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टॉक्सिक रिलेशनशिप 

कहते हैं जब कोई इंसान प्रेम में होता है या कोमल भावनाओं के साथ किसी रिश्ते में जुड़ जाता है तो कुछ भी करने को, सहने को तैयार हो जाता है। 

जब दो विपरीत प्रवृति के लोग किसी रिश्ते में जुड़ जाते तो सबसे भयावह स्थिति उत्पन्न होती है। दिल और दिमाग का तालमेल संभव नहीं हो पाता। भावुक इंसान चूंकि भावनाओं से जुड़ता है इस लिए रिश्ते में तमाम समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। दिमाग वाला बिना नफा नुकसान देखे कोई काम नहीं करता। नतीजा भावुक इंसान पीड़ा ,अवसाद में घिरने लगता है। लेकिन तमाम दुख ,दर्द ,अवहेलना , अपमान सहने के बाद भी उस रिश्ते को बचाने में लगा रहता है और दूसरे इंसान को कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

टॉक्सिक रिलेशनशिप आखिर क्या है इसे कैसे पहचाना जाए? अगर किसी रिश्ते में आपको लगातार पीड़ा ,तिरस्कार , अवहेलना मिल रही हो बेवजह प्रताड़ना ,गलत साबित किया जा रहा हो ,रिश्ते में खुशी से ज्यादा दुख ने पाँव पसार लिए हों तो निःसंदेह आप गलत रिश्ते में जुड़े हैं। ऐसे रिश्ते में दूसरा व्यक्ति नकारात्मक रूप से आपको प्रभावित करके नियंत्रित करने की कोशिश करता है। इसके लिए अनैतिक बर्ताव, कटु बाणी ,आरोप प्रत्यारोप आम बातें हो जाती हैं। जबकि दूसरा इंसान कुछ बीते अच्छे दिनों की यादें समेटे बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है। नतीजतन दोनों ही इस चीज़ के अभ्यस्त हो जाते हैं।

अगर हम कहें कि टॉक्सिक रिलेशन जुए के खेल जैसा होता है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। जैसे जुए में दस बार हारने के बाद भी जीतने की उम्मीद बनी रहती है। वैसे ही भावनाओं से जुड़ा इंसान बदलाव की उम्मीद में सब सहता रहता है और एक समय ऐसा आ जाता है कि ये उसकी आदत बन जाती है और मर मर कर जीना उसकी नियति ।

   जीवन हमें एक बार ही मिलता है।कोशिश करें इसे हम उन लोगों के साथ गुजारें जिन्हें हमारी परवाह है। जिनको हमारे सुख दुख से फ़र्क पड़ता हो। महज भावुकता में बह कर ऐसे किसी रिश्ते को ना ढोयें जो आपको कष्ट देना ही जानता हो । 

टूटने ,बिखरने का भय त्याग कर अपने स्वभाव अनुसार रिश्तों में जुड़िए फिर देखिए जीवन कितना खूबसूरत है। बस इस बदलाव के लिए अपने अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति पैदा करनी होगी।

