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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के अमरेली में 4,900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के अमरेली में 4,900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। आज की विकास परियोजनाओं में रेल, सड़क, जल विकास और पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से राज्य के अमरेली, जामनगर, मोरबी, देवभूमि द्वारका, जूनागढ़, पोरबंदर, कच्छ और बोटाद जिलों के नागरिकों को लाभ होगा।

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने धनतेरस एवं दिवाली की उत्सव की भावना को रेखांकित किया और कहा कि जहां ये त्योहार संस्कृति का उत्सव मनाते हैं, वहीं विकास कार्यों में जारी प्रगति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने वडोदरा की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए गुजरात भर में विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं के संबंध में अपडेट साझा किए। वडोदरा में उन्होंने भारतीय वायुसेना के लिए भारत में निर्मित विमान के उत्पादन के लिए समर्पित भारत की पहली फैक्ट्री का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने आज पहले अमरेली में भारत माता सरोवर के उद्घाटन का उल्लेख किया और कहा कि यहां पानी, सड़क तथा रेलवे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं सौराष्ट्र और कच्छ में लोगों के जीवन को आसान बनायेंगी, क्षेत्रीय विकास को गति देंगी, स्थानीय किसानों को समृद्ध करेंगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगी। उन्होंने आज की विकास परियोजनाओं के लिए सभी को बधाई दी।

इस बात का उल्लेख करते हुए कि यह सौराष्ट्र में अमरेली की भूमि ने भारत को कई रत्न दिए हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक और राजनीतिक रूप से, हर तरह से अमरेली का एक गौरवशाली अतीत है। उन्होंने कहा कि अमरेली श्री योगीजी महाराज और भोज भगत के साथ-साथ लोक गायक एवं कवि दुलभय्या काग, कलापी जैसे कवियों, विश्व प्रसिद्ध जादूगर के. लाल और आधुनिक कविता के अगुआ रमेश पारेख की कर्मभूमि है। उन्होंने आगे कहा कि अमरेली ने गुजरात को पहला मुख्यमंत्री श्री जीवराज मेहता जी भी दिया है। श्री मोदी ने कहा कि अमरेली के बच्चों ने समाज में बड़ा योगदान देकर व्यापार जगत में भी बड़ा नाम कमाया है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को ढोलकैया परिवार ने मजबूत किया है, जो गुजरात सरकार की जल संरक्षण से संबंधित 80/20 योजनाओं से जुड़ा था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले ढाई दशकों के निरंतर प्रयासों के कारण परिवर्तन बिल्कुल स्पष्ट हैं।

प्रधानमंत्री ने पानी के महत्व पर जोर दिया, खासकर गुजरात और सौराष्ट्र के लोगों के लिए, जो लंबे समय से पानी से संबंधित चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने उस अतीत को याद किया जब सौराष्ट्र पानी की कमी के कारण पलायन के लिए जाना जाता था और कहा, “आज, स्थिति बदल गई है। अब, नर्मदा का पानी गांवों तक पहुंच गया है।” उन्होंने जलसंचय और सौनी योजना जैसी सरकारी पहलों की सराहना की। इन पहलों ने भूजल के स्तर में काफी वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि नदियों के गहरीकरण तथा चेक डैम के निर्माण से बाढ़ की समस्या से निपटा जा सकता है और वर्षा के जल का भी प्रभावी ढंग से भंडारण किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि आसपास के क्षेत्रों में पेयजल से संबंधित समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा, जिससे लाखों लोगों को लाभ होगा।

प्रधानमंत्री ने पिछले दो दशकों के दौरान हर घर और खेत तक पानी पहुंचाने की दिशा में गुजरात की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला, जो पूरे देश के लिए एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हर कोने तक पानी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के निरंतर प्रयास जारी हैं तथा आज की परियोजनाओं से उस क्षेत्र के लाखों लोगों को और अधिक लाभ होगा। श्री मोदी ने बताया कि नवदा-चावंड बल्क पाइपलाइन परियोजना से अमरेली, बोटाद, जूनागढ़, राजकोट और पोरबंदर जैसे जिलों को प्रभावित करने वाले लगभग 1,300 गांवों और 35 से अधिक शहरों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से इन क्षेत्रों में हर दिन 30 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी की आपूर्ति होगी। पासवी समूह सौराष्ट्र क्षेत्रीय जल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण के शिलान्यास का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तलाजा, महुवा और पालीताना तालुका की जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने बताया, “एक बार पूरा हो जाने पर, लगभग 100 गांवों को इस परियोजना से सीधे लाभ होगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की ये जल परियोजनाएं सार्वजनिक भागीदारी के साथ सरकार और समाज के बीच की सहयोगात्मक शक्ति का उदाहरण पेश करती हैं। उन्होंने प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवरों के निर्माण के माध्यम से भारत की आजादी के 75वें वर्ष को जल संरक्षण पहल से जोड़ने की सफलता पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने गांवों में 60,000 अमृत सरोवरों के निर्माण पर प्रसन्नता व्यक्त की, जो भावी पीढ़ियों के लिए एक विरासत छोड़ेंगे। उन्होंने श्री सी. आर. पाटिल के नेतृत्व में गति पकड़ रहे ‘कैच द रेन’ अभियान की सराहना की। प्रधानमंत्री ने बताया कि यह अभियान राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है, जहां सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से हजारों पुनर्भरण कुओं का निर्माण किया जा रहा है। श्री मोदी ने अपने पैतृक गांवों में पुनर्भरण कुएं बनाने के लिए आगे आने वाले लोगों के उत्साह को भी स्वीकार किया और इस बात पर जोर दिया कि कैसे यह पहल गांवों और खेतों में स्थानीय जल का प्रतिधारण सुनिश्चित करती है। उन्होंने आज सैकड़ों परियोजनाओं की शुरुआत का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य जल संरक्षण के माध्यम से कृषि और पशुधन को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि अब अधिक पानी की उपलब्धता के कारण खेती आसान हो गई है और नर्मदा के पानी से अब अमरेली में तीन मौसम की खेती संभव है। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज, अमरेली जिला खेती के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है।” उन्होंने कहा कि कपास, मूंगफली, तिल तथा बाजरा जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा मिल रहा है और अमरेली के गौरव केसर आम को जीआई टैग हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि जीआई टैग के दर्जे का मतलब है कि अमरेली की पहचान केसर आम से जुड़ी है, चाहे वह दुनिया में कहीं भी बेचा जाए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमरेली तेजी से प्राकृतिक खेती के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहा है और देश का पहला प्राकृतिक खेती विश्वविद्यालय हलोल में बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के तहत अमरेली को गुजरात का पहला प्राकृतिक खेती से संबंधित कॉलेज मिला है। श्री मोदी ने कहा कि प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक किसान पशुपालन में संलग्न हों और प्राकृतिक खेती से भी लाभान्वित हों। इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि हाल के वर्षों में अमरेली के डेयरी उद्योग ने काफी प्रगति की है, श्री मोदी ने कहा कि यह केवल सरकार और सहकारी समितियों के संयुक्त प्रयासों के कारण ही संभव हुआ है। वर्ष 2007 में अमर डेयरी की स्थापना को याद करते हुए जब 25 गांवों की सरकारी समितियां उससे जुड़ी थीं, श्री मोदी ने कहा, “आज 700 से अधिक सहकारी समितियां अमर डेयरी से जुड़ी हैं और हर दिन लगभग 1.25 लाख लीटर दूध एकत्र किया जा रहा है”।

