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एलवीएम3 ने सबसे भारी पेलोड की सफलता के साथ विश्व स्तरीय विश्वसनीयता का प्रदर्शन किया -डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को ले जाने वाले एलवीएम3-एम6 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर इसरो टीम को बधाई दी। केन्द्रीय मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में इसरो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती ताकत, विश्वसनीयता और वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत करते हुए लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।

इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, भारत में एलवीएम3-एम6 मिशन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन में भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा अब तक के सबसे भारी उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में देश की स्थिति को और मजबूत करता है और भारी-भारित प्रक्षेपण क्षमता हासिल करने की उल्लेखनीय सफलता दर्शाता है।

अंतरिक्ष विभाग के सचिव और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसए) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने घोषणा की कि एलवीएम3-एम6 प्रक्षेपण यान ने सफल प्रदर्शन करते हुए ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को उसकी निर्धारित निम्न पृथ्वी कक्षा में सटीक रूप से स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी प्रक्षेपण यान का उपयोग करके भारतीय धरती से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है और एलवीएम3 का तीसरा पूर्णतः वाणिज्यिक मिशन है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मिशन प्रक्षेपण यान की उत्कृष्ट विश्वसनीयता और विश्वस्तरीय प्रदर्शन को दर्शाता है, इससे यह वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ हो गया है। इस मिशन में उपयोग किया गया उपग्रह, ब्लू बर्ड ब्लॉक-2, अगली पीढ़ी के उपग्रह समूह का हिस्सा है। इसे विशेष उपयोगकर्ता उपकरणों की आवश्यकता के बिना, सामान्य मोबाइल स्मार्टफोन को सीधे अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच एक वाणिज्यिक समझौते के तहत शुरू किया गया है। यह उन्नत वैश्विक संचार मिशनों के लिए एक विश्वसनीय प्रक्षेपण सेवा प्रदाता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

लॉन्च व्हीकल मार्क-3 की सफल उड़ान के साथ, भारत ने एक बार फिर जटिल भारी-भरकम मिशनों में अपनी तकनीकी परिपक्वता का प्रदर्शन किया है। इससे स्वदेशी प्रक्षेपण प्रणालियों में विश्वास मजबूत हुआ है और वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की प्रतिष्ठा और बढ़ी है।

 

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भारतीय तटरक्षक बल ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में विकसित अपने पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत – समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजीने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएलकी 2 पीसीवी परियोजना के तहत 23 दिसंबर 2025 को पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी)– समुद्र प्रताप (यार्ड 1267) को अपने बेड़े में शामिल किया। 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से युक्त इस पोत का आईसीजी बेड़े में शामिल होना सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहलों के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।

‘समुद्र प्रताप’ भारतीय तटरक्षक बल का स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत है। यह तटरक्षक बल के बेड़े का सबसे बड़ा पोत है, जो तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और पहुंच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है। 114.5 मीटर लंबा और 16.5 मीटर चौड़ा, 4,170 टन विस्थापन क्षमता वाला यह पोत अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित है, जिसमें 30 मिमी सीआरएन91 तोप, एकीकृत अग्नि नियंत्रण प्रणाली से लैस दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोटनियंत्रित तोपें, स्वदेशी रूप से विकसित एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली और एक उच्च क्षमता वाली बाहरी अग्निशमन प्रणाली शामिल हैं।

प्रदूषण नियंत्रण पोत भारतीय तटरक्षक बल का पहला ऐसा पोत है जो डायनामिक पोजिशनिंग क्षमता (डीपी1) से लैस है और इसे एफआईएफआई2/एफएफवी2 प्रमाणन प्राप्त है। यह तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन, जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर और पीसी लैब उपकरण, जो विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और उसके बाहर व्यापक प्रदूषण प्रतिक्रिया अभियानों को चला सकता हैं। यह उच्च परिशुद्धता संचालन करने, गाढ़े तेल से प्रदूषकों को पुनर्प्राप्त करने, संदूषकों का विश्लेषण करने और दूषित पानी से तेल को अलग करने में सक्षम है।

दीक्षांत समारोह में डीआईजी वीके परमार, पीडी (एमएटी), आईसीजी; श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, जीएसएल और आईसीजी तथा जीएसएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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कानपुर स्मार्ट सिटी में मोटर वाहन अधिनियम की उड़ रहीं जमकर धज्जियां

स्मार्ट सिटी में कानून का हो रहा खुला उल्लंघन !

स्मार्ट सिटी की सड़कों पर ‘लोहे के अवैध कवच’ पहनकर दौड़ रहे सवारी वाहन

– करोड़ों खर्च कर लगाए गए कैमरों में क्यों नहीं कैद होती है मनमानी?

– चौराहों पर ड्यूटी में लगे यातायात पुलिस के जवान क्यों करते हैं अनदेखी ?

