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‘एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता अड्डांकी, बापट्ला। देश के लघु एवं मझोले वर्ग के समाचारपत्र संगठन ‘एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् की बैठक आन्ध्र पदेश राज्य के बापट्ला जिले के अड्डांकी, सिंगारकोण्डा में आयोजित।

सम्मेलन का शुभारम्भ पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीदुग्गाबत्ती वेंकटेश्वरा राव, पूर्व मंत्री गोट्टीपति पति रवि कुमार, पद्मश्री येदलापल्ली वेंकटेश्वरा राव, मुख्य सूचना आयुक्त, एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चन्दोला, राष्ट्रीय महासचिव शंकर कतीरा के करकमलों द्वारा संयक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

लघु एवं मझोले वर्ग के अखबारों के प्रकाशकों के तीन दिवसीय सम्मेलन में लघु एवं मझोले वर्ग की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम, उत्तराखण्ड, उड़ीसा सहित अनेक राज्यों से शामिल हुए प्रकाशकों ने अनेक समस्याओं को विस्तार से बताया।

सम्मेलन में शामिल हुए प्रकाशकों व पदाधिकारियों द्वारा रखे गये प्रस्तावों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चन्दोला ने कहा कि छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों का उत्पीड़न, केन्द्र व राज्यों की सरकारों को बन्द करना चाहिये छोटे व मझोले वर्ग के अखबार ही स्थानीय स्तर की समस्याओं को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। ऐसे में उनका उत्पीड़न निन्दनीय है।

श्री चन्दोला ने कहा कि, हम मांग करते हैं कि छोटे व मझोले वर्ग के अखबारों की विकासदर बढ़ाने के लिये केन्द्र व राज्यों की सरकारों को आगे आना चाहिये और अखबारों का आर्थिक स्तर मजबूत करने के लिये उनके हिस्से का विज्ञापन, विज्ञापन नियमावली के अनुसार नियत बजट के आधार पर जारी करना चाहिये।

राष्ट्रीय सचिव डॉ. अनन्त शर्मा ने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने अपने राज्यों से प्रकाशित होने वाले अखबारों की समस्याओं को बिन्दुवार लिखकर भेजें। उनका समाधान करवाने हेतु केन्द्र सरकार व सम्बन्धित राज्यों की सरकारों को पत्र प्रेषित किया जायेगा।

सम्मेलन में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय सचिव प्रवीण पाटिल, कोषाध्यक्ष भगवती चन्दोला, संगठन सचिव अतुल दीक्षित, किरि रांगहेंग, उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्याम सिंह पंवार राजस्थान राज्य इकाई के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता, महाराष्ट्र राज्य इकाई अध्यक्ष प्रदीप कुलकर्णी, गुजरात राज्य इकाई अध्यक्ष मयूर बोरीचा, उड़ीसा राज्य इकाई अध्यक्ष चन्द्रकान्त सूतर, राष्ट्रीय कार्यपरिषद् के सदस्य एम. अरुणा, के. वेंकटेश रेड्डी, वेनुगोपाल, तारिका वेल्कर, के. परशुराम, अकरम खान सहित अनेक प्रकाशक मौजूद रहे। एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् के सम्मेलन में आन्ध्र प्रदेश राज्य के अध्यक्ष सेंडीरेड्डी कोण्डला राव ने उपस्थित प्रदेश अध्यक्षों को शॉल उढ़ाकर व स्मृतिचिन्ह भेंट कर एवं राष्ट्रीय परिषद् के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इसी दौरान राजस्थान राज्य इकाई, असम राज्य इकाई ने भी अतिथियों व पदाधिकारियों को सम्मानित किया।

एसोसियेशन ऑफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इण्डिया’ की राष्ट्रीय परिषद् के सम्मेलन में छात्राओ ने उपस्थित जनों के स्वागत में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। 

