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भारतीय रेलवे ने 2025 में त्योहारों और यात्राओं के दौरान सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 43,000 से अधिक विशेष ट्रेन यात्राएं संचालित कीं

भारतीय रेलवे ने प्रमुख धार्मिक आयोजनों और यात्राओं के पीक सीजन के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन सेवाएँ संचालित कर यात्रियों की सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए। ये पहल बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने और देशभर में निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराने के प्रति रेलवे की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया, जो बेहतर योजना और यात्रियों की सुविधा पर पहले से अधिक मजबूत फोकस को रेखांकित करता है।

वर्ष 2025 के दौरान भारतीय रेलवे ने महा कुंभ के लिए अपने सबसे बड़े विशेष ट्रेन अभियानों में से एक का संचालन किया। 13 जनवरी से 28 फरवरी 2025 के बीच तीर्थयात्रियों की अत्यधिक संख्या की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 17,340 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं। इसी तरह, होली 2025 के अवसर पर 1 मार्च से 22 मार्च 2025 के बीच 1,144 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं, जो होली 2024 की तुलना में लगभग दोगुनी थीं। इससे यात्रियों को बेहतर उपलब्धता मिली और त्योहार के दौरान यात्रा अधिक सहज और सुव्यवस्थित रही।

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समर ट्रैवल सीज़न, 2025 यानि गर्मी की छुट्टियों के दौरान, जो 1 अप्रैल से 30 जून तक रहा, यात्रियों की बढ़ी हुई आवाजाही को ध्यान में रखते हुए 12,417 समर स्पेशल ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया, जिससे छुट्टियों के पीक महीनों में भी उच्च स्तर की सेवा बनाए रखी जा सकी। इसके अलावा, छठ पूजा 2025 के लिए विशेष इंतज़ामों को और मज़बूत किया गया। 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2025 के बीच 12,383 विशेष ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

साल 2025 में किए गए ये विस्तारित इंतज़ाम 2024 में तैयार किए गए मज़बूत परिचालन आधार पर आधारित थे। 30 जनवरी से 11 मार्च 2024 के बीच संचालित आस्था स्पेशल सेवाओं के दौरान तीर्थयात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 326 विशेष सर्कुलर ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं थी। इसी तरह, होली 2024 के अवसर पर 12 मार्च से 2 अप्रैल 2024 के बीच त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने 604 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया था।

गर्मियों की छुट्टियों 2024 के दौरान 12,919 समर स्पेशल ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं थी। वहीं, छठ पूजा 2024 के लिए 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2024 के बीच 7,990 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया था।

वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा, प्रभावी भीड़ प्रबंधन और अधिक मांग वाले समय में विश्वसनीय तथा सुचारु यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रति लगातार प्रतिबद्ध है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025” प्रदान किया

राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित दूसरे “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार” समारोह में प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित “राष्ट्रीय विज्ञान रत्न पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया। देश की चर्चित “पर्पल रिवोल्यूशन” और लैवेंडर उद्यमिता को गति प्रदान करने वाली उद्यमी विज्ञान टीम सीएसआईआर के नेतृत्व वाले अरोमा मिशन को “राष्ट्रीय विज्ञान टीम पुरस्कार 2025” या विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में विभिन्न क्षेत्रों के 24 वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को पुरस्कार प्रदान किए ।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की स्थापना मोदी सरकार द्वारा की गई थी।

‘X’ पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “विश्व को ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ की अवधारणा से परिचित कराने और ‘लैवेंडर’ को कृषि-उद्यमिता के एक नए मार्ग के रूप में प्रस्तुत करने में आपके योगदान को मान्यता देते हुए, प्रतिष्ठित #राष्ट्रीयविज्ञानपुरस्कार 2025 के लिए ‘टीम अरोमा’ को बधाई… हिमालय के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी आकर्षक आजीविका की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए।”

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत अरोमा मिशन टीम को हिमालयी क्षेत्र में सुगंधित फसलों, विशेष रूप से लैवेंडर की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर प्रयोगशाला अनुसंधान को जमीनी स्तर के परिणामों में परिवर्तित करने का श्रेय दिया जाता है। इसके कार्य ने जम्मू और कश्मीर के किसानों के लिए आजीविका के नए द्वार खोले, आवश्यक तेलों के आयात पर निर्भरता कम की और यह प्रदर्शित किया कि समन्वित वैज्ञानिक हस्तक्षेप किस प्रकार सामाजिक-आर्थिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

