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आज लॉन्च किया गया “युवा पोर्टल” हमें संभावित युवा स्टार्ट अप उद्यमों को जोड़ने और पहचानने में मदद करेगा – केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज “युवा पोर्टल” लॉन्च किया, जो संभावित युवा स्टार्ट-अप को जोड़ने और पहचानने में मदद करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में एनपीएल के “वन वीक-वन लैब” कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि हितधारकों की भागीदारी व्यापक होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि स्टार्ट-अप उद्यम उचित उद्योग मार्गदर्शन और सही विशेषज्ञता के बिना टिकाऊ नहीं होंगे, खासकर अगर उद्योग क्षेत्र की व्यापक भागीदारी नहीं है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 6 जनवरी, 2023 को “वन वीक-वन लैब” पहल की शुरुआत की थी। प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्टार्ट-अप में भारत के वैश्विक नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान की 37 सीएसआईआर परिषदों में से प्रत्येक के पास काम के अलग विशेष क्षेत्र के लिए देश भर में फैली प्रयोगशालाएं समर्पित हैं और “वन वीक-वन लैब” अभियान उनमें से प्रत्येक को अपना काम दिखाने का अवसर प्रदान करेगा ताकि अन्य लोग इससे लाभान्वित हो सकें और हितधारक इसके बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को नागपुर में आयोजित 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में प्रधानमंत्री के संबोधन का उल्लेख किया, जब उन्होंने कहा था, “हम उस वैज्ञानिक दृष्टिकोण के परिणाम भी देख रहे हैं जिसके साथ आज का भारत आगे बढ़ रहा है। भारत तेजी से विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों में से एक बन रहा है।“

डॉ. जितेंद्र सिंह ने हरियाणा के करनाल में स्थापित की गई खगोल विज्ञान प्रयोगशाला के शुभारंभ की भी सराहना की और कहा कि यह सभी को समान अवसर प्रदान करेगी और यहां तक कि दिव्यांग भी कौशल, कला और शिल्प के विभिन्न रूपों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा, विभिन्न भाषाओं में शुरू की जाने वाली सुविधा श्रवण बाधित छात्रों को अंतरिक्ष की सरल से जटिल अवधारणाओं के अलावा सूर्य, चंद्रमा और सितारों के बारे में जानने में सक्षम बनाएगी।

भारतीय सांकेतिक भाषा एस्ट्रोलैब में 65 उपकरण हैं जिनमें एक बड़ा टेलीस्कोप, इंटरैक्टिव मॉडल, ऑडियो विजुअल एड्स, फन फैक्ट पोस्टर शामिल हैं। इसमें भारतीय सांकेतिक भाषा में अंतरिक्ष और विज्ञान से संबंधित सरल और जटिल विषयों पर बायोपिक्स, व्यावहारिक प्रदर्शन, मजेदार तथ्य, व्याख्यात्मक वीडियो सहित 90 से अधिक वीडियो स्ट्रीम करने के लिए सप्ताह के सातों दिन, चौबीस घंटे वर्चुअल एक्सेस है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, आज के कार्यक्रम से, जिसमें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की सभी प्रयोगशालाएं न केवल जनता के लिए अपनी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करेंगी, बल्कि युवा अन्वेषकों, छात्रों, स्टार्ट-अप्स को भी प्रबुद्ध करेंगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षाविद् और उद्यमी अपने ज्ञान को बढ़ाने और डीप टेक वेंचर्स के माध्यम से अवसरों का पता लगाने के लिए लोगों तक पहुंचेंगे। “वन वीक, वन लैब” अभियान के तहत, लगातार हफ्तों में, सीएसआईआर की प्रत्येक प्रयोगशाला भारत के लोगों के लिए अपने अद्वितीय नवाचारों और तकनीकी प्रगति का प्रदर्शन करेगी। सीएसआईआर की प्रयोगशालाएं अद्वितीय हैं। इन प्रयोगशालाओं को जीनोम से भूविज्ञान, भोजन से ऊर्जा, खनिजों से सामग्री तक फैले विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि सीएसआईआर-एनपीएल भारतीय मानक समय (आईएसटी) का संरक्षक है, जिसे सीज़ियम परमाणु घड़ी और हाइड्रोजन मेसर्स से युक्त परमाणु समय पैमाने का उपयोग करके विकसित किया गया है। इतना ही नहीं, अल्ट्रा-सटीक उपग्रह लिंक का उपयोग करके भारतीय मानक समय को अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ समय यूटीसी (समन्वित यूनिवर्सल टाइम) के कुछ नैनोसेकंड के भीतर इंगित किया जा सकता है। आइए और जानिए कि कैसे सीएसआईआर-एनपीएल देश का समय सही रखता है!

क्या आप जानते हैं कि सीएसआईआर-एनपीएल ने वायुमंडलीय प्रदूषण की निगरानी के लिए गैस और वायुजनित कणों के मापन को मानकीकृत किया है?

सीएसआईआर-एनपीएल के निदेशक प्रोफेसर वेणुगोपाल अचंता ने कहा कि सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) 17 से 21 अप्रैल तक एक सप्ताह एक प्रयोगशाला कार्यक्रम आयोजित कर रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य एनपीएल में उपलब्ध तकनीकों और सेवाओं के बारे में संभावित भागीदारों के बीच जागरूकता पैदा करना, सामाजिक समस्याओं का समाधान प्रदान करना, सटीक माप के महत्व के बारे में लोगों को शिक्षित करना और लोगों में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करना है, खासकर उन छात्रों में जो देश का भविष्य हैं।

डॉ. अचंता ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में 180 स्कूल विभिन्न गतिविधियों के लिए एनपीएल से प्रयोगशालाओं के संपर्क में हैं और भविष्य में इस तरह की बातचीत के लिए और स्कूलों के साथ के संपर्क होगा।

यह भारतीय मानक समय (आईएसटी) के प्रसार के कार्य सहित लंबाई, द्रव्यमान, तापमान आदि के माप मानकों को संरक्षित और बनाए रखता है। एनपीएल भविष्य के क्वांटम मानकों और आगामी तकनीकों को स्थापित करने के मिशन के साथ बहु-विषयक अनुसंधान एवं विकास कर रहा है ताकि भारत अंतरराष्ट्रीय माप प्रयोगशालाओं के बराबर बना रहे। यह उभरते हुए भारत की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के तहत परिष्कृत विश्लेषणात्मक उपकरण (यानी आयात विकल्प) विकसित कर रहा है और “कौशल भारत” कार्यक्रम के तहत माप के क्षेत्र में युवा वैज्ञानिकों और उद्योग कर्मियों को प्रशिक्षण दे रहा है।

