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शिक्षा

“विज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नति ने स्वक्छ पर्यावरण के हमारे मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया” विषय पर अंतरमहाविद्यालयी वाद- विवाद प्रतियोगि आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 5 दिसम्बर, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर के रसायन विज्ञान विभाग ने “ विज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नति में स्वक्छ पर्यावरण के हमारे मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया है- विषय पर एक अंतरमहाविद्यालयी वाद- विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया । इस अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध ११महाविद्यालयों की ३२ टीमो के ६४ प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंध तंत्र के सचिव पी के सेन संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन प्राचार्या प्रोफेसर सुमन , निर्णायक मंडल  श्रद्धा मिश्रा ,डिप्टी डायरेक्टर ,डी एम एस आर डी तथा डॉ गोवर्धन लाल ,जॉइंट डायरेक्टर ,डी एम एस आर डी कानपुर तथा रसायन विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो गार्गी यादव ने माँ सरस्वती के माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलित करके किया ।सभी छात्र छात्राओं ने अपने अपने विचार पक्ष और विपक्ष में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया ।श्री शुभ्रो जी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अच्छे वाद विवाद करने के गुर बताए । प्राचार्या प्रो सुमन ने सभी प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाते हुए भूरि भूरी प्रशंसा की ।मंच संचालन बी एस सी तृतीय वर्ष की सृष्टि जायसवाल तथा माही तिवारी ने किया ।निर्णायकों के निर्णय लेने के अंतराल में महाविद्यालय की छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण पर एक लघु नाटिका और नृत्य का प्रदर्शन किया ।
विजयी टीमों को पुरस्कृत मंचासीनअतिथियों किया ने किया । प्रतियोगिता का निर्णय इस प्रकार रहा-
प्रथम -सिमोन तथा मौलश्री ए एन डी महाविद्यालय

द्वितीय -चित्रांशी शुक्ला तथा ग्वाँशी पटेल , ब्रह्मावर्त पी जी कॉलेज,मधना

तृतीय – माही तथा ख़ुशी ,डॉ वी एस ई सी

सांत्वना – निहारिका तथा सुहावनी कौर, जागरण कॉलेज
मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कार्यक्रम में डा अलका टंडन ,डॉ निशा वर्मा, डॉ रचना निगम डॉ शुभा बाजपेयी सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

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आईआईटी कानपुर, में उपराष्ट्रपति का संबोधन

पहले भारत एक अलग देश था, लेकिन अब यह आशा और संभावनाओं वाला देश है। अब यह आर्थिक उन्नति करता हुआ एक देश है, एक अभूतपूर्व बुनियादी ढांचे वाला देश है,अब यह एक ऐसा देश है जिसके समुद्र, जमीन, आकाश या अंतरिक्ष में प्रदर्शन को वैश्विक प्रशंसा मिल रही है।

हमारे देश में जो परिवर्तन आया है, वह मोटे तौर पर इन संस्थानों के पूर्व छात्रों के कारण ही है। इतिहास गवाह है कि कोई भी राष्ट्र तकनीकी क्रांतियों के बगैर महानता हासिल नहीं कर सका है। पैक्स इंडिका को वास्तविकता बनाने के लिए, भारत को इसी तरह तकनीकी प्रगति का नेतृत्व करना होगा।

पिछले एक दशक में,भारत में उल्लेखनीय परिवर्तन और नवाचार देखा गया है। बेहतरी के लिए वातावरण में पूरी तरह से क्रांति ला दी गई है। हमारी पेटेंट फाइलिंग दोगुनी से भी अधिक हो गई है। कुछ लोगों के लिए यह आँकड़े हो सकते हैं, लेकिन आप इसका महत्व जानते हैं।

मैंने अक्सर संस्थानों पर इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि शोध केवल शोध के लिए नहीं होना चाहिए।

एक शोध पत्र सिर्फ अकादमिक प्रशंसा के लिए नहीं है। एक शोध पत्र का आधार ऐसा होना चाहिए, जो बड़े पैमाने पर जनता के लिए परिवर्तनकारी हो। वर्ष 2014-15 में 42,763 पेटेंट फाइलिंग थे, जो 2023-24 में 92,000 हो गए और ये इस प्रक्रिया में हम वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर हैं। लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं हो सकते। हमें शीर्ष पर पहुंचना है और इसके लिए पारिस्थितिकी तंत्र, सकारात्मक नीतियों, पहलों ने आपके लिए कार्य संस्कृति को और अधिक सुविधाजनक बना दिया है। 1,50,000 स्टार्टअप के साथ हमारे पास तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। लेकिन जो अधिक उल्लेखनीय बात है, कि उनमें से 118 यूनिकॉर्न की लागत 354 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।