इस मान्यता से राष्ट्रीय पुरस्कारों के ढांचे के केंद्र में सहयोगात्मक, अनुप्रयोग-उन्मुख विज्ञान को स्थान मिलता है। जम्मू-कश्मीर के भदेरवाह और गुलमर्ग कस्बों से शुरू हुई लैवेंडर की खेती और उद्यमशीलता अब केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाई जा रही है।

पिछले वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की नई संरचना के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य जीवन भर की उपलब्धियों से लेकर प्रारंभिक करियर की उत्कृष्टता और टीम आधारित नवाचार तक, विज्ञान के सभी क्षेत्रों में किए गए कार्यों को मान्यता देना है। इस वर्ष का समारोह पुरस्कारों का दूसरा संस्करण था। यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एक संरचित, समकालीन प्रारूप में विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मान प्रदान करने के सरकार के इरादे को रेखांकित करता है।

प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए विज्ञान रत्न से सम्मानित किया गया और कई विज्ञान श्री और विज्ञान युवा पुरस्कारों ने भौतिकी, कृषि, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अंतरिक्ष विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यक्तिगत योगदान को मान्यता दी गई। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की पूरी सूची में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ-साथ 45 वर्ष से कम आयु के शोधकर्ता भी शामिल हैं, जो अनुभव और उभरती प्रतिभा दोनों पर पुरस्कार के जोर को दर्शाता है।

विशिष्ट क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती विज्ञान श्री श्रेणी के अंतर्गत डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान), डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा), डॉ. के. थंगराज (जीव विज्ञान), प्रो. प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान), प्रो. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान), डॉ. एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान), प्रो. महान एमजे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान), और श्री जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी) को पुरस्कार प्रदान किए गए। यह विभिन्न विषयों में उनके निरंतर और क्षेत्र-परिभाषित कार्य को उजागर करते हैं।

विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के वैज्ञानिकों के लिए है। यह नवोन्मेषी योगदान देने वाले उभरते शोधकर्ताओं को सम्मानित करता है। पुरस्कार पाने वालों में भौतिकी में प्रो. अमित कुमार अग्रवाल और प्रो. सुरहुद श्रीकांत मोरे; कृषि विज्ञान में डॉ. जगदीश गुप्ता कपुगंती और डॉ. सतेंद्र कुमार मंगरौथिया; जीव विज्ञान में डॉ. दीपा अगाशे और श्री देबरका सेनगुप्ता; रसायन विज्ञान में डॉ. दिब्येंदु दास; भूविज्ञान में डॉ. वलीउर रहमान; इंजीनियरिंग विज्ञान में प्रो. अर्कप्रवा बसु; गणित और कंप्यूटर विज्ञान में प्रो. सब्यसाची मुखर्जी और प्रो. श्वेता प्रेम अग्रवाल; चिकित्सा में डॉ. सुरेश कुमार; अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में श्री अंकुर गर्ग; और प्रौद्योगिकी और नवाचार में प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम शामिल हैं।

इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में महिला वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिका रही। इन्हें कई श्रेणियों और विषयों में मान्यता मिली। डॉ. दीपा अगाशे और प्रोफेसर श्वेता प्रेम अग्रवाल जैसी शोधकर्ताओं को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह देश के वैज्ञानिक परिवेश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यों में देश की वैज्ञानिक प्रतिभा की गहराई और विविधता झलकती है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया है।

राष्ट्रपति और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री की उपस्थिति को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और इसके सार्वजनिक उपयोग को दी जाने वाली राष्ट्रीय प्राथमिकता को सुदृढ़ करने वाला माना गया। पुरस्कारों के ढांचे का उद्देश्य आयु और उपलब्धि मानदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके श्रेणियों, विशेष रूप से युवा वैज्ञानिक वर्ग, में स्पष्टता लाना भी है।

