हाथो में जाम थामे विराज पूरी महफ़िल में झूमता सा दिख रहा था..,
कुंवर प्रताप सिंह का बेटा विराज जिसका व्यक्तित्व देखने में बिन्दास ,मन मौजी सा ,मगर अन्दर से गंभीर, शांत व्यक्तित्व का स्वामी था।
विराज की ख़ुशी की वजह सौम्या का पार्टी मे होना ही था ।
शांत स्वभाव वाली सौम्या,..सोने जैसा रंग और उस पर नीले रगं के लिबास में लिपटी पार्टी में सब से मिल रही थी।
कुंवर प्रताप सिंह के चरण स्पर्श कर उनको उनके जन्मदिन की हार्दिक बधाई देती है कुँवर प्रताप सिंह जाने माने शहर के लोगों में से एक है .. सौम्या उनके दोस्त की बेटी जो इंग्लैंड से डिग्री ले आई थी अभी।
विराज की नज़रें सौम्या पर ही थी।धड़कते दिल से सौम्या के पास आया और धीरे से अपने होंठ सौम्या के कान के पास ले जा पूछने लगा ! कब आई इंग्लैंड से ? मुझे बताया नहीं ,कि तुम आने वाली हो।सौम्या ने मुड़ कर देखा तो विराज को अपने बेहद क़रीब पाया।विराज कहता जा रहा था। सौम्या तुम पर तो इंग्लैंड का रंग बिलकुल नही चढा।
वही हीरे जैसी चमकती आँखे जो झील से भी गहरी है ..पार्टी में म्यूज़िक की आवाज़ ऊँची होने पर भी सौम्या विराज की हर बात को सुन पा रही थी। सौम्या ने इक नज़र विराज को देखा, और बिना कुछ कहे आगे निकल गई। विराज सौम्या के पास जा कर कहने लगा !
तुम से बात करनी है मुझे ..इतने सालों के बाद तुम्हें मिल रहा हूँ और तुम ….,
सौम्या बोली !
होश में तो आप आ जायें पहले,फिर बात भी कर लूँगी और फिर जल्दी से कुंवर प्रताप सिंह से इजाज़त ले कर पार्टी से निकल गई। विराज को लगा जैसे कोई हवा का झोंका आया और उसके दिल और दिमाग़ पर तूफ़ान सा छोड़ गया और उसके बाद पार्टी में क्या हुआ,सबसे बेख़बर सा ,लुटा लुटा सोच रहा था।पार्टी तो चल रही है लोग भी है यहाँ, पर मैं क्यों ख़ाली ख़ाली सा महसूस कर रहा हूँ।क्या हो गया मुझे इक दम अचानक से ? वजह भी जानता था विराज ….
ज़िन्दगी में कोई ख़ास ऐसा होता ही है .. जिस के होने,या न होने से बहुत फ़र्क़ पड़ता है ..ऐसा कोई ख़ास शख़्स ,रूह से जुड़ा होता है
जिस के बिना हर चीज़ बे-मायने हो जाती है।और उसकी जुदाई आप की रूह को जला डालती है ।
उसे याद आ रहा था कि कैसे सौम्या और वो इक दूजे को चाहते थे मगर विराज की शादी रोशनी से,जो शहर के जाने माने रईस की बेटी थी तय कर दी गई थी ।जब सौम्या को उसकी सगाई का पता चला तो बिना कुछ कहे लंदन चली गई थी .. .. सौम्या की नाराज़गी से वाक़िफ़ था विराज।
इक रोज़ विराज ने सौम्या को काफ़ी के लिए बुलाया।
सौम्या के लिए न करना आसान नही था।रेस्टोरेन्ट में सौम्या का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा विराज बार बार घड़ी देख रहा था तभी उसने सौम्या को देखा आते हुये देखा…
कच्चे पीले रंग का दुपट्टा ,जो बार बार लहरा कर उसके चेहरे को ढके जा रहा था ,उसपर आँखो पर काला चश्मा बेहद खूबसूरत लग रहा था।
सौम्या की गंभीर आँखों को देख कर विराज बोला! नाज़ है मुझे मेरी पसंद पर ..
तुम कुछ भी न कहो चाहे ,सौम्या मगर
मेरी मौजूदगी तुम्हारी आँखों में आज भी साफ़ दिख रही है…
. वजूद तो तुम्हारा है वहाँ …मगर मेरी ही तालाश में ..
अक्सर तुम्हारी तसवीर देखता हूँ तुम्हारे फ़ोन पर
होंठों पर मुस्कुराहट तो होती है वहाँ..मगर फीकी फीकी सी …. जैसे तुम्हारी आँखे देखती तो सबको है ,मगर ढूँढती मुझे ही है।
सौम्या बोली! इतना जानते हो मुझे ,तो ये भी जानते होंगे कि मैं नाराज़ हूँ आप से।मेरे लिए ,मेरी चाहत के लिए जरा सा भी लड़ नहीं पाये किसी से ..और मुझे नहीं पता था कि आप रोशनी से शादी कर लोगे ।मुझे लगा !आप और मैं …कहते कहते सौम्या का गला भर आया।सौम्या कहती जा रही थी..विराज आप भागते जा रहे हो दुनिया की चाहते ले कर ..और मैं …कुछ न चाह कर ..बस आप तक ही आ कर ठहर गई थी मगर आप वहाँ न ठहर सके।विराज बोला !