मैं उद्योग, व्यापार, व्यवसाय और कॉरपोरेट्स तथा उनके संगठनों से अपील करूंगा, क्योंकि नवाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उचित परिप्रेक्ष्य में समझना ज़रुरी है। वे अपने वर्तमान में और अपने भविष्य में निवेश कर रहे हैं। उन्हें इसका अहसास करना होगा। मैंने वैश्विक स्तर पर देखा और शीर्ष 25 में मैं केवल दो भारतीय कॉरपोरेट्स को ही पाया। वास्तव में हमें उस बड़े बदलाव की ज़रूरत है, जिसकी देश को ज़रुरत है, एक ऐसा बदलाव जो वैश्विक स्थिरता और सद्भाव के लिए होगा, क्योंकि भारत की वृद्धि विश्व के लिए समृद्धि है। यही हमारी संस्कृति है।

नवाचार के प्रति कॉर्पोरेट प्रतिबद्धता मजबूत हो रही है, इसे आगे बढ़ने की जरूरत है। बीएसई 100 कंपनियां अभी से अपना आरएंडडी में निवेश बढ़ा रही हैं, इसे समझने के लिए बहुत साहस की जरूरत है। पिछले पांच वर्षों में राजस्व 0.89% से 1.32% तक पहुंच गया है। इसके लिए एक बड़ी छलांग की जरूरत है। मुझे यकीन है कि निदेशक और उनके जैसे लोग तथा आईआईटी के पूर्व छात्र, उन्हें एक मंच पर बातचीत करनी चाहिए। वे शायद इस ग्रह पर बेजोड़ प्रतिभा का भंडार हैं। वे भारत और उसके बाहर अच्छे फैसले लेने की स्थिति में है।

मैं लंबे समय से आईआईटी के पूर्व छात्र संघों के एक संघ के लिए प्रयास कर रहा हूं। वह वैश्विक थिंक टैंक न केवल कॉरपोरेट्स को प्रेरित कर सकता है, बल्कि एक बड़ा बदलाव भी ला सकता है। मुझे ख़ुशी होगी अगर निदेशक अन्य निदेशकों से संपर्क करके पहल करें कि हमारे पास आईआईटी के पूर्व छात्र संघों का एक संघ हो। एक बार जब वे लोग एक ही बात पर सहमत होंगे,तो मुझे यकीन है कि तकनीक की मदद से ऐसा हो सकेगा। इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से संस्थागत समर्थन आईआईटी कानपुर के साथ बढ़ रहा है, जिसने पहले 100 से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों सहित 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 250 स्टार्टअप को समर्थन दिया था। बाद की उपलब्धि खास ध्यान देने योग्य है। जब मैं यहाँ आया तो मैंने देखा कि ज्यादा छात्राएं नहीं थीं, लेकिन उनकी जो भी उपस्थिति है,आप बहुमत से अधिक हैं। बड़ा बदलाव पहले से ही हो रहा है।

भविष्य में नवाचार हमारे लिए ज़रुरी भूमिका निभाएगा और ये सिद्धांत मौलिक हैं। स्मार्ट, समाधान-उन्मुख, स्केलेबल और टिकाऊ। इन शब्दों का अर्थ बहुत सतत् है। मैं एक साधारण वजह से कहता हूं। हमारे ग्रह को वास्तव में ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है और हमारे पास कोई दूसरा ग्रह नहीं है। इसलिए विकास स्थिर होना चाहिए। क्रांतिकारी स्मार्टफोन या भारत की यूपीआई प्रणाली जैसे स्मार्ट नवाचार सरल, अनुकूलनीय और परिवर्तनकारी होने चाहिए। जब मैं इस अनुकूलनशीलता को देखता हूं, तो यह मेरे लिए गर्व का क्षण होता है। आज करोड़ों भारतीय किसानों को उनके खातों में सीधे धनराशि प्राप्त होती है। आज जो सरकार कर रही है, वह सबसे अलग है। सुविधाए प्राप्त करने वालों को देखिए,जिन्हें पहले इनकी उम्मीद नहीं थी। तकनीकी मदद के चलते आज धनराशि को लेकर कोई संशय नहीं है, कोई बिचौलिया नहीं, कोई भ्रष्ट तत्व नहीं, पारदर्शिता और जवाबदेही और सबसे खास बात प्रक्रियाओं में तेज़ी आ रही है।