  • निवेदिता शुक्ला
  • इटावा , उत्तर प्रदेश

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युवा नवसंकल्प

उठो, जागो युवाओं लेना है तुम्हें आज …एक संकल्प।

वो धरती जिसने बरसों सहा है गुलामी को,

अपने रक्त से रचे हैं जिसने तमाम स्वतंत्रता चिह्न,

अब देना है तुम्हें नव रूप, फिर से उसी धरा को।

पालन करना है तुम्हें अपने कर्तव्यों का ।

जागो युवाओं! व्रत लो, रचोगे नया इतिहास तुम।

तुम्हें चलना है उन राहों पर जिन्हें दिखाया था स्वामी विवेकानंद और गांधी ने,

एक नई ज्योति जगाई थी उन्होंने आजादी की ,

और बंधाया अटूट विश्वास दिल में,

लेकिन युवाओं अब नई चुनौती है इस नए युग में

विकास,शिक्षा और नवोद्योग की।

तुम्हारे हौसलों के पंख ले जाएंगे देश को ऊँचाइयों तक,

गाँव-गाँव और शहर-शहर जगमगाओगे तुम एक सबेरा शिक्षा का।

धरती की छाती पर लहराओगे फूल उत्सवों के, किसान बन कर।

थमने मत दे तू चल उठ आगे बढ़।

थाम ले मशाल अपने हाथों में,

तब चमकेगा तेरा नाम तकनीक, कला और विज्ञान के क्षेत्र में

उठो युवाओं लेना है एक और संकल्प तुम्हें

तुम बनोगे पहिए विकास की गाड़ी के,

तोड़ दोगे तुम भ्रष्टाचार की दीवार को,

बोओगे नए बीज नवाचार के,

और लहराओगे तुम एकता के ध्वज को विविधता के बीच।

युवाओं, तुम ही तो हो केंद्र बिन्दु राष्ट्र की उन्नति का,

ऐसा बिन्दु जिसके आसपास कोई बाधा न हो

न जाति,न धर्म और न ही भाषा ।

उठो युवाओं तुम्हें संभालना है अपने पर्यावरण को,

अपनी स्वच्छ हवाएँ,जल और हरियाली को।

तुम्हीं बनाओगे उन्नति का एक उजला सा वन।

युवाओं मुझे पता है हिलोरें लेती हैं सैनिकों की शौर्य गाथा, तुम्हारे लहू में,

लेकिन नहीं भूलोगे तुम शांति, समृद्धि और अपना उद्देश्य।

युवाओं तुम्हे बनाना है महाशक्ति इस धरा को,

तुम्हीं दे पाओगे सब को न्याय, समृद्धि, साझा तरक्की में सबका हिस्सा।

उठो युवाओं तुम्हारी राह देखता है ये देश,

प्रतिस्पर्धा के युग में तुम जलाओ एक मशाल नव युग की।

नव संकल्प लो युवाओं,राष्ट्र की उन्नति में कर दो न्योछावर अपना सर्वस्व,

क्योकि देश भक्ति ना रहे मोहताज किसी भाषा की, किसी जाति की और न ही धर्म की।

युवाओं तुम्हारा जोश लहराएगा तिरंगा बन कर अनंत अकाश में, हमेशा हमेशा।

~ प्रो. प्रभात द्विवेदी राजकीय महाविद्यालय

चिन्यालीसौंड, उत्तरकाशी उत्तराखण्ड

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तीन दशक की जद्दोजहद का अंत, सुदामा को मिला मेहनत का पूरा हक

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर 19 अगस्त जिलाधिकारी की सक्रियता से हुआ 1996 से लंबित प्रकरण का समाधान, 29 साल बाद मिली जीपीएफ की राशि*

लगभग तीन दशक की लंबी जद्दोजहद, धैर्य और उम्मीद के बाद सेवानिवृत्त संग्रह सेवक सुदामा प्रसाद को आखिरकार उनकी मेहनत की कमाई मिल गई। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की सक्रिय पहल और लगातार निगरानी के चलते सामान्य भविष्य निधि का वह भुगतान संभव हुआ, जो वर्ष 1996 से अटका था। आखिरकार ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये सुदामा के खाते में पहुंच गए।

फरवरी की एक सुबह जिलाधिकारी कार्यालय में जनता दर्शन चल रहा था। अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे लोगों की भीड़ में एक बुज़ुर्ग भी खड़े थे। साधारण पैंट-शर्ट पहने, हाथ में पुरानी फाइल और थैला थामे, चेहरे पर धैर्य और आंखों में उम्मीद की चमक। यह थे 89 वर्षीय सुदामा प्रसाद, जो उनतीस वर्षों से अपनी मेहनत की पाई-पाई पाने के लिए दर-दर भटक रहे थे। कितने ही दफ्तरों के चक्कर, कितनी ही बार फाइलें चलीं और लौटीं, अधिकारी बदलते गए, नियमावली के पन्ने पलटते रहे लेकिन मेहनत की कमाई तक पहुंच नहीं बन सकी। खास बात यह रही कि उन्होंने कभी न्यायालय का दरवाज़ा नहीं खटखटाया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखा।

प्रकरण की जड़ सेवानिवृत्ति अभिलेखों में छूटे एक महत्वपूर्ण तथ्य में छिपी थी। पारिवारिक न्यायालय बांदा ने सुदामा को पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन 1995 में उनकी पत्नी का निधन हो चुका था। यह जानकारी अभिलेखों में दर्ज न हो पाने से भुगतान वर्षों तक थमा रहा।

