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राजनीति

राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 की अधिसूचना

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।

इस अधिसूचना के तहत केंद्र सरकार को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक खोज-सह-चयन समिति गठित करने का अधिकार दिया गया है। इस समिति में सचिव (खेल), खेल प्रशासन में अनुभव रखने वाला एक व्यक्ति और राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले दो व्यक्ति शामिल होंगे।

समिति को यह जिम्मा दिया गया है कि वह अध्यक्ष और बोर्ड के दो सदस्यों के पदों के लिए ऐसे व्यक्तियों के नामों की सिफारिश करे, जो योग्यता, सत्यनिष्ठा और उत्तम प्रतिष्ठा रखते हों। इन व्यक्तियों को लोक प्रशासन, खेल प्रशासन, खेल कानून या अन्य संबंधित क्षेत्रों में ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए।

राष्ट्रीय खेल बोर्ड (खोज-सह-चयन समिति) नियम, 2026 के तहत राष्ट्रीय खेल बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह बोर्ड देश में राष्ट्रीय खेल निकायों को मान्यता प्रदान करने के साथ-साथ उनके शासन, वित्तीय प्रबंधन और नैतिक मानकों के अनुपालन की निगरानी करने वाले केंद्रीय प्राधिकरण की भूमिका निभाएगा।

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केंद्र ने तमिलनाडु में 235 करोड़ रुपये की पत्तन परियोजनाएं शुरू कीं

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग के केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने चेन्नई पत्तन प्राधिकरण और कामराजार पत्तन लिमिटेड में 235 करोड़ रुपये की पत्तन अवसंरचना तथा डिजिटल शासन परियोजनाओं का शुभारंभ किया। यह पहल तमिलनाडु की समुद्री क्षमता को सुदृढ़ करने और भारत के समुद्री क्षेत्र के नेतृत्व वाले विकास के एजेंडा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

चेन्नई में आयोजित “विकसित भारत, विकसित पोर्ट्स” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ये परियोजनाएं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, जलवायु-सहिष्णु तथा डिजिटल रूप से सक्षम पत्तनों के निर्माण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। साथ ही, ये पहल व्यवसाय करने में सुगमता और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने में भी सहायक होंगी।

 सर्बानंद सोनोवाल ने कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वह विज़न और नेतृत्व प्रदान करते हैं जो भारत के समुद्री क्षेत्र के रूपांतरण को गति देता है। “मोदी जी का विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत पर स्पष्ट ध्यान हमारे द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक सुधार का मार्गदर्शन करता है। हम पत्तनों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं, तटीय लचीलापन सुदृढ़ कर रहे हैं, परिचालनों का डिजिटलीकरण कर रहे हैं तथा व्यापार सुगमता का विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारतीय पत्तन विकास के इंजन, राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के आधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के केंद्र के रूप में उभर सकें।”

कुल व्यय में से 129.36 करोड़ रुपये चेन्नई पत्तन प्राधिकरण में परियोजनाओं के लिए तथा 105.64 करोड़ रुपये कामराजार पत्तन लिमिटेड में पहलों के समर्थन हेतु निर्धारित किए गए हैं।

चेन्नई पत्तन प्राधिकरण के लिए केंद्रीय मंत्री ने लचीलापन, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा प्रदाय पर केंद्रित तीन परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में लगभग 850 मीटर लम्‍बी तटीय बर्थ के पीछे स्थित तटीय संरक्षण तटबंध की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण शामिल है। यह कार्य 33.28 करोड़ रुपये की लागत से जलवायु-सहिष्णु अभिकल्पों के साथ किया जाएगा। मंत्री ने तेल गोदी क्षेत्र में तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय के सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के लिए 43 करोड़ रुपये के निवेश से एक नए अग्निशमन पंप गृह के निर्माण का भी शिलान्यास किया। इससे महत्वपूर्ण ऊर्जा-सुरक्षा परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा मानकों के पूर्ण अनुपालन वाली समर्पित, उच्च-क्षमता अग्निशमन अवसंरचना स्थापित होगी। इसके अतिरिक्त, 8.08 करोड़ रुपये के निवेश से चेन्नई पत्तन अस्पताल के आधुनिकीकरण के लिए भी शिलान्यास किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य वार्डों, शल्य चिकित्सा कक्षों, निदान सुविधाओं तथा सहायक सेवाओं का उन्नयन करने के साथ-साथ निर्बाध चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करना है।

 सोनोवाल ने एंटरप्राइज बिजनेस सिस्टम (ईबीएस) का भी उद्घाटन किया, जो एक सैप-आधारित (एसएपी- आधारित) एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है और यह वित्त, पत्तन संचालन, मानव संसाधन, परिसंपत्तियों, खरीद एवं ग्राहक सेवाओं को एक इकहरे आधार पर लाता है। इस प्रणाली का विकास 45 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और इसके माध्यम से पारदर्शिता, अनुपालन और संचालन दक्षता में वृद्धि होने की अपेक्षा है, जिससे व्यवसाय की सुगमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