समाधान-उन्मुख नवाचार के लिए कृषि से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया की समस्याओं को समझने की ज़रुरत है। मेरे युवा मित्रों, इसके लिए ज़रुरी है कि हम आरामदायक क्षेत्र से बाहर निकलें और पूरे भारत में विविध हितधारकों के साथ जुड़ें। मैं इसी पर ध्यान केंद्रित करूंगा, क्योंकि मैं आईआईटी कानपुर से एक उत्साही अपील करने आया हूं।

मुझे बेहद खुशी होगी, अगर आईआईटी कानपुर मिशन मोड में किसानों का कल्याण कर सके। कुछ समस्याएं तो बेहद साफ है जैसे पराली जलाने का मुद्दा। कृपया अपने विचारों से इसका कोई समाधान खोजें। हमारे किसान तनावग्रस्त है, क्योंकि उन्हें नवाचार के लाभों का अनुभव नहीं है। आप में से अधिकांश लोग, या आप में से बहुत से लोग किसान परिवारों से आते होंगे। यही बताया जाता है कि कृषि उपज होती है और किसान उसे बेचता है और बात ख़त्म।

किसान को अपने उत्पाद का मूल्य क्यों नहीं बढ़ाना चाहिए? किसान को इसकी मार्केटिंग क्यों नहीं करनी चाहिए? उद्योग के राजकोषीय आयाम की मात्रा की कल्पना करें, जो कृषि उपज के मूल्य में बढ़ोत्तरी करता है।

मैंने कई आईआईटी से निकले महानुभावों को इस क्षेत्र में जाते देखा है। लेकिन जो लोग इसे आसानी से कर सकते हैं, कृपया इस पर ध्यान दें। कहा जा रहा है कि अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है, इसकी जरूरत है। हमें भारत में डिजाइनिंग की जगह, भारत में विनिर्माण पर फोकस करना चाहिए। यह बहुत ही संवेदनशील क्षेत्र है। मैं बार-बार कहता रहा हूं, विनिर्माण का मतलब है कि हम मूल्यों में बढ़ोत्तरी करें, अपने कच्चे माल में वृद्धि करें। ये तो इसका एक छोटा सा पहलू है। लेकिन जब आप पारादीप जैसे बंदरगाह पर जाते हैं या जहां बिना मूल्यवर्धन के लोहा निर्यात किया जा रहा हो, तो युवा लड़के और लड़कियां उस परिदृश्य को किस तरह देखेंगे। कोई उस लौह अयस्क पर नियंत्रण रखता है, किसी को सौदे पर बातचीत करने के लिए कमरे में बैठना आरामदायक लगता है, किसी को विदेश में। लेकिन इस प्रक्रिया में हमारे हितों से समझौता किया जाता है। कोई राजकोषीय लाभ नहीं होता। आपको मूल्यांकन क्षेत्रों में अत्यंत नवोन्मेषी होना चाहिए। हालाँकि बहुत कुछ हो रहा है। यदि कचरे से धन बनाया जा रहा है, यदि कच्चा माल विभिन्न स्वरूपों में उभर कर आ रहा है, तो यह नवाचार के कारण ही है। युवाओं, स्थिरता को प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने की हमारी सभ्यता के लोकाचार के अनुरूप सभी नवाचारों को रेखांकित करना चाहिए। मुझे पता है कि इस प्रवृत्ति में कुछ गिरावट आ रही है। यह उन लोगों के लिए फैशन की बात है , जो संपन्न हैं और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। आप प्रतिभाशाली व्यक्तित्व हैं, प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग होना चाहिए, क्योंकि यही सतत् विकास का आधार है।