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“सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड पॉलिटिक्स” (सी एस एस पी) ने बेटियों को राजनीति में लाने का संदेश दिया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर “सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड पॉलिटिक्स” (सी एस एस पी)की ओर से घर की बेटियों को राजनीति में लाने का संदेश दिया गया।
सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चेंबर सभागार में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि राजनीति अब राजनैतिक घरानों के बेटियों के लिए नहीं रहेगी इसका स्वरूप बदलेगा,
अब राजनीति में रुचि रखने वाली गैर राजनैतिक परिवार की बेटियों की भागीदारी बढ़ेगी। संस्थान ने गैर राजनैतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार की महिलाओं को प्रेरित प्रशिक्षित और शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है ताकि वो राजनीति में आने से न हिचकें और राजनीतिक में अपनी भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम में के डी जी सी लखनऊ की प्राचार्या प्रो सारिका दुबे ने इस विषय अपनी राय रखी उन्होंने कहा राजनैतिक सशक्तिकरण के लिए सीएसएसपी द्वारा की गई पहल से महिलाओं का राजनीत में आने का मार्ग सुलभ होगा। संस्थान के निदेशक डॉ ए के वर्मा ने अपनी पौत्री श्रेया की स्मृति में बेटियों को श्रेया स्कॉलरशिप देने की घोषणा की, इस अवसर पर डॉ ए के वर्मा की दो पुस्तकों “ए ग्रामर ऑफ प्रोफेशनल पॉलिटिक्स,इंटर पॉलिटिक्स,विन इलेक्शन” और व्यावसायिक राजनीति का व्याकरण राजनीतिज्ञ बने चुनाव जीतें” का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रो नलिन कुमार, डॉ नीता जैन, डॉ शिप्रा श्रीवास्तव, डॉ संजय कुमार, डॉ सूफिया शहाब, डॉ आशुतोष सक्सेना, डॉ मितकमल डॉ नीरज शुक्ला, अजय दीक्षित, प्रभात तिवारी, ज़ैनब आदि उपस्थित रहे।

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प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के साथ बातचीत कीजो देश के लिए गौरव का क्षण था। इस मुलाकात के दौरानदोनों ने कई विषयों पर चर्चा कीजिनमें अंतरिक्ष में श्री शुक्ला के अनुभवविज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति और देश के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम – गगनयान जैसे विषय शामिल थे।

एक्स पर एक पोस्ट मेंश्री मोदी ने लिखा:

“शुभांशु शुक्ला के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हमने अंतरिक्ष में उनके अनुभवों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ-साथ भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन सहित कई विषयों पर चर्चा की। भारत को उनकी उपलब्धि पर गर्व है।

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“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी एआई-संचालित रक्त परीक्षण उपकरण का समर्थन किया”

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने मेसर्स प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के साथ “एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के लिए आईओटी-सक्षम पॉइंट-ऑफ-केयर रक्त परीक्षण उपकरण” नामक परियोजना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व छात्र श्री साहिल जगनानी और श्री अंकित चौधरी द्वारा स्थापित, यह कंपनी डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों, प्रोफेसरों और छात्रों की एक बहु-विषयक टीम से उभरी है, जो वंचित आबादी के लिए किफायती नैदानिक तकनीकें विकसित करने के लिए काम कर रही है। उनके सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास, जिसे शुरू में बीआईआरएसी का सहयोग प्राप्त था, ने मोबिलैब डिवाइस का निर्माण किया—एक पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाला क्लिनिकल केमिस्ट्री एनालाइज़र, आईओटी-सक्षम और एआई/एमएल एल्गोरिदम द्वारा संचालित, जो किडनी, लिवर, हृदय, विटामिन और कैंसर से संबंधित 25 से अधिक मापदंडों का परीक्षण करने में सक्षम है।