तुम ने ये कैसे सोचा कि मैं रोशनी से शादी करूँगा। मेरी मजबूरी थी वो ,शायद तुम्हें नहीं पता।जब मेरी सगाई की हुई ।तब पापा की तबियत इक दम से ख़राब हो गई थी और पापा दिल्ली अस्पताल में दाखिल थे।तब मैं पापा से कुछ नहीं कहना चाहता था ,मगर कुछ दिन बाद मैंने वो रिश्ता खुद ही तोड़ दिया था। रोशनी ने भी इस बात को समझा कि वो मेरे साथ कभी ख़ुश नहीं रह पायेगी।तब तक तुम जा चुकी थी। तुम ने मुझ से कोई सवाल नहीं किया ,न ही कभी कोई जवाब माँगा.. भरोसा नहीं था मुझ पर ,या मेरे प्यार पर ..कितना इन्तज़ार किया है मैंने तुम्हारा ।मैं तुम्हें चाहता था मगर खुद ही जान नहीं पाया मैं, कि तुम मेरे लिए कितनी ज़रूरी थी।तुम्हीं मेरा प्यार हो ,तुम मेरा बचपन हो ,.. तुम ही तो हो जिस ने मेरे दिल पर राज किया है।
सौम्या बोली! तो क्या आप रोशनी को चाहते नहीं थे।पागल हो तुम !
इतना भी पहचान नहीं पाई मुझे।विराज का यूँ सौम्या को पागल कहना ,सौम्या को इक अपनेपन का अहसास करवा रहा था
विराज बोला।रोशनी को बचपन से जानता ज़रूर हूँ मगर अपनी पत्नी के रूप में उसे कभी नहीं देखा था।
मेरी बेशुमार चाहतों की तुम ही अकेली वारिस रही हो।
सौम्या बोली !विराज
पिछले चार सालों में मैंने दर्द तो सहा ,मगर आप से नाराज़ नहीं हो पाई।विराज बोला ! सौम्या किसी से हँस कर बात करना ,प्यार नहीं होता .. ,जो दिल मे छिपा रहता है वही प्यार है,ज़ाहिर रिश्तों मे गहराई नही हुआ करती।रोशनी मेरी दोस्त से ज़्यादा कुछ भी नहीं ..याद है मुझे इक रोज़ तुम ने कहा !तुम मुझ से कभी बात नहीं करोगी ,न ही कभी मिलोगी।ये सोच कर मैं अक्सर बेचैन रहता था ,फिर तुम मुझे छोड़ कर इंग्लैंड पढ़ने चली गई और तुम्हें देखने की मेरी तमन्ना मुझे दिवाना बना दिया करती।कभी कभी तो जैसे पंजाबी में कहते हैं न,खो पढ़ जाना ऐसे तुम्हें देखने के लिए मुझे हुआ करती थी।तुम नहीं थी यहाँ , मैं खुद को काम मे बीज़ी रखने लगा, पार्टियों में जाने लगा,गाने सुनता मगर सकून मुझ से कोसों दूर ही रहा।
तुम्हारी याद मुझे बेचैन रखती।बहुत मिस करता था तुम्हें।
मिस करना जैसा लफ़्ज़ शायद बहुत छोटा है।सौम्या को, ये सब सुनना कहीं न कहीं सकून दे रहा था।अच्छा लग रहा था कि विराज को भी उसकी कमी का अहसास होता रहा है ..जैसे वो खुद महसूस किया करती थी।विराज कहता जा रहा था लोगों की नज़रों में जो मैं दिखता हूँ मैं वैसा बिलकुल भी नहीं .. सौम्या बोली !
विराज मेरी नाराज़गी अपनी जगह थी .. फ़िक्र अपनी जगह थी ..नही चाहती थी कि तुम से बात करूँ कभी ..मगर मुझे भी बार बार तलब उठती थी ..तुम्हें देखने की . ..तुम से बात करने की मगर मैं खुद को रोक लेती थी।
विराज कहने लगा जितनी ऊँची दिवारें तुम बनाती रही अपने इर्द गिर्द ,उतनी ही मेरी चाहत बढ़ती रही।विराज ने सौम्या का हाथ पकड़ कर धीरे से कहा !अगर तुम्हारी इजाज़त हो तो मैं अपने पापा से बात करूँ शादी की ?
और सौम्या ने भरी आँखों से अपना सर विराज के कंधे पर रख दिया जैसे हाँ की स्वीकृति दे रही हो ..
दोस्तों !
