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शिक्षा

देश के आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने के लिए आदि युवा फेलोशिप एवं आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक की शुरुआत

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र भारत के साथ साझेदारी में आज आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदि युवा फेलोशिप एवं आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह एक प्रमुख पहल है, जिसे विश्व के सबसे बड़े जनजातीय जमीनी स्तर के नेतृत्व अभियान के रूप में देखा जा रहा है।

आदि कर्मयोगी अभियान का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2025 को जनजातीय गौरव वर्ष (15 नवंबर 2024 – 15 नवंबर 2025) के भाग के रूप में किया था। इसका उद्देश्य 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 550 जिलों के एक लाख आदिवासी बहुल गांवों के 11 करोड़ नागरिकों को इसमें सीधे शामिल करना है। उत्तरदायी, जवाबदेह एवं नागरिक-केंद्रित शासन के सिद्धांतों पर आधारित यह अभियान शासन को एक जन अभियान बनाने एवं विकसित भारत 2047 की नींव रखने की कोशिश करता है।

इस पहल के एक भाग के रूप में, आदि सेवापर्व (17 सितंबर – 02 अक्टूबर 2025) चल रहा है, जिस दौरान जनजातीय समुदाय एवं सरकारी अधिकारी मिलकर जनजातीय ग्राम विजन 2030 कार्य योजना तैयार करेंगे  ताकि समावेशी विकास की दिशा में स्थानीय विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

आदि युवा फेलोशिप

संयुक्त राष्ट्र भारत द्वारा समर्थित आदि युवा फेलोशिप, अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है जिसे संरचित शिक्षा, मार्गदर्शन एवं कैरियर विकास के माध्यम से जनजातिय युवाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।

  • चयनित जनजातीय युवा 12 महीने की वेतन फेलोशिप प्राप्त करेंगे, जो एक अनुकूलित शिक्षण योजना होगी जिसमें ज्ञान निर्माण, नौकरी के अनुभव एवं चिंतनात्मक अभ्यास के बीच का संतुलन स्थापित किया जाएगा।
  • फेलो को मासिक भत्ते, व्यापक स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा तथा उच्च गुणवत्ता वाले संयुक्त राष्ट्र एवं वाणिज्यिक शिक्षण प्लेटफार्मों तक पहुंच प्राप्त होगी।
  • यह कार्यक्रम फेलो को राष्ट्रीय कौशल और रोजगारपरकता योजनाओं जैसे पीएमकेवीवाई 4.0, एनएपीएस और पीएम विकसित भारत रोजगार योजना से जोड़ेगा, जिससे दीर्घकालिक करियर के लिए मार्ग सुनिश्चित होगा।
  • फेलो को संरचित मार्गदर्शन, सहकर्मी से सहकर्मी को सीखने और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों के संपर्क का भी लाभ प्राप्त होगा।
  • अगले महीने एक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से 16 फेलो के पहले बैच का चयन किया जाएगा और उन्हें राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ रखा जाएगा।

आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक

  • आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक पहल यूएनएफपीए द्वारा समर्थित है जो जनजातीय युवाओं को जमीनी स्तर पर परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक बनने तथा जनजातीय क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए सक्षम बनाएगी।
  • 82 संयुक्त राष्ट्र सामुदायिक स्वयंसेवक आदि कर्मयोगी के रूप में यूएनएफपीए द्वारा समर्थित स्वयंसेवकों को दो महीने की गहन जमीनी स्तर की भागीदारी के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के 13 जिलों के 82 ब्लॉकों में तैनात किया गया है।
  • स्वयंसेवक ग्राम विजन 2030 योजना, जागरूकता अभियान, आउटरीच तथा योजनाओं एवं सेवाओं तक बेहतर पहुंच में सहायता प्रदान करेंगे।
  • उनके योगदान से गांव स्तर पर सामुदायिक भागीदारी और समावेशी शासन को मजबूती मिलेगी।