कंपनी के पास आईआईटी गुवाहाटी से हस्तांतरित “पॉइंट-ऑफ-केयर क्वांटिफिकेशन के लिए एक ट्रांसमिटेंस-आधारित प्रणाली/किट” का पेटेंट है और उसने एकीकृत मिक्सर, परख विकास, सेंट्रीफ्यूज और प्रोपराइटरी ऑप्टिकल सिस्टम से संबंधित छह से ज़्यादा अतिरिक्त पेटेंट आवेदन दायर किए हैं। इस उपकरण का 10,000 मरीज़ों पर परीक्षण हो चुका है और हाल ही में इसे सीडीएससीओ से निर्माण लाइसेंस मिला है। यह परियोजना वर्तमान प्रोटोटाइप (एम1) को उन्नत बनाने पर केंद्रित होगी ताकि एक साथ पाँच परीक्षण किए जा सकें, रोगियों के प्रतीक्षा समय को कम किया जा सके और व्यावसायिक स्तर पर विनिर्माण स्थापित किया जा सके। इस अगली पीढ़ी के मोबिलैब में हीमोग्लोबिन, क्रिएटिनिन, बिलीरुबिन, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, यूरिक एसिड, ग्लूकोज और जीजीटी जैसे परीक्षण शामिल होंगे।

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव, श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा:
“ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंच सुनिश्चित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। यह परियोजना न केवल सामर्थ्य और पहुंच को संबोधित करती है, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वदेशी, एआई-संचालित नैदानिक समाधान विकसित करने में देश की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।”

प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड का सहयोग प्रयोगशाला नवाचार से लेकर बड़े पैमाने पर तैनाती तक की हमारी यात्रा को गति देगा। मोबिलैब के साथ, हमारा लक्ष्य ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवा की कमी को पूरा करना है, और यह सुनिश्चित करना है कि देश में कहीं भी, देखभाल के बिंदु पर उन्नत निदान उपलब्ध हों।”

यह सहयोग टीडीबी की आत्मनिर्भर भारत के साथ स्वदेशी स्वास्थ्य सेवा नवाचारों को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर सस्ती चिकित्सा प्रौद्योगिकियों में देश की उपस्थिति को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

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टॉक्सिक रिलेशनशिप 

कहते हैं जब कोई इंसान प्रेम में होता है या कोमल भावनाओं के साथ किसी रिश्ते में जुड़ जाता है तो कुछ भी करने को, सहने को तैयार हो जाता है। 

जब दो विपरीत प्रवृति के लोग किसी रिश्ते में जुड़ जाते तो सबसे भयावह स्थिति उत्पन्न होती है। दिल और दिमाग का तालमेल संभव नहीं हो पाता। भावुक इंसान चूंकि भावनाओं से जुड़ता है इस लिए रिश्ते में तमाम समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। दिमाग वाला बिना नफा नुकसान देखे कोई काम नहीं करता। नतीजा भावुक इंसान पीड़ा ,अवसाद में घिरने लगता है। लेकिन तमाम दुख ,दर्द ,अवहेलना , अपमान सहने के बाद भी उस रिश्ते को बचाने में लगा रहता है और दूसरे इंसान को कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

टॉक्सिक रिलेशनशिप आखिर क्या है इसे कैसे पहचाना जाए? अगर किसी रिश्ते में आपको लगातार पीड़ा ,तिरस्कार , अवहेलना मिल रही हो बेवजह प्रताड़ना ,गलत साबित किया जा रहा हो ,रिश्ते में खुशी से ज्यादा दुख ने पाँव पसार लिए हों तो निःसंदेह आप गलत रिश्ते में जुड़े हैं। ऐसे रिश्ते में दूसरा व्यक्ति नकारात्मक रूप से आपको प्रभावित करके नियंत्रित करने की कोशिश करता है। इसके लिए अनैतिक बर्ताव, कटु बाणी ,आरोप प्रत्यारोप आम बातें हो जाती हैं। जबकि दूसरा इंसान कुछ बीते अच्छे दिनों की यादें समेटे बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है। नतीजतन दोनों ही इस चीज़ के अभ्यस्त हो जाते हैं।

अगर हम कहें कि टॉक्सिक रिलेशन जुए के खेल जैसा होता है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जैसे जुए में दस बार हारने के बाद भी जीतने की उम्मीद बनी रहती है। वैसे ही भावनाओं से जुड़ा इंसान बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है और एक समय ऐसा आ जाता है कि ये उसकी आदत बन जाती है और मर मर कर जीना उसकी नियति ।