ग़लतफ़हमियाँ ही वजह बनती है दूरियों की … वक़्त रहते उन्हें सुलझा लेना चाहिए क्योंकि
कोई भरोसा नही ,कब ज़िन्दगी बेवफ़ाई कर हमारे अपनों को हम से दूर ले जाये और हमारे हाथ तरसने ..तड़पने और बेचैन होने के इलावा कोई रास्ता ही न बचे।
यही मेरी इल्तिजा है सब के लिए ..वक़्त रहते.. अपने दिल के क़रीब रिश्तों को संभाल लीजिए .. —स्मिता केंथ
मनोरंजन
गोवा में भारत के पहले प्रकाश स्तंभ महोत्सव का आज शुभारंभ हुआ; प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किए जाने वाले 75 ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष ध्यान
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 23 सितंबर 2023 को गोवा के पणजी में ऐतिहासिक किले अगौड़ा में ‘भारतीय प्रकाश स्तंभ उत्सव’ या भारतीय लाइटहाउस महोत्सव के पहले संस्करण का उद्घाटन किया।

इस महोत्सव का उद्देश्य भारत के 75 प्रतिष्ठित प्रकाशस्तंभों के समृद्ध समुद्री इतिहास को पुनर्जीवित करना और दुनिया के सामने उनकी शानदार गाथाओं को सामने लाना है। इस प्रकार के पहले आयोजन के प्रमुख स्थल, फोर्ट अगौड़ा में आयोजित बैठक में गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सावंत; केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और पर्यटन राज्य मंत्री, श्रीपद नाइक और गोवा सरकार के पर्यटन मंत्री श्री रोहन खौंटे ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधायक माइकल लोबो भी उपास्थित थे।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा, “इस महोत्सव के शुभारंभ के साथ, हम इन प्रतिष्ठित स्थलों की समृद्ध विरासत को उजागर करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ समुद्र तटीय भारत में 75 प्रकाश स्तंभों में सदियों पुराने क्लासिक्स को फिर से जीवंत करने की प्रक्रिया और उन्हें दुनिया के सामने पेश करने के लिए सक्षम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारा देश आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र प्रयास में हम प्रतिष्ठित प्रकाश स्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के प्रमुख केन्द्रों का उत्प्रेरक बनाकर मोदी की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। आज, हम अपने दूरदर्शी नेता, मोदी की दूरदर्शिता और नेतृत्व के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमारे विशिष्ट प्रकाशस्तंभों को मनोरम विरासत पर्यटन स्थलों में बदलने का समर्थन किया है। बहुत लंबे समय तक, अंधेरी रातों के बीच सैकड़ों नाविकों और जहाजों को आशा की रोशनी प्रदान करते समय समुद्र तटों के मूक प्रहरी को नजरअंदाज कर दिया गया था। “प्रकाश स्तंभ उत्सव” इसे बदलने का हमारा प्रयास है। इन ऐतिहासिक प्रकाशस्तंभों ने हमारे देश के इतिहास में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उसके बारे में आप सभी को सूचित करना, उससे जोड़ना और शिक्षित करना हमारा मिशन है।
भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य ऐतिहासिक स्थलों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों में विकसित करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी मार्ग के लिए आधार तैयार करने के लिए भारतीय प्रकाश स्तंभ महोत्सव का लाभ प्राप्त करना है। प्रकाश स्तंभ और लाइटशिप महानिदेशालय ने पहले ही 75 ऐसे प्रकाश स्तंभों की पहचान कर ली है और यह उत्सव हमारी समुद्री विरासत का जश्न मनाने और संरक्षित करने की सरकार की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री महोदय ने कहा, “प्रकाश स्तंभ महोत्सव” एक शानदार उत्सव है जो समय और सुंदरता के माध्यम से एक मनोरम यात्रा होने का वादा करता है। यह एक ऐसी यात्रा है जो हमारे समुद्री इतिहास के छिपे हुए रत्नों को उजागर करेगी और हमारे ऐतिहासिक प्रकाश स्तंभों की अनकही गाथाओं को उजागर करेगी। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने परिवर्तन के लिए सुधार की पहल के एक हिस्से के रूप में, भारत में पोत परिवहन क्षेत्र में सहायता के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए एक रूपरेखा प्रदान करने के लिए लाइटहाउस अधिनियम, 1927 को निरस्त करके समुद्री परिवहन के लिए समुद्री सहायता अधिनियम, 2021 लागू किया। इसके अंतर्गत हमने विरासत प्रकाश स्तंभ की नई अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें केंद्र सरकार अपने नियंत्रण में समुद्री परिवहन के लिए किसी भी सहायता को विरासत प्रकाश स्तंभ के रूप में नामांकित कर सकती है। समुद्री परिवहन में सहायता के रूप में उनके कार्य के अलावा, ऐसे प्रकाशस्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटक उद्देश्यों के लिए विकसित किया जाएगा। यह महोत्सव सिर्फ ज्ञान का नहीं है; यह मूल्यों और अवसरों को पैदा करने के बारे में है। महोत्सव से अलग, हमारी परिकल्पना प्रकाशस्तंभों को पर्यटन स्थलों के रूप में बढ़ावा देना, इन ऐतिहासिक संरचनाओं पुनर्जीवन प्रदान करना और स्थानीय समुदायों और व्यवसायों के लिए अवसर पैदा करना है।”