जनता दर्शन में जब उन्होंने जिलाधिकारी के सामने अपनी व्यथा रखी तो जिलाधिकारी ने तुरंत गंभीरता से सुनवाई की। वर्षों पुरानी फाइलें मंगाई गईं, रिकॉर्ड खंगाला गया। डीएम ने निर्देश दिया कि अब इस मामले में और देरी नहीं होनी चाहिए। जनपद बांदा से आवश्यक अभिलेख मंगाए गए। इसके बाद कोषाधिकारी ने रिपोर्ट दी कि खाते में जमा राशि पर चालू वित्तीय वर्ष तक ब्याज जोड़कर पूरा भुगतान अनुमन्य है और अब तक कोई आंशिक भुगतान भी नहीं हुआ है। इसके बाद उपजिलाधिकारी सदर की जांच रिपोर्ट में ब्याज सहित तीन लाख सात हजार रुपये देय पाए गए।

सामान्य भविष्य निधि नियमावली 1985 के तहत आदेश जारी हुए और जिलाधिकारी ने प्रगति पर स्वयं नज़र रखी। आखिरकार 18 अगस्त को वह दिन आया जब भुगतान सुदामा प्रसाद खाते में पहुंच गया। लगभग तीस साल की प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद उन्हें अपनी मेहनत का हक मिला।

राशि खाते में आने की ख़बर मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं लेकिन होंठों पर सुकून की मुस्कान थी। उन्होंने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी का आभार व्यक्त करते हुए बस इतना कहा कि देर है, पर अंधेर नहीं। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह रकम केवल पैसे भर नहीं थी, बल्कि आत्मसम्मान और विश्वास की वापसी है।

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इस स्वतंत्रता दिवस ज़ी सिनेमा में देखिए `आज़ादी एक्सप्रेस’ के साथ. जाट, द साबरमती रिपोर्ट और द केरल स्टोरी का प्रीमियर

भारतीय स्वरूप संवाददाता मुंबई, अगस्त 2025: इस स्वतंत्रता दिवस, ज़ी सिनेमा लेकर आ रहा है तीन ऐसी कहानियां, जो सच्चाई, हिम्मत और जज़्बे से भरी हैं। ये तीनों प्रीमियर सुबह 10 बजे से एक के बाद एक लगातार दिखाए जाएंगे। सबसे पहले बात करते हैं ‘जाट’ की, जिसका वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर दोपहर 12:30 बजे होगा। इसमें सनी देओल ‘गदर 2’ की बड़ी कामयाबी के बाद एक और दमदार रोल में लौटे हैं। इस फिल्म में सनी एक फौजी का किरदार निभा रहे हैं, जो लोगों की मदद के लिए ज़ुल्म के ख़िलाफ डटकर खड़े होते हैं और अपनी जान की परवाह किए बिना सबकी हिफ़ाज़त करते हैं। इसके साथ ही लाइनअप में है ‘द साबरमती रिपोर्ट’ – सच की तलाश करने वाली एक बेहद दिलचस्प थ्रिलर जो सुबह 10 बजे शुरू होगी और फिर शाम 3:30 बजे आएगी ‘द केरल स्टोरी’ – एक दिल झकझोर देने वाली कहानी, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। देश की मिट्टी से जुड़ी ये तीनों कहानियां, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिंदुस्तान के सच्चे जज़्बे को दर्शाती हैं।

सनी देओल की दमदार ‘ढाई किलो का हाथ’ वाली परफॉर्मेंस देखने के लिए तैयार हो जाइए दोपहर 12:30 बजे, फ़िल्म ‘जाट’ में। ये सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं है बल्कि ये उस इंसान की कहानी है जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल देता है। सनी का किरदार सच्चा, निडर और मदद करने वाला है जो बड़ी से बड़ी मुश्किल से टकराता है ताकि देशवासियों की हिफ़ाज़त कर सके। इस फिल्म में सनी देओल ने अपने सारे एक्शन सीन खुद किए हैं, और हर सीन में उनका असली जोश नज़र आता है, और वो फिर याद दिलाते हैं कि क्यों उन्हें पर्दे का सबसे वजनदार हीरो कहा जाता है।

सुबह 10 बजे आएगी ‘द साबरमती रिपोर्ट’, जिसमें हैं विक्रांत मैसी। ये कहानी है उस हादसे की जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था – गोधरा ट्रेन में आग की घटना। ये एक पत्रकार की लड़ाई है, जो हर हाल में सच तक पहुंचना चाहता है। फ़िल्म की कहानी तेज़, असरदार और सच्चे जज़्बातों से भरी है – जो बताती है कि आज़ादी का मतलब सिर्फ़ बोलने की नहीं, सच जानने की भी आज़ादी है; झूठ और फरेब से आज़ादी!

