• वर्ष 2024 के दौरान भारत में 20.57 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन (आईटीए)।
• वर्ष 2024 के दौरान पर्यटन से 2,93,033 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित (एफईई)।
• वर्ष 2024 के दौरान भारत में 2948.19 मिलियन घरेलू पर्यटक यात्राएं (डीटीवी)।
बुनियादी ढांचे का विकास
पर्यटन मंत्रालय ने थीम-आधारित पर्यटन सर्किट के विकास हेतु जनवरी 2015 में स्वदेश दर्शन योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना के तहत कुल 5290.33 करोड़ रुपये की लागत से कुल 76 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 75 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटक एवं गंतव्य केन्द्रित दृष्टिकोण को अपनाते हुए स्थायी एवं जिम्मेदार गंतव्य विकसित करने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी2.0) के तौर पर नया रूप दिया है। एसडी2.0 योजना के तहत 2208.27 करोड़ रुपये की 53 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।
पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटक मूल्य श्रृंखला के सभी केन्द्रों पर पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने हेतु स्वदेश दर्शन 2.0 योजना की उप-योजना के तौर पर ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ (सीबीडीडी) के लिए दिशा-निर्देश तैयार की है। चार थीम वाली श्रेणी – (i) आध्यात्मिक पर्यटन, (ii) संस्कृति एवं विरासत, (iii) वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, (iv) इकोटूरिज्म एवं अमृत धरोहर स्थल – के तहत 648.11 करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाएं मजूर की गई हैं।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जनजातीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने हेतु प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (पीएम-जेयूजीए) को मंजूरी दे दी है। पर्यटन मंत्रालय पीएम-जेयूजीए योजना के तहत 1,000 जनजातीय होमस्टे विकसित करेगा। इन कदमों को स्वदेश दर्शन की उप-योजना के तौर पर लागू किया जाएगा। जनजातीय होमस्टे के विकास हेतु दिशानिर्देश बनाई और जारी कर दी गई हैं।
वर्ष 2024-25 की बजट घोषणाओं के फॉलो-अप के तौर पर, देश में प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों के पूर्ण विकास और वैश्विक स्तर पर उनकी ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग के लिए राज्यों को 50 वर्ष की अवधि के लिए दीर्घकालिक ब्याज-मुक्त ऋण देने हेतु, पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) – प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को वैश्विक स्तर पर विकसित करने की योजना के तहत 23 राज्यों में 3295.76 करोड़ रुपये की लागत से कुल 40 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।
पर्यटन मंत्रालय ने देश में चुने हुए तीर्थ स्थलों के समग्र विकास हेतु तीर्थयात्रा कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) से संबंधित राष्ट्रीय मिशन योजना का शुभारंभ किया है। इस योजना के तहत 1726.74 करोड़ रुपये की लागत से कुल 54 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 31 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
केन्द्रीय एजेंसियों को सहायता योजना के तहत, पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास हेतु आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, पोर्ट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, आईटीडीसी, रेल मंत्रालय आदि जैसी केन्द्रीय एजेंसियों को वित्तीय मदद प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 948.78 करोड़ रुपये की लागत से कुल 66 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें से 39 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 10 परियोजनाएं बंद कर दी गई हैं।
प्रचार एवं विपणन
पर्यटन मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के तौर पर 26 से 31 जनवरी 2025 के दौरान दिल्ली के लाल किले के मैदान में “भारत पर्व” कार्यक्रम का आयोजन किया। देश के अलग-अलग पर्यटन संबंधी आकर्षणों को प्रदर्शित करने हेतु विभिन्न राज्यों/केन्द्र- शासित प्रदेशों के थीम वाले पवेलियन स्थापित किए गए थे। विभिन्न क्षेत्रीय सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। भारत पर्व की थीम ‘देखो अपना देश’ थी।
पर्यटन मंत्रालय ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के उपलक्ष्य में 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में 40 सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किए। ये कार्यक्रम वैश्विक थीम “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” के अनुरूप थे और इनमें समग्र स्वास्थ्य, सांस्कृतिक विरासत और स्थायी पर्यटन पर जोर दिया गया।