अरोमा मिशन को मिली मान्यता के साथ, समारोह ने रेखाकिंत किया की कैसे सरकार समर्थित वैज्ञानिक कार्यक्रम, जब स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों और टीम वर्क के माध्यम से कार्यान्वित किए जाएं, तो प्रयोगशालाओं और पत्रिकाओं से परे परिणाम दे सकते हैं। भारत अपने विज्ञान-आधारित विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार अनुसंधान उत्कृष्टता को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जमीनी स्तर पर प्रभाव से जोड़ने वाले एक मंच के रूप में तेजी से उभर रहा है।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी)-2025 के लिए पुरस्कार विजेताओं की सूची

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एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन, कानपुर जोन का त्रिवर्षीय चुनाव संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन, कानपुर जोन का त्रिवर्षीय चुनाव (2025–2028) संगठन के संविधान एवं नियमों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस चुनाव में पारस्परिक सौहार्द, एकता एवं सहयोग की भावना के परिणामस्वरूप निम्न सभी प्रत्याशी अपने-अपने पदों पर निर्विरोध निर्वाचित हुए।

अंचल अध्यक्ष~अतुल अग्रवाल~अंचल उपाध्यक्ष~विजय कुमार अवस्थित

अंचल सचिव ~सुरेश कुमार कपूर

सहायक अंचल सचिव~राहुल निगम

सहायक अंचल सचिव(वित्त)~अशोक चतुर्वेदी

कार्यकारिणी सदस्य ~सुरिंदर कुमार सुखीजा, सुरेश मिश्रा।

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कानपुर स्मार्ट सिटी में मोटर वाहन अधिनियम की उड़ रहीं जमकर धज्जियां

स्मार्ट सिटी में कानून का हो रहा खुला उल्लंघन !

स्मार्ट सिटी की सड़कों पर ‘लोहे के अवैध कवच’ पहनकर दौड़ रहे सवारी वाहन

– करोड़ों खर्च कर लगाए गए कैमरों में क्यों नहीं कैद होती है मनमानी?

– चौराहों पर ड्यूटी में लगे यातायात पुलिस के जवान क्यों करते हैं अनदेखी ?

कानपुर। स्मार्ट सिटी कानपुर में सार्वजनिक परिवहन के नाम पर अराजकता का बोलबाला है। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों—कल्याणपुर, रावतपुर, पनकी, विजय नगर, बर्रा, गोविंद नगर, किदवई नगर, बाबूपुरवा, नौबस्ता, रामादेवी, बारादेवी, झकरकटी, फजलगंज, टाटमिल, चुन्नीगंज, जरीब चौकी सहित अधिकतर क्षेत्रों में चलने वाले विक्रम टेम्पो, ऑटो और ई-रिक्शा के मालिकों के मनमाने रवैये ने सड़कों को असुरक्षित बना दिया है। इन वाहनों की बॉडी के चारों ओर अवैध रूप से लगाए गए लोहे के भारी एंगल न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहे हैं।

मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के अनुसार, वाहनों की मूल संरचना (Structure) में इस तरह का बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act) की धारा 52 का स्पष्ट उल्लंघन है।

वहीं वाहन की लंबाई, चौड़ाई या वजन में कोई भी ऐसा बदलाव जो आरसी (Registration Certificate) के विपरीत हो, पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वहीं इन्हीं अवैध एंगलों की वजह से चालक, धारा 184 के तहत ‘खतरनाक ड्राइविंग’ को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि उन्हें अपने वाहन के क्षतिग्रस्त होने का डर नहीं रहता है।

स्मार्ट सिटी में चलने वाले ऑटो-विक्रम, ई रिक्शा चालक, अपने मनमुताबिक, लोहे के जालीदार एंगलों का इस्तेमाल ‘सुरक्षा कवच’ की तरह कर रहे हैं। जिसके कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आए दिन छोटी-मोटी भिड़ंत होती रहती है, जिससे कई बार विवाद पैदा हो जाता है और जाम की स्थिति पैदा होती है।

डिजिटल निगरानी पर सवाल ? आईटीएमएस (ITMS) के तहत लगे कैमरों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर ये ‘मोडिफाइड’ वाहन चालान की जद से बाहर कैसे और क्यों हैं? वहीं यातायात पुलिस के जवानों की नजर इस ओर क्यों नहीं जाती ?