18 से 20 अप्रैल तक तीन दिवसीय स्टार्टअप/एमएसएमई/इंडस्ट्री मीट होगी। इस आयोजन का उद्देश्य उद्योगों को एनपीएल द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं का प्रदर्शन करना है। इस आयोजन में, एनपीएल द्वारा सहायता प्राप्त/नियुक्त/तकनीकी सहायता/परामर्श/सेवाएं प्रदान करने वाली सभी संबंधित पार्टियों को आमंत्रित किया जाता है। आयोजन के दौरान प्रत्येक दिन, 20 से अधिक उद्योग भाग लेंगे जहां वे न केवल अपनी प्रौद्योगिकियों/सेवाओं (जहां एनपीएल ने योगदान दिया है) का प्रदर्शन करेंगे बल्कि एनपीएल के वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन के बारे में भी बात करेंगे। नवाचार ढांचे और पारिस्थितिक तंत्र से संबंधित कई अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विकास के लिए 4 नए औद्योगिक भागीदारों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

19 अप्रैल को एक मेट्रोलॉजी कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा जहां सीएसआईआर-एनपीएल में एडवांस इन मेट्रोलॉजी हैंडबुक जारी की जाएगी। मैट्रोलोजी के क्षेत्र में सीएसआईआर-एनपीएल की भूमिका, प्रयास, भविष्य के लिए सीएसआईआर-एनपीएल का रोड मैप, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का विकास, पैनल डिस्कशन आदि को मैट्रोलोजी सम्मेलन में शामिल किया गया है।

20 अप्रैल को आरएंडडी कॉन्क्लेव और वीमेन इन स्टेम आयोजित किया जाएगा। इसमें एनपीएल परिवार के प्रमुख वैज्ञानिक और पूर्व छात्र अपना दृष्टिकोण साझा करेंगे। विज्ञान-प्रौद्योगिकी में हाल की प्रगति में सीएसआईआर-एनपीएल की भूमिका का प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित है। अनुसंधान और विकास में एसटीईएम करियर में महिलाओं के लिए हालिया रुझानों, चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए महिला वैज्ञानिकों द्वारा कई गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। साथ ही, भारत की प्रसिद्ध महिला वैज्ञानिकों पर एक वृत्तचित्र फिल्म भी प्रदर्शित होगी।

एक दिवसीय स्किल कॉन्क्लेव 21 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। कॉन्क्लेव का मुख्य फोकस जनता को सीएसआईआर-एनपीएल के कौशल विकास कार्यक्रम के बारे में शिक्षित करना और हमारे जीवन के सभी पहलुओं से संबंधित क्षेत्रों में विभिन्न विशेषज्ञ व्याख्यान और कौशल प्रदर्शनों की मेजबानी करके स्थानीय लोगों को प्रेरित करना है। देश में विभिन्न उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के लिए आवश्यक कुशल जनशक्ति को प्रशिक्षित करने के लिए सीएसआईआर-एनपीएल समय-समय पर कई कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।

सीएसआईआर-एनपीएल और इसके “वन वीक वन लैब” कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी के लिए एनपीएल की वेबसाइट है: https://www.nplindia.org/

इसमें भाग लेने के इच्छुक लोग इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण करा सकते हैं।

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ऑपरेशन कावेरी- सूडान से अब तक स्वदेश आए 1,191 यात्रियों में से 117 यात्रियों को वर्तमान में नि:शुल्क क्वारंटीन किया गया है, क्योंकि उन्हें येलो फीवर का टीका नहीं लगा हुआ था

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ‘ऑपरेशन कावेरी’ के तहत विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। भारत सरकार सूडान से भारतीय मूल के लगभग 3,000 यात्रियों को सुरक्षित स्वदेश वापस लेकर आ रही है। भारत आने वाले इन यात्रियों के लिए मिशन मोड में ट्रांजिट जंगक्चर्स पर आवश्यक क्वारंटीन सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। अब तक कुल 1,191 यात्री स्वदेश वापस आ चुके हैं, जिनमें से 117 यात्रियों को वर्तमान में क्वारंटीन किया गया है, क्योंकि उन्हें येलो फीवर का टीका नहीं लगा हुआ था। सभी यात्रियों को 7 दिनों के बाद लक्षण रहित पाए जाने पर उनके घर भेज दिया जाएगा।

इन यात्रियों को हवाई अड्डे के स्वास्थ्य अधिकारियों (एपीएचओ) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की देखभाल में संचालित क्वारंटीन सेंटर्स में मुफ्त भोजन के अलावा किराये से मुक्त आवास सुविधा प्रदान की जा रही है। ये केंद्र एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत राज्यों के विभिन्न अस्पतालों के साथ-साथ दिल्ली में केंद्र सरकार के अस्पतालों जैसे सफदरजंग चिकित्सालय में स्थापित किये गए हैं। इसके अतिरिक्त, नजफगढ़ के आरएचटीसी (100 बेड); महरौली के एनआईटीआर,(40 बेड) और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (60 बेड) में भी क्वारंटीन करने की व्यवस्था की गई है।

सूडान से भारत आने वाले यात्रियों का पहला जत्था 360 यात्रियों के साथ दिल्ली पहुंचा था, जिनमें से किसी भी यात्री को क्वारंटीन की आवश्यकता नहीं थी। इसके बाद 26 अप्रैल को दूसरी उड़ान भारत आई थी, जो 240 यात्रियों को लेकर मुंबई पहुंची, इनमें से 14 लोगों को क्वारंटीन किया गया था, जबकि दो लोगों को उनके टीकाकरण प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद घर भेज दिया गया था। शेष 12 लोग आज शाम तक अपनी क्वारंटीन अवधि पूरी कर लेंगे (क्योंकि वे जेद्दा में भी 4 दिनों के लिए रुके हुए थे)। तीसरी फ्लाइट कल दोपहर बेंगलुरु पहुंची थी, जिसमें 360 यात्री सवार थे और फिर वहां 47 यात्रियों को शुरू में क्वारंटीन किया गया था। 3 व्यक्तियों को आज टीकाकरण के सत्यापन के बाद वापस जाने दिया गया। पांच अन्य यात्रियों के सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। सूडान से चौथी उड़ान कल शाम 231 यात्रियों को लेकर दिल्ली पहुंची, जिनमें से 61 को क्वारंटीन किया गया था (एक मुसाफिर को बाद में घर भेज दिया गया)। 35 यात्री दिल्ली एपीएचओ में और 26 लोग सफदरजंग अस्पताल में क्वारंटीन किये गए हैं। पांचवीं उड़ान के 367 यात्रियों के साथ आज रात दिल्ली पहुंचने की संभावना है और 320 लोगों के साथ एक अतिरिक्त उड़ान के कल सुबह 10:30 बजे बेंगलुरु आने की उम्मीद है।