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“आदि युवा एवं आदि कर्मयोगी फ़ेलोशिप समावेशी विकास के प्रति हमारी दृढ़ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब हैं, जिसका उद्देश्य युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने व नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाना है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के नेतृत्व मेंहमें विविधता में भारत की शक्ति का समर्थन करने और 2030 एजेंडा और विकसित भारत 2047, दोनों की दिशा में गतिशील प्रगति देने पर गर्व है।”

-— शोम्बी शार्प, भारत में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्यवक

“यह साझेदारी आदिवासी युवाओं को अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व करने में सक्षम बनाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। यह न केवल समावेशी प्रगति को गति देगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आदिवासी समुदाय भारत की विकास गाथा के केंद्र में हों। मंत्रालय हमारे युवाओं को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि वे भारत के भविष्य के लिए नेतृत्वकर्ता, नवप्रवर्तक और परिवर्तन के वाहक के रूप में उभरें।”

— विभु नायर, सचिवजनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार

आदि युवा फ़ेलोशिप और आदि कर्मयोगी स्वयंसेवक कार्यक्रम का शुभारंभ आदिवासी युवाओं को भविष्य के नेता, नवप्रवर्तक और परिवर्तनकारी के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। कौशलमार्गदर्शन और जमीनी स्तर पर जुड़ाव को बढ़ावा देकरयह पहल सुनिश्चित करती है कि आदिवासी समुदाय अपने विकास को आकार देने में सक्रिय भागीदार बनें। भारत में जनजातीय कार्य मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के बीच इस साझेदारी के माध्यम सेयह अभियान समावेशी विकास, सहभागी शासन और विकसित भारत 2047 के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

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उच्च ऊर्जा परमाणु जुड़ाव नई दिशा प्रदान कर रहा है, जिससे अगली पीढ़ी के क्वांटम उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है

भारतीय क्वांटम अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि जब ऐसे परमाणु, जो हमारे चारों ओर के पदार्थ के मूल निर्माण के छोटे-छोटे खंड हैं, उनको बहुत अधिक ऊर्जा दी जाती है, तो वे स्वतंत्र कणों की तरह व्यवहार करना बंद कर देते हैं। इस अवस्था में वे अब अलग-अलग कणों की तरह नहीं रहते, बल्कि आपस में इतनी मजबूती से जुड़ जाते हैं कि रोशनी के साथ उनका संबंध भी बदल जाता है और उसकी प्रतिक्रिया विकृत दिखाई देने लगती है।

इतनी उच्च अवस्थाओं पर रिडबर्ग परमाणु संकेतों पर पहली बार देखी गई यह अनोखी विकृति भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

साधारण परमाणु छोटे-से कण होते हैं, लेकिन रिडबर्ग परमाणु असाधारण रूप से विशाल होते हैं। जब वैज्ञानिक किसी परमाणु के सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा के बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाते हैं, तो उसका आकार सामान्य से कहीं बड़ा हो जाता है और वह अपने आस-पास के वातावरण के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है। यही अनोखे गुण रिडबर्ग परमाणुओं को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों और अति-सटीक सेंसरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। हालांकि, यही संवेदनशीलता उन्हें अप्रत्याशित भी बना देती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) की एक टीम ने रुबिडियम परमाणुओं को लगभग परम शून्य तापमान तक ठंडा किया — इतना ठंडा कि वे मुश्किल से हिल पाते हैं। इन परमाणुओं को बाद में लेजर और चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से फंसा दिया गया। इसके बाद, प्रकाश किरणों का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने उन्हें रिडबर्ग अवस्था में उत्तेजित किया। आमतौर पर परमाणु अपनी उत्तेजना को एक स्पष्ट और मूलग्रंथ जैसे पैटर्न में प्रकट करते हैं, जिसे ऑटलर-टाउन्स स्प्लिटिंग कहा जाता है।

चित्र- फंसे हुए ठंडे परमाणु सेट-अप में रिडबर्ग उत्तेजना का एक कलात्मक प्रतिनिधित्व