कामराजार पत्तन लिमिटेड के लिए, मंत्री ने उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर नई सीमा दीवार का शिलान्यास किया, जो उत्तरी पत्तन पहुँच मार्ग (एनपीएआर) से जुड़ती है, और इसकी लागत 1.39 करोड़ रुपये है। इससे पहुँच नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा। केंद्रीय मंत्री ने 105 करोड़ रुपये के निवेश से पुनर्वासित उत्तरी ब्रेकवॉटर हेड का उद्घाटन भी किया, जिसे चक्रवात से हुए नुकसान के बाद सुदृढ़ किया गया है, जिससे नौवहन सुरक्षा और पत्तन संचालन में निरंतरता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना भारत के पूर्वी समुद्री गलियारे में पत्तन की भूमिका को मजबूत करती है। पुनर्वास में 202 मीटर क्षेत्र शामिल है, जिसमें 3035 नए 25 मीट्रिक टन के टेट्रापॉड लगाए गए हैं। यह क्षेत्र पहले चक्रवात थाने और नीलम के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था।

भारत के समुद्री क्षेत्र में इन परियोजनाओं की भूमिका के महत्व पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “ये परियोजनाएं भारत को विश्व के अग्रणी समुद्री देशों में स्थापित करने के लिए एक बड़े, एकीकृत प्रयास का हिस्सा हैं। पत्तनों का आधुनिकीकरण, लचीलापन सुदृढ़ करना, परिचालनों का डिजिटलीकरण और व्यवसाय की सुगमता में सुधार करके, हम वह समुद्री आधार तैयार कर रहे हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करने और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के विज़न की दिशा में अग्रसर करने के लिए आवश्यक है।”

एक राष्ट्रीय स्तर की व्यापार-सुगमता पहल के तहत, जो “एक राष्ट्र–एक पत्तन प्रक्रिया” (ओएनओपी) के अनुरूप है, सोनोवाल ने ई-पोर्ट क्लियरेंस पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से पत्तन मंजूरी प्रमाण पत्र, जिसमें अग्रिम मंजूरी भी शामिल है, ऑनलाइन प्रस्तुत और जारी किए जा सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य इस पूरी प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और पूरे भारत में समुद्री संचालन के लिए पूर्वानुमान क्षमता में सुधार लाना है। पोर्टल शिपिंग लाइन/स्टीमर एजेंटों को ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने और अपने यूज़र लॉगिन के माध्यम से पत्तन मंजूरी प्रमाण पत्र डाउनलोड करने की सुविधा देगा—इससे समुद्री संचालन में पारदर्शिता, गति और पूर्वानुमान क्षमता मजबूत होगी। माननीय केंद्रीय मंत्री ने चेन्नई पत्तन विद्यालय के 20 छात्रों के नौकायन प्रशिक्षण के लिए रॉयल मद्रास यॉट क्लब (आरएमवाईसी) को 18 लाख रुपये का चेक भी प्रदान किया।

श्री सोनोवाल ने कहा कि इन संयुक्त निवेशों से एक समुद्री शक्ति के रूप में तमिलनाडु की स्थिति उन्नत होगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत होगी। उन्‍होंने कहा, “सागरमाला के तहत निरंतर निवेश और सुधार भारत के पत्तनों को वैश्विक मानकों वाले केंद्रों में बदल रहे हैं, जो विकास, रोजगार और राष्ट्रीय गौरव को समर्थन देते हैं।”

इस कार्यक्रम ने “वन्दे मातरम् @150” की राष्ट्रीय भावना को भी प्रतिबिंबित किया, जो इस प्रतिष्ठित गीत के 150वें वर्ष का प्रतीक है और एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प की पुनः पुष्टि करता है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विशेष आवश्‍यकता वाले बच्चों के लिए शहर के टोंडियारपेट इलाके में स्थित स्वबोधिनी विद्यालय एवं व्यावसायिक केंद्र का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकगण के साथ संवाद किया और समावेशी विकास के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। सोनोवाल ने स्वबोधिनी के एकीकृत मॉडल की समीक्षा की, जिसमें विशेष शिक्षा को व्यावसायिक, वाक् और संवेदी चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, खेल, योग और व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ जोड़ा गया है। इसमें मुद्रण, मोमबत्ती एवं साबुन बनाना और कम्प्यूटर शिक्षा जैसे कौशल विकास कार्यक्रम भी शामिल हैं। माननीय मंत्री को मापनीय परिणामों की जानकारी दी गई, जिनमें बच्चों की गतिशीलता, संचार कौशल में सुधार और सफल नियुक्तियाँ शामिल हैं। इसके अलावा, स्‍थायित्‍व के मूल्यों को सुदृढ़ करते हुए श्री सोनोवाल ने “एक-पेड-माँ-के-नाम” अभियान के तहत एक पौधा भी रोपा।