क्वारंटीन किए गए व्यक्तियों की संख्या घटती-बढ़ती या परिवर्तित होती रहेगी, क्योंकि यह यात्रियों की पासपोर्ट संख्या (ओं) के सत्यापन की स्थिति पर निर्भर करती है।

‘ऑपरेशन कावेरी’ सूडान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक निकासी अभियान है। ऑपरेशन कावेरी को संकटग्रस्त सूडान में त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए 24 अप्रैल, 2023 को शुरू किया गया था। भारतीयों नागरिकों की सूडान से सुरक्षित निकासी हेतु उचित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय वायु सेना और सूडान स्थित भारतीय दूतावास सहित अन्य अधिकारियों की एक टीम नियुक्त की गई है। इस दौरान, भारतीयों नागरिकों को सूडान के अलग-अलग हिस्सों से राजधानी खार्तूम ले जाया जा रहा है, जहां से उन्हें वापस भारत पहुंचाया जाएगा।

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इंपीरियल कॉलेज लंदन ने कॉलेज में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए 400,000 ब्रिटिश पौंड की छात्रवृत्ति की घोषणा की

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ब्रिटेन में इंपीरियल कॉलेज लंदन का दौरा किया और कॉलेज में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के साथ बातचीत की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई युवा-केंद्रित नीतियों की श्रृंखला के कारण यह समय भारत के युवाओं और छात्रों के लिए सर्वोत्तम है।

इंपीरियल कॉलेज लंदन में डॉ. जितेंद्र सिंह की यात्रा के अवसर पर कॉलेज प्रबंधन ने कॉलेज में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए 400,000 ब्रिटिश पौंड की छात्रवृत्ति की घोषणा की। इसमें से 50 प्रतिशत छात्रवृत्ति भारत की छात्राओं को दी जाएगी।

इस अवसर पर उपस्थित समुदाय को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वे यूरोप के सर्वाधिक प्रगतिशील विश्वविद्यालयों में से एक प्रमुख विश्वविद्यालय में आकर बहुत प्रसन्न हैं। इस विश्वविद्यालय ने विश्व को होनहारों के अतिरिक्त पेनिसिलिन, होलोग्राफी और फाइबर ऑप्टिक्स दिए हैं।

इंपीरियल कॉलेज लंदन, इंग्लैंड में एक सार्वजनिक अनुसंधान विश्वविद्यालय है। यह कॉलेज ब्रिटेन में अनुसंधान, पर्यावरण अनुसंधान और रसेल समूह विश्वविद्यालयों में अनुसंधान प्रभाव के लिए प्रथम श्रेणी में गिना जाता है। यह एमएस और पार्किंसंस का ऊतक बैंक, ‘कई स्क्लेरोसिस, पार्किंसंस रोग और संबंधित स्थितियों वाले व्यक्तियों द्वारा दान किए गए केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ऊतकों के नमूनों’ का संग्रह भी है। यह ब्रिटेन के सबसे बड़े ब्रेन बैंक के संग्रह का हिस्सा है। यहां दुनिया भर के 100 से अधिक विभिन्न संस्थानों में अनुसंधान परियोजनाओं में उपयोग किए जा रहे अंगों के नमूनों के साथ लगभग 1,650 नमूने -80ºC पर संग्रहीत किए जाते हैं।

पिछले पांच वर्षों में इंपीरियल के विद्यार्थियों ने 300 से अधिक भारतीय संस्थानों में भागीदारों के साथ 1,200 से अधिक शोध प्रकाशनों में लेखन में साझेदारी की है। अनुसंधान भागीदारों में भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च) शामिल हैं। कॉलेज में वर्तमान में 700 भारतीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और भारत में इंपीरियल कॉलेज से शिक्षा पाने वाले 3,000 से अधिक पूर्व छात्रों का एक समुदाय है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जीवंत माहौल में लगभग एक घंटा छात्रों से बातचीत की और उन्होंने कहा कि यह भारत में युवाओं के लिए सर्वोत्तम समय है, क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 9 वर्षों में कई बाधाओं को दूर किया है और कई बोझिल नियमों को हटाया है तथा एक सक्षम वातावरण बनाया गया है, जहां युवा अपनी आकांक्षाओं को अनुभव कर सकते हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी प्रतिभागियों के लिए खोला गया है। अब अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सैकड़ों स्टार्टअप हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप आंदोलन को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से बढ़ावा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप यह आंकड़ा 100 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ 350 से बढ़कर 90,000 से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि जिस बायोटेक क्षेत्र को पहले उपेक्षा की जाती थी, वर्तमान सरकार ने उस पर विशेष ध्यान दिया है और कोरोना वैक्सीन की सफलता की कहानी के बाद छात्र इसमें रुचि दिखा रहे हैं। 2014 में 50 स्टार्टअप थे, अब देश में लगभग 6000 बायो स्टार्टअप हैं।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इंपीरियल कॉलेज लंदन आपके जीवन के लिए आपका अल्मा मेटर बनने जा रहा है। यहां से प्राप्त ज्ञान आजीवन आपके साथ रहेगा, जब आप लौटें तो यहां से प्राप्त ज्ञान और सीख को समर्पित करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि भारत तीसरे सबसे बड़े वैश्विक स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के रूप में उभरा है और यह  12-15 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बार-बार भारतीय छात्रों से अगले 25 वर्षों के लिए तैयारी करने का आह्वान किया है, क्योंकि स्वतंत्र भारत अब 100वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा अन्य क्षेत्रों में रुचि रखने वाले छात्रों की वापसी और भविष्य में अनुसंधान के क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले इच्छुक छात्रों के लिए देश में नए अवसर सृजित किए गए हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ब्रिटेन की 6 दिवसीय यात्रा पर हैं। वे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक उच्च स्तरीय आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंदन विज्ञान संग्रहालय का दौरा किया और सफल कोविड वैक्‍सीन पहल में भारत के अनुभव को साझा किया