दिन भर चले कार्यक्रम के दौरान, ‘हमारे तटों के अग्ररक्षक: भारत के अतीत और वर्तमान के प्रमाण के रूप में प्रकाशस्तंभ’ शीर्षक से एक सत्र आयोजित किया गया था, जिसे शासन, नीतियां और राजनीति संस्थान की पहल, भारत प्रवाह द्वारा आयोजित किया गया था, जहां प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् जो राखीगढ़ी के रूप में ख्याति प्राप्त प्रो. वसंत शिंदे ने भारत के समुद्री इतिहास में प्रकाशस्तंभों के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बात की। डॉ. सुनील गुप्ता, समुद्री पुरातत्वविद् और नई दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में ओएसडी; और गोवा राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. वासु उस्पाकर ने भी सत्र में अपने विचार रखे। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने प्रकाश स्तंभ विरासत पर्यटन विकास के प्रति मंत्रालय के दृष्टिकोण और इस चरण में 75 प्रकाश स्तंभों में निवेश के अवसरों के बारे में एक केस प्रस्तुत किया।

भारत के पहले प्रकाश स्तंभ महोत्सव का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रदर्शनी सत्र, समुद्री इतिहास और संस्कृति पर प्रकाश और ध्वनि शो, ख्याति प्राप्त गायकों के साथ मधुर शामें, समुद्र तटों के जायको और सामुदायिक सहभागिता हैं।
Read More »
कनपुर, भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज महाविद्यालय में पिछले एक सप्ताह से चल रहे मंच कला वह फिल्म अभिनय का सफलतापूर्वक समापन प्राचार्य जोसेफ डेनियल के दिशा निर्देशन में किया गया। सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित की गई यह कार्यशाला संयोजक डॉ.संजय सक्सेना और सहसंयोजक प्रो.मीत कमल द्वारा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगीत नाटक पुरस्कार विजेता नाटक और संवाद लेखक विभांशु वैभव के नेतृत्व में यह एक सप्ताह की कार्यशाला की गई। इस कार्यशाला में महाविद्यालय के 40 से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया कार्यशाला के सप्ताह में वैभव ने मंच कला में अभिनय के इतिहास के बारे में बच्चों को बताया एवं इसकी उत्पत्ति कैसे हुई यह बताया, ध्यान केंद्रित करने के तरीके बताएं ।एक छोटी सी मूवी – ए बॉय इन स्ट्रिप्ड पजामा के माध्यम से हमें ऑब्जर्वेशन के विषय में समझाया । वैभव ने विदोहम सिंफनी म्यूजिक में एक्ट भी कराया । सर ने कार्य दिया कि हमें अपने आसपास मौजूद किसी भी व्यक्ति को ध्यानपूर्वक ऑब्जर्व करना है ।उसे अगले दिन अपने एकल प्रस्तुति माध्यम द्वारा दिखाना है। कार्यशाला में एक्टर के लिए महत्वपूर्ण तत्वों पर बात की जैसे रिलैक्सेशन ,कंसंट्रेशन ऑब्जरवेशन ,बिलीव एंड इमोशन। सर ने अपनी रचित कविता भी लिखाई ।कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को चार समूह में विभाजित कर दिया एवं उनको समाज के कुछ ऐसे विषयों पर नाट्य प्रस्तुत करने का मौका दिया जैसे ड्रग्स, वृद्ध आश्रम, आतंकवादी हमले एवं एसिड अटैक इन्हीं कार्यक्रमों की फाइनल प्रस्तुति 22/09/2023 की कार्यक्रम द्वारा की गई। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जोसेफ डेनियल के मार्गदर्शन में किया गया मुख्य अतिथि संगीत नाटक अवार्ड विजेता विभांशु वैभव रहे ।इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभांशु वैभव ने बताया कि बच्चे न सिर्फ जिस तरह से रंगमंच में भाग लेते हैं बल्कि उनकी बहुमुखी प्रतिभा का भी विकास होता है ।कार्यक्रम में सभी का स्वागत डॉक्टर संजय सक्सेना संयोजक सांस्कृतिक समिति द्वारा किया गया। उक्त कार्यक्रम का संचालन नागेंद्र प्रताप सिंह एवं कावेरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्राचार्य द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया। गया कार्यक्रम का अंत प्रोफेसर मीत कमल सह संयोजक सांस्कृतिक समिति द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से किया गया । उक्त कार्यक्रम के अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक गण एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
क्राइस्ट चर्च कॉलेज में मंच की कला व फिल्म अभिनय पर एक सप्ताह की कार्यशाला का शुभारम्भ
कानपुर 16 सितम्बर भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में मंच की कला व फिल्म अभिनय पर एक सप्ताह की कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ ।यह कार्यशाला प्रचार्य जोसफ डेनियल के दिशानिर्देशन में कॉलेज की सांस्कृतिक समिति द्वारा अयोजित की गई है जिसके संयोजक संजय सक्सेना और सह-संयोजक मीतकमल हैं। यह कार्यशाला यूपी संगीत नाटक पुरस्कार विजेता, नाटक और संवाद लेखक विभांशु वैभव द्वार संचलित होगी
