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विविधा

एक देश, अनेक शिक्षा प्रणालियाँ !

क्या समान अवसर केवल संविधान की किताबों तक सीमित है?
यदि भारत एक है, तो क्या उसके बच्चों की शिक्षा भी कम-से-कम एक जैसी नहीं होनी चाहिए?विशेष संपादकीय | खोजी विश्लेषण

भारत को अक्सर “विविधताओं का देश” कहा जाता है। भाषाएँ अलग हैं, पहनावे अलग हैं, संस्कृतियाँ अलग हैं और जीवन-शैली भी अलग-अलग है। यही विविधता भारत की सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है। लेकिन एक प्रश्न ऐसा है, जिसे हमने शायद कभी गंभीरता से पूछने की कोशिश ही नहीं की—क्या शिक्षा भी विविधता का विषय होनी चाहिए, या समान अवसर का?

आज भारत का हर बच्चा चाहे राजस्थान में जन्मा हो, बिहार में, गुजरात में, तमिलनाडु में या असम में—वह अंततः उसी भारत का नागरिक है। आगे चलकर वही बच्चा UPSC देगा, वही JEE और NEET देगा, वही सेना में भर्ती होगा, वही न्यायपालिका, प्रशासन, विज्ञान, उद्योग और राजनीति में अपनी जगह बनाएगा। राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ सबके लिए समान हैं, लेकिन उन प्रतियोगिताओं तक पहुँचने का रास्ता सबके लिए समान नहीं है। यही भारतीय शिक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा विरोधाभास है।

संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है। अनुच्छेद 21A प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार देता है। नीति-निर्देशक तत्व राज्य से अपेक्षा करते हैं कि वह समान अवसर उपलब्ध कराए। लेकिन व्यवहार में भारत की शिक्षा व्यवस्था अनेक परतों में बँटी हुई दिखाई देती है। कहीं राज्य बोर्ड, कहीं CBSE, कहीं ICSE, कहीं अलग-अलग क्षेत्रीय पाठ्यक्रम। परिणाम यह है कि एक ही कक्षा में पढ़ने वाले दो बच्चों का शैक्षणिक आधार केवल इसलिए अलग हो सकता है क्योंकि उनका जन्म अलग-अलग राज्यों में हुआ।

यहाँ प्रश्न यह नहीं है कि राज्यों को अपनी भाषा, संस्कृति या इतिहास पढ़ाने का अधिकार होना चाहिए या नहीं। होना चाहिए, और अवश्य होना चाहिए। भारत की विविधता का सम्मान लोकतंत्र की मूल भावना है। प्रश्न यह है कि क्या गणित, विज्ञान, संविधान, नागरिक शास्त्र, अर्थव्यवस्था, डिजिटल साक्षरता और बुनियादी जीवन-कौशल जैसे विषयों का न्यूनतम स्तर भी राज्य-राज्य में अलग होना चाहिए?

जब राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नपत्र समान होता है, तब तैयारी की बुनियाद अलग क्यों है? यदि अंतिम दौड़ एक ही ट्रैक पर होनी है, तो शुरुआती रेखा अलग-अलग क्यों खींची गई है?

शिक्षा विशेषज्ञ वर्षों से इस ओर ध्यान दिलाते रहे हैं कि भारत में केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी अत्यंत असमान है। कहीं प्रयोगशालाएँ हैं, कहीं केवल नाम मात्र की। कहीं प्रशिक्षित शिक्षक हैं, कहीं वर्षों से रिक्त पद। कहीं डिजिटल बोर्ड और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रयोगशालाएँ हैं, तो कहीं बच्चों के पास बैठने के लिए पर्याप्त बेंच तक नहीं। ऐसे में केवल “समान परीक्षा” की बात करना, समान अवसर की गारंटी नहीं बन जाता।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। बुनियादी साक्षरता, कौशल विकास, बहुभाषिकता और लचीले पाठ्यक्रम जैसे विचार स्वागतयोग्य हैं। लेकिन आज भी भारत में ऐसा कोई राष्ट्रीय न्यूनतम शैक्षणिक मानक नहीं है, जो यह सुनिश्चित करे कि देश के हर बच्चे ने कम-से-कम समान बुनियादी ज्ञान प्राप्त किया है। यही वह खाली स्थान है, जिस पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।

समस्या केवल पाठ्यक्रम की नहीं है। किताबें अलग, उनकी कीमतें अलग, निजी विद्यालयों की फीस अलग, यूनिफॉर्म की व्यवस्था अलग, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता अलग। कई स्थानों पर अभिभावकों को विद्यालय द्वारा निर्धारित विशेष दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदनी पड़ती हैं। शिक्षा धीरे-धीरे अधिकार से अधिक बाज़ार का विषय बनती दिखाई देती है। यदि दो समान आय वाले परिवार अलग-अलग राज्यों में रहते हैं, तो संभव है कि उनके बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च और मिलने वाली गुणवत्ता दोनों अलग हों।