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान, राज्‍य मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज 175 साल पुराने लंदन विज्ञान संग्रहालय का दौरा किया और भारत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा इसी तरह के विज्ञान संग्रहालयों की स्थापना की पहल का अनुभव साझा किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन संग्रहालयों को स्थापित करने का विचार आम नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं को उनकी छिपी क्षमताओं का पता लगाने में मदद करना और कभी-कभी उनके अंतर्निहित कौशल की खोज करना भी है, जिसका आभास उन्‍हें स्‍वयं भी नहीं होता। यह संग्रहालय जिज्ञासा के भाव को बढ़ाते हैं, इससे उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक नवाचार में मदद मिलती है। विज्ञान संग्रहालय लंदन में दक्षिण केंसिंग्टन प्रदर्शनी रोड पर स्थित है। इसकी स्थापना 1857 में हुई थी।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह का यह दौरा मुख्य रूप से ऊर्जा क्रांति, टीके और अंतरिक्ष गैलरी से संबंधित क्षेत्रों पर केंद्रित था। इस दौरान संग्रहालय का प्रबंधन भारत की कोविड सफलता की कहानी से बहुत प्रभावित था।

डॉ. सिंह को कोविड महामारी के इतिहास को दर्शाने के लिए बनाया गया विशेष पवेलियन दिखाया गया। यहां पर कोविड का टीका लगवाने के लिए आए पहले व्यक्ति से जागरूकता अभियान की यात्रा को क्रमानुसार दिखाया गया है। कोविड प्रबंधन और रोकथाम में भारत की अग्रणी भूमिका को पवेलियन में विशेष स्‍थान दिया गया है।

उन्‍होंने एक अन्‍य मंडप भी देखा जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए विशेष रूप से समर्पित पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को हिन्‍दी भाषा में लिखे गए बैनरों के साथ दर्शाया गया था। भारत के नेतृत्‍व में चलाये गये पोलियो उन्‍मूलन अभियान ने स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के क्षेत्र में विशिष्‍ठ रोल मॉडल का स्‍थान अर्जित किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख जैव-अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है पिछले कुछ वर्षों में यह नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र कई गुना बढ़ गया है। उन्‍होंने बताया कि भारत ने केवल दो वर्षों में चार स्वदेशी टीके विकसित किए हैं।

उन्‍होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने “मिशन कोविड सुरक्षा” के माध्यम से चार टीके वितरित किए हैं, कोवैक्सीन के निर्माण में तेजी आई है और भविष्य के टीकों के सुचारू विकास के लिए आवश्यक मूलभूत ढांचा तैयार किया है।  हमारा देश महामारी का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया अब निवारक स्वास्थ्य सेवा में भारत की उत्कृष्ट क्षमताओं से अवगत हो रही है और अब हम इस श्रृंखला में कई अन्‍य टीकों को विकसित करने की प्रक्रिया की विकास यात्रा में है। हाल ही में पहली डीएनए वैक्सीन के बाद, पहली नेज़ल वैक्‍सीन (नाक से दी जाने वाली वैक्‍सीन) का भी सफलतापूर्वक निर्माण किया गया है। देश में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) से संबंधित एक अन्य टीका भी विकसित किया गया है, जिससे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में मदद मिली है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि भारतीय वैक्सीन बाजार ने वैश्विक स्तर पर अपना विशिष्‍ट स्‍थान बनाया है। भारत का वैक्‍सीन बाजार के 2025 तक 252 बिलियन रुपये के मूल्‍यांकन तक पहुंचने की उम्‍मीद है। डॉ. सिंह ने ब्रिटेन के साथ बायोटेक स्टार्टअप और वैक्सीन विकास के क्षेत्र में सहयोग का आह्वान किया।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ब्रिटेन की 6 दिवसीय यात्रा पर हैं और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक उच्च स्तरीय आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

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भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को साकार करने के लिए एक मजबूत, स्थायी, निर्णायक और पारदर्शी सरकार अहम हैः नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मुंबई में इंडियन मर्चेंट चैम्बर (आईएमसी) द्वारा आयोजित ‘इंडिया कॉलिंग कॉन्फ्रेंस 2023’ के दौरान पीएम गति शक्ति पर हुए एक सत्र में एक भाषण दिया। श्री गडकरी ने ‘ब्रांड-इंडिया’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल ‘इंडिया कॉलिंग कॉन्फ्रेंस’ आयोजित करने के लिए आईएमसी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि 2025 तक भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के हमारे माननीय प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए एक मजबूत, स्थिर, निर्णायक और पारदर्शी सरकार अहम है।

पीएम गति शक्ति परियोजना के बारे में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा, “पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान (एनएमपी) एक बहुत बड़ी पहल है और इससे हमें लॉजिस्टिक की लागत को कम करने में मदद मिलेगी। अमेरिका जैसी अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सकल घरेलू उत्पाद के 8 से 9 प्रतिशत की तुलना में भारत में लॉजिस्टिक लागत जीडीपी की 13 से 14 प्रतिशत के स्तर तक है, जो काफी ज्यादा है। ऊंची लॉजिस्टिक लागत वैश्विक बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है। लॉजिस्टिक की लागत को जीडीपी के 9 प्रतिशत तक कम करना सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है।”

राजमार्ग नेटवर्क में सुधार की योजनाओं के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनएचएआई राजमार्गों से सटे 600 से ज्यादा स्थानों पर विश्व स्तरीय वेसाइड एमेनिटीज (डब्ल्यूएसए) यानी सड़क किनारे की सुविधाएं विकसित कर रहा है। अच्छे शौचालय, पार्किंग और रेस्तरां जैसी बुनियादी सुविधाओं के अलावा, इन वे साइड एमेनिटीज में ट्रक ड्राइवरों के लिए शयनगृह, ईवी चार्जिंग सुविधाएं, कन्वेंशन सेंटर, ट्रामा सेंटर और हस्तशिल्प और स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए खुदरा दुकानें भी होंगी। सड़क दुर्घटनाओं और अंग प्रत्यारोपण जैसी आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों से निपटने के लिए कुछ डब्ल्यूएसए में हेलीपैड और ड्रोन लैंडिंग की सुविधाएं भी होंगी।