   जीवन हमें एक बार ही मिलता है।कोशिश करें इसे हम उन लोगों के साथ गुजारें जिन्हें हमारी परवाह है। जिनको हमारे सुख दुख से फ़र्क पड़ता हो। महज भावुकता में बह कर ऐसे किसी रिश्ते को ना ढोयें जो आपको कष्ट देना ही जानता हो । 

टूटने ,बिखरने का भय त्याग कर अपने स्वभाव अनुसार रिश्तों में जुड़िए फिर देखिए जीवन कितना खूबसूरत है। बस इस बदलाव के लिए अपने अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति पैदा करनी होगी।

  • निवेदिता शुक्ला
  • इटावा , उत्तर प्रदेश

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युवा नवसंकल्प

उठो, जागो युवाओं लेना है तुम्हें आज …एक संकल्प।

वो धरती जिसने बरसों सहा है गुलामी को,

अपने रक्त से रचे हैं जिसने तमाम स्वतंत्रता चिह्न,

अब देना है तुम्हें नव रूप, फिर से उसी धरा को।

पालन करना है तुम्हें अपने कर्तव्यों का ।

जागो युवाओं! व्रत लो, रचोगे नया इतिहास तुम।

तुम्हें चलना है उन राहों पर जिन्हें दिखाया था स्वामी विवेकानंद और गांधी ने,

एक नई ज्योति जगाई थी उन्होंने आजादी की ,

और बंधाया अटूट विश्वास दिल में,

लेकिन युवाओं अब नई चुनौती है इस नए युग में

विकास,शिक्षा और नवोद्योग की।

तुम्हारे हौसलों के पंख ले जाएंगे देश को ऊँचाइयों तक,

गाँव-गाँव और शहर-शहर जगमगाओगे तुम एक सबेरा शिक्षा का।

धरती की छाती पर लहराओगे फूल उत्सवों के, किसान बन कर।

थमने मत दे तू चल उठ आगे बढ़।

थाम ले मशाल अपने हाथों में,

तब चमकेगा तेरा नाम तकनीक, कला और विज्ञान के क्षेत्र में

उठो युवाओं लेना है एक और संकल्प तुम्हें

तुम बनोगे पहिए विकास की गाड़ी के,

तोड़ दोगे तुम भ्रष्टाचार की दीवार को,

बोओगे नए बीज नवाचार के,

और लहराओगे तुम एकता के ध्वज को विविधता के बीच।

युवाओं, तुम ही तो हो केंद्र बिन्दु राष्ट्र की उन्नति का,

ऐसा बिन्दु जिसके आसपास कोई बाधा न हो

न जाति,न धर्म और न ही भाषा ।

उठो युवाओं तुम्हें संभालना है अपने पर्यावरण को,

अपनी स्वच्छ हवाएँ,जल और हरियाली को।

तुम्हीं बनाओगे उन्नति का एक उजला सा वन।

युवाओं मुझे पता है हिलोरें लेती हैं सैनिकों की शौर्य गाथा, तुम्हारे लहू में,

लेकिन नहीं भूलोगे तुम शांति, समृद्धि और अपना उद्देश्य।

युवाओं तुम्हे बनाना है महाशक्ति इस धरा को,

तुम्हीं दे पाओगे सब को न्याय, समृद्धि, साझा तरक्की में सबका हिस्सा।

उठो युवाओं तुम्हारी राह देखता है ये देश,

प्रतिस्पर्धा के युग में तुम जलाओ एक मशाल नव युग की।

नव संकल्प लो युवाओं,राष्ट्र की उन्नति में कर दो न्योछावर अपना सर्वस्व,

क्योकि देश भक्ति ना रहे मोहताज किसी भाषा की, किसी जाति की और न ही धर्म की।

युवाओं तुम्हारा जोश लहराएगा तिरंगा बन कर अनंत अकाश में, हमेशा हमेशा।

~ प्रो. प्रभात द्विवेदी राजकीय महाविद्यालय

चिन्यालीसौंड, उत्तरकाशी उत्तराखण्ड

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तीन दशक की जद्दोजहद का अंत, सुदामा को मिला मेहनत का पूरा हक

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर 19 अगस्त जिलाधिकारी की सक्रियता से हुआ 1996 से लंबित प्रकरण का समाधान, 29 साल बाद मिली जीपीएफ की राशि*