यहाँ एक महत्वपूर्ण आपत्ति भी सामने आती है। कई लोग कहते हैं कि भारत जैसा विविध देश एक समान शिक्षा व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर सकता। राज्यों की अपनी ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक आवश्यकताएँ हैं। यह तर्क महत्वपूर्ण है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। वास्तव में किसी भी सुधार का उद्देश्य राज्यों की पहचान समाप्त करना नहीं होना चाहिए।

इसीलिए समाधान “One Nation, One Syllabus” नहीं, बल्कि One Nation, One Minimum Education Standard” हो सकता है।

इसका अर्थ यह नहीं कि तमिलनाडु राजस्थान का इतिहास पढ़ाए या राजस्थान के विद्यालय मलयालम पढ़ाएँ। इसका अर्थ यह है कि देश का प्रत्येक बच्चा, चाहे वह किसी भी बोर्ड में पढ़ता हो, कम-से-कम गणित, विज्ञान, संविधान, नागरिक शास्त्र, भारतीय इतिहास की मूल रूपरेखा, अर्थव्यवस्था, डिजिटल साक्षरता, पर्यावरण और जीवन-कौशल का एक समान राष्ट्रीय स्तर प्राप्त करे। इसके ऊपर राज्य अपनी भाषा, साहित्य, संस्कृति, भूगोल और स्थानीय इतिहास पढ़ाएँ। विविधता भी बचे और समान अवसर भी।

ऐसी व्यवस्था केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए लाभकारी होगी। इससे राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में आधारभूत असमानता कम होगी। राज्यों के बीच शैक्षणिक तुलना सरल होगी। शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन अधिक वस्तुनिष्ठ हो सकेगा। और सबसे महत्वपूर्ण—किसी बच्चे का भविष्य उसके जन्मस्थान से कम और उसकी प्रतिभा व मेहनत से अधिक निर्धारित होगा।

इस चर्चा में फीस का प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शिक्षा यदि अधिकार है, तो उसकी पहुँच भी समान होनी चाहिए। यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं कि देश के हर निजी विद्यालय की फीस एक जैसी हो, क्योंकि भूमि, वेतन और संचालन लागत अलग-अलग हैं। लेकिन यह अवश्य संभव है कि फीस निर्धारण के लिए पारदर्शी राष्ट्रीय मानक हों, मनमानी वृद्धि पर नियंत्रण हो और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए सहायता की प्रभावी व्यवस्था हो। शिक्षा का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, नागरिक बनाना होना चाहिए।

यूनिफॉर्म के प्रश्न पर भी बहस आवश्यक है। पूरे देश में एक जैसी पोशाक व्यावहारिक न हो, लेकिन कम-से-कम ऐसा ड्रेस कोड विकसित किया जा सकता है जो अनावश्यक आर्थिक बोझ कम करे। यूनिफॉर्म किसी एक विक्रेता से खरीदने की बाध्यता समाप्त हो और अभिभावकों को खुले बाज़ार से निर्धारित मानक के अनुसार वस्त्र खरीदने की स्वतंत्रता मिले। इससे शिक्षा से जुड़े अनेक छोटे-छोटे आर्थिक शोषण स्वतः समाप्त हो सकते हैं।

आज भारत “विश्वगुरु” बनने की आकांक्षा रखता है। लेकिन कोई भी राष्ट्र अपनी शिक्षा व्यवस्था से ऊपर नहीं उठ सकता। विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं ने पहले अपनी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, उसके बाद विज्ञान, उद्योग और नवाचार में नेतृत्व प्राप्त किया। यदि भारत को वास्तव में ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनना है, तो सबसे पहले उसे अपने बच्चों के लिए समान प्रारंभिक अवसर सुनिश्चित करने होंगे।

यह लेख किसी राज्य के विरुद्ध नहीं है, किसी बोर्ड के विरुद्ध नहीं है और न ही किसी सरकार के विरुद्ध। यह केवल एक प्रश्न उठाता है—क्या भारत के बच्चों को कम-से-कम समान बुनियादी शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए?