हालांकि जब शोधकर्ताओं ने परमाणुओं को 100वें ऊर्जा स्तर से आगे धकेला, तो साफ और नियमित पैटर्न अचानक टूट गया। अब उनका व्यवहार धुंधला तथा विकृत दिखने लगा। यह कोई त्रुटि नहीं थी, बल्कि एक अद्भुत खोज थी: परमाणु अब अकेले नहीं, बल्कि एक साथ कार्य कर रहे थे। यह ऐसा था कि जैसे एक बड़ा झुंड तालमेल से नाच रहा हो, वे एक-दूसरे से जुड़ रहे थे, प्रभाव डाल रहे थे और सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया दे रहे थे।

रिडबर्ग परमाणुओं में उच्च ऊर्जा पर दिखने वाली ये विचित्र विकृतियां क्वांटम तकनीक के लिए एक संकेत की तरह हैं। ये वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती हैं कि किस समय परमाणु अकेले रहते हैं और कब वे एक साथ जुड़कर जटिल, आपस में उलझे समूह बनाते हैं, जो बड़ी एवं जटिल प्रणाली की नकल करने में सक्षम होते हैं। ये वास्तव में परिशुद्धता वाले प्रयोगों में उपयोगी हैं। यह जानना कि परमाणु कब और कैसे एक-दूसरे से ‘जुड़ना’ शुरू करते हैं, भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

आरआरआई में प्रोफेसर संजुक्ता रॉय और उनके पीएचडी विद्यार्थियों शिल्पा बी एस और शोवन के बारिक के नेतृत्व में आईआईएसईआर पुणे में प्रोफेसर रेजिश नाथ की टीम द्वारा सैद्धांतिक मॉडलिंग के साथ किये गए इस प्रयोग ने नाजुक इंजीनियरिंग को गहन भौतिकी अंतर्दृष्टि के साथ जोड़ा है। उनकी विशेष रूप से निर्मित पहचान प्रणाली इतनी संवेदनशील थी कि वह बहुत कम संख्या में फोटॉनों को भी पहचान सकती थी, जिससे उन्हें अत्यधिक उच्च ऊर्जा स्तरों पर रिडबर्ग परमाणुओं का अध्ययन करने में सहायता मिली, जहां अन्य विफल हो गए थे।

डॉ. रॉय के अनुसार, ‘हमारे प्रयोग में एक अत्यंत संवेदनशील पहचान प्रणाली स्थापित की गई, जो परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित कुछ ही फोटॉनों का भी पता लगाने में सक्षम है। इससे हमें अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं (n > 100) में मौजूद परमाणुओं का पता लगाने में मदद मिली, भले ही उनके संक्रमण की संभावनाएं बहुत कम रही हों। हमने अपने प्रयोग को इस तरह अनुकूलित किया है कि अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं से आने वाले सिग्नल को उच्च सिग्नल-टू-शोर अनुपात के साथ मापा जा सके।’

इस खोज ने भारतीय शोधकर्ताओं को वैश्विक क्वांटम अनुसंधान के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यह दिखाता है कि जब वैज्ञानिक परमाणुओं को लगभग पूरी तरह स्थिर अवस्था तक ठंडा करते हैं और फिर उन्हें अत्यधिक ऊर्जावान बनाते हैं, तो वे पदार्थ को व्यक्तिगत से सामूहिक रूप में बदलते हुए देख सकते हैं।

परमाणु व्यवहार को समझने यह नई खोज भविष्य की क्वांटम प्रौद्योगिकियों की सीमाएं निर्धारित करती है। इस नाजुक संतुलन पर ही क्वांटम प्रौद्योगिकियों का भविष्य आकार ले रहा है और यह ज्ञान आने वाले उपकरणों के निर्माण में मार्गदर्शन करेगा।

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सशक्त नारी समृद्ध प्रदेश:मिशन शक्ति-पंचम चरण कार्यशाला आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद कॉलेज कानपुर में ग्वालटोली थाना पुलिस टीम के द्वारा सब इंस्पेक्टर दुर्गेश राय एवं किरण के नेतृत्व में मिशन शक्ति (पंचम चरण) के अंतर्गत एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। महाविद्यालय मिशन शक्ति कोर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्राओं एवं महिला शिक्षकों को नारी सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन से संबंधित विभिन्न योजनाओं, सेवाओं तथा महिला हेल्पलाइन सुविधाओं के बारे में जानकारी देना था।

कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों द्वारा छात्राओं को वुमन हेल्पलाइन 1090, 112, 181, महिला पुलिस बीट, मिशन शक्ति केंद्र तथा महिला परामर्श केंद्र जैसी सेवाओं के विषय में विस्तार से बताया गया। साथ ही स्वयं की सुरक्षा हेतु आत्मरक्षा के उपाय, साइबर क्राइम से बचाव, और अपराध की त्वरित रिपोर्टिंग पर विशेष जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में उपस्थित 100 से अधिक छात्राओं ने सक्रिय रूप से सहभागिता की तथा प्रश्नोत्तर सत्र में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। अंत में, सभी को नारी सशक्तिकरण हेतु समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प दिलाया गया। कार्यशाला छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी रही, जिससे उनमें आत्मविश्वास और जागरूकता दोनों का विकास हुआ।

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स्वच्छता पखवाड़ा – स्वच्छता ही सेवा के अंतर्गत स्वच्छता अभियान

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस एन सेन महाविद्यालय में *स्वच्छता पखवाड़ा – स्वच्छता ही सेवा* के अंतर्गत स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। यह अभियान कॉलेज की एनएसएस इकाई कार्यक्रम अधिकारी डॉ श्वेता रानी के नेतृत्व में संपन्न हुआ।मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर 70 से अधिक छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और महाविद्यालय परिसर में सफाई कार्य किया। स्वयंसेवकों ने कूड़ा-कचरा एकत्र कर उचित स्थान पर निस्तारित किया तथा आमजन को स्वच्छता का संदेश दिया।

यह कार्यक्रम छात्रों की जागरूकता, जिम्मेदारी और *स्वच्छ भारत अभियान* के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण रहा। अंत में विद्यार्थियों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने घर, मोहल्ले और समाज में स्वच्छता का संदेश निरंतर फैलाते रहेंगे।

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सामाजिक सुरक्षा के लिए एसपीआरईई 2025 पर ज़ोर

कर्मचारी कल्याण कानूनों और योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी), हरियाणा क्षेत्रीय कार्यालय ने फरीदाबाद प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस के बैनर तले जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य स्कूल अधिकारियों और प्रतिष्ठान मालिकों को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के वैधानिक प्रावधानों और ईएसआई योजना के पंजीकरण के लाभों के बारे में शिक्षित करना था।

कार्यक्रम में ईएसआई अधिनियम के अनुसार, 10 या अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले प्रत्येक स्कूल, कारखाने, क्लिनिक, अस्पताल, दुकान या प्रतिष्ठान को इस योजना के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने पर प्रकाश डाला गया है। 10 कर्मचारियों की सीमा पूरी होने के 15 दिनों की अवधि के भीतर पंजीकरण पूरा किया जाना चाहिए। इस बात पर बल दिया गया कि ईएसआईसी पंजीकरण न केवल श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करता है, बल्कि ईएसआई पंजीकरण न होने के मामलों में, नियोक्ताओं को कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 और मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत उत्पन्न होने वाली वित्तीय देनदारियों से भी बचाता है।

प्रतिभागियों को बताया गया कि कई प्रतिष्ठान, वर्षों से पात्र होने के बावजूद, ईएसआईसी के साथ पंजीकरण कराने में विफल रहे हैं, इससे उनके कर्मचारी महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित हो रहे हैं। अनुपालन न करने पर पूर्वव्यापी अंशदान देनदारियां, ब्याज, दंड और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इन चिंताओं के समाधान और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए, सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत ईएसआईसी द्वारा शुरू की गई नियोक्ताओं और कर्मचारियों के पंजीकरण को बढ़ावा देने की योजना (एसपीआरईई) 2025 के बारे में जानकारी दी गई। यह योजना पात्र प्रतिष्ठानों को पूर्वव्यापी जांच या मांग के डर के बिना ईएसआई योजना के तहत पंजीकरण कराने का अवसर प्रदान करती है। एसपीआरईई 2025 के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

