर प्रबंध तंत्र सदस्य श्रीमती दीपाश्री सेन सहित समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा।
कानपुर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, एस एन सेन बा वि पी जी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग ने कार्यशाला: ईथनोबॉटनी तथा आयुर्वेद का आयोजन किया ।