शाम 3:30 बजे देखिए ‘द केरल स्टोरी’ – वो फ़िल्म जिसने दो नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए हैं और जिसे खूब सराहा गया है। इसमें अदा शर्मा ने एक ऐसी लड़की का रोल निभाया है, जो धोखे से आतंक के जाल में फंस जाती है। लेकिन वो हार नहीं मानती और हिम्मत के साथ उस अंधेरे से बाहर निकलने की लड़ाई लड़ती है। ये कहानी है एक लड़की की जिद और हौसले की जो अपनी ज़िंदगी को फिर से जीने की कोशिश करती है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

तो इस 15 अगस्त, अपना दिन कीजिए ज़ी सिनेमा के नाम! देखिए तीन ज़बर्दस्त कहानियां जो सच्चाई, हिम्मत और इंसानियत को सलाम करती हैं – ‘द साबरमती रिपोर्ट’, ‘जाट’ और ‘द केरल स्टोरी’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के साथ, सिर्फ़ ज़ी सिनेमा पर।

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तर्कशीलता का मतलब नास्तिक होना नहीं है

किसी भी बात को तर्क के जरिए स्थापित किया जा सकता है और तर्कों द्वारा ही खंडित भी किया जा सकता है। हमारे देश में से बहुत से ऐसे मुद्दे रहे हैं जिन को तर्कों द्वारा स्थापित करने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी है और लोगों द्वारा बहिष्कार भी सहन करना पड़ा है। धर्म के उन्मादी लोगों को समझा पाना बहुत कठिन होता है क्योंकि समाज में फैली कुरीतियों में या तो उनके स्वार्थ सिद्ध होते हैं या फिर एक भेड़ चाल जो सदियों से चली आ रही है  जिसकी वजह से वो उस लीक से हटना पसंद नहीं करते हैं।
हमारे यहाँ सती प्रथा जो 500 ईसा पूर्व शुरू हुई और 1829 में इसे लॉर्ड विलियम बैंटिक ने इसे गैर कानूनी घोषित कर दिया था। इस प्रथा को खत्म करने में राजा राममोहन राय का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। इसी तरह बाल विवाह का इतिहास भी बहुत पुराना है लेकिन समय के साथ इसके नियम बदलते रहे और इस प्रथा का विरोध भी राजाराम मोहन राय ने प्रमुखता से किया।1929 में बाल विवाह विरोध कानून लागू हुआ। इसी तरह विधवा विवाह शुरू करने में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का योगदान रहा। ईश्वर चंद्र विद्यासागर  ने विधवा विवाह अधिनियम के लिए आवाज उठाई। पर्दा प्रथा के लिए भी कई समाज सुधारकों ने आवाज उठाई। स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में भी सावित्रीबाई फुले, भीमराव अंबेडकर ने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलवाया। सावित्री बाई फुले को भी सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने तर्क के साथ समाज में अपनी बात रखने के साथ-साथ उसे लोगों के जेहन में स्थापित भी किया।
अब कुछ मसले और है जो विवाद के तौर पर उभरने लगे हैं। सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल विवाह, स्त्री शिक्षा ऐसे कई मसले रहे हैं जिन्हें सबसे पहले तर्कों द्वारा ही खत्म किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन कुरीतियों को धार्मिक मान्यता प्राप्त थी। अब धीरे-धीरे लड़कियों में होने वाले मासिक चक्र को लेकर उनके विचारों में परिवर्तन लक्षित हो रहा है। उनका मानना है कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। एक क्रिया जो हर महीने होती है इसके लिए उन्हें अपवित्र मानना या मंदिर में प्रवेश ना करने देना, पूजा पाठ से वंचित रखना उन्हें सही नहीं लगता। यदि स्वास्थ्य की नजर से देखा जाए तो यह दिन आराम करने के लिए होते हैं क्योंकि इन दिनों लड़कियों+महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि बदलते वक्त के साथ बहुत बदलाव आया है लेकिन सबकी अपनी सुविधानुसार बदलाव आया है और इन आराम के दिनों का महत्व भी खत्म हो गया है। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस सभी जगह महिलाएं अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करती है और अब आराम जैसा कुछ भी नहीं रह गया है। घर में महिलाएं सभी काम बहुत नॉर्मल तरीके से करती है सिर्फ पूजा पाठ नहीं करती। तो फिर पूजा पाठ में अड़चन क्यों? मंदिर में प्रवेश वर्जित क्यों? क्यों अभी भी कुछ जगहों पर इन दिनों में घर के कामों से भी वंचित रखा जाता है?
अभी भी धार्मिक कर्मकांडों का भय बहुत ज्यादा है और हाल के समय में तो कुछ ज्यादा ही है। यदि बाहरी देशों में देखें तो इस मसले को ज्यादा तूल नहीं दिया जाता है, एक स्वाभाविक शारीरिक क्रिया के तौर पर ही देखा जाता है। सभी देशों में इस मसले पर अपने कुछ रिवाज हैं लेकिन बहुत से देश इन कुरीतियों से बाहर निकल चुके हैं। मासिक धर्म को लेकर वहाँ इतनी संकीर्णता नहीं है।
सवाल हमारे यहाँ गहरी पैठ चुकी इस कुरीति पर है? क्या हम भविष्य में इन कुरीतियों से आगे बढ़ पाएंगे? यह सवाल अब लड़कियों के मन में पनपने लगा है। ~प्रियंका वर्मा महेश्वरी 