इस कार्यक्रम में डॉ. मालिनी वी. शंकर, कुलपति, इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (आईएमयू), एस. विश्वनाथन, अध्यक्ष, चेन्नई पत्तन प्राधिकरण, जे.पी. आइरीन सिंथिया, प्रबंध निदेशक, कामराजार पत्तन लिमिटेड सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया। इसके अलावा भी 450 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें पत्तन हितधारक, समुद्री पेशेवर, इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के छात्र और अधिकारी शामिल थे, ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

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उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 8 महीनों में 31 क्षेत्रों में 45 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलवाई

भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की एक प्रमुख पहल, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच), देश भर में उपभोक्ताओं की शिकायतों के प्रभावी, समयबद्ध और मुकदमेबाजी से पहले निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 तक आठ महीने की अवधि के दौरान, हेल्पलाइन ने 31 क्षेत्रों में राशि वापिस दिलवाने के दावों से संबंधित 67,265 उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करते हुए 45 करोड़ रुपये की राशि के वापिस दिलवाई है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत मुकदमेबाजी से पहले, एनसीएच विवादों के त्वरित, किफायती और सौहार्दपूर्ण समाधान को सक्षम बनाती है जिससे उपभोक्ता आयोगों पर बोझ कम होता है।

क्षेत्रवार निष्पादन

 -कॉमर्स क्षेत्र में शिकायतों और वापिस दिलवाई गई राशि की मात्रा और संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई जिसमें 39,965 शिकायतों के परिणामस्वरूप 32 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई। इसके बाद यात्रा और पर्यटन क्षेत्र का स्थान रहा जिसमें 4,050 शिकायतें दर्ज की गई और 3.5 करोड़ रुपये की राशि वापिस दिलवाई गई।

ई-कॉमर्स क्षेत्र से राशि वापिस दिलवाने से संबंधित शिकायतें देश के सभी हिस्सों से प्राप्त हुई जिनमें प्रमुख महानगरों से लेकर दूरस्थ और कम आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। यह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की राष्ट्रव्यापी पहुंच, सुगमता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

कुल वापिस दिलवाई गई राशि में 85 प्रतिशत से अधिक का योगदान देने वाले शीर्ष पांच क्षेत्रों, प्राप्त शिकायतों की संख्या और संबंधित वापिस दिलवाई गई राशि का विवरण नीचे दिया गया है:

क्रम संख्या क्षेत्र कुल शिकायतें कुल वापसी राशि ( रुपये में )
1 ई-कॉमर्स 39,965 320,680,198
2 यात्रा पर्यटन 4,050 35,222,102
3 एजेंसी सेवाएं 957 13,497,714
4 इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 635 11,725,231
5 एयरलाइंस 668 9,556,843
कुल 46,275 39,06,82,088

इस उपलब्धि के पीछे का एक प्रमुख कारण साझेदारों की संख्या में विस्तार है जिससे उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की सामूहिक क्षमता में वृद्धि हुई है। यह संबंधित हितधारकों की सशक्त भागीदारी को दर्शाता है जो उपभोक्ता कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए उनकी जवाबदेही की पुष्टि करता है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 की अवधि में 45 करोड़ रुपये की राशि की त्वरित वापसी न केवल हेल्पलाइन की प्रभावशीलता और तत्परता दर्शाती है बल्कि समयबद्ध और परेशानी मुक्त शिकायत निवारण सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका भी दर्शाती है। यह मुकदमेबाजी से पहले के चरण में एक आवश्यक माध्यम के रूप में एनसीएच के महत्व को और मजबूत करता है जो बाजार में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।

उपभोक्ता पर प्रभाव – उदाहरण:

राजस्थान के जोधपुर के एक उपभोक्ता ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खराब कुर्सियाँ प्राप्त करने के बाद शिकायत दर्ज कराई। समाधान चाहा, उपभोक्ता ने कंपनी से संपर्क किया, लेकिन लगातार पाँच बार समान वापिस लेना रद्द कर दिया गया जिससे मामला अनसुलझा रह गया। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के हस्तक्षेप से मामले का तुरंत समाधान हुआ और उपभोक्ता को पूरी राशि वापस कर दी गई। उपभोक्ता ने हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे जैसे ठगे गए उपभोक्ताओं की सहायता करने के लिए उपभोक्ता हेल्पलाइन का बहुत-बहुत धन्यवाद… आपका बहुत-बहुत आभार।”