। विभांशु वैभव को नाटक अकादमी पुरस्कार, नट सम्राट दिल्ली पुरस्कार, भारतेन्दु पुरस्कार प. प्रताप नारायण मिश्र युवा साहित्यकार पुरस्कार, अखिल भारतीय मानवाधिकार पुरस्कार, उर्दू अकादमी, दिल्ली सम्मान जैसे ढेर सारे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। कई भाषाओं में नाटकों का अनुवाद, हिन्दी की कई पत्र पत्रिकाओं के लिये लेखन किया महारथी, बाबूजी, कहो तो बोलूँ, मंथन, पांचाली. ठुमरी, गुण्डा, ना मैं धर्मी ना अधर्मी, सोल सागा, तेरे मेरे सपने, तरसत जियरा हमार, छुटटन दूबे के सपने शब-ब-खैर जैसे नाटकों का लेखन और मंचन किया। वर्कशॉप के पहले दिन स्क्रिप्ट को अच्छे से और आराम से पढ़ लेना है। अपने डायलॉग को अच्छे से याद कर लेना है।और महसूस करना है। जान लिजीए कि हर लाईन किसी के जश्बारी स्क्रिप्ट किसी कि जिदंगी के सुख दुःख लम्हो को बया करती हैं। आप जिस किरदार के डायलॉग बोलने वाले है। डायलॉग के हर एक शब्द को अच्छे से महसूस करके बोले। और अभिनय की उत्पति कैसे हुई ये बताया गया । कार्यशाला में छात्रों को अभिनय की बुनियादी बाते और एक अच्छा अभिनय करने की बारीकियां बताई जाएंगी इसके साथ साथ शारीरिक और मानसिक संतुलन को बनाए रखने के तरीके शारीरिक गतिविधियां ध्यान केन्द्रित करना संवाद वितरण आदि विषयों पर भी बताया जाएगा कार्यशाला में 50 विद्यार्थी उपस्थित रहे
54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए पंजीकरण के साथ ही सिनेप्रेमियों के लिए जश्न का समय आरंभ
भारतीय राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम लिमिटेड (एनएफडीसी), सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारतीय फिल्म उद्योग के माध्यम से एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी) तथा गोवा राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम में भारतीय और विश्व सिनेमा का सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन किया जाएगा।
आईएफएफआई विभिन्न वर्गों में भारतीय और विश्व सिनेमा के विविध चयन की व्यवस्था करता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता (15 प्रशंसित फीचर फिल्मों का चयन), आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी मेडल पुरस्कार के लिए प्रतियोगिता, एक निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फीचर फिल्म के लिए प्रतियोगिता, सिनेमा ऑफ द वर्ल्ड (आईएफएफआई का दुनिया भर से अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्मों का आधिकारिक चयन), भारतीय पैनोरमा (विभिन्न भारतीय भाषाओं में सिनेमाई, विषयगत और सौंदर्य उत्कृष्टता की फीचर और गैर-फीचर फिल्मों का संग्रह), फेस्टिवल कैलिडोस्कोप (दिग्गजों की असाधारण फिल्मों का वर्गीकरण, उभरती प्रतिभाओं के काम, अन्य फिल्मोत्सवों की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्में), कुछ ऐसे अनुभाग हैं जो भारतीय और विश्व सिनेमा को प्रदर्शित करते हैं। कंट्री फोकस, एनिमेशन, वृत्तचित्र और गोवा फिल्म्स जैसी भारतीय और विदेशी फिल्मों के विशेष क्यूरेटेड पैकेज भी प्रदर्शित किए गए हैं। गाला प्रीमियर, दैनिक रेड कार्पेट कार्यक्रम और समारोह उत्सव का आकर्षण बढ़ाते हैं।
स्क्रीनिंग के अलावा, आईएफएफआई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समुदाय की 200 से अधिक प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा आयोजित कार्यशालाओं, मास्टरक्लास, आपसी संवाद सत्र और पैनल चर्चा की प्रस्तुति करता है।
54वें आईएफएफआई के लिए प्रतिनिधि पंजीकरण निम्नलिखित श्रेणियों के लिए iffigoa.org के माध्यम से किया जा सकता है:
प्रतिनिधि सिनेप्रेमी: 1000/- रुपये + जीएसटी
प्रतिनिधि प्रोफेशनल: 1000/- रुपये + जीएसटी
प्रतिनिधि छात्र: कोई पंजीकरण शुल्क नहीं
54वें आईएफएफआई के साथ-साथ एनएफडीसी द्वारा आयोजित ‘फिल्म बाजार’ के 17वें संस्करण का भी पंजीकरण शुरू हो गया है। यह ‘फिल्म बाजार’ दक्षिण एशिया के सबसे बड़े वैश्विक सिनेबाजार के रूप में कार्य करता है, जो दक्षिण एशियाई और अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्मकारों, निर्माताओं, बिक्री एजेंटों और उत्सव प्रोग्रामरों के बीच रचनात्मक और वित्तीय सहयोग की सुविधा प्रदान करता है। फिल्म बाज़ार के लिए प्रतिनिधि पंजीकरण filmbazaarindia.com पर उपलब्ध है।
54वें आईएफएफआई के लिए मीडिया पंजीकरण शीघ्र ही शुरू कर दिया जाएगा, जिससे पत्रकारों और मीडिया प्रोफेशनलो को इस सिनेमाई कार्यक्रम तक पहुंच मिलेगी।
इस बार जन्माष्टमी का त्यौहार 6 सितम्बर को मनाया जाएगा