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पोर्टल सम्बन्धी समस्याओं के समाधान के लिए आरएनआई राज्यवार वर्कशाप आयोजित करे – के. डी. चन्दोला

भारतीय स्वरूप संवाददाता देहरादून विगत दिवस हिन्दी भवन देहरादून में एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया की उत्तराखंड इकाई द्वारा ’’छोटे एवं मंझोले समाचार पत्रों के लिए बढ़ती चुनौतियां’’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । गोष्ठी का शुभारंभ डा. नीता कुकरेती जी, पूर्व उपाध्यक्ष, हिन्दी साहित्य समिति देहरादून द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से किया गया । अतिथियों के स्वागत उपरांत विषय पर चर्चा प्रारम्भ करते हुए एसोसियेशन की प्रदेश अध्यक्ष निशा रस्तोगी ने कहा कि आरएनआई द्वारा समाचार पत्रों का पंजीकरण व अन्य सभी कार्य पोर्टल के माध्यम से करने की व्यवस्था प्रारम्भ की गई है परन्तु पोर्टल में कमियां होने के कारण समाचार पत्र प्रकाशकों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सम्पादक दैनिक शिखर संदेश पर्वतीय सम्पादक परिषद के अध्यक्ष एवं एसोसियेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री आई.पी. उनियाल ने भी स्माल एवं मीडियम समाचार पत्रों के संचालन में आने वाली कठिनाईयों का विस्तार से उल्लेख करते हुए उनके निवारण हेतु प्रयास करने की अपेक्षा की । वरिष्ठ पत्रकार श्री इन्द्रदेव रतूड़ी ने भी प्रकाशकों के सम्मुख आने वाली समस्याओं का उल्लेख करते हुए अनुरोध किया कि पत्रकारों के सभी संगठनों को संयुक्त रूप से संघर्ष कर समस्याओं का निवारण करने के प्रयास करने चाहिएं । वरिष्ठ पत्रकार एवं देवभूमि पत्रकार यूनियन उत्तराखंड के प्रदेश महामंत्री श्री बी0डी0शर्मा ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि आरएनआई द्वारा छोटे व मंझोले समाचार पत्रों का गला दबाने का निरन्तर प्रयास किया जा रहा है। एक ओर इलैक्ट्रोनिक चैनल, पोर्टल एवं सोशल मीडिया के कारण पहले ही छोटे व मंझोले समाचार पत्रों के प्रकाशन में कठिनाइयां बढ़ रही हैं दूसरी ओर आरएनआई द्वारा दिन प्रतिदिन नये नये प्रतिबन्ध लगाकर छोटे समाचार पत्रों के समक्ष परेशानियां खड़ी की जा रही हैं। कार्यक्रम में अध्यक्षीय सम्बोधन करते हुए एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के0डी0चन्दोला द्वारा कहा गया कि आरएनआई के पोर्टल में अनेक कमियां होने के कारण सभी प्रकाशकों के समक्ष कठिनाइयां आ रही है जिसके कारण उन्होंने आरएनआई से अनुरोध किया है कि पोर्टल के संचालन हेतु प्रदेश स्तर पर वर्कशाप का आयोजन कर प्रकाशकों, सम्पादकों को उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए ताकि वे अन्य को भी जानकारी देकर कार्यो का सम्पादन कुशलता से कर सकें ।