कर्नाटक के बेंगलुरु निवासी एक उपभोक्ता ने वार्षिक इंटरनेट प्लान खरीदा था और उसके खाते से राशि काट ली गई थी। हालांकि, कनेक्शन कभी लगाया ही नहीं गया। जब उसने ग्राहक सेवा से संपर्क किया तो उसे आश्वासन दिया गया कि 10 कार्य दिवसों के भीतर राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। कई बार कॉल करने और शिकायत करने के बावजूद, उपभोक्ता को चार महीने बाद भी राशि वापिस नहीं मिली। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के प्रभावी हस्तक्षेप से कंपनी ने तुरंत राशि लौटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी। समाधान पर संतोष व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “यह एक अच्छा अनुभव रहा। अन्यथा, राशि वापिस पाना मुश्किल था।”

तमिलनाडु के चेन्नई के एक उपभोक्ता ने उड़ान से 96 घंटे से अधिक पहले अपना टिकट रद्द कर दिया था। इसके बावजूद, उपभोक्ता के बार-बार अनुरोध करने पर भी कंपनी ने राशि वापिस नहीं लौटाई। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के त्वरित हस्तक्षेप से राशि वापिस लौटा दी गई। एनसीएच के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए उपभोक्ता ने कहा, “एनसीएच को त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद। मैं आपके प्रयासों से बहुत प्रसन्न हूं।”

ये मामले मुकदमेबाजी से पहले की प्रभावी व्यवस्था के रूप में एनसीएच की भूमिका को दर्शाते हैं जो उपभोक्ताओं को लंबी कानूनी कार्यवाही के बिना सुलभ और समय पर शिकायत निवारण प्रदान करता है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन तक पहुंच

यह हेल्पलाइन देशभर के उपभोक्ताओं के लिए मुकदमेबाजी से पहले ही शिकायतों के निवारण हेतु एक सुलभ केंद्र के रूप में उभरी है । उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 के माध्यम से 17 भाषाओं में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतें एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (आईएनजीआरएएम) के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं। यह एक सर्वसुलभ, सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम केंद्रीय पोर्टल है। इसके लिए कई माध्यम उपलब्ध हैं,

जिनमें व्हाट्सएप (8800001915), एसएमएस (8800001915), ईमेल (nch-ca[at]gov[dot]in), एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल ( www.consumerhelpline.gov.in ) और उमंग ऐप शामिल हैं जो उपभोक्ताओं को लचीलापन और सुविधा प्रदान करते हैं।

विभाग उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है और सभी उपभोक्ताओं से अपने अधिकारों की रक्षा करने और समय पर निवारण प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन का उपयोग करने का आग्रह करता है।

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प्रधानमंत्री मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर आधारित और सतत संवाद के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री के सहकारी संघवाद के दृष्टिकोण पर आधारित यह सम्मेलन एक ऐसे मंच के रूप में कार्य करता है जहां केंद्र और राज्य भारत की मानव पूंजी क्षमता को अधिकतम करने तथा समावेशी भविष्य के लिए तैयार विकास को गति देने के लिए एक एकीकृत प्रारूप तैयार करने के लिए सहयोग करते हैं।

 तीन दिवसीय सम्मेलन में एक साझा विकास एजेंडा को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। यह सम्मेलन भारत की जनसंख्या को केवल जनसांख्यिकीय लाभांश के रूप में देखने के बजाय नागरिकों को मानव पूंजी के रूप में स्थापित करने के लिए सहयोगात्मक कार्रवाई का आधार तैयार करेगा। इसके लिए शिक्षा प्रणालियों को मजबूत करने, कौशल विकास पहलों को आगे बढ़ाने और देश भर में भविष्य के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन करने के लिए ठोस रणनीतियां विकसित की जाएंगी।

केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, नीति आयोग, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर, पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी’ होगा, जिसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और रणनीतियों को शामिल किया जाएगा।

इस व्यापक विषय के अंतर्गत, पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष बल दिया जाएगा: प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, खेल और पाठ्येतर गतिविधियां, जिन्हें विस्तृत चर्चा के लिए चुना गया है।

राज्यों में विनियमन में ढील; शासन में प्रौद्योगिकी: अवसर, जोखिम और शमन; स्मार्ट आपूर्ति श्रृंखला और बाजार संबंधों के लिए एग्रीस्टैक; एक राज्य, एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल; आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी तथा पोस्ट-एलडब्ल्यूई भविष्य की योजनाएं जैसे विषयों पर छह विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा, भोजन के दौरान विरासत और पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटलीकरण तथा सभी के लिए आयुष-प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में ज्ञान का एकीकरण जैसे विषयों पर केंद्रित विचार-विमर्श किया जाएगा।

मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन पिछले चार वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। इसका प्रथम सम्मेलन जून 2022 में धर्मशाला में आयोजित किया गया था। इसके पश्चात जनवरी 2023, दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में इन्हें नई दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किया गया।

इस सम्मेलन में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य उपस्थित रहेंगे।

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भारतीय रेलवे की अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों में रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता दोगुनी करने की योजना