कानपुर। स्मार्ट सिटी कानपुर में सार्वजनिक परिवहन के नाम पर अराजकता का बोलबाला है। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों—कल्याणपुर, रावतपुर, पनकी, विजय नगर, बर्रा, गोविंद नगर, किदवई नगर, बाबूपुरवा, नौबस्ता, रामादेवी, बारादेवी, झकरकटी, फजलगंज, टाटमिल, चुन्नीगंज, जरीब चौकी सहित अधिकतर क्षेत्रों में चलने वाले विक्रम टेम्पो, ऑटो और ई-रिक्शा के मालिकों के मनमाने रवैये ने सड़कों को असुरक्षित बना दिया है। इन वाहनों की बॉडी के चारों ओर अवैध रूप से लगाए गए लोहे के भारी एंगल न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहे हैं।

मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के अनुसार, वाहनों की मूल संरचना (Structure) में इस तरह का बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act) की धारा 52 का स्पष्ट उल्लंघन है।

वहीं वाहन की लंबाई, चौड़ाई या वजन में कोई भी ऐसा बदलाव जो आरसी (Registration Certificate) के विपरीत हो, पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वहीं इन्हीं अवैध एंगलों की वजह से चालक, धारा 184 के तहत ‘खतरनाक ड्राइविंग’ को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि उन्हें अपने वाहन के क्षतिग्रस्त होने का डर नहीं रहता है।

स्मार्ट सिटी में चलने वाले ऑटो-विक्रम, ई रिक्शा चालक, अपने मनमुताबिक, लोहे के जालीदार एंगलों का इस्तेमाल ‘सुरक्षा कवच’ की तरह कर रहे हैं। जिसके कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आए दिन छोटी-मोटी भिड़ंत होती रहती है, जिससे कई बार विवाद पैदा हो जाता है और जाम की स्थिति पैदा होती है।

डिजिटल निगरानी पर सवाल ? आईटीएमएस (ITMS) के तहत लगे कैमरों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर ये ‘मोडिफाइड’ वाहन चालान की जद से बाहर कैसे और क्यों हैं? वहीं यातायात पुलिस के जवानों की नजर इस ओर क्यों नहीं जाती ?

ऐसे में जरूरी है कि संभागीय परिवहन विभाग व यातायात पुलिस, एक साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाये और ऑटो – विक्रम व ई – रिक्शाओं में लगे अवैध एंगलों को मौके पर ही कटवाकर जब्त किया जाए।

~प्रेषक श्याम सिंह पंवार सम्पादक दैनिक जन सामना

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प्यार की महक

प्यार की महक कुछ भीनी-सी, गहरी-सी,

जो हृदय को दे अद्भुत स्पंदन।

ऐसा स्पर्श, जो पूरे जीवन को

नव-सृजन की ओर ले जाए।

कार्य की नई लय से

जीवन महके—बिखरे नहीं।

महकते कदमों के संग

उच्च दिशाओं की ओर बढ़ते हुए,

पूरा करने के दृढ़ संकल्प में

रास्ता अपना बनता है।

पथ पर आगे बढ़ते हुए

प्यार का उजाला फैलता है,

राहें सरल होती जाती हैं।

बाधाओं के बीच उभरता एक सरोवर,

जो सुन्दर कर्मों से

और गहरी आशाओं से भर जाता है।

मन की कल्पनाओं को मिलता है आकार,

कल्पना—जो भीतर की शाश्वत ज्योति है।

यही है प्यार का रंग।

और इस रंग को संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी।

~डॉ रश्मि गोयल

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इफ्फी 2025 में भारत और दुनिया भर से सात निर्देशकों की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्में दिखाई जाएंगी

अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में बेहतरीन नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव  (इफ्फी) 2025 में निर्देशक के बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म अवॉर्ड के लिए विशेष रूप से चुनी गई पांच अंतरराष्ट्रीय और दो भारतीय फ़िल्में दिखाई जाएंगी।

विजेता को प्रतिष्ठित सिल्वर पीकॉक, ₹10 लाख का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र मिलेगा।

सिनेमा के दिग्गजों की जानी-मानी जूरी विजेता का फैसला करेगी। जूरी की अध्यक्षता मशहूर भारतीय फिल्म निर्माता राकेश ओमप्रकाश मेहरा करेंगे। उनके साथ ग्रीम क्लिफर्ड (संपादक और निर्देशक, ऑस्ट्रेलिया), कैथरीना शटलर (एक्टर, जर्मनी), चंद्रन रत्नम (फिल्म निर्माता, श्रीलंका) और रेमी एडेफरासिन (सिनेमैटोग्राफर, इंग्लैंड) भी होंगे।

हर साल की तरह, इस वर्ष के फिल्मोत्सव में भी पहली बार फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्माताओं के बेहतरीन काम को दिखाया जायेगा और दुनिया भर के अगली पीढ़ी के कहानीकारों के सिनेमैटिक विज़न को पेश किया जाएगा।