लगभग तीन दशक की लंबी जद्दोजहद, धैर्य और उम्मीद के बाद सेवानिवृत्त संग्रह सेवक सुदामा प्रसाद को आखिरकार उनकी मेहनत की कमाई मिल गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की सक्रिय पहल और लगातार निगरानी के चलते सामान्य भविष्य निधि का वह भुगतान संभव हुआ, जो वर्ष 1996 से अटका था। आखिरकार ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये सुदामा के खाते में पहुंच गए।

फरवरी की एक सुबह जिलाधिकारी कार्यालय में जनता दर्शन चल रहा था। अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे लोगों की भीड़ में एक बुज़ुर्ग भी खड़े थे। साधारण पैंट-शर्ट पहने, हाथ में पुरानी फाइल और थैला थामे, चेहरे पर धैर्य और आंखों में उम्मीद की चमक। यह थे 89 वर्षीय सुदामा प्रसाद, जो उनतीस वर्षों से अपनी मेहनत की पाई-पाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे थे। कितने ही दफ्तरों के चक्कर, कितनी ही बार फाइलें चलीं और लौटीं, अधिकारी बदलते गए, नियमावली के पन्ने पलटते रहे लेकिन मेहनत की कमाई तक पहुंच नहीं बन सकी। खास बात यह रही कि उन्होंने कभी न्यायालय का दरवाज़ा नहीं खटखटाया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखा।

प्रकरण की जड़ सेवानिवृत्ति अभिलेखों में छूटे एक महत्वपूर्ण तथ्य में छिपी थी। पारिवारिक न्यायालय बांदा ने सुदामा को पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन 1995 में उनकी पत्नी का निधन हो चुका था। यह जानकारी अभिलेखों में दर्ज न हो पाने से भुगतान वर्षों तक थमा रहा।

जनता दर्शन में जब उन्होंने जिलाधिकारी के सामने अपनी व्यथा रखी तो जिलाधिकारी ने तुरंत गंभीरता से सुनवाई की। वर्षों पुरानी फाइलें मंगाई गईं, रिकॉर्ड खंगाला गया। डीएम ने निर्देश दिया कि अब इस मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए। जनपद बांदा से आवश्यक अभिलेख मंगाए गए। इसके बाद कोषाधिकारी ने रिपोर्ट दी कि खाते में जमा राशि पर चालू वित्तीय वर्ष तक ब्याज जोड़कर पूरा भुगतान अनुमन्य है और अब तक कोई आंशिक भुगतान भी नहीं हुआ है। इसके बाद उपजिलाधिकारी सदर की जांच रिपोर्ट में ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये देय पाए गए।

सामान्य भविष्य निधि नियमावली 1985 के तहत आदेश जारी हुए और जिलाधिकारी ने प्रगति पर स्वयं नज़र रखी। आखिरकार 18 अगस्त को वह दिन आया जब भुगतान सुदामा प्रसाद खाते में पहुंच गया। लगभग तीस साल की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद उन्हें अपनी मेहनत का हक मिला।

राशि खाते में आने की ख़बर मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं लेकिन होंठों पर सुकून की मुस्कान थी। उन्होंने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी का आभार व्यक्त करते हुए बस इतना कहा कि देर है, पर अंधेर नहीं। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह रकम केवल पैसे भर नहीं थी, बल्कि आत्मसम्मान और विश्वास की वापसी है।

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इस स्वतंत्रता दिवस ज़ी सिनेमा में देखिए `आज़ादी एक्सप्रेस’ के साथ. जाट, द साबरमती रिपोर्ट और द केरल स्टोरी का प्रीमियर

