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54वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव गोवा में 20 से 28 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा

• अंतर्राष्ट्रीय खंड में 198 फिल्में दिखाई जाएंगी, जिनमें 13 का विश्व प्रीमियर भी शामिल हैं।

• कैचिंग डस्ट’ ओपनिंग फिल्म होगी; ‘अबाउट ड्राई ग्रासेज’ मिड-फेस्ट फिल्म होगी और ‘द फेदरवेट’ समापन फिल्म होगी।

• इस साल विभिन्न प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों की 19 पुरस्कार विजेता फिल्मों  को इफ्फी कैलिडोस्कोप में शामिल किया गया है।

• फिल्म बाजार के 17वें संस्करण में इस वर्ष 300 अंतर्राष्ट्रीय फिल्म परियोजनाओं को उत्पादन, वितरण या बिक्री के लिए क्यूरेट और प्रदर्शित किया गया।

• प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं, छायाकारों और अभिनेताओं के साथ 20 से अधिक ‘मास्टरक्लास’ और ‘इन कन्वर्सेशन’ सत्र आयोजित किए जाएंगे।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने आज घोषणा की कि 54वां अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई-इफ्फी) 20 नवंबर 28 नवंबर 2023 तक गोवा में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर श्री ठाकुर ने कहा कि भारत के बाजार की विश्व रैंकिंग 5वें नंबर पर है, जो भारत की मीडिया और मनोरंजन उद्योग की शक्ति दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह बाजार पिछले तीन वर्षों में 20 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि के साथ हर साल बढ़ रहा है। भारत में बनी फिल्में देश के कोने-कोने में छा गई हैं और अब दुनिया के दूर-दराज स्थानों तक पहुंच रही हैं।

मंत्री महोदय ने कहा कि इस वर्ष सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार विश्व सिनेमा के दीप्तिमान सितारे श्री माइकल डगलस को प्रदान किया जाएगा, जिन्हें सिनेमाई जगत में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है।

श्री ठाकुर ने बताया कि इफ्फी के अंतर्राष्ट्रीय खंड में प्राप्त फिल्मों की संख्या में तीन गुना वृद्धि देखी गई है और यह इफ्फी के लिए अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उद्योग के आकर्षण का परिचायक है।

नए शुरू किए गए ओटीटी पुरस्कारों के बारे में उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से ओटीटी उद्योग ने भारत में बहुत अधिक वृद्धि की है और यह मंच हजारों लोगों को रोजगार दे रहा है। इस क्षेत्र के सालाना 28 प्रतिशत वृद्धि वाली गतिशीलता को देखते हुए मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफार्मों पर उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर्स को मान देते हुए इस पुरस्कार की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि 15 ओटीटी प्लेटफार्मों से 10 भाषाओं में कुल 32 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं और विजेता को दस लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा।

श्री अनुराग ठाकुर ने देश में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के बारे कहा कि सरकारें ऐसी संस्थाओं को पोषित करने के लिए एक समर्थन प्रणाली बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म क्षेत्र में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने और देश के दूरदराज के इलाकों से प्रतिभाओं को पहचानने के लिए हमने क्रिएटिव माइंड्स ऑफ टुमॉरो पहल की शुरुआत की थी। मंत्री महोदय ने बताया कि इस वर्ष के लिए इस खंड में 600 से अधिक प्रविष्टियां मिली हैं। इस वर्ष 75 विजेताओं के चयन से तीन वर्षों में ऐसे विजेताओं की कुल संख्या 225 हो जाएगी।

मंत्री महोदय ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि इस वर्ष के इफ्फी के सभी स्थलों में सभी सुविधाएं होंगी और उन तक दिव्यांगों की पहुंच होगी। दृष्टिबाधितों के लिए ऑडियो डिस्क्रिप्शन, श्रवणबाधितों के लिए सांकेतिक भाषा, कई भाषाओं में कंटेंट की डबिंग सबका साथ सबका विकास के मंत्र का प्रतीक होगा।

राज्य मंत्री डॉ. एल मुरूगन ने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में कहा कि इफ्फी विश्व के सबसे बड़े फिल्म और सांस्कृतिक समारोहों में से एक है। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरी का नेतृत्व जाने-माने फिल्म निर्माता श्री शेखर कपूर कर रहे हैं।

यहां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 54वें संस्करण की झलकियां पेश की जा रही हैं:

  1. इफ्फी के मुख्य आकर्षण में से एक सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (एसआरएलटीए) है, जो विश्व सिनेमा में उत्कृष्टता के लिए दिया जाता है। हॉलीवुड अभिनेता और निर्माता माइकल डगलस, जो वर्तमान में विश्व सिनेमा में सबसे महान अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों में से एक हैं, उन्हें अपनी पत्नी और प्रसिद्ध अभिनेत्री कैथरीन ज़ीटा-जोन्स के साथ इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

फिल्म और टेलीविजन उद्योग में 50 से अधिक वर्षों के साथ, माइकल डगलस को दो ऑस्कर, पांच गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, एक प्राइमटाइम एमी पुरस्कार और अनगिनत अन्य सम्मान मिला है। वर्ष 2023 में, उन्हें 76वें फेस्टिवल डी कान में पाल्मे डी’ओर नामक लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार मिला है। उन्हें ‘वॉल स्ट्रीट’ में गॉर्डन गेको की भूमिका के लिए अकादमी पुरस्कार से लेकर फेटल एट्रेक्शन, द अमेरिकन प्रेसिडेंट, बेसिक इंस्टिंक्ट, ट्रैफिक और रोमांसिंग द स्टोन जैसी समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्मों तक की भूमिकाओं के लिए जाना जाता है। माइकल न केवल एक अभिनेता हैं, बल्कि एक कुशल निर्माता भी हैं। उनकी कृतियों में वन फ्लाई ओवर द कुकूज नेस्ट और द चाइना सिंड्रोम जैसी दमदार फिल्में शामिल हैं। श्री डगलस अपने मानवीय प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। वह न्यूक्लियर थ्रेट इनीशिएटिव संगठन के बोर्ड में हैं, जो मानवता को संकट में डालने वाले परमाणु और जैविक खतरों को कम करने पर केंद्रित है। उन्हें 1998 में संयुक्त राष्ट्र के शांति दूत के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