अपने संबोधन में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग और आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत उस गति से आगे बढ़ रहा है जो पहले कभी नहीं देखी गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने में 60 साल लगे और अब, 2014 के बाद केवल 9 वर्षों में, भारत लगभग साढ़े तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हो गई है।”

श्री सोनोवाल ने कहा कि पीएम गति शक्ति एनएमपी के तहत, पत्तन, पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्रालय ने 2025 तक कार्यान्वयन के लिए 62,227 करोड़ रुपये की 101 परियोजनाओं की पहचान की है। इन 101 परियोजनाओं में से 8,897 करोड़ रुपये की 26 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 15,343 करोड़ रुपये की 42 परियोजनाएं विकास के चरण में है और 36,638 करोड़ रुपये की 33 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। कार्यान्वयन के तहत परियोजनाओं में से, 20,537 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाओं के दिसंबर 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 101 गति शक्ति परियोजनाओं में से 9,867 करोड़ रुपये की 12 परियोजनाएं महाराष्ट्र में कार्यान्वित हो रही हैं, जिनमें से 3,165 करोड़ रुपये की 3 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं। 675 करोड़ रुपये की 2 परियोजनाएं विकास के चरण में हैं, वहीं बाकी 6,027 करोड़ रुपये की 7 परियोजनाएं कार्यान्वयन के दौर में हैं और इनके 2025 तक पूरी होने का अनुमान है।

सागरमाला परियोजना के तहत प्रगति के बारे में विस्तार से बताते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत 2035 तक 5.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 802 परियोजनाएं कार्यान्वित होनी हैं। 1,21,545 करोड़ रुपये की 228 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं और 2.36 लाख करोड़ रुपये की 260 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। महाराष्ट्र राज्य में, सागरमाला कार्यक्रम के तहत 1,13,285 करोड़ रुपये की 126 परियोजनाएं हैं। 126 परियोजनाओं में से 16,393 करोड़ रुपये की 39 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 18,146 करोड़ रुपये की 42 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। 78,746 करोड़ रुपये की 45 परियोजनाएं विकास के चरण में हैं। हरित पहलों के बारे में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत 2035 तक सभी बड़े बंदरगाहों में ग्रीन हाइड्रोजन/ अमोनिया बंर और रिफ्यूलिंग की सुविधाएं स्थापित की जानी हैं। दीनदयाल, पारादीप और वी ओ चिदम्बरानार बंदरगाहों पर हाइड्रोजन बंकरिंग की स्थापना के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है।

इस अवसर पर रेलवे और कपड़ा राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने कहा कि आईएमसी की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वदेशी आंदोलन में योगदान देने की समृद्ध विरासत रही है। उन्होंने कहा कि रेल क्षेत्र में ऐसी कई परियोजनाएं हैं जहां निवेश के अवसर हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया, “कई घरेलू और विदेशी निवेशक रेल परियोजनाओं में निवेश करना चाह रहे हैं। रेल क्षेत्र में स्वचालित रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। सरकार की 2030 तक रेल बुनियादी ढांचे में 715 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना है।”

इससे पहले, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि परिचालन तैयारियों को बनाए रखने के लिए भारत मुख्य रूप से रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भर है और हमारे सामरिक लक्ष्यों के लिए आत्म निर्भरता और आयात पर निर्भरता को कम करना काफी अहम है। वे ‘रक्षा विनिर्माण में अवसर’ विषय पर आयोजित सत्र में बोल रहे थे।

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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कार्यक्रम के दौरान द्वारा 24 अप्रैल 2023 को संयुक्त प्रगति (समावेशी विकास) अभियान का शुभारंभ करेंगे

प्रधानमंत्री मोदी आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में संयुक्त प्रगति (समावेशी विकास) की विषय-वस्तु के तहत मध्य प्रदेश के रीवा में 24 अप्रैल 2023 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के दौरान इन नौ अभियानों का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री उसी दिन एक वेबसाइट और मोबाइल ऐप “समावेशी विकास” को भी लॉन्च करेंगे।

भारत अगस्त, 2023 तक आजादी का अमृत महोत्सव (एकेएएम) मना रहा है। इस अवसर को उत्साहपूर्वक मनाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न विषयों पर आधारित कई कार्यक्रम/अभियान आयोजित किए जा रहे हैं, इस पहल में राज्य सरकारों और आम जनता का सहयोग भी लिया जा रहा है। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत एक मूल विषय संयुक्त प्रगति (समावेशी विकास) रखा गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) इस पहल के लिए अग्रणी मंत्रालय की भूमिका निभा रहा है, जिसमें भारत सरकार के चार अन्य सहायक मंत्रालयों/विभागों की भी सहायता ली जा रही है। इस विषय के तहत नौ अभियानों में से पांच ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन हैं, (i) प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत समग्र आवास, (ii) जिला स्तर पर वित्तीय साक्षरता, (iii) ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना और (iv) स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) नेटवर्क में पात्र ग्रामीण महिलाओं का सामाजिक जुड़ाव, (v) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत नदी के किनारों पर वृक्षारोपण अभियान।

इनके अलावा, सहयोगी मंत्रालयों/विभागों द्वारा चार अन्य अभियानों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं (i) स्वस्थ महिला-समृद्ध समाज (एसएमएसएस)- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, (ii) आकांक्षी जिलों में पशुधन जागृति अभियान गहन जागरूकता अभियान-पशुपालन एवं डेयरी विभाग, (iii) सवामित्व, मेरी संपत्ति, मेरा हक- पंचायती राज मंत्रालय तथा (iv) प्राकृतिक खेती के साथ स्वयं सहायता समूह महिला अभियान – कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय।

संयुक्त प्रगति विषयवस्तु के तहत, स्वीकृत अभियानों का चयन उन्नत प्रभाव मूल्य और उच्च जन-भागीदारी क्षमता पर केंद्रित है। इन अभियानों को “पूरे सामाजिक दृष्टिकोण” के साथ तैयार किया गया है, जिससे अभियानों के लाभार्थियों तक शत प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित हो जाती है। पूरे अभियान को “समावेशी विकास” कहा गया है, जो अपनी बुनियाद को “अभिसरण” और “अंतिम छोर तक पहुंचने” की अवधारणा में निहित करता है, इसका लक्ष्य सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों, जिलों तथा ग्राम पंचायतों के माध्यम से योजनाबद्ध कार्यक्रम आयोजित करना है, जिसमें चयनित अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। कार्यक्रम में शामिल हो रहे सभी मंत्रालयों/विभागों द्वारा रोजगार सृजन, स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका सृजन के क्षेत्र में प्रयास किये जा रहे हैं।