ऐसे में जरूरी है कि संभागीय परिवहन विभाग व यातायात पुलिस, एक साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाये और ऑटो – विक्रम व ई – रिक्शाओं में लगे अवैध एंगलों को मौके पर ही कटवाकर जब्त किया जाए।

~प्रेषक श्याम सिंह पंवार सम्पादक दैनिक जन सामना

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बीएसएनएल ने दिवाली पर एक महीने के लिए मुफ्त मोबाइल सेवाओं का ऑफर दिया

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) भारत की अग्रणी सरकारी दूरसंचार प्रदाता कंपनी है। इसने दिवाली के अवसर पर नए ग्राहकों को एक महीने की अवधि के लिए केवल एक रुपए के टोकन शुल्क पर 4जी मोबाइल सेवाएं देने की पेशकश की है।

यह दिवाली बोनान्ज़ा 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2025 तक जारी रहेगा।

योजना लाभ (दिवाली बोनान्ज़ा योजना):

  • असीमित वॉयस कॉल (योजना नियम व शर्तों के अनुसार)
  • 2 जीबी/दिन हाई-स्पीड डेटा
  • 100 एसएमएस/दिन
  • निःशुल्क सिम (दूरसंचार विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार केवाईसी)

उपरोक्त प्रस्ताव की घोषणा करते हुए बीएसएनएल के सीएमडी श्री ए. रॉबर्ट जे. रवि ने कहा:

बीएसएनएल ने हाल ही में देश भर में मेक-इन-इंडिया, अत्याधुनिक 4जी मोबाइल नेटवर्क स्थापित किया है, जो आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है। दिवाली बोनान्ज़ा प्लान—पहले 30 दिनों के लिए बिल्कुल मुफ़्त सेवा शुल्क—ग्राहकों को हमारे स्वदेशी रूप से विकसित 4जी नेटवर्क का अनुभव करने का गौरवपूर्ण अवसर प्रदान करता है। हमें विश्वास है कि सेवा की गुणवत्ता, कवरेज और बीएसएनएल ब्रांड से जुड़ा विश्वास ग्राहकों को मुफ़्त 30 दिनों की अवधि से भी आगे तक हमारे साथ बने रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

दिवाली बोनान्ज़ा योजना कैसे प्राप्त करें?

  1. निकटतम बीएसएनएल ग्राहक सेवा केंद्र (सीएससी) पर जाएं (वैध केवाईसी दस्तावेज साथ रखें)।
  2. दिवाली बोनान्ज़ा प्लान (₹1 एक्टिवेशन) का अनुरोध करें; केवाईसी पूरा करें और अपना निःशुल्क सिम प्राप्त करें।
  3. सिम डालें और उसे सक्रिय करने की प्रक्रिया निर्देशानुसार पूरी करें; आपके 30-दिन के निःशुल्क लाभ सक्रियण की तिथि से शुरू हो जाएंगे।
  4. सहायता के लिए 1800-180-1503 पर कॉल करें या bsnl.co.in पर जाएं।

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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की 7.62 x 51 एमएम असॉल्ट राइफलों के लिए एडवांस्‍ड नाइट साइट की खरीद हेतु 659.47 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की 7.62 x 51 एमएम असॉल्ट राइफलों के लिए एडवांस्‍ड नाइट साइट की खरीद हेतु 659.47 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए

रक्षा मंत्रालय ने 15 अक्टूबर, 2025 को भारतीय सेना के लिए 7.62 x 51 एमएम असॉल्ट राइफल के लिए नाइट साइट (इमेज इंटेंसिफायर) की खरीद के साथ-साथ सहायक उपकरण के लिए 659.47 करोड़ रुपये के अनुबंध समझौते पर हस्ताक्षर किए। नाइट साइट सैनिकों को एसआईजी 716 असॉल्ट राइफल की लंबी प्रभावी रेंज का पूरी तरह से फायदा उठाने में सक्षम बनाएगी।

ये साइट स्‍टारलिट कंडिशन में भी 500 मीटर की प्रभावी दूरी तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हैं और मौजूदा पैसिव नाइट साइट (पीएनएस) की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार प्रदान करते हैं। इस खरीद को 51 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ (भारतीय-आईडीडीएम) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह खरीद रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस पहल से कल-पुर्जों के निर्माण और कच्चे माल की आपूर्ति से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी लाभ होगा।