यदि हम प्रकृति के साथ सामंजस्य रखते हैं, तो हमें इस तरह से काम करना होगा, कि पारिस्थितिकी तंत्र के विकास से नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ सामान, जैविक खेती और कृषि वानिकी में अवसर पैदा हों। जैसा कि मैंने कहा, किसानों को नवाचार को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाते हुए पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को अपनाने में सक्षम बनाना चाहिए। असल में अब यह एक सपना नहीं है, यह 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की हमारी मंजिल है। हमें कृषि के कल्याण पर अधिक गंभीरता से ध्यान केंद्रित करने की ज़रूरत है। आपको इस बात पर विचार करना चाहिए कि घटती भूमि के आकार के साथ कृषि अर्थव्यवस्था को कैसे सुधारा जाए। सरकार की कई योजनाएं, हैंड-होल्डिंग योजनाएं, सहकारी समितियां हैं, जिन्हें अब हमारे संविधान में जगह मिली है। वह सब कुछ किया जा रहा है, जो हो सकता है। लेकिन नवीनता उत्पन्न होनी चाहिए। एक बार जब वह नवप्रवर्तन हो जाएगा, तो क्रियान्वयन भी अपने आप हो जाएगा।

हमारे जनसांख्यिकीय लाभांश को देखते हुए, 2047 तक भारत का विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करना ज़रुरी है। प्राकृतिक संसाधन, प्रतिभा पूल और सहायक नीतियां, सकारात्मक नीतियों जैसी सुविधाएं हमारे पास नहीं थी, जो आपके पास है। जैसे ही आप बाहरी दुनिया के लिए प्रवेश करेंगे,एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है जो आपकी मदद करेगा। आप पाएंगे कि यदि आपके पास कोई स्टार्टअप है, तो शीर्ष कॉर्पोरेट्स निवेश करेंगे। आप अखबार तो पढ़ते ही होंगे, वे उसमें दिलचस्पी लेते हैं। आपने देखा होगा कि कैसे आपके संस्थानों से लोग अरबपति बन गए हैं, क्योंकि उन्होंने नवाचार से एक तकनीकी दिग्गज संस्था बनाई है।

सामान्य आदमी का सरोकार नवाचारों से नहीं, बल्कि समाधान से है। इसलिए, समाधान प्रदान करने वाला कोई भी नवाचार हर किसी की कल्पना को आकर्षित करता है। क्या आप हमारे जैसे देश की कल्पना कर सकते हैं जहां लोग गांवों में रहते हों? प्रौद्योगिकी की अनुकूलनशीलता इतनी तेज रही है, जिससे हमें दुनिया में बढ़त मिली है । हमारी प्रति व्यक्ति इंटरनेट खपत अमेरिका और चीन की संयुक्त खपत की तुलना में अधिक है। अब आप पाएंगे कि हर व्यक्ति डिजिटल माध्यम से भुगतान करने लगा है। अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखिए, हमारी अर्थव्यवस्था औपचारिक होती जा रही है। एक औपचारिक अर्थव्यवस्था नैतिक मानकों, पारदर्शी शासन का अग्रदूत है। आपमें से जो लोग , जिनके माता-पिता से आयकर रिटर्न दाखिल करते थे, उनसे पता कर सकते हैं कि पहले यह काफी परेशानी भरा काम हुआ करता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। सभी लेन-देन सरल हो गए हैं। पूरे भारत में भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे का अभिसरण बाजार संबंधों के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा करता है।

मैं इनोवेटर्स से आग्रह करूंगा, यानी कि आप युवाओं से कि आपको स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए इन फाउंडेशन का लाभ उठाना चाहिए, जैसे कि कानपुर के चमड़े के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना चाहिए। राष्ट्र की प्रगति, नवाचारों को तैयार करने की आपकी क्षमता पर निर्भर करती है, जो आर्थिक विकास को आगे बढ़ाते हुए वास्तविक चुनौतियों का समाधान भी करती है।

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मीडिया, विज्ञान और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय आयोजन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा संचारक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सीएसआईआर-एनआईएससीएआईआर के पूर्व निदेशक डॉ. मनोज कुमार पटैरिया और सीएसआईआर-सीईसीआरआई के निदेशक डॉ. के. रमेश भी उपस्थित थे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मीडिया सम्मेलन में अतिथियों ने रोजगार समाचार पत्रिका और विज्ञान भारत पत्रिका के अंकों का विमोचन किया। यह भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2024 का एक आयोजन है। देश के इस सबसे बड़े विज्ञान महोत्सव का आयोजन 30 नवंबर से 3 दिसंबर 2024 के दौरान असम के आईआईटी गुवाहाटी में किया जा रहा है।