  1. 270 से अधिक फिल्मों को महोत्सव के दौरान चार स्थानों पर प्रदर्शित किया जाएगा – आईनॉक्स पंजिम (4), माक्विनेज पैलेस (1), आईनॉक्स पोरवोरिम (4), जेड स्क्वायर सम्राट अशोक (2)।
  2. 54वें इफ्फी के ‘अंतर्राष्ट्रीय खंड‘ में 198 फिल्में होंगी। इस बार इस खंड में 53वें इफ्फी की तुलना में 18 फिल्में अधिक हैं। इसमें 13 विश्व प्रीमियर, 18 अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियर, 62 एशिया प्रीमियर और 89 इंडिया प्रीमियर होंगे। इस वर्ष इफ्फी को 105 देशों से रिकॉर्ड 2926 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियां हैं।
  3. भारतीय पैनोरमा’ खंड में भारत की 25 फीचर फिल्में और 20 गैर-फीचर फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। फीचर सेक्शन में ओपनिंग फिल्म मलयालम फिल्म, अट्टम है, और गैर-फीचर सेक्शन में मणिपुर से एंड्रो ड्रीम्स है।
  4. सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज (ओटीटी) पुरस्कारः इस साल बेस्ट वेब सीरीज (ओटीटी) अवॉर्ड की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य ओटीटी प्लेटफार्मों के समृद्ध कंटेंट और इसके रचनाकारों को मान देना, प्रोत्साहित करना और सम्मानित करना है। 15 ओटीटी प्लेटफॉर्म से 10 भाषाओं में 32 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। समापन समारोह में घोषित होने वाली सीरीज को पुरस्कार राशि के रूप में प्रमाण-पत्र और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
  5. इस वर्ष के इफ्फी का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म खंड- इसमें आठ क्यूरेटेड सेक्शन होंगे। महत्वपूर्ण फिल्मों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं –
  • ओपनिंग फिल्मकैचिंग डस्ट | निर्देशक: स्टुअर्ट गैट | यूनाइटेड किंगडम | (इंटरनेशल प्रीमियर)- इस थ्रिलर फिल्म में प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय अभिनेता, एरिन मोरियार्टी, जय कर्टनी, दीना शिहाबी, रयान कोर, जोस अल्टिट, गैरी फैनिन और ओल्वेन फॉरे काम कर रहे हैं। स्टुअर्ट गैट मिश्रित एशियाई विरासत के एक पुरस्कार विजेता ब्रिटिश फिल्म निर्माता हैं जिनकी कहानियां अक्सर सामयिक सामाजिक विषयों से प्रभावित होती हैं।
  • मिड-फेस्ट फिल्मअबाउट ड्राई ग्रासेज | निर्देशन: नूरी बिल्गे सीलान | फ्रांस | (इंडिया प्रीमियर)- यह प्रसिद्ध निर्देशक का एक तुर्की ड्रामा है, जिन्होंने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते हैं। उनकी फ़िल्म विंटर स्लीप (2014) ने कान फिल्म फेस्टिवल में पाल्मे डी’ओर पुरस्कार प्राप्त किया था, जबकि उनकी छह फिल्मों को सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार के लिए तुर्की की प्रस्तुति के रूप में चुना गया है। इसमें ‘अबाउट ड्राई ग्रासेज’ भी शामिल है। यह फिल्म इस साल कान फिल्म फेस्टिवल के कॉम्पिटिशन सेक्शन में भी थी। इसकी प्रसिद्ध अभिनेत्री मर्व दिज़दार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए पुरस्कृत किया गया था
  • समापन फिल्मद फेदरवेट | निर्देशक: रॉबर्ट कोलोडनी | संयुक्त राज्य अमेरिका | (एशिया प्रीमियर)- यह 2023 की एक अमेरिकी बायोग्राफिकल स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है, जो एक स्टार एथलीट की बायोपिक के माध्यम से मिथकीय और आधुनिक स्टारडम की कल्पना को उजागर करती है। इसे क्लासिक “सिनेमा वेरिटे” (यथार्थवादी सिनेमा) शैली में तैयार किया गया है। रॉबर्ट कोलोडनी एक बहुमुखी अमेरिकी निर्देशक, लेखक और छायाकार हैं। फिल्म का प्रीमियर सितंबर, 2023 में 80वें वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। रॉबर्ट ने कई फिल्मों के लिए फोटोग्राफी निर्देशक के रूप में कार्य किया और विभिन्न पुरस्कार विजेता फिल्मों और वृत्तचित्रों का निर्देशन भी किया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता खंड में 15 फीचर फिल्मों (12 अंतर्राष्ट्रीय + 3 भारतीय) को प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार, गोल्डन पीकॉक और 40 लाख रुपये के लिए प्रतिस्पर्धा करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सर्वश्रेष्ठ फिल्म के अलावा ज्यूरी सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष), सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (महिला), विशेष जूरी पुरस्कार श्रेणी में भी विजेताओं का निर्धारण करेगी। फिल्मों की सूची अनुलग्नक में दी गई है और उनका विवरण इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है।
  • बेस्ट फीचर फिल्म डेब्यू डायरेक्टर– 5 अंतर्राष्ट्रीय + 2 भारतीय फिल्में प्रतिष्ठित सिल्वर पीकॉक के लिए इस खंड में प्रतिस्पर्धा करेंगी, नकद पुरस्कार के रूप में 10 लाख रुपये और प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। फिल्मों की सूची अनुलग्नक में दी गई है और उनका विवरण इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरी– जाने-माने भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता श्री शेखर कपूर (अध्यक्ष), पुरस्कृत स्पेनिश सिनेमैटोग्राफर जोस लुइस अल्केन, मार्चे डु कान के प्रतिष्ठित पूर्व प्रमुख जेरोम पैलार्ड, फ्रांस के विपुल फिल्म निर्माता कैथरीन डसार्ट, ऑस्ट्रेलिया से प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हेलेन लीके।
  • फेस्टिवल कैलिडोस्कोप इस वर्ष प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों की सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार विजेता फिल्मों को इफ्फी कैलिडोस्कोप में शामिल किया गया है। 19 फिल्में कान, वेनिस, साओ पाउलो, रॉटरडैम, सांता बारबरा, स्टॉकहोम आदि जैसे समारोहों से ली गई हैं।
  • दुनिया का सिनेमा खंड में प्रविष्टियों के माध्यम से 103 फिल्में शामिल हैं, जो दुनिया भर के सिनेमाघरों से सौंदर्यबोध और कथा वस्तुओं वाली फिल्मों में शामिल हैं। पिछले वर्षों (77) की तुलना में इनकी संख्या इस बार अधिक है।
  • डॉक्यू-मोंटाज खंड का परिचय- दुनिया भर के मनमोहक वृत्तचित्रों का समुच्चय है।
  • एनिमेशन खंड के हवाले से अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय एनिमेशन फिल्मों को क्यूरेट करने के लिए महोत्सव का विस्तार किया गया है, जिसमें एक व्यापक लाइन अप शामिल है। सौंदर्यवादी रूप से सरल और कथात्मक रूप से अचंभित कर देने वाली पोलैंड की आधिकारिक फिल्म ओसर की प्रविष्टि सहित एनिमेटेड फिल्में – द पीजेंट्स (डीआईआर: डीके वेल्चमैन, ह्यूग वेल्चमैन) फिल्में शामिल हैं। इनमें भारतीय एनिमेशन फिल्मों को भी रखा गया है।
  • पुनर्स्थापित क्लासिक्स खंड की शुरुआत- राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम) के तहत एनएफडीसी-एनएफएआई द्वारा भारतीय क्लासिक्स के क्षतिग्रस्त सेल्युलाइड रीलों से सात विश्व स्तरीय फिल्मों को दुरुस्त किया गया है, जिनकी सूची इस प्रकार है-
    • विद्यापति (1937) बांग्ला, निर्देशक: देवकी बोस
    • श्यामची आई (1953), मराठीनिर्देशक: पी.के.
    • पाताल भैरवी (1951), तेलुगुनिर्देशक: के.वी. रेड्डी
    • गाइड (1965), हिंदीनिर्देशक: विजय आनंद
    • हकीकत (1964), हिंदीनिर्देशक: चेतन आनंद
    • कोरस (1974) बांग्लानिर्देशक: मृणाल सेन
    • बीस साल बाद (1962), हिंदीनिर्देशक: बीरेन नाग
    • इसके अलावा, इस खंड में तीन अंतर्राष्ट्रीय पुनर्स्थापित फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी, जिनमें वेनिस के द एक्सोरिस्ट एक्सटेंडेड डायरेक्टर कट और सर्गेई परजानोव की शैडोज़ ऑफ फॉरगॉटन एनसेस्टर्स शामिल हैं।
  • यूनेस्को फिल्में– यूनेस्को के आदर्शों को प्रतिबिंबित करने वाली फिल्में: 7 अंतर्राष्ट्रीय + 3 भारतीय फिल्में। फिल्मों की सूची अनुलग्नक में दी गई हैं और उनका विवरण इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है।
  • सुलभ फिल्में 54वें इफ्फी में यह सुनिश्चित करने की सुविधा होगी कि विशेष रूप से दिव्यांग महोत्सव प्रतिनिधि सभी स्क्रीनिंग और अन्य स्थानों तक पहुंच सकें। उत्सव को सभी के लिए एक समावेशी और सुलभ अवसर बनाना समावेशिता की दिशा में उठाया गया एक कदम है।
    • विशेष रूप से दिव्यांग प्रतिनिधि
      • दृष्टिबाधितों के लिए: फिल्मों के साथ एम्बेडेड ऑडियो विवरण– सिर्फ एक बंदा काफी है और शेरशाह
      • श्रवण-बाधितों के लिए: फिल्मों के साथ एम्बेडेड साइन लैंग्वेज – 83 और भाग मिल्खा भाग
    • एकाधिक भाषा डबिंग– कई भारतीय पैनोरमा फिल्में अपने “स्मार्टफोन और ईयरफोन” का उपयोग करके पसंदीदा भाषा में डबिंग के साथ देखने के लिए उपलब्ध होंगी। इफ्फी ने इसके लिए ‘सिनेडुब्स’ ऐप के साथ साझेदारी की है, जिसे निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। ऐप के माध्यम से कई डब उपलब्ध होंगे। जिस भाषा में थिएटर में फिल्म चलाई जा रही है, उसके अलावा अन्य भाषाओं में भी यह उपलब्ध होगी।
  • इफ्फी के अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में 40 से अधिक महिला फिल्म निर्माताओं की फीचर फिल्में।
  1. मास्टर क्लासेस और इन-कन्वर्सेशन सत्र- प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं, छायाकारों और अभिनेताओं के साथ 20 से अधिक ‘मास्टरक्लास’ और ‘इन कन्वर्सेशन’ सत्रों के साथ यह एक रोमांचक सप्ताह होगा। फेस्टिवल माइल, पणजी, गोवा में पुनर्निर्मित और नवीनीकृत कला अकादमी में होगा। माइकल डगलस, ब्रेंडन गाल्विन, ब्रिलेंटे मेंडोज़ा, सनी देओल, रानी मुखर्जी, विद्या बालन, जॉन गोल्डवाटर, विजय सेतुपति, सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, केके मेनन, करण जौहर, मधुर भंडारकर, मनोज बाजपेयी, कार्तिकी गोंजाल्विस, बोनी कपूर, अल्लू अरविंद, थियोडोर ग्लक, गुलशन ग्रोवर और इस सूची में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सितारे शामिल हैं।
  2. गाला प्रीमियर- पिछले साल शुरू हुए गाला प्रीमियर्स का विस्तार किया जा रहा है। इफ्फी में इन फिल्म प्रीमियर में उनके अभिनेता और प्रतिभाएं अपनी फिल्मों का प्रचार करने के लिए इफ्फी में मौजूद रहेंगी।
  3. वर्चुअल इफ्फी– मास्टरक्लास, इन-कन्वर्सेशन सत्र, पैनल चर्चा और इफ्फी के 54वें संस्करण के उद्घाटन/समापन समारोह को बुक माय शो ऐप के माध्यम से ऑनलाइन देखा जा सकता है। पंजीकरण शुल्क मामूली रखा जाएगा।
  4. फिल्म बाजार- इफ्फी संक्षेप में “विश्व सिनेमा का उत्सव” है। इसके साथ ही एनएफडीसी द्वारा “सिनेमा के व्यवसाय” के लिए एक फिल्म बाजार का आयोजन किया जाता है। इफ्फी का फिल्म बाजार दक्षिण एशिया में सबसे बड़े वैश्विक फिल्म बाजार में से एक के रूप में विकसित हुआ है। यह अंतर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं, निर्माताओं, बिक्री एजेंटों और उत्सव प्रोग्रामर के हवाले से संभावित रचनात्मक और वित्तीय सहयोग के संबंध में एक आदर्श इकोसिस्टम के रूप में कार्य करता है। इस तरह “एनएफडीसी फिल्म बाजार के 17वें संस्करण में इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार किया जाएगा
    • फिल्म बाजार में मंडप और स्टॉल –
      1. वीएफएक्स और टेक पवेलियन– एक नए क्यूरेटेड “वीएफएक्स एंड टेक पवेलियन” को फिल्म बाजार में एकीकृत किया गया है, जिसे समुद्र के सामने तैयार किया गया है। यह फिल्म निर्माताओं को नवीनतम नवाचारों से अवगत कराएगा, न केवल “टेकिंग द शॉट” के पारंपरिक तरीके से कहानी कहने की संभावनाओं की पड़ताल करने के लिए, बल्कि अनंत संभावनाओं के साथ “क्रिएटिंग द शॉट” के बारे में भी।
      2. अंतर्राष्ट्रीय फिल्म आयोगों और भारतीय राज्यों के कई स्टॉल उनके स्थानों व प्रोत्साहन योजनाओं को बढ़ावा देने के लिए होंगे।
      3. फिल्म से संबंधित प्रोडक्शंस हाउस, संस्थानों, संघों आदि के कई स्टॉल।
    • वृत्तचित्र और गैर-फीचर परियोजनाओं/फिल्मों का परिचय
    • ज्ञान श्रृंखला” फिल्म निर्माण और वितरण के महत्वपूर्ण पहलुओं के साथ-साथ चयनित फिल्म निर्माताओं, देशों और राज्यों के मद्देनजर गहन चर्चा सत्र शामिल करने के लिए तैयार किया गया।
    • पिछले साल शुरू हुए, ‘बुक टू बॉक्स ऑफिस खंड ने ‘द स्टोरी इंक’ के साथ साझेदारी की है। इसका मुख्य उद्देश्य रचनात्मक लेखकों को अपना काम प्रस्तुत करने के लिए एक मंच प्रदान करना और इन कहानियों को निर्माताओं और मंच के प्रमुखों को पेश करना है।
    • कुल मिलाकर उत्पादनवितरण या बिक्री के लिए फिल्म बाजार के 17वें संस्करण में 300 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म परियोजनाएं क्यूरेट और प्रदर्शित की जाएंगी।
  1. 75 क्रिएटिव माइंड्स ऑफ टुमॉरो (सीएमओटी): माननीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर की पहल। इस पहल का उद्देश्य फिल्म निर्माण के विभिन्न व्यवसायों से युवा रचनात्मक प्रतिभाओं की पहचान करना, प्रोत्साहित करना और पोषण करना है। शॉर्ट्स टीवी वैचारिक प्रोग्रामिंग पार्टनर है, जो टीवी पर, मोबाइल पर, ऑनलाइन और सिनेमाघरों में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाली लघु फिल्मों और श्रृंखलाओं की दुनिया की सबसे बड़ी श्रृंखला पेश करता है। इन चयनित ‘क्रिएटिव माइंड्स’ को ‘फिल्म चैलेंज’ के लिए 5 टीमों में विभाजित किया गया है। यह 48 घंटों में एक लघु फिल्म बनाने के लिए है। इस वर्ष उम्मीदवारों के पास विशेष रूप से सिनेमा के मास्टर्स द्वारा क्यूरेट की गई पेशेवर कक्षाएं भी होंगी और भर्ती के लिए 20 से अधिक अग्रणी कंपनियों के साथ एक “प्रतिभा शिविर” आयोजित किया जाएगा।
  2. इफ्फी सिने-मेलाइफ्फी न केवल सिनेमाई उत्कृष्टता का प्रदर्शन है, बल्कि सांस्कृतिक विविधता का उत्सव भी है। इस वर्ष, इफ्फी सिने-मेला सिनेमाई उत्सवों के लिए एक शानदार पहल होगी। इसके लिए उपस्थित लोग और यहां तक कि अन्य लोग जैसे कि स्थानीय लोग और पर्यटक जो इफ्फी के लिए पंजीकृत नहीं हैं, वे भी सिनेमा, कला, संस्कृति, शिल्प, खान-पान आदि से संबंधित रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।
  3. अन्य आकर्षण: इफ्फी को दुनिया के लिए भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक समारोहों में से एक के रूप में बढ़ाने के लिए ओपन एयर स्क्रीनिंग, कारवां, शिगमोत्सव, गोवा कार्निवल, सेल्फी पॉइंट, इफ्फी मर्चेंडाइज आदि का आयोजन किया गया।
  4. महोत्सव स्थलों की ब्रांडिंग और सजावट : एनएफडीसी और ईएसजी ने महोत्सव स्थलों की पूरी सजावट और ब्रांडिंग के लिए एनआईडी, अहमदाबाद के साथ साझेदारी की है।
  5. भारत की संस्कृतियों का उत्सव (5 दिन) फिल्म स्क्रीनिंग को रेखांकित करते हुए, गाला प्रीमियर्स और अपने-अपने क्षेत्रों का प्रदर्शन करने के लिए फिल्म प्रतिभाएं अपनी प्रतिभा का परिचय देंगी।
      • 22 वीं: पूर्व: बांग्लाउड़ियाअसमियामणिपुरी और उत्तर पूर्वी बोलियां
      • 23 वां: दक्षिण 1: तमिल और मलयालम
      • 24 वीं: उत्तर: पंजाबीडोगरीभोजपुरीराजस्थानीउर्दूछत्तीसगढ़ी
      • 25 वां: पश्चिम: कोंकणीमराठीगुजराती
      • 26 वां: दक्षिण 2: कन्नड़ और तेलुगू