मीठी क्रांति के कारण अमरेली की प्रसिद्धि का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि शहद उत्पादन ने किसानों को आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि अमरेली के सैकड़ों किसानों ने मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेने के बाद शहद से संबंधित व्यवसाय शुरू किया है।

बिजली के बिलों को खत्म करने और प्रत्येक परिवार के लिए 25,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये की वार्षिक बचत सुनिश्चित करते हुए बिजली से आय उत्पन्न करने से संबंधित प्रधानमंत्री सूर्य गढ़ योजना के बारे में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि इस योजना के कार्यान्वयन के कुछ ही महीनों बाद पूरे गुजरात में छतों पर लगभग 200,000 सौर पैनल स्थापित किए गए हैं।  उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अमरेली जिला सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसका उदाहरण दुधाला गांव है, जहां सैकड़ों घरों में सौर पैनल लगे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “इसके परिणामस्वरूप, यह गांव बिजली बिल में प्रति माह लगभग 75,000 रुपये की बचत कर रहा है और प्रत्येक घर को 4,000 रुपये की वार्षिक बचत का लाभ मिल रहा है।” उन्होंने कहा, “दुधाला तेजी से अमरेली का पहला सौर गांव बनने की ओर अग्रसर है।”

इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि सौराष्ट्र कई पवित्र स्थलों और आस्था से जुड़े स्थानों की मेजबानी करने वाला पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है, प्रधानमंत्री ने पर्यटकों के आकर्षण के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में सरदार सरोवर बांध के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले साल सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा को देखने के लिए 50 लाख से ज्यादा पर्यटक आए थे। उन्होंने सरदार साहब की जयंती के लिए दो दिनों में इस स्थल का दौरा करने और राष्ट्रीय एकता परेड देखने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केर्ली पुनर्भरण जलाशय आने वाले समय में इको-टूरिज्म का एक प्रमुख केन्द्र बनेगा और एडवेंचर टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह केर्ली पक्षी अभयारण्य को दुनिया में एक नई पहचान भी देगा।

गुजरात की लंबी तटरेखा पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि विरासत के संरक्षण के साथ-साथ विकास सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए, मत्स्यपालन और बंदरगाहों से संबंधित सदियों पुरानी विरासत को पुनर्जीवित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के निर्माण को मंजूरी देने का उल्लेख किया और कहा कि यह कदम देश तथा दुनिया को भारत की गौरवशाली समुद्री विरासत से परिचित कराएगा और प्रेरित करेगा।

श्री मोदी ने कहा, “हमारा प्रयास है कि समुद्र का नीला पानी नीली क्रांति को गति दे।” उन्होंने कहा कि बंदरगाह आधारित विकास से विकसित भारत का संकल्प मजबूत होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बताया कि जाफराबाद, शियालबेट में मछुआरों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है; जबकि अमरेली में पीपावाव बंदरगाह के आधुनिकीकरण ने 10 लाख से अधिक कंटेनरों और हजारों वाहनों को संभालने की क्षमता के साथ-साथ आज हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं। श्री मोदी ने पीपावाव बंदरगाह और गुजरात के ऐसे हर बंदरगाह को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के सरकार के प्रयास पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने इस बात को दोहराया कि गरीबों के लिए पक्के घर, बिजली, सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे और गैस पाइपलाइन जैसे बुनियादी ढांचे विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में बुनियादी ढांचे के विकास पर तेजी से काम कर रही है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सौराष्ट्र में बेहतर बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी के लाभों ने औद्योगिक विकास को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा, “रो-रो फेरी सेवा के शुभारंभ से सौराष्ट्र और सूरत के बीच कनेक्टिविटी सरल हो गई है तथा हाल के वर्षों में 7 लाख से अधिक लोग इससे लाभान्वित हुए हैं। एक लाख से अधिक कारों और 75,000 से अधिक ट्रकों और बसों का परिवहन किया गया है, जिससे समय और धन दोनों की बचत हुई है।”

