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राजनीति

आईएनएस तबर की अभियानगत तैनाती

मित्र देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने की दिशा में भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस तबर को 13 जून, 2021 से तीन महीने से अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय जल के लिए तैनात किया गया था। तैनाती के दौरान उसने यूरोप और अफ्रीका के नौ देशों में लगभग 20,000 नॉटिकल मील समुद्री यात्रा करते हुए 11 पोर्ट कॉल किए। सभी बंदरगाहों पर स्थानीय अधिकारियों ने जहाज का गर्मजोशी से स्वागत किया और कई स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने इसका दौरा किया।https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/Pix(1)CS9G.jpeg

जहाज की बंदरगाह यात्राओं में मेजबान देशों के साथ विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक बातचीत हुई। जहाज ने समुद्र में विदेशी नौसेनाओं के साथ बारह समुद्री साझेदारी अभ्यास भी किए। इनमें रॉयल नेवी के साथ एक्सरसाइज कोंकण 21 और रूसी नौसेना के साथ एक्सरसाइज इंद्र-नेवी 21 जैसे प्रमुख द्विपक्षीय अभ्यास भी शामिल थे। इन अभ्यासों में विविध प्रकार के नौसैनिक अभियानों को शामिल करते हुए व्यापक और बहु-आयामी विकास शामिल थे। माना जाता है कि अभ्यासों ने भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता में वृद्धि की है और आवश्यकता पड़ने पर साझा समुद्री चिंताओं और खतरों को दूर करने के लिए वे आसानी से काम कर सकते हैं। इनमें से कुछ अभ्यास जैसे कि रॉयल नॉर्वेजियन नौसेनाअल्जीरियाई नौसेना और सूडानी नौसेना के साथ-पहली बार हुए थे ।

आईएनएस तबर ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी नौसेना की 325वीं वर्षगांठ समारोह में भी भाग लिया, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस अभियानगत तैनाती के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद आईएनएस तबर को अब एडन की खाड़ी और फारस की खाड़ी में गश्त के लिए तैनात किया गया है।

कैप्टन महेश मंगीपुडी द्वारा कमांड किए जाने वाला आईएनएस तबर एक स्टील्थ फ्रिगेट है और इसमें 300 कर्मियों का दल है। पश्चिमी बेड़े से संबंधित इस जहाज़ ने पहले एडन की खाड़ी में समुद्री डकैती रोधी ऑपरेशन में भाग लिया था।

 

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स्वामित्व योजना की ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी- गिरिराज सिंह

केंद्रीय पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज नई दिल्ली में स्कोप कॉम्प्लेक्स के स्कोप सम्मेलन केंद्र में स्वामित्व योजना: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान की ओर एक कदम पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। केंद्रीय मंत्री ने इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए डैशबोर्ड (https://svamitva.nic.in/) भी लॉन्च किया।

अपने उद्घाटन भाषण में श्री गिरिराज सिंह ने सभी राज्यों से 2024 तक समय सीमा से पहले ही स्वामित्व योजना के कार्यान्वयन को पूरा करने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करने के लिए कहा और आश्वासन दिया कि इस लक्ष्य का पूरा करने हेतु केंद्र सरकार जल्द से जल्द सभी को आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।

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श्री गिरिराज सिंह ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है और स्वामित्व योजना गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण में स्वमित्व योजना के उल्लेख का ज़िक्र करते हुए श्री सिंह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ही दूरदृष्टि है जो उन्होंने ग्रामीण भारत की बेहतरी के लिए प्रौद्योगिकी एवं डेटा का उपयोग करने का आह्वान किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीक तथा डेटा के इस्तेमाल से ग्रामीण भारत और अधिक पारदर्शी बनेगा। श्री गिरिराज सिंह ने राज्यों से स्वामित्व योजना के कार्यान्वयन में पंचायतों की भूमिका बढ़ाने का भी आग्रह किया।

स्वामित्व योजना के महत्व के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस योजना से ग्रामीण लोगों में स्वामित्व की भावना उत्पन्न होगी और वे स्वामित्व कार्ड की मदद से ऋण प्राप्त कर सकते हैं। श्री सिंह ने योजना के तहत उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि स्वामित्व योजना आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

इस मौके पर केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ने ड्रोन के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, जो योजना के वांछित परिणामों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं और राज्यों से प्रतिदिन कम से कम 5 गांव प्रति ड्रोन टीम उपलब्ध कराने का आह्वान किया। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ने जमीनी स्तर पर वास्तविकता को परखने के लिए फीचर एक्सट्रैक्टेड मैप उपलब्ध कराने हेतु 15 दिनों की समयसीमा का पालन करने पर भी जोर दिया। इसी तरह, राज्यों को भी सर्वे ऑफ इंडिया को जमीनी हकीकत वाले नक्शे वापस उपलब्ध कराने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा का पालन करना चाहिए।

हरियाणा राज्य को दिसंबर 2021 तक लाल-डोरा क्षेत्रों में टाइटल डीड वितरण कार्य पूरा करना है। ड्रोन सर्वेक्षण को दमन और दीव, पुद्दुचेरी एवं लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा किया जाना है तथा कम से कम 75 जिलों में दिसंबर 2021 तक इस कार्य को ड्रोन सर्वेक्षण के साथ पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में ड्रोन सर्वेक्षण युद्ध स्तर पर पूरा किया जाना है। राज्यों में ड्रोन टीमों को बढ़ाने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया को प्रोत्साहित किया गया है।

केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री श्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने भी समय सीमा से पहले ही लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है और इसे प्राप्त करने में हमें अपना अहम योगदान देना होगा। उन्होंने ग्राम पंचायतों द्वारा स्वयं के राजस्व के स्रोत (ओएसआर) कर संग्रह के निम्न स्तर पर भी ध्यान आकृष्ट किया। महाराष्ट्र ने राज्य में वितरित संपत्ति कार्ड (सनद) पर मामूली शुल्क लगाकर अपने ओएसआर संपत्ति कर संग्रह में वृद्धि की है। राज्य ऐसे ओएसआर संग्रह को बढ़ाने के लिए स्वामित्व योजना का लाभ उठा सकते हैं, जहां ग्राम पंचायतों को ऐसा करने का अधिकार दिया गया है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री सुश्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण विकास और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी ग्रामीण से शहरी प्रवास को कम करने में भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होगी।

केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने सभी राज्यों से अपने यहां इस योजना को जल्द से जल्द लागू करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना वंचित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम साबित होगी।

इस योजना के कार्यान्वयन में सबसे आगे रहने के लिए केंद्रीय मंत्रियों द्वारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों की सराहना की गई। मध्य प्रदेश ने ड्रोन फ्लाइंग, ग्राउंड-ट्रूथिंग और प्रॉपर्टी कार्ड जनरेशन से एंड टू एंड ऑटोमेशन प्रक्रिया विकसित की है। नागरिक क्लिक करके ही योजना की प्रगति देख सकते हैं और अंतिम संपत्ति कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। नागरिक राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (आरसीएमएस) के माध्यम से भी आपत्ति के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। इससे पारदर्शिता आई है और राज्य में योजना के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित किया गया है। सर्वेक्षण गतिविधियों में तेजी लाने के लिए नए राज्यों को समान वेब-आधारित/मोबाइल-आधारित आईटी प्रणालियों को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

राज्यों को स्वामित्व योजना को एक मिशन मोड में लागू करने और समय पर ड्रोन सर्वेक्षण पूरा करने के लिए ड्रोन का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

इस योजना की सफलता के लिए राज्य और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के बीच घनिष्ठ समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया है। नए राज्यों को वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित विभिन्न मील के पत्थर लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, भारतीय सर्वेक्षण के साथ सक्रिय रूप से संपर्क करने और समयबद्ध तरीके से योजना को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था।

पंचायती राज मंत्रालय में सचिव श्री सुनील कुमार, भूमि संसाधन विभाग में सचिव श्री अजय तिर्की, भारत के महासर्वेक्षक श्री नवीन तोमर सहित भारत सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस सम्मेलन में 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, भारतीय सर्वेक्षण और केंद्रीय मंत्रालयों के 60 से अधिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में भूमि संसाधन विभाग, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नीति आयोग और ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

राज्य भूमि अभिलेख विभाग, सर्वेक्षण एवं निपटान विभाग, भूमि राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण, एनआईसी, जिला कलेक्टरों और मजिस्ट्रेटों तथा भारतीय बैंक संघ के अधिकारियों द्वारा राज्यों से सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचार तथा स्वामित्व कार्यान्वयन के लिए विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। छठी अनुसूची के क्षेत्रों में, तकनीकी आवश्यकताएं – एंड-टू-एंड प्रोसेस ऑटोमेशन और कंटीन्यूअस ऑपरेटिंग रेफरेंस सिस्टम (सीओआरएस), संपत्ति कार्ड की बैंकेबिलिटी के पहलू और स्वामित्व डैशबोर्ड की प्रमुख विशेषताएं आदि शामिल हैं।

पृष्ठभूमि:

स्वामित्व (ग्रामों का सर्वेक्षण और ग्राम क्षेत्रों में तात्कालिक प्रौद्योगिकी के साथ मानचित्रण) योजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल 2020 को प्रत्येक ग्रामीण गृह स्वामी को “अधिकारों का रिकॉर्ड” प्रदान करके ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति को सक्षम करने के संकल्प के साथ शुरू किया गया था। नवीनतम सर्वेक्षण ड्रोन तकनीक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आबाद (आबादी) भूमि का सीमांकन करने के उद्देश्य से स्वामित्व योजना पंचायती राज मंत्रालय, राज्य राजस्व विभागों, राज्य पंचायती राज विभागों तथा भारतीय सर्वेक्षण विभाग का एक सहयोगात्मक प्रयास है। इस योजना में विविध पहलुओं को शामिल किया गया है। संपत्तियों के मुद्रीकरण को सुगम बनाना और बैंक ऋण सक्षम बनाना; संपत्ति से संबंधित विवादों को कम करना; ग्राम स्तर की व्यापक योजना सही मायने में ग्राम स्वराज प्राप्त करने और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण गृह स्वामियों को अधिकारों का रिकॉर्ड प्रदान करना है। अधिकारों का रिकॉर्ड मालिकों द्वारा बैंक से ऋण तथा अन्य वित्तीय लाभों का फायदा उठाने के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह योजना ग्राम स्तर पर विवादों के निपटारे, सटीक भूमि अभिलेखों के निर्माण और किसी भी विभाग या एजेंसी द्वारा उपयोग किए जाने वाले सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में सीओआरएस नेटवर्क की स्थापना में भी मदद करेगी।

चरण I – प्रायोगिक परियोजना (अप्रैल 2020 – मार्च 2021) में हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान राज्यों में सतत संचालन संदर्भ प्रणाली (सीओआरएस) की स्थापना शामिल है।

चरण II (अप्रैल 2021 – मार्च 2025) – 2022 तक देश भर में शेष गांवों और सीओआरएस नेटवर्क कवरेज का पूरा सर्वेक्षण।

प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2020 को हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों के 763 गांवों के लगभग 1.25 लाख निवासियों को संपत्ति कार्ड के वितरण का शुभारंभ किया था। इसके अलावा, राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर 24 अप्रैल 2021 प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना के राष्ट्रीय रोल-आउट का शुभारंभ किया और 5,000 गांवों में 4 लाख से अधिक लाभार्थियों को संपत्ति कार्ड/स्वामित्व कार्ड प्राप्त हुए।

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भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा के लिखित परीक्षा, 2021 के परिणाम

पीआईबी, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जुलाई, 2021 में आयोजित भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, 2021 के लिखित भाग के परिणाम के आधार पर, निम्नलिखित अनुक्रमांक वाले उम्मीदवारों ने साक्षात्कार/व्यक्तित्व परीक्षण के लिए अर्हता प्राप्‍त कर ली है।