6. इफ्फी की आधिकारिक वेबसाइट https://iffigoa.org/. पर दैनिक घोषणाएं और अपडेट देखे जा सकते हैं।

7. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) के माध्यम से गोवा राज्य सरकार के साथ संयुक्त रूप से अपनी एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी) के माध्यम से 20 से 28 नवंबर, 2023 तक गोवा में 54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) का आयोजन कर रहा है।

8. इफ्फी दुनिया के 14 सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता फीचर फिल्म समारोहों’ में से एक है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (एफआईएपीएफ) द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह विश्व स्तर पर फिल्म समारोहों को नियंत्रित करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। कान, बर्लिन और वेनिस जैसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह ऐसे अन्य प्रतिष्ठित उत्सव हैं, जो इस श्रेणी के तहत एफआईएपीएफ द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।

9. यह वार्षिक सिनेमाई समारोह वर्षों से विश्व और भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों का गंतव्य रहा है, जिसमें भारत के फिल्म उद्योग के साथ-साथ दुनिया भर के दिग्गज प्रतिनिधि, अतिथि और वक्ता इसकी शोभा बढ़ाते हैं।

अनुलग्नक

54वां इफ्फी 2023

फिल्म सूची– प्रतियोगिताएं

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता (आईसी)- 15 फिल्में

अंड्रेगोगी | निर्देशक : रेगास भानुतेजा | इंडोनेशिया | 2023 | इन्डोनेशियाई | 110′ | आईसी
ब्लागाज लेसंस | निर्देशक: स्टीफन कोमांदारेव | बुल्गारिया, जर्मनी | 2023 | बल्गेरियाई | 114′ | आईसी
बोस्नियाई पॉट | निर्देशन: पावो मारिनकोविच | क्रोएशिया | 2023 | क्रोएशियाई, जर्मन | 103′ | आईसी
एंडलेस बॉर्डर्स | निर्देशक: अब्बास अमीनी | इस्लामी गणराज्य ईरान | 2023 | फारसी | 111′ | आईसी
हॉफमैन्स फैरी टेल्स | निर्देशक: टीना बरकलाया | रूसी संघ | 2023 | रूसी | 88′ | आईसी
लुबो | निर्देशन: जियोर्जियो डिरिट्टी | इटली, स्विट्ज़रलैंड | 2023 | इतालवी, स्विस जर्मन, जेनिश | 181′ | आईसी
मेजर्स ऑफ मैन | निर्देशन: लार्स क्रुम | जर्मनी | 2023 | जर्मन | 116′ | आईसी
पार्टी ऑफ फूल्स | निर्देशन:­ अरनॉड डेस पल्लीरेस | फ्रांस | 2023 | फ्रेंच | 122′ | आईसी
द अदर विंडो | निर्देशक: मा’अयान रिप्प | इज़राइल | 2022 | हिब्रू | 83′ | आईसी
वुमन ऑफ | निर्देशक: स्ज़ुमोव्स्का, माइकल एंगलर्ट | पोलैंड | 2023 | पोलिश | 132′ | आईसी
असोग | निर्देशक: शान डेवलिन | कनाडा | 2023 | अन्य, तागालोग | 99′ | आईसी
डाइ बिफोर डेथ | निर्देशक: अहमद इमामोविच | बोस्निया और हर्जेगोविना | 2023 | बोस्नियाई | 94′ | आईसी
कंतारा | निर्देशक: ऋषभ शेट्टी | भारत | 2022 | कन्नड़ | 150′ | आईसी
सना | निर्देशक: सुधांशु सरिया | भारत | 2023 | हिंदी | 119′ | आईसी
मीरबेन | निर्देशक: मृदुल गुप्ता | भारत | 2022 | कर्बी | 89′ | आईसी

 

बेस्ट डेब्यू फीचर फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर अवार्ड (बीडी) – फिल्में

 