प्रतिवर्ष भाद्रपक्ष कृष्णाष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। दरअसल मान्यता है कि इसी दिन मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया था। इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की 5250वीं जन्माष्टमी मनाई जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार जन्माष्टमी का त्यो हार 6 सितम्बर को मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल अष्टमी तिथि बुधवार 6 सितंबर को दोपहर 3.37 बजे शुरू होगी, जिसका समापन 7 सितंबर की शाम 4 बजकर 14 मिनट पर होगा। वैसे जन्माष्टमी का त्योहार आमतौर पर दो दिन मनाया जाता है, पहले दिन (स्मार्त) गृहस्थियों द्वारा तथा दूसरे दिन वैष्णव सम्प्रदाय द्वारा। गृहस्थ लोग इस बार 6 सितंबर को जन्माष्टमी मनाएंगे जबकि वैष्णव सम्प्रदाय में 7 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा।
भारतीय संस्कृति में जन्माष्टमी का इतना महत्व क्यों है, यह जानने के लिए श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और उनकी अलौकिक लीलाओं को समझना जरूरी है। द्वापर युग के अंत में मथुरा में अग्रसेन नामक राजा का शासन था। उनका पुत्र था कंस, जिसने बलपूर्वक अपने पिता से सिंहासन छीन लिया और स्वयं मथुरा का राजा बन गया। कंस की बहन देवकी का विवाह यदुवंशी वसुदेव के साथ हुआ। एक दिन जब कंस देवकी को उसकी ससुराल छोड़ने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि हे कंस! जिस देवकी को तू इतने प्रेम से उसकी ससुराल छोड़ने जा रहा है, उसी का आठवां बालक तेरा संहारक होगा। आकाशवाणी सुन कंस घबरा गया और देवकी की ससुराल पहुंचकर उसने अपने जीजा वसुदेव की हत्या करने के लिए तलवार खींच ली। तब देवकी ने अपने भाई कंस से निवेदन करते हुए वादा किया कि उसके गर्भ से जो भी संतान होगी, उसे वह कंस को सौंप दिया करेगी। कंस ने देवकी की विनती स्वीकार कर ली और वसुदेव-देवकी को कारागार में डाल दिया।
कारागार में देवकी ने पहली संतान को जन्म दिया, जिसे कंस ने मार डाला। इसी प्रकार एक-एक कर उसने देवकी के सात बालकों की हत्या कर दी। जब कंस को देवकी के 8वें गर्भ की सूचना मिली तो उसने वसुदेव-देवकी पर पहरा और कड़ा कर दिया। आखिरकार वह घड़ी भी आ गई, जब देवकी ने कृष्ण को जन्म लिया। उस समय घोर अंधकार छाया हुआ था तथा मूसलाधार वर्षा हो रही थी। तभी वसुदेव जी की कोठरी में अलौकिक प्रकाश हुआ। उन्होंने देखा कि शंख, चक्र, गदा और पद्मधारी चतुर्भुज भगवान उनके सामने खड़े हैं। भगवान के इस दिव्य रूप के दर्शन पाकर वसुदेव और देवकी उनके चरणों में गिर पड़े। भगवान ने वसुदेव से कहा, ‘‘अब मैं बालक का रूप धारण करता हूं। तुम मुझे तत्काल गोकुल में नंद के घर पहुंचा दो, जहां अभी एक कन्या ने जन्म लिया है। मेरे स्थान पर उस कन्या को कंस को सौंप दो। मेरी ही माया से कंस की जेल के सारे पहरेदार सो रहे हैं और कारागार के सारे ताले भी अपने आप खुल गए हैं। यमुना भी तुम्हें जाने का मार्ग अपने आप देगी।’’
वसुदेव ने भगवान की आज्ञा पाकर शिशु को छाज में रखकर अपने सिर पर उठा लिया। यमुना में प्रवेश करने पर यमुना का जल भगवान श्रीकृष्ण के चरण स्पर्श करने के लिए हिलोरं, लेने लगा और जलचर भी श्रीकृष्ण के चरण स्पर्श के लिए उमड़ पड़े। गोकुल पहुंचकर वसुदेव सीधे नंद बाबा के घर पहुंचे। घर के सभी लोग उस समय गहरी नींद में सोये हुए थे पर सभी दरवाजे खुले पड़े थे। वसुदेव ने नंद की पत्नी यशोदा की बगल में सोई कन्या को उठा लिया और उसकी जगह श्रीकृष्ण को लिटा दिया। उसके बाद वसुदेव मथुरा पहुंचकर अपनी कोठरी में पहुंच गए। कोठरी में पहुंचते ही कारागार के द्वार अपने आप बंद हो गए और पहरेदारों की नींद खुल गई।
कंस को जैसे ही कन्या के जन्म का समाचार मिला, वह तुरन्त कारागार पहुंचा और कन्या को बालों से पकड़कर शिला पर पटककर मारने के लिए ऊपर उठाया लेकिन कन्या अचानक कंस के हाथ से छूटकर आकाश में पहुंच गई। आकाश में पहुंचकर उसने कहा, ‘‘मुझे मारने से तुझे कुछ लाभ नहीं होगा। तेरा संहारक गोकुल में सुरक्षित है।’’ यह सुनकर कंस के होश उड़ गए। उसके बाद कंस ने उन्हें मारने के लिए अनेक प्रयास किए। कंस ने श्रीकृष्ण का वध करने के लिए अनेक भयानक राक्षस भेजे परन्तु श्रीकृष्ण ने एक-एक कर उन सभी का संहार कर दिया। बड़ा होने पर कंस का वध कर उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाया और अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त कराया। तभी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की स्मृति में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाने लगा।
बाल्याकाल से लेकर बड़े होने तक श्रीकृष्ण की अनेक लीलाएं विख्यात हैं। उन्होंने अपने बड़े भाई बलराम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमान जी का आव्हान किया था, जिसके बाद हनुमान जी ने बलराम की वाटिका में जाकर बलराम से युद्ध किया और उनका घमंड चूर-चूर कर दिया था। श्रीकृष्ण ने नररकासुर नामक असुर के बंदीगृह से 16100 बंदी महिलाओं को मुक्त कराया था, जिन्हें समाज द्वारा बहिष्कृत कर दिए जाने पर उन महिलाओं ने श्रीकृष्ण से अपनी रक्षा की गुहार लगाई और तब श्रीकृष्ण ने उन सभी महिलाओं को अपनी रानी होने का दर्जा देकर उन्हें सम्मान दिया था।
खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने पूरे राजस्थान में खेलो इंडिया के 33 केंद्रों का शुभारंभ किया