यदि उत्तर “हाँ” है, तो अब बहस केवल शिक्षा नीति पर नहीं, बल्कि शिक्षा समानता पर होनी चाहिए। शायद समय आ गया है कि देश National Minimum Education Standard” पर गंभीर राष्ट्रीय विमर्श शुरू करे—ऐसा मानक जो राज्यों की विविधता का सम्मान करे, लेकिन बच्चों के भविष्य में असमानता न पैदा करे।

क्योंकि अंततः प्रश्न केवल शिक्षा का नहीं है। प्रश्न उस भारत का है, जहाँ एक बच्चे की सफलता उसकी प्रतिभा और परिश्रम से तय हो—न कि उसके पिन कोड, बोर्ड या राज्य से। और शायद लोकतंत्र में इससे बड़ा प्रश्न कोई नहीं हो सकता।

लेखक :  सी एम जैन
संपर्क : +91 9408887777
 

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पीएम-अजय आदर्श ग्राम कंपोनेंट के तहत देश भर में 47,328 गांवों का चयन, तेलंगाना में 435 गांव

भारत सरकार अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अपने आदर्श ग्राम कंपोनेंट के तहत गांवों के एकीकृत विकास के माध्यम से प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) लागू कर रही है। इस योजना का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के कनवर्जेंस और प्रमुख विकास कमियों को दूर करके प्रमुख सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का सैचुरेशन सुनिश्चित करना है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने राज्यसभा में श्री अनिल कुमार यादव मंडाडी को दिए एक लिखित जवाब में यह जानकारी साझा की। सदन को बताया गया कि पीएम-अजय के आदर्श ग्राम घटक के तहत देशभर में 47,328 गांवों का चयन किया गया है, जिनमें तेलंगाना के 435 गांव शामिल हैं। चयनित गांवों का राज्यवार विवरण सदन के पटल पर रख दिया गया है।

लिखित उत्तर में आगे कहा गया कि आदर्श ग्राम कंपोनेंट शिक्षा सहित 10 क्षेत्रों में 50 निगरानी योग्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की पूर्णता के माध्यम से चयनित गांवों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है। इन संकेतकों की बेसलाइन स्टेटस स्थापित करने के लिए एक नीड असेसमेंट सर्वे आयोजित किया जाता है। पहचानी गई कमियों को केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से या पीएम-अजय के तहत सहायता प्राप्त हस्तक्षेपों द्वारा दूर किया जाता है। राज्यों द्वारा की गई प्रगति को पीएमएजीवाई पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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सदन को यह भी सूचित किया गया कि इस योजना के अंतर्गत देशभर में 3,28,131 विकास कार्यों और 1,10,51,213 लाभार्थियों की पहचान की गई है। इनमें से अब तक 46,642 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं, जिससे 47,59,399 लाभार्थी लाभान्वित हुए हैं।

तेलंगाना के संबंध में, लिखित उत्तर में कहा गया कि शिक्षा क्षेत्र के तहत 3,529 लाभार्थियों की पहचान की गई है, जिनमें से 472 लाभार्थियों को योजना के तहत लाभ प्राप्त हो चुका है।

थर्ड-पार्टी ऑडिट के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए सदन को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीएम-

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया; प्रत्येक नागरिक से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आज ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रव्यापी वीडियो कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 28,000 से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवा नागरिकों सहित विविध समूहों का औपचारिक रूप से स्वागत किया। इस अवसर के सामूहिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण सामूहिक संकल्प का अवसर बताया। श्री मोदी ने कहा, “आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं।”

प्रधानमंत्री ने इस पहल की व्यापक प्रकृति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अभियान केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र के व्यापक हितों से जुड़ा हुआ है।’विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि देश की युवा पीढ़ी शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और नशे जैसी आत्म विनाशकारी आदतों से पूरी तरह मुक्त हो। श्री मोदी ने कहा, “आज जब राष्ट्र ने विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है, तब यह आवश्यक है कि देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे, आत्मविश्वास से भरपूर हो और नशे जैसी विनाशकारी आदतों से हमेशा दूर रहे।”

अभियान की शुरुआत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि यह पहल पिछले वर्ष पवित्र भूमि काशी से एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक स्पष्टता, आध्यात्मिक ऊर्जा और गहरे सांस्कृतिक समर्पण के अनूठे समन्वय से प्रेरित इस अभियान का व्यापक विस्तार हुआ है। श्री मोदी ने कहा, “काशी घोषणा के तहत 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठनों और अनेक गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से शुरू हुई यह जन कल्याणकारी पहल अब सफलतापूर्वक एक राष्ट्रीय परियोजना बन गई है।”

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान” का शुभारंभ, प्रधानमंत्री के विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण के केंद्र में हमेशा भारत के युवाओं को रखा है और उन्हें अमृत काल की प्रेरक शक्ति के रूप में देखा है।