ऑलमोस्ट एंटायरली अ स्लाइट डिजास्टर | निर्देशक : उमुत सुबासी | तुर्की | 2023 | अंग्रेज़ी, तुर्की | 88′ | बीडी
लेट मी गो | निर्देशन: मैक्सिम रैपज़ | स्विट्ज़रलैंड | 2023 | फ्रेंच | 92′ | बीडी
ओकारिना | निर्देशक: अल्बान ज़ोगजानी | अल्बानिया | 2023 | अल्बेनियन, अंग्रेज़ी | 92′ | बीडी
स्लीप | निर्देशक: जेसन यू | दक्षिण कोरिया | 2023 | कोरियाई | 95′ | बीडी
वेन द सीडलिंग्स ग्रो | निर्देशक : रेगर आजाद काया | सीरियाई अरब गणराज्य | 2022 | अरबी, कुर्द | 83′ | बीडी
ढाई आखर | निर्देशक: परवीन अरोड़ा | भारत | 2023 | हिंदी | 98′ | बीडी
इरत्ता | निर्देशक: रोहित एम.जी. कृष्णन भारत | 2023 | मलयालम | 112 ‘ | बीडी

 

आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पदक पुरस्कार – 10 फिल्में

ए हाउस इन यरूशलेम | निर्देशक: मुयाद अलायन | फिलिस्तीन, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, कतर | 2022 | अंग्रेज़ी, अरबी, हिब्रू | 103′ | आईसीएफटी यूनेस्को
सिटिजन सेंट  निर्देशक: तिनातिन कजिरिश्विली | जॉर्जिया | 2023 | जॉर्जियाई | 100′ | आईसीएफटी यूनेस्को
ड्रिफ्ट | निर्देशक: एंथनी चन | ब्रिटेन, फ्रांस, ग्रीस | 2023 | अंग्रेज़ी, ग्रीक | 93′ | आईसीएफटी यूनेस्को
इट्स सिरा | निर्देशन: एपोलिन ट्राओरे | बुर्किना फासो, फ्रांस, जर्मनी, सेनेगल | 2023 | फ्रेंच, फुला | 122′ | आईसीएफटी यूनेस्को
कालेव | निर्देशक: ओव मस्टिंग | एस्टोनिया | 2022 | एस्टोनियाई, रूसी | 94′ | आईसीएफटी यूनेस्को
द प्राइज! | निर्देशक: पॉल फौजान अगस्ता | इंडोनेशिया | 2022 | इन्डोनेशियाई | 96′ | आईसीएफटी यूनेस्को
द सुगर एक्सपेरिमेंट | निर्देशक: जॉन टॉर्नब्लैड | स्वीडन | 2022 | स्वीडिश | 91′ | आईसीएफटी यूनेस्को
मंडली | निर्देशक: राकेश चतुर्वदी ओम | भारत | 2023 | हिंदी | 118′ | आईसीएफटी यूनेस्को
मलिकापुरम | निर्देशक: विष्णु शशि शंकर | भारत | 2022 | मलयालम | 121′ | आईसीएफटी यूनेस्को
रबिन्द्र काब्य रहस्य | निर्देशक: सायंतन घोसन | भारत | 2023 | बांग्ला | 115′ | आईसीएफटी यूनेस्को

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भारतीय रेल 16 नवंबर को दिल्ली से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भारत गौरव ट्रेन टूर का संचालन करेगी

रेल मंत्रालय, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) लिमिटेड के साथ एक सहयोगात्मक पहल में, पूर्वोत्तर राज्यों के संबंध में अनछुए स्थानों को बढ़ावा देने के लिए “नॉर्थ ईस्ट डिस्कवरी” टूर संचालित कर रहा है। भारत गौरव डीलक्स वातानुकूलित पर्यटक ट्रेन पर विशेष रूप से आयोजित किए जाने वाला यह टूर 16 नवंबर, 2023 को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करेगा। इस टूर में असम के गुवाहाटी, शिवसागर, जोरहाट और काजीरंगा, त्रिपुरा के उनाकोटि, अगरतला और उदयपुर, नागालैंड के कोहिमा और दीमापुर तथा मेघालय के शिलांग और चेरापूंजी शहर शामिल हैं, जिनका 15 दिनों के दौरे में भ्रमण किया जाएगा।

भारत गौरव डीलक्स वातानुकूलित पर्यटक ट्रेन में दो डाइनिंग कार/रेस्तरां, एक समकालीन रसोईघर (फ्लेमलेस), एसी I और एसी II कोचों में शॉवर क्यूबिकल, सेंसर-आधारित वॉशरूम फ़ंक्शन, फुट मसाजर और एक मिनी लाइब्रेरी सहित अनेक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। पूरी तरह से वातानुकूलित इस ट्रेन में एसी I, एसी II और एसी III तीन प्रकार की आवास सुविधा उपलब्ध हैं। ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे, इलेक्ट्रॉनिक तिजोरियां और प्रत्येक कोच के लिए नियुक्त किए गए समर्पित सुरक्षा गार्ड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

14 रातों और 15 दिनों के इस टूर के लिए चलने वाली इस ट्रेन का पहला पड़ाव गुवाहाटी है जहां पर्यटक कामाख्या मंदिर और उसके बाद उमानंद मंदिर तथा ब्रह्मपुत्र नदी में सूर्यास्त क्रूज का भ्रमण करेंगे। इसके बाद यह ट्रेन रात्रिकालीन यात्रा पर नाहरलागुन रेलवे स्टेशन के लिए रवाना होगी जो अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। यात्रा का अगला पड़ाव शहर शिवसागर है- जो असम के पूर्वी हिस्से स्थित है और अहोम साम्राज्य की पुरानी राजधानी है। यहां के प्रसिद्ध शिव मंदिर सिवाडोल के साथ-साथ तलातल घर और रंग घर (पूर्व का कोलोसियम) जैसे अन्य विरासत स्थलों की यात्रा भी इस कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके अलावा पर्यटकों को जोरहाट में चाय के बागानों और काजीरंगा में रात भर रुकने के साथ-साथ काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सुबह की जंगल सफारी का अनुभव भी कराया जाएगा। इसके बाद यह ट्रेन त्रिपुरा राज्य के लिए प्रस्थान करेगी, जहां मेहमानों को सघन जम्पुई पहाड़ियों में प्रसिद्ध विरासत स्थल उनाकोटि के दर्शनीय स्थलों की यात्रा कराई जाएगी। इसके बाद वे राजधानी अगरतला के लिए आगे बढ़ेगें, जहां की यात्रा में उन्हें प्रसिद्ध उज्जयंता पैलेस, नीरमहल और उदयपुर में त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की यात्रा कराई जाएगी।

त्रिपुरा के बाद, यह ट्रेन नागालैंड राज्य को कवर करने के लिए दीमापुर के लिए प्रस्थान करेगी। बदरपुर स्टेशन से लुमडिंग जंक्शन के बीच की प्राकृति सौंदर्य से भरी इस सुंदर ट्रेन यात्रा का मेहमान सुबह के शुरुआती घंटों में अपनी सीटों से ही लुत्फ उठा सकते हैं। दीमापुर स्टेशन से पर्यटकों को बसों द्वारा कोहिमा ले जाया जाएगा जहां वे नागा जीवन शैली का अनुभव करने के लिए खोनोमा गांव का भ्रमण करने सहित अन्य स्थानीय स्थलों का भी अवलोकन करेंगे। इस पर्यटक ट्रेन का अगला पड़ाव गुवाहाटी होगा जहां से पर्यटकों को सड़क मार्ग से मेघालय की राजधानी शिलांग ले जाया जाएगा और उनका रास्ते में राजसी उमियम झील पर रुकने का कार्यक्रम है। अगले दिन की शुरुआत पूर्वी खासी पहाड़ियों में बसे चेरापूंजी की यात्रा से होगी। जहां पर्यटक शिलांग पीक, एलिफेंट फॉल्स, नवाखलिकाई फॉल्स और मावसमाई गुफाओं जैसे दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करेंगे। चेरापूंजी से पर्यटक वापसी यात्रा में दिल्ली वापस लौटने के लिए गुवाहाटी स्टेशन पर ट्रेन में सवार होंगे। इस यात्रा के दौरान यह ट्रेन लगभग 5800 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।

यह उल्लेखनीय है कि भारत गौरव पर्यटक ट्रेन का शुभारंभ घरेलू पर्यटन को बढावा देने के लिए भारत सरकार की पहल “एक भारत श्रेष्ठ भारत” और “देखो अपना देश” के अनुरूप है। आईआरसीटीसी पर्यटक ट्रेन का यह 15 दिनों का सर्व-समावेशी टूर पैकेज होगा, जिसमें संबंधित श्रेणी में ट्रेन यात्रा, वातानुकूलित होटलों में रात्रि प्रवास, सभी भोजन (केवल शाकाहारी), बसों में सभी स्थानांतरण और दर्शनीय स्थलों की सैर, यात्रा बीमा, टूर एस्कॉर्ट की सेवाएं शामिल होंगी। इसके अलावा इसमें सभी आवश्यक स्वास्थ्य निवारक उपायों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और आईआरसीटीसी मेहमानों को एक सुरक्षित और यादगार अनुभव प्रदान करने का पूरा प्रयास करेगा।

अधिक जानकारी के लिए आप https://www.irctctourism.com/bharatgaurav पर जा सकते हैं, जहां बुकिंग ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर ऑनलाइन उपलब्ध है।

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भारतीय रेलवे ने इस त्योहारी मौसम के दौरान यात्रियों की सुगम और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 283 विशेष रेल सेवाओं को अधिसूचित किया है

भारतीय रेलवे इस समय चल रहे वर्तमान त्योहारी मौसम में रेल यात्रियों की सुविधा के लिए और यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए, इस वर्ष छठ पूजा तक 283 विशेष रेल सेवाओं की 4480 फेरे संचालित कर रहा है। दिल्ली-पटना, दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा, दानापुर-सहरसा, दानापुर-बेंगलुरु, अंबाला-सहरसा, मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर, पुरी-पटना, ओखा- नाहरलागुन, सियालदह-न्यू जलपाईगुड़ी, कोचुवेली-बेंगलुरु, बनारस-मुंबई, हावड़ा-रक्सौल आदि जैसे रेलवे मार्गों पर देश भर के प्रमुख स्थलों को जोड़ने के लिए विशेष ट्रेनों की योजना बनाई गई है। वर्ष 2022 के दौरान, भारतीय रेलवे ने 216 पूजा स्पेशल रेलगाड़ियों के 2614 फेरे अधिसूचित किए थे।