मीडिया कॉन्क्लेव का परिचय देबोब्रत घोष ने दिया और इस आयोजन के दो दिनों के संक्षिप्त विवरण की जानकारी डॉ. राजीव सिंह द्वारा दी गई।

सीएसआईआर-केंद्रीय विद्युत-रासायनिक अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. के. रमेश ने अपने संबोधन में कहा कि आईआईएसएफ एक विज्ञान एक ऐसा महोत्सव है जिसे देश के लोगों के साथ मनाया जाता है। यह मीडिया शोध को लोगों तक पहुंचाने में सहायता करता है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध को अधिकतर इस कार्य से जुड़े व्‍यक्ति ही समझते हैं। आईआईएसएफ ने मीडिया से अनुरोध किया कि वह शोध को रचनात्मक तरीके से लोगों तक पहुंचाए, ताकि लोग शोध कार्य को समझ सकें। उन्‍होंने हर मीडियाकर्मी से अनुरोध किया कि वे इन शोधों को सकारात्‍मक रूप से लोगों तक पहुंचाए क्‍योंकि मीडिया ही इस कार्य को लोगों तक जोड़ने का माध्‍यम है।

सीएसआईआर-एनआईएससीएआईआर के पूर्व निदेशक डॉ. मनोज कुमार पटैरिया ने कहा कि विज्ञान विधि के रूप में कार्य करता है जिसमें जिज्ञासा, विश्लेषण, प्रयोग और सत्यापन शामिल है। यही बात मीडिया पर भी लागू होती है और इस तरह मीडिया और विज्ञान की प्रक्रिया समान ही है।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिवकुमार शर्मा ने कहा कि उन्‍हें यह अनुभव हुआ है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवधारणाओं को समझने और समझाने के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। इस अंतर को पाटने के लिए, हमें जटिल विचारों को ऐसे सरल तरीके से संप्रेषित करने की आवश्यकता है जो सभी को समझ में आते हों। इसके लिए एक विचारशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है, हम क्या संप्रेषित करना चाहते हैं और इसे प्रभावी ढंग से कैसे करना है, इस बात पर विचार करते हुए कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जनता के साथ साझा करने के लिए व्यवस्थित तरीके विकसित करके और मीडिया क्षमता का लाभ उठाते हुए हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी जागरूकता और समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकते हैं।

सम्मेलन में पूर्वोत्तर मीडिया में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रसार पर एक पैनल चर्चा भी शामिल थी। इसमें असम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अरूप मिश्रा, मणिपुर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के निदेशक डॉ. मिनकेतन सिंह, असम विज्ञान प्रौद्योगिकी, पर्यावरण परिषद के निदेशक डॉ. जयदीप बरुआ और मिजोरम विज्ञान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. डेवी तथा विज्ञान पत्रकार सुश्री गीताली सैकिया जैसे विशेषज्ञों ने भाग लिया।

आहारक्रांति पर डॉ. येलोजी राव मिराजकर का व्याख्यान:

भारत को खाद्य उत्पादन और उपभोग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, ताकि संतुलित और स्वस्थ आहार सुनिश्चित किया जा सके जो देश के कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का समाधान निकालता हो। चरक आयुर्वेदिक आहार जैसी पारंपरिक आहार प्रथाओं को अपनाना और पाचन एवं पोषण के महत्व को समझाते हुए भारतीयों के लिए निदिृष्‍ट भोजन विकल्प बनाने और स्वस्थ जीवन जीने में सहायता प्रदान कर सकता है। अन्न और आहार के बीच केवल इतना अंतर है कि अन्न को हम मुख से मात्र उदरपूर्ति के साधन के रूप में ग्रहण करते हैं जबकि आहार में वह संपूर्ण पोषण शामिल है जिसका हम अपनी इंद्रियों के माध्यम से आनंद लेते हैं।