नए पंजीकृत प्रतिष्ठानों के पिछले अभिलेखों का निरीक्षण नहीं;

पिछले अंशदान, ब्याज या दंड की मांग नहीं;

पिछले गैर-अनुपालन के लिए कोई कानूनी कार्रवाई नहीं;

प्रतिष्ठान स्वामी का पंजीकरण पंजीकरण की तिथि से ही मान्य होगा।

एसपीआरईई 2025 के अंतर्गत, नियोक्ता और कर्मचारी ईएसआईसी के सभी लाभों का लाभ उठा सकते हैं। इनमें चिकित्सा देखभाल, बीमारी और मातृत्व लाभ, स्थायी विकलांगता और आश्रित पेंशन, अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के अंतर्गत बेरोजगारी भत्ता, अंतिम संस्कार व्यय, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास शामिल हैं।

यह विशेष पंजीकरण योजना 31 दिसंबर 2025 तक खुली रहेगी। इससे प्रतिष्ठानों को अपनी स्थिति को नियमित करने और अपने कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने के लिए सीमित समय मिलेगा।

सहायता या स्पष्टीकरण चाहने वाले प्रतिष्ठान मालिक तत्काल सहायता के लिए समर्पित हेल्पलाइन 0129-2222980/981 पर संपर्क कर सकते हैं।

इस संगोष्ठी में लगभग 40 नियोक्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व ईएसआईसी हरियाणा के क्षेत्रीय निदेशक सुगन लाल मीणा ने किया और ईएसआई योजना के तहत वैधानिक दायित्वों और लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। टी.एस. दलाल (मुख्य संरक्षक),  नरेंद्र परमार (अध्यक्ष), राजदीप सिंह (महासचिव), भारत भूषण (कोषाध्यक्ष), श्री नारायण डागर, साकेत भाटिया,  राकेश बंसल, अनुभव माहेश्वरी, तुलसी, विनय गोयल, विनोद, मोहन और भगवान सिंह आदि अन्य प्रमुख लोग भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस” मनाया गया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस” बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आशिम कुमार नथानिएल के स्वागत और प्रार्थना से हुई। इसके बाद प्रिंसिपल प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन का प्रेरक संबोधन हुआ, जिसमें ओजोन परत की सुरक्षा में सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया गया।

छात्र प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और गहराई प्रदान की अनामता शहाबुद्दीन (बी.एससी. सेमेस्टर V) ने ओजोन दिवस के महत्व पर बात की। वंशिका सिंह (एम.एससी. सेमेस्टर I रसायन विज्ञान) ने पर्यावरण जागरूकता पर एक स्वरचित कविता सुनाई, और गुलनाज़ (एम.एससी. सेमेस्टर I रसायन विज्ञान) ने वैश्विक पर्यावरण मुद्दों और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर बात की। रसायन विज्ञान विभाग की प्रोफेसर ज्योत्सना लाल के एक विशेष व्याख्यान में ओजोन क्षरण के सबसे चिंताजनक पहलू के कारणों और मरम्मत पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने एक वीडियो प्रदर्शित करके प्रस्तुति को और अधिक रोचक बना दिया, जिससे सत्र और समृद्ध हो गया। उप-प्रिंसिपल, प्रो. श्वेता चंद ने कहा कि अपनी भावी पीढ़ियों की बेहतरी के लिए, हमें अपने पर्यावरण के संरक्षण पर काम करने के लिए छोटे कदम उठाने चाहिए।

कार्यक्रम का समापन रसायन विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रोफेसर अनिंदिता भट्टाचार्य के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण की सुरक्षा पर एक शक्तिशाली संदेश दिया गया।

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भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर ज्ञानशून्य भाषा से राष्ट्र का निर्माण कभी नहीं हो सकता। भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ कर ही हिंदी सही मायनों में राजभाषा से विश्वभाषा का सफर तय कर सकेगी। उपरोक्त विचार क्राइस्ट चर्च कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर दिनांक 16.09.2025 को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और हिन्दी ‘ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन ने कहीं। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत पौधा देकर किया गया व औपचारिक स्वागत वक्तव्य हिन्दी विभाग की प्रभारी प्रो. सुजाता चतुर्वेदी ने दिया। 

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में ज्वाला देवी महाविद्यालय में हिंदी की सहायक आचार्य डॉ. खुशबू सिंह उपस्थित रहीं । अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े बिना हिंदी वैचारिक स्वराज्य की भाषा नहीं बन सकती । हिन्दी और भारतीय ज्ञान परंपरा एक दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं । हिंदी में शोध के अनेक नए आयाम व क्षेत्र भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर खुल सकते हैं। उप-प्राचार्या प्रो. श्वेता चंद ने भी इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएँ ज्ञापित करते हुए हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्धि से छात्रों को लाभान्वित होने का आह्वान किया। हिन्दी विभाग के सह-आचार्य श्री अवधेश मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के बहुलतावादी व प्रतिरोधी चरित्र को सही मायने में हिंदी ही प्रतिबिंबित करती है। हिंदी विभाग के सहायक आचार्य अरुणेश शुक्ल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक हिंदी साहित्य का पूरा ढाँचा पारंपरिक भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमि पर ही खड़ा है। हिंदी विभाग के विद्यार्थियों, विख्यात दुबे, फैरी , लुत्फ़ा,  ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि हिंदी का अपना चरित्र समन्वयवादी है। वह भारतीय ज्ञान परंपरा से इसी बिंदु पर जुड़ती है।

हिन्दी विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा निकाली जाने वाली भित्ति पटल पत्रिका और कविता पोस्टर प्रदर्शनी का लोकार्पण और उद्घाटन भी अतिथियों द्वारा किया गया। ये कविता पोस्टर कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा बनाए गए । 

कविता पोस्टर प्रतियोगिता में विजेता छात्र छात्राओं को पुरस्कार स्वरूप अतिथियों द्वारा पुस्तकें प्रदान की गई। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान वरीशा हाशमी (बी.ए. सेम. 3) ; राशू कनौजिया (बी.ए. सेम.1) ने द्वितीय स्थान ; शालिनी तिवारी (एम.ए. हिंदी सेम.1) तथा काव्या पाण्डेय (बी.ए. सेम.1) ने  तृतीय स्थान प्राप्त किया। साथ ही सांत्वना पुरस्कार निकिता श्रीवास्तव (एम.ए. हिंदी सेम. 1) तथा फैरी (बी.ए. सेम. 5) ने प्राप्त किया। 

औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. अरविंद सिंह ने किया । कार्यक्रम का कुशल संचालन हिंदी विभाग की छात्रा काव्या पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक , शिक्षणेत्तर कर्मचारी, शोधार्थी तथा छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता में  अक्सा, आयतल, प्रज्ञा , फैरी आदि विद्यार्थियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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वृद्ध जनों की स्थिति विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा “भारत में वृद्ध जनों की स्थिति” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुमन, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. निशि प्रकाश, प्रो. रेखा चौेबे, तथा कैप्टन ममता अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। प्रतियोगिता में बी.ए. प्रथम सेमेस्टर तथा बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में निर्णायक मंडल में चित्रकला विभाग की अध्यक्षा डॉ. रचना, शिक्षाशास्त्र विभाग की डा. अनामिका ने महती भूमिका निभाई।

प्रतियोगिता में भारत में वृद्ध जनों का सम्मान, सुरक्षा, पहचान, वृद्धावस्था पेंशन, वृद्धावस्था हेतु सरकारी प्रयास, पारिवारिक संस्कार, और वृद्धों से जुड़ी समस्याओं के मुद्दे पर विचार प्रस्तुत किये गये। प्राचार्या ने अच्छे कार्यक्रम के आयोजन के लिए समाजशास्त्र विभाग को, प्रतिभागी छात्राओं तथा उपस्थित छात्राओं को बधाई दीं। प्रो. निशी प्रकाश ने जीवन में रिश्तों के सम्मान को बनाए रखने का संदेश छात्राओं को दिया। 

