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युवा जगत

राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के नई दिल्ली कैंपस की स्नातक प्रदर्शनी का आयोजन

राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के नई दिल्ली कैंपस की स्नातक प्रदर्शनी कल निफ्ट, दिल्ली में आयोजित की गई। ‘पूर्वावलोकन’ शीर्षक वाले इस कार्यक्रम में 2022 की कक्षा के स्नातक कार्यों के शानदार विवरण के साथ अनावरण किया गया। एक प्रभावशाली प्रदर्शनी में स्नातक परियोजनाओं ने रचनात्मकता और नवीनता को प्रदर्शित किया। फैशन प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित “क्रिएटिंग टेक्नोप्रीनर्स, टेक्नो समिट- 2022” उद्योग संगोष्ठी के तहत प्रौद्योगिकी में उद्यमिता को रेखांकित किया गया।

वस्त्र मंत्रालय के सचिव श्री उपेन्द्र प्रसाद सिंह इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। युवा स्नातकों के साथ बातचीत में श्री सिंह ने छात्रों से अपने लिए चुनिंदा क्षेत्रों में शानदार करियर बनाने के दौरान निफ्ट में निर्मित उत्कृष्टता की परंपरा को बनाए रखने का आह्वान किया।

वहीं, निफ्ट के महानिदेशक श्री शांतमनु ने छात्रों को आगे बढ़ने को लेकर एक प्रेरक स्थान प्रदान करने के लिए शिक्षकों को बधाई दी। वहीं, दिल्ली कैंपस की निदेशक- निफ्ट, आईआरएस श्रीमती मनीषा किन्नू ने युवा स्नातकों को उनके पाठ्यक्रम के सफल समापन पर बधाई दी। इस प्रदर्शनी में उन्होंने स्नातक करने वाले छात्रों के साथ बातचीत की। उन्होंने आगे युवा मस्तिष्कों से अपने नए करियर में नैतिक व सचेत रहने और “निफ्ट के ध्वज को ऊंचा रखने” का अनुरोध किया।

कोविड-19 महामारी के दौरान संस्थान ने अध्यापन और शिक्षण के नए तरीकों को अपनाया, जिससे इस कठिन समय में भी छात्रों के लिए सर्वश्रेष्ठ सुनिश्चित किया जा सके। कैंपस ऑनलाइन शिक्षण मोड को आगे बढ़ाया गया और शिक्षकों ने अपनी ओर से उत्कृष्ट प्रयास किए, जिससे छात्र अपने घर की सीमा से ही अपनी पूरी क्षमता के साथ इन तक पहुंच सकें। इस कार्यक्रम में शिक्षकों और स्नातक छात्रों के प्रयासों को प्रदर्शित किया गया और उद्योग व अकादमिक क्षेत्र की ओर से समान रूप से बहुत प्रशंसा और मान्यता प्राप्त हुई।

इस प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इनमें इको टसर से श्री खितिज पंड्या, डिवाइन डिजाइन की सुश्री अंजलि कालिया, ट्रिबर्ग से श्री संजय शुक्ला, पीएंडजी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड से श्री मनोज तुली, माइन ऑफ डिजाइन की ओर से श्रीमती प्रतिमा पाण्डेय, श्री गौरव गुप्ता, श्री जॉय मित्रा व श्रीमती अंबर परिधि, दा मिलानो से श्री साहिल मलिक, अल्पाइन अपैरल्स प्राइवेट लिमिटेड से श्री संजय लीखा सहित अन्य लोगों ने हिस्सा लिया। विशिष्टताओं के अलावा इस प्रदर्शनी में उद्योग के लिए तैयार और व्यापक अवधारणाओं से जुड़ी रियल टाइम परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। कुछ परियोजनाओं ने उद्योग विशिष्ट मुद्दों के लिए तकनीकी-युग समाधान प्रदान करने का प्रयास किया। वहीं, अन्य परियोजनाओं ने नवाचार संचालित प्रक्रियाओं और तकनीकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना वर्ष 1986 में की गई थी। अपनी स्थापना के बाद से ही निफ्ट ने फैशन शिक्षा में एक मानक स्थापित किया, जो डिजाइन, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी के एक प्रमुख संस्थान के रूप में सामने आ रही है। निफ्ट, पेशेवर रूप से प्रबंधित 17 कैंपस के एक नेटवर्क के जरिए तकनीकी क्षमता के साथ रचनात्मक प्रतिभा के अपने अद्वितीय एकीकरण सहित अकादमिक मानकों को स्थापित करता है और विचार नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करता है। निफ्ट अधिनियम, 2006 ने संस्थान को डिग्री और अन्य शैक्षणिक विशिष्टताओं को प्रदान करने का अधिकार दिया है।

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आर्टिफिशियल इंटे‍लीजेंस भारत में सड़कों को गाड़ी चलाने के लिए सुरक्षित बनाएगा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रेरित समाधान जल्द ही भारत में सड़कों को गाड़ी चलाने के लिए एक सुरक्षित स्थान बना सकते हैं। एक अद्वितीय एआई दृष्टिकोण जो सड़क पर जोखिमों की पहचान करने के लिए एआई की भविष्यसूचक शक्ति का उपयोग करता है और सड़क सुरक्षा से संबंधित कई सुधार करने के लिए ड्राइवरों को समय पर सावधान करने के लिए टकराव चेतावनी प्रणाली का उपयोग करता है, उसे दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाने के उद्देश्य से नागपुर शहर में लागू किया जा रहा है।

नागपुर में प्रोजेक्ट ‘इंटेलिजेंट सॉल्यूशंस फॉर रोड सेफ्टी थ्रू टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग’ (आईआरएएसटीई) वाहन चलाते समय संभावित दुर्घटना का कारण बनने वाले परिदृश्यों की पहचान करेगा और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) की मदद से ड्राइवरों को इसके बारे में सावधान करेगा। पूरे सड़क नेटवर्क पर लगातार गतिशील जोखिमों की निगरानी करके डेटा विश्लेषण और गतिशीलता विश्लेषण द्वारा ‘ग्रेस्पॉट्स’ की पहचान भी करेगा। ग्रेस्पॉट सड़कों पर ऐसे स्थान हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया वे ब्लैकस्पॉट (घातक दुर्घटनाओं वाले स्थान) बन सकते हैं। यह प्रणाली सड़कों की लगातार निगरानी करती है और डिजाइन इंजीनियरिंग निवारक रख-रखाव तथा बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे के लिए सड़क पर मौजूदा ब्लैकस्पॉट को ठीक रखती है। आईआरएएसटीई परियोजना टेक्नोलॉजी वर्टिकल- डेटा बैंक और डेटा सेवाओं में प्रौद्योगिकी क्षेत्र के एक नवाचार हब (टीआईएच) आई-हब फाउंडेशन, आईआईआईटी हैदराबाद के अधीन है जो आईएनएआई (एप्लाइड एआई रिसर्च इंस्टीट्यूट) के साथ इंटरडिसिप्लिनरी साइबर फिजिकल सिस्टम्स (एनएम-आईसीपीएस) पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित इसके राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत है। परियोजना संघ में सीएसआईआर-सीआरआरआई और नागपुर नगर निगम शामिल हैं, जिसमें महिंद्रा और इंटेल उद्योग भागीदार हैं।

wps1 हब व्यापक डेटा-संचालित प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ देश भर में इसके प्रसार और रुपांतरण में बुनियादी और प्रायौगिक अनुसंधान को समन्वित, एकीकृत और बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। प्राथमिक उद्देश्यों में से एक शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और उद्योग, मुख्य रूप से स्मार्ट मोबिलिटी, हेल्थकेयर के साथ-साथ स्मार्ट बिल्डिंग के क्षेत्रों में भविष्य के उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन तैयार करना है। जो बात आईआरएएसटीई परियोजना को और भी अद्वितीय बनाती है वह यह है कि एआई और प्रौद्योगिकी को भारतीय परिस्थितियों के लिए एक ब्‍‍लूप्रिंट के रूप में व्यावहारिक समाधान बनाने के लिए लागू किया जा रहा है। जबकि आईआरएएसटीई प्रारंभ में नागपुर में उपलब्‍‍ध है, अंतिम लक्ष्य अन्य शहरों में इसे दोहराना है। वर्तमान में, उन बसों के बेड़े के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने की तेलंगाना सरकार के साथ बातचीत चल रही है जो राजमार्गों पर चलती हैं। आईआरएएसटीई के दायरे को गोवा और गुजरात में भी विस्तारित करने की योजना है। आई-हब फाउंडेशन ने मोबिलिटी क्षेत्र में कई अन्य डेटा-संचालित तकनीकी समाधानों के लिए मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विज़न और कम्प्यूटेशनल सेंसिंग से लेकर तकनीकों का भी उपयोग किया है। ऐसा ही एक समाधान इंडिया ड्राइविंग डेटासेट (आईडीडी) है, जो भारतीय सड़कों के अव्‍‍यवस्थित वातावरण में सड़क के दृश्य को समझने के लिए एक डेटासेट है, जो अच्छी तरह से वर्णित बुनियादी ढांचे की दुनिया भर की धारणाओं जैसे कि गलियाँ, सीमित ट्रैफिक प्रतिभागी, वस्तु या पृष्ठभूमि की उपस्थिति में कम भिन्नता और ट्रैफिक नियमों के मजबूत पालन से स्‍पष्‍ट होता है। डेटासेट, अपनी तरह का पहला है, जिसमें 10,000 चित्र शामिल हैं, जिसकी हैदराबाद, बैंगलोर और उनके बाहरी इलाके में चल रही एक कार से जुड़े फ्रंट-फेसिंग कैमरे से प्राप्त भारतीय सड़कों पर 182 सड़क श्रेणियों से एकत्र 34 वर्गों के साथ बारीकी से व्‍याख्‍या की गई है। सार्वजनिक लाइसेंस के तहत अप्रतिबंधित उपयोग के लिए सार्वजनिक डोमेन में डेटासेट जारी किया गया है और भारतीय सड़क दृश्यों पर सभी विश्लेषण के लिए एक वास्तविक डेटासेट बन रहा है। वर्तमान में, दुनिया भर में इस डेटासेट के लिए 5000 से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। ओपन वर्ल्ड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन ऑन रोड सीन (ओआरडीईआर) नामक एक अन्य डेटासेट को भी इंडिया ड्राइविंग डेटासेट का उपयोग करके विकसित किया गया है जिसका उपयोग भारत की ड्राइविंग स्थितियों में स्वायत्त नेविगेशन प्रणाली द्वारा सड़क दृश्य में वस्‍‍तु के स्थानीयकरण और वर्गीकरण के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, एक मोबिलिटी कार डेटा प्लेटफ़ॉर्म (एमसीडीपी) को कई सेंसरों के साथ डिज़ाइन किया गया है – कैमरा, एलआईडीएआर, किसी को भी कार के बारे में डेटा लेने या प्रोसेस करने के लिए आवश्यक गणना के साथ, जो भारत में शोधकर्ताओं और स्टार्ट-अप को उनके ऑटोमोटिव एल्गोरिदम और नेविगेशन तथा भारतीय सड़कों पर शोध में दृष्टिकोण का परीक्षण करने में मदद कर सकता है। लेन रोडनेट (एलआरनेट), एक एकीकृत तंत्र के साथ एक नया ढांचा है, जिसमें गहरे अध्‍‍ययन का उपयोग करते हुए लेन और सड़क के मापदंडों पर विचार किया गया है, जिसे भारतीय सड़कों की समस्याओं को दूर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें कई बाधाएं हैं, बंद लेन के निशान, टूटे हुए डिवाइडर, दरारें, गड्ढे आदि हैं जो गाड़ी चलाते समय ड्राइवर के लिए काफी जोखिम खड़े करते हैं। इस ढांचे में, एक मॉड्यूलर स्कोरिंग फ़ंक्शन की मदद से एक सड़क गुणवत्ता स्कोर की गणना की जाती है। फाइनल स्कोर अधिकारियों को सड़क की गुणवत्ता का आकलन करने और सड़क के रख-रखाव कार्यक्रम को प्राथमिकता देने में मदद करता है ताकि ड्राइवर को गाड़ी चलाने के लिए सुधरी हुई स्थितियां मिल सकें। जिन सड़कों पर वृक्ष नहीं हैं वहां उपयुक्त कायाकल्प विधियों को प्रयोग में लाकर स्थानीय स्व-सरकारी संस्थानों की मदद के लिए, आई-हब फाउंडेशन ने सड़क पर पेड़ का पता लगाने, गणना और कल्पना के लिए एक रूपरेखा तैयार की है जो ऑब्जेक्ट डिटेक्टरों और एक मैचिंग काउंटिंग एल्गोरिदम का उपयोग करती है। इस कार्य ने पेड़ों की कमी वाली सड़कों को पहचानने का त्वरित, सटीक और सस्ते तरीके का पता लगाने का मार्ग प्रशस्त किया है ।

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संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री  मीनाक्षी लेखी ने ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की 7वीं बैठक में भाग लिया

संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री  मीनाक्षी लेखी ने ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की 7वीं बैठक में भाग लिया। इस बैठक को चीन गणराज्य द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गया था।

ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रगति और विस्तार के लिए “ब्रिक्स के बीच समावेश और आपस में ज्ञान का साझा करने वाली सांस्कृतिक साझेदारी स्थापित करने” के थीम पर इस बैठक में चर्चा हुई। चर्चा का मुख्य फोकस क्षेत्र में सांस्कृतिक डिजिटलीकरण पर विकास और सहयोग को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर सहयोग को मजबूत करना और ब्रिक्स देशों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्लेटफार्मों के निर्माण को आगे बढ़ाना था। मंत्रियों ने सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने और 2015 में हस्ताक्षरित ब्रिक्स सांस्कृतिक सहयोग समझौते को लागू करने के लिए ब्रिक्स कार्य योजना 2022-2026 को अपनाया।

श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और अपने संबोधन में निम्नलिखित बिंदुओं को सामने रखा:

(i)            भारत अपनी विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के साथ संगीत, रंगमंच, कठपुतली का खेल, विभिन्न आदिवासी कला और नृत्य के विशेष रूप से शास्त्रीय और लोक क्षेत्र में आदान-प्रदान कार्यक्रमों/गतिविधियों के माध्यम से ब्रिक्स देशों को सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराने के लिए एक मंच प्रदान करना सुनिश्चित करता है।

(ii)           कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के कारण पिछले ढाई साल के दौरान फीजिकल मूवमेंट संभव नहीं हो पाया है। इसके बावजूद संस्कृति सहित सभी मोर्चों पर जीवन को आगे बढ़ाने में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

(iii)          सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में मूल्यवान संग्रह को डिजिटाइज करना और उन्हें खुले सूचना स्थान में प्रस्तुत करना भारत की प्राथमिकता है क्योंकि यह संग्रहालयों और पुस्तकालयों जैसे सांस्कृतिक संस्थानों में संग्रहीत सांस्कृतिक सामग्री के लिए लंबी अवधि के लिए संग्रहण और व्यापक पहुंच प्रदान करता है। ब्रिक्स देशों की आभासी प्रदर्शनियों के माध्यम से ब्रिक्स देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का पता लगाया जा सकता है।

(iv)         भारत सांस्कृतिक विरासत और इन्टर्कल्चरल डायलग की विविधता में विश्वास करता है। यह पर्यावरण संबंधी चिंताओं के लिए नवीन और संस्कृति-आधारित समाधानों में विरासत और पारंपरिक ज्ञान को एकीकृत करने वाले स्थायी और लचीले पर्यावरण की पुरजोर वकालत करता है।

(v)          भारत की कला अपनी समृद्ध विरासत और अपने आधुनिक इतिहास का एक मिश्रण है। इसने निस्संदेह भारत को एक सक्रिय और रचनात्मक इकाई के रूप में स्थापित किया है जो आज कला जगत का एक अभिन्न अंग है।

(vi)         आज की पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के आलोक में, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विकास प्रतिमानों की दिशा में काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। समय की मांग एक रोडमैप है जो सांस्कृतिक विरासत, सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों और लोगों की सहज कल्पना और सामूहिक बुद्धि की समझ को एकीकृत करना चाहिए।

उन्होंने अध्यक्ष को धन्यवाद दिया और सभी क्षेत्रों में प्रगतिशील और व्यापक ब्रिक्स सहयोग की कामना की।

बैठक के अंत में, ब्रिक्स राज्यों की सरकारों के बीच संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग (2022-2026) के बीच समझौते के कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना पर सहमति हुई और सभी ब्रिक्स राष्ट्रों के संस्कृति मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए।

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जिलाधिकारी की अध्यक्षता मे कलेक्ट्रेट सभागार में उद्योग बन्धु की बैठक सम्पन्न

कानपुर 25 मई भारतीय स्वरूप संवाददाता, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभागार में उद्योग बन्धु की बैठक सम्पन्न हुई । बैठक में उन्होंने समस्त सम्बंधित अधिकारियों को स्पस्ट निर्देश देते हुए कहा कि समस्त संबंधित अधिकारी स्वयं बैठक में उपस्थित हूं अपनी प्रतिनिधि को बैठक में ना भेजें । उन्होंने कहा कि उधमियों की आने वाली समस्याओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित कराया जाए । उधमियों को किसी प्रकार की कोई समस्या नही होने चाहिए । औधोगिक इकाइयों में सफाई कर्मियों द्वारा सफाई कराई जाती रहे । जहां पर सफाई कर्मचारी नही है वहा सफाई कर्मचारी की तैनाती की जाए। औद्योगिक क्षेत्र में ट्रकों के आवागमन हेतु बैठक कर व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए ताकि औद्योगिक इकाइयों को किसी प्रकार की समस्या ना हो। बैठक में अपर जिलाधिकारी नगर श्री अतुल कुमार डीसी डीआईसी श्री सुधीर कुमार , श्री सुरेंद्र सिंह समेत उद्यमी उपस्थित रहे।

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मैडम सर’ ने 500 शानदार एपिसोड्स पूरे किए, शो के कलाकारों ने मनाया इस उपलब्धि का जश्‍न!

‘मैडम सर’ ने 500 शानदार एपिसोड्स पूरे किए, शो के कलाकारों ने अपने अंदाज में मनाया इस उपलब्धि का जश्‍न!

सोनी सब के शो ‘मैडम सर’ ने सफलतापूर्वक 500 एपिसोड पूरे कर लिए हैं। यही वह समय है कि भारत की सबसे चहेती महिला पुलिस अधिकारियों के लिये हम सब जमकर ताली बजाएं। दो साल पहले अपने लॉन्‍च के बाद से ही, इस शो ने महिलाओं के नेतृत्‍व वाले मजबूत किरदारों और सोच-विचार कर बनाई गईं कहानियों एवं प्‍लॉट के साथ दर्शकों को काफी लुभाया है। इस शो में एसएचओ हसीना मलिक (गुल्‍की जोशी), करिश्‍मा सिंह (युक्ति कपूर), संतोष (भाविका शर्मा), पुष्‍पा सिंह (सोनाली नाईक) और चीता चतुर्वेदी (प्रियांशु सिंह) मुख्‍य भूमिकाएं निभा रहे हैं। शो में बड़े आत्‍मविश्‍वास और बेहतरीन तरीके से एक महिला पुलिस थाने को संभालने में रोजाना आने वाली चुनौतियाँ दिखाई गई हैं। इसके किरदारों ने अजीब से अजीब मामलों को पूरे ‘जज्‍बात’ के साथ और सबसे अभिनव तरीकों से सुलझाया है। पिछले 500 एपिसोड्स में ‘मैडम सर’ ने अनगिनत सामयिक विषयों और निजी अनुभवों को छुआ है, जो ऐसी लड़कियों के लिये प्रेरक हैं, जिन्‍हें अपने काम में महारथ पाने और उसे सहजता से करने की आकांक्षा है। महिला सशक्तिकरण से लेकर, दबंगई, सामाजिक रूढि़यों, मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य, आदि तक इस शो ने प्रासंगिक मुद्दों को ऐसी कहानियों के जरिए दिखाया है जोकि एक सकारात्‍मक एवं महत्‍वपूर्ण असर पैदा करने के लिए समाधान प्रदान करती हैं। आज हासिल हुई उपलब्धि के साथ ‘मैडम सर’ नये रास्‍तों पर बढ़ने के लिये तैयार है, और यह दर्शकों को बांधकर रखने की कोशिश करता रहेगा।  इस उपलब्धि पर अपनी बात रखते हुए, हसीना मलिक की भूमिका निभा रहीं गुल्‍की जोशी ने कहा, “मुझे ‘मैडम सर’ का हिस्‍सा बनकर बहुत गर्व और खुशी है, क्‍योंकि यह शो समस्‍याओं को हल करने की नई-नई विधियों से दयालुता और हास्‍य के भाव को फैलाता है। एक एक्‍टर के तौर पर इसमें मैंने न केवल नये लुक्‍स और शख्सियतों को अपनाया, बल्कि परफॉर्मेंस के मामले में भी मेरा दायरा बढ़ा। हमारे शो को दर्शकों से अब तक मिली प्रतिक्रिया काफी संतोषजनक रही है और हम आगे और भी ज्‍यादा एडवेंचर्स लाकर दर्शकों का मनोरंजन जारी रखना चाहते हैं। 500 एपिसोड्स पूरे करने और यह बेजोड़ उपलब्धि हासिल करने के लिये पूरी टीम को शाबाशी मिलनी चाहिये। यह ‘मैडम सर’ की यात्रा में एक नये अध्‍याय की शुरूआत है।‘’ करिश्‍मा सिंह की भूमिका निभा रहीं युक्ति कपूर ने कहा, “मैं 500 शानदार एपिसोड्स पूरे होने पर पूरे दिल से हमारी टीम को बधाई देना चाहती हूँ। यह उपलब्धि हासिल करने का अनुभव सपने जैसा लग रहा है और यह हमारी उस कड़ी मेहनत को दिखाता है, जो इस कहानी को पर्दे पर जीवंत करने में लगी है। इस शो ने हमें एक्‍टर के तौर पर कई बारीकियाँ जानने का मौका दिया और इसके नेरेटिव भी आधुनिक समय के हैं। ऐसे बेहतरीन कलाकारों और क्रू के साथ काम करना मैं अपना सौभाग्‍य मानती हूँ, जिन्‍होंने हमेशा मेरा साथ दिया। मैं ऐसी और भी उपलब्धियों की कामना करती हूँ।” संतोष की भूमिका निभा रहीं भाविका शर्मा ने कहा, “इतनी बड़ी उपलब्धि का हिस्‍सा बनकर मैं बहुत खुश और आभारी हूँ। एक शो को इतने लंबे समय तक चलाना और दर्शकों के लिये प्रासंगिक बनाये रखना कठिन है, लेकिन ‘मैडम सर’ ने कौतुहल पैदा करने और मनोरंजन देने वाली कहानियों के साथ एक बदलाव करके दिखाया है। एक टीम के तौर पर हमने इस शो को सफल बनाने के लिये बड़ी कोशिश की है और मैं दर्शकों से आग्रह करती हूँ कि वे हमें अपना प्‍यार और सहयोग लगातार देते रहें।” देखते रहिये ‘मैडम सर’, सोमवार से शनिवार रात 10 बजे, सिर्फ सोनी सब पर!

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हर साल बिजली का संकट

हर साल की तरह इस साल भी गर्मी ने लोगों को बुरी तरह परेशान कर रखा है ऐसे में बिजली कटौती लोगों का जीना दुश्वार कर रही है। इस भीषण गर्मी के बीच देश में गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है। मांग के अनुपात में बिजली नहीं मिल पा रही है। बारह राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहे हैं। कोयले की कमी के कारण उत्पन्न हुआ यह संकट कोई पहली बार नहीं है। पिछले साल भी यह संकट गहराया था लेकिन इस बार बिजली की किल्लत कुछ ज्यादा ही महसूस की जा रही है। कई राज्यों में बिजली कटौती की घोषणा कर दी गई है जिसकी वजह से आम जन परेशान हो गए हैं। चालू वित्त वर्ष में कोल इंडिया का बिजली कंपनियों को करीब 21.600 करोड़ रूपया बकाया था अब भी कोल इंडिया का बिजली कंपनियों पर 12,300 करोड़ों का बकाया है और बिजली का यह संकट कर्ज ना चुका पाने के कारण है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) की डेली कोल स्टॉक रिपोर्ट के मुताबिक 165 थर्मल पावर स्टेशनों में से 56 में से 10 फ़ीसदी या उससे कम कोयला बचा है। कम से कम 26 के पास पांच फीसदी से भी कम स्टॉक है। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों के पास एक दिन से भी कम का कोयला बचा है। बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर जलापूर्ति व्यवस्था पर संसाधनों पर पड़ा है बिजली कटौती से आम जनता को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा हैं। इसके अलावा अस्पताल और मेट्रो सेवाओं में बाधा उत्पन्न होगी सो अलग। बिजली संकट से जो स्थिति उत्पन्न हो गई है वो तकलीफ देने के लिए काफी है। वह भविष्य में आने वाले संकटों के लिए आगाह कर रही है और बारह राज्यों में बिजली कटौती का अर्थ यह नहीं है अन्य प्रदेश इस संकट से बचे हुए हैं। इस संकट की आहट उन्हें भी महसूस हो गई है। बिजली प्रबंधन के मामले में देश में बहुत लचर व्यवस्था चल रही है और इसी वजह से यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। लगभग हर साल यही सुनने में आता है कि एक-दो दिन की बिजली के लिए कोयला बचा है। लगभग सभी ताप बिजलीघर आधे से भी कम क्षमता पर चल रहे हैं। यदि कोयला समाप्ति पर है तो आगे की व्यवस्था, रखरखाव और मरम्मत किस प्रकार होगी? और सरकार इस अव्यवस्था को नजरअंदाज कर रही है। सरकार का ध्यान ग्रीन एनर्जी  की तरफ ज्यादा है।
अब वैकल्पिक ऊर्जा को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है और इसी वजह से परंपरागत ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा का सामंजस्य ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण बिजली संकट बढ़ते जा रहा है।
वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा जरूर दिया जा रहा है लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में जागरूकता और बहुत कार्य करने की जरूरत है साथ ही प्रबंधन व्यवस्था को सुधारना अति आवश्यक है यदि इनमें सुधार कर लिया गया तो संकट काफी हद तक दूर हो जाएगा। विभिन्न  सरकारें सब्सिडी या मुफ्त बिजली दे रही है लेकिन इस राशि का भुगतान विद्युत वितरण कंपनियों को नियमित रूप से नहीं कर रही है। बिजली संकट दूर करने के लिए प्रबंधन में सुधार अत्यावश्यक है।

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राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) ने लक्षद्वीप के तट से दूर बीच समुद्र में छापा मार कर 218 किलोग्राम हेरोइन जब्त की

ल्रगातार  कई महीनों तक विशिष्ट खुफिया जानकारी हासिल कर लेने के बाद  राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने यह पक्‍का अनुमान लगा लिया था कि दो भारतीय नावें तमिलनाडु के तट से रवाना होंगी और मई 2022 के दूसरे/तीसरे सप्ताह के दौरान अरब सागर में कहीं न कहीं उन पर भारी मात्रा में मादक द्रव्‍य या नशीले पदार्थ लादे जाएंगे। तदनुसार, भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) के साथ मिलकर डीआरआई का एक संयुक्त अभियान ऑपरेशन खोजबीन के कोडनेम से 7 मई 2022 को शुरू किया गया था। इस कार्रवाई के तहत तटरक्षक जहाज सुजीत, जिस पर डीआरआई के कई अधिकारी सवार थे, विशेष आर्थिक जोन के निकट निरंतर कड़ी निगरानी रखता था। समुद्र में अक्‍सर तूफान आने के बीच लगातार कई दिनों तक तलाश और निगरानी करने के बाद दो संदिग्ध नौकाओं ‘प्रिंस’ और ‘लिटिल जीसस’ को भारत की ओर बढ़ते हुए देखा गया। इन दोनों ही भारतीय नौकाओं को 18 मई 2022 को लक्षद्वीप के तट से दूर आईसीजी और डीआरआई के अधिकारियों ने रोक लिया था। पूछताछ करने पर इन दोनों ही नौकाओं के चालक दल के कुछ सदस्यों ने यह स्वीकार कर लिया कि उन्हें बीच समुद्र में भारी मात्रा में हेरोइन मिली थी और उन्होंने इसे इन दोनों नौकाओं में छिपा दिया था। इसे देखते हुए इन दोनों ही नौकाओं को इस दिशा में आगे की कार्यवाही के लिए कोच्चि ले जाया गया। कोच्चि स्थित तटरक्षक के जिला मुख्यालय में इन दोनों ही नौकाओं की गहन तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्येक 1 किलो के 218 पैकेटों में छिपाकर रखी गई हेरोइन बरामद हुई। एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत जब्ती की कार्रवाई फि‍लहाल डीआरआई द्वारा की जा रही है। इस मामले में विभिन्न स्थानों पर लगातार तलाशी ली जा रही है और आगे की जांच की जा रही है।

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इस अभि‍यान के तहत डीआरआई और आईसीजी द्वारा सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई एवं फि‍र उस पर अमल किया गया और लगातार कई दिनों तक समुद्र में अक्‍सर तूफान आने के बीच व्यापक निगरानी की गई। जब्त की गई नशीली दवा हाई-ग्रेड हेरोइन की प्रतीत होती है और अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी कीमत लगभग 1,526 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। हाल के दिनों में आईसीजी और डीआरआई ने नशीली दवाओं की तस्करी से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। पिछले एक महीने में डीआरआई की ओर से यह नशीली दवाओं का चौथा बड़ा भंडाफोड़ है। इससे पहले डीआरआई ने 20.04.2022 को कांडला बंदरगाह पर जिप्सम पाउडर की एक वाणिज्यिक आयात खेप से 205.6 किलोग्राम हेरोइन, 29.04.2022 को पिपावाव बंदरगाह पर 396 किलो सूत (हेरोइन युक्‍त), और 10.05.2022 को एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स, आईजीआई, नई दिल्ली में 62 किलो हेरोइन बरामद की थी जिनकी कुल कीमत अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में लगभग 2,500 करोड़ रुपये आंकी गई है।

अप्रैल 2021 से लेकर अब तक डीआरआई ने 3,800 किलोग्राम से भी अधिक हेरोइन जब्त की है, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में लगभग 26,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। सितंबर 2021 में मुंद्रा में 3,000 किलो हेरोइन की जब्ती; जुलाई 2021 में न्हावा शेवा बंदरगाह पर 293 किलो हेरोइन की जब्‍ती; और फरवरी 2022 में नई दिल्ली के तुगलकाबाद में 34 किलो हेरोइन की जब्ती भी शामिल है। इसके अलावा अनेक हवाई यात्रियों से भी हेरोइन की बरामदगी की गई है। इसके अतिरिक्‍त, इसी अवधि के दौरान 350 किलोग्राम से भी अधिक कोकीन डीआरआई द्वारा जब्त की गई थी, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में लगभग 3,500 करोड़ रुपये आंकी गई है और जिसमें अप्रैल 2021 में तूतीकोरिन बंदरगाह पर एक कंटेनर से 303 किलोग्राम कोकीन की अब तक की सर्वाधिक मात्रा में जब्‍ती भी शामिल है। वहीं, दूसरी ओर आईसीजी ने पिछले 3 वर्षों में अपने विभिन्न अभियानों के तहत लगभग 6,200 करोड़ रुपये मूल्य के लगभग 3 टन नशीले पदार्थ बरामद किए हैं, जिससे अब तक नशीली दवाओं की कुल बरामदगी 12,206 करोड़ रुपये की आंकी गई है। इस तरह के उल्लेखनीय मामलों में श्रीलंकाई नौकाओं शेनाया दुवा और रविहांसी को पकड़ा जाना शामिल है, इन दोनों ही नौकाओं को नशीली दवाओं और विभिन्‍न हथियारों जैसे कि एके-47 और पिस्तौल के साथ पकड़ा गया था। हाल ही में ईरानी नौका जुम्मा, पाक नौका अल हुसेनी और अल हज को पकड़ा गया था। मादक द्रव्‍यों की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों के खिलाफ आईसीजी और डीआरआई का संयुक्त अभियान समुद्री मार्गों के जरिए देश में नशीली दवाओं के प्रवाह को बाधित करने में कामयाब रहा है।

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ओला और उबर को उपभोक्ता अधिकारों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के उल्लंघन पर नोटिस जारी

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ओला और उबर, दो ऑनलाइन सवारी उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म को अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के लिए को नोटिस जारी किया है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के आंकड़ों के अनुसार, 01.04.2021 से 01.05.2022 तक, उपभोक्ताओं द्वारा ओला के खिलाफ 2,482 शिकायतें दर्ज की गईं और उबर के खिलाफ 770 शिकायतें दर्ज की गईं। पिछले सप्ताह, विभाग ने सवारी उपलब्ध कराने वाली कंपनियों ओला, उबर, रैपिडो, मेरु कैब्स और जुगनू के साथ बैठक में उन्हें उपभोक्ताओं के लिए बेहतर शिकायत निवारण और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 और ई-कॉमर्स नियम का अनुपालन करने के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में अभिसरण भागीदार बनने का निर्देश दिया।

नोटिस में उठाए गए प्राथमिक मुद्दों में शामिल हैं: –

· सेवा में कमी जिसमें ग्राहक सहायता से उचित प्रतिक्रिया की कमी, ड्राइवर द्वारा ऑनलाइन मोड से भुगतान लेने से इनकार करना और केवल नकद के लिए जोर देना, पहले से कम शुल्क पर एक ही मार्ग पर जाने के बावजूद अधिक शुल्क लिया जाना, अव्यवसायिक चालक व्यवहार और ड्राइवर द्वारा एसी को चलाने से इनकार करना शामिल है, जब कि उपभोक्ता को ऐप पर एसी की सवारी का वादा किया जाता है।

· ग्राहक सेवा संख्या और शिकायत अधिकारी के विवरण, दोनों के अभाव में अपर्याप्त उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र, जैसा कि प्लेटफॉर्म पर उल्लेख किया जाना आवश्यक है।

· रद्दीकरण शुल्क की अनुचित वसूली जिसमें उपयोगकर्ताओं को वह समय नहीं दिखाया जाता है जिसके भीतर एक सवारी को यात्रा रद्द करने की अनुमति है। राइड बुक करने से पहले रद्द करने के शुल्क की राशि प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं होती है। अनुचित रद्दीकरण शुल्क उपयोगकर्ताओं द्वारा वहन किया जाता है जब उन्हें ड्राइवर द्वारा सवारी स्वीकार करने या पिक-अप स्थान पर आने की अनिच्छा के कारण सवारी को रद्द करने के लिए मजबूर किया जाता है।

· दो व्यक्तियों से एक ही मार्ग के लिए अलग-अलग किराए वसूलने के लिए कंपनी द्वारा उपयोग किए जाने वाले एल्गोरिदम या विधि के बारे में किसी भी जानकारी का अभाव

· प्रत्येक सवारी से पहले स्पष्ट और सकारात्मक कार्रवाई द्वारा सहमति प्राप्त किए बिना ऐड-ऑन सेवाओं को शामिल करने के लिए पूर्व-चिह्नित बक्सों द्वारा ऐड-ऑन सेवाओं के लिए शुल्क शामिल करना।

यह उल्लेख किया जा सकता है कि देश भर में उपभोक्ताओं द्वारा कई मुद्दों पर शिकायतें दर्ज की गई हैं, जो दोनों राइड उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म के माध्यम से बुक की गई उनकी सवारी को प्रभावित करती हैं। सीसीपीए देश में उपभोक्ता संरक्षण परिदृश्य की नियमित रूप से निगरानी कर रहा है। हाल ही में, सीसीपीए ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वायरलेस जैमर की अवैध बिक्री और सुविधा के खिलाफ एडवाइजरी जारी की। सीसीपीए ने सभी मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के लिए एक परामर्श भी जारी किया है कि उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के नियम 6 के उप-नियम (5) के अंतर्गत अनिवार्य रूप से विक्रेताओं का विवरण, नाम और संपर्क नंबर सहित शिकायत अधिकारी को स्पष्ट और सुलभ तरीके से उपलब्ध कराया जाता है, जो मंच पर उपयोगकर्ताओं को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाता है। इसके अलावा, सीसीपीए ने अधिनियम की धारा 18 (2) (जे) के अंतर्गत सुरक्षा नोटिस भी जारी किए हैं ताकि उपभोक्ताओं को ऐसे सामान खरीदने के प्रति सतर्क और सावधान किया जा सके जो वैध आईएसआई मार्क वाले नहीं होते हैं और अनिवार्य बीआईएस मानकों का उल्लंघन करते हैं। पहला सुरक्षा नोटिस 06.12.2021 को हेलमेट, प्रेशर कुकर और रसोई गैस सिलेंडर के संबंध में जारी किया गया था और दूसरा सुरक्षा नोटिस 16.12.2021 को जारी किया गया था, जिसमें इलेक्ट्रिक इमर्शन वॉटर हीटर, सिलाई मशीन, माइक्रोवेव ओवन, एलपीजी आदि के साथ घरेलू गैस स्टोव सहित घरेलू सामान शामिल थे।

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केंद्र ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय आयोगों को एक महीने से अधिक के लिए स्थगन नहीं देने और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे में तेजी लाने के लिए कहा

उपभोक्ता कार्य विभाग (डीओसीए) ने उपभोक्ता शिकायतों का जल्द निपटाने सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला आयोगों के रजिस्ट्रारों और अध्यक्षों को  पत्र लिखकर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत प्रदान की गई समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक महीने से अधिक के लिए स्थगन आदेश नहीं देने को कहा है। स्थगन अनुरोधों के कारण शिकायतों के समाधान में 2 महीने से अधिक की देरी के मामले में, आयोग पार्टियों पर लागत लगाने पर विचार कर सकता है। सचिव डीओसीए श्री रोहित कुमार सिंह ने अपने पत्र में उपभोक्ताओं को सस्ता, परेशानी मुक्त और जल्द न्याय दिलाने पर जोर दिया है। इस पत्र में कहा गया है कि बार-बार और लंबे समय तक स्थगन न केवल उपभोक्ता को उसके सुनने और उसके निवारण के अधिकार से वंचित करता है, बल्कि उस अधिनियम की भावना को भी खत्म कर देता है जिसका विधायिका ने इरादा किया था। इसलिए, उपभोक्ता आयोगों से अनुरोध है कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी परिस्थिति में लंबी अवधि के लिए स्थगन प्रदान नहीं किया जाए। इसके अलावा, किसी भी पक्ष द्वारा स्थगन के दो से अधिक अनुरोधों के मामले में, उपभोक्ता आयोग निवारक उपाय के रूप में पार्टियों पर लागत लगा सकता है। अधिनियम की धारा 38(7) के तहत शिकायत स्वीकार करने की प्रक्रिया पर उपभोक्ता आयोगों का ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र में जोर दिया गया है कि प्रत्येक शिकायत का यथासंभव शीघ्र निपटारा किया जाना आवश्यक है और विरोधी पक्ष द्वारा नोटिस प्राप्त होने की तारीख से 3 महीने की अवधि के भीतर जहां शिकायत के लिए वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है और यदि वस्तुओं के विश्लेषण या परीक्षण की आवश्यकता होती है तो 5 महीने के भीतर शिकायत पर निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा, अधिनियम यह भी कहता कि कोई भी स्थगन आमतौर पर उपभोक्ता आयोगों द्वारा तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि पर्याप्त कारण नहीं दिखाया गया हो और स्थगन के कारणों को लिखित रूप में दर्ज नहीं किया गया हो। आयोगों को स्थगन से होने वाली लागतों के बारे में आदेश देने का भी अधिकार है। यह उल्लेख किया जा सकता है कि अधिनियम की धारा 38(2)(ए) के अनुसार आयोग स्वीकार की गई शिकायत की एक प्रति विरोधी पक्ष को 30 दिनों की अवधि के भीतर या विस्तारित 15 दिनों की अवधि के भीतर मामले पर अपना पक्ष देने का निर्देश देगा, जो इसके द्वारा दी जा सकती है। धारा 38(3)(बी)(ii) में आगे प्रावधान है कि यदि विरोधी पक्ष कोई कार्रवाई करने में या निर्धारित समय के भीतर अपने मामले को पेश करने में विफल रहता है, तो आयोग साक्ष्य के आधार पर एक पक्षीय निर्णय लेने के लिए आगे बढ़ सकता है। इसके अलावा, पत्र में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम हिली मल्टीपर्पज कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के 04.03.2020 को दिए फैसला का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि उपभोक्ता आयोगों के पास शिकायतों का जवाब दाखिल करने के लिए अधिनियम की धारा 13 में उल्लिखित 30 दिनों के अतिरिक्त 15 दिनों की अवधि के अलावा और समय बढ़ाने की कोई शक्ति नहीं है। मेसर्स डैडीज बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य बनाम मनीषा भार्गव और अन्य के मामले में 11.02.2021 को दिए गए फैसले तथा डायमंड एक्सपोर्ट्स और अन्य बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एंड ओर्स मामले में 14.12.2021 को दिए गए फैसले में भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसी निर्णय की पुष्टि की गई है। सचिव डीओसीए ने सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और सभी उपभोक्ता आयोगों को पत्र लिखकर उपभोक्ताओं को ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। पत्र में, इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों ने ई-दाखिल तंत्र स्थापित किया है जिसमें ई-नोटिस, केस डॉक्यूमेंट डाउनलोड लिंक और वर्चुअल हियरिंग लिंक, विपरीत पक्ष द्वारा लिखित प्रतिक्रिया दाखिल करने, शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्तर दाखिल करने और एसएमएस/ई-मेल के माध्यम से अलर्ट पाने सहित कई विशेषताएं हैं। आयोगों से अनुरोध किया गया है कि वे ई-दाखिल पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों को दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करें।  उपभोक्ता कार्य विभाग 31.05.2022 को राष्ट्रीय, राज्य और जिला आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ-साथ राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में उपभोक्ता मामलों के प्रभारी सचिव के साथ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन भी कर रहा है। इसमें उपभोक्ताओं के लिए विवाद निवारण तंत्र को अधिक प्रभावी, तेज और परेशानी मुक्त बनाने पर चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा।

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केन्‍द्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कन्हेरी गुफाओं में विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया

केन्‍द्रीय पर्यटन, संस्कृति और उत्‍तर पूर्व क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर) श्री जी. किशन रेड्डी ने आज बोरीवली के नजदीक संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित कन्हेरी गुफाओं में पर्यटकों के लिए विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया। संस्‍कृति मंत्री ने कहा, “कन्हेरी गुफाएं हमारी प्राचीन विरासत का हिस्सा हैं क्योंकि वे हमारे उद्भव और अतीत का प्रमाण प्रदान करती हैं। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर किए गए कार्यों का उद्घाटन करना सौभाग्य की बात है। बुद्ध का संदेश संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए आज भी महत्‍वपूर्ण है।”

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श्री रेड्डी ने कहा कि हमारी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण में रुचि दिखाना और उसकी जिम्मेदारी लेना प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। संस्‍कृति मंत्री ने कहा कि हमारी विरासत की रक्षा, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, कॉरपोरेट और सिविल सोसाइटी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां इन खजानों तक पहुंच सकें। इंडियन ऑयल फाउंडेशन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के हिस्से के रूप में कन्हेरी में उन्नत पर्यटक बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के कार्य में शामिल है। वर्तमान इमारत में आगन्‍तुक मंडप, रखवाली करने वालों के आवास, बुकिंग ऑफिस को अपग्रेड करने के साथ उनका नवीनीकरण किया गया है। बुकिंग काउंटर से लेकर कस्टोडियन क्वार्टर तक के क्षेत्र को प्राकृतिक दश्‍यों से सुशोभित किया गया है। चूंकि गुफाएं जंगल के मुख्य क्षेत्र में आती हैं, बिजली और पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है, इसके बावजूद सौर ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बिजली की व्यवस्था की गई है। आगंतुकों की रुचि बनाए रखने के लिए सरल और सुविधाजनक विवेचना केन्‍द्र की स्‍थापना की गई है जिसमें ग्यारह व्‍याख्‍यात्‍मक पैनलों की मदद से प्रमुख गुफाओं की उत्कृष्ट विशेषताओं और अद्वितीयता को उजागर किया गया है। कन्हेरी का ट्रेल मैप यानी रास्‍ता दिखाने वाला नक्‍शा एक और महत्वपूर्ण विशेषता है जो आगंतुकों का समय बचाने में मदद करता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पूरे मठ परिसर के 3डी वर्चुअल टूर पर भी काम कर रहा है। कन्हेरी गुफाएं मुंबई के पश्चिमी बाहरी इलाके में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों में बड़े पैमाने पर बेसाल्ट आउटक्रॉप में गुफाओं का समूह और कटी हुई चट्टानों से बने स्मारकों का एक समूह है। इनमें बौद्ध मूर्तियां और राहत नक्काशी, पेंटिंग और शिलालेख हैं, जो पहली शताब्दी सीई से 10वीं शताब्दी सीई तक की हैं। पानी के अनेक जलाशयों के साथ खुदाई की सतह और क्षेत्र, शिलालेख, एक सबसे पुराना बांध, एक स्तूप दफन गैलरी और उत्कृष्ट वर्षा जल संचयन प्रणाली इसकी एक आश्रम और तीर्थ केन्‍द्र के रूप में लोकप्रियता का संकेत देती है। कन्हेरी सातवाहन, त्रिकुटक, वाकाटक और सिलहारा के संरक्षण में और क्षेत्र के धनी व्यापारियों द्वारा किए गए दान के माध्यम से फला-फूला।

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