 कार्यक्रम में श्री राजेश डोभाल जी ने राष्ट्रभक्ति का गीत प्रस्तुत किया, श्री बी0एस0नेगी जी द्वारा भी अपने विचार प्रस्तुत किये गये । कार्यक्रम के समापन की घोषणा करते हुए एसोसियेशन के प्रान्तीय महामंत्री एस0सी0भटनागर ने सभी अतिथियों व सभागार में उपस्थित समस्त सम्मानित अतिथियों का आभार व्यक्त किया । अन्त में गुजरात में हुए विमान हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए समस्त दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु प्रार्थना की गई। साथ ही एसोसियेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री शिवचन्द अग्निहोत्री जी के माह अप्रैल 2025 में हुए निधन पर भी शोक प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की गई।

 कार्यक्रम में श्रीमति भगवती, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, एसोसियेशन आफ स्माल एण्ड मीडियम न्यूजपेपर्स आफ इंडिया, श्री आलोक अग्निहोत्री, कानपुर, हिन्दी साहित्य समिति के उपाध्यक्ष डा. राकेश बलूनी, हिन्दी साहित्य समिति के महामंत्री श्री हेमवतीनन्दन कुकरेती, श्री स्वपनिल सिन्हा, सविता आदि भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट काजल द्वारा किया गया ।

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सशक्त ग्रामीण समुदायों के बिना विकसित भारत संभव नहीं है: केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री श्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा है कि सशक्त ग्रामीण समुदायों के बिना विकसित भारत संभव नहीं है। गोवा के मीरमार में आज प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के अंतर्गत क्षेत्रीय ग्रामीण कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्री पेम्मासानी ने कहा कि जब हमारे गांव समृद्ध होंगे, तो भारत समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना अंत्योदय की सच्ची भावना – अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान- को मूर्त रूप देती है।

श्री पेम्मासानी ने कहा कि पीएमएवाई-ग्रामीण एक नीति से कहीं अधिक है, इस योजना के तहत उम्मीदें साकार हुई हैं, सपनों को मूर्त रूप दिया गया है और परिवारों को अनिश्चितता से सुरक्षा की ओर ले जाया गया है। उन्होंने कहा, “मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ घरों के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ, हमने पहले ही उल्लेखनीय प्रगति की है। आज तक, कुल 3.90 करोड़ लक्ष्य आवंटित किए गए हैं, 3.69 करोड़ घरों को मंजूरी दी गई है और 2.76 करोड़ घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। योजना के तहत बने घरों की प्रत्येक संख्या एक परिवार को शांति से नींद लेते हुए, बच्चों को सुरक्षित रूप से पढ़ते हुए और बुजुर्गों को सम्मान के साथ जीवन गुजारते हुए दर्शाती है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बदलाव केवल घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकार पीएमएवाई-जी को उज्ज्वला, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत जैसी प्रमुख योजनाओं के साथ जोड़ रही है, ताकि केवल घर ही नहीं, बल्कि समग्र आवास का निर्माण किया जा सके। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को स्वच्छ जल, स्वच्छता और खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन मिले।

श्री पेम्मासानी ने कहा कि सरकार की सोच ईंटों और गारे से कहीं आगे की है। राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से, हम ग्रामीण भारत में कुशल कारीगरों का एक समूह तैयार कर रहे हैं। यह अपने शुद्धतम रूप में आर्थिक सशक्तिकरण है। हमारा उद्देश्य नौकरियां पैदा करना, विशेषज्ञता का निर्माण करना और यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण युवा अपनी समृद्धि के लेखक स्वयं बनें।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम ग्रीन हाउसिंग की ओर जा रहे हैं,

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भारत ने विश्व पर्यावरण दिवस 2025 के अवसर पर ‘एक देश, एक मिशन: बंद करें प्लास्टिक प्रदूषण’ थीम के साथ वैश्विक मुहिम का नेतृत्व किया