यात्रा की मांग में लगातार हो रही तीव्र वृद्धि को देखते हुए, अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों की नई रेल गाड़ियों के संचालन की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना करना आवश्यक है। आगामी वर्षों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा। वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता को दोगुना करने के लिए निम्नलिखित कार्य शामिल होंगे:

i. मौजूदा टर्मिनलों को अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और पर्याप्त शंटिंग सुविधाओं से सुसज्जित करना।

ii. शहरी क्षेत्र में और उसके आसपास नए टर्मिनलों की पहचान और निर्माण करना।

iii. मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स सहित रखरखाव सुविधाएं।

iv. विभिन्न स्थानों पर रेल गाड़ियों की बढ़ती संख्या की व्यवस्था करने के लिए यातायात सुविधा कार्यों, सिग्नलिंग उन्नयन और मल्टीट्रैकिंग के माध्यम से अनुभागीय क्षमता में वृद्धि करना।

टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाते समय, टर्मिनलों के आसपास के स्टेशनों को भी ध्यान में रखा जाएगा ताकि क्षमता में संतुलन बना रहे। उदाहरण के लिए, पुणे के लिए, पुणे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और स्टेबलिंग लाइनों को बढ़ाने के साथ-साथ हडपसर, खड़की और आलंदी स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने पर विचार किया गया है।

उपरोक्त प्रक्रिया उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों प्रकार के यातायात के लिए की जाएगी, जिसमें दोनों खंडों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा। 48 प्रमुख शहरों की एक व्यापक योजना विचाराधीन है (सूची संलग्न है)। इस योजना में निर्धारित समय सीमा के भीतर रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियोजित, प्रस्तावित या पहले से स्वीकृत कार्यों को शामिल किया जाएगा।

क्षमता को वर्ष 2030 तक दोगुना करने की योजना है, लेकिन यह आशा है कि अगले 5 वर्षों में क्षमता में क्रमिक वृद्धि की जाएगी ताकि क्षमता वृद्धि के लाभ तुरंत प्राप्त किए जा सकें। इससे आने वाले वर्षों में यातायात की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने में सहायता मिलेगी। योजना में कार्यों को तीन श्रेणियों, अर्थात् तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक में वर्गीकृत किया जाएगा। प्रस्तावित योजनाएँ विशिष्ट होंगी, जिनमें स्पष्ट समयसीमा और परिभाषित परिणाम होंगे। यद्यपि यह अभ्यास विशिष्ट स्टेशनों पर केंद्रित है, प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे को अपने-अपने मंडलों में रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता बढ़ाने की योजना बनाने के लिए कहा गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि न केवल टर्मिनल क्षमता में वृद्धि हो, बल्कि स्टेशनों और यार्डों पर अनुभागीय क्षमता और परिचालन संबंधी बाधाओं का भी प्रभावी ढंग से समाधान किया जाए।

केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “हम यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार कर रहे हैं और अनुभागीय एवं परिचालन क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं। इस कदम से हमारे रेलवे नेटवर्क का उन्नयन होगा और राष्ट्रव्यापी संपर्क सुविधा में सुधार होगा।”

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भारतीय रेलवे ने 2025 में त्योहारों और यात्राओं के दौरान सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 43,000 से अधिक विशेष ट्रेन यात्राएं संचालित कीं

भारतीय रेलवे ने प्रमुख धार्मिक आयोजनों और यात्राओं के पीक सीजन के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन सेवाएँ संचालित कर यात्रियों की सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए। ये पहल बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने और देशभर में निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराने के प्रति रेलवे की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया, जो बेहतर योजना और यात्रियों की सुविधा पर पहले से अधिक मजबूत फोकस को रेखांकित करता है।

वर्ष 2025 के दौरान भारतीय रेलवे ने महा कुंभ के लिए अपने सबसे बड़े विशेष ट्रेन अभियानों में से एक का संचालन किया। 13 जनवरी से 28 फरवरी 2025 के बीच तीर्थयात्रियों की अत्यधिक संख्या की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 17,340 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं। इसी तरह, होली 2025 के अवसर पर 1 मार्च से 22 मार्च 2025 के बीच 1,144 विशेष ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं, जो होली 2024 की तुलना में लगभग दोगुनी थीं। इससे यात्रियों को बेहतर उपलब्धता मिली और त्योहार के दौरान यात्रा अधिक सहज और सुव्यवस्थित रही।

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समर ट्रैवल सीज़न, 2025 यानि गर्मी की छुट्टियों के दौरान, जो 1 अप्रैल से 30 जून तक रहा, यात्रियों की बढ़ी हुई आवाजाही को ध्यान में रखते हुए 12,417 समर स्पेशल ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया, जिससे छुट्टियों के पीक महीनों में भी उच्च स्तर की सेवा बनाए रखी जा सकी। इसके अलावा, छठ पूजा 2025 के लिए विशेष इंतज़ामों को और मज़बूत किया गया। 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2025 के बीच 12,383 विशेष ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