 प्रतियोगिता में प्रथम स्थान निदा परवीन, दि्तीय स्थान कृष्टि कनौजिया, तृतीय स्थान सिमरन वर्मा ने प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार कुमकुम पांडे ने प्राप्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन समाजशास्त्र विभाग की डॉ. रेनू कुरील तथा प्रो. मीनाक्षी व्यास ने किया। कार्यक्रम में समाजशास्त्र विभाग की समस्त छात्राएं उपस्थित रही।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर महिला सशक्तिकरण और कल्याण को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर की मिशन शक्ति इकाई ने 13 सितंबर 2025 को मेरी आवाज, मेरी पसंद विषय पर मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं पर केंद्रित था और प्रॉक्टर एंड गैबल द्वारा उदारतापूर्वक प्रायोजित किया गया था। इसमें संकाय सदस्य, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रही। मिशन शक्ति की प्रभारी प्रो मीत कमल ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और मासिक धर्म स्वास्थ्य पर खुली बातचीत के महत्व पर जोर देकर सत्र की शुरुआत की उन्होंने कहा कि ये विषय हमेशा से कलंक और चुप्पी से घिरा रहा है।

प्राचार्य प्रो० विनय जॉन सेबेस्टियन ने इस पहल की सराहना की तथा इसे बाधाओं को तोडने वाला और महिलाओं को उपलब्ध स्वास्थ्य विकल्पों के बारे में जागरूक करने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उप प्राचार्य प्रो. श्वेता चंद ने इस बात पर जोर दिया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत स्वच्छता का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, समानता और अधिकारों का भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अतिधि वक्ताओं सूर्याश सक्सेना और अंजलि शुक्ला का संबोधन था, जिन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व, उपेक्षा से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों और महिलाओं के प्रति भेदभाव को बढ़ावा देने वाले मिथकों को दूर करने की तत्काल आवश्यकता पर खुलकर बात की। इस सत्र में तथ्यों, व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि और प्रेरक मार्गदर्शन का समावेश था, जिसने छात्राओं को गहराई से प्रभावित किया।कार्यक्रम का संचालन छात्रा स्वयंसेवकों ओजस्विनी, कांची, सुंदरम, अनमता, प्राची, वृंदा, वंशिका और आदर्श ने सुचारू रूप से किया। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. और एक स्वस्थ और अधिक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए जागरूकता, शिक्षा और स्वच्छता तक पहुँच आवश्यक है। सभी उपस्थित लोगों को सैनिटरी नैपकिन के निःशुल्क पैकेट वितरित किए गए। मिशन शक्ति मानसिकता बदलने और युवा महिलाओं को अपनी भलाई की जिम्मेदारी लेने के लिए सशक्त बनाने में योगदान देता है।

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दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने दुबई में आईआईएम अहमदाबाद के पहले विदेशी परिसर का उद्घाटन किया

दुबई के क्राउन प्रिंस, उप-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री, महामहिम शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने आज दुबई में भारत के प्रमुख बिज़नेस स्कूल, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएमए) के पहले विदेशी परिसर का उद्घाटन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान और संयुक्त अरब अमीरात के कार्यवाहक उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री डॉ. अब्दुल रहमान अब्दुल मन्नान अल अवार भी इस समारोह में उपस्थित थे।

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इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री प्रधान ने कहा कि दुबई के क्राउन प्रिंस, शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम द्वारा आईआईएम अहमदाबाद दुबई परिसर का उद्घाटन किया जाना हमारे लिए बेहद सम्मान की बात है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप भारतीय शिक्षा के वैश्वीकरण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आईआईएम अहमदाबाद दुबई परिसर भारत की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा को दुनिया तक पहुंचाएगा। दुबई ने आज आईआईएम अहमदाबाद अंतर्राष्ट्रीय परिसर की मेजबानी करके ‘भारतीय भावना, वैश्विक दृष्टिकोण’ के सिद्धांत को साकार करने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान किया है। उन्होंने भारत-यूएई ज्ञान सहयोग में एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ने के लिए शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में भारत के राजदूत श्री संजय सुधीर, भारत के महावाणिज्यदूत श्री सतीश सिवन, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष श्री पंकज पटेल, आईआईएमए के निदेशक प्रोफेसर भरत भास्कर और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। क्राउन प्रिंस शेख हमदान के साथ संयुक्त अरब अमीरात के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे, जिनमें कैबिनेट मामले मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल गर्गावी; अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम बिन्त इब्राहिम अल हाशिमी; शिक्षा मंत्री सारा बिन्त यूसुफ अल अमीरी; अर्थव्यवस्था और पर्यटन विभाग की महानिदेशक हेलाल सईद अल मारी और ज्ञान एवं मानव विकास प्राधिकरण की महानिदेशक आयशा अब्दुल्ला मीरान शामिल थे।

श्री धर्मेन्‍द्र प्रधान ने संयुक्त अरब अमीरात के कार्यवाहक उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री, डॉ. अब्दुलरहमान अब्दुलमन्नान अल अवार के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने उच्च शिक्षा में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की और ज्ञान के संबंधों को और परिपुष्‍ट करने के साथ-साथ ज्ञान, नवाचार और अनुसंधान को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख घटक बनाने पर सहमति व्यक्त की। महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और द्विपक्षीय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान पर भी चर्चा हुई।

श्री प्रधान ने दुबई में भारतीय शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए योगदान, विशेष रूप से पारस्परिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और वैश्विक संपर्क को बढ़ावा देने और साथ ही संयुक्त अरब अमीरात में और अधिक उच्च-गुणवत्ता वाले भारतीय संस्थानों की स्थापना के लिए दिए गए समर्थन की सराहना के लिए डॉ. अब्दुलरहमान अल अवार का धन्यवाद किया। मंत्री महोदय ने कहा कि भारत प्रतिभाओं का एक वैश्विक केंद्र है और संयुक्त अरब अमीरात एक वैश्विक आर्थिक केंद्र है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ही लोगों के बीच संपर्क को मज़बूत करने और अपने सदियों पुराने और मज़बूत संबंधों को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बाद में, धर्मेन्‍द्र प्रधान ने दुबई स्थित मणिपाल विश्वविद्यालय परिसर का भी दौरा किया, जहां उन्होंने सिम्बायोसिस, बिट्स पिलानी, एमआईटी, एमिटी आदि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के प्राचार्यों के साथ एक गोलमेज चर्चा की। श्री प्रधान ने यूएई के शैक्षणिक दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्‍होंने शोध मूल्य श्रृंखला को शोध पत्रों के प्रकाशन से आगे बढ़ाकर उत्पादीकरण और विपणन की ओर ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता के मानचित्र पर ब्रांड इंडिया को मजबूत बनाने पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

श्री प्रधान ने संयुक्त अरब अमीरात में 109 भारतीय पाठ्यक्रम वाले स्कूलों के प्रधानाचार्यों से भी वार्तालाप किया। अन्य जीसीसी देशों और सभी वैश्विक सीबीएसई स्कूलों के सीबीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्य वर्चुअल माध्यम से इसमें शामिल हुए। इस अवसर पर, श्री प्रधान ने जीसीसी देशों के सीबीएसई स्कूलों में 12 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की घोषणा की, ताकि छात्रों में व्यावहारिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) परियोजनाओं के माध्यम से वैज्ञानिक जिज्ञासा और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सके।

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दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम में, श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के अंतर्गत, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय वृक्ष- ग़फ़ का एक पौधा लगाया। श्री प्रधान ने कहा कि यह संयुक्त अरब अमीरात में स्थिरता और शांति का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक है। वाणिज्य दूतावास में स्थित ग़फ़ वृक्ष भारत-यूएई मैत्री का एक सदाबहार प्रमाण भी रहेगा।

इस यात्रा ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थायी मित्रता की पुष्टि की, जो पारस्परिक सम्मान, साझा आकांक्षाओं और शिक्षा के माध्यम से भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाने के दृष्टिकोण पर आधारित है। श्री प्रधान ने सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक गतिशील और समावेशी शैक्षिक पारिस्थितिकी व्‍यवस्‍था को आकार देने में निरंतर सहयोग की आशा व्यक्त की।

 

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