प्रधानमंत्री ने जामनगर से अमृतसर-भटिंडा तक आर्थिक गलियारे के निर्माण में तेजी से प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “इस परियोजना से गुजरात से पंजाब तक सभी राज्यों को लाभ होगा। आज सड़क परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास से जामनगर और मोरबी जैसे प्रमुख औद्योगिक केन्द्रों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी, सीमेंट कारखानों तक सुगमता बढ़ेगी और साथ ही सोमनाथ एवं द्वारका के लिए आसान तीर्थयात्रा की सुविधा मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि कच्छ में रेलवे कनेक्टिविटी के विस्तार से सौराष्ट्र एवं कच्छ में पर्यटन तथा औद्योगिकीकरण को और मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, “जैसे-जैसे भारत तेजी से विकास कर रहा है, दुनिया में भारत का गौरव भी लगातार बढ़ता जा रहा है।” उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को नये परिपेक्ष्य में देख रही है, भारत की क्षमताओं को पहचान रही है और भारत की बात को गंभीरता से सुन रही है।” इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कि इन दिनों हर कोई भारत की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है, श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि इसमें गुजरात की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि गुजरात ने दुनिया को दिखाया है कि भारत के हर शहर और गांव में कितनी संभावनाएं हैं। रूस में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने हेतु अपनी हालिया यात्रा का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि हर कोई भारत से जुड़ना और निवेश करना चाहता है। प्रधानमंत्री ने जर्मनी के चांसलर की हाल की यात्रा और उनके साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जर्मनी ने अब वार्षिक वीजा कोटा मौजूदा 20 हजार से बढ़ाकर 90 हजार कर दिया है, जिससे भारतीय युवाओं को लाभ होगा। श्री मोदी ने स्पेन के राष्ट्रपति की आज की गुजरात यात्रा और वडोदरा में परिवहन विमान निर्माण कारखाने के रूप में स्पेन के भारी निवेश पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इससे गुजरात में हजारों लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही विमान निर्माण से संबंधित एक संपूर्ण इकोसिस्टम का विकास होगा, जिससे लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था तो कहता था कि गुजरात के विकास से देश का विकास होता है। एक विकसित गुजरात, एक विकसित भारत के मार्ग को प्रशस्त करेगा।” उन्होंने आज की विकास परियोजनाओं के लिए सभी को बधाई दी।

इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल और सांसद श्री परषोत्तम रूपाला सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने अमरेली के दुधाला में भारत माता सरोवर का उद्घाटन किया। यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत गुजरात सरकार और ढोलकैया फाउंडेशन के बीच सहयोग के माध्यम से विकसित की गई है। ढोलकैया फाउंडेशन ने एक चेक डैम का उन्नयन किया है। मूल रूप से इस बांध में 4.5 करोड़ लीटर पानी को रोक सकने की  क्षमता थी। लेकिन इसे गहरा करने, चौड़ा करने और मजबूत करने के बाद, इसकी क्षमता बढ़कर 24.5 करोड़ लीटर हो गई है। इस उन्नयन से आस-पास के कुओं और कूपो का जलस्तर बढ़ गया है जिससे स्थानीय गांवों और किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा प्रदान करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने गुजरात के अमरेली में लगभग 4,900 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से राज्य के अमरेली, जामनगर, मोरबी, देवभूमि द्वारका, जूनागढ़, पोरबंदर, कच्छ और बोटाद जिलों के नागरिकों को लाभ होगा।

प्रधानमंत्री ने 2,800 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में एनएच 151, एनएच 151ए एवं एनएच 51 और जूनागढ़ बाईपास के विभिन्न खंडों को चार लेन का बनाना शामिल है। जामनगर जिले के ध्रोल बाईपास से मोरबी जिले के अमरान तक शेष खंड को चार लेन वाला बनाने की परियोजना का शिलान्यास भी किया गया।

प्रधानमंत्री ने लगभग 1,100 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हुई भुज-नालिया रेल गेज परिवर्तन परियोजना को राष्ट्र को समर्पित की। इस व्यापक परियोजना में 24 बड़े सेतु, 254 छोटे सेतु, 3 रोड ओवरब्रिज और 30 रोड अंडरब्रिज शामिल हैं तथा यह कच्छ जिले के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री ने अमरेली जिले के जल आपूर्ति विभाग की 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उद्घाटन की गई परियोजनाओं में नवदा से चावंड बल्क पाइपलाइन शामिल है जो बोटाद, अमरेली, जूनागढ़, राजकोट और पोरबंदर जिलों के 36 शहरों और 1,298 गांवों में लगभग 67 लाख लाभार्थियों को अतिरिक्त 28 करोड़ लीटर पानी प्रदान करेगी। भावनगर जिले में पासवी समूह की संवर्धित जल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण का शिलान्यास भी किया गया, जिससे भावनगर जिले के महुवा, तलाजा और पालीताना तालुका के 95 गांवों को लाभ होगा।

प्रधानमंत्री ने पर्यटन से जुड़ी विभिन्न विकास संबंधी पहलों का शिलान्यास भी किया, जिसमें पोरबंदर जिले के मोकरसागर में केर्ली पुनर्भरण जलाशय को एक विश्वस्तरीय टिकाऊ इको-पर्यटन स्थल में बदलना शामिल है।

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केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व-संध्या पर ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाई

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज यहां सरुसजाई खेल परिसर से ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाई। ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ की पूर्व-संध्या पर आयोजित इस दौड़ में श्री सोनोवाल ने देश को एकजुट करने और एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की नींव रखने में सरदार वल्लभ भाई पटेल के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। केंद्रीय मंत्री के साथ असम सरकार के मंत्री श्री केशव महंत और गुवाहाटी के सांसद श्री बिजुली कलिता मेधी भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के साथ मिलकर असम सरकार के सहयोग से किया था।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “भारत के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को बहाल किया और एक मजबूत और समृद्ध भारत की नींव रखी। उनकी जयंती की पूर्व-संध्या पर, हम राष्ट्रीयता के विचार को घर तक पहुंचाने के लिए ‘रन फॉर यूनिटी’ मना रहे हैं। देश को एकीकृत करने और एकीकृत करने में सरदार पटेल के अमूल्य योगदान ने भारत की गाथा को आकार देने के लिए एक मजबूत आधार सुनिश्चित किया। इस नींव की बदौलत हम 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। सरदार पटेल के आशीर्वाद से, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के आदर्श वाक्य के साथ देश का नेतृत्व कर रहे हैं। आप सभी को, विशेषकर युवाओं को इस ‘रन फॉर यूनिटी’ के माध्यम से सरदार पटेल के महान आदर्शों का जश्न मनाते हुए देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। भारत रत्न सरदार पटेल का चिरस्थायी योगदान देश के प्रत्येक नागरिक को प्रेरित करता रहेगा।”

इस दौड़ में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें युवाओं और स्कूली छात्रों की भागीदारी सबसे ज़्यादा थी। धावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, सरुसजाई स्टेडियम के चारों ओर बनाए गए रन-इन ट्रेल का अनुसरण करते हुए इसे पूरा किया और दौड़ के विचार के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता दिवस के विचार के साथ जुड़ने की अपनी इच्छा व्यक्त की।

वर्ष 2015 से 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर देश के लोग राष्ट्रवाद के महान प्रतीक को याद करते हैं और भारत की एकता और अखंडता की शपथ लेते हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के दौरान दीपावली के त्यौहार के अवसर पर 31 अक्टूबर के बजाय आज ‘रन फॉर यूनिटी’ का उत्सव मनाने का आह्वान किया था।

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देश भर में ग्राम पंचायतों को सबल बनाने के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णय

देश भर में जमीनी स्तर पर शासन की प्रभावशीलता को और बढ़ाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) के सचिव श्री विवेक भारद्वाज की अध्यक्षता में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की केंद्र प्रायोजित संशोधित योजना की केंद्रीय अधिकारप्राप्त समिति (सीईसी) ने अपनी 8वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आरजीएसए के तहत मानकीकृत मानदेय को अपनाना, पंचायत अधिकारियों का दीर्घकालिक घरेलू प्रशिक्षण, स्मार्ट कक्षाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण, पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश पर विशेष ध्यान देते हुए देश भर में ग्राम पंचायत बुनियादी ढांचे में निवेश सम्बंधी प्रमुख निर्णय लिए गये।

आरजीएसए के अंतर्गत मानकीकृत मानदेय प्रणाली को अपनाना

सीईसी ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मास्टर प्रशिक्षकों, अतिथि संकायों और विशेष संसाधन के तौर पर काम करने वाले व्यक्तियों के लिए मानदेय दरों के मानकीकरण को मंजूरी दी। यह निर्णय न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित करता है और उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षकों की उपलब्धता को बढ़ावा देता है, जो जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण कार्य में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। यह निर्णय पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) में प्रशिक्षण स्थिरता और क्षमता निर्माण के लिए मानदेय की असमानताओं को दूर करके एक नया मानदंड स्थापित करता है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों से लेकर सिक्किम और गोवा जैसे छोटे राज्यों तक, पूरे देश में प्रशिक्षण कार्य में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और साथ ही अपनी प्रशिक्षण पहलों को विस्तार दे रहें  बिहार, गुजरात, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश उच्च शिक्षा के लिए दीर्घकालिक घरेलू प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए पंचायत अधिकारियों को प्रायोजित करेंगे

आरजीएसए के राज्य घटक के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पीआरआई और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के लिए एक वर्ष तक की अवधि वाले “दीर्घकालिक घरेलू प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए वित्त पोषण” को मंजूरी दे दी गई है। इस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारियों को उत्कृष्ट संस्थानों से उन्नत, क्षेत्र-विशिष्ट प्रशिक्षण मिले, जो जमीनी स्तर पर बेहतर सेवा सुविधाओं के लिए उनके कौशल को उन्नत करेगा। यह विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली को मजबूत करने और कार्यान्वयन दक्षता में सुधार करने के आरजीएसए के उद्देश्य के अनुरूप है। यह ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन में भूमिका निभा रहें अधिकारियों की समग्र योग्यता को बढ़ावा देगा, जिससे जमीनी स्तर पर योजना में सुधार होगा। इसके परिणामस्वरूप कुछ वर्षों की अवधि में पीआरआई में पूंजी निर्माण में सहायक व्यापक तौर पर श्रम कौशल में दक्ष कामगारों की संख्या में वृद्धि होगी।

यह निर्णय सभी सहभागी राज्यों में पीआरआई कार्यकर्ताओं के गहन कौशल में वृद्धि की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करता है। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानिक नियोजन, संसाधन जुटाना और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को शामिल करके  केरल के तटीय क्षेत्रों से लेकर हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों तक विविध भौगोलिक संदर्भों में ग्रामीण विकास के लिए अधिकारियों आवश्यक व्यापक ज्ञान बढ़ाना है। इस निर्णय से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लाभ होगा क्योंकि अब उत्तर पूर्व (एनई) और पहाड़ी राज्य उच्च शिक्षा के लिए 10-10 उम्मीदवारों को प्रायोजित कर सकते हैं, केंद्र शासित प्रदेश और गोवा अपने यहां से 5 आवेदकों को प्रायोजित कर सकते हैं जबकि अन्य राज्य 20 उम्मीदवारों को प्रायोजित कर सकते हैं।

पंचायती बुनियादी ढांचे को बढ़ावा

बुनियादी ढांचे में विस्तार के लिए, सीईसी ने आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों में सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के साथ 3,301 ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण को मंजूरी दी और ग्राम पंचायतों के लिए 22,164 कंप्यूटर स्वीकृत किए है। यह निर्णय इन राज्यों में पंचायती राज प्रणाली को बढ़ावा देता है क्योंकि यह सीधे  तौर पर बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करता है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रशासनिक कामकाज और डिजिटल शासन को सक्षम किया जा सकता है। समर्पित भवनों और कंप्यूटर उपकरणों के प्रावधान से रिकॉर्ड को कुशल तरीके से संभाल कर रखने और ई-गवर्नेंस की सुविधा मिलेगी, जिससे स्थानीय प्रशासन के संचालन और सेवा सुविधाओं में काफी वृद्धि होगी।

पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्मार्ट कक्षाओं में प्रशिक्षित किया जाएगा

देश भर में राज्य और जिला स्तर पर पंचायत संसाधन केंद्रों के आधुनिकीकरण के लिए, 25 राज्यों में राज्य पंचायत संसाधन केंद्रों (एसपीआरसी) के साथ-साथ 395 जिलों में जिला पंचायत संसाधन केंद्रों (डीपीआरसी) में स्थित कंप्यूटर प्रयोगशालाओं को नवीनतम तकनीक के अधिक संख्या में कंप्यूटरों के साथ आधुनिक बनाया जाएगा। साथ ही, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इन एसपीआरसी और डीपीआरसी में तकनीकी शैक्षिक सहायक उपकरण स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राज्य और जिला पंचायत संसाधन केंद्रों (एसपीआरसी/डीपीआरसी) को अपग्रेड करने का यह निर्णय, प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाएगा और एक अनुकूल शिक्षण वातावरण तैयार करेगा। प्रोजेक्टर, एलसीडी, इंटरैक्टिव पैनल और पीए सिस्टम सहित डिजिटल उपकरणों को एकीकृत करके, प्रशिक्षण केंद्र उच्च गुणवत्ता वाले क्षमता निर्माण कार्यक्रम के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित होंगे।

पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों के सशक्त गांवों के पंचायती बुनियादी ढांचे में निवेश

पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के लिए बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने के लिए कई निर्णय लिए गए हैं। पिछले वर्षों में मंत्रालय ने इन क्षेत्रों में निवासियों की सुविधा के लिए पंचायत भवनों के निर्माण के साथ-साथ सामान्य सेवा केंद्र की स्थापना का भी समर्थन किया है। जम्मू-कश्मीर में मंत्रालय ने 2024-25 के दौरान 970 ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण और 1606 सामान्य सेवा केंद्रों की सह-स्थापना का समर्थन किया है।

इस बैठक में अरुणाचल प्रदेश में 400 पंचायत भवन-सह-सामान्य सेवा केन्द्रों के निर्माण का निर्णय लिया गया है । यह पिछले दिनों पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 939 ग्राम पंचायत भवनों के लिए सीएससी के साथ किए गए सहयोग का ही एक हिस्सा है। इसी तरह, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, असम, मणिपुर सहित पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के लिए पंचायत बुनियादी ढांचे का समर्थन किया गया है। कुल मिलाकर, पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए 1633 ग्राम पंचायत भवन और 514 सीएससी को मंजूरी दी गई है।

इन पहलों का उद्देश्य सशक्त गांवों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना और जमीनी स्तर पर आवश्यक सेवाएं प्रदान करना है।

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प्रतीक आवंटन के उपरान्त प्रचार अवधि के दौरान सीसामऊ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के सभी प्रत्याशियो द्वारा निजी रूप से स्वंय उपस्थित होना होगा

कानपुर नगर, दिनांक 29 अक्टूबर, 2024* जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि 213-विधानसभा क्षेत्र उप निर्वाचन-2024 हेतु भारत निर्वाचन आयोग, नयी दिल्ली द्वारा प्रदत्त निर्देश के क्रम में प्रतीक आबंटन के उपरान्त प्रचार अवधि के दौरान 213-सीसामऊ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के सभी प्रत्याशियो द्वारा निजी रूप से स्वंय या अपने निर्वाचन एजेण्ट के माध्यम से या अपने द्वारा विधिवत रूप से प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा मा0 व्यय प्रेक्षक/निरीक्षक के लिए पदभिहित अधिकारी के सम्मुख/समक्ष अपने व्यय रजिस्टर का तीन वार निरीक्षण कलेक्ट्रेट सभागार कानपुर नगर में कराना सुनिश्चित करेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रथम निरीक्षण दिनांक 05 नवम्बर, 2024, द्वितीय निरीक्षण दिनांक 08 नवम्बर, 2024 एवं तृतीय निरीक्षण दिनांक 11 नवम्बर, 2024 को प्रातः 10ः00 बजे से सायं 05ः00 बजे तक किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि लेखा समाधान बैठक निर्वाचन परिणाम की घोषणा के 26वें दिन जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में दिनांक 18 दिसम्बर, 2024 को प्रातः 10ः00 बजे से सायं 05ः00 बजे तक कलेक्ट्रेट सभागार में प्रस्तावित है।
अतः 213-सीसामऊ विधानसभा उप निर्वाचन-2024 से चुनाव लड़ने वाले समस्त प्रत्याशीगण स्वंय अथवा उनके द्वारा अधिकृत निर्वाचन एजेण्ट अपने से सम्बन्धित निर्धारित तिथियों में अपना व्यय लेखा से सम्बन्धित रजिस्टर मिलान हेतु प्रस्तुत करेंगें। उक्त के साथ आप समस्त दैनिक व्यय लेखा पंजिका, बैंक पंजिका, बिल/वाउचर्स, बैंक स्टेटमेण्ट की छाया प्रतियाँ 03 सेट में आवश्यक रूप से प्रस्तुत/उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। लेखा प्रस्तुत करने हेतु निर्धारित तिथि के एक दिन पूर्व तक का लेखा सम्बन्धित अभ्यर्थीगण द्वारा प्रस्तुत किया जाना सुनिश्चित किया जायेगा। मिलान/निरीक्षण की निर्धारित तिथियों में व्यय लेखा प्रस्तुत न किये जाने की स्थिति में नियमानुसार नोटिस जारी करते हुए सम्बन्धित प्रत्याशी/अभ्यर्थी के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए जनसभा, जुलूस तथा वाहन इत्यादि की निर्गत परमीशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की कार्यवाही की जायेगी।

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भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र (I4C), गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संगठित साइबर अपराधियों द्वारा अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘mule’ बैंक खातों का उपयोग कर बनाए गए उन गैर-कानूनी पेमेंट गेटवे के खिलाफ़ अलर्ट जारी किया है, जो मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त हैं

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र (I4C), गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय संगठित साइबर अपराधियों (Transnational Organized Cybercriminals) द्वारा अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘mule’ बैंक खातों का उपयोग कर बनाए गए उन गैर-कानूनी पेमेंट गेटवे के खिलाफ़ अलर्ट जारी किया है, जो मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त हैं। गुजरात पुलिस (FIR संख्या – 0113/2024) और आंध्र प्रदेश पुलिस (FIR संख्या – 310/2024) द्वारा हाल ही में की गई राष्ट्रव्यापी छापेमारी में पता चला कि अंतरराष्ट्रीय अपराधियों ने ‘mule’ या किसी और के खातों का संचालन कर अवैध डिजिटल पेमेंट गेटवे बनाए हैं। मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त इस अवैध तंत्र का इस्तेमाल साइबर अपराधों से हासिल अवैध धन की लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है ।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय, सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से साइबर सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए हरसंभव कदम उठा रहा है।

राज्यों की पुलिस एजेंसियों से प्राप्त जानकारी और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा किए गये विश्लेषण के अनुसार, निम्नलिखित बिन्दुओं की पहचान की गई :

I. चालू खाते (Current Account) और बचत खाते (Savings Account) सोशल मीडिया, खासकर Telegram और Facebook के माध्यम से खोजे जाते हैं; ये खाते shell कंपनियों / एंटरप्राइज या व्यक्तियों के होते हैं।

II. इन mule खातों को विदेशों से संचालित किया जाता है।

III. फिर इन mule खातों का उपयोग कर अवैध पेमेंट गेटवे बनाया जाता है, जिसे आपराधिक सिंडिकेट को फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कैम साइटों, offshore सट्टेबाजी और जुए से जुडी वेबसाइटों, फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म आदि जैसे अवैध प्लेटफार्मों पर जमा हुई धनराशि प्राप्त करने के लिए दिया जाता है।

IV. जैसे ही अपराध से अवैध धन प्राप्त होता है, उसे तुरंत दूसरे खाते में डाल दिया जाता है। इसके लिए बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली Bulk Payout की सुविधा का दुरुपयोग किया जाता है।

 

अभियान के तहत जिन पेमेंट गेटवे की पहचान की गई, उनमें PeacePay, RTX Pay, PoccoPay, RPPay आदि शामिल हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ये गेटवे, मनी लॉन्ड्रिंग को एक सेवा के रूप में उपलब्ध कराते हैं और इन्हें विदेशी नागरिकों द्वारा संचालित किया जाता है।

I4C ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खाते/कंपनी पंजीकरण प्रमाणपत्र/’उद्यम आधार’ पंजीकरण प्रमाणपत्र किसी को न बेचें और न ही किराए पर दें। ऐसे बैंक खातों में किसी और द्वारा जमा अवैध धनराशि के लिए गिरफ़्तारी सहित अन्य कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। बैंक उन खातों के दुरुपयोग की पहचान करने के लिए जाँच कर सकते हैं जिनका इस्तेमाल अवैध पेमेंट गेटवे बनाने के लिए किया जाता है। नागरिक किसी भी साइबर अपराध की सूचना हेल्पलाइन नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in पर तुरंत दें और सोशल मीडिया पर “CyberDost” चैनल/अकाउंट को फ़ॉलो करें

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रोजगार मेले के तहत सरकारी विभागों और संगठनों में 51,000 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 29 अक्टूबर, 2024 को सुबह 10:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 51,000 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। प्रधानमंत्री रोजगार मेले को संबोधित भी करेंगे।

रोज़गार मेला रोज़गार सृजन को प्राथमिकता देने की प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए सार्थक अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाएगा।

देश भर में 40 स्थानों पर रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें नए कर्मचारी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों, जैसे राजस्व विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय आदि में शामिल होंगे।

नई भर्तियों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन मॉड्यूल ‘कर्मयोगी प्रारम्भ’ के माध्यम से आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 1400 से अधिक ई-लर्निंग पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं जो नई भर्तियों को अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाने और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करें