भारतीय स्वरूप संवाददाता मुंबई, अगस्त 2025: इस स्वतंत्रता दिवस, ज़ी सिनेमा लेकर आ रहा है तीन ऐसी कहानियां, जो सच्चाई, हिम्मत और जज़्बे से भरी हैं। ये तीनों प्रीमियर सुबह 10 बजे से एक के बाद एक लगातार दिखाए जाएंगे। सबसे पहले बात करते हैं ‘जाट’ की, जिसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर दोपहर 12:30 बजे होगा। इसमें सनी देओल ‘गदर 2’ की बड़ी कामयाबी के बाद एक और दमदार रोल में लौटे हैं। इस फिल्म में सनी एक फौजी का किरदार निभा रहे हैं, जो लोगों की मदद के लिए ज़ुल्म के ख़िलाफ डटकर खड़े होते हैं और अपनी जान की परवाह किए बिना सबकी हिफ़ाज़त करते हैं। इसके साथ ही लाइनअप में है ‘द साबरमती रिपोर्ट’ – सच की तलाश करने वाली एक बेहद दिलचस्प थ्रिलर जो सुबह 10 बजे शुरू होगी और फिर शाम 3:30 बजे आएगी ‘द केरल स्टोरी’ – एक दिल झकझोर देने वाली कहानी, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। देश की मिट्टी से जुड़ी ये तीनों कहानियां, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिंदुस्तान के सच्चे जज़्बे को दर्शाती हैं।

सनी देओल की दमदार ‘ढाई किलो का हाथ’ वाली परफॉर्मेंस देखने के लिए तैयार हो जाइए दोपहर 12:30 बजे, फ़िल्म ‘जाट’ में। ये सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है बल्कि ये उस इंसान की कहानी है जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल देता है। सनी का किरदार सच्चा, निडर और मदद करने वाला है जो बड़ी से बड़ी मुश्किल से टकराता है ताकि देशवासियों की हिफ़ाज़त कर सके। इस फिल्म में सनी देओल ने अपने सारे एक्शन सीन खुद किए हैं, और हर सीन में उनका असली जोश नज़र आता है, और वो फिर याद दिलाते हैं कि क्यों उन्हें पर्दे का सबसे वजनदार हीरो कहा जाता है।

सुबह 10 बजे आएगी ‘द साबरमती रिपोर्ट’, जिसमें हैं विक्रांत मैसी। ये कहानी है उस हादसे की जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था – गोधरा ट्रेन में आग की घटना। ये एक पत्रकार की लड़ाई है, जो हर हाल में सच तक पहुंचना चाहता है। फ़िल्म की कहानी तेज़, असरदार और सच्चे जज़्बातों से भरी है – जो बताती है कि आज़ादी का मतलब सिर्फ़ बोलने की नहीं, सच जानने की भी आज़ादी है; झूठ और फरेब से आज़ादी!

शाम 3:30 बजे देखिए ‘द केरल स्टोरी’ – वो फ़िल्म जिसने दो नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए हैं और जिसे खूब सराहा गया है। इसमें अदा शर्मा ने एक ऐसी लड़की का रोल निभाया है, जो धोखे से आतंक के जाल में फंस जाती है। लेकिन वो हार नहीं मानती और हिम्मत के साथ उस अंधेरे से बाहर निकलने की लड़ाई लड़ती है। ये कहानी है एक लड़की की जिद और हौसले की जो अपनी ज़िंदगी को फिर से जीने की कोशिश करती है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

तो इस 15 अगस्त, अपना दिन कीजिए ज़ी सिनेमा के नाम! देखिए तीन ज़बर्दस्त कहानियां जो सच्चाई, हिम्मत और इंसानियत को सलाम करती हैं – ‘द साबरमती रिपोर्ट’, ‘जाट’ और ‘द केरल स्टोरी’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ, सिर्फ़ ज़ी सिनेमा पर।

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तर्कशीलता का मतलब नास्तिक होना नहीं है