 

                        अधिसूचित पूजा/दिवाली/छठ विशेष रेलगाड़ियां -2023 (19.10.23 तक)
क्रम संख्या रेलवे अधिसूचित विशेष रेलगाड़ियों की संख्या अधिसूचित फेरों की कुल संख्या
1 मध्य रेलवे 14 100
2 पूर्व मध्य रेलवे 42 512
3 पूर्व तटीय रेलवे 12 308
4 पूर्वी रेलवे 8 42
5 उत्तर रेलवे 34 228
6 पूर्वोत्तर रेलवे 4 26
7 पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे 22 241
8 उत्तर पश्चिम रेलवे 24 1208
9 दक्षिण रेलवे 10 58
10 दक्षिण पूर्वी रेलवे 8 64
11 दक्षिण मध्य रेलवे 58 404
12 दक्षिण पश्चिम रेलवे 11 27
13  पश्चिम रेलवे 36 1262
  कुल योग 283 4480

 

अनारक्षित यानों में यात्रियों के व्यवस्थित प्रवेश के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कर्मचारियों की देखरेख में टर्मिनस स्टेशनों पर कतार बनाकर भीड़ को नियंत्रित करने के उपाय सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर अतिरिक्त रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) जवानों को तैनात किया गया है। रेलगाड़ियों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर अधिकारियों को आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात किया गया है। रेल सेवा में किसी भी व्यवधान को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के लिए विभिन्न अनुभागों में कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

प्लेटफॉर्म नंबरों के साथ रेलगाड़ियों के आगमन/प्रस्थान की लगातार और समय पर घोषणा के लिए उचित उपाय किए गए हैं।

महत्वपूर्ण स्टेशनों पर “मे आई हेल्प यू” यानी मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ जैसे बूथ चालू रखे गए हैं जहां यात्रियों की उचित सहायता और मार्गदर्शन के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कार्मियों और चल टिकट निरीक्षकों (टीटीई) को तैनात किया गया है। चिकित्सा टीमें कॉल पर प्रमुख स्टेशनों पर उपलब्ध हैं। पैरामेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस भी उपलब्ध है।

सुरक्षा एवं सतर्कता विभाग के कर्मचारियों द्वारा किसी भी कदाचार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। विशेष रूप से प्रतीक्षलय, विश्राम गृह, प्लेटफॉर्म और सामान्य तौर पर स्टेशनों पर सफाई बनाए रखने के निर्देश क्षेत्रीय मुख्यालय द्वारा दिए गए हैं।

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जम्मू-कश्मीर में 82 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 395 मीटर (2-लेन) मारोग सुरंग के साथ 250 मीटर सेतु (2-लेन) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है : गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक पोस्ट में कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुमानित लागत पर 395 मीटर (2-लेन) मारोग सुरंग के साथ 250 मीटर सेतु (2-लेन) का 82 करोड़ रुपये का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

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गडकरी ने कहा कि यह अवसंरचना एनएच-44 के रामबन से बनिहाल खंड के साथ स्थित है। बड़ी परियोजना के हिस्से के रूप में यह 645 मीटर का खंड, न केवल यात्रा की दूरी को 200 मीटर तक कम कर देगा, खड़ी ढलानों को कम करेगा, बल्कि प्रसिद्ध सीता राम पासी स्लाइड क्षेत्र के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की सुविधा भी प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्‍त, यह चुनौतीपूर्ण मार्गों क्षेत्र की ढलानों को दरकिनार करते हुए वाहनों के सुचारू प्रवाह की सुविधा प्रदान करता है।

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गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के तहत हमने जम्मू और कश्मीर में अद्वितीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से बरकरार रखा है। उन्होंने कहा कि यह रूपांतरकारी विकास न केवल क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि में योगदान देता है बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में इसके आकर्षण को भी बढ़ाता है।

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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ से पहली हरित हाइड्रोजन ईंधन सेल बस को हरी झंडी दिखाई

प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कि हरित हाइड्रोजन न केवल हरित नौकरियों के माध्यम से हरित विकास का आधार बनेगा, बल्कि यह स्वच्छ ऊर्जा रूपातंरण की दिशा में दुनिया के लिए एक उदाहरण भी स्थापित करेगा, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और आवास एवं शहरी मामले मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा “दिल्ली में ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए माननीय प्रधानमंत्री ने विद्युत गतिशीलता, गैस आधारित अर्थव्यवस्था और मिशन मोड पर ग्रीन हाइड्रोजन को ले जाने के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की घोषणा की।” श्री हरदीप सिंह पुरी ने यह कर्तव्य पथ, नई दिल्ली से पहली हरित हाइड्रोजन ईंधन सेल बस को हरी झंडी दिखाने के अवसर पर संबोधित करते हुए कहा। इस अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्री रामेश्वर तेली; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव श्री पंकज जैन; और इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्री एस एम वैद्य भी उपस्थित थे।

युवा स्कूली बच्चों, अधिकारियों और मीडियाकर्मियों की उपस्थिति में पहली हाइड्रोजन सेल बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए, श्री हरदीप सिंह पुरी ने हाइड्रोजन की अवधारणा और इसे भविष्य के लिए ईंधन के रूप में उपयोग करने के लाभों के बारे में बताते हुए कहा, “ईंधन सेल हाइड्रोजन और वायु का उपयोग कर बस को चलाने के लिए बिजली उत्पन्न करता है और बस का एकमात्र उप-उत्पाद पानी है, इसलिए यह डीजल और पेट्रोल पर चलने वाली पारंपरिक बसों की तुलना में संभवतः परिवहन का सबसे पर्यावरण अनुकूल साधन है। तीन गुना ऊर्जा घनत्व और हानिकारक उत्सर्जन की अनुपस्थिति के साथ, हाइड्रोजन ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक स्वच्छ, अधिक कुशल विकल्प के रूप में उभरता है।” श्री पुरी ने कहा कि इसके अतिरिक्त, हाइड्रोजन सेल से संचालित बसों को पूरी तरह से चार्ज होने में कुछ मिनट लगते हैं।

स्वच्छ और हरित ऊर्जा पर सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में बोलते हुए, श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हाइड्रोजन और जैव-ईंधन जैसे उभरते ईंधन अगले दो दशकों में वैश्विक वृद्धिशील ऊर्जा मांग वृद्धि का 25प्रतिशत  हिस्सा होंगे। उन्होंने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े सिंक्रोनस ग्रिडों में से एक के साथ, हमने ‘वन नेशन-वन ग्रिड-वन फ़्रीक्वेंसी’ हासिल की है और जल्द ही हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात में वैश्विक विजेता होंगे और हरित हाइड्रोजन के केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार हैं।”

भारत को एक वैश्विक मंच पर ले जाने और यह सुनिश्चित करने में कि यह स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक केंद्र बन जाए और जल्द ही ऊर्जा में आत्मनिर्भरता हासिल कर पाए पर उद्योग और सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए, पेट्रोलियम मंत्री ने कहा “हमें दुनिया के पहले बीएस 6 (स्टेज II) विद्युतीकृत फ्लेक्स फ्यूल वाहन प्रोटोटाइप जिसमें फ्लेक्स फ्यूल इंजन के साथ-साथ एक इलेक्ट्रिक पावरट्रेन भी शामिल है और जो बेहतर ईंधन दक्षता के साथ इथेनॉल का उच्च उपयोग प्रदान करता है, के लॉन्च की जानकारी थी। अब पहली दो हाइड्रोजन सेल बसों को हरी झंडी दिखाने के साथ हमने शुरुआत कर दी है और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक ऐसी 15 अन्य बसें दिल्ली एनसीआर की सड़कों पर चलेंगी।”

हरित हाइड्रोजन चालित बसों को देश में शहरी परिवहन के लिए गेम चेंजर के रूप में चिह्नित करते हुए, श्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में ईंधन सेल और हाइड्रोजन के बुनियादी ढांचे से संबंधित स्वदेशी समाधानों के विकास के लिए टाटा मोटर्स के साथ इस सहयोगी दृष्टिकोण को अपनाने के लिए इंडियन ऑयल की सराहना की। श्री पुरी ने कहा, “इस परियोजना की सफलता भारत को जीवाश्म ऊर्जा के शुद्ध आयातक से स्वच्छ हाइड्रोजन ऊर्जा के शुद्ध निर्यातक बनने में मदद कर सकती है।”

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री रामेश्वर तेली ने कहा, “ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, जिसका उद्देश्य भारत में ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना है, एक विकासात्मक और प्रगतिशील पथ पर है। कार्बन-मुक्त अर्थव्यवस्था में के रूप में परिवर्तित होने में हाइड्रोजन एक प्रमुख खिलाड़ी होगा और जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करेगा। आज का लॉन्च निश्चित रूप से स्वच्छ और हरित राष्ट्र बनने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।”

सभा को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव श्री पंकज जैन ने कहा कि हम प्रौद्योगिकी और गतिशीलता के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। उन्होंने जोड़ा, “आज ग्रीन हाइड्रोजन बस को हरी झंडी दिखाना इस बात का प्रतीक है कि गतिशीलता कैसे बदल जाएगी और भारत पारंपरिक ईंधन से कैसे दूर हो जाएगा। हाइड्रोजन के क्षेत्र में इस क्रांतिकारी प्रयास के लिए इंडियन ऑयल को मेरी बधाई।” उन्होंने स्कूली बच्चों को नई हरित प्रौद्योगिकियों के बारे में जिज्ञासु होने और यह जानने के लिए प्रोत्साहित किया कि ये प्रौद्योगिकियां हमें आंतरिक दहन इंजन से कैसे दूर ले जाएंगी।