फ्रैंक

एस्टोनियाई फिल्म निर्माता टोनिस पिल इस मार्मिक कमिंग-ऑफ-एज ड्रामा के साथ फीचर फिल्म में डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म का प्रीमियर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रन एंड यंग ऑडियंस – श्लिंगेल 2025 में हुआ, जहाँ इसे FIPRESCI जूरी पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों के लिए नामित किया गया था।

घरेलू हिंसा की क्रूर घटना के बाद, 13 वर्ष का पॉल अपनी जगह से उजड़ जाता है और खुद को नए शहर में पाता है। वहाँ अपनेपन की भावना की तलाश उसे गलत फैसलों की श्रृंखला में ले जाती है। जैसे ही उसका भविष्य बिगड़ने लगता है, एक सनकी, दिव्यांग अजनबी के साथ अप्रत्याशित रिश्ता उसके जीवन की दिशा बदल देता है।

यह फिल्म टूटे परिवारों, बचपन के ज़ख्मों के शांत दर्द और अप्रत्याशित दोस्ती की परिवर्तनकारी शक्ति को कोमलता से दिखाती है।

फ्यूरी (मूल नामला फुरिया)

स्पैनिश फिल्ममेकर जेम्मा ब्लास्को की पावरफुल डेब्यू फीचर फिल्म फ्यूरी एक ब्रूटल ड्रामा है जो बोल्ड नई आवाज़ के आने का संकेत देती है। यह फिल्म SXSW फिल्म फेस्टिवल 2025 और सैन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में प्रीमियर हुई।

अभिनेत्री एलेक्जेंड्रा ने फिल्म में मेडिया की भूमिका निभाई है। नए साल की शाम को रेप होने के बाद वह मेडिया के किरदार के ज़रिए अपने दर्द को बाहर निकालती है, जबकि उसका भाई एड्रियन उसे बचाने में नाकाम रहने के लिए शर्मिंदगी और गुस्से से जूझता है।

यह फिल्म महिलावादी नजरिए से  उस डर, शर्म, घृणा और गिल्ट की पड़ताल पेश करती है जिसका सामना हिंसक, पितृसत्तात्मक समाज में यौन शोषण से बचे लोगों को करना पड़ता है।

कार्ला

जर्मन फिल्ममेकर क्रिस्टीना टूर्नाट्ज़ेस का डेब्यू ड्रामा कार्ला का प्रीमियर म्यूनिख फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहाँ इसने बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट स्क्रीनराइटर के दोअवॉर्ड जीते।

1962 में म्यूनिख में सेट, यह फिल्म 12 वर्ष की कार्ला की सच्ची कहानी बताती है, जो वर्षों के दुर्व्यवहार से सुरक्षा पाने के लिए अपने पिता के खिलाफ केस दर्ज कराती है।

बहुत ज़्यादा संवेदनशीलता और एटमॉस्फेरिक सिनेमैटोग्राफी के साथ बनाई गई, यह फिल्म बच्चे की अपनी ही ज़ुबान में बताई गई कहानी का सशक्त वर्णन है। कार्ला के साथ, टूर्नाट्ज़ेस एक ऐसी सिनेमैटिक भाषा बनाती हैं जो अनकही बातों को कहने में सक्षम है – जो कोमलता, स्पष्टता और ज़बरदस्त सुरक्षा से बनी है।

माई  डॉटर्स हेयर (ओरिजिनल टाइटल – राहा)

ईरानी निर्देशक हेसाम फराहमंद अपनी मशहूर लघु फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज़ के बाद राहा के साथ एक ज़बरदस्त सोशल ड्रामा लेकर आए हैं।

फिल्म तोहिद पर आधारित है, जो अपने परिवार के लिए थोड़ी खुशी लाने के लिए अपनी छोटी बेटी के बाल बेचकर सेकंड हैंड लैपटॉप खरीदता है। लेकिन जब एक अमीर परिवार लैपटॉप की ओनरशिप पर सवाल उठाता है, तो झगड़ों की एक चेन गहरे क्लास डिवीज़न को सामने लाती है।

असल ज़िंदगी की सच्चाइयों से प्रेरित होकर, फराहमंद एक ऐसी दुनिया बनाते हैं जहाँ नैतिकता धुंधली हो जाती है और न्याय कमज़ोर होता है। बिना किसी लाग-लपेट के ऑब्ज़र्वेशन के साथ, राहा गरिमा, संघर्ष और ज़िंदा रहने की खामोश कीमत के बारे में सार्वभौमिक कहानी बन जाती है।

  डेविल स्मोक्स (एंड सेव्स द बर्न्ट मैचेस इन द सेम बॉक्स)

(ओरिजिनल टाइटल – एल डियाब्लो फुमा (वाई गार्डस लास कैबेज़ास डे लॉस सेरिलोस क्वेमाडोस एन ला मिस्मा काजा))

मैक्सिकन फिल्ममेकर अर्नेस्टो मार्टिनेज़ बूसियो की विशेष पहली फीचर फिल्म ने बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025 में पहला पर्सपेक्टिव्स कॉम्पिटिशन जीता।

यह पाँच भाई-बहनों की कहानी है जिन्हें उनके माता-पिता छोड़कर चले जाते हैं और वे खुद ही अपना ख्याल रखते हैं। जैसे-जैसे वे अकेलेपन से गुज़रते हैं, वे अपनी चिंताओं को अपनी सिज़ोफ्रेनिक दादी के अस्थिर दिमाग के ज़रिए दिखाते हैं, और एक-दूसरे का साथ बनाए रखने की लड़ाई में कल्पना और हकीकत के बीच की लाइन को धुंधला कर देते हैं।

एलिप्टिकल नैरेटिव के ज़रिए बनाई गई यह फिल्म बचपन के डर और इंस्टिंक्ट्स के बारे में तीखी, परेशान करने वाली बातें बताती है। यह जानी-पहचानी “होम अलोन” कहानी को डर, कल्पना और ज़िंदा रहने की परत दर परत मनोवैज्ञानिक खोज में बदल देती है।

शेप ऑफ़ मोमो

भारतीय  फिल्म निर्माता त्रिबेनी राय की पहली फीचर फिल्म शेप ऑफ़ मोमो ने शानदार फेस्टिवल जर्नी के बाद डेब्यू कॉम्पिटिशन में अच्छी एंट्री की है। यह कान 2025 में “HAF गोज़ टू कान” शोकेस के लिए पांच एशियन वर्क्स-इन-प्रोग्रेस में से एक के तौर पर चुनी गई थी। इस फिल्म का प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ और सैन सेबेस्टियन में भी दिखाई गई, जहाँ इसे न्यू डायरेक्टर्स अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था।

सिक्किम में सेट और नेपाली में फिल्माई गई, यह कहानी बिष्णु के बारे में है। वह अपने कई पीढ़ियों वाले महिलाओं के घर लौटती है, जो अब सुस्ती में डूबा हुआ है। खुद के लिए और उनके लिए आज़ादी वापस पाने के लिए दृढ़, वह पितृसत्ता द्वारा बनाए गए रूटीन को तोड़ती है। हर उस महिला को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है कि वह विरासत में मिली सीमाओं को स्वीकार करे या उनका विरोध करे।

शेप ऑफ़ मोमो परंपरा, आज़ादी और परिवारों के अंदर पैदा होने वाली शांत क्रांतियों पर भावपूर्ण विचार है।

आता थांबायचा नाय! (इंग्लिश टाइटल – नाउ,  देयर इज नो शॉपिंग!)

एक्टर शिवराज वायचल की यह पहली फीचर फिल्म है। यह मराठी भाषा का ड्रामा है जो मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के क्लास IV सफाई  कर्मियों के एक समूह की सच्ची कहानी पर आधारित है। ये लोग एक समर्पित अधिकारी से प्रेरित होकर अपनी 10वीं कक्षा की परीक्षा पूरी करने के लिए स्कूल वापस जाने का फैसला करते हैं।

हास्य और भावनाओं का मेल यह फिल्म हिम्मत, काम की गरिमा और शिक्षा की बदलने वाली ताकत का सम्मान करती है – यह साबित करती है कि सीखने, सपने देखने या फिर से शुरू करने में कभी देर नहीं होती।

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आकाश से बरसात तक : क्लाउड सीडिंग का विज्ञान और प्रभावशीलता

क्लाउड सीडिंग, यानी कृत्रिम वर्षा उत्पन्न करने की एक वैज्ञानिक तकनीक। जब बादल मौजूद होते हुए भी वर्षा नहीं होती, तब वैज्ञानिक उनमें कुछ रासायनिक तत्वों का छिड़काव करते हैं, जिससे जलवाष्प संघनित होकर वर्षा की बूंदों में बदल जाती है।आमतौर पर इसमें सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड या ड्राई आइस जैसे पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।आज बढ़ते तापमान, घटते जलस्तर, पिघलते ग्लेशियर और जल–विनाश की वजह से सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। ऐसे में क्लाउड सीडिंग को एक आशाजनक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।यह तकनीक कई देशों में लंबे समय से सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है, जबकि भारत में अभी यह सीमित स्तर पर ही प्रयोग में है।हाल के वर्षों में भारत सरकार और कई राज्य सरकारें सूखे से निपटने के लिए इस तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग हो चुका है।हालाँकि यह भी सच है कि हर जगह या हर मौसम में क्लाउड सीडिंग कारगर नहीं होती।अगर बादलों में नमी का स्तर या तापमान अनुकूल न हो, तो वर्षा की संभावना कम हो जाती है।इस प्रक्रिया के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियाँ, ऊर्जा और नमी का सही संतुलन होना जरूरी है।इसी कारण बिना मौसम अनुमान के क्लाउड सीडिंग करना महंगा और व्यर्थ साबित हो सकता है।दिल्ली–एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गंगा के मैदानी इलाकों में यह तकनीक वायु प्रदूषण घटाने के उपाय के रूप में भी चर्चा में रही है।ठंड के मौसम में जब वायुमंडलीय परतें नीचे बैठ जाती हैं और प्रदूषक कण ऊपर नहीं जा पाते, तब हवा की गुणवत्ता “खराब” या “बहुत खराब” स्तर पर पहुँच जाती है।ऐसे में यदि मौसम अनुकूल हो तो क्लाउड सीडिंग प्रदूषण कम करने का एक संभावित उपाय हो सकता है।

क्लाउड सीडिंग की संभावनाएँ और सीमाएँ

ठंड और गंगा–यमुना के मैदानी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर रहती है।यह तब और बढ़ जाती है जब हवा की गति कम हो जाती है और धूल तथा धुआँ वातावरण में फँस जाता है।क्लाउड सीडिंग को इस स्थिति में संभावित समाधान के रूप में देखा गया है, क्योंकि कृत्रिम वर्षा से हवा में मौजूद धूल के कण नीचे बैठ सकते हैं और प्रदूषण का स्तर घट सकता है।हालाँकि यह प्रक्रिया पूरी तरह मौसम और नमी पर निर्भर करती है।भारत में इसका प्रयोग पहली बार 1945 में अमेरिका के उदाहरण से प्रेरित होकर किया गया था।इसके बाद 1983, 1984 और 1993–94 में भारत के कई राज्यों में इस पर कार्य हुआ।आईआईटी कानपुर ने भी 2003–06 के बीच क्लाउड सीडिंग पर शोध किया।आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि बादलों में 15 फ़ीसदी नमी के चलते कृत्रिम बारिश का प्रयोग सफल नहीं हो सका , लेकिन उन्होंने माना कि भविष्य में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।दिल्ली की जलवायु को देखते हुए सर्दियों में क्लाउड सीडिंग की संभावना कम रहती है, क्योंकि ठंड तो होती है लेकिन पर्याप्त नमी नहीं होती।जब तक कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) न आए, तब तक यहाँ बादलों का बनना मुश्किल होता है।यानी, तकनीकी तौर पर जब तक वातावरण अनुकूल न हो, क्लाउड सीडिंग संभव नहीं ~डॉ. रश्मि गोयल

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बुलबुले फेस्टिवल 2025 – लखनऊ का प्रथम कला एवं सांस्कृतिक बाल महोत्सव (तीसरा संस्करण)

भारतीय स्वरूप संवाददाता लखनऊ, नवंबर 2025: लखनऊ में बच्चों के लिए समर्पित कला एवं संस्कृति का अद्वितीय उत्सव ‘बुलबुले फेस्टिवल 2025’ 7 और 8 नवम्बर 2025 को इंडिया लिटरेसी हाउस, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन, लखनऊ द्वारा किया जा रहा हैl एक ऐसी संस्था जो कला और ‘मेकिंग’ के माध्यम से बच्चों में कल्पनाशक्ति, रचनात्मक आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है। बुलबुले फेस्टिवल बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और कलाकारों सभी को एक ही मंच पर लाता है, जहाँ कला, खेल और सीख एक साथ मिलकर एक जीवंत अनुभव का रूप लेते हैं। कहानी-कथन से लेकर कठपुतली नाट्य तक, कार्यशालाओं से लेकर खेलों तक, संगीत से लेकर विविध कलाओं तक, यह महोत्सव हर बच्चे के लिए खोज, आनंद और सृजन का एक अद्भुत अवसर प्रदान करेगाl इस वर्ष, कई संस्थाएँ, सरकारी अधिकारी, शिक्षकों, अभिभावकों और स्वयं बच्चों ने मिलकर इस उत्सव को साकार करने में योगदान दिया है। सभी का साझा विश्वास यही है कि “बच्चे सबसे गहराई से और स्वाभाविक रूप से आनंद और खेल के माध्यम से सीखते हैं।”

स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन की को-फाउंडर ऋद्धि ने कहा, “‘बुलबुले’ इस विश्वास से जन्मा है कि हर बच्चे के भीतर एक अद्भुत और जादुई दुनिया होती है, और जब उन्हें खुलकर सोचने की आज़ादी मिलती है, तो उनके विचार रंग-बिरंगी, जीवंत बुलबुलों की तरह उड़ने लगते हैं। यह उत्सव हर उस बच्चे की असीम संभावनाओं को उजागर करने का वादा करता है जो इस रंगीन माहौल में कदम रखता है। हमारा उद्देश्य है कि हर बच्चा कला, खेल और रचनात्मक सोच के ज़रिए अपनी आवाज़ और पसंद को आत्मविश्वास के साथ व्यक्त कर सके,” ऐसा कहना है।”

बुलबुले फेस्टिवल 2025 में आकर्षक प्रस्तुतियों, सहभागिता-आधारित कार्यशालाओं और खोजपरक गतिविधियों की विविध श्रृंखला शामिल होगी जिनका उद्देश्य बच्चों की जिज्ञासा, कल्पना और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन सभी के लिए खुला है, विशेषकर उन बच्चों के लिए जो सामान्यतः खेल और अनुभव के माध्यम से सीखने के अवसरों से वंचित रहते हैं। इस वर्ष, स्वतंत्र तालीम फाउंडेशन ने ‘बचपन मनाओ’, जो कि एकस्टेप फाउंडेशन की पहल है, के साथ साझेदारी की है। ‘बचपन मनाओ’ पहल का उद्देश्य हर बच्चे के जीवन में पहले आठ वर्षों के दौरान खेल और आनंद के माध्यम से सीखने के अवसरों को बढ़ाना है। यह एक ऐसा समुदाय है जिसमें 100 से अधिक “कोलैब-एक्टर्स” सक्रिय रूप से बच्चों के चारों ओर सहयोगी माहौल तैयार करने में जुटे हैं।

आयोजकों के अनुसार, इस फेस्टिवल में लगभग 500 बच्चे (10 वर्ष तक आयु वर्ग) अपने शिक्षकों और मार्गदर्शकों के साथ भाग लेंगे। यह दो दिवसीय आयोजन कल्पना, सीख और उल्लास का सामूहिक उत्सव बनेगा जहाँ बच्चे और बड़ों, दोनों के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय रहेगा।

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एड. असीम सरोदे की सनद निलंबन अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर सीधा हमला – ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन

भारतीय स्वरूप संवाददाता ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) ख्यातनाम मानवाधिकार वकील एड. असीम सरोदे की सनद बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा (BCMG) द्वारा निलंबित करने के निर्णय की तीव्र निंदा करती है। आरएसएस प्रेरित भाजपा सत्ता में आने के बाद से अपने विरोधी सभी आवाजों का गला घोंटने की प्रक्रिया चल रही है। राजनीतिक विरोधी, सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार तथा वकील आदि लोगों को सरकार निशाना बना रही है। AILU इस बात की सार्वजनिक निंदा करती है तथा उन पर की गई इस कार्रवाई को रद्द करने की मांग करती है। यह तीन माह का निलंबन आदेश केवल मार्च २०२४ में हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एड. सरोदे द्वारा की गई टिप्पणियों पर आधारित है, जहां उन्होंने न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली तथा संवैधानिक पदाधिकारियों की जवाबदारी पर भाष्य किया था। भाजपा के महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल पर टीका की तथा भाजपा के विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया, इस कथित कारण के लिए वकीलों की महाराष्ट्र तथा गोवा बार एसोसिएशन की अनुशासन संबंधी समिति ने तीन माह के निलंबन की कार्रवाई की है।

उक्त कार्यक्रम में एड. सरोदे ने न्याय वितरण तंत्र में प्रणालीगत विलंब, सामान्य नागरिकों को न्यायालय में न्याय प्राप्त करने में कठिनाइयों तथा संवैधानिक पदाधिकारियों की अधिक जवाबदारी की आवश्यकता पर बोला था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कुछ संवैधानिक पदों — जिनमें राज्यपाल का भी समावेश है — अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की पद्धति पर प्रश्न उठाए तथा लोकतंत्र में सभी संवैधानिक पदाधिकारी जनता के प्रति जवाबदार रहने चाहिए, इस आशय का कथन किया था। उनकी यह टिप्पणी रचनात्मक तथा लोकतांत्रिक भावना से की गई थी, जिसमें संवैधानिक ढांचे की संस्थाओं को पारदर्शी तथा जवाबदारी से कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की गई थी। शासन प्रायोजित विलंब में प्रणाली की त्रुटियों को उजागर करना किसी व्यक्ति की बदनामी करना या न्याय व्यवस्था का अपमान करना नहीं होता। यदि सरोदे ने किसी दल के आंतरिक कार्यक्रमों में कोई टिप्पणी की हो तो वह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। इससे उन्होंने किसी पद का अनादर नहीं किया है। स्वयं भाजपा के पूर्व राज्यपाल तथा विधानसभा अध्यक्ष ने भी इसके लिए कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं की है। ऐसे होने पर भी किसी तृतीय पक्ष तथा भाजपा कार्यकर्ता के आवेदन पर वकील बार काउंसिल की अनुशासन संबंधी समिति द्वारा निलंबन जैसी कठोर सजा देना अत्यंत अनुचित, गलत तथा दमनकारी है। एड. सरोदे ने कोई अनुशासन भंग या वकील के रूप में कोई अनैतिक आचरण नहीं किया है किंतु इसका कोई विचार बार काउंसिल द्वारा किया गया। बार काउंसिल जैसे नियामक बोर्ड को राजनीतिक प्रभावों से स्वयं को अलग रखते हुए अपने निर्णय लेने अपेक्षित होते हैं। भाजपा या किसी भी राजनीतिक शक्ति के लिए बार काउंसिल का दुरुपयोग न होने देना बार काउंसिल की जिम्मेदारी है। प्रसिद्ध पर्यावरणवादी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर हाल ही में देशद्रोह जैसे धारा के तहत दमनकारी कार्रवाई भाजपा सरकार द्वारा की गई है। इसी प्रकार देश में पत्रकार, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील पर कार्रवाई तथा दमन जारी है। संविधान द्वारा दिए गए जनता के अभिव्यक्ति स्वतंत्रता को अबाधित रखना सभी कानूनी संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इस कार्यक्रम के बाद भाजपा व आरएसएस से संबंधित व्यक्तियों ने महाराष्ट्र तथा गोवा बार एसोसिएशन (BCMG) के पास शिकायत दर्ज की। उस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बार काउंसिल ने १२ अगस्त २०२५ को एड. सरोदे की सनद तीन माह के लिए निलंबित करने का आदेश पारित किया। किंतु यह आदेश उन्हें ३ नवंबर २०२५ को अर्थात लगभग तीन माह बाद सूचित किया गया। आदेश सूचित करने में विलंब तथा आदेश के कारण स्पष्ट न करने से प्रक्रियात्मक न्याय तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन के संबंध में गंभीर संदेह उत्पन्न हुए हैं। कानून व्यवसाय के सदस्यों ने चिंता व्यक्त की है कि अनुशासनात्मक प्रक्रिया बाहरी दबाव या राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुई प्रतीत होती है, क्योंकि लोकतांत्रिक मत व्यक्त करने पर दंडात्मक कार्रवाई न तो न्यायोचित है, न ही संविधान में गारंटीकृत अभिव्यक्ति स्वतंत्रता से सुसंगत है।

स्वस्थ लोकतंत्र बनाए रखने के लिए वकील के रूप में न्याय व्यवस्था, सरकारी कृत्यों या संवैधानिक पदाधिकारियों पर टीका करना वकील का अधिकार तथा कर्तव्य है, प्रश्न उठाना तथा सुधार मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है; ऐसे आवाजों को दबाना दुष्कृत्य है। अनुशासनात्मक कार्रवाई का उपयोग कर वकीलों को चुप कराना कानून व्यवस्था को ही अन्याय करना है।

AILU मांग करती है कि बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा तत्काल निलंबन वापस ले तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) हस्तक्षेप कर अनुशासनात्मक तंत्र को स्वतंत्र, पारदर्शी तथा राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने की गारंटी करे। संवैधानिक मत व्यक्त करने पर वकील को निशाना बनाना खतरनाक है तथा लोकतंत्र की स्वतंत्रताओं के मूल आधार पर ही प्रहार है इसलिए इसे कदापि सहन नहीं किया जाएगा। एड. असीम सरोदे को उनकी सनद तत्काल बहाल की जाए। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन ॲड. असिम सरोदे के साथ पूर्ण एकजुटता से खड़ी है।

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सांसद खेल महोत्सव-2025 के अंतर्गत वॉकथॉन रैली आयोजित, उमड़े युवा

खेल से आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना होती है मजबूत:रमेश अवस्थी

दैनिक भारतीय स्वरूप कानपुर, 17 अक्टूबर। सांसद खेल महोत्सव-2025 का आगाज शुक्रवार सुबह ग्रीन पार्क स्टेडियम से भव्य वॉकथॉन रैली के साथ हुआ। रैली को सांसद रमेश अवस्थी और इंग्लैंड के वेलिंगबरो शहर के मेयर राज मिश्रा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली सरसैया घाट चौराहा होते हुए नानाराव पार्क में संपन्न हुई।

करीब पाँच हजार प्रतिभागियों ने इस वॉकथॉन में हिस्सा लिया। इसमें एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, युवक व महिला मंगल दल, पुलिस विभाग, सिविल डिफेंस, स्कूली छात्र-छात्राएं और विभिन्न खेल संघों के खिलाड़ी शामिल रहे। शहर में खेलों के प्रति जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश इस रैली के माध्यम से दिया गया।

सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि महोत्सव के तहत एक नवम्बर से 25 दिसम्बर तक विधानसभा स्तर पर कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जूडो, बैडमिंटन, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स सहित कई प्रतियोगिताएं होंगी। सब जूनियर, जूनियर और सीनियर वर्गों में होने वाले मुकाबलों के विजेता खिलाड़ी आगे सांसद खेल स्पर्धा, फिर जोन स्तर और अंततः राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे।

सांसद ने कहा कि खेल न केवल शारीरिक और मानसिक विकास का माध्यम हैं बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में जिला प्रशासन, पुलिस, खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, खिलाड़ियों, नागरिकों, एनसीसी, सिविल डिफेंस और पुलिस रिक्रूट्स के सहयोग के लिए आभार जताया। रैली के दौरान प्रतिभागियों को अवगत कराया गया कि “मा० सांसद खेल महोत्सव-2025” के शुभारंभ के उपरांत विधानसभा स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन 1 नवम्बर से 25 दिसम्बर 2025 तक किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न आयु वर्गों—सब जूनियर, जूनियर एवं सीनियर—के खिलाड़ियों के बीच कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जूडो, बैडमिंटन, भारोत्तोलन, एथलेटिक्स आदि विधाओं में प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी। विधानसभा स्तर पर विजयी खिलाड़ी सांसद खेल स्पर्धा में प्रतिभाग करेंगे, वहीं सांसद खेल स्पर्धा में विजयी प्रतिभागी जोन स्तर पर तथा उसके उपरांत राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। रैली में विधान परिषद सदस्य सलिल विश्नोई, विधायक महेश त्रिवेदी, मंडल अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, अन्य जनप्रतिनिधि और खेल संघों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं जिला प्रशासन की ओर से एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार, डीसीपी सेंट्रल, डीसीपी रवीन्द्र कुमार, नगर आयुक्त, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी भानु प्रसाद, जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला युवा कल्याण अधिकारी आरती जायसवाल ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

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कोविड के दौरान अपने माता-पिता खोने वाले बच्चों को डीएम ने दिया दीपावली का उपहार

*दीपावली पर जिलाधिकारी बने अभिभावक, 22 मासूमों संग साझा कीं खुशियाँ*

कानपुर नगर, 17 अक्तूबर। कलेक्ट्रेट सभागार शुक्रवार को दीपावली के दीपों से ज़्यादा उन नन्हीं आँखों की चमक से रोशन था, जिन्होंने कोविड महामारी में अपने माता पिता दोनों को खो दिया। गम के अंधेरे से गुज़र चुके इन बच्चों के चेहरों पर एक खास मुस्कान थी, जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने उन्हें मिठाई, दीया-बत्ती, चॉकलेट और किताबें भेंट कीं और कहा कि एक अभिभावक के रूप में वे हर पल उनके साथ खड़े हैं।

जिलाधिकारी ने बच्चों से कहा कि वे उनके जैविक पिता नहीं हैं लेकिन एक जिलाधिकारी के रूप में उनके वैधानिक अभिभावक हैं और उनकी देखभाल अभिभावक की तरह करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी बच्चा खुद को अकेला महसूस न करे, प्रशासन और सरकार हर पल उनके साथ है।

संवाद के दौरान बच्चों ने अपने सपनों को साझा किया। किसी ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, किसी ने इंजीनियर या चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का लक्ष्य रखा। कुछ बच्चों ने एथलीट बनने का सपना बताया तो कई ने आईएएस और आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी ने बच्चों को करियर काउंसलिंग दी और समझाया कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

कक्षा दसवीं की छात्रा गरिमा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह से उनके सपने ज़िंदा हैं। योजनाओं से मिलने वाली मदद से पढ़ाई बेहतर तरीके से हो रही है। उन्होंने कहा कि दीपावली को खास बनाने के लिए जिलाधिकारी का आभार है। सिंधुजा यादव ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें यह एहसास हुआ कि वे अकेली नहीं हैं। समाज और प्रशासन हर कदम पर उनका संबल बने हुए हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत शून्य से अठारह वर्ष की आयु तक के बच्चों को प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेईस वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें दस लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि मिलेगी जिससे उनकी उच्च शिक्षा और जीवन की राह आसान होगी। सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना से पाँच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त लैपटॉप और टैबलेट भी वितरित किए गए हैं, ताकि पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न आए।

जिन बच्चों को इस अवसर पर सम्मानित किया गया उनमें परिधि श्रीवास्तव, अद्वित मिश्रा, आराध्या मिश्रा, बबीता कपूर, सतीश कपूर, उत्कर्ष त्रिपाठी, वैष्णवी गुप्ता, अमन गुप्ता, नैतिक चड्ढा, परी मिश्रा, खुशी मिश्रा, रिद्धिमा कपूर, इशिता गुप्ता, तनिष्क गुप्ता, मानविक त्रिवेदी, अभिनव सिंह, गरिमा सिंह, अश्वनी कुमार, सिंधुजा यादव, संध्या, दिव्या और झलक शामिल हैं।

डीएम ने बच्चों के साथ आए परिजनों का आभार जताया और कहा कि रिश्तेदार और समाज यदि इन बच्चों की मदद के लिए आगे आते हैं तो यह पूरे प्रदेश के लिए सकारात्मक संदेश होगा।

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