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एमएसएमई विशेषज्ञों द्वारा इंटरएक्टिव सत्र आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेल द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को छात्रों में नवाचार और उद्यमिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एमएसएमई विशेषज्ञों द्वारा एक इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किया गया। सत्र का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता में भूमिका को समझना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेल के संयोजक डॉ. मनीष कपूर के स्वागत भाषण एवं परिचय से हुआ, जिन्होंने एमएसएमई की नवाचार और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन ने अपने संबोधन में छात्रों को उद्यमिता को व्यक्तिगत और सामाजिक विकास का मार्ग मानने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान श्री दिव्यांशु शुक्ला ने सभा को संबोधित करते हुए कृषि-आधारित उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से सुगंधित एवं औषधीय फसलों के क्षेत्र में, जो युवाओं के लिए रोजगार एवं ग्रामीण विकास का एक उभरता हुआ क्षेत्र है।

इस अवसर पर श्री भक्ति विजय शुक्ला, उपनिदेशक, एमएसएमई, कन्नौज ने सरकारी योजनाओं, इनक्यूबेशन अवसरों एवं शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार की भूमिका पर अपने मूल्यवान विचार साझा किए। कार्यक्रम का समापन एक इंटरएक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र से हुआ, जिसमें छात्रों ने अपने विचार रखे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

सत्र में एमएसएमई पहल, नवाचार, और स्टार्टअप समर्थन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और नवाचार-आधारित एवं स्व-रोजगार के अवसरों की ओर प्रेरित हुए।

इस कार्यक्रम से छात्रों में एमएसएमई के प्रति जागरूकता बढ़ी, उद्यमिता के प्रति उनकी रुचि में वृद्धि हुई, और शिक्षा जगत तथा उद्योग के बीच संबंध मजबूत हुए। प्रतिभागियों ने इस सत्र की सराहना की और व्यावहारिक कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन का सुझाव दिया।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेता मिश्रा, संकाय सदस्य द्वारा किया गया, जिन्होंने अतिथियों, अध्यापकों और छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस आयोजन ने शैक्षणिक ज्ञान और उद्यमिक व्यवहार के बीच की खाई को सफलतापूर्वक पाटते हुए छात्रों को भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

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पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी 34 महीने बाद महराजगंज जेल से रिहा