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने गुजरात के वडोदरा में सी-295 विमान निर्माण के लिए टा टाएयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री श्री पेड्रो सांचेज ने आज गुजरात के वडोदरा में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) परिसर में सी-295 विमान निर्माण के लिए टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि स्पेन के प्रधानमंत्री श्री पेड्रो सांचेज की यह पहली भारत यात्रा है और आज दोनों देशों के बीच साझेदारी को नई दिशा मिल रही है। सी-295 विमान निर्माण के लिए टाटा एयरक्राफ्ट कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के बारे में चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे न केवल दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे, बल्कि ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ मिशन को भी गति मिलेगी। श्री मोदी ने इस अवसर पर एयरबस और टाटा की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने स्वर्गीय श्री रतन टाटा जी को भी श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सी-295 विमान का कारखाना नए भारत की नई कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश में किसी भी परियोजना की अवधारणा से लेकर क्रियान्वयन तक भारत की गति यहां देखी जा सकती है। अक्टूबर 2022 में कारखाने के शिलान्यास को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संयंत्र अब सी-295 विमानों के उत्पादन के लिए तैयार है। परियोजनाओं की योजना बनाने और उनके क्रियान्वयन में होने वाली बेहिसाब देरी को खत्म करने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वडोदरा में बॉम्बार्डियर ट्रेन कोच निर्माण संयंत्र की स्थापना को याद किया। उन्होंने कहा कि यह कारखाना उत्पादन के लिए रिकॉर्ड समय में तैयार हो गया। उन्होंने कहा, “इस कारखाने में बने मेट्रो कोच आज दूसरे देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।” श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि आज उद्घाटन किए गए नए संयंत्र में बने विमानों का भी निर्यात किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध स्पेनिश कवि एंटोनियो मचाडो को उद्धृत करते हुए कहा कि जैसे ही हम लक्ष्य की ओर बढ़ना शुरू करते हैं, लक्ष्य की ओर जाने वाला रास्ता अपने आप बन जाता है। यह एहसास कराते हुए कि भारत का रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है, श्री मोदी ने कहा कि अगर 10 साल पहले ठोस कदम नहीं उठाए गए होते तो आज इस लक्ष्य तक पहुंचना असंभव होता। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले रक्षा विनिर्माण की प्राथमिकता और पहचान आयात को लेकर थी और कोई भी कल्पना नहीं कर सकता था कि भारत में इतने बड़े पैमाने पर रक्षा विनिर्माण हो सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने एक नए रास्ते पर चलने का फैसला किया, भारत के लिए नए लक्ष्य तय किए, जिसके परिणाम आज स्पष्ट हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र में परिवर्तन इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक सही योजना और साझेदारी संभावनाओं को समृद्धि में बदल सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि रणनीतिक निर्णयों ने पिछले दशक में भारत में एक जीवंत रक्षा उद्योग के विकास को बढ़ावा दिया है। श्री मोदी ने कहा, “हमने रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी का विस्तार किया, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को अधिक कुशल बनाया, आयुध कारखानों को सात प्रमुख कंपनियों में पुनर्गठित किया और डीआरडीओ तथा एचएएल को सशक्त बनाया।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा गलियारे स्थापित करने से इस क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। प्रधानमंत्री ने आई-डेक्स (रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार) योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसने पिछले पांच से छह वर्षों में रक्षा के क्षेत्र में लगभग 1,000 स्टार्टअप को बढ़ावा दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत के रक्षा निर्यात में 30 गुना वृद्धि हुई है, और देश अब 100 से अधिक देशों को उपकरण निर्यात कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कौशल और रोजगार सृजन पर जोर देते हुए कहा कि एयरबस-टाटा फैक्ट्री जैसी परियोजनाएं हजारों रोजगार पैदा करेंगी। उन्होंने कहा कि यह फैक्ट्री 18,000 विमान पुर्जों के स्वदेशी विनिर्माण को समर्थन देगी, जिससे पूरे भारत में एमएसएमई के लिए अपार अवसर उपलब्ध होंगे। इस ओर ध्यान दिलाते हुए कि भारत आज भी दुनिया की प्रमुख विमान कंपनियों के पुर्जों के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है, श्री मोदी ने कहा कि नई विमान फैक्ट्री भारत में नए कौशल और नए उद्योगों को बड़ा बढ़ावा देगी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वे आज के कार्यक्रम को परिवहन विमान के निर्माण से आगे भी देख रहे हैं। श्री मोदी ने पिछले दशक में भारत के विमानन क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि और परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत देश के सैकड़ों छोटे शहरों को हवाई संपर्क प्रदान कर रहा है। इतना ही नहीं, यह भारत को विमानन और एमआरओ डोमेन का केंद्र बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह इकोसिस्टम भविष्य में मेड इन इंडिया असैनिक विमानों का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। यह जानकारी देते हुए कि विभिन्न भारतीय एयरलाइनों ने 1200 नए विमानों का ऑर्डर दिया है, श्री मोदी ने कहा कि इसका मतलब यह है कि नवनिर्मित कारखाना भविष्य में भारत और दुनिया की जरूरतों को पूरा करने के लिए असैनिक विमानों के डिजाइन से लेकर निर्माण तक में प्रमुख भूमिका निभाएगा।

इस बात से अवगत कराते हुए कि वडोदरा शहर एमएसएमई का गढ़ है, श्री मोदी ने कहा कि यह शहर भारत के इन प्रयासों में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि शहर में एक गतिशक्ति विश्वविद्यालय भी है, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लिए पेशेवरों को तैयार कर रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वडोदरा में फार्मा सेक्टर, इंजीनियरिंग और भारी मशीनरी, केमिकल और पेट्रोकेमिकल, बिजली और ऊर्जा उपकरण जैसे कई क्षेत्रों से जुड़ी अनेक कंपनियां हैं। उन्होंने कहा कि अब यह पूरा क्षेत्र भारत में विमानन निर्माण का एक प्रमुख केंद्र भी बनने जा रहा है। श्री मोदी ने गुजरात सरकार और उसके मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल और उनकी पूरी टीम को उनकी आधुनिक औद्योगिक नीतियों और निर्णयों के लिए बधाई दी।

यह सूचित करते हुए कि वडोदरा भारत का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक शहर भी है, श्री मोदी ने कहा कि वे स्पेन से आए सभी मित्रों का स्वागत करते हुए अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत और स्पेन के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का अपना महत्व है।” उन्होंने कहा कि फादर कार्लोस वैले स्पेन से आए थे और गुजरात में बस गए थे और उन्होंने अपने जीवन के पचास साल यहां बिताए। उन्होंने यह भी कहा कि फादर वैले ने अपने विचारों और लेखन से संस्कृति को समृद्ध किया। श्री मोदी ने कहा कि उन्हें फादर वैले से मिलने का भी सौभाग्य मिला और भारत सरकार ने उनके महान योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