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘एक देश, एक मिशन: बंद करें प्लास्टिक प्रदूषण’ के नारे के साथ विश्व पर्यावरण दिवस 2025 मनाया। कार्यक्रम में प्रसारित एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात को रेखांकित किया कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भारतीय संस्कृति का अंग है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण के मुद्दे की ओर ध्‍यान आकृष्‍ट होने से बहुत पहले ही भारत ने इससे निपटने की कार्रवाई शुरू कर दी थी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा और दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के सदस्यों, सिविल सोसायटी, छात्रों और राज्यों तथा संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के सरकारी अधिकारियों ने भी ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण का पालन करते हुए भाग लिया।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने मुख्य भाषण में इस बात को रेखांकित किया कि दिल्ली में वाहनों से होने वाला प्रदूषण एक महत्वपूर्ण समस्‍या है और इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यमुना नदी के प्रदूषण की समस्‍या को राज्यों द्वारा सामूहिक रूप से हल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्लास्टिक एक महत्वपूर्ण सामग्री है, लेकिन प्लास्टिक अपशिष्‍ट का उचित रूप से निपटान न होना प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को जन्म दे रहा है। यादव ने दिल्ली के नागरिकों से 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक थैलों का उपयोग न करने और एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग से बचने का आग्रह किया। उन्होंने प्लास्टिक अपशिष्‍ट का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण करने का अवसर देने वाली तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और प्लास्टिक प्रदूषण में कमी लाने के लिए नवोन्‍मेषी प्रौद्योगिकी को व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया। श्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि ईपीआर दिशानिर्देश सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देते हैं और प्लास्टिक अपशिष्‍ट का पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने मिशन लाइफ के सिद्धांतों को अपनाने और अछूते प्राकृतिक संसाधनों की खपत कम करने के लिए पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने अपने संबोधन में पिछले तीन वर्षों में दिल्ली में की गई हरित पहलों पर जोर दिया और कहा कि दिल्ली का वृक्ष आवरण बढ़ा है। उन्होंने अरावली की हरियाली के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई और व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए नवोन्‍मेषी तकनीकों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

आज दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें पहले प्रकाशन गवर्नमेंट इनिशिएटिव्‍स ऑन एंडिंग प्लास्टिक पल्‍यूशन में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्‍या से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को शामिल किया गया है। इस पुस्तक में सरकार और उद्योग सहित सभी हितधारकों की सामूहिक कार्रवाई की ताकत को दर्शाया गया है। कंपोडियम ऑन इको ऑल्‍टरनेटिव्‍ज टू बैन्‍ड सिंगल यूज प्लास्टिक का भी विमोचन किया गया। यह संग्रह देश भर में उपलब्ध पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों का एक व्यापक संकलन है।

इस कार्यक्रम के दौरान नेशनल प्लास्टिक वेस्‍ट रिपोर्टिंग पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जो बहु-चरणीय फिजीकल रिपोर्टिंग से हटकर ऑनलाइन रिपोर्टिंग की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। यह पोर्टल पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करते हुए कचरा बीनने वालों से लेकर कचरे के प्रसंस्करण और निपटान तक के पूरे प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकोसिस्‍टम को कवर करता है। बेहतर नियोजन और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए देश भर के सभी शहरी स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के लिए प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित डेटा उपलब्ध हो जाएगा।

गणमान्य व्यक्तियों ने सात लाइफ थीमों में आइडियाज4लाइफ‘ के 21 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। एक महीने तक चली प्री-कैंपेन गतिविधियों के अंतर्गत, देश भर में 69,000 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 21 लाख लोगों ने भाग लिया।

योजनाबद्ध पहलों की श्रृंखला के साथ राष्ट्रीय प्लास्टिक प्रदूषण न्यूनीकरण अभियान भी आज शुरू किया गया। इस अभियान में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत बाघ अभ्‍यारण्‍यों तथा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की गतिविधियाँ शामिल हैं। विशेष रूप से विशेष अभियान 5.0 के दौरान सरकारी कार्यालयों में उपयोग में न आने वाले एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एकल उपयोग प्लास्टिक के लिए पर्यावरण-विकल्पों पर एक हैकथॉन तथा प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त करने की थीम पर कविता लेखन, नारा लेखन और स्किट (नुक्कड़ नाटक) जैसी रचनात्मक प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को शामिल करना अभियान का हिस्सा है।

प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने पर सरकार के फोकस को ध्यान में रखते हुए, प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक के लिए पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों पर एक राष्ट्रीय प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में भारत भर से 150 स्टार्टअप, रिसाइकिलर्स और स्थानीय निकायों ने पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन पर नवीन तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रदर्शन करते हुए जीवंत भागीदारी की। इस प्रदर्शनी में मिशन लाइफ के लिए एक अलग मंडप भी था। छात्रों के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएमएनएच) द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता की चयनित प्रविष्टियों को भी एक अलग मंडप में प्रदर्शित किया गया।