2.    इन सभी उम्मीदवारों की उम्मीदवारी इनके हर प्रकार से पात्र पाए जाने के अध्यधीन अनंतिम है। उम्मीदवारों को व्यक्तित्व परीक्षण के समय अपनी आयु, शैक्षणिक योग्यता, समुदाय, शारीरिक अक्षमता (जिन भी मामलों में लागू हो) आदि के अपने दावे के समर्थन में मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे। अत:, उन्हें सलाह दी जाती है कि अपने प्रमाण-पत्र तैयार रखें और व्‍यक्तित्‍व परीक्षण बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने से पहले, आयोग की वेबसाइट पर उपलब्‍ध महत्‍वपूर्ण अनुदेशों के अनुसार अपने प्रमाण-पत्रों की जांच कर लें।

3.    परीक्षा की नियमावली के अनुसार, इन सभी उम्मीदवारों से यह अपेक्षित है कि वे आयोग की वेबसाइट upsconline.nic.in पर उपलब्‍ध विस्तृत आवेदन प्रपत्र (डीएएफ) को भरें। यह विस्तृत आवेदन प्रपत्र (डीएएफ) आयोग की वेबसाइट पर दिनांक 15.09.2021 से दिनांक 28.09.2021 तक शाम 6.00 बजे तक उपलब्ध रहेगा। विस्तृत आवेदन प्रपत्र (डीएएफ) भरने और उसे आयोग में ऑनलाइन जमा करने संबंधी महत्वपूर्ण अनुदेश भी वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे। सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों को ऑनलाइन विस्तृत आवेदन प्रपत्र भरने से पहले वेबसाइट के संगत पृष्‍ठ पर अपने को रजिस्टर करना होगा। इसके बाद ही वे अपनी अर्हता के समर्थन में तथा आरक्षण आदि के दावे के अनुसार संगत प्रमाण-पत्रों/दस्‍तावेजों की स्‍कैन की गई प्रतियों के साथ अपने विस्‍तृत आवेदन को ऑनलाइन जमा करेंगे। अर्हक उम्मीदवारों को भारत के ई-राजपत्र में प्रकाशित भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, 2021 की नियमावली का अवलोकन करने का भी परामर्श दिया जाता है।

4.  उम्‍मीदवार, साक्षात्‍कार के समय प्रस्‍तुत किए जाने वाले प्रमाण-पत्रों के संदर्भ में भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, 2021 की नियमावली के साथ-साथ वेबसाइट पर उपलब्‍ध विस्तृत आवेदन प्रपत्र (डीएएफ) भरने से संबंधित अनुदेशों को ध्‍यानपूर्वक पढ़ लें। उम्‍मीदवार अपनी आयु, जन्‍मतिथि, शैक्षणिक योग्‍यता, समुदाय (अ.जा./अ.ज.जा./अ.पि.व./ईडब्‍ल्‍यूएस) तथा शारीरिक विकलांगता की स्‍थिति के समर्थन में पर्याप्‍त प्रमाण (बेंचमार्क विकलांगता वाले उम्‍मीदवारों के मामले में) प्रस्‍तुत नहीं कर पाने के लिए स्‍वयं उत्‍तरदायी होंगे। लिखित परीक्षा में अर्हक हुआ कोई उम्‍मीदवार, भारतीय आर्थिक सेवा/ भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा, 2021 हेतु अपनी उम्‍मीदवारी के समर्थन में यदि कोई एक अथवा सभी मूल दस्‍तावेज लाने में विफल रहता है तो उसे व्‍यक्तित्‍व परीक्षण बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उसे यात्रा भत्‍ते(टीए) का भुगतान नहीं किया जाएगा।

 

5.    व्यक्तित्व परीक्षण के लिए अर्हक हुए उम्मीदवारों के साक्षात्कार का कार्यक्रम, आयोग की वेबसाइट पर यथासमय प्रदर्शित किया जाएगा। तथापि, साक्षात्कार की सही तारीख की सूचना उम्मीदवारों को ई-समन पत्र के माध्‍यम से प्रदान की जाएगी। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि इस संबंध में आगे की जानकारी हेतु वे आयोग की वेबसाइट (www.upsc.gov.in) देखते रहें।

6.    उम्मीदवारों को व्यक्तित्व परीक्षण हेतु सूचित की गई तारीख और समय में परिवर्तन करने संबंधी अनुरोध पर सामान्‍यत: किसी भी परिस्थिति में विचार नहीं किया जाएगा।

7.    जिन उम्मीदवारों ने अर्हता प्राप्‍त नहीं की है, उनके अंक-पत्र, अंतिम परिणाम के प्रकाशन के बाद (व्यक्तित्व परीक्षण के आयोजन के बाद) आयोग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किए जाएंगे और ये अंक-पत्र वेबसाइट पर 30 दिनों की अवधि के लिए उपलब्ध रहेंगे।

8.    उम्मीदवार अपना अनुक्रमांक और जन्म की तारीख अंकित करने के बाद अंक-पत्र प्राप्‍त कर सकते हैं। तथापि, संघ लोक सेवा आयोग द्वारा उम्मीदवारों को अंक-पत्र की मुद्रित प्रतियां, उम्मीदवारों से डाक-टिकट लगे स्व-पता लिखे लिफाफे सहित उनके द्वारा विशेष अनुरोध प्राप्‍त होने पर ही भेजी जाएंगी। अंक-पत्रों की मुद्रित प्रतियां प्राप्‍त करने के इच्छुक उम्मीदवारों को ऐसा अनुरोध आयोग की वेबसाइट पर अंक-पत्रों के प्रदर्शित किए जाने के तीस दिन के अंदर करना चाहिए; इसके बाद ऐसे किसी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा ।