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 30 सितंबर  समाजवादी पार्टी सपा के चर्चित नेता और सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक हाजी इरफान सोलंकी आज महराजगंज जिला कारागार से रिहा।  2 दिसंबर 2022 से जेल में बंद इरफान की आज सुबह 10 बजे रिहाई की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ईडी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ के कारण इसमें कुछ देरी हुई शाम तक सभी औपचारिकताएं पूरी हो गईं और इरफान जेल के बाहर आ गए इरफान की पत्नी और वर्तमान विधायक नसीम सोलंकी ने जेल पहुंचकर रिहाई की प्रक्रिया में सहयोग किया जेल परिसर और आसपास के इलाकों में सुबह से ही सपा कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुट चुकी थी फूल-मालाओं और नारों के साथ समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया रिहाई के बाद इरफान ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा यह आजादी सिर्फ मेरी नहीं बल्कि उन तमाम साथियों की है जो अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं सपा परिवार का आभार इरफान पर आगजनी रंगदारी गैंगस्टर एक्ट समेत कुल 10 से अधिक मुकदमे दर्ज थे दिसंबर 2022 में जाजमऊ थाने में दर्ज आगजनी मामले में उन्हें 7 साल की सजा सुनाई गई थी जिसके चलते उनकी विधायकी भी समाप्त हो गई मार्च 2025 में रंगदारी मामले में जमानत मिली 25 सितंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के आखिरी मामले में भी उन्हें उनके भाई रिजवान सोलंकी और अन्य सहयोगियों को जमानत दे दी रिहाई से ठीक पहले ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सवाल पूछे लेकिन कोई नई बाधा नहीं बनी इरफान की करीब 30 करोड़ की संपत्ति पहले ही जब्त हो चुकी है परिवार का संघर्ष इस दौरान नसीम सोलंकी ने सीसामऊ सीट से विधायक बनकर राजनीतिक विरासत संभाली। उनके भाई रिजवान भी 29 सितंबर को कानपुर जेल से रिहा हो चुके हैं इरफान की रिहाई से कानपुर की सियासत में हलचल तेज हो गई है सपा के तेज तर्रार नेता के लौटने से 2027 विधानसभा चुनावों में सीसामऊ और आसपास के इलाकों में समीकरण बदल सकते हैं अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले इरफान की वापसी आजम खान की हालिया रिहाई के बाद सपा को मजबूती देगी कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह राजनीतिक साजिशो के खिलाफ जीत है जेल से बाहर आते ही इरफान ने कहा जेल ने मुझे मजबूत बनाया अब जनसेवा के लिए तैयार हूं समर्थकों ने इरफान जिंदाबाद के नारे लगाए सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में “आचार संहिता” पर व्याख्यान आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर में आईक्यूएसी (IQAC) और वैल्यू एजुकेशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में “आचार संहिता पर प्रेरणादायी व्याख्यान”  आयोजित हुआ।कार्यक्रम की शुरुआत प्रो सुजाता चतुर्वेदी(आईक्यूएसी संयोजक) के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद *प्राचार्य प्रो. विनय जॉन सेबेस्टियन* ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा में अनुशासन और मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्य व्याख्यान डॉ. विमल सिंह, शिक्षा विभाग, सीएसजेएम विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया। उन्होंने छात्रों को ईमानदारी, जिम्मेदारी और नैतिकता को जीवन और शिक्षा की दिशा में मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में रचनात्मकता जोड़ते हुए *”सेल्फी विद ग्रैंडपेरेंट्स”* प्रतियोगिता के परिणाम की घोषणा प्रो श्वेता चन्द (वैल्यू एजुकेशन सेल संयोजक) द्वारा की गई। अंत में डॉ. धनंजय डे ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही तथा यह संदेश दिया गया कि नैतिक आचरण व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।

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उच्च ऊर्जा परमाणु जुड़ाव नई दिशा प्रदान कर रहा है, जिससे अगली पीढ़ी के क्वांटम उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है

भारतीय क्वांटम अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि जब ऐसे परमाणु, जो हमारे चारों ओर के पदार्थ के मूल निर्माण के छोटे-छोटे खंड हैं, उनको बहुत अधिक ऊर्जा दी जाती है, तो वे स्वतंत्र कणों की तरह व्यवहार करना बंद कर देते हैं। इस अवस्था में वे अब अलग-अलग कणों की तरह नहीं रहते, बल्कि आपस में इतनी मजबूती से जुड़ जाते हैं कि रोशनी के साथ उनका संबंध भी बदल जाता है और उसकी प्रतिक्रिया विकृत दिखाई देने लगती है।

इतनी उच्च अवस्थाओं पर रिडबर्ग परमाणु संकेतों पर पहली बार देखी गई यह अनोखी विकृति भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

साधारण परमाणु छोटे-से कण होते हैं, लेकिन रिडबर्ग परमाणु असाधारण रूप से विशाल होते हैं। जब वैज्ञानिक किसी परमाणु के सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा के बहुत ऊंचे स्तर पर ले जाते हैं, तो उसका आकार सामान्य से कहीं बड़ा हो जाता है और वह अपने आस-पास के वातावरण के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है। यही अनोखे गुण रिडबर्ग परमाणुओं को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों और अति-सटीक सेंसरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। हालांकि, यही संवेदनशीलता उन्हें अप्रत्याशित भी बना देती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान, रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) की एक टीम ने रुबिडियम परमाणुओं को लगभग परम शून्य तापमान तक ठंडा किया — इतना ठंडा कि वे मुश्किल से हिल पाते हैं। इन परमाणुओं को बाद में लेजर और चुंबकीय क्षेत्रों की मदद से फंसा दिया गया। इसके बाद, प्रकाश किरणों का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने उन्हें रिडबर्ग अवस्था में उत्तेजित किया। आमतौर पर परमाणु अपनी उत्तेजना को एक स्पष्ट और मूलग्रंथ जैसे पैटर्न में प्रकट करते हैं, जिसे ऑटलर-टाउन्स स्प्लिटिंग कहा जाता है।