इस सम्‍मेलन का समापन मीडिया में एसएंडटी कवरेज पर एक सत्र के साथ हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों, मीडिया पेशेवरों और जनता के बीच वार्तालाप हुआ। इस अवसर पर डॉ. केजी सुरेश, पूर्व महानिदेशक, आईआईएमसी के साथ-साथ डॉ. मनोज पटैरिया, श्री डेकेन्द्र मेवाड़ी, डॉ. केएन पांडे, धृपल्लव बागला, श्री समीर गांगुली, श्री मारुफआलम और डॉ. वामसी कृष्णा जैसे विशेषज्ञों ने मीडिया के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने पर अपने विचार साझा किए।

मीडिया कॉन्क्लेव के दौरान आज विज्ञान आधारित फीचर फिल्म पर भी एक सत्र आयोजित किया गया।

कई विज्ञान संचारकों और छात्रों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। इसके परिणामस्वरूप एक उपयोगी प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया जिसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मीडिया कॉन्क्लेव के उद्देश्यों की प्रभावी ढंग से प्रस्तुति की गई।

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एस एन सेन बालिका महाविद्यालय में संविधान दिवस स्वतंत्रता के अमृत काल के अवसर कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 नवम्बर एस एन सेन बालिका महाविद्यालय में संविधान दिवस स्वतंत्रता के अमृत काल के अवसर पर तीन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा इस दिवस का उद्घाटन महाविद्यालय की छात्राओं को शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें “संविधान की उपयोगिता” “हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए छात्राओं को संविधान के विषय में अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता अरमापुर पीजी कॉलेज के राजनीति शास्त्र विभाग में सहायक आचार्य डॉक्टर धीरेन्द्र कुमार दोहरे ने संविधान की भारतीय जनमानस के लिए उपयोगिता पर प्रकाश डाला था संविधान का गहन अध्ययन करने के लिए छात्राओं को प्रेरित किया। मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया कि इस अवसर पर मुख्य वक्ता द्वारा प्राचार्या प्रो सुमन को संविधान की प्रति भेंट की गई। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम प्रभारी राजनीति शास्त्र विभाग की प्रभारी डॉ रश्मि गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सभी शिक्षिकाएं व छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में मनाया गया संविधान दिवस शपथ एवं अन्य गतिविधियों के साथ

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 अक्टूबर, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, राजनीति विज्ञान विभाग, इतिहास विभाग एवम् चित्रकला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संविधान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही द्वारा संविधान शपथ दिलवाई गई। छात्राओं के मध्य संविधान के प्रति जानकारियां एवं जागरूकता लाने हेतु इस अवसर पर अन्य गतिविधियों में भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता तथा रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। समस्त कार्यक्रमों में 100 से अधिक छात्राओं ने प्रतिभाग किया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने संविधान दिवस के अवसर पर छात्राओं के द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो पप्पी मिश्रा, प्रो अभिलाष गौर, प्रो शिखा पांडे, प्रो उपासना वर्मा, प्रो शुभम शिवा, डॉ पूजा श्रीवास्तव, डॉ आभा पांडे, डॉ ज्योत्सना पांडे, श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव आदि सभी का विशेष योगदान सराहनीय रहा।

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एन. सेन. बी. वी. पी. जी. कॉलेज की छात्रा ने “संस्कृत प्रतिभा खोज २०२४” के उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान राज्य स्तरीय प्रतियोगिता २०२४ में भाग लिया

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस. एन. सेन. बी. वी. पी. जी. कॉलेज कानपुर की छात्रा ने “संस्कृत प्रतिभा खोज २०२४” के उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ (भाषा विभाग उत्तर प्रदेश शासनाधीन) राज्य स्तरीय प्रतियोगिता २०२४ में प्रतिभाग किया। यह प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, नया हैदराबाद लखनऊ में आयोजित हुई। प्रतिभाग करने वाली छात्रा सलोनी राव (पंचम सेमेस्टर) की थी। छात्रा ने संस्कृत भाषा प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य (संस्कृत भाषा संस्थान लखनऊ) संस्कृत प्रतिभा खोज थी। प्रबंध तंत्र समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीण कुमार मिश्रा, सचिव श्री प्रोवीर कुमार सेन, संयुक्त सचिव श्री शुभ्रो सेन, प्राचार्या प्रोफेसर सुमन जी का सहयोग रहा। आपका प्रोत्साहन छात्राओं को समय समय पर मिलता रहा। संस्कृत विभाग डॉ आराधना द्विवेदी ने छात्रों को प्रतियोगिता में निर्देशित किया

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भारतीय ज्ञान परंपरा : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विशेष सन्दर्भ में ‘ विषय पर प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज कानपुर के शिक्षाशास्त्र विभाग के द्वारा दिनाँक 19-11-2024, मंगलवार को शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विशेष सन्दर्भ में ‘ विषय पर छात्राओं हेतु पी. पी. टी. प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया|विभागीय प्रतियोगिता कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रोफेसर सुमन, समाजशास्त्र विभाग की वरिष्ठ आचार्या प्रो. रेखा चौबे, मुख्य कुलानुशासिका कैप्टन ममता अग्रवाल, शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो. चित्रा सिंह तोमर, प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में सम्मिलित- IKS प्रभारी प्रो. मीनाक्षी व्यास, दर्शन शास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो. किरन व्योम तथा शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्षा प्रो. प्रीती पांडेय जी ने सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा माल्यार्पण के साथ किया| उपस्थित शिक्षिकाओं ने सरस्वती माँ के चरणों में पुष्प अर्पित किए। अतिथि स्वागत परंपरा के उपरान्त, प्रो. चित्रा सिंह तोमर ने विषय प्रवर्तन करते हुए विस्तार से NEP 2020 के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के सूक्ष्म बिंदुओं पर प्रकाश डाला तथा छात्राओं का मार्गदर्शन किया| प्राचार्या प्रो. सुमन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ मे मस्तिष्क, शरीर, आत्मा के सामंजस्य की भारतीय ज्ञान में उपादेयता स्पष्न्ने भारतीय ज्ञान के आधुनिक स्वरूप को भारत की नई पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए आवश्यक बताया। छात्राओं के उत्तम प्रयास की सराहना करते हुए IKS पर कार्यक्रम हेतु शिक्षाशास्त्र विभाग को शुभकामनाएं भी दीं।

प्रतियोगिता में शिक्षा शास्त्र विभाग की 13 छात्राओं ने वैदिक शिक्षा, मूल्य शिक्षा, वेदांत दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा, भगवद गीता, भारतीय शैक्षिक विचारक- राजा राम मोहन राय, ईश्वर चंद विद्यासागर, महर्षि दयानन्द सरस्वती, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, अरबिंदो, आदि संबंधित विषयों पर PPT Presentation किया। निर्णायक मंडल में प्रो. किरन ने छात्राओं को मूल्य शिक्षा, आध्यात्मिक उत्थान, चारित्रिक विकास हेतु सोशल मीडिया से दूर रहने तथा अच्छी सन्दर्भ पाठ्य पुस्तकों को पढ़ने की सलाह दी। प्रो. मीनाक्षी व्यास ने ‘सा विद्या वा विमुक्तये’ की अवधारणा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्पष्ट किया। उन्होंने परिवर्तन को गतिमान रहने के लिए आवश्यक बताया। प्रो. प्रीती पांडेय ने प्रत्येक प्रतिभागी छात्रा के PPT Presentation की तकनीकी बारीकियों को प्रभावशाली तरीके से स्पष्ट किया तथा भविष्य में अच्छे PPT Presentation बनाने के लिए उन्हें सुझाव भी दिए। प्रतियोगिता का निर्णय निम्नवत रहा-

प्रथम स्थान- आयुषी बाजपेई
द्वितीय स्थान- पावनी पांडेय
तृतीय स्थान- अंशिका कन्नौजिया
सान्त्वना पुरुस्कार- मुस्कान द्विवेदी

मंच संचालन डाॅ. ऋचा सिंह ने किया। कैप्टन ममता अग्रवाल ने नई तकनीकी के प्रयोग हेतु छात्राओं को प्रोत्साहित किया। प्रो. अलका टंडन, प्रो. निशा वर्मा,डॉ. मोनिका सहाय, डाॅ. प्रीति सिंह,डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ. कोमल सरोज, डॉ. शिवांगी यादव, डॉ. अमिता सिंह ने कार्यक्रम के आरंभ से अंत तक उपस्थित रहकर छात्राओं को निरंतर प्रोत्साहित किया। सभी शिक्षिकाओं की कार्यक्रम में उपस्थिति ने छात्राओं का मनोबल बढ़ाया।

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शासन के दिशा निर्देशानुसार छात्राओं को व्यवसाय जगत की जानकारी देने हेतु कैरियर काउंसलिंग वार्ता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एस.एन. सेन बी. वी. पी. जी. कॉलेज तथा सी.एस.जे.एम.यू. कानपुर की सेवायोजन प्रकोष्ठ द्वारा संयुक्त रूप से एस.एन.सेन महाविद्यालय में शासन के दिशा निर्देशानुसार छात्राओं को व्यवसाय जगत की जानकारी देने हेतु एक कैरियर काउंसलिंग वार्ता तथा ऑल डिजी टेक्नोलॉजी कंपनी, नोएडा के द्वारा रोजगार लिए प्लेसमेंट- ड्राइव का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने रूचि दिखाते हुए बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। प्रशिक्षण अवधि के पश्चात वेतन बढ़ने के आकर्षण ने छात्राओं को उत्साहित एवं उल्लासित किया। कार्यक्रम के विधिवत् शुभारंभ के पश्चात, प्राचार्य प्रो. सुमन, सेवायोजन प्रकोष्ठ सह प्रभारी प्रो. निशा वर्मा, तथा चीफ प्रॉक्टर कप्तान ममता अग्रवाल ने, विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेल से आए हुए प्रतिनिधि अनिल कुमार त्रिपाठी एवं ऑल डिजी टेक्नोलॉजी कंपनी के एच.आर श्री अभिषेक प्रताप सिंह का स्वागत किया। अनिल कुमार त्रिपाठी जी ने छात्राओं को कम्युनिकेशन स्किल्स , कंप्यूटर ज्ञान, स्टार्ट अप में इनोवेशन की आवश्यकता इत्यादि के बारे में जानकारी साझा की। अगले कार्यक्रम में ऑल डिजी टेक्नोलॉजी कंपनी से आए हुए एच.आर, श्री अभिषेक प्रताप सिंह एवं उनकी टीम द्वारा छात्राओं का साक्षात्कार लिया गया जिसमें 100 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। सभी वक्ताओं ने छात्राओं की कैरियर संबंधी समस्याओं का समाधान किया।
महाविद्यालय सेवायोजन प्रकोष्ठ के सदस्यों डॉ.कोमल सरोज, डॉ. अनामिका, श्वेता रानी ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

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भगवान बिरसा मुंडा जयंती – जनजातीय गौरव दिवस पर आयोजित हुई विभिन्न प्रतिस्पर्धाएं

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में भगवान बिरसा मुंडा जयंती – 2024 “जनजातीय गौरव दिवस” के उपलक्ष में छात्राओं एवं युवाओं में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तथा जनजातीय विकास में उनके योगदान के संबंध में जागरूकता लाने एवं व्यापक प्रचार प्रसार करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की गई जिनमें भाषण प्रतियोगिता, कविता पाठ गीत, निबंध लेखन आदि प्रमुख रहे। इस कार्यक्रम में कुल 50 एन एस एस वॉलिंटियर्स ने उमंग एवं उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय नॉलेज इंस्टीट्यूशन की प्रभारी डॉ ज्योत्सना पांडे, एनसीसी इंचार्ज प्रोफेसर शुभ्रा राजपूत तथा रेंजर्स सह-प्रभारी श्रीमती श्वेता गोंड का विशेष योगदान रहा।

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मिशन शक्ति के द्वारा विशाखा एक्ट 2013 गाइडलाइंस पर व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज कानपुर, मिशन शक्ति के द्वारा विशाखा एक्ट 2013 गाइडलाइंस पर व्याख्यान का आयोजन हुआ मिशन शक्ति फेज-5 के अंतर्गत दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में मिशन शक्ति प्रभारी डॉ संगीता सिरोही के निर्देशन में विशाखा एक्ट 2013 पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अंशु पांडे के द्वारा दिया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में विशाखा एक्ट 2013 गाइडलाइंस, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ जारी की गई दिशानिर्देश पर विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। जो छात्रों के लिए आने वाले जीवन में अत्यधिक लाभदायक साबित होंगे। इस कार्यक्रम में कुल 40 छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में एनसीसी इंचार्ज प्रोफेसर शुभ्रा राजपूत तथा रोमन रेंजर्स इंचार्ज श्वेता गोंड का विशेष योगदान रहा।

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