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शिक्षा

एस. एन. सेन बा.वि.पी. जी. कॉलेज में “पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का आयोजन*

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन बा.वि.पी. जी. कॉलेज में विद्यार्थियों में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “एक पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का आयोजन किया गया,

कार्यक्रम कुलाधिपति/राज्यपाल की प्रेरणा एवं कुलपति के मार्गदर्शन में आयोजित हो रहा है। कॉलेज की पुस्तकालय समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को पुस्तकों के करीब लाना और उनमें नई सोच व ज्ञान की जिज्ञासा जागृत करना है, इस अवसर पर प्राचार्या प्रो सुमन ने कहा कि “ज्ञान के बढ़ते ग्राफ में किताबों का बहुत योगदान है”। पुस्तकें न केवल नई खोज कराती हैं बल्कि अज्ञानता का नाश भी करती हैं साहित्य विज्ञान व कला की विभिन्न किताबो को पढने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्या ने अब्दुल कलाम की पुस्तकों ,रामायण के विभिन्न अनुवादित पुस्तकों पर प्रकाश डाला । महत्वपूर्ण संदर्भ से संबंधित पुस्तकें पढऩे पर जोर दिया । पुस्तकालय समिति की प्रभारी व दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो किरन ने छात्राओं को पुस्तक पठन – पाठन हेतु प्रेरित किया और पुस्तकों को प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु लाभदायक बताया।  समाजशास्त्र विभाग की प्रवक्ता डा. रेनू कुरील ने छात्राओं को पुस्तकों को सबसे अच्छी दोस्त बताया और ज्ञान संवर्द्धन हेतु पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया।  मनोविज्ञान विभागाध्यक्षा डॉ . मोनिका सहाय ने पुस्तक पठन को मनोविज्ञान के ज्ञान से संबद्ध किया व अंग्रेजी विभागाध्यक्षा डॉ . कोमल सरोज ने पुस्तक पठन को साहित्य के विविध विधाओ से संदर्भित किया। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु डॉ. रोली मिश्रा ने संयोजन किया डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ .रेशमा, डॉ. श्वेता रानी ने सक्रीय भूमिका निभाई । इस कार्यक्रम मे महाविद्यालय की कुलानुशासक कैप्टन ममता अग्रवाल प्रो निशा वर्मा प्रो. प्रीति पाण्डेय, प्रो. मीनाक्षी व्यास डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. शुभा बाजपेयी व सभी शिक्षिकाओं ने पुस्तक पठन कार्यक्रम मे प्रतिभाग किया।

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दयानन्द गर्ल्स पी. जी. कॉलेज में “पुस्तक पढ़ें” अभियान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार दिनांक 06 जुलाई को दयानन्द गर्ल्स पी. जी. कॉलेज, कानपुर में “एक पुस्तक पढ़ें” कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन नोडल अधिकारी डॉ अर्चना दीक्षित के निर्देशन में सम्पन्न किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो वंदना निगम तथा सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो अर्चना वर्मा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की 100 छात्राओं एवं समस्त शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि जागृत करना, नियमित पठन-पाठन की आदत विकसित करना तथा ज्ञानार्जन के महत्व को समझाना था।
पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो क्षमा त्रिपाठी ने कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को पुस्तकों के महत्व पर प्रेरक विचारों से अवगत कराया तथा सभी प्रतिभागियों ने एक पुस्तक पढ़ने एवं उससे प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। पुस्तकें पढ़ने के उपरांन्त सामूहिक चर्चा भी की गई जिसमें पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम सफलतापूर्वक एवं शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। अंत में रेंजर प्रभारी प्रो स्वाति सक्सेना ने सभी उपस्थित शिक्षिकाओं एवं छात्राओं का आभार व्यक्त किया।

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हरिद्वार में भारतीय भेषज संहिता (आईपी) 2026 पर वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित; औषध गुणवत्ता को सुदृढ़ करने में औषध संहिता मानकों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था, भारतीय भेषज संहिता आयोग (आईपीसी) ने देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एडीपीआई) और उत्तराखंड के संबद्ध फार्मास्युटिकल विनिर्माण संघों के सहयोग से हरिद्वार में भारतीय फार्माकोपिया (आईपी) 2026 “फार्माकोपिया मानकों और गुणवत्ता अनुपालन के माध्यम से फार्मास्युटिकल विनिर्माण को सुदृढ़ बनाना” विषय पर एक वैज्ञानिक सम्मेलन और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य आईपी-2026 के प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और फार्मास्युटिकल विनिर्माण क्षेत्र में गुणवत्ता अनुपालन को बढ़ावा देना था।

उत्तराखंड भारत के प्रमुख दवा विनिर्माण केंद्रों में से एक है और उन राज्यों में शामिल है जो दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए आईपी और भारतीय फार्माकोपिया संदर्भ पदार्थों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं। दवा विनिर्माण में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देते हुए, उद्योग जगत में जागरूकता बढ़ाने, फार्माकोपिया की आवश्यकताओं के अनुपालन को बढ़ावा देने और दवा क्षेत्र में आईपी मानकों को एकसमान रूप से अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिससे राज्य के दवा निर्माताओं और अन्य हितधारकों को सहयोग प्रदान किया जा सके।

इस कार्यक्रम में दवा विनिर्माण इकाइयों के प्रतिनिधियों, गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता आश्वासन पेशेवरों, नियामक अधिकारियों, विश्लेषणात्मक वैज्ञानिकों और दवा परीक्षण प्रयोगशाला कर्मियों को एक साथ लाया गया ताकि फार्माकोपियल मानकों में हाल के घटनाक्रमों और दवा उद्योग में उनके कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श किया जा सके।

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ देवभूमि फार्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन के स्वागत भाषण से हुआ। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने फार्मास्युटिकल गुणवत्ता प्रणालियों को मजबूत करने में उद्योग और मानक-निर्धारण निकायों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

इस सत्र को देहरादून स्थित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सहायक औषधि नियंत्रक (भारत) श्री सिद्धार्थ सहाय मल्होत्रा ​​और उत्तराखंड के औषधि नियंत्रक एवं राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण श्री ताजबेर सिंह ने भी संबोधित किया, जिन्होंने नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने और जन स्वास्थ्य की रक्षा में औषध संहिता मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में, आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने औषधियों के लिए वैज्ञानिक रूप से मान्य गुणवत्ता मानकों को स्थापित करने और वैश्विक फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को बनाए रखने में आईपी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने आईपी-2026 में शामिल प्रमुख प्रगति पर प्रकाश डाला और औषध संहिता की आवश्यकताओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में उद्योग की भागीदारी के महत्व पर बल दिया।

उद्घाटन सत्र के बाद आईपी के प्रमुख पहलुओं पर तकनीकी विचार-विमर्श और ज्ञान-साझाकरण संबंधी चर्चाओं की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें फार्माकोपियल मानकों, संदर्भ पदार्थों, सूक्ष्मजीवविज्ञानिक गुणवत्ता आवश्यकताओं, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों, विश्लेषणात्मक जांच और जैविक मानकों में हाल के विकास शामिल थे। सत्रों ने प्रतिभागियों को फार्मास्युटिकल विनिर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण में आईपी मानकों के अनुप्रयोग की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।

एक विशेष संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों को आईपीसी वैज्ञानिकों के साथ सीधे बातचीत करने और आईपी-2026 के तकनीकी, नियामक और कार्यान्वयन संबंधी पहलुओं पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया। चर्चाओं में फार्माकोपियल आवश्यकताओं में हो रहे बदलावों को समझने और गुणवत्ता आश्वासन के लिए सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में उद्योग की गहरी रुचि झलकती है।

इस सम्मेलन में आईपीसी ने औषध संहिता मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और गुणवत्ता सुनिश्चित दवाओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए हितधारकों के साथ सहयोग मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। कार्यक्रम का समापन नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ जिससे उत्तराखंड और पूरे देश में दवा की गुणवत्ता और अनुपालन को आगे बढ़ाने के लिए नियामकों, उद्योग प्रतिनिधियों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों के बीच निरंतर संवाद स्थापित करने में मदद मिली।

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विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर  विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता विषयक विभिन्न कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य फोकस जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास पर रहा, जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो वंदना निगम के द्वारा पौधारोपण कर किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही ने पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता हेतु सक्रिय योगदान देने तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की शपथ दिलवायी।
इस अवसर पर एनएसएस वॉलंटियर्स के द्वारा वृक्षारोपण अभियान, पोस्टर प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता तथा पर्यावरण जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। छात्राओं ने जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन, स्वच्छता तथा हरित पर्यावरण जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में लगभग 50 छात्राओं के द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यक्रम में रेंजर प्रभारी प्रो स्वाति सक्सेना ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ विनीता श्रीवास्तव , डॉ अलका त्रिपाठी, डॉ. शिखा, श्वेता गोंड, एनसीसी एवं रेंजर्स छात्राओं एवं शिक्षिकाओं का योगदान सराहनीय रहा।

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कार्यकारी अध्यक्ष बने पंडित जितेन्द्र वाल्मीकि