इस विजन से प्रेरित होकर सरकार ने युवाओं को स्वयंसेवा, नेतृत्व, मार्गदर्शन और राष्ट्र सेवा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मेरा युवा भारत (MY Bharat) को एकल खिड़की मंच के रूप में स्थापित किया है, जिसके माध्यम से देशभर के 2.23 करोड़ से अधिक युवा जुड़े हैं। लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा नशा मुक्त भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि मेरा युवा भारत (MY Bharat) निरंतर युवा भागीदारी के माध्यम से इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि 100 सप्ताह की कार्य योजना और प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से तैयार काशी घोषणा ने मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध देशव्यापी जन आंदोलन की नींव रखी है। अभियान के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन भागीदारी ने स्वच्छ भारत, फिट इंडिया और कई अन्य राष्ट्रीय अभियानों को जन आंदोलन की सफलता में परिवर्तित किया है, उसी प्रकार “विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान” भी लाखों-करोड़ों भारतीय युवाओं को स्वस्थ, नशा मुक्त और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, 26 राज्यों के राज्यपालों और 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान में भाग लिया।

नशा विरोधी शपथ लेने वाले लाखों युवाओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके नशामुक्त जीवन जीने के संकल्प और अपने विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा समुदायों में नशा मुक्त जीवन का संदेश सक्रिय रूप से प्रसारित करने के प्रयासों की प्रशंसा की। अभियान की महत्वाकांक्षी 100 सप्ताह की कार्य योजना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रत्येक आगामी रविवार को कला, संस्कृति, खेल और ध्यान से संबंधित विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे नए प्रतिभागियों को लगातार जोड़ा जा सकेगा।

श्री मोदी ने कहा, “आने वाले 100 रविवार निश्चित रूप से पूरी तरह नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 सशक्त कदम साबित होंगे।”

छात्रों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सदस्यों और मेरा युवा भारत (MY Bharat) के स्वयंसेवकों की विशाल ऑनलाइन सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं द्वारा प्रदर्शित जागरूकता, संवेदनशीलता और गंभीर प्रतिबद्धता पर गर्व व्यक्त किया।

युवा पीढ़ी को भारत की ‘अमृत पीढ़ी’ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा वर्ष 2047 तक देश के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

श्री मोदी ने कहा, “देश के उज्ज्वल भविष्य और अपने स्वयं के जीवन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप स्वयं को नशे से पूरी तरह मुक्त रखें।”

संशोधन के बाद यह संस्करण PIB राजभाषा शैली के अनुरूप है। इसमें तकनीकी शब्दावली, सरकारी भाषा और मूल अंग्रेजी अर्थ का मिलान कर दिया गया है।

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विनाशकारी प्रभावों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने आज के युवाओं की स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, खेल और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों का उल्लेख किया और चेतावनी दी कि नशे की लत किस प्रकार एकाग्रता को भटकाती है तथा सपनों को नष्ट कर देती है। परिवारों पर पड़ने वाले इसके गंभीर दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे माता-पिता के सपने टूटते हैं और बुजुर्गों को प्रतिदिन पीड़ा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने समाज पर पड़ने वाले इसके व्यापक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “जब किसी परिवार या समाज में यह विनाश होता है, तो पूरे राष्ट्र की समग्र शक्ति भी कमजोर हो जाती है।”

युवाओं को नशीले पदार्थों की भ्रामक प्रकृति से आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों से मिलने वाला क्षणिक नशे का प्रभाव अंततः उनके करियर और पारिवारिक जीवन के लिए स्थायी नुकसान का कारण बनता है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक गुरुओं के गहन ज्ञान, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का भी उल्लेख शामिल है, का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से चेतना को प्रभावित करने वाले पदार्थों को स्वीकार नहीं किया है। श्री मोदी ने कहा, “हमें किसी भी परिस्थिति में नशे को किसी भी प्रकार की सामाजिक स्वीकृति नहीं देनी चाहिए।”

नशे की लत से मुक्ति के लिए उपलब्ध व्यापक सहायता प्रणालियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक सहयोग, योग, ध्यान और आधुनिक पुनर्वास केंद्र नशे की आदत को दूर करने में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने परिवारों से सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी गलत चिंताओं के बजाय चिकित्सा सहायता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने घरों में खुले संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि संवेदनशील बच्चे नशे के जाल में फंसने से बच सकें। श्री मोदी ने कहा, “यदि कोई युवा गलती से नशे की लत में पड़ गया है, तो इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि उसके सभी रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।”

शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों से विशेष अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने नियमित पाठ्यक्रम में नशीले पदार्थों के खतरों से संबंधित चर्चाओं को सक्रिय रूप से शामिल करें और अपने परिसरों में नशा विरोधी विशेष अभियान शुरू करें। नशे की लत से उबर रहे लोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज से उनके प्रति सम्मान और दूसरा अवसर देने का आह्वान किया तथा उनके अतीत से जुड़े कलंक को पूरी तरह अस्वीकार करने की बात कही। श्री मोदी ने कहा, “नशे की लत से संघर्ष कर बाहर आने वाले युवा कमजोर नहीं होते; वे सच्चे योद्धा होते हैं, जिनका अद्भुत साहस ही उनकी वास्तविक पहचान है।”

अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया कि इस महत्वपूर्ण लड़ाई में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने देश भर में नशीले पदार्थों के खिलाफ की गई अभूतपूर्व कड़ी कार्रवाई, हजारों करोड़ रुपये मूल्य की जब्ती और नशीले पदार्थों के तस्करों तथा कारोबारियों के खिलाफ बढ़ती गिरफ्तारियों का उल्लेख किया। युवा पीढ़ी की दृढ़ता पर अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय अभियान अत्यंत सफल होगा। श्री मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारे युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी ऊर्जा की रक्षा करेंगे और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएंगे।”

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योग दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज के प्रांगण में योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने किया। योग शिविर का संचालन रेंजर प्रभारी प्रोफेसर स्वाति सक्सेना ने किया तथा बताया योग शरीर और मस्तिष्क को जोड़ने की एक सफल विधि है यदि स्वस्थ शरीर होगा तो मस्तिष्क भी स्वस्थ होगा और आम जीवन शैली में व्यक्ति बेहतर जीवन की पाएगा। विषय प्रवर्तन डॉ दीपाली सक्सेना ने किया की स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग कितना आवश्यक है और थीम के विशिष्ट पहलुओं चर्चा कीl योगा फॉर ऑल और स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग विषय पर कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक योग संस्थान हरिद्वार के प्रोफेसर सीडी यादव सर . ने छात्राओं को योग के महत्व को बताया कि कैसे योग को वर्तमान जीवन शैली में शामिल करके हम स्वस्थ जीवन जी सकते हैं छात्राओं को बताया कि अपने परिवार तथा आस पास पड़ोस में स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग की थीम के अनुसार छात्राएं कैसे जागरूकता कर सकती हैं योग को हमें आम जनमानस तक कैसे पहुंचlना है.. छात्रों को प्राणायाम अनुलोम विलोम भ्रामरी उत्तानपादासन पद्मासन जैसे अनिवार्य आसनों के माध्यम से बताया गया शरीर के सभी अंगों को कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है सर्वप्रथम प्रार्थना कराई गई और अंत में लाफिंग थेरेपी की गई की कैसे शारीरिक और मानसिक विकारों से मुक्ति पाई जा सकती है l धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनीत श्रीवास्तव ने दिया l

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एसोसिएशन आफ स्माल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर्स आफ इंडिया की राष्ट्रीय परिषद की बैठक दिल्ली के यूपी भवन में संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, एसोसिएशन आफ स्माल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर्स आफ इंडिया के राष्ट्रीय परिषद की बैठक यूपी भवन मीटिंग रुम में बड़े उत्साह पूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई। बैठक में समाचार पत्र पंजीयक योगेश बवेजा और अतिरिक्त पंजीयक संतोश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहें तथा सदस्यों की समस्याओं को सुना और संतोष जनक कार्यवाही का आश्वासन भी दिया। सदस्यों ने पीआरजीआइ के पोर्टल संबधी समस्याएं उठाइ तथा एडिट का आप्शन देने की मांग की। जिसे समाचार पत्र पंजीयक ने स्वीकार कर लिया। बैठक में यूपी, उत्तराखण्ड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तैलंगाना, तमिलनाडु, राजस्थान महाराष्ट्र, गुजरात उडीसा से आए राष्ट्रीय पार्षदों ने भाग लिया और अपने विचार तथा छोटे समाचार पत्रों की समस्याएं उठाई। बैठक का संचालन महामंत्री शंकर कतीरा ने किया तथा अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव दत्त चंदोला ने किया। बैठक में भगवती चन्दोला, निशा रस्तोगी, श्याम सिंह पंवार, अतुल दीक्षित, प्रवीण पाटिल, आलोक अग्निहोत्री, गोपाल गुप्ता, कुंडलराव सेंडी रेड्डी, के स्वयं प्रकाश, आदि ने अपने विचार व्यक्त किए बैठक के प्रारम्भ में समाचार पत्र पंजीयक योगेश बवेजा, अपर प्रेम पंजीयक संतोष कुमार, गौहाटी के सुरेश गारोदिया, और दिल्ली के सुरेश अग्रवाल को शाल उढ़ा कर उनका स्वागत सम्मान किया गया।

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संगीत को जीने वालों ने सजाई सुरों की शानदार महफिल

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर , गीत संगीत सुनने और जीने का शौक रखने वालों के लिए रविवार का दिन अत्यंत खूबसूरत रहा कार्यक्रम में कानपुर और आस पास के शहरों के संगीत में रुचि रखने वालों के लिए खुशनुमा त्यौहार जैसा था। कार्यक्रम के आयोजन का विचार रेलबाजार निवासी गोविंद सिंह का था, जिसे अति अल्प समय में बेहद खूबसूरत तरीके से क्रियान्वित करने का कार्य उनकी टीम खासकर बॉबी खान, टेक्निकल टीम के चौधरी भाई आदि ने बखूबी निभाया, मंच संचालन कर रहे बॉबी खान की फुलझड़ियों और माही के अंदाज ने सबका मन मोह लियामाँ शारदे का आशीर्वाद लेकर और विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की कृपा पाकर कार्यक्रम का शुभारंभ सुमधुर बांसुरी वादन और गोविंद जी के गायन से हुआ,

समाज के विभिन्न क्षेत्रों जैसे समाजसेवा, मीडिया आदि से भी लोगों की सहभागिता रही।  म्यूजिकल किसी भी कार्यक्रम की सफलता के दो मुख्य घटक गायक/गायिका और श्रोता होते है, और कहना पड़ेगा कि इस मामले में सारे श्रोता बेहद शालीन और अनुशासित दिखे । पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी श्रोताओं ने गायक गायिकाओं का जोरदार उत्साहवर्धन किया।. इस मंच के तत्वावधान में पहला आयोजन होने के कारण आयोजकों में पहले जो असमंजस और डर था , थोड़ी ही देर में सभी के परफॉर्मेंस और सहयोग से दूर हो गया। पूरे दिन एक से बढ़कर एक नए और पुराने गीतों की वो स्वर लहरी बही कि कोई भी उससे अछूता नहीं रह गया।

कार्यक्रम में राजेंद्र श्रीवास्तव , आशीष अवस्थी , दिवाकर शुक्ला, अतुल दीक्षित , गिरीश मारवाह ,आरती त्रिपाठी , अंजना अवस्थी , रेनू अग्रवाल , रेनू अवस्थी ,सुषमा श्रीवास्तव , प्रीति श्रीवास्तव, भारती दीक्षित, नीलम दीक्षित, स्मिता श्रीवास्तव आदि की धमाकेदार गीतों की प्रस्तुति को सबने खूब सराहा।

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माय भारत 6 जून को त्यागराज स्टेडियम में ‘युवा विकसित भारत- माय भारत युवा सम्मेलन’ का आयोजन करेगा

प्रधानमंत्री मोदी के युवाओं को 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में प्रेरक शक्ति के रूप में सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अधीन ‘ मेरा युवा भारत (एमवाई भारत)’ 6 जून 2026 को दोपहर 12:00 बजे नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में ‘युवा विकसित भारत- एमवाई भारत युवा सम्मेलन’ का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में देश भर से 6,000 से अधिक युवा प्रतिभागी एकत्रित होंगे, जो छात्रों, युवा पेशेवरों, युवा महिलाओं, उद्यमियों, कंटेंट क्रिएटर्स, इनोवेटर्स, उभरते नेताओं और उपलब्धि अर्जित करने वालों सहित विविध पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात नेता, विशिष्ट अतिथि और युवा व्यक्तित्व उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम भारत के भविष्य निर्माताओं को वर्तमान में उपलब्धि हासिल करने वालों को एकजुट करेगा, जिससे राष्ट्रीय विकास और सार्वजनिक नेतृत्व के प्रति साझा प्रतिबद्धता को बढ़ावा मिलेगा।

इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद होगा, जिनमें बीओएटी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उद्यमी अमन गुप्ता, ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत, यूपीएससी अचीवर्स और राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी कंटेंट क्रिएटर जैसे मल्हार कलांबे , आरजे रौनक आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य प्रभावशाली युवा भी होंगे, जिन्होंने अपने काम और सामाजिक प्रभाव से लाखों लोगों को प्रेरित किया है। यह कार्यक्रम देश भर के उन उभरते युवा प्रतिभाओं को भी सम्मानित करेगा जिन्होंने खेल, उद्यमिता, शासन और कंटेंट निर्माण के क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्रदर्शित की है ।