9.    संघ लोक सेवा आयोग के परिसर में एक सुविधा काउंटर स्थित है। उम्मीदवार अपनी परीक्षा/परिणाम से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी/स्पष्‍टीकरण इस काउंटर से व्यक्तिगत रूप से अथवा टेलीफोन नं. (011)-23385271/23381125/23098543 पर कार्य दिवसों में प्रात: 10.00 बजे से सायं 5.00 बजे के बीच प्राप्‍त कर सकते हैं।

परिणाम के लिए यहाँ क्लिक करें:

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मंडलायुक्त ने यूपीएफसी का लिया अतिरिक्त प्रभार

कानपुर 13 सितंबर,”श्रम आयुक्त यूपी” और “एमडी उत्तर प्रदेश वित्त निगम (यूपीएफसी)” का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करते हुए मंडलायुक्त राजशेखर_

_मंडलायुक्त राजशेखर ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और उत्तर प्रदेश सरकार के दिशा निर्देशों के तहत विभाग को सौंपे गए कार्यों में उत्साहजनक परिणाम देने के लिए हम अपनी पूरी कोशिश करेंगे_

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औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना की अध्यक्षता में मेडिकल कॉलेज सभागार में डेंगू , मलेरिया ओर कोरोना की तीसरी लहर की तैयारी के संबंध में बैठक

कानपुर 12 सितंबर, औद्योगिक विकास मंत्री श्री सतीश महाना की अध्यक्षता में मेडिकल कॉलेज सभागार में जनपद में डेंगू मलेरिया व कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियो के सम्बंध में बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कानपुर नगर को निर्देशित करते हुए कहा कि समस्त सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण बेहतर इलाज मिले, किसी भी प्रकार के कोई सनसाधनों की कोई कमी नहीं है बेहतर प्रबंधन से हम बड़ी से बड़ी महामारी पर कंट्रोल कर सकते हैं इसके लिए पूरी क्षमता से कार्य करना है और समस्त डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को कड़ी मेहनत करनी है आप लोगो की कड़ी मेहनत की वजह से ही कोरोना पर अंकुश लगा है ।उन्होंने कहा कि कहा कहा डेंगू की टेस्टिंग होगी इसके लिए लोगो को बताया जाए तथा नगर निगम के स्थापित कंट्रोल रूम नम्बर 18001805159 पर अब डेंगू, मलेरिया व वायरल फीवर से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी दी जाती रहे इसके लिए लोगो को बताया जाए।शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में साफ सफाई होती रहे इसके लिए कार्य योजना बना कर अभियान के तौर पर सफाई कराई जाए तथा लोगो को सफाई हेतु जागरूक भी किया जाता रहे । उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की सम्पूर्ण तैयारी कर ली जाए इसके लिए मार्च व अप्रैल माह में ऑक्सीजन की कितनी आवश्यकता थी उसका आकलन मुख्य चिकित्सा अधिकारी सरकारी व्यवस्था व समस्त प्राइवेट व्यवस्था के अनुसार कर ले ।जो ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होने है इसके लिए जो समस्या आ रही है उनका निस्तारण युद्ध स्तर पर करे ताकि प्लांट जल्दी स्थापित हो सके।उन्होंने हैलेट अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की तो उपस्थित डॉक्टर ने बताया कि हैलेट अस्पताल में 200 बेड तीसरी लहर के लिए बनाया गया था जिसमें वतर्मान में वारयल फीवर के मरीज भर्ती है। आने वाले मरीजों को बेहतर ईलाज किया जा रहा है ।उन्होंने कहा कि यहां आने वाले मरीज को प्रत्येक दशा में बेहतर इलाज मिले इसमे लापरवाही नही होनी चाहिए। बैठक में जिलाधिकारी कानपुर नगर, मुख्य विकास अधिकारी कानपुर नगर , नगर आयुक्त , मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आदि उपस्थित रहे।

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एसोसिएशन ऑफ एलाइंस क्लब कानपुर भूमिजा एवं कानपुर सृजन का अधिष्ठापन समारोह संपन्न

कानपुर 11 सितम्बर, शुक्रवार को होटल के. डी. पैलेस में एसोसिएशन ऑफ एलाइंस क्लब कानपुर भूमिजा एवं कानपुर सृजन का अधिष्ठापन समारोह संपन्न हुआ,

समारोह में शिक्षा ओर कला क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले करीब 30 शिक्षको को महापौर प्रमिला पांडेय द्वारा सम्मानित किया गया,

इस मौके पर राजीव शुक्ल, राजेंद्र गर्ग, नलिन श्रीवास्तव, डा शिप्रा श्रीवास्तव, डा प्रियंका सिंह, अंजू शुक्ल, डा राजकिशोर सिंह, आदि उपस्थित रहे।

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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर के तत्वाधान में एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित

कानपुर, दिनांक 11 सितम्बर, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ निर्देशों के अनुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर के तत्वाधान एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर श्री में दीवानी न्यायालय परिसर कानपुर नगर में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुये राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें मोटर दुर्घटना प्रतिकर, सिविलवाद, लघुवाद, आपराधिक एवं वैवाहिक आदि वादों का तथा प्रीलिटीगेशन स्तर पर विभिन्न बैंको के वादों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार आर0 पी0 सिंह, की अध्यक्षता पर किया गया। दीवानी न्यायालय के पीठासीन अधिकारीगण द्वारा 11089 वादों का निस्तारण किया गया जिसमें मु० और 8.33.39.397.00 रु0 धनराशि दिलायी/वसूल की गयी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा 171 वादो का निस्तारण किया गया और 5,61,41,000.00 रु0 धनराशि दिलायी की गयी। कामर्शियल कोर्ट द्वारा 22 वादो का निस्तारण किया गया और 1.56,51,256.00 रु0 धनराशि दिलायी की गयी। प्रीलिटीगेशन स्तर पर 1028 वादो का निस्तारण किया गया 4,48,97.926.00 रु0 का समझौता बैंको द्वारा किया गया। विशेष उल्लेखनीय है कि, आर0 पी0 सिंह, जनपद न्यायाधीश, कानपुर नगर द्वार कुल-12 वादों का निस्तारण कर 25,000.00 रूपये वसूल/दिलाये गये। इस प्रकार कुल मिलाकर 12117 वादो का निस्तारण किया गया तथा कुल धनराशि 12,82,37,323.00 रु0 वसूल/दिलायी गयी। वैवाहिक प्रकृति के कुल 67 वादो का निस्तारण किया गया जिसमें प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, कानपुर नगर श्री रमेश चन्द्र-I, द्वारा 47 वादों का निस्तारण किया गया एवं कुल 09 पारिवारिक जोड़ों को महोदय द्वारा आशीर्वाद देकर एक दूसरे को गले मिलवाया गया व एक-दूसरे को मिठाई खिलवाकर विदा किया गया। मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट, कानपुर नगर श्री शैलेन्द्र यादव द्वारा सर्वाधिक 5057 मुकदमों का निस्तारण किया गया। आज राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन में रामगोपाल विधि महाविद्यालय के छात्र एवं छात्राओं द्वारा न्यायालय में उपस्थित होकर न्यायालयों की कार्यवाही का अवलोकन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का संचालन श्री प्रथम कान्त, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कक्ष सं0-04 एवं श्रीमती अंशू शुक्ला, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कानपुर नगर द्वारा किया गया।

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री 11 और 12 सितंबर, 2021 को मणिपुर में ‘पोषण माह’ समारोहों की शोभा बढ़ाएंगी

‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत मनाए जा रहे ‘पोषण माह’ के भाग के रूप में, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी 11 और 12 सितंबर, 2021 को इम्फाल, मणिपुर में होने वाले कार्यक्रमों की एक श्रृंखला में भाग लेंगी।

11 सितंबर को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री इम्फाल में सिटी कन्वेंशन सेंटर में हो रहे राष्ट्रीय पोषण माह पर एक कार्यक्रम में मुख्य संबोधन देंगी। इसके बाद, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों को औषधीय पौधों व गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों सहित आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभार्थियों को न्यूट्री-किट्स का वितरण करेंगी। इम्फाल में सिटी कन्वेंशन सेंटर में एक एनीमिया जांच शिविर का भी आयोजन किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री बासापुरा, इम्फाल में मुख्यमंत्री सचिवालय में मणिपुर के मुख्यमंत्री श्री एन. बीरेन सिंह से भी मुलाकात करेंगी।

 

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12 सितंबर, 2021 को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री बिष्णुपुर जिले में डिस्ट्रिक्ट पंचायत रिसोर्स सेंटर में पोषण माह समारोह पर एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम औषधीय पौधों और फल देने वाले पेड़ों के पौधारोपण के साथ शुरू होगा, जिसके बाद एक एनीमिया शिविर का शुभारम्भ होगा। कार्यक्रम में संबोधन देने के बाद केंद्रीय मंत्री पोषण साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाएंगी।

12 सितंबर को अन्य प्रमुख कार्यक्रम आईएनए, मोइरैंग में होगा, जहां आईएनए मेमोरियल हॉल में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री लाभार्थियों, एडब्ल्यूडब्ल्यू, एडब्ल्यूएच, सुपरवाइजरों, सीडीपीओ और डीपीओ के साथ संवाद करेंगी। केंद्रीय मंत्री एक पोषण वॉक को भी हरी झंडी दिखाएंगी।

पोषण अभियान

पोषण अभियान बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण में सुधार के उद्देश्य से शुरू किया गया भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है। 8 मार्च, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राजस्थान के झुंझुनू से शुरू किया गया पोषण (प्राइम मिनिस्टर्स ओवरआर्चिंग स्कीम फोर होलिस्टिक न्यूट्रिशन) अभियान का उद्देश्य कुपोषण की समस्या की ओर देश का ध्यान आकर्षित करना और इससे मिशन के रूप में निपटना है।

पोषण अभियान स्थानीय निकायों के जन प्रतिनिधियों, राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की समावेशी भागीदारी वाला एक जनांदोलन है। सामुदायिक एकजुटता सुनिश्चित करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने के क्रम में, देश भर में सितंबर महीने को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर पोषण माह- 2021 के दौरान गतिविधियों की एक श्रृंखला के आयोजन की योजना बनाई है। इस साल पोषण माह के दौरान सभी हितधारकों के द्वारा की जाने वाली गतिविधियां आंगनबाड़ियों, स्कूल परिसरों, ग्राम पंचायतों और अन्य स्थानों में उपलब्ध स्थान में पोषण वाटिका के लिए पौधारोपण अभियान पर केंद्रित हैं।

पौधारोपण गतिविधि पोषक फल देने वाले पौधों, स्थानीय सब्जियों, औषधीय पौधों और जड़ी बूटियों के पौधे रोपने पर केंद्रित है। कोविड टीकाकरण और कोविड प्रोटोकॉल के पालन के लिए संवेदनशील/ जागरूक बनाने का अभियान चलाया जा रहा है, बच्चों (6 साल से उम्र से कम) के लिए लंबाई और वजन मापने का विशेष अभियान, गर्भवती महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खाद्य पदार्थों को रेखांकित करने के लिए नारा लेखन और पाक विधि प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन किया जा रहा है। पोषण माह के दौरान होने वाली गतिविधियों में क्षेत्रीय/ स्थानीय खाद्य, क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों से युक्त न्यूट्रीशियन किट्स के वितरण, एनीमिया शिविरों, विकासखंड वार एसएएम बच्चों की पहचान के लिए अभियान, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में एसएएम के प्रसार को रोकने की पहल के रूप में एसएएम बच्चों के लिए पूरक आहार कार्यक्रम की निगरानी, भारी कुपोषण के सामुदायिक प्रबंधन के लिए संवेदनशील बनाने और एसएएम बच्चों के लिए पोषक खाद्य पदार्थों का वितरण शामिल है।