किसी भी बात को तर्क के जरिए स्थापित किया जा सकता है और तर्कों द्वारा ही खंडित भी किया जा सकता है। हमारे देश में से बहुत से ऐसे मुद्दे रहे हैं जिन को तर्कों द्वारा स्थापित करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी है और लोगों द्वारा बहिष्कार भी सहन करना पड़ा है। धर्म के उन्मादी लोगों को समझा पाना बहुत कठिन होता है क्योंकि समाज में फैली कुरीतियों में या तो उनके स्वार्थ सिद्ध होते हैं या फिर एक भेड़ चाल जो सदियों से चली आ रही है  जिसकी वजह से वो उस लीक से हटना पसंद नहीं करते हैं।
हमारे यहाँ सती प्रथा जो 500 ईसा पूर्व शुरू हुई और 1829 में इसे लॉर्ड विलियम बैंटिक ने इसे गैर कानूनी घोषित कर दिया था। इस प्रथा को खत्म करने में राजा राममोहन राय का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। इसी तरह बाल विवाह का इतिहास भी बहुत पुराना है लेकिन समय के साथ इसके नियम बदलते रहे और इस प्रथा का विरोध भी राजाराम मोहन राय ने प्रमुखता से किया।1929 में बाल विवाह विरोध कानून लागू हुआ। इसी तरह विधवा विवाह शुरू करने में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का योगदान रहा। ईश्वर चंद्र विद्यासागर  ने विधवा विवाह अधिनियम के लिए आवाज उठाई। पर्दा प्रथा के लिए भी कई समाज सुधारकों ने आवाज उठाई। स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में भी सावित्रीबाई फुले, भीमराव अंबेडकर ने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलवाया। सावित्री बाई फुले को भी सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने तर्क के साथ समाज में अपनी बात रखने के साथ-साथ उसे लोगों के जेहन में स्थापित भी किया।
अब कुछ मसले और है जो विवाद के तौर पर उभरने लगे हैं। सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल विवाह, स्त्री शिक्षा ऐसे कई मसले रहे हैं जिन्हें सबसे पहले तर्कों द्वारा ही खत्म किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन कुरीतियों को धार्मिक मान्यता प्राप्त थी। अब धीरे-धीरे लड़कियों में होने वाले मासिक चक्र को लेकर उनके विचारों में परिवर्तन लक्षित हो रहा है। उनका मानना है कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। एक क्रिया जो हर महीने होती है इसके लिए उन्हें अपवित्र मानना या मंदिर में प्रवेश ना करने देना, पूजा पाठ से वंचित रखना उन्हें सही नहीं लगता। यदि स्वास्थ्य की नजर से देखा जाए तो यह दिन आराम करने के लिए होते हैं क्योंकि इन दिनों लड़कियों+महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि बदलते वक्त के साथ बहुत बदलाव आया है लेकिन सबकी अपनी सुविधानुसार बदलाव आया है और इन आराम के दिनों का महत्व भी खत्म हो गया है। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस सभी जगह महिलाएं अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करती है और अब आराम जैसा कुछ भी नहीं रह गया है। घर में महिलाएं सभी काम बहुत नॉर्मल तरीके से करती है सिर्फ पूजा पाठ नहीं करती। तो फिर पूजा पाठ में अड़चन क्यों? मंदिर में प्रवेश वर्जित क्यों? क्यों अभी भी कुछ जगहों पर इन दिनों में घर के कामों से भी वंचित रखा जाता है?
अभी भी धार्मिक कर्मकांडों का भय बहुत ज्यादा है और हाल के समय में तो कुछ ज्यादा ही है। यदि बाहरी देशों में देखें तो इस मसले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाता है, एक स्वाभाविक शारीरिक क्रिया के तौर पर ही देखा जाता है। सभी देशों में इस मसले पर अपने कुछ रिवाज हैं लेकिन बहुत से देश इन कुरीतियों से बाहर निकल चुके हैं। मासिक धर्म को लेकर वहाँ इतनी संकीर्णता नहीं है।
सवाल हमारे यहाँ गहरी पैठ चुकी इस कुरीति पर है? क्या हम भविष्य में इन कुरीतियों से आगे बढ़ पाएंगे? यह सवाल अब लड़कियों के मन में पनपने लगा है। ~प्रियंका वर्मा महेश्वरी 

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पोर्टल सम्बन्धी समस्याओं के समाधान के लिए आरएनआई राज्यवार वर्कशाप आयोजित करे – के. डी. चन्दोला