यह भी घोषणा की गई कि खेलो इंडिया केंद्रों के बीच प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जबकि कोचिंग द कोच कार्यक्रम को खेलो इंडिया केंद्र तक भी बढ़ाया जाएगा। कोचों और खेलो इंडिया केंद्र के कोचों को हमारे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कोचों के साथ जोड़कर प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस अवसर पर राजस्थान के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री श्री अशोक चांदना के साथ-साथ राज्य के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। इस अवसर पर श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “हम चाहते हैं कि सभी राज्य खेलों के मामले में आगे बढ़ें। जब राज्य सरकारें खेलों के लिए एक सर्वसम्मत दृष्टिकोण के साथ केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेंगी, तो भारत के लिए और अधिक पदक आएंगे।
उन्होंने कहा, ‘खेलो इंडिया योजना और टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना की सफलता के कारण पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक पदक मिले हैं, चाहे वह ओलंपिक हो या पैरालंपिक या राष्ट्रमंडल खेल या थॉमस कप जीत जैसी ऐतिहासिक प्रतियोगिता। अंडर-20 कुश्ती में अंतिम पंघाल ने भी दो बार विश्व चैंपियन बनकर इतिहास रचा। प्रगनानंदा शतरंज में एफआईडीए विश्व कप के फाइनल में पहुंचे। यह भारतीय खेलों के लिए अभूतपूर्व दौर है। 60 वर्षों में, विश्व विश्वविद्यालय खेलों में केवल 18 पदक मिले थे, जबकि, केवल इस साल टूर्नामेंट में हमने 26 पदक जीते हैं।
खेलो इंडिया के महत्व के बारे में बताते हुए श्री ठाकुर ने कहा, “इस सफलता में खेलो इंडिया खेलों की बड़ी भूमिका है। हर साल, इतने सारे एथलीट युवा, विश्वविद्यालय और शीतकालीन खेलों में भाग लेते हैं और उनका प्रदर्शन उन्हें बड़ी प्रतियोगिताओं में ले जा रहा है। मुझे उम्मीद है कि इन खेलो इंडिया केंद्रों के माध्यम से राजस्थान के अधिक से अधिक एथलीटों को यहां से तैयार किया जाएगा। वर्तमान, अतीत और भविष्य के एथलीट भी इनके माध्यम से सुसज्जित हो रहे हैं।
वर्तमान में, 17,000 से अधिक एथलीट खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) में प्रशिक्षित हो रहे हैं और 699 पूर्व चैंपियन एथलीट पहले से ही देश भर में काम पर हैं। वर्तमान में पूरे भारत में अधिसूचित खेलो इंडिया केंद्रों की कुल संख्या 960 है, जिनमें से 715 केआईसी द्वारा संचालित हैं। राजस्थान में अधिसूचित केआईसी की कुल संख्या 33 है, जिनमें से 32 केआईसी कार्यरत हैं। ये केआईसी विशिष्ट प्रशिक्षण केंद्र हैं जो साइकिल चलाना, बास्केटबॉल, वुशु, हॉकी आदि जैसे खेल विषयों पर केंद्रित हैं।
ब्लॉक या जिला स्तर पर स्कूलों, संगठनों और अन्य पात्र एजेंसियों में उपलब्ध खेल संबंधी मौजूदा बुनियादी ढांचे के उपयोग को बढ़ाने के लिए, छोटे खेलो इंडिया केंद्र जमीनी स्तर पर खेल इको-सिस्टम को मजबूत करने में सहायता करते हैं। केआईसी में, युवाओं के लिए पूर्व चैंपियन एथलीट कोच और संरक्षक बन जाते हैं, स्वायत्त तरीके से खेल प्रशिक्षण केंद्र चलाते हैं और अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। खेलो इंडिया योजना के तहत, इन पूर्व चैंपियनों के साथ-साथ इन केंद्रों को खेल प्रशिक्षण, कोचिंग और संचालन के लिए प्रारंभिक तथा वार्षिक वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।
खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने पदक विजेता तीरंदाजों को सम्मानित किया
केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मंगलवार को पदक विजेता तीरंदाजों को सम्मानित किया, जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप बर्लिन और पेरिस में विश्व कप 2023 चरण 4 में देश के लिए गौरव हासिल किया। अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट इसी अगस्त में आयोजित किए गए थे। जहां भारत ने पेरिस में कुल 5 पदक (2 स्वर्ण, 3 कांस्य) जीते, वहीं बर्लिन प्रतियोगिता में कुल 4 पदक (3 स्वर्ण, 1 कांस्य) जीते।

मंगलवार को सम्मान समारोह में इतिहास रचने वाली अदिति गोपीचंद स्वामी और ओजस प्रवीण देवताले समेत कुल 13 तीरंदाज मौजूद थे। जहां खेलो इंडिया एथलीट अदिति न केवल सबसे कम उम्र की तीरंदाजी विश्व चैंपियन बनीं बल्कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी बनीं। वहीं ओजस प्रवीण देवतले तीरंदाजी विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बने। प्रतिभाशाली तीरंदाजों को संबोधित करते हुए श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “मैं आप सभी को आपके प्रदर्शन के लिए बधाई देना चाहता हूं। रिसर्च टीम ने आपके प्रदर्शन का विश्लेषण किया है और मुझे खुशी है कि आपके अच्छे नतीजों का सिलसिला जारी है। ”