चलो भारत वैश्विक प्रवासी अभियान: चलो भारत पहल के तहत एक लाख मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा की घोषणा की गई। यह 31 मार्च 2025 तक मान्य है ताकि भारतीय प्रवासी अपने 5 गैर-भारतीय दोस्तों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित करके अतुल्य भारत के दूत बन सकें।
पर्यटन मंत्रालय भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने हेतु उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट (आईटीएम) का आयोजन कर रहा है। 13वां इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट (आईटीएम) 13 से 16 नवंबर 2025 के दौरान सिक्किम के गंगटोक में आयोजित किया गया था। इस चार-दिवसीय कार्यक्रम में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जुड़े विभिन्न हितधारक एक साथ आए।
मंत्रालय ने मीटिंग, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन (माइस) के लिए भारत को एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य के तौर पर पेश करने हेतु एक समग्र डिजिटल माइस कैटलॉग तैयार किया है। इस कैटलॉग में 60 शहरों में भारत की माइस संबंधी अवसंरचना की जानकारी दी गई है, जिसमें बड़े कन्वेंशन सेंटर, कनेक्टिविटी, सुविधाएं और आस-पास के आकर्षण शामिल हैं। यह पहल घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय इवेंट प्लानर्स के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का काम करती है, जिससे भारत की दृश्यता, प्रतिस्पर्धात्मकता और बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने की क्षमता बढ़ती है।
कौशल विकास
पर्यटन मंत्रालय ने सामाजिक समावेशन, रोजगार और आर्थिक प्रगति के लिए पर्यटन को एक जरिया बनाने के साथ-साथ पर्यटकों को ‘पर्यटकों के अनुकूल’ लोगों से मिलवाकर गंतव्य पर उनके समग्र अनुभव को बेहतर बनाने हेतु ‘पर्यटन मित्र एवं पर्यटन दीदी’ नाम की एक राष्ट्रीय जिम्मेदार पर्यटन पहल शुरू की थी। ये लोग अपने गंतव्य के गौरवान्वित दूत और कहानीकार हैं। इस कार्यक्रम के तहत लगभग 4382 पर्यटन सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण दी गई है।
माइस पर्यटन
पर्यटन मंत्रालय ने माइस उद्योग के लिए राष्ट्रीय रणनीति एवं रोडमैप तैयार की है और भारत को बड़ी कॉन्फ्रेंस और प्रदर्शनी के केन्द्र के तौर पर बढ़ावा देने हेतु ‘मीट इन इंडिया’ सब-ब्रांड लॉन्च किया है। घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय प्लानर्स को सहायता प्रदान करने हेतु 60 से अधिक शहरों – जिसमें जी20 के आयोजक शहर भी शामिल हैं – में बुनियादी ढांचे एवं सुविधाओं को कवर करने वाला एक पूरा डिजिटल माइस कैटलॉग तैयार किया गया है। 4-6 मई को जयपुर में संपन्न मीट इन इंडिया कॉन्क्लेव 2025 भारत के माइस एजेंडा को आगे बढ़ाने और माइस सेक्टर में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने का एक अहम प्लेटफॉर्म साबित हुआ।
चिकित्सा पर्यटन
अपनी उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा और इलाज की किफायती लागत का लाभ उठाकर, भारत दुनिया भर में किफायती चिकित्सा एवं कल्याण पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के तौर पर उभर रहा है। भारत का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ उच्च-गुणवत्ता वाली तृतीयक स्तर की देखभाल की सुविधा – जैसे कि हृदय की शल्य चिकित्सा, घुटने का ट्रांसप्लांट, कॉस्मेटिक सर्जरी और डेंटल केयर – प्रदान करने में निहित है। भारत आधुनिक स्वास्थ्य सेवा को आयुष प्रणाली (पारंपरिक भारतीय चिकित्सा) के साथ आसानी से जोड़ता है। वर्ष 2024 में, भारत में चिकित्सा के उद्देश्य से 6,44,387 विदेशी पर्यटक आए, जो 2020 की तुलना में लगभग 252 प्रतिशत अधिक है। चिकित्सा एवं कल्याण के उद्देश्य से की जाने वाली यात्रा को आसान बनाने हेतु भारत सरकार ने ई-मेडिकल वीजा और ई-आयुष वीजा शुरू किए हैं। यह सुविधा 171 देशों के यात्रियों के लिए उपलब्ध है।
अपने पोर्टल http://www.indiahealthcaretourism.com के जरिए चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु पर्यटन मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत सर्विस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ सहयोग भी किया है।
बजट घोषणाओं का कार्यान्वयन:
बजट घोषणा 2023-24: देश घरेलू और विदेशी, दोनों प्रकार के पर्यटकों के लिए बेहद आकर्षक पेशकश करता है। पर्यटन में बहुत अधिक संभावनाएं हैं, जिनका सदुपयोग किया जा सकता है। यह क्षेत्र, विशेष तौर पर युवाओं को, नौकरियों और उद्यमिता के बड़े अवसर प्रदान करता है। पर्यटन को बढ़ावा देने का काम मिशन मोड पर किया जाएगा, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी, सरकारी कार्यक्रमों का तालमेल और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप शामिल होगी।
अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने विभिन्न गंतव्यों के समग्र विकास हेतु स्वदेश दर्शन के तहत एक उप-योजना, चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) के लिए दिशानिर्देश तैयार की हैं। चुनौती आधारित गंतव्य विकास योजना राज्यों की सक्रिय भागीदारी, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और सरकारी कार्यक्रमों के तालमेल से मिशन मोड में पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के विजन का हिस्सा है।