इस दौरान, ‘प्लास्टिक अपशिष्‍ट पर स्थानीय निकायों के दृष्टिकोण’; ‘पर्यावरण के अनुकूल-विकल्पों और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में स्टार्टअप को बढ़ावा देना’; और ‘प्लास्टिक पैकेजिंग पर ईपीआर: अवसर और आगे की राह’ विषय पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए । स्थानीय निकायों पर सत्र में शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण चरण II के तहत कदमों को शामिल किया गया। स्टार्टअप पर सत्र में वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्री, प्लास्टिक-पैकेजिंग-मुक्त दूध वितरण और लचीली पैकेजिंग में उपयोग की जाने वाली डिंकिंग तकनीकों के संबंध में नवोन्‍मेषी तकनीकों को शामिल किया गया। ईपीआर पर सत्र में कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग के पुन: उपयोग, रासायनिक पुनर्चक्रण, डिपोजिट रिफंड सिस्‍टम, प्लास्टिक पैकेजिंग के निर्माण में पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक सामग्री के उपयोग के अभिनव मॉडल शामिल रहे।

 

 

 

 

 

 

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुवाहाटी में 55000 पीएमएवाई-जी घरों के वर्चुअल गृह प्रवेश समारोह में शामिल हुए

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/agrYAVQ.png ग्रामीण विकास के लिए असम में एक महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित करते हुए, केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज गुवाहाटी में प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 55,000 घरों के वर्चुअल गृहप्रवेश समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर  चौहान ने चालू वित्त वर्ष के लिए पीएमएवाई-जी के तहत 3.76 लाख और घरों को स्वीकृत करने की घोषणा की।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए,  चौहान ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और हाशिए पर पड़े व वंचित समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 20 लाख घरों को पूरा करने की असम की उल्लेखनीय उपलब्धि की सराहना की। कार्यक्रम के एक अंग के तौर पर  पीएमएवाई-जी के उन लाभार्थियों को मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया जिन्होंने सफलतापूर्वक अपने नए घरों का निर्माण कर उनमें प्रवेश कर चुके हैं।

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, श्री चौहान ने पीएमएवाई-जी के तहत एक महिला राजमिस्त्री पहल – लखिमी मिस्त्री की भी शुरूआत की, जिसका उद्देश्य महिलाओं को रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए आवश्यक राजमिस्त्री कौशल से लैस करना है। इस शुरूआत के मौके पर लखिमी मिस्त्री पहल के तहत प्रशिक्षित होने वाली पांच महिलाओं को सुरक्षा किट वितरित किए गए।

इस अवसर पर चौहान ने ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के तहत असम भर में 21 ज्ञान केंद्रों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। ये केंद्र ग्रामीण कृषि अवसंरचना को मजबूत करने और किसानों को समय पर संसाधनों और सूचनाओं तक पहुंच प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं।

चौहान ने असम सरकार के प्रयासों की सराहना की और ग्रामीण आवास और विकास पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में नेतृत्व के लिए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा को बधाई दी।

कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और कृषि और ग्रामीण आजीविका में सतत विकास के माध्यम से किसानों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने के लिए असम की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस अवसर पर असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा और असम के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रंजीत कुमार दास भी उपस्थित थे।

 

 

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सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता का भारत का सख्त संदेश देंगे

ऑपरेशन सिंदूर और भारत की सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई के संदर्भ में, सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने के अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों सहित प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करने जा रहे हैं।

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत की राष्ट्रीय सहमति और मजबूत दृष्टिकोण को प्रदर्शित करेंगे। वे दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ शून्य-सहिष्णु बनाने के देश के मजबूत संदेश को आगे बढ़ाएंगे।

विभिन्न दलों के संसद सदस्य, प्रमुख राजनीतिक हस्तियां और प्रतिष्ठित राजनयिक प्रत्येक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।

निम्नलिखित संसद सदस्य सात प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करेंगे:

1)  शशि थरूर, कांग्रेस

2)  रविशंकर प्रसाद, भाजपा

3)  संजय कुमार झा, जदयू

4)  बैजयंत पांडा, भाजपा

5)  कनिमोझी करुणानिधि, डीएमके

6)  सुप्रिया सुले, एनसीपी

7)  श्रीकांत एकनाथ शिंदे, शिव सेना

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