शिविर में तीरंदाजों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए श्री ठाकुर ने कहा, “टीम भावना ही मायने रखती है और मुझे यह जानकर गर्व है कि न केवल कोच बल्कि सीनियर्स ने भी जूनियर्स को मानसिक दृढ़ता और तैयारियों को आकार देने में मदद की। जिस तरह अभिषेक वर्मा जैसे अनुभवी सीनियर ने प्रतियोगिता के दौरान ओजस प्रवीण जैसे युवा को प्रेरित और उनका मार्गदर्शन किया, वह सराहनीय है।
माननीय मंत्री ने कहा, “एशियाई खेलों, ओलंपिक क्वालीफायर स्पर्धाओं और अंत में पेरिस ओलंपिक तक पहुंचने के लिए आगे का रास्ता लंबा है। ये सभी टूर्नामेंट बहुत महत्वपूर्ण हैं। एक पदक में हम सभी भारतीयों की भावनाएं होती हैं और एक साधारण पदक कई सफलताओं की संभावनाओं को खोलता है।”
मंगलवार को इस आयोजन का हिस्सा रहे कुछ अन्य तीरंदाजों में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के एथलीट धीरज बोम्मदेवरा, भजन कौर, सिमरनजीत कौर और अंकिता भकत शामिल थे।
Read More »केडीए सिग्नेचर परिसर में हरियाली तीज के उपलक्ष में सावन महोत्सव मनाया गया
कानपुर 20 अगस्त भारतीय स्वरूप संवाददाता केडीए सिग्नेचर परिसर में आया सावन झूम के हरियाली तीज के उपलक्ष में सावन महोत्सव का विशाल रंगारंग कार्यक्रम हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया कार्यक्रम का शुभारंभ श्रद्धा शशि शुक्ला के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया गणेश वंदना और सावन की कजरी गाकर लोगों ने प्रोग्राम का शुभारंभ किया
सुंदर सजे हुए झूलों में झूला झूल कर लोगों का मन बहुत ही प्रफुल्लित हो रहा था कार्यक्रम के बीच बीच में लकी ड्रॉ निकाले गए और तरह तरह के खेल खेले गए सिग्नेचर की सखियों ने तरह-तरह के स्टेज प्रोग्राम दिए अंत में तीज क्वीन का चयन हुआ जिसमें आरजू विजय रही और पूर्णिमा दूसरे स्थान पर रही आशा कपूर शैली श्रीवास्तव अर्चना साहू ने तीज क्वीन का चयन किया हरे रंग के परिधान में सजी सभी महिलाओं को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे चारों और हरियाली ही हरियाली हो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सुंदर सजावट और खाने-पीने की स्टाल रही सावन महोत्सव का संचालन अंजलि बहुगुणा और हेमा सिन्हा ने किया मस्ती भरे इस कार्यक्रम में दीपा मोनी शालिनी प्रतिष्ठा पूजा स्मृति रीमा गोल्डी आदि की भूमिका बहुत ही सराहनीय रही.मीडिया प्रसार का कार्य डॉ प्रीति सिंह ने किया
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज आंध्रप्रदेश के कुरनूल में 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत की भगवान श्री राम की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज आंध्रप्रदेश के कुरनूल में भगवान श्री राम की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिलान्यास किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री अमित शाह ने कहा कि आज कुरनूल के मंत्रालयम में 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत की श्री राम की भव्य पंचलोहा प्रतिमा का शिलान्यास हुआ है। उन्होंने कहा कि मंत्रालयम में स्थापित यह 108 फीट ऊंची प्रभु श्री राम की प्रतिमा युगों-युगों तक समग्र दुनिया को हमारे सनातन धर्म का संदेश देगी और वैष्णव परंपरा को देश और दुनिया में मजबूत करेगी। श्री शाह ने कहा कि 108 हमारी हिन्दू संस्कृति में बहुत ही पवित्र संख्या है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित मंत्रालयम गाँव में 10 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ यह प्रोजेक्ट ढाई साल में पूरा होगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालयम गाँव राघवेन्द्र स्वामी के मंदिर के लिए बहुत प्रसिद्ध स्थान है। साथ ही इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व भी है, इसी तुंगभद्रा के किनारे महान विजय नगर साम्राज्य का उद्भव हुआ था जिसने आक्रान्ताओं को खदेड़ कर स्वदेश और स्वधर्म को पुनर्स्थापित किया। श्री शाह ने कहा कि मंत्रालयम दास साहित्य प्रकल्प के तहत आवास, अन्न दानम, प्राण दानम, विद्या दानम, पेयजल और गौ संरक्षण के कई सारे विषयों को आगे बढ़ाया गया है।

अमित शाह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अयोध्या में कई वर्षों से लंबित श्री राम मंदिर का शिलान्यास कर उसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है। अब जल्द ही श्री राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की स्थापना होगी और सैकड़ों वर्षों के बाद एक बार फिर प्रभु श्री राम अपने निज गृह में विराजमान होंगे। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने मंत्रालयम में श्री राम की भव्य प्रतिमा के शिलान्यास के अवसर पर मठ के मठाधीश, परम पूजनीय संत माध्वाचार्य जी, संत राघवेन्द्र स्वामी जी तथा दक्षिण की बहुत समृद्ध वैष्णव परंपरा व उसके सभी संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
Read More »
भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर