
हिंदी से है जुड़ा हमारा अभिमान,
हिंदी से रोशन है हिंदुस्तान।
सरल, सहज और मीठी बोली,
संस्कृति की है यह अनमोल डोली।
मातृभाषा का मान बढ़ाएँ,
हर दिल में हिंदी को अपनाएँ।
ज्ञान, साहित्य, संस्कृति का संगम,
हिंदी ही है भारत का अनुपम।
विद्या की गंगा हिंदी बहाती,
मन की बातों को स्वर दे जाती।
एकता का संदेश सुनाती,
दूरियों को भी पास कराती।
यही है हमारी पहचान की शान,
यही है भविष्य, यही है वरदान।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
हिंदी को विश्व शिखर तक ले जाएँ।
डॉ अंजनी अग्रवाल कानपुर नगर उत्तर प्रदेश
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर