यह ऐतिहासिक पहल देश के विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गुजरात के राजकोट में 236 एकड़ में बने मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमताएं इसके चारों ओर घने आवासीय और वाणिज्यिक विकास के कारण बाधित हैं और इसमें आगे विस्तार एवं नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं को पूरा करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
इसलिए, हीरासर, राजकोट में एक नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा प्रस्तावित किया गया और इसे भारतीय हवाईअड्डा प्राधिकरण को सौंप दिया गया। प्रस्तावित नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के चालू होने के बाद मौजूदा राजकोट हवाई अड्डा काम करना बंद कर देगा। पूर्ण और उपलब्ध बुनियादी ढांचे के साथ हवाई अड्डे को संचालित करने के लिए एक अंतरिम टर्मिनल भवन का निर्माण किया गया है। नया टर्मिनल भवन फिलहाल निर्माणाधीन है। एक बार इसके पूरा हो जाने पर अंतरिम टर्मिनल का उपयोग कार्गो टर्मिनल के रूप में किया जाएगा।

अपने संबोधन में श्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने कहा कि इस हवाई अड्डे की कल्पना हमारे प्रधानमंत्री ने लगभग सात साल पहले की थी। आज वह राजकोट की जनता को यह ऐतिहासिक उपहार समर्पित करने के लिए यहां उपस्थित हैं। नया हवाई अड्डा राजकोट के मौजूदा हवाई अड्डे से दस गुना बड़ा है। वहां एक नया टर्मिनल भवन भी बनाया जा रहा है, जिसकी क्षमता प्रति घंटे 1800 यात्रियों को सेवाएं देने की होगी। इस नए टर्मिनल भवन में राजकोट की कला और संस्कृति को दर्शाया जाएगा।
श्री सिंधिया ने कहा कि वर्ष 2014 में राजकोट से हर हफ्ते सिर्फ 56 उड़ानों का परिचालन होता था, जो संख्या आज दोगुनी से भी ज्यादा होकर प्रति सप्ताह 130 हो गई है। वर्तमान में, राजकोट का मुंबई, दिल्ली, पुणे, गोवा और बेंगलुरु से हवाई संपर्क है। आने वाले हफ्तों में हम राजकोट को उदयपुर और इंदौर से भी जोड़ने जा रहे हैं। 2014 में, गुजरात का संपर्क केवल 19 शहरों से था; आज यह 50 शहरों से जुड़ा है।
नया टर्मिनल भवन और हवाई क्षेत्र का बुनियादी ढांचा कुल 2,534 एकड़ भूमि क्षेत्र में और 1405 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। इस विकास में रनवे, एप्रन, समानांतर टैक्सी ट्रैक आदि का निर्माण शामिल है।
हवाई अड्डे की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- नया टर्मिनल भवन 23,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
- यह इमारत बेहद व्यस्त घंटों के दौरान 2800 यात्रियों को सेवा प्रदान कर सकती है।
- टर्मिनल में 20 चेक-इन काउंटर और 5 कन्वेयर बेल्ट हैं।
- रनवे की लंबाई 3,040 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर है।
- हवाई अड्डे के एप्रन की माप 334 मीटर x 152 मीटर है।
- एप्रन एक साथ दस (10) कोड-सी टाइप और चार (4) कोड-बी टाइप के विमानों के बेड़े को समायोजित कर सकता है।
- 2 लिंक टैक्सी ट्रैक हैं, प्रत्येक की माप 428 मीटर x 23 मीटर है।
- हवाई अड्डे के साथ 300 कारों और 75 दोपहिया वाहनों को समायोजित करने की क्षमता वाला एक पार्किंग क्षेत्र विकसित किया गया है।
हीरासर हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग डबल इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, ऊर्जा बचत के लिए कैनोपी, एलईडी लाइटिंग, लो हीट गेन डबल ग्लेज़िंग यूनिट, फव्वारों का निर्माण, एचवीएसी, वाटर ट्रीटमेंट संयंत्र, सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र और पुनर्नवीनीकृत पानी के उपयोग, गृह-IV रेटिंग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र जैसी कई स्थायी विशेषताओं से युक्त है।
विमानन उद्योग की बढ़ती मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से हीरासर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई और विकास किया गया है। यात्रियों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, हवाई अड्डे में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त जगह है। इसके अलावा, डिज़ाइन सुगम्य भारत अभियान मानदंडों के अनुरूप है, जो सभी यात्रियों के लिए पहुंच सुनिश्चित करती है, साथ ही अलग-अलग दिव्यांग व्यक्तियों के अनुभव को बढ़ाने के लिए स्पर्श पथों को शामिल करती है।
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपस्थिति भारत के विमानन क्षेत्र को बढ़ाने और वैश्विक विमानन मानचित्र पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने आज देश के किसानों की आय सहायता के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 14वीं किस्त के रूप में 17 हजार करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में जमा किए। सीकर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा आयोजित वृहद कार्यक्रम में श्री मोदी ने 1.25 लाख पीएम किसान समृद्धि केंद्र (पीएम-केएसके) राष्ट्र को समर्पित किए और सल्फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड) लांच की। साथ ही, ओपन नेटवर्क फार डिजिटल कामर्स (ओएनडीसी) पर 1600 से अधिक कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के ऑनबार्डिंग का शुभारंभ किया। राजस्थान को एक साथ अनेक सौगातें प्रदान करते हुए प्रधानमंत्री ने 5 मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन व 7 मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास किया तथा 6 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों व एक केंद्रीय विद्यालय का शुभारंभ भी किया। समारोह में राज्यपाल श्री कलराज मिश्र, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मांडविया, जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी भी मौजूद थे। समारोह में, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज शुरू किए 1.25 लाख पीएम किसान समृद्धि केंद्र किसानों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इन्हें किसानों की जरूरतों के लिए वन-स्टॉप शॉप में विकसित किया जा रहा है। गांव व ब्लॉक लेवल पर इन केंद्रों से करोड़ों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। यहां किसानों को बीज, खाद, खेती के औजार व अन्य मशीनें भी मिलेगी। ये केंद्र खेती से जुड़ी हर आधुनिक जानकारी किसानों को देंगे। वर्षांत से पहले ऐसे और 1.75 लाख केंद्र खोले जाएंगे। ओएनडीसी पर एफपीओ की भागीदारी का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि इससे किसानों के लिए देश के किसी भी हिस्से से उपज को बाजार तक ले जाना आसान हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की मौजूदा सरकार किसानों के दर्द और जरूरतों को समझती है व किसानों के खर्चें कम करने और जरूरत के समय उनका समर्थन करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है। पिछले 9 वर्षों में बीज से बाज़ार तक नई व्यवस्था का निर्माण किया गया हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के माध्यम से करोड़ों किसान मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में ज्ञान के आधार पर इष्टतम निर्णय ले रहे हैं। मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि का जिक्र करते हुए कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी योजना है जिसमें सीधे किसानों के बैंक खाते में धनराशि ट्रांसफर की जाती है। आज की 14वीं किस्त को मिला लें तो अब तक 2.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं जिससे किसानों को विभिन्न खर्चों को कवर करने में फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि किसानों का सामर्थ्य, किसानों का परिश्रम, मिट्टी से भी सोना निकाल देता है इसलिए सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हमारी सरकार कैसे अपने किसान भाइयों के पैसे बचा रही है, इसका एक उदाहरण यूरिया की कीमतें भी हैं। हमारी सरकार ने कोरोना और रूस-यूक्रेन युद्ध का असर किसानों पर नहीं पड़ने दिया। आज देश में यूरिया की जो बोरी 266 रु. में देते हैं, यहीं बोरी पाकिस्तान में करीब 800 रु. में मिलती है, बांग्लादेश में 720 रु. और चीन में 2100 रु. की मिलती है। अमेरिका में यूरिया की यही बोरी 3000 रु. से ज्यादा की मिल रही है। श्री मोदी ने कहा कि सरकार किसानों को यूरिया की कीमतों से परेशान नहीं होने देगी, जब कोई किसान यूरिया खरीदने जाता है तो उसे विश्वास होता है कि यह मोदी की गारंटी है। प्रधानमंत्री ने श्री अन्न को बढ़ावा देने हेतु उठाए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे श्री अन्न के उत्पादन, प्रसंस्करण, निर्यात में वृद्धि हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत का विकास तभी संभव है, जब गांवों का विकास होगा इसीलिए सरकार गांवों में वो सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है जो सिर्फ शहरों में ही मिलती थी।” उन्होंने कहा कि दशकों तक गांवों में अच्छे स्कूलों, शिक्षा की कमी के कारण गांव-गरीब पीछे रह गए, अफसोसजनक रहा कि पिछड़े-आदिवासी समाज के बच्चों के पास सपनों को पूरा करने का कोई साधन नहीं था। श्री मोदी ने उल्लेख किया कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के लिए बजट और संसाधन बढ़ाएं और एकलव्य आवासीय विद्यालय खोले जिससे आदिवासी युवाओं को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा, ”सफलता तभी बड़ी होती है, जब सपने बड़े हों।” कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने कहा कि आज एक बार फिर कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक अवसर है जब प्रधानमंत्री के कर-कमलों से इतनी सौगातें मिल रही है। उन्होंने इसके लिए करोड़ों किसानों की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी का अभिनंदन करते हुए कहा कि देश इस बात का साक्षी है कि जबसे प्रधानमंत्री ने कार्यभार संभाला, उनकी प्राथमिकता रही है कि गांव-गरीब-किसानों की प्रगति हों, उनके घरों में खुशहाली आएं, कृषि क्षेत्र में उत्पादन-उत्पादकता बढ़ें, नवाचार बढ़ें, तकनीक का समर्थन हों, छोटे किसानों की ताकत व आमदनी बढ़ें, कृषि की अर्थव्यवस्था मजबूत हों और देश में योगदान दे सकें। इसके लिए मोदी जी के नेतृत्व में अनेक योजनाएं इन 9 वर्षों में शुरू हुई हैं। 2014-15 में कृषि मंत्रालय का बजट 23 हजार करोड़ रु. होता था जो अब करीब पांच गुना अधिक 1.25 लाख करोड़ रु. हो गया है, यह प्रधानमंत्री की प्राथमिकता का परिचय देता है। श्री तोमर ने कहा कि किसान कितना भी परिश्रम कर लें, सरकार की नीतियां अनुकूल हों, फिर भी उन्हें प्रकृति पर निर्भर रहना पड़ता है और जब प्रकृति का प्रकोप आता है तो फसलों को नुकसान होता ही है। इसके लिए श्री मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बड़ा सुरक्षा कवच किसानों को दिया है। इस योजना अंतर्गत किसानों के अब तक 29 हजार करोड़ रु. प्रीमियम रूप में जमा हुए, जबकि 1.41 लाख करोड़ रु. मुआवजे के रूप में दिए गए हैं।
कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, सड़क सुरक्षा जीवन के लिए मोती है – आर टी ओ राजेश सिंह दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर में सड़क सुरक्षा पखवाड़े के अंतर्गत रैली एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि आरटीओ कानपुर नगर, श्री राजेश सिंह रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा के नियम का पालन कर हम स्वयं की तथा राह पर चलने वाले अन्य व्यक्तियों की भी जान बचा सकते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि यातायात निरीक्षक, कानपुर नगर,श्री राजवीर सिंह ने छात्राओं को यातायात के नियमों तथा सड़क सुरक्षा से संबंधित आंकड़ों व नियमों के बारे में विस्तार पूर्वक बताते हुए उन्हें रोड सेफ्टी की शपथ दिलवाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नमामि गंगे विभाग भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश संयोजक श्री कृष्णा दीक्षित बड़े जी ने शासन प्रशासन तथा महाविद्यालय द्वारा रोड सेफ्टी क्लब का गठन कर रैली विभिन्न प्रतियोगिताओं विचार गोष्ठियों आदि गतिविधियों के द्वारा इस दिशा में फैलाई जा रही जनजागरूकता की भूरी–भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि यह योजना भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में तेजी से कमी लाने के लिए अत्यंत कारगर साबित होगी। इस अवसर पर महाविद्यालय से ग्रीन पार्क स्टेडियम तक एक जागरूकता रैली भी निकाली गई।