इस गति को और मजबूत करते हुए, माय भारत हाल ही में “एक सप्ताह में ऑनलाइन क्विज में भाग लेने वाले सबसे अधिक उपयोगकर्ता” के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में मिली मान्यता के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा, जो कि विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी) क्विज के माध्यम से हासिल की गई थी। इस पहल में सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के 5 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। आधिकारिक मूल्यांकन अवधि के दौरान 390,812 प्रतिभागियों ने सफलतापूर्वक क्विज़ पूरी की, जिससे एक नया विश्व रिकॉर्ड बना। यह उपलब्धि विकसित भारत @2047 के विजन में युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी को दर्शाती है और राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की सार्थक भागीदारी के लिए एक मंच के रूप में माई भारत में युवा नागरिकों के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करती है।

भारत के 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ , ‘माई भारत’ युवा सम्मेलन देश के युवाओं की आकांक्षाओं, उपलब्धियों और परिवर्तनकारी क्षमता का उत्सव मनाएगा। भारत भर से हजारों युवा परिवर्तनकर्ताओं को एक साथ लाकर, यह सम्मेलन राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए अमृत पीठी के सामूहिक संकल्प की पुष्टि करेगा और प्रधानमंत्री के विकसित, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करेगा।

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सीएसए में आयोजित तीन दिवसीय उद्यमिता कॉनक्लेव में पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर में गोल्डन जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में कृषि विश्वविद्यालय एवं एमएसएमई विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कॉनक्लेव एवं क्षेत्रीय ट्रेड शो में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचे।

पूर्व राष्ट्रपति के आगमन पर प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सचान ने उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने महान क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके उपरांत उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने ओडीओपी/ओडीओसी, टेक्सटाइल, मुख्यमंत्री युवा योजना, एग्रीटेक, मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विस सेक्टर से संबंधित विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर प्रदर्शित नवाचारों एवं उत्पादों की जानकारी प्राप्त की तथा उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया।

पूर्व राष्ट्रपति ने स्टार्टअप्स, स्थानीय उद्योगों एवं नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कुलपति के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि इस क्षेत्रीय ट्रेड शो के माध्यम से युवाओं को उद्योगों के विकास की दिशा में नई प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में विधायक सुरेंद्र मैथानी, अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. कौशल कुमार, निदेशक प्रसार डॉ. वी. के. त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड ने लखनऊ में अपने पहले रणनीतिक संचार सम्मेलन का आयोजन किया

भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड ने 7 मार्च, 2026 को उत्तर प्रदेश स्थित लखनऊ में अपने पहले रणनीतिक संचार सम्मेलन का आयोजन किया। करीब 500 लोगों की उपस्थिति के बीच आयोजित इस सम्मेलन में, राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में रणनीतिक संचार पर विचार-विमर्श और पैनल चर्चाएं हुईं। पैनलिस्ट व वक्ताओं में वरिष्ठ राजनयिक, सरकार और मीडिया के संचार के जानकार शामिल थे। उपस्थित लोगों में सेंट्रल कमांड के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और सरकार व निजी क्षेत्र के संचार पेशेवर भी मौजूद रहे।

अपने उद्घाटन भाषण में, सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने युद्ध की प्रकृति में आए मूलभूत बदलावों को रेखांकित किया, जिसमें अब सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र भी शामिल हैं। धारणा के प्रबंधन की बड़ी भूमिका पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि धारणा वैधता को आकार देती है, वैधता असर पैदा करती है और असर से परिणाम तय होते हैं। उन्होंने नैरेटिव को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने और युद्ध की सीमा से नीचे के संघर्षों से पैदा होने वाले खतरों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि रणनीतिक संचार प्रतिक्रियात्मक, छिटपुट या निजी असर पर आधारित नहीं रह सकता, बल्कि इसे संस्थागत, सिद्धांत-सहयोगी और क्षमता वाला होना चाहिए।

इस सम्मेलन में ‘उभरते संचार क्षेत्र में भविष्य की तैयारियों के लिए एक क्षमता के तौर पर रणनीतिक संचार का संस्थागतकरण‘ विषय पर संस्थागत और राष्ट्रीय सुरक्षा आयामों पर एक विशेषज्ञ नीति-स्तर के सत्र का आयोजन किया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कंबोज (सेवानिवृत्त), राजदूत यशवर्धन सिन्हा (सेवानिवृत्त) और लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) ने सत्र को संबोधित किया।