इससे पहले दिन में, गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए, इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्री एस एम वैद्य ने कहा कि हाइड्रोजन, वर्ष 2070 तक नेट-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने की भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में गेम चेंजर बनने के लिए तैयार है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण और आज हरित हाइड्रोजन ईंधन सेल बसों को हरी झंडी दिखाना मोबिलिटी क्षेत्र को हरित बनाने के लिए स्थायी समाधान तैयार करने की दिशा में इंडियन ऑयल की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है। भारत सरकार और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सक्रिय समर्थन से, यह मील का पत्थर शून्य उत्सर्जन गतिशीलता की दिशा में देश की यात्रा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। इस कार्यक्रम के तहत, भारतीय परिचालन स्थितियों के तहत प्रदर्शन डेटा स्थापित करने के लिए दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में निर्दिष्ट मार्गों पर 15 ईंधन सेल बसें चलाई जाएंगी। संपूर्ण मूल्य श्रृंखला की प्रभावकारिता, दक्षता और स्थिरता स्थापित करने के लिए ये 15 बसें कुल 3 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेंगी।

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ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने अरुणाचल प्रदेश के तेजू हवाई अड्डे पर नए बुनियादी ढांचे का उद्घाटन किया

नागर विमानन तथा इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज अरुणाचल प्रदेश में तेजू हवाई अड्डे के नव विकसित बुनियादी ढांचे का उद्घाटन किया।

तेजू हवाई अड्डा तेजू शहर में स्थित एक घरेलू हवाई अड्डा है, जो एकल रनवे के माध्यम से संचालित होता है। यह हवाई अड्डा 212 एकड़ भूमि पर विकसित किया गया है और एटीआर 72 प्रकार के विमानों के संचालन संबंधी दायित्वों को निभाने में सक्षम है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने राज्य सरकार के अनुरोध पर तेजू हवाई अड्डे को शुरू करने हेतु विकास एवं उन्नयन का कार्य किया। कुल 170 करोड़ रुपये की लागत वाले इन कार्यों में रनवे का विस्तार (1500 मीटरx30 मीटर) और, दो एटीआर 72 प्रकार के विमान के लिए नए एप्रन का निर्माण, एक नए टर्मिनल भवन एवं एक फायर स्टेशन सह एटीसी टॉवर का निर्माण शामिल है।

इस अवसर पर, केन्द्रीय नागर विमानन तथा इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास को विशेष गति दी गई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उत्तर-पूर्व भारत को भारत का ‘हीरा’ बना दिया है, जिसका आशय हाईवे (राजमार्ग), इंटरनेट, रेलवे और विएशन (विमानन) से है। ये वैसे चार प्रमुख घटक हैं, जो इस क्षेत्र के समग्र एवं समावेशी विकास को संभव बना रहे हैं। इसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस)-उड़ान के बारे में बात की। इस योजना से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को काफी लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘उड़ान’ योजना के माध्यम से नागर विमानन क्षेत्र का लोकतांत्रीकरण किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘उड़ान’ के तहत 2.50 लाख से अधिक उड़ानों ने 1.37 करोड़ से अधिक लोगों को यात्रा करने में मदद की है।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में नागर विमानन क्षेत्र की स्थिति के बारे में बात की। वर्ष 2014 की स्थिति से तुलना करते हुए, उन्होंने कहा कि 2014 तक अरुणाचल प्रदेश में कोई हवाई अड्डा नहीं था और नौ वर्षों की अवधि में यहां चार नए हवाई अड्डे विकसित और शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तेजू में निर्मित नया टर्मिनल भवन इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगा तथा इस क्षेत्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केन्द्रीय मंत्री ने ‘उड़ान 5.0’ योजना के तहत ईटानगर से तीन सीधे हवाई मार्गों- ईटानगर से दिल्ली, ईटानगर से जोरहाट, और ईटानगर से रूपसी – की भी घोषणा की, जो शीघ्र ही शुरू हो जायेंगे।

तेजू हवाई अड्डे को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की आरसीएस उड़ान योजना के तहत 2018 में चालू किया गया था। हवाई अड्डा वर्तमान में एलायंस एयर और फ्लाईबिग एयरलाइन द्वारा नियमित निर्धारित उड़ानों के माध्यम से डिब्रूगढ़, इंफाल और गुवाहाटी से जुड़ा हुआ है।

टर्मिनल भवन की मुख्य विशेषताएं

  • टर्मिनल क्षेत्र: 4000 वर्गमीटर
  • व्यस्त समय में सेवा क्षमता:             300 यात्री
  • चेक-इन काउंटर:       05 + (03 भविष्य में)
  • आगमन कैरसेल 02
  • विमान पार्किंग बे:       02 – एटीआर-72 प्रकार के विमान

स्थायित्व संबंधी विशेषताएं:

• डबल इंसुलेटेड छत प्रणाली

• ऊर्जा के मामले में किफायती एचवीएसी और प्रकाश व्यवस्था

• कम गर्मी बढ़ाने वाली ग्लेजिंग

• ईसीबीसी के अनुरूप उपकरण।

• ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली।

• फ्लशिंग और बागवानी उद्देश्यों के लिए शोधित पानी का पुन: उपयोग।

• वर्षा जल संचयन का टिकाऊ शहरी जल निकासी प्रणाली के साथ एकीकरण

• कुशल जल उपकरणों का उपयोग।

इस परियोजना के लाभ

• अधिक यातायात को संभालने के लिए हवाई अड्डे की क्षमता का विस्तार

• देश के बाकी हिस्सों के साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना

• पर्यटन, व्यापार और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना

• इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना

इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री चोउना मीन, अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन एवं नागर विमानन मंत्री श्री नाकाप नालो, सांसद (राज्यसभा) श्री नबाम रेबिया, सांसद (लोकसभा)  तापिर गाओ और भारत सरकार के नागर विमान मंत्रालय में सचिव श्री वुमलुनमंग वुअलनाम उपस्थित थे।

तेजू लोहित नदी के तट पर स्थित एक छोटा सा शहर है और यह अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले का मुख्यालय है। यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जहां चारों ओर हरे-भरे जंगल और ऊंची-ऊंची पहाड़ियां हैं।

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गोवा में भारत के पहले प्रकाश स्तंभ महोत्सव का आज शुभारंभ हुआ; प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किए जाने वाले 75 ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष ध्यान

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग तथा आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 23 सितंबर 2023 को गोवा के पणजी में ऐतिहासिक किले अगौड़ा में ‘भारतीय प्रकाश स्तंभ उत्सव’ या भारतीय लाइटहाउस महोत्सव के पहले संस्करण का उद्घाटन किया।

इस महोत्सव का उद्देश्य भारत के 75 प्रतिष्ठित प्रकाशस्तंभों के समृद्ध समुद्री इतिहास को पुनर्जीवित करना और दुनिया के सामने उनकी शानदार गाथाओं को सामने लाना है। इस प्रकार के पहले आयोजन के प्रमुख स्थल, फोर्ट अगौड़ा में आयोजित बैठक में गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सावंत; केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और पर्यटन राज्य मंत्री,  श्रीपद नाइक और गोवा सरकार के पर्यटन मंत्री श्री रोहन खौंटे ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधायक माइकल लोबो भी उपास्थित थे।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा, “इस महोत्सव के शुभारंभ के साथ, हम इन प्रतिष्ठित स्थलों की समृद्ध विरासत को उजागर करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ समुद्र तटीय भारत में 75 प्रकाश स्तंभों में सदियों पुराने क्लासिक्स को फिर से जीवंत करने की प्रक्रिया और उन्हें दुनिया के सामने पेश करने के लिए सक्षम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारा देश आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र प्रयास में हम प्रतिष्ठित प्रकाश स्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के प्रमुख केन्द्रों का उत्प्रेरक बनाकर मोदी की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं। आज, हम अपने दूरदर्शी नेता,  मोदी  की दूरदर्शिता और नेतृत्व के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमारे विशिष्ट प्रकाशस्तंभों को मनोरम विरासत पर्यटन स्थलों में बदलने का समर्थन किया है। बहुत लंबे समय तक, अंधेरी रातों के बीच सैकड़ों नाविकों और जहाजों को आशा की रोशनी प्रदान करते समय समुद्र तटों के मूक प्रहरी को नजरअंदाज कर दिया गया था। “प्रकाश स्तंभ उत्सव” इसे बदलने का हमारा प्रयास है। इन ऐतिहासिक प्रकाशस्तंभों ने हमारे देश के इतिहास में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उसके बारे में आप सभी को सूचित करनाउससे जोड़ना और शिक्षित करना हमारा मिशन है।

 

भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य ऐतिहासिक स्थलों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों में विकसित करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी मार्ग के लिए आधार तैयार करने के लिए भारतीय प्रकाश स्तंभ महोत्सव का लाभ प्राप्त करना है। प्रकाश स्तंभ और लाइटशिप महानिदेशालय ने पहले ही 75 ऐसे प्रकाश स्तंभों की पहचान कर ली है और यह उत्सव हमारी समुद्री विरासत का जश्न मनाने और संरक्षित करने की सरकार की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री महोदय ने कहा, “प्रकाश स्तंभ महोत्सव” एक शानदार उत्सव है जो समय और सुंदरता के माध्यम से एक मनोरम यात्रा होने का वादा करता है। यह एक ऐसी यात्रा है जो हमारे समुद्री इतिहास के छिपे हुए रत्नों को उजागर करेगी और हमारे ऐतिहासिक प्रकाश स्तंभों की अनकही गाथाओं को उजागर करेगी। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने परिवर्तन के लिए सुधार की पहल के एक हिस्से के रूप में, भारत में पोत परिवहन क्षेत्र में सहायता के विकास, रखरखाव और प्रबंधन के लिए एक रूपरेखा प्रदान करने के लिए लाइटहाउस अधिनियम, 1927 को निरस्त करके समुद्री परिवहन के लिए समुद्री सहायता अधिनियम, 2021 लागू किया। इसके अंतर्गत हमने विरासत प्रकाश स्तंभ की नई अवधारणा प्रस्तुत की, जिसमें केंद्र सरकार अपने नियंत्रण में समुद्री परिवहन के लिए किसी भी सहायता को विरासत प्रकाश स्तंभ के रूप में नामांकित कर सकती है। समुद्री परिवहन में सहायता के रूप में उनके कार्य के अलावा, ऐसे प्रकाशस्तंभों को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटक उद्देश्यों के लिए विकसित किया जाएगा। यह महोत्सव सिर्फ ज्ञान का नहीं है; यह मूल्यों और अवसरों को पैदा करने के बारे में है। महोत्सव से अलग, हमारी परिकल्पना प्रकाशस्तंभों को पर्यटन स्थलों के रूप में बढ़ावा देना, इन ऐतिहासिक संरचनाओं पुनर्जीवन प्रदान करना और स्थानीय समुदायों और व्यवसायों के लिए अवसर पैदा करना है।”

दिन भर चले कार्यक्रम के दौरान, ‘हमारे तटों के अग्ररक्षक: भारत के अतीत और वर्तमान के प्रमाण के रूप में प्रकाशस्तंभ’ शीर्षक से एक सत्र आयोजित किया गया था, जिसे शासन, नीतियां और राजनीति संस्थान की पहल, भारत प्रवाह द्वारा आयोजित किया गया था, जहां प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् जो राखीगढ़ी के रूप में ख्याति प्राप्त प्रो. वसंत शिंदे ने भारत के समुद्री इतिहास में प्रकाशस्तंभों के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बात की। डॉ. सुनील गुप्ता, समुद्री पुरातत्वविद् और नई दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में ओएसडी; और गोवा राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. वासु उस्पाकर ने भी सत्र में अपने विचार रखे। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने प्रकाश स्तंभ विरासत पर्यटन विकास के प्रति मंत्रालय के दृष्टिकोण और इस चरण में 75 प्रकाश स्तंभों में निवेश के अवसरों के बारे में एक केस प्रस्तुत किया।

भारत के पहले प्रकाश स्तंभ महोत्सव का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रदर्शनी सत्र, समुद्री इतिहास और संस्कृति पर प्रकाश और ध्वनि शो, ख्याति प्राप्त गायकों के साथ मधुर शामें, समुद्र तटों के  जायको और सामुदायिक सहभागिता हैं।

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भारतीय नौसेना और उबर के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

भारतीय नौसेना ने मैसर्स उबर के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार, एनडब्ल्यूडब्ल्यूए अध्यक्ष कला हरि कुमार और भारत, दक्षिण एशिया और मिस्र में उबर बिजनेस के वरिष्ठ कंट्री मैनेजर  अभिनव मित्तू भी उपस्थित रहे। इस एमओयू का उद्देश्य देश भर में नौसेना कर्मियों और उनके परिवारों की व्यक्तिगत यात्रा और आवागमन के लिए विश्वसनीय, सुविधाजनक, सुरक्षित और किफायती वाहन सुविधा प्रदान करना है।

मैसर्स उबर भारतीय नौसेना कर्मियों और उनके परिवारों को निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगा: –

(ए) उबर ऐप पर एक वैयक्तिकृत प्रोफ़ाइल बनाएगा।

(बी) प्रीमियर एक्जीक्यूटिव कैब श्रेणी के जरिए कार्यालय आने-जाने के व्यस्त समय के दौरान बढ़ती कीमतों से सुरक्षा प्रदान करेगा।

(सी) टॉप-रेटेड ड्राइवरों की उपलब्धता।

(डी) सभी उबर वाहनों के लिए शून्य रद्दीकरण शुल्क।

(ई) 24×7 प्रीमियम व्यवसाय सहायता।

यह समझौता ज्ञापन सीएनएस के ‘शिप फर्स्ट’ के तहत ‘हैप्पी पर्सनेल’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है और सशस्त्र बलों में यह पहली कोशिश है। यह परिवर्तनकारी बदलाव के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाने की भारत सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ विज़न को आगे बढ़ाने का काम करेगा।

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प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में लगभग 6,350 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं

प्रधानमंत्री मोदी ने आज छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में लगभग 6,350 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं। उन्होंने छत्तीसगढ़ के 9 जिलों में 50 बिस्तरों वाले ‘क्रिटिकल केयर ब्लॉक’ की आधारशिला रखी और जांच की गई आबादी को 1 लाख सिकल सेल परामर्श कार्ड वितरित किए। इन रेल परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ पूर्व रेल परियोजना चरण-I, चंपा से जमगा के बीच तीसरी रेल लाइन, पेंद्रा रोड से अनूपपुर के बीच तीसरी रेल लाइन और तलाईपल्ली कोयला खदान को एनटीपीसी लारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन से जोड़ने वाली एमजीआर (मेरी-गो-राउंड) प्रणाली शामिल है।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा की कि छत्तीसगढ़ में 6,400 करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाओं का अनावरण किया जा रहा है और इसी के साथ यह राज्य विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की ऊर्जा उत्पादन क्षमता का विस्तार करने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए आज विभिन्न नई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। उन्होंने इस अवसर पर सिकल सेल काउंसलिंग कार्ड के वितरण का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि पूरी दुनिया आधुनिक विकास और सामाजिक कल्याण की तेज़ रफ्तार के भारतीय मॉडल को न केवल देख रही है बल्कि सराहना भी कर रही है। प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं की मेजबानी को याद करते हुए ज़िक्र किया कि वे भारत के विकास और सामाजिक कल्याण मॉडल से बेहद प्रभावित थे। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी बड़ी संस्थाएं भारत की सफलता से सीखने की बात कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय देश के हर राज्य और हर क्षेत्र के विकास के प्रति सरकार की बराबर प्राथमिकता को दिया। प्रधानमंत्री ने आज की परियोजनाओं के लिए नागरिकों को बधाई देते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ और रायगढ़ का यह क्षेत्र भी इसका साक्षी है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि “छत्तीसगढ़ देश के विकास का एक पावर हाउस है” और कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है जब उसके पावर हाउस पूरी ताकत से काम करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 9 वर्षों में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बहुमुखी विकास के लिए लगातार काम किया है और उनके विज़न तथा नीतियों का परिणाम आज यहां देखा जा सकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी योजनाएं संचालित की जा रही हैं और नई-नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने विशाखापत्तनम से रायपुर आर्थिक गलियारे और रायपुर से धनबाद आर्थिक गलियारे की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने के लिए जुलाई में की गई अपनी रायपुर की यात्रा को याद किया। उन्होंने राज्य को प्रदान किए गए विभिन्न महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की कि “आज छत्तीसगढ़ के रेलवे नेटवर्क के विकास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है” और यह सुधरा हुआ रेल नेटवर्क बिलासपुर-मुंबई रेल लाइन के झारसुगुड़ा बिलासपुर खंड में भीड़ को कम करेगा। उन्होंने कहा, इसी तरह जो अन्य रेल लाइनें शुरू हो रही हैं और जो रेल कॉरिडोर बन रहे हैं, वे छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देंगे। उन्होंने कहा कि इन मार्गों के पूरा होने पर न केवल छत्तीसगढ़ के लोगों को सुविधा मिलेगी बल्कि इस इलाके में रोजगार और आय के नए अवसर भी निर्मित होंगे। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कोयला खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयले के परिवहन की लागत और समय अब कम हो जाएंगे। प्रधानमंत्री ने बताया कि कम लागत पर ज्यादा से ज्यादा बिजली पैदा करने के लिए सरकार पिट हेड थर्मल पावर प्लांट भी बना रही है। उन्होंने तलाईपल्ली खदान को जोड़ने के लिए 65 किलोमीटर लंबी मैरी-गो-राउंड परियोजना के उद्घाटन का भी जिक्र किया और कहा कि देश में ऐसी परियोजनाओं की संख्या बढ़ेगी और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को इसका सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।

अमृत काल के अगले 25 वर्षों में भारत को एक विकसित राष्ट्र में परिवर्तित करने के अपने संकल्प पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने विकास के लिए प्रत्येक नागरिक की समान भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की बात की और सूरजपुर जिले में बंद पड़ी कोयला खदान का जिक्र किया, जिसे इको-टूरिज्म के हिस्से के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि कोरवा में भी ऐसा ही इको पार्क विकसित करने का काम चल रहा है। इस क्षेत्र के जनजातीय वर्ग को मिलने वाले लाभों पर बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने खदानों से निकलने वाले पानी से हजारों लोगों को दी जा रही सिंचाई और पेयजल सुविधाओं पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि वन संपदा के जरिए समृद्धि के नए रास्ते खोलने के साथ-साथ, वनों और भूमि की रक्षा करना भी सरकार का संकल्प है। वनधन विकास योजना का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि इस योजना से लाखों आदिवासी युवा लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने दुनिया द्वारा बाजरा वर्ष मनाए जाने का भी ज़िक्र किया और आने वाले वर्षों में श्रीअन्न या बाजरा बाजार की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां देश की आदिवासी परंपरा को नई पहचान मिल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रगति के नये रास्ते सृजित हो रहे हैं।