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डीआरडीओ ने राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय वायु सेना को वायु रक्षा मिसाइल (एमआर-सैम) प्रणाली सौंपी

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भारत की रक्षा क्षमताओं को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन देने के लिए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय वायु सेना को मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआर-सैम) प्रणाली की पहली सुपुर्दगी योग्य फायरिंग यूनिट दिनांक 9 सितंबर, 2021 को राजस्थान में जैसलमेर वायुसेना स्टेशन में सौंपी गई।
एमआरएसएएम भारतीय उद्योग के सहयोग से एमएसएमई सहित निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय कंपनियों के साथ तालमेल कर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक उन्नत नेटवर्क केंद्रित लड़ाकू वायु रक्षा प्रणाली है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया को पहली डिलीवरी योग्य फायरिंग यूनिट सौंपी। आयोजन के दौरान डीआरडीओ और आईएआई के अधिकारियों ने ऑन-साइट स्वीकृति परीक्षण (ओएसएटी) के हिस्से के रूप में एमआर-सैम प्रणाली की क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

प्रमुख बातें:

  •  एमआर-सैम लड़ाकू विमानयूएवीनिर्देशित और अनिर्देशित हथियारों एवं क्रूज मिसाइलों जैसे हवाई खतरों के खिलाफ हवाई सुरक्षा प्रदान करता है
  •  70 किलोमीटर तक दूरी पर अनेक लक्ष्यों को एंगेज़ करने में सक्षम
  •  उच्च गतिशीलता प्राप्त करने के लिए स्वदेश में विकसित रॉकेट मोटर एवं कंट्रोल प्रणाली
  •  अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली

 

अपने संबोधन में श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, आईएआई, विभिन्न निरीक्षण एजेंसियों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योग भागीदारों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की और उन्होंने इस प्रणाली को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों में से एक करार दिया। उन्होंने कहा, “भारतीय वायुसेना को एमआरएसएएम प्रणाली सौंपने के साथ, हमने अपने प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना के अनुरूप ‘आत्मनिर्भर भारत’ हासिल करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। यह वायु-रक्षा-प्रणाली में गेम चेंजर साबित होगी।”

रक्षा मंत्री ने तेजी से बदलते वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य से उत्पन्न होने वाली किसी भी चुनौती से निपटने के लिए देश के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार के संकल्प को दोहराया । उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। एक मजबूत सेना की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा और समग्र विकास सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा उद्योग कॉरिडोर की स्थापना सहित सरकार द्वारा उठाए गए उपायों- आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण; निजी क्षेत्र को डीआरडीओ द्वारा निर्यात और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) बढ़ाने के लिए 200 से अधिक वस्तुओं की दो सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की अधिसूचना का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत जल्द ही रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ रक्षा प्रणालियों का वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन जाएगा।

श्री राजनाथ सिंह ने ‘मेक इन इंडिया, ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन और विकास के माध्यम से तकनीकी आधार को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रौद्योगिकी भागीदारों और मित्र देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग ने इस दृष्टि को साकार करने की दिशा में तेजी से प्रगति की है और एमआर-सैम का विकास इस तरह के सहयोगात्मक प्रयास का एक बड़ा उदाहरण है।

रक्षा मंत्री ने एमआर-सैम प्रणाली के विकास को भारत और इज़राइल के बीच घनिष्ठ साझेदारी का एक जीवंत उदाहरण बताया और कहा कि भारतीय वायुसेना को प्रणाली प्राप्त होना दशकों पुरानी दोस्ती को और अधिक ऊंचाइयों पर ले गया है। उन्होंने कहा कि इसने भारत और इज़राइल के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कार्यक्रम के विकास में नई परीक्षण सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह भविष्य में दोनों देशों के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के उत्पादन में सहायक होगा । उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए निर्मित की जा रही उप-प्रणालियों को भारतीय सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच तालमेल का एक बड़ा उदाहरण बताया।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम को याद करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया, जिन्होंने रक्षा क्षेत्र में, विशेष रूप से मिसाइल विकास कार्यक्रम में, आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि लगभग 30 साल पहले डॉ कलाम ने एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम की शुरुआत ऐसे समय में की थी जब वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न प्रतिबंधों का सामना कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन सबके बावजूद कार्यक्रम की सफलता ने न केवल मिसाइल विकास में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की, बल्कि सीमा पार से किसी भी खतरे की संभावना को भी विफल कर दिया।

एमआर-सैम प्रणाली लड़ाकू विमान, यूएवी, हेलीकॉप्टर, निर्देशित और बिना निर्देशित युद्ध सामग्री, सब-सोनिक और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों आदि समेत खतरों की एक विस्तृत श्रृंखला के खिलाफ जमीनी संपत्तियों को एक स्थान विशेष पर और क्षेत्र विशेष पर वायु रक्षा प्रदान करती है । यह गंभीर संतृप्ति परिदृश्यों में 70 किलोमीटर की दूरी तक अनेक लक्ष्यों को एंगेज करने में सक्षम है। टर्मिनल चरण के दौरान उच्च गतिशीलता प्राप्त करने के लिए मिसाइल स्वदेशी रूप से विकसित रॉकेट मोटर और कंट्रोल प्रणाली द्वारा संचालित है।

फायरिंग यूनिट में मिसाइल, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस), मोबाइल लॉन्चर सिस्टम (एमएलएस), एडवांस्ड लॉन्ग रेंज रडार, मोबाइल पावर सिस्टम (एमपीएस), रडार पावर सिस्टम (आरपीएस), रीलोडर व्हीकल (आरवी) और फील्ड सर्विस व्हीकल (एफएसवी)
शामिल हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने एमआर-सैम (आईएएफ) की पूरी टीम के प्रयासों को बधाई दी और कहा कि यह प्रणाली देश की वायु रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगी। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने एमआर-सैम प्रणाली के विकास में शामिल टीमों की सराहना की।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, दक्षिण पश्चिमी वायुसेना कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल संदीप सिंह तथा आईएआई के अध्यक्ष और सीईओ श्री बोज लेवी और अन्य वरिष्ठ नागरिक तथा सैन्य अधिकारी भी उपस्थित थे ।