इन अभियानों की प्रगति को देखने और इनकी निगरानी करने की दृष्टि से https://akam-samveshivikaas.nic.in नाम से एक वेबसाइट तैयार की गई है, जिसे प्रधानमंत्री द्वारा 24 अप्रैल, 2023 को मध्य प्रदेश के रीवा में एक समारोह में पंचायती राज दिवस के दिन राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च करने का प्रस्ताव किया गया है। यह जीवंत और सक्रिय वेबसाइट समग्री विकास अभियानों के तहत विभिन्न गतिविधियों की वास्तविक समय पर उनकी स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करेगी और प्रमुख प्रदर्शन संकेतक, आयोजनों का कैलेंडर, कार्यक्रम से संबंधित तस्वीरें एवं वीडियो, अखबार की कतरनें तथा जनता की राय को भी संदर्भ में इस्तेमाल करेगी। वेबसाइट तकनीकी उपकरणों के माध्यम से विभाग को रिपोर्ट तैयार करने और अभियानों की प्रगति का आकलन तथा निगरानी करने में सक्षम बनाएगी।

जनभागीदारी और लोक सहभागिता के दस्तावेज़ीकरण को सुनिश्चित करने के लिए “समावेशी विकास” नामक एक सरल तथा उपयोगकर्ता के अनुकूल मोबाइल ऐप तैयार किया गया है। इसके माध्यम से, आम जनता इन अभियानों पर तस्वीरों के साथ इन अभियानों के प्रभाव एवं लाभों के बारे में अपने अनुभव व राय/फीडबैक साझा कर सकती है।

अलग-अलग अभियानों के बारे में संक्षिप्त सी जानकारी:

(1) प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजनाग्रामीण के तहत समग्र आवासअभिसरण: इस अभियान में, पहले से स्वीकृत 2.50 करोड़ से अधिक के अतिरिक्त भी 45 लाख प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना-ग्रामीण घरों की मंजूरी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही बिजली, एलपीजी, पानी प्रदान करने वाली योजनाओं के साथ कार्यक्रम के तहत प्रदान किए जा रहे लाभों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सभी प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना-ग्रामीण घरों में नल से जल का कनेक्शन और शौचालय उपलब्ध होगा। यह अभियान अप्रैल, 2023 में शुरू हो रहा है और अगस्त, 2023 तक जारी रहेगा।

(2) जिला स्तर पर वित्तीय साक्षरता: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वित्तीय जागरूकता उत्पन्न करना है और विभिन्न बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच बढ़ाना है। यह अभियान 500 जिलों में चलाया जाएगा और 2 करोड़ स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण देने तथा जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। ग्राम-स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 2.5 करोड़ स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और 3 करोड़ प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत नामांकित किया जाएगा। इस अभियान की अवधि के दौरान, वित्तीय जागरूकता, सेवा वितरण एवं बुनियादी शिकायतों के निवारण के उद्देश्य से एक ही स्थान पर समाधान उपलब्ध कराने के लिए राज्यों में 750 सक्षम केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह अभियान 11 जनवरी, 2023 से शुरू हो चुका है और अगस्त, 2023 तक जारी रहेगा।

(3) ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों और उनके परिवारों के बीच लेनदेन के विभिन्न डिजिटल तरीकों के बारे में जागरूकता पैदा करना तथा उनकी पहुंच का विस्तार करना है। 3 करोड़ लेनदेन के साथ 50,000 ग्राम पंचायतों में जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा और 20,000 स्वयं सहायता समूह सदस्यों को व्यवसाय प्रतिनिधि सखी / डिजीपे सखी / पेपॉइंट के रूप में सेवा देने लिए लगाया जाएगा। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। यह अभियान 1 फरवरी, 2023 से शुरू हुआ और अगस्त, 2023 तक जारी रहेगा।

(4) स्वयं सहायता समूह नेटवर्क में पात्र ग्रामीण महिलाओं का सामाजिक जुड़ाव: इस अभियान का उद्देश्य पात्र ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूह नेटवर्क में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। पात्र स्वयं सहायता समूह को वीओ (ग्राम संगठनों) में जोड़ना, पात्र ग्राम संगठनों को क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) में लाना और पात्र स्वयं सहायता समूह को पूंजी का सहयोग उपलब्ध कराना इसका एक लक्ष्य है। इस अभियान का मकसद वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक कुल 10 करोड़ ग्रामीण परिवारों को जोड़ना है। इसका उद्देश्य सभी कमजोर एवं सीमांत ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूह के अंतर्गत लाना और सरकार की इस पहल के माध्यम से प्रदान किए गए लाभों को आकर्षित कराना है। उम्मीद है कि इस अवधि के दौरान 20 लाख छूटे हुए परिवारों को इससे जोड़ा जाएगा और 60,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह तैयार किये जाएंगे।

(5) नदी तटों पर वृक्षारोपण अभियान: इस अभियान के तहत नदी तटों पर महात्मा गांधी नरेगा कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। इसकी कार्य अवधि के दौरान, नदी के किनारों पर लगभग 20,000 किलोमीटर के दायरे में करीब 4 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। अभियान 1 मार्च, 2023 को शुरू हुआ था और अगस्त, 2023 तक जारी रहेगा।

(6) स्वस्थ महिला समृद्ध समाज: इस अभियान का नेतृत्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएएंडएफडब्ल्यू) कर रहा है, जो ‘बेहतर स्वास्थ्य’ को एक जन आंदोलन बनाने के लिए गांवों में महिला स्वयं सहायता समूह के बीच क्रेडिट-प्लस गतिविधि के रूप में स्वास्थ्य को बढ़ावा दे रहा है और यह महिलाओं में कैंसर की रोकथाम तथा नियंत्रण पर जोर देने के उद्देश्य से- स्तन कैंसर एवं सर्वाइकल कैंसर की जांच पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। अभियान की अवधि के दौरान, देश भर में कार्यान्वित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र पर पीआरआई/एनआरएलएम इकाइयों द्वारा 10 लाख कैंसर जांच/जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। यह भी उम्मीद है कि 2.5 करोड़ महिलाओं की स्तन कैंसर तथा सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की जाएगी (25 सर्वाइकल कैंसर के लिए व 25 स्तन कैंसर के लिए प्रति शिविर * 10 लाख कैंप) और आयुष्मान भारत – स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में महिलाओं की देखभाल में अभियान अवधि के अंत तक कुल आठ करोड़ लोगों की उपस्थिति दर्ज होगी। यह अभियान 14 जनवरी, 2023 को शुरू हुआ और अगस्त, 2023 तक जारी रहेगा।