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। जब से माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एसोसिएशान उत्तर प्रदेश कानपुर से कार्यकारी अध्यक्ष पंडित जितेन्द्र वाल्मीकि को बनाया गया है तब से वाल्मीकि समाज में एक खुशी कि लहर चल रही है ऐसा पहली बार हुआ है की माध्यमिक शिक्षा विभाग में किसी वाल्मीकि समुदाय के व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनाया गया आज से पहले कभी भी किसी संगठन ने वाल्मीकि समुदाय को इतनी बड़ी जिम्मेदारी नही सौंपी संघ ने पंडित जी को कानपुर जिला संगठन मंत्री बनाया था इनका कार्य इतना जबरदस्त रहा की संगठन मंत्री के साथ सह मिडिया प्रभारी का भी भार संघ ने दे दिया था दोनों पदों का दायित्व निभाते हुए संगठन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना कार्य करते चले जा रहे थे इनकी ईमानदारी लगन को देखते हुए संगठन ने इनको एक नई जिम्मेदारी देते हुए कानपुर से कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया जैसे ही समाज के लोगो को यहां जानकारी हुई तो वाल्मीकि समाज में खुशी की लहर जाग गई समाज के नवयुवाओं ने जितेन्द्र के निवास पर कांग्रेस सचिव अनिकेत सुनील वाल्मीकि. वाल्मीकि सेना कानपुर नगर अध्यक्ष विमल कुमार मानवाधिकार एनजीओ अध्यक्ष विजय मसीह उपाध्यक्ष अमित कुमार. राहुल केथल. अंटू वाल्मीकि. तरुण गौतम. आशीष गौतम. पहुंचकर फूलो की माला पहनाकर मिठाई खिलाकर जोरदार स्वागत किया और जितेन्द्र की पत्नी ममता बेटी अनिष्का ने आये हुए सभी लोगों के साथ मोहल्ले में मिठाई बाटकर अपनी खुशी जाहिर की इसी क्रम में पंडित जी के विधालय के कर्मचारी भी पीछे नही रहे जैसे ही कर्मचारियों को पता चला की हमारे साथी वाल्मीकि को संघ की तरफ से कानपुर कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है तो सभी कर्मचारियों ने बड़ी घूमधाम से जश्न मानते हुए की अब हमारे दर्द को समझने वाला हमारा भाई अध्यक्ष बनाया गया कर्मचारियों ने जितेन्द्र को माला पहनाकर स्वागत किया और अपने अपने विचार व्यक्त किए और  सभी का मुंह मीठा कराया एक दूसरे को बधाई दी इस मौके पर विधालय के प्रधानाचार्य देव सिंह गौड ने भी वाल्मीकि को अपना आशीर्वाद देते हुए नस्ते का आनन्द लिया
इस कार्यकर्म के मौके पर विनोद पाण्डेय. सुरेन्द्र यादव. क्रिकेट कोच अंकुर यादव.मरमट महंत ओम प्रकाश मिश्रा. राहुल यादव.शाहिल कुमार. करन त्रिवेदी. राजन शर्मा. अंकुर कश्यप. खुशबू शुक्ला मौजूद रहे।

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“भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु शिष्यपरंपरा”! विषय पर व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स कॉलेज के प्रांगण में शिक्षा शास्त्र विभाग तथा दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वाधान में व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका विषय रहा “भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु शिष्यपरंपरा”! व्याख्यान का शुभारंभ प्राचार्य प्रोफेसर बंदना निगम तथा डायरेक्टर प्रोफेसर अर्चना वर्मा के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। स्वागत उद्बोधन प्रोफेसर स्वाती सक्सेना ने किया और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व के बारे में बताया, विषय प्रवर्तन प्रोफेसर सुचेता शुक्ला ने किया इन्होंने गुरु की महिमा का साक्षात वर्णन किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉक्टर संगीता एस.एन. सेम कॉलेज ने गुरु शिष्य परंपरा के विभिन्न तथ्यों पर प्रकाश डाला कि वर्तमान दौर में गुरु शिष्य का अटूट बंधन क्यों अनिवार्य हैं और वैदिक संस्कृति ने इस देश को क्या दिया है यदि भावी पीढ़ी को तरक्की करनी है तो अपने गुरु के मूल्यों के साथ आगे बढ़ना होगा भारतीय संस्कृति में गुरु और माता-पिता को समतुल्य स्थान दिया गया है यदि आप इनके आशीर्वाद से जीवन में कुछ भी करना चाहते हैं तो असंभव नहीं है। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर मधुरिमा सिंह ने किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर पप्पी मिश्रा, प्रोफेसर क्षमा त्रिपाठी, डॉ अंशु पांडे,डॉ आभा पांडे, कविता विश्नोई,डॉ शालिनी तिवारी आदि की उपस्थित रही। कार्यक्रम में लगभग 118 छात्राओं ने सहभागिता की और ज्ञानार्जन प्राप्त किया।

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पर्यावरणीय अवनयन” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर के भूगोल विभाग द्वारा दिनांक 8 अप्रैल 2026 को स्नातक एवं परास्नातक छात्राओं हेतु “पर्यावरणीय अवनयन” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन एवं प्राचार्या प्रो. वंदना निगम के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर के भूगोल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुमार अमित उपस्थित रहे। उन्होंने पर्यावरणीय अवनयन, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर छात्राओं को विस्तृत जानकारी प्रदान की।

व्याख्यान के दौरान छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. कुमार अमित ने सरल एवं प्रभावशाली ढंग से उत्तर दिया। कार्यक्रम छात्राओं के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी रहा। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. अंजना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। साथ ही विभाग की प्राध्यापिका डॉ. शशि बाला सिंह एवं श्वेता गोंड की उपस्थिति एवं सहयोग सराहनीय रहा। अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता सिरोही ने मुख्य वक्ता सहित सभी अतिथियों एवं छात्राओं का आभार व्यक्त किया।

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दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में “सेमिनार प्रेजेंटेशन एवं प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण” आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर के भूगोल विभाग द्वारा बी.ए. षष्ठम सेमेस्टर सत्र 2025-26 की छात्राओं हेतु “सेमिनार प्रेजेंटेशन एवं प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण” विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता सिरोही के मार्गदर्शन में दिनांक 6 मई 2026 को आयोजित किया गया। इस अवसर पर छात्राओं ने भूगोल विषय से संबंधित विभिन्न समसामयिक एवं शोधपरक विषयों जैसे ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इन कानपुर’ , ‘कानपुर में नगरीकरण एवं उसके प्रभाव’ आदि पर प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।
विषय विशेषज्ञ डॉ. ऋचा त्रिपाठी तथा डॉ शशिबाला सिंह ने छात्राओं की प्रस्तुति, शोध दृष्टिकोण एवं विषय ज्ञान की सराहना की गई। शोध निर्देशक डॉ संगीता सिरोही, डॉ अंजना श्रीवास्तव एवं स्वेता गोंड ने छात्राओं को शोध कार्य, प्रस्तुतीकरण कौशल एवं विषय की गहन समझ विकसित करने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए। सेमिनार प्रेजेंटेशन के माध्यम से छात्राओं को अकादमिक अभिव्यक्ति, शोध लेखन तथा मंच संचालन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

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8वें पोषण पखवाड़ा के तहत स्क्रीन टाइम घटाने में अभिभावकों एवं समुदाय की भूमिका पर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में जागरूकता अभियान

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर।20 अप्रैल 2026, दयानंद गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में पोषण पखवाड़ा (8वां संस्करण) के अंतर्गत “स्क्रीन टाइम कम करने में माता-पिता, अभिभावकों एवं समुदाय की भूमिका” विषय पर एक प्रभावी व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. संगीता सिरोही के कुशल निर्देशन में, सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर प्रो. अर्चना वर्मा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में रेंजर प्रभारी प्रो. स्वाति सक्सेना ने विद्यार्थियों को अत्यधिक स्क्रीन उपयोग के दुष्प्रभावों तथा उसके समाधान के व्यावहारिक उपायों से अवगत कराया। उन्होंने अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी को बच्चों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

इस अवसर पर लगभग 70 प्राध्यापिकाओं एवं छात्राओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, प्रो. रुचिमिता पाण्डेय, अपूर्वा बाजपेयी, डॉ अलका सिंह, डॉ. कुमुद बाला सिंह एवं डॉ. श्वेता गोंड का विशेष सहयोग सराहनीय रहा। डॉ संगीता सिरोही ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए जागरूकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली एवं पौष्टिक आहार अपनाने का संदेश दिया गया।

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रचार-प्रसार हेतु दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज में पोस्टर जारी कर चलाया गया विशेष अभियान

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर। 16 अप्रैल 2026, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं समर्थन हेतु निर्धारित मोबाइल नंबर पर मिस्ड कॉल देने हेतु स्टिकर पोस्टर जारी कर एक विशेष मेगा जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत महाविद्यालय परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में दीवारों, वाहनो आदि पर स्टीकर पोस्टर लगाकर छात्राओं एवं आमजन को अधिनियम के प्रति जागरूक किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. संगीता सिरोही के निर्देशन में संपन्न हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. वंदना निगम एवं सेल्फ फाइनेंस निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा के मार्गदर्शन में अभियान को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने अपने मोबाइल फोन से निर्धारित नंबर 9667173333 पर मिस्ड कॉल देकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया और समाज में महिलाओं के अधिकारों एवं सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। महाविद्यालय परिवार ने इस पहल को महिलाओं की भागीदारी एवं सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया तथा भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया।कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अंजना श्रीवास्तव, डॉ. श्वेता गोंड, डॉ. शशि बाला सिंह तथा चीफ प्रॉक्टर प्रो. अर्चना श्रीवास्तव, अनुराधा सिंह, आकांक्षा अस्थाना समेत महाविद्यालय की समस्त प्राध्यापिकाओं, कर्मचारियों एवं लगभग 100 छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

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