चित्र- फंसे हुए ठंडे परमाणु सेट-अप में रिडबर्ग उत्तेजना का एक कलात्मक प्रतिनिधित्व

हालांकि जब शोधकर्ताओं ने परमाणुओं को 100वें ऊर्जा स्तर से आगे धकेला, तो साफ और नियमित पैटर्न अचानक टूट गया। अब उनका व्यवहार धुंधला तथा विकृत दिखने लगा। यह कोई त्रुटि नहीं थी, बल्कि एक अद्भुत खोज थी: परमाणु अब अकेले नहीं, बल्कि एक साथ कार्य कर रहे थे। यह ऐसा था कि जैसे एक बड़ा झुंड तालमेल से नाच रहा हो, वे एक-दूसरे से जुड़ रहे थे, प्रभाव डाल रहे थे और सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया दे रहे थे।

रिडबर्ग परमाणुओं में उच्च ऊर्जा पर दिखने वाली ये विचित्र विकृतियां क्वांटम तकनीक के लिए एक संकेत की तरह हैं। ये वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती हैं कि किस समय परमाणु अकेले रहते हैं और कब वे एक साथ जुड़कर जटिल, आपस में उलझे समूह बनाते हैं, जो बड़ी एवं जटिल प्रणाली की नकल करने में सक्षम होते हैं। ये वास्तव में परिशुद्धता वाले प्रयोगों में उपयोगी हैं। यह जानना कि परमाणु कब और कैसे एक-दूसरे से ‘जुड़ना’ शुरू करते हैं, भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर, सेंसर और संचार उपकरण बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

आरआरआई में प्रोफेसर संजुक्ता रॉय और उनके पीएचडी विद्यार्थियों शिल्पा बी एस और शोवन के बारिक के नेतृत्व में आईआईएसईआर पुणे में प्रोफेसर रेजिश नाथ की टीम द्वारा सैद्धांतिक मॉडलिंग के साथ किये गए इस प्रयोग ने नाजुक इंजीनियरिंग को गहन भौतिकी अंतर्दृष्टि के साथ जोड़ा है। उनकी विशेष रूप से निर्मित पहचान प्रणाली इतनी संवेदनशील थी कि वह बहुत कम संख्या में फोटॉनों को भी पहचान सकती थी, जिससे उन्हें अत्यधिक उच्च ऊर्जा स्तरों पर रिडबर्ग परमाणुओं का अध्ययन करने में सहायता मिली, जहां अन्य विफल हो गए थे।

डॉ. रॉय के अनुसार, ‘हमारे प्रयोग में एक अत्यंत संवेदनशील पहचान प्रणाली स्थापित की गई, जो परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित कुछ ही फोटॉनों का भी पता लगाने में सक्षम है। इससे हमें अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं (n > 100) में मौजूद परमाणुओं का पता लगाने में मदद मिली, भले ही उनके संक्रमण की संभावनाएं बहुत कम रही हों। हमने अपने प्रयोग को इस तरह अनुकूलित किया है कि अत्यधिक उत्तेजित रिडबर्ग अवस्थाओं से आने वाले सिग्नल को उच्च सिग्नल-टू-शोर अनुपात के साथ मापा जा सके।’

इस खोज ने भारतीय शोधकर्ताओं को वैश्विक क्वांटम अनुसंधान के मानचित्र पर मजबूती से स्थापित कर दिया है। यह दिखाता है कि जब वैज्ञानिक परमाणुओं को लगभग पूरी तरह स्थिर अवस्था तक ठंडा करते हैं और फिर उन्हें अत्यधिक ऊर्जावान बनाते हैं, तो वे पदार्थ को व्यक्तिगत से सामूहिक रूप में बदलते हुए देख सकते हैं।

परमाणु व्यवहार को समझने यह नई खोज भविष्य की क्वांटम प्रौद्योगिकियों की सीमाएं निर्धारित करती है। इस नाजुक संतुलन पर ही क्वांटम प्रौद्योगिकियों का भविष्य आकार ले रहा है और यह ज्ञान आने वाले उपकरणों के निर्माण में मार्गदर्शन करेगा।

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