(7स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ प्राकृतिक खेती: इस अभियान का नेतृत्व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएंडएफडब्ल्यू) कर रहा है। इस अभियान में मिट्टी के स्वास्थ्य की बहाली सुनिश्चित करना, जिसमें जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए वायुमंडलीय कार्बन पर नियंत्रण, खेत तथा स्थानीय इकोसिस्टम के स्तर पर जैव विविधता के नुकसान को कम करना और दुर्लभ कृषि संसाधनों को बनाए रखना / पुनर्चक्रण करना शामिल है। अभियान अवधि के दौरान, कम से कम 10 महिला किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन / सहायता देना (एक एफपीओ में न्यूनतम दस की सदस्यता है, जो सदस्यों की उपलब्धता के आधार पर 2000 तक जा सकती है) और साथ ही राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय महत्वपूर्ण दिवसों पर विशेष अभियान आयोजित करना सुनिश्चित किया जायेगा। लगभग 440 (प्रगतिशील महिला किसानों/एफपीओ/आरसी/एसएचजी के सदस्यों तथा एनआरएलएम/एसआरएलएम/महिला कृषि-उद्यमियों की कृषि सखियों) को शामिल करते हुए एक जागरूकता अभियान पहले ही आयोजित किया जा चुका है। यह अभियान 11 फरवरी 2023 से शुरू हुआ और अगस्त, 2023 तक जारी रहेगा।

(8) पशुधन जागृति अभियान– आकांक्षी जिलों में गहन जागरूकता: इस अभियान का नेतृत्व पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीओएएचएंडडी) द्वारा किया जा रहा है। इस अभियान में उद्यमिता तथा विभाग की अन्य योजनाओं, रोग के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं पशु स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करने वाले आकांक्षी जिलों में लगभग 16,000 ग्राम-स्तरीय शिविरों का आयोजन करके देश भर के 112 सबसे कम विकसित जिलों को प्रभावी ढंग से बदलने का प्रयास किया जाएगा। सभी आकांक्षी जिलों में प्रति जिला दो पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे और प्रत्येक स्वास्थ्य शिविर में 100 किसान भाग लेंगे। वर्चुअल शिविरों को विभाग के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित किया जाएगा और राज्य एएच जिला संस्थान किसानों को पशु स्वास्थ्य शिविरों के लिए जुटाएंगे। इसके अलावा सभी आकांक्षी जिलों में 224 पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिससे लगभग 22,400 किसान लाभान्वित होंगे। अभियान 22 फरवरी, 2023 से शुरू हुआ था और यह अगस्त, 2023 तक जारी रहेगा।

(9) स्वामित्वमेरी संपत्तिमेरा हक: यह अभियान पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) के नेतृत्व में आयोजित हो रहा है। इस अभियान का उद्देश्य स्वामित्व योजना के तहत नवीनतम ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण तकनीक के उपयोग से एक गांव के बसे हुए क्षेत्र (आबादी) में संपत्ति के मालिकों को ‘रिकॉर्ड ऑफ राइट्स’ प्रदान करना है। इसका लक्ष्य अगस्त 2023 तक स्वामित्व योजना के अंतर्गत 1.50 करोड़ “मालिकाना अधिकारों के रिकॉर्ड”/ संपत्ति कार्ड बनाना है। अभियान 18 अप्रैल, 2023 से शुरू हुआ और 30 जून, 2023 तक जारी रहेगा।

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नगर निगम महापौर पद हेतु बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती अर्चना निषाद ने नामांकन कराया

नगर निगम महापौर पद हेतु बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती अर्चना निषाद ने नामांकन कराया।

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अरुणाचल प्रदेश में कल दो सौ चौवन 4जी मोबाइल टावर राष्ट्र को समर्पित किए गए

प्रधानमंत्री मोदी ने 16वें सिविल सेवा दिवस पर अपने संबोधन में कहा था कि हम भारत में सुदूर सीमावर्ती गांवों को देश के पहले गांव मानते हैं, आखिरी नहीं और हमें शत प्रतिशत परिपूर्णता प्राप्त करने के लिए ईमानदारी से प्रयास करने तथा नवीन संसाधनों की आवश्यकता होगी।

भारत सरकार ने इन्हीं प्रयासों के हिस्से के रूप में 2,675 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ अरुणाचल प्रदेश में 3,721 से अधिक गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान करने के उद्देश्य से 2,605, 4जी मोबाइल टावरों को स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की है।

ये 254, 4जी मोबाइल टावर 22 अप्रैल, 2023 को संचार, रेलवे तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा राष्ट्र को समर्पित किए जाएंगे। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री  किरेन रिजिजू; संचार राज्य मंत्री श्री देवू सिंह चौहान और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू तथा केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उनके साथ उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन समारोह राजधानी ईटानगर में राज्य विधान सभा परिसर में आयोजित किया जाएगा।

ये टावर बेहतरीन कनेक्टिविटी से अब तक वंचित रहे गांवों में 4जी सेवाएं प्रदान करेंगे, जिससे अरुणाचल के 336 गांवों को डिजिटल कनेक्टिविटी आसानी से मिलेगी। इन गांवों में कई ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जो आजादी के बाद से अब तक बिना कनेक्टिविटी के रहे हैं। उम्मीद है कि इस पहल से 70,000 से अधिक ग्राहक लाभान्वित होंगे और अपेक्षित डाटा उपयोग हर महीने 40 टीबी को पार कर सकता है।

विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश के लिए हाई-स्पीड नेटवर्क कनेक्टिविटी तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है, जैसे कि ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विस्तृत दूरसंचार विकास योजना (सीटीडीपी-एनईआर), ‘अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज के बिना डाटा कनेक्टिविटी वाले गांवों और असम के 2 जिलों में मोबाइल सेवाओं का प्रावधान’ तथा 4जी परिपूर्णता परियोजना।