‘उभरते बहु–क्षेत्रीय अभियानों में रणनीतिक संचार: रणनीतियां, संरचनाएं, प्रक्रियाएं और तैयारी’ विषयवस्तु पर एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें नीतिगत और कार्यान्वयन संबंधी दृष्टिकोणों को जोड़ा गया। राजदूत दिलीप सिन्हा, डॉ. शांतनु मुखर्जी, श्रीमती वीणा जैन और लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडेय के साथ सेवानिवृत्त नागरिक और सैन्य अधिकारियों ने सत्र के दौरान महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि साझा कीं। ‘मन के क्षेत्र को आकार देना: रणनीतिक क्षेत्र में धारणा प्रबंधन’ और ‘सूचना की शक्ति और रणनीतिक संचार’ विषयवस्तु पर मीडिया के साथ पैनल चर्चा में धारणा प्रबंधन और सूचना की शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना के भीतर एक संस्थागत क्षमता के तौर पर रणनीतिक संचार का परीक्षण करना और उभरते सूचना क्षेत्र में सिद्धांत, संरचनाओं, प्रक्रियाओं और तैयारियों पर कार्रवाही के लिए अंतर्दृष्टि पैदा करना था।

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-ब्राजील के बीच 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के महत्वाकांक्षी व्यापार विस्तार और रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मज़बूत संबंधों का आह्वान किया

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित भारत-ब्राजील व्यापार मंच के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ब्राजील के बीच बढ़ते सहयोग पर का उल्लेख किया। पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह अब बढ़कर 15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने वर्तमान स्तर को अपर्याप्त बताया और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए अधिक महत्वाकांक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित उच्च मानकों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राष्ट्र तेजी से विकास कर सकते हैं, विस्तार कर सकते हैं और साझा समृद्धि के लिए एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत-ब्राजील साझेदारी का उल्लेख करते हुए वाणिज्य मंत्री ने दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बताया, जो लोकतंत्र, विविधता और विकास की साझा आकांक्षाओं से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध दोनो देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग से प्रेरित एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुए हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और रक्षा, ऊर्जा, कृषि और कृषि रसायनों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।

श्री गोयल ने दक्षिण-दक्षिण सहयोग और ब्रिक्स, आईबीएसए, जी-20 तथा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अंतर्गत सहयोग सहित साझेदारी के व्यापक आयामों पर भी जोर दिया। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के उज्ज्वल भविष्य के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया।

भारत की व्यापार रणनीति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री महोदय ने वैश्विक व्यापार और निवेश के लिए भारत के एक विश्वसनीय स्थल के रूप में उभरने का उल्लेख किया, जिसने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया। यह एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में कई उच्च गुणवत्ता वाले मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं और कई अन्य समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है। इन समझौतों के साथ, भारत को अब वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिकता की पहुंच प्राप्त है। उन्होंने बताया कि इज़राइल और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ संदर्भ की शर्तें तय कर ली गई हैं, कनाडा के साथ बातचीत शुरू हो गई है और निकट भविष्य में आगे की बातचीत शुरू होने की संभावना है।

उन्होंने मर्कोसुर क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत, बाजार पहुंच बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी साझेदारी को मजबूत करने और खेल, शिक्षा तथा संस्कृति में भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए भारत-मर्कोसुर तरजीहीप्राथमिकता व्यापार समझौते का विस्तार करने के लिए काम कर रहा है।

श्री गोयल ने कहा कि यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब दोनों अर्थव्यवस्थाएं नई गति प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि वर्ष 2014 से संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है, जो कराधान, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण, डिजिटल अवसंरचना, अनुपालन में कमी और व्यापार करने में सुगमता की दिशा में सुधारों से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सक्रिय रूप से बाहरी निवेश को बढ़ावा देता है और मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उद्योग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

श्री गोयल ने ब्राजील की शक्तियों का वर्णन करते हुए, इसके समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, जिनमें नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क शामिल हैं, का उल्लेख किया, जो वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में ब्राजील की शक्तियों पर भी प्रकाश डाला और इन्हें महत्वपूर्ण सहयोग के क्षेत्रों के रूप में मान्यता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील मिलकर संसाधनों, नवाचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को नया रूप देने की क्षमता रखते हैं और ब्राजील की कंपनियों को रोजगार सृजन, मूल्यवर्धन और प्रौद्योगिकी का  लाभ उठाने में भारत के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित किया।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और वैश्विक बौद्धिक संपदा ढांचे के भीतर समान पहुंच को बढ़ावा देने, विशेष रूप से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के संरक्षण के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ब्राजील की राजकीय यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा दोनों ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर सहमति व्यक्त की थी।

श्री गोयल ने अपने संबोधन के समापन में विश्वास व्यक्त किया कि यह वार्ता भविष्य के अनुकूल कार्ययोजना तैयार करने और द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने सहयोग और नवाचार के माध्यम से भारत-ब्राजील साझेदारी को और प्रगाढ़ करने का आह्वान किया, ताकि आने वाले वर्षों में पारस्परिक समृद्धि की साझा दृष्टि बनी रहे।

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