भारतीय स्वरूप संवाददाता देहरादून विगत दिवस हिन्दी भवन देहरादून में एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया की उत्तराखंड इकाई द्वारा ’’छोटे एवं मंझोले समाचार पत्रों के लिए बढ़ती चुनौतियां’’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । गोष्ठी का शुभारंभ डा. नीता कुकरेती जी, पूर्व उपाध्यक्ष, हिन्दी साहित्य समिति देहरादून द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से किया गया । अतिथियों के स्वागत उपरांत विषय पर चर्चा प्रारम्भ करते हुए एसोसियेशन की प्रदेश अध्यक्ष निशा रस्तोगी ने कहा कि आरएनआई द्वारा समाचार पत्रों का पंजीकरण व अन्य सभी कार्य पोर्टल के माध्यम से करने की व्यवस्था प्रारम्भ की गई है परन्तु पोर्टल में कमियां होने के कारण समाचार पत्र प्रकाशकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सम्पादक दैनिक शिखर संदेश पर्वतीय सम्पादक परिषद के अध्यक्ष एवं एसोसियेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री आई.पी. उनियाल ने भी स्माल एवं मीडियम समाचार पत्रों के संचालन में आने वाली कठिनाईयों का विस्तार से उल्लेख करते हुए उनके निवारण हेतु प्रयास करने की अपेक्षा की । वरिष्ठ पत्रकार श्री इन्द्रदेव रतूड़ी ने भी प्रकाशकों के सम्मुख आने वाली समस्याओं का उल्लेख करते हुए अनुरोध किया कि पत्रकारों के सभी संगठनों को संयुक्त रूप से संघर्ष कर समस्याओं का निवारण करने के प्रयास करने चाहिएं । वरिष्ठ पत्रकार एवं देवभूमि पत्रकार यूनियन उत्तराखंड के प्रदेश महामंत्री श्री बी0डी0शर्मा ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि आरएनआई द्वारा छोटे व मंझोले समाचार पत्रों का गला दबाने का निरन्तर प्रयास किया जा रहा है। एक ओर इलैक्ट्रोनिक चैनल, पोर्टल एवं सोशल मीडिया के कारण पहले ही छोटे व मंझोले समाचार पत्रों के प्रकाशन में कठिनाइयां बढ़ रही हैं दूसरी ओर आरएनआई द्वारा दिन प्रतिदिन नये नये प्रतिबन्ध लगाकर छोटे समाचार पत्रों के समक्ष परेशानियां खड़ी की जा रही हैं। कार्यक्रम में अध्यक्षीय सम्बोधन करते हुए एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के0डी0चन्दोला द्वारा कहा गया कि आरएनआई के पोर्टल में अनेक कमियां होने के कारण सभी प्रकाशकों के समक्ष कठिनाइयां आ रही है जिसके कारण उन्होंने आरएनआई से अनुरोध किया है कि पोर्टल के संचालन हेतु प्रदेश स्तर पर वर्कशाप का आयोजन कर प्रकाशकों, सम्पादकों को उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए ताकि वे अन्य को भी जानकारी देकर कार्यो का सम्पादन कुशलता से कर सकें ।

 कार्यक्रम में श्री राजेश डोभाल जी ने राष्ट्रभक्ति का गीत प्रस्तुत किया, श्री बी0एस0नेगी जी द्वारा भी अपने विचार प्रस्तुत किये गये । कार्यक्रम के समापन की घोषणा करते हुए एसोसियेशन के प्रान्तीय महामंत्री एस0सी0भटनागर ने सभी अतिथियों व सभागार में उपस्थित समस्त सम्मानित अतिथियों का आभार व्यक्त किया । अन्त में गुजरात में हुए विमान हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए समस्त दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु प्रार्थना की गई। साथ ही एसोसियेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री शिवचन्द अग्निहोत्री जी के माह अप्रैल 2025 में हुए निधन पर भी शोक प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की गई।

 कार्यक्रम में श्रीमति भगवती, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया, श्री आलोक अग्निहोत्री, कानपुर, हिन्दी साहित्य समिति के उपाध्यक्ष डा. राकेश बलूनी, हिन्दी साहित्य समिति के महामंत्री श्री हेमवतीनन्दन कुकरेती, श्री स्वपनिल सिन्हा, सविता आदि भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट काजल द्वारा किया गया ।

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