साल 2025 में किए गए ये विस्तारित इंतज़ाम 2024 में तैयार किए गए मज़बूत परिचालन आधार पर आधारित थे। 30 जनवरी से 11 मार्च 2024 के बीच संचालित आस्था स्पेशल सेवाओं के दौरान तीर्थयात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 326 विशेष सर्कुलर ट्रेन यात्राएँ चलाई गईं थी। इसी तरह, होली 2024 के अवसर पर 12 मार्च से 2 अप्रैल 2024 के बीच त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने 604 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया था।

गर्मियों की छुट्टियों 2024 के दौरान 12,919 समर स्पेशल ट्रेन यात्राएँ संचालित की गईं थी। वहीं, छठ पूजा 2024 के लिए 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2024 के बीच 7,990 विशेष ट्रेन यात्राओं का संचालन किया गया था।

वर्ष 2025 में विशेष ट्रेन परिचालन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा, प्रभावी भीड़ प्रबंधन और अधिक मांग वाले समय में विश्वसनीय तथा सुचारु यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रति लगातार प्रतिबद्ध है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025” प्रदान किया

राष्ट्रपति भवन में आज आयोजित दूसरे “राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार” समारोह में प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित “राष्ट्रीय विज्ञान रत्न पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया। देश की चर्चित “पर्पल रिवोल्यूशन” और लैवेंडर उद्यमिता को गति प्रदान करने वाली उद्यमी विज्ञान टीम सीएसआईआर के नेतृत्व वाले अरोमा मिशन को “राष्ट्रीय विज्ञान टीम पुरस्कार 2025” या विज्ञान टीम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में विभिन्न क्षेत्रों के 24 वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को पुरस्कार प्रदान किए ।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार की स्थापना मोदी सरकार द्वारा की गई थी।

‘X’ पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “विश्व को ‘पर्पल रिवोल्यूशन’ की अवधारणा से परिचित कराने और ‘लैवेंडर’ को कृषि-उद्यमिता के एक नए मार्ग के रूप में प्रस्तुत करने में आपके योगदान को मान्यता देते हुए, प्रतिष्ठित #राष्ट्रीयविज्ञानपुरस्कार 2025 के लिए ‘टीम अरोमा’ को बधाई… हिमालय के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी आकर्षक आजीविका की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए।”

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत अरोमा मिशन टीम को हिमालयी क्षेत्र में सुगंधित फसलों, विशेष रूप से लैवेंडर की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर प्रयोगशाला अनुसंधान को जमीनी स्तर के परिणामों में परिवर्तित करने का श्रेय दिया जाता है। इसके कार्य ने जम्मू और कश्मीर के किसानों के लिए आजीविका के नए द्वार खोले, आवश्यक तेलों के आयात पर निर्भरता कम की और यह प्रदर्शित किया कि समन्वित वैज्ञानिक हस्तक्षेप किस प्रकार सामाजिक-आर्थिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

इस मान्यता से राष्ट्रीय पुरस्कारों के ढांचे के केंद्र में सहयोगात्मक, अनुप्रयोग-उन्मुख विज्ञान को स्थान मिलता है। जम्मू-कश्मीर के भदेरवाह और गुलमर्ग कस्बों से शुरू हुई लैवेंडर की खेती और उद्यमशीलता अब केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी फैल चुकी है और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाई जा रही है।

पिछले वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों की नई संरचना के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य जीवन भर की उपलब्धियों से लेकर प्रारंभिक करियर की उत्कृष्टता और टीम आधारित नवाचार तक, विज्ञान के सभी क्षेत्रों में किए गए कार्यों को मान्यता देना है। इस वर्ष का समारोह पुरस्कारों का दूसरा संस्करण था। यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एक संरचित, समकालीन प्रारूप में विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मान प्रदान करने के सरकार के इरादे को रेखांकित करता है।

प्रख्यात खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत आजीवन उपलब्धि के लिए विज्ञान रत्न से सम्मानित किया गया और कई विज्ञान श्री और विज्ञान युवा पुरस्कारों ने भौतिकी, कृषि, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, अंतरिक्ष विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यक्तिगत योगदान को मान्यता दी गई। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की पूरी सूची में वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ-साथ 45 वर्ष से कम आयु के शोधकर्ता भी शामिल हैं, जो अनुभव और उभरती प्रतिभा दोनों पर पुरस्कार के जोर को दर्शाता है।

विशिष्ट क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती विज्ञान श्री श्रेणी के अंतर्गत डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (कृषि विज्ञान), डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख (परमाणु ऊर्जा), डॉ. के. थंगराज (जीव विज्ञान), प्रो. प्रदीप थलप्पिल (रसायन विज्ञान), प्रो. अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित (इंजीनियरिंग विज्ञान), डॉ. एस. वेंकट मोहन (पर्यावरण विज्ञान), प्रो. महान एमजे (गणित और कंप्यूटर विज्ञान), और श्री जयन एन (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी) को पुरस्कार प्रदान किए गए। यह विभिन्न विषयों में उनके निरंतर और क्षेत्र-परिभाषित कार्य को उजागर करते हैं।

विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के वैज्ञानिकों के लिए है। यह नवोन्मेषी योगदान देने वाले उभरते शोधकर्ताओं को सम्मानित करता है। पुरस्कार पाने वालों में भौतिकी में प्रो. अमित कुमार अग्रवाल और प्रो. सुरहुद श्रीकांत मोरे; कृषि विज्ञान में डॉ. जगदीश गुप्ता कपुगंती और डॉ. सतेंद्र कुमार मंगरौथिया; जीव विज्ञान में डॉ. दीपा अगाशे और श्री देबरका सेनगुप्ता; रसायन विज्ञान में डॉ. दिब्येंदु दास; भूविज्ञान में डॉ. वलीउर रहमान; इंजीनियरिंग विज्ञान में प्रो. अर्कप्रवा बसु; गणित और कंप्यूटर विज्ञान में प्रो. सब्यसाची मुखर्जी और प्रो. श्वेता प्रेम अग्रवाल; चिकित्सा में डॉ. सुरेश कुमार; अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में श्री अंकुर गर्ग; और प्रौद्योगिकी और नवाचार में प्रो. मोहनशंकर शिवप्रकाशम शामिल हैं।

इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में महिला वैज्ञानिकों की प्रमुख भूमिका रही। इन्हें कई श्रेणियों और विषयों में मान्यता मिली। डॉ. दीपा अगाशे और प्रोफेसर श्वेता प्रेम अग्रवाल जैसी शोधकर्ताओं को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। यह देश के वैज्ञानिक परिवेश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्यों में देश की वैज्ञानिक प्रतिभा की गहराई और विविधता झलकती है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को संबोधित करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया है।

राष्ट्रपति और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री की उपस्थिति को वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और इसके सार्वजनिक उपयोग को दी जाने वाली राष्ट्रीय प्राथमिकता को सुदृढ़ करने वाला माना गया। पुरस्कारों के ढांचे का उद्देश्य आयु और उपलब्धि मानदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके श्रेणियों, विशेष रूप से युवा वैज्ञानिक वर्ग, में स्पष्टता लाना भी है।

अरोमा मिशन को मिली मान्यता के साथ, समारोह ने रेखाकिंत किया की कैसे सरकार समर्थित वैज्ञानिक कार्यक्रम, जब स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों और टीम वर्क के माध्यम से कार्यान्वित किए जाएं, तो प्रयोगशालाओं और पत्रिकाओं से परे परिणाम दे सकते हैं। भारत अपने विज्ञान-आधारित विकास मॉडल को मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार अनुसंधान उत्कृष्टता को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जमीनी स्तर पर प्रभाव से जोड़ने वाले एक मंच के रूप में तेजी से उभर रहा है।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी)-2025 के लिए पुरस्कार विजेताओं की सूची

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एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन, कानपुर जोन का त्रिवर्षीय चुनाव संपन्न

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर एसबीआई पेंशनर्स एसोसिएशन, कानपुर जोन का त्रिवर्षीय चुनाव (2025–2028) संगठन के संविधान एवं नियमों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस चुनाव में पारस्परिक सौहार्द, एकता एवं सहयोग की भावना के परिणामस्वरूप निम्न सभी प्रत्याशी अपने-अपने पदों पर निर्विरोध निर्वाचित हुए।

अंचल अध्यक्ष~अतुल अग्रवाल~अंचल उपाध्यक्ष~विजय कुमार अवस्थित

अंचल सचिव ~सुरेश कुमार कपूर

सहायक अंचल सचिव~राहुल निगम

सहायक अंचल सचिव(वित्त)~अशोक चतुर्वेदी

कार्यकारिणी सदस्य ~सुरिंदर कुमार सुखीजा, सुरेश मिश्रा।

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कानपुर स्मार्ट सिटी में मोटर वाहन अधिनियम की उड़ रहीं जमकर धज्जियां

स्मार्ट सिटी में कानून का हो रहा खुला उल्लंघन !

स्मार्ट सिटी की सड़कों पर ‘लोहे के अवैध कवच’ पहनकर दौड़ रहे सवारी वाहन

– करोड़ों खर्च कर लगाए गए कैमरों में क्यों नहीं कैद होती है मनमानी?

– चौराहों पर ड्यूटी में लगे यातायात पुलिस के जवान क्यों करते हैं अनदेखी ?