 

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अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क के बारे में जानें सब कुछ – एक वित्तीय डेटा-साझा प्रणाली

पिछले सप्ताह, भारत ने वित्तीय डेटा-साझा प्रणाली – अकाउंट एग्रीगेटर (एए) नेटवर्क का अनावरण किया, जो निवेश और ऋण के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। इससे लाखों उपभोक्ताओं को अपने वित्तीय रिकॉर्ड के उपयोग पर आसान पहुंच और नियंत्रण मिल सकता है और ऋण प्रदाता तथा फिनटेक कंपनियों के लिए ग्राहकों की संभावित संख्या में अत्यधिक विस्तार हो सकता है। अकाउंट एग्रीगेटर व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत वित्तीय डेटा पर नियंत्रण के साथ सशक्त बनाता है, जो डेटा सामान्यतया अलग-थलग और आसान पहुँच से बाहर रहते हैं।

यह भारत में ओपन बैंकिंग की व्यवस्था शुरू करने की दिशा में पहला कदम है, जो लाखों ग्राहकों को सुरक्षित और कुशल तरीके से अपने वित्तीय डेटा तक डिजिटल रूप में पहुँचने और इसे अन्य संस्थानों के साथ साझा करने के लिए सशक्त बनाता है।

बैंकिंग में अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली, भारत के आठ सबसे बड़े बैंकों के साथ शुरू की गई है। अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली ऋण और धन प्रबंधन को बहुत तेज और किफायती बना सकता है।

1) अकाउंट एग्रीगेटर क्या है?

अकाउंट एग्रीगेटर (एए) आरबीआई द्वारा विनियमित एक ऐसी इकाई है, (एनबीएफसी-एए लाइसेंस के साथ) जो किसी व्यक्ति को सुरक्षित और डिजिटल रूप में एक वित्तीय संस्थान से प्राप्त अपने खाते की जानकारी को एए में शामिल किसी अन्य विनियमित वित्तीय संस्थान के साथ साझा करने में मदद करती है। व्यक्ति की सहमति के बिना डेटा को साझा नहीं किया जा सकता है।

ऐसी सुविधा देने वाले कई अकाउंट एग्रीगेटर होंगे और उपभोक्ता जिसे चाहे उसे चुन सकता है।

अकाउंट एग्रीगेटर; आपके डेटा के प्रत्येक उपयोग के लिए ‘रिक्त चेक’ स्वीकृति के लंबे नियम और शर्तों के बदले एक संक्षिप्त, चरण-दर-चरण अनुमति और नियंत्रण का प्रस्ताव देता है।

 

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2) नया अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क, व्यक्ति के वित्तीय कामकाज को कैसे आसान बनाएगा?

भारत की वित्तीय प्रणाली में उपभोक्ताओं को कई परेशानियां का सामना करना पड़ता है, जैसे बैंक खता विवरण की भौतिक रूप से हस्ताक्षरित और स्कैन की गई प्रतियों को साझा करना, दस्तावेजों को नोटरी से हस्ताक्षर करवाने या मुहर लगाने के लिए इधर-उधर परेशान होना या किसी तीसरे पक्ष को अपना वित्तीय विवरण देने के क्रम में व्यक्तिगत उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड साझा करना। अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क इन सभी समस्याओं के बदले एक सरल, मोबाइल-आधारित और सुरक्षित तरीके से डिजिटल डेटा तक पहुँचने व साझा करने की प्रक्रिया की पेशकश करता है। यह नई प्रकार की सेवाओं के लिए अवसर सृजित करेगा — जैसे नए प्रकार के ऋण।

एक बैंक को केवल अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क से जुड़ने की आवश्यकता है। आठ बैंक पहले से ही सहमति के आधार पर डेटा साझा कर रहे हैं, चार बैंक यह सुविधा शुरू कर चुके हैं, (एक्सिसआईसीआईसीआईएचडीएफसी और इंडसइंड बैंक) और चार जल्द ही शुरू करने वाले हैं (भारतीय स्टेट बैंककोटक महिंद्रा बैंकआईडीएफसी फर्स्ट बैंक और फेडरल बैंक)।

 

3) अकाउंट एग्रीगेटर, आधार ईकेवाईसी डेटा साझाक्रेडिट ब्यूरो डेटा साझा और सीकेवाईसी जैसे प्लेटफॉर्म से कैसे अलग है?

आधार ईकेवाईसी और सीकेवाईसी; केवल केवाईसी उद्देश्यों (जैसे नाम, पता, लिंग, आदि) के लिए ‘पहचान’ आधारित केवल चार प्रकार के डेटा साझा करने की अनुमति देते हैं। इसी तरह, क्रेडिट ब्यूरो डेटा केवल ऋण इतिहास और/या क्रेडिट स्कोर दिखाता है। अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क बचत/जमा/चालू खातों से लेनदेन डेटा या बैंक खाता विवरण साझा करने की अनुमति देता है।

4) किस प्रकार का डेटा साझा किया जा सकता है?

आज, बैंकिंग लेनदेन डेटा, उन बैंकों के साथ साझा किये जाने के लिए उपलब्ध है, (उदाहरण के लिए, एक चालू या बचत खाते से बैंक विवरण) जो अभी नेटवर्क पर लाइव हैं।

धीरे-धीरे एए व्यवस्था साझा करने के लिए सभी वित्तीय डेटा उपलब्ध कराएगी, जिसमें कर डेटा, पेंशन डेटा, प्रतिभूति डेटा (म्यूचुअल फंड और ब्रोकरेज) शामिल होंगे, जबकि बीमा डेटा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा। वित्तीय क्षेत्र के अलावा भी इस सुविधा का विस्तार होगा, ताकि एए के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा और दूरसंचार डेटा भी लोगों के लिए सुलभ हो सके।

5) क्या एए व्यक्तिगत डेटा को देख या एकत्रित‘ कर सकते हैंक्या डेटा साझा करना सुरक्षित है?