भारत, देश भर में डिजिटल और मोबाइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और देश के अंतिम छोर तक डिजिटल क्रांति तथा मोबाइल एवं डिजिटल सेवाओं के तेजी से प्रसार के माध्यम से आम नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान 5.0 का शुभारंभ किया

बोली प्रक्रिया के चार सफल दौर के बाद, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश के दूर-दराज और क्षेत्रीय इलाकों में कनेक्टिविटी को और बढ़ाने तथा अंतिम स्थल तक हवाई-संपर्क का लक्ष्य हासिल करने के लिए क्षेत्रीय हवाई-संपर्क योजना (आरसीएस) – उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) के 5वें चरण की शुरुआत की है।

उड़ान 5.0 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • उड़ान का यह चरण, श्रेणी-2 (20-80 सीटों) और श्रेणी-3 (>80 सीटों) पर केंद्रित है।
  • पहले चरण की 600 किमी की सीमा को समाप्त कर दिया गया है और उड़ान के मूल और गंतव्य के बीच की दूरी के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है।
  • प्रदान की जाने वाली व्यावहारिक अंतर वित्तीय सहायता (वायबिलिटी गैप फंडिंग -वीजीएफ) को प्राथमिकता और गैर-प्राथमिकता वाले दोनों क्षेत्रों के लिए ऊपरी सीमा 600 किमी की दूरी पर निर्धारित की जायेगी, जबकि पहले ऊपरी सीमा 500 किमी थी।
  • कोई पूर्व निर्धारित रूट पेश नहीं किया जाएगा। केवल एयरलाइंस द्वारा प्रस्तावित नेटवर्क और व्यक्तिगत रूट के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
  • एयरलाइनों को एलओए जारी होने के 2 महीने बाद एक कार्य/व्यवसाय योजना प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें वे तकनीकी प्रस्ताव के समय अपनी विमान अधिग्रहण योजना/विमान की उपलब्धता, चालक दल, स्लॉट आदि प्रस्तुत करेंगे।
  • एक रूट, एक एयरलाइन को एक से अधिक बार नहीं दिया जाएगा, चाहे वह अलग-अलग नेटवर्क में हो या एक ही नेटवर्क में।
  • एक रूट पर एकाधिकार को रोकने के लिए, यदि चार लगातार तिमाहियों में औसत तिमाही पीएलएफ 75% से अधिक है, तो विशिष्टता वापस ले ली जाएगी।
  • त्वरित संचालन को और प्रोत्साहित करने के लिए 4 महीने तक की देरी होने पर, प्रत्येक महीने के लिए प्रदर्शन गारंटी का 25% भुना लिया जाएगा।
  • एयरलाइंस को रूट दिए जाने के 4 महीने के भीतर परिचालन शुरू करना होगा। पहले यह समय सीमा 6 महीने थी।
  • हवाई अड्डों की एक सूची – जो संचालन के लिए तैयार हैं, या जल्द ही संचालन के लिए तैयार होंगे – को योजना में शामिल किया गया है, ताकि योजना के तहत मार्गों के त्वरित संचालन को सुविधाजनक बनाया जा सके।
  • एक ऑपरेटर द्वारा रूट को दूसरे ऑपरेटर को दिए जाने से जुड़ी नवीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और इसे प्रोत्साहित किया गया है।

उड़ान 5.0 के लॉन्च के अवसर पर नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “उड़ान कई क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है, जो अब देश भर के स्थानों से अच्छी तरह से जुड़ गई हैं। योजना का यह नया और मजबूत संस्करण गति को बढ़ाएगा, नए मार्गों को जोड़ेगा और हमें निकट भविष्य में 1000 मार्गों तथा 50 अतिरिक्त हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और जल हवाई अड्डों के संचालन के लक्ष्य के करीब लाएगा। अब उड़ेगा देश का हर आम नागरिक!”

उड़ान योजना ने हितधारकों के एक विविध समूह को लाभान्वित किया है। यात्रियों को हवाई संपर्क का लाभ मिला है, एयरलाइनों को क्षेत्रीय मार्गों के संचालन के लिए रियायतें मिली हैं, हवाई संपर्क से जुड़े नए क्षेत्रों को उनके आर्थिक विकास के लिए हवाई संपर्क का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिला है। किफायती और रियायती हवाई किराए पर आम आदमी हवाई यात्रा करे– इस बात से जुड़े प्रधानमंत्री के विजन की दिशा में यह एक और कदम है।

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सेल-बीएसएल ने टेलीकम्युकेशंस कंसल्टैंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) के साथ समझौता ज्ञापन किया

सेल-बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने सेल की झारखंड स्थित खानों और कोयला खदानों, सेंट्रल कोल सप्लाई ऑर्गनाइजेशन और सेल रिफ्रैक्टरी यूनिट सहित सेल-बोकारो स्टील प्लांट में 5जी/ आईटी/ दूरसंचार और अन्य वायरलेस संचार प्रौद्योगिकियों के उपयोग की संभावनाओं को खोजने के लिए टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टैंट्स इंडिया लि. (टीसीआईएल) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। सेल के बोकारो स्टील प्लांट में 21 अप्रैल, 2023 को इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। सेल-बीएसएल की ओर से कार्यकारी निदेशक (वर्क्स) बी. के. तिवारी और टीसीआईएल की ओर से कार्यकारी निदेशक (आईटी और दूरसंचार) सुश्री अलका सेलोट अस्थाना ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

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सेल-बीएसएल ने टीसीआईएल की मदद से एक समर्पित 5जी नेटवर्क स्थापित करने की पहल करने वाला देश का पहला पीएसयू बनने की दिशा में कदम उठाया है, जिससे इस्पात निर्माण में 5जी/ आईटी/ दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। इस्पात संयंत्र के अलावा, यह साझेदारी झारखंड में सेल खानों और कोयला खदानों, स्मार्ट शहरों आदि में नवीन समाधान प्रदान करने में भी उपयोगी साबित होगी। कार्यकारी निदेशक (आईटी और दूरसंचार) सुश्री अलका सेलोट ने कहा कि टीसीआईएल के पास सेल-बीएसएल के लिए 5जी/ आईटी/ दूरसंचार प्रौद्योगिकियों को प्रसारित करने, परीक्षण, स्थापना और रखरखाव के लिए टर्नकी समाधान प्रदान करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, अनुभव और संसाधन हैं।

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