इस योजना का उद्देश्य पर्यटक मूल्य श्रृंखला के सभी केन्द्रों पर पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना है। सीबीडीडी पहल के तहत, 648.11 करोड़ रुपये की लागत से 36 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।
बजट घोषणा 2023-24: ‘देखो अपना देश’ पहल के उद्देश्यों को पूरा करने हेतु क्षेत्र विशिष्ट कौशल एवं उद्यमिता के विकास को जोड़ा जाएगा। इसे प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के बजाय घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता देने की अपील के तौर पर शुरू किया था। थीम-आधारित पर्यटक सर्किट के एकीकृत विकास हेतु, ‘स्वदेश दर्शन योजना’ भी शुरू की गई थी। वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत, सीमावर्ती गांवों में पर्यटन संबंधी अवसंरचना एवं सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।
अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने ‘पर्यटन मित्र/पर्यटन दीदी’ नाम से एक राष्ट्रीय जिम्मेदार पर्यटन पहल की शुरुआत की है। इस पहल को प्रायोगिक परियोजना के तौर पर शुरू करने हेतु कुल 7 पर्यटक गंतव्य – ओरछा (मध्य प्रदेश), गांडिकोटा (आंध्र प्रदेश), बोधगया (बिहार), आइजोल (मिजोरम), जोधपुर (राजस्थान), श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर) और श्री विजय पुरम (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) – चुने गए थे। विश्व पर्यटन दिवस 2024 के अवसर पर, पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में 50 पर्यटक गंतव्यों पर पर्यटन मित्र और पर्यटन दीदी कार्यक्रम का विस्तार किया। अब तक, इस पहल के तहत लगभग 4382 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है।
इसके अलावा, पर्यटन मंत्रालय अपनी ‘सेवा प्रदाता का क्षमता विकास (सीबीएसपी)’ योजना के तहत, हुनर से रोजगार तक, कौशल जांच प्रमाण-पत्र आदि जैसे विभिन्न अल्पकालिक आतिथ्य और पर्यटन से संबंधित कौशल विकास कार्यक्रम चलाता है। पर्यटन मंत्रालय ‘इंक्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट फैसिलिटेटर (आईआईटीएफ) और इंक्रेडिबल इंडिया टूरिस्ट गाइड (आईआईटीजी) सर्टिफिकेशन’ कार्यक्रम भी चला रहा है – जिसका उद्देश्य पूरे देश में, पर्यटन क्षमता वाले दूरदराज के इलाकों सहित, अच्छी तरह से प्रशिक्षित और पेशेवर टूरिस्ट फैसिलिटेटर/गाइड का एक पूल बनाना है। ये नियमित पाठ्यक्रम हैं जो ऑनलाइन आयोजित किए जाते हैं, जिसमें पंजीकरण पूरे साल खुली रहती है और परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती है।
पर्यटन मंत्रालय ने देश में स्थायी एवं जिम्मेदार पर्यटक गंतव्य विकसित करने के उद्देश्य से अपनी स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में नया रूप दिया है और 2208.27 करोड़ रुपये की लागत से 53 परियोजनाएं मजूर की हैं।
पर्यटन मंत्रालय ने ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ (सीबीडीडी) पहल के तहत वाइब्रेंट विलेजेस को एक थीम वाली श्रेणी के रूप में शामिल किया है, जो स्वदेश दर्शन योजना की एक उप-योजना है और इस श्रेणी के तहत पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 5 गांवों की पहचान की है। सीबीडीडी योजना के तहत अरुणाचल प्रदेश (किबिथो), हिमाचल प्रदेश (रक्षम-छितकुल), सिक्किम (ग्राथांग) और उत्तराखंड (जादुंग एवं माना) राज्यों में वाइब्रेंट विलेजेस थीम के तहत 24.90 करोड़ रुपये की लागत से 5 परियोजनाएं मजूर की गई हैं।
बजट घोषणा 2024-25 / अंतरिम बजट: राज्यों को प्रसिद्ध पर्यटन केन्द्रों के पूर्ण विकास, उनकी ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सुविधाओं और सेवाओं की गुणवत्ता के आधार पर इन केन्द्रों की रेटिंग के लिए एक फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। इस प्रकार के विकास का वित्त पोषण करने हेतु राज्यों को मिलान के आधार पर दीर्घकालिक अवधि के लिए बिना ब्याज वाले ऋण दिए जाएंगे।
अब तक की प्रगति: पर्यटन मंत्रालय ने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) – प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को वैश्विक स्तर पर विकसित करने के लिए कार्यात्मक दिशानिर्देश जारी की हैं। इस योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों को देश में प्रसिद्ध पर्यटक केन्द्रों को पूरी तरह से विकसित करने, उनकी ब्रांडिंग और वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग के लिए 50 वर्ष की अवधि के लिए दीर्घकालिक ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान करना है। पर्यटन मंत्रालय ने इस योजना की दिशानिर्देशों के अनुरूप 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं का चयन किया है, जिनके लिए व्यय विभाग द्वारा 3295.76 करोड़ रुपये मजूर किए गए हैं।
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