कानपुर। स्मार्ट सिटी कानपुर में सार्वजनिक परिवहन के नाम पर अराजकता का बोलबाला है। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों—कल्याणपुर, रावतपुर, पनकी, विजय नगर, बर्रा, गोविंद नगर, किदवई नगर, बाबूपुरवा, नौबस्ता, रामादेवी, बारादेवी, झकरकटी, फजलगंज, टाटमिल, चुन्नीगंज, जरीब चौकी सहित अधिकतर क्षेत्रों में चलने वाले विक्रम टेम्पो, ऑटो और ई-रिक्शा के मालिकों के मनमाने रवैये ने सड़कों को असुरक्षित बना दिया है। इन वाहनों की बॉडी के चारों ओर अवैध रूप से लगाए गए लोहे के भारी एंगल न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहे हैं।

मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के अनुसार, वाहनों की मूल संरचना (Structure) में इस तरह का बदलाव मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act) की धारा 52 का स्पष्ट उल्लंघन है।

वहीं वाहन की लंबाई, चौड़ाई या वजन में कोई भी ऐसा बदलाव जो आरसी (Registration Certificate) के विपरीत हो, पूरी तरह प्रतिबंधित है।

वहीं इन्हीं अवैध एंगलों की वजह से चालक, धारा 184 के तहत ‘खतरनाक ड्राइविंग’ को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि उन्हें अपने वाहन के क्षतिग्रस्त होने का डर नहीं रहता है।

स्मार्ट सिटी में चलने वाले ऑटो-विक्रम, ई रिक्शा चालक, अपने मनमुताबिक, लोहे के जालीदार एंगलों का इस्तेमाल ‘सुरक्षा कवच’ की तरह कर रहे हैं। जिसके कारण शहर के व्यस्त चौराहों पर आए दिन छोटी-मोटी भिड़ंत होती रहती है, जिससे कई बार विवाद पैदा हो जाता है और जाम की स्थिति पैदा होती है।

डिजिटल निगरानी पर सवाल ? आईटीएमएस (ITMS) के तहत लगे कैमरों की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर ये ‘मोडिफाइड’ वाहन चालान की जद से बाहर कैसे और क्यों हैं? वहीं यातायात पुलिस के जवानों की नजर इस ओर क्यों नहीं जाती ?

ऐसे में जरूरी है कि संभागीय परिवहन विभाग व यातायात पुलिस, एक साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाये और ऑटो – विक्रम व ई – रिक्शाओं में लगे अवैध एंगलों को मौके पर ही कटवाकर जब्त किया जाए।

~प्रेषक श्याम सिंह पंवार सम्पादक दैनिक जन सामना

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बीएसएनएल ने दिवाली पर एक महीने के लिए मुफ्त मोबाइल सेवाओं का ऑफर दिया

भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) भारत की अग्रणी सरकारी दूरसंचार प्रदाता कंपनी है। इसने दिवाली के अवसर पर नए ग्राहकों को एक महीने की अवधि के लिए केवल एक रुपए के टोकन शुल्क पर 4जी मोबाइल सेवाएं देने की पेशकश की है।

यह दिवाली बोनान्ज़ा 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2025 तक जारी रहेगा।

योजना लाभ (दिवाली बोनान्ज़ा योजना):

  • असीमित वॉयस कॉल (योजना नियम व शर्तों के अनुसार)
  • 2 जीबी/दिन हाई-स्पीड डेटा
  • 100 एसएमएस/दिन
  • निःशुल्क सिम (दूरसंचार विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार केवाईसी)

उपरोक्त प्रस्ताव की घोषणा करते हुए बीएसएनएल के सीएमडी श्री ए. रॉबर्ट जे. रवि ने कहा:

बीएसएनएल ने हाल ही में देश भर में मेक-इन-इंडिया, अत्याधुनिक 4जी मोबाइल नेटवर्क स्थापित किया है, जो आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है। दिवाली बोनान्ज़ा प्लान—पहले 30 दिनों के लिए बिल्कुल मुफ़्त सेवा शुल्क—ग्राहकों को हमारे स्वदेशी रूप से विकसित 4जी नेटवर्क का अनुभव करने का गौरवपूर्ण अवसर प्रदान करता है। हमें विश्वास है कि सेवा की गुणवत्ता, कवरेज और बीएसएनएल ब्रांड से जुड़ा विश्वास ग्राहकों को मुफ़्त 30 दिनों की अवधि से भी आगे तक हमारे साथ बने रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

दिवाली बोनान्ज़ा योजना कैसे प्राप्त करें?

  1. निकटतम बीएसएनएल ग्राहक सेवा केंद्र (सीएससी) पर जाएं (वैध केवाईसी दस्तावेज साथ रखें)।
  2. दिवाली बोनान्ज़ा प्लान (₹1 एक्टिवेशन) का अनुरोध करें; केवाईसी पूरा करें और अपना निःशुल्क सिम प्राप्त करें।
  3. सिम डालें और उसे सक्रिय करने की प्रक्रिया निर्देशानुसार पूरी करें; आपके 30-दिन के निःशुल्क लाभ सक्रियण की तिथि से शुरू हो जाएंगे।
  4. सहायता के लिए 1800-180-1503 पर कॉल करें या bsnl.co.in पर जाएं।

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