अकाउंट एग्रीगेटर डेटा देख नहीं सकते हैं; केवल व्यक्ति के निर्देश और सहमति के आधार पर वे इसे एक वित्तीय संस्थान से दूसरे वित्तीय संस्थान में भेज सकते हैं। नाम के विपरीत, वे आपके डेटा को ‘एकत्रित’ नहीं कर सकते। एए प्रौद्योगिकी कंपनियों की तरह नहीं हैं, जो आपके डेटा को एकत्रित करती हैं और आपका विस्तृत व्यक्तिगत विवरण (प्रोफाइल) तैयार करती हैं।

एए डेटा को कूटभाषा (एन्क्रिप्ट) में साझा करता है और केवल प्राप्तकर्ता द्वारा इसे समझा (डिक्रिप्ट) जा सकता है। एक छोर से दूसरे छोर तक कूटभाषा और ‘डिजिटल हस्ताक्षर’ जैसी तकनीक का उपयोग, कागजी दस्तावेजों को साझा करने की तुलना में, इस साझा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाता है।

6) क्या कोई उपभोक्ता यह तय कर सकता है कि वे डेटा साझा करना नहीं चाहते हैं?

हां। एए के साथ पंजीकरण करना उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से स्वैच्छिक है। यदि उपभोक्ता जिस बैंक का उपयोग कर रहा है और वह नेटवर्क में शामिल हो गया है, तो कोई व्यक्ति एए पर पंजीकरण करने का विकल्प चुन सकता है। व्यक्ति यह भी तय कर सकता है कि वे किन खातों को इससे जोड़ना चाहते हैं और वह अपने किसी एक खाते से डेटा को किसी विशेष उद्देश्य के लिए किसी एक अकाउंट एग्रीगेटर के माध्यम से ‘सहमति’ देने के चरण में किसी नए ऋण प्रदाता या वित्तीय संस्थान से साझा कर सकता है। एक ग्राहक किसी भी समय साझा करने संबंधी सहमति को वापस ले सकता है। यदि किसी उपभोक्ता ने एक अवधि (जैसे ऋण अवधि के दौरान) में आवर्ती तरीके से या बार-बार डेटा साझा करना स्वीकार किया है, तो इस सहमति को भी बाद में किसी भी समय उपभोक्ता द्वारा रद्द किया जा सकता है।

7) यदि किसी उपभोक्ता ने अपना डेटा किसी संस्थान के साथ एक बार साझा किया हैतो संस्थान कितनी अवधि तक इसका उपयोग कर सकता है?

डेटा साझा करने के लिए सहमति के समय प्राप्तकर्ता संस्थान द्वारा उपयोग की समयावधि उपभोक्ता को बतायी जाएगी।

8) ग्राहक एए के साथ कैसे पंजीकृत हो सकता है?

आप एए के साथ उनके ऐप या वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। एए एक हैंडल (जैसे उपयोगकर्ता नाम) प्रदान करेगा, जिसका उपयोग सहमति प्रक्रिया के दौरान किया जा सकता है।

आज, चार ऐप डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं, (फिनव्यू, वनमनी, सीएएमएस फिनसर्व, और एनएडीएल) जिनके पास एए होने के लिए परिचालन लाइसेंस हैं। तीन और को (फोनपे, योडली और परफियोस) आरबीआई से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है और वे जल्द ही ऐप लॉन्च कर सकते हैं।

9) क्या ग्राहक को प्रत्येक एए के साथ पंजीकरण करने की आवश्यकता है?

नहीं, ग्राहक नेटवर्क पर किसी भी बैंक से डेटा तक पहुँचने के लिए किसी एक एए के साथ पंजीकरण कर सकता है।

10) क्या इस सुविधा का उपयोग करने के लिए ग्राहक को एए को भुगतान करने की आवश्यकता है?

यह एए पर निर्भर करेगा। कुछ एए निःशुल्क हो सकते हैं, क्योंकि वे वित्तीय संस्थानों से सेवा शुल्क लेते हैं। कुछ अन्य एए उपयोगकर्ता शुल्क के रूप में एक छोटी राशि ले सकते हैं।

11) यदि ग्राहक का बैंक डेटा साझा के एए नेटवर्क में शामिल हो गया है, तो ग्राहक किन नई सेवाओं का लाभ उठा सकता है?

किसी व्यक्ति के लिए दो प्रमुख सेवाओं में सुधार किया जाएगा- ऋण प्राप्ति  और धन प्रबंधन की सुविधा। यदि कोई ग्राहक आज एक छोटे व्यवसाय के लिए या व्यक्तिगत ऋण प्राप्त करना चाहता है, तो ऐसे कई दस्तावेज हैं, जिन्हें ऋणदाता के साथ साझा करने की आवश्यकता होती है। यह आज एक बोझिल और कई चरणों में पूरी की जाने वाली प्रक्रिया है, जो ऋण प्राप्त करने और ऋण तक पहुंचने में लगने वाले समय को प्रभावित करती है। इसी तरह, आज धन प्रबंधन कठिन है, क्योंकि डेटा का संग्रह कई अलग-अलग स्थानों में किया जाता है और विश्लेषण के लिए आसानी से एक साथ नहीं लाया जा सकता है।

अकाउंट एग्रीगेटर के माध्यम से, एक कंपनी बिना किसी त्रुटि के तथा सुरक्षित तरीके से डेटा तक जल्दी और कम खर्च में पहुँच सकती है और ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर सकती है, ताकि ग्राहक को ऋण मिल सके। साथ ही, एक ग्राहक जीएसटी या जीईएम जैसी सरकारी प्रणाली से सीधे नकदी प्रवाह पर या भविष्य के चालान संबंधी विश्वसनीय जानकारी साझा करके, बिना कोई सम्पत्ति दस्तावेज को गिरवी रखे, ऋण का उपयोग करने में सक्षम हो सकता है।

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