जनजातीय आबादी पर सिकल सेल एनीमिया के प्रभाव के संबंध में प्रधानमंत्री ने कहा कि सिकल सेल परामर्श कार्डों का वितरण आदिवासी समाज के लिए एक बड़ा कदम है क्योंकि जानकारी का प्रसार करने से इस रोग को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की जरूरत पर बल दिया और विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।

इस अवसर पर अन्य लोगों के साथ-साथ केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री श्री टी एस सिंहदेव उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

रायगढ़ में इस सार्वजनिक कार्यक्रम में लगभग 6,350 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित करने से, देश भर में कनेक्टिविटी में सुधार पर प्रधानमंत्री के आग्रह को बढ़ावा मिलेगा। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ पूर्व रेल परियोजना चरण-I, चंपा से जमगा के बीच तीसरी रेल लाइन, पेंद्रा रोड से अनूपपुर के बीच तीसरी रेल लाइन और तलाईपल्ली कोयला खदान को एनटीपीसी लारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन से जोड़ने वाली एमजीआर (मेरी-गो-राउंड) प्रणाली शामिल है। यह रेल परियोजनाएं इस इलाके में यात्रियों की आवाजाही के साथ-साथ माल ढुलाई को सुगम बनाकर सामाजिक आर्थिक विकास को गति प्रदान करेंगी।

छत्तीसगढ़ पूर्व रेल परियोजना के चरण-I को महत्वाकांक्षी पीएम गतिशक्ति-मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है और इसमें खरसिया से धरमजयगढ़ तक 124.8 किलोमीटर की रेल लाइन शामिल है। इसमें गेर-पेलमा के लिए एक स्पर लाइन और छल, बरौद, दुर्गापुर और अन्य कोयला खदानों को जोड़ने वाली तीन फीडर लाइनें शामिल हैं। लगभग 3,055 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह रेल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉड गेज लेवल क्रॉसिंग और यात्री सुविधाओं के साथ फ्री पार्ट डबल लाइन से सुसज्जित है। यह छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में स्थित मांड-रायगढ़ कोयला क्षेत्रों से कोयला परिवहन के लिए रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

पेंद्रा रोड से अनूपपुर के बीच तीसरी रेल लाइन 50 किमी लंबी है और लगभग 516 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है। चांपा और जामगा रेल खंड के बीच 98 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन लगभग 796 करोड़ रुपये की लागत से बनी है। नई रेल लाइनों से इस इलाके में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन तथा रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी।

65 किलोमीटर लंबी विद्युतीकृत एमजीआर (मैरी-गो-राउंड) प्रणाली एनटीपीसी की तलाईपल्ली कोयला खदान से छत्तीसगढ़ में 1600 मेगावाट के एनटीपीसी लारा सुपर थर्मल पावर स्टेशन तक कम लागत में उच्च श्रेणी का कोयला लाने का काम करेगी। इससे एनटीपीसी लारा से कम लागत के और विश्वसनीय बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। 2070 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित एमजीआर प्रणाली, कोयला खदानों से बिजली स्टेशनों तक कोयला परिवहन में सुधार के लिए एक तकनीकी चमत्कार से कम नहीं है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के 9 जिलों में 50 बिस्तरों वाले ‘क्रिटिकल केयर ब्लॉक’ का शिलान्यास भी किया। प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत दुर्ग, कोंडागांव, राजनांदगांव, गरियाबंद, जशपुर, सूरजपुर, सरगुजा, बस्तर और रायगढ़ जिलों में नौ क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाए जाएंगे, जिनकी कुल लागत 210 करोड़ रुपये होगी। जनजातीय आबादी के बीच विशेष रूप से होने वाले सिकल सेल रोग से उपजी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने जांची गई आबादी को एक लाख सिकल सेल परामर्श कार्ड वितरित किए। सिकल सेल परामर्श कार्ड का वितरण राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन (एनएसएईएम) के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा जुलाई 2023 में मध्य प्रदेश के शहडोल में किया गया था।

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भारत और रूस समुद्री सहयोग को विस्तृत एवं व्यापक बनाने के उद्देश्य से उत्तरी समुद्री मार्ग (एनएसआर) तथा पूर्वी समुद्री गलियारे (ईएमसी) में संभावनाएं तलाश रहे हैं

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग और आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रूसी गणराज्य में सुदूर पूर्व और आर्कटिक के विकास मंत्री  ए ओ चेकुनकोव से आज रूस के व्लादिवोस्तोक में “फार ईस्ट स्ट्रीट” स्थित कामचटका क्षेत्र के पवेलियन में मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों के नेताओं ने समुद्री सहयोग को वृहद् एवं व्यापक बनाने के उद्देश्य से भारत और रूस के बीच समुद्री आवागमन की विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की, जिसमें उत्तरी समुद्री मार्ग (एनएसआर) के साथ-साथ व्लादिवोस्तोक तथा चेन्नई के बीच पूर्वी समुद्री गलियारे (ईएमसी) जैसे नए समुद्री परिवहन गलियारों के उपयोग की संभावना भी शामिल की गई है। इसके साथ भारत और रूस, रूस के व्लादिवोस्तोक में जीआई एडमिरल नेवेल्स्की रूसी समुद्री प्रशिक्षण संस्थान में ध्रुवीय एवं आर्कटिक समुद्र के जल में भारतीय नाविकों को प्रशिक्षित करने का निर्णय भी लिया गया। यह संस्थान सिम्युलेटर प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित है।

इस अवसर पर सोनोवाल ने अपने संबोधन में कहा है कि रूस तथा भारत के बीच संबंधों की जड़ें गहरी व ऐतिहासिक  हैं और यह आपसी सम्मान एवं साझा हितों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि हम सशक्त संबंध बनाए रखने और विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वचनबद्ध हैं। श्री सोनोवाल ने बताया कि रूस की सरकार के सहयोग से हमारी टीम ने मई 2023 में व्लादिवोस्तोक, वोस्तोचन, नखोदका और कोजमिनो बंदरगाहों का दौरा किया था, जिससे हमें इस मुद्दे पर आगे बढ़ने के उद्देश्य से अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि इन पत्तनों की यात्राओं के दौरान प्राप्त हुए सहयोग ने पूर्वी समुद्री गलियारे (ईएमसी) के पूर्ण पैमाने पर संचालन के लिए आवश्यकताओं की हमारी समझ में विशेष योगदान दिया है।  सोनोवाल ने कहा कि चेन्नई में हमारी प्रस्तावित कार्यशाला ईएमसी के संचालन पर चर्चा करेगी और हम इस गलियारे के साथ कोकिंग कोयला, तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं के व्यापार एवं परिवहन के लिए प्रासंगिक हितधारकों को शामिल करने की कल्पना करते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमने आगामी ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट (जीएमआईएस), 2023 में भाग लेने के लिए रूस को आमंत्रित किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रूसी गणराज्य में सुदूर पूर्व और आर्कटिक के विकास मंत्री ए ओ चेकुनकोव ने कहा है कि हमने अपने सहयोगी देशों के बीच समुद्री संचार के विकास के साथ-साथ उत्तरी समुद्री मार्ग के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा है कि संपर्कों की यह गतिशीलता हमारी साझेदारी को और बेहतर करने की नींव रखने जैसा है। श्री ए ओ चेकुनकोव ने कहा है कि भारत के साथ सहयोग करना हमारे मंत्रालय की अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों की प्राथमिकताओं में से एक है और हम आपसी हित के सभी क्षेत्रों के लिए सुदूर पूर्व में भारतीय भागीदारों के साथ लाभप्रद संबंध विकसित करने का इरादा रखते हैं। सोनोवाल ने भारत और रूस के बीच व्यापार एवं वाणिज्य के अवसरों की तलाश के लिए अन्य वैकल्पिक मार्गों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत बढ़ी हुई संपर्क सुविधा और व्यापार की क्षमता को पहचानते हुए उत्तरी समुद्री मार्ग के विकास के संबंध में साझेदारी करने की इच्छा रखता है। ए ओ चेकुनकोव ने व्यापार के लिए वैकल्पिक मार्गों के बारे में अपने विचार भी साझा किये। उन्होंने कहा कि हम आपके निष्कर्ष से सहमत हैं कि इस क्षेत्र का संभावित कार्गो आधार कोकिंग कोयला, तेल, एलएनजी और उर्वरक ही होगा। सुदूर पूर्व में, यह उत्पाद श्रृंखला पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और भारत के पूर्व में इसे प्राप्त करने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है।  ए ओ चेकुनकोव ने कहा कि सुदूर पूर्वी बंदरगाहों की विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को विस्तारित भौगोलिक दायरे में लागू किया जाना चाहिए, जिसमें प्राथमिक के अलावा अन्य क्षेत्र तथा मुख्य रूप से खाबरोवस्क का समुद्री इलाका शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हम इस वर्ष अक्टूबर में एक व्यावसायिक मिशन पर चेन्नई का दौरा करेंगे और प्रमुख रूसी निर्यातकों की भागीदारी के साथ उपरोक्त परियोजनाओं के शुभारंभ के लिए भारतीय पक्ष के साथ पारस्परिक रूप से लाभप्रद समाधान विकसित करने के उद्देश्य के साथ तैयार हैं। ए ओ चेकुनकोव ने कहा कि एनएसआर एक वैश्विक परिवहन परियोजना है और इसका विकास रूस तथा गैर-क्षेत्रीय देशों दोनों को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह पोत निर्माण उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और उत्तरी गोलार्ध वाले देशों में सामान्य रसद व्यवसाय में भागीदारी से आय प्राप्त करने का एक अवसर भी है।

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