भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। 18 दिसम्बर मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में गुड टच एंड बैड टच पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं सहायक आचार्य अपुर्वा बाजपेयी ने छात्राओं को “गुड टच–बैड टच से आगे: सीमाओं और सहमति की समझ” विषय पर संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए व्यक्तिगत सीमाओं और सहमति की स्पष्ट समझ अत्यंत आवश्यक है। कोई भी स्पर्श या व्यवहार तभी स्वीकार्य है, जब वह व्यक्ति की स्पष्ट इच्छा और सहजता के अनुरूप हो। असहजता भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसे कभी सहमति नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भय या तनाव की स्थिति में व्यक्ति तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे पाता, जिसे समाज अक्सर गलत रूप में समझ लेता है।
सत्र में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (POSH Act) का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम की संयोजिका मिशन शक्ति कोऑर्डिनेटर डॉ. संगीता सिरोही रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. वंदना निगम ने की। सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो. अर्चना वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. साधना सिंह, श्वेता गोंड एवं विमला देवी का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की लगभग 80 छात्राएँ उपस्थित रही। सत्र का उद्देश्य छात्राओं को जागरूक कर उन्हें आत्म-सुरक्षा, आत्म-सम्मान और स्वस्थ सामाजिक संबंधों के लिए सशक्त बनाना रहा।
महिला जगत
प्यार की महक
प्यार की महक कुछ भीनी-सी, गहरी-सी,
जो हृदय को दे अद्भुत स्पंदन।
ऐसा स्पर्श, जो पूरे जीवन को
नव-सृजन की ओर ले जाए।
कार्य की नई लय से
जीवन महके—बिखरे नहीं।
महकते कदमों के संग
उच्च दिशाओं की ओर बढ़ते हुए,
पूरा करने के दृढ़ संकल्प में
रास्ता अपना बनता है।
पथ पर आगे बढ़ते हुए
प्यार का उजाला फैलता है,
राहें सरल होती जाती हैं।
बाधाओं के बीच उभरता एक सरोवर,
जो सुन्दर कर्मों से
और गहरी आशाओं से भर जाता है।
मन की कल्पनाओं को मिलता है आकार,
कल्पना—जो भीतर की शाश्वत ज्योति है।
यही है प्यार का रंग।
और इस रंग को संजोकर रखना हमारी जिम्मेदारी।
~डॉ रश्मि गोयल
Read More »दयानंद गर्ल्स कॉलेज में संविधान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, 26 नवम्बर दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में संविधान दिवस के उपलक्ष्य में “हमारा संविधान — हमारा स्वाभिमान” विषय के अंतर्गत विविध रचनात्मक एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में भारतीय संविधान के प्रति सम्मान, जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों की समझ को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रमों में समान न्याय, समानता तथा अनेकता में एकता विषयों पर चित्रकला–पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन लेखन प्रतियोगिता और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने पोस्टरों, स्लोगनों और भाषणों के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया।
इसके साथ ही छात्राओं द्वारा एक जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें विविधता, समानता और अधिकारों के संदेश दिए गए। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्राओं और संकाय सदस्यों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ (शपथ) कर राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के निर्देशन में किया गया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने छात्राओं को संविधान के आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया।महाविद्यालय स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम की निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा ने भी छात्राओं के उत्साह और सक्रिय भागीदारी की सराहना की।कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ ज्योत्सना पांडे, डॉ अंजना श्रीवास्तव, वन्या श्रीवास्तव एवं आकांक्षा अस्थाना का विशेष योगदान रहा।
आकाश से बरसात तक : क्लाउड सीडिंग का विज्ञान और प्रभावशीलता
क्लाउड सीडिंग, यानी कृत्रिम वर्षा उत्पन्न करने की एक वैज्ञानिक तकनीक। जब बादल मौजूद होते हुए भी वर्षा नहीं होती, तब वैज्ञानिक उनमें कुछ रासायनिक तत्वों का छिड़काव करते हैं, जिससे जलवाष्प संघनित होकर वर्षा की बूंदों में बदल जाती है।आमतौर पर इसमें सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड या ड्राई आइस जैसे पदार्थों का प्रयोग किया जाता है।आज बढ़ते तापमान, घटते जलस्तर, पिघलते ग्लेशियर और जल–विनाश की वजह से सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। ऐसे में क्लाउड सीडिंग को एक आशाजनक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।यह तकनीक कई देशों में लंबे समय से सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है, जबकि भारत में अभी यह सीमित स्तर पर ही प्रयोग में है।हाल के वर्षों में भारत सरकार और कई राज्य सरकारें सूखे से निपटने के लिए इस तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग हो चुका है।हालाँकि यह भी सच है कि हर जगह या हर मौसम में क्लाउड सीडिंग कारगर नहीं होती।अगर बादलों में नमी का स्तर या तापमान अनुकूल न हो, तो वर्षा की संभावना कम हो जाती है।इस प्रक्रिया के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियाँ, ऊर्जा और नमी का सही संतुलन होना जरूरी है।इसी कारण बिना मौसम अनुमान के क्लाउड सीडिंग करना महंगा और व्यर्थ साबित हो सकता है।दिल्ली–एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गंगा के मैदानी इलाकों में यह तकनीक वायु प्रदूषण घटाने के उपाय के रूप में भी चर्चा में रही है।ठंड के मौसम में जब वायुमंडलीय परतें नीचे बैठ जाती हैं और प्रदूषक कण ऊपर नहीं जा पाते, तब हवा की गुणवत्ता “खराब” या “बहुत खराब” स्तर पर पहुँच जाती है।ऐसे में यदि मौसम अनुकूल हो तो क्लाउड सीडिंग प्रदूषण कम करने का एक संभावित उपाय हो सकता है।
क्लाउड सीडिंग की संभावनाएँ और सीमाएँ
ठंड और गंगा–यमुना के मैदानी क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर रहती है।यह तब और बढ़ जाती है जब हवा की गति कम हो जाती है और धूल तथा धुआँ वातावरण में फँस जाता है।क्लाउड सीडिंग को इस स्थिति में संभावित समाधान के रूप में देखा गया है, क्योंकि कृत्रिम वर्षा से हवा में मौजूद धूल के कण नीचे बैठ सकते हैं और प्रदूषण का स्तर घट सकता है।हालाँकि यह प्रक्रिया पूरी तरह मौसम और नमी पर निर्भर करती है।भारत में इसका प्रयोग पहली बार 1945 में अमेरिका के उदाहरण से प्रेरित होकर किया गया था।इसके बाद 1983, 1984 और 1993–94 में भारत के कई राज्यों में इस पर कार्य हुआ।आईआईटी कानपुर ने भी 2003–06 के बीच क्लाउड सीडिंग पर शोध किया।आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि बादलों में 15 फ़ीसदी नमी के चलते कृत्रिम बारिश का प्रयोग सफल नहीं हो सका , लेकिन उन्होंने माना कि भविष्य में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।दिल्ली की जलवायु को देखते हुए सर्दियों में क्लाउड सीडिंग की संभावना कम रहती है, क्योंकि ठंड तो होती है लेकिन पर्याप्त नमी नहीं होती।जब तक कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) न आए, तब तक यहाँ बादलों का बनना मुश्किल होता है।यानी, तकनीकी तौर पर जब तक वातावरण अनुकूल न हो, क्लाउड सीडिंग संभव नहीं ~डॉ. रश्मि गोयल
Read More »सहज योग पर कार्यशाल आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज में सहज योग पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसके लिए नागपुर से ६ सदस्यीय टीम आई जिसमे महेश , राजू , उमेश, मेघा, वंदना एवं वनिता रहीं। माँ सरस्वती के वंदन से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। आज की तनाव भरी ज़िंदगी में आस पास के लोगों से प्रभावित होने ,एकाग्रता की कमी ,पढ़ाई में रुचि न होने और मानसिक रूप से परेशान रहने की समस्या से बचने के लिये इस कार्यशाला का आयोजन किया गया ।
मुख्य वक्ता मेघा लड़वीकर ने सर्वप्रथम विभिन्न नाड़ी चक्रों की सैद्धांतिक जानकारी छात्राओं को प्रदान की। इसके पश्चात 20 मिनट का सहज योग अभ्यास सदन को करवाया। मैडिटेशन के पश्चात छात्राओं के अनुभव पूछे और प्रत्येक व्यक्ति के भिन्न भिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए तथा उनके अनुभव के कारण बताए।
प्राचार्या प्रो. सुमन ने सहज योग समिति का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज की तनाव भरी जिंदगी में सहज योग का अभ्यास वांछनीय है। कार्यशाला का संयोजन तथा संचालन डॉ प्रीति सिंह द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में ६२ छात्राओं तथा २५ प्रवक्ताओं ने सहजयोग की सहजता को समझा और लाभान्वित हुए, सभी छात्राओं तथा शिक्षिकाओं ने कार्यशाला में उत्साहपूर्ण सहभागिता की।
Read More »सरदार पटेल जयंती के उपलक्ष्य में डी जी कॉलेज में निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा सरदार पटेल की जयंती पर “सरदार पटेल : विकसित भारत के आधार स्तंभ” विषय पर एक निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ संगीता सिरोही के दिशा निर्देशन में किया गया।जिसमें महाविद्यालय की 55 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर वंदना निगम तथा निर्देशक प्रोफेसर अर्चना वर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ दीप्ति शुक्ला, डॉ विनीता श्रीवास्तव, डॉ अपर्णा शुक्ला, वान्या श्रीवास्तव, आकांक्षा का विशेषयोगदान रहा।
ऐस. ऐन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज में प्लेसमेंट सेल द्वारा “कैरियर वार्ता” आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर ऐस. ऐन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज, माल रोड, कानपुर में मिशन शक्ति 5.0 कार्यक्रम के अंतर्गत ,प्लेसमेंट सेल द्वारा “कैरियर वार्ता” का आयोजन सेवा योजन सूचना एवं मंत्रणा केंद्र , छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि डॉ ए. के.जैन, डॉ. ए.के.त्रिपाठी व महाविद्यालय प्राचार्या डॉ सुमन द्वारा माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन मिशन शक्ति प्रभारी प्रो. चित्रा तोमर द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. जैन ने छात्राओं को रोजगार संगम पोर्टल पर रजिस्टर करने की प्रक्रिया के बारे में छात्राओं को विस्तार से अवगत कराया। मुख्य वक्ता ए. के. त्रिपाठी ने छात्राओं को व्यवसाय जगत की जानकारी प्रदान की और अपना व्यापार शुरू करने हेतु अवसर व सम्भावनाएँ तलाशने हेतु प्रेरित किया. स्वयंसेविका कोमल दिवाकर, नंदिका श्रीवास्तव,मन्तशा ने आयोजन में सहयोग किया। कार्यक्रम में डॉ निशा वर्मा, डॉ ऋचा सिंह, डॉ संगीता सिंह,डॉ कोमल सरोज, डॉ पूजा गुप्ता, डॉ प्रीता अवस्थी, डॉ सपना रॉय, डॉ मोनिका शुक्ला तथा अन्य शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
भूगोल विभाग द्वारा ईको क्लब के अंतर्गत ‘बायोडायवर्सिटी एवं इको सिस्टम’ पर प्रदर्शनी आयोजित
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर के भूगोल विभाग द्वारा ईको क्लब के अंतर्गत “बायोडायवर्सिटी एवं इको सिस्टम” विषय पर एक प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य छात्राओं में पर्यावरणीय चेतना जागृत करना तथा जैव विविधता एवं पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना था। प्रदर्शनी का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंध समिति की वरिष्ठ सदस्या श्रीमती अनंta स्वरूप, डाइरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा तथा प्राचार्य प्रो वंदना निगम के करकमलों द्वारा किया गया। उन्होंने छात्राओं द्वारा तैयार किए गए मॉडलों, चार्ट्स और पोस्टर्स का अवलोकन करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। प्रदर्शनी में छात्राओं ने विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण आदि का सजीव प्रदर्शन किया और जैव विविधता के संरक्षण के उपायों पर रोचक जानकारी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. संगीता सिरोही, भूगोल विभागाध्यक्ष एवं ईको क्लब प्रभारी, के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने कहा कि “प्रकृति और मानव के मध्य संतुलन बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है, और ऐसी गतिविधियाँ छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक दृष्टिकोण का विकास करती हैं।” छात्राओं की सृजनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने प्रदर्शनी को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों डॉ अंजना श्रीवास्तव, डॉ स्वेता गोंड एवं समस्त छात्राओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
Read More »छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय अंतर महाविद्यालय शूटिंग प्रतियोगिता संपन्न
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, दो दिवसीय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय अंतर महाविद्यालय शूटिंग प्रतियोगिता का आयोजन एसएन सेन बालिका विद्यालयपीजी कॉलेज द्वारा शूटिंग स्पोर्टस अकादमी ,कल्याणपुर में दिनांक 15 एवं 17अक्टूबर 2025 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो . सुमन द्वारा किया गया इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मो . उमर वर्ल्ड कप शूटिंग के मेडलिस्ट को प्राचार्यों द्वारा मालार्यपण एवं स्मृति चिंह देकर सम्मानित किया गया ।| प्रतियोगिता महिला एव पुरुष दोनों वर्गों मेंआयोजित की गई जिसमें बढ़ चढ़कर खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता दी। शूटिंग प्रतियोगिताओं के विभिन्न इवेंट में विजेता खिलाड़ियों के नाम निम्न वक्त हैं
1 – 10 मीटर एयर राइफल महिला वर्ग में
प्रथम स्थान आकांक्षी यादव द्वितीय स्थान प्रतीक्षा तृतीय स्थान पलक
2 – 10 मीटर एयर राइफल पुरुष वर्ग में
1 .उत्तम सिंह राठौड़ प्रथम स्थान 2 .अभिजीत सिंह द्वितीय स्थान 3.हीरामन सिंह तृतीय स्थान पर रहे ।
3 . 50 मीटर फ्री पिस्टल में अभिषेक यादव प्रथम लव कुश द्वितीय स्थान
4 . 50 मीटर फ्री पिस्टल महिला वर्ग में प्रथम स्थान पलक द्विवेदी
5 . पिस्टल 25 मी (महिला) में पलक द्विवेदी प्रथम स्थान रही
6 . 50 मीटर राइफल ( महिला )में प्रथम स्थान अंशिका
द्वितीय स्थान युक्तिशा
7 . 10 मीटर एयर पिस्टल (पुरुष वर्ग ) में प्रथम स्थान अभिषेक यादव द्वितीय तुषार सिंह तृतीय मोहित यादव
8.10 मीटर पिस्टल महिला वर्ग में प्रथम स्थान शिवांगी द्वितीय स्थान सृष्टि तृतीय स्थान पलक
शूटिंग प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में अभय, मयंक, शैलेश, तारा एवं मोहम्मद उमर रहे ।कार्यक्रम कीआयोजन सचिव प्रोफेसर प्रीति पांडे ने सभीअतिथि गण खिलाड़ियों एवं निर्णय को का धन्यवाद ज्ञापन किया एवं कार्यक्रम में विश्वविद्यालय शाहिद शिक्षा विभाग एवं क्रीड़ा सेडॉक्टर निमिषा डॉक्टर श्रवण डॉ प्रभाकर ,डॉ अभिषेक ने भी अपनी उपस्थिति दी ।
दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाए गए दीवाली के उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई
भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में दिव्यांग डेवलपमेंट सोसायटी, महाविद्यालय के “दिव्यांग सहायता क्लब” एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान द्वारा दिव्यांग बच्चों के द्वारा बनाए गए दीवाली के सुंदर उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्राचार्या प्रो. पूनम विज ने दिव्यांग बच्चों के द्वारा बनाए गए उत्पादों की भूरि भूरि प्रशंसा की और कई उत्पादों की खरीदारी कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। प्राचार्या जी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें दूसरों की सहायता करनी चाहिए। जब हम सभी ऐसा करेंगे, तभी एक अच्छे समाज का निर्माण हो सकेगा । हमारे महाविद्यालय में इसकी पहल, महाविद्यालय में दिव्यांग सहायता क्लब को स्थापित करके तथा समाजशास्त्र विभाग द्वारा दिव्यांग डेवलपमेंट सोसाइटी के साथ समझौता ज्ञापन करके की गई है। जो समय समय पर दिव्यांग बच्चों के लिए भी प्रशंसनीय कार्य करता रहता है। जिससे महाविद्यालय के बच्चों के मन में दिव्यंगता के प्रति सहयोग की भावना उत्पन्न हुई है। इस प्रदर्शनी में सभी शिक्षिकाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग लिया। प्रदर्शनी को सफल बनाने हेतु समुचित आयोजन डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, विभागाध्यक्ष,समाजशास्त्र विभाग के द्वारा किया गया।
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