श्री मोदी ने कहा कि स्पेन में भी योग बहुत लोकप्रिय है और भारत में स्पेनिश फुटबॉल भी पसंद किया जाता है। श्री मोदी ने कल रियल मैड्रिड और बार्सिलोना क्लबों के बीच हुए फुटबॉल मैच के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि बार्सिलोना की शानदार जीत भारत में भी चर्चा का विषय रही और दोनों क्लबों के प्रशंसकों का उत्साह भारत में भी स्पेन की तरह ही था। प्रधानमंत्री ने भारत और स्पेन की बहुआयामी साझेदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा, “चाहे वह भोजन हो, फिल्म हो या फुटबॉल, हमारे लोगों के बीच मजबूत जुड़ाव ने हमेशा हमारे संबंधों को मजबूत किया है।” श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत और स्पेन ने 2026 को भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन और एआई के वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि आज का कार्यक्रम भारत और स्पेन के बीच कई नई संयुक्त सहयोग परियोजनाओं को प्रेरित करेगा। उन्होंने स्पेनिश उद्योग और नवोन्मेषकों को भारत आने तथा देश की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय विदेश मंत्री श्री एस जयशंकर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

सी-295 कार्यक्रम के तहत कुल 56 विमान वितरित किए जाने हैं, जिनमें से 16 स्पेन से एयरबस द्वारा सीधे वितरित किए जा रहे हैं और शेष 40 भारत में बनाए जाने हैं।

भारत में इन 40 विमानों को बनाने की जिम्मेदारी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की है। यह संयंत्र भारत में सैन्य विमानों के लिए निजी क्षेत्र की पहली फाइनल असेंबली लाइन (एफएएल) बन गई है। इसमें निर्माण से लेकर असेंबली, परीक्षण और विशिष्टता, विमान के पूरे जीवनचक्र की डिलीवरी और रखरखाव तक एक संपूर्ण इकोसिस्टम का पूर्ण विकास शामिल होगा।

टाटा के अलावा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड जैसी रक्षा क्षेत्र की अग्रणी सार्वजनिक इकाइयों के साथ ही निजी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इस कार्यक्रम में योगदान देंगे। इससे पहले अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री ने वडोदरा फाइनल असेंबली लाइन (एफएएल) की आधारशिला रखी थी।

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सर्जन वाइस एडमिरल कविता सहाय, सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल ने चिकित्सा सेवा (नौसेना) के महानिदेशक का पदभार संभाला

सर्जन वाइस एडमिरल कविता सहाय, सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल ने आज चिकित्सा सेवाएं (नौसेना) के महानिदेशक का पदभार संभाला। उन्हें 30 दिसंबर 1986 को सेना चिकित्सा कोर में कमीशन किया गया था।

कविता सहाय सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज पुणे की पूर्व छात्रा और पैथोलॉजी तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली से ऑन्कोपैथोलॉजी में विशेषज्ञता प्राप्त हैं। वह आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल) और बेस अस्पताल दिल्ली कैंट (बीएचडीसी) में प्रोफेसर और लैब साईंसिज की विभागाध्यक्ष भी रही हैं। खान सुरक्षा महानिदेशालय (नौसेना) के रूप में कार्यभार संभालने से पहले, वह सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज पुणे में पैथोलॉजी विभाग में भी प्रोफेसर रही हैं। वह सेना चिकित्सा कोर (एएमसी) ​​सेंटर और कॉलेज की पहली महिला कमांडेंट ओ आई/सी  रिकॉर्ड्स और आर्मी मेडिकल कोर की कर्नल कमांडेंट के रूप में चुनी जाने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। उनकी चिकित्सा शिक्षा में विशेष रुचि है और उन्हें वर्ष 2013-14 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया से मेडिकल शिक्षा के विकास के लिए प्रतिष्ठित फाउंडेशन फॉर एडवांसमेंट ऑफ इंटरनेशनल मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एफएआईएमईआर) फेलोशिप से सम्मानित किया गया था।

कविता सहाय को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए  वर्ष 2024 में सेवा पदक और वर्ष 2018 में विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2008 और वर्ष 2012 में दो बार सेना प्रमुख और 2010 में भारतीय सेना की पश्चिमी कमान (डब्ल्यूसी) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) द्वारा उनकी सराहना की गई।

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भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाने तथा हरित एवं स्वच्छ ग्रह सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुणे में बायोपॉलिमर्स के लिए भारत की पहली प्रदर्शन सुविधा का उद्घाटन किया

भारत को अर्थव्यवस्था में वैश्विक नेता बनाने और हरित एवं स्वच्छ ग्रह सुनिश्चित करने में अग्रणी देश बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली से पुणे के जेजुरी में बायोपॉलिमर के लिए भारत की पहली प्रदर्शन सुविधा का उद्घाटन किया। इस सुविधा का निर्माण प्राज इंडस्ट्रीज द्वारा किया गया है।

दर्शकों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “भारत में बायोपॉलिमर के लिए यह अपनी तरह की पहली प्रदर्शन सुविधा पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) बायोप्लास्टिक के उत्पादन के लिए स्वदेशी रूप से एकीकृत तकनीक विकसित करने में एक अग्रणी प्रयास है। यह टिकाऊ समाधानों के लिए भारत की प्रतिबद्धता के लिए एक महत्वपूर्ण विकास को दर्शाता है। यह जीवाश्म-आधारित प्लास्टिक से पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों में बदलाव के लिए भारत के संकल्प को दर्शाता है, जो वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण संकट को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है।”

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “भारत वैश्विक स्तर पर एक बेहद आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के देश को “आत्मनिर्भर” के रूप में स्थापित करने के दूरदर्शी प्रयास से प्रेरित है। हमारी जैव अर्थव्यवस्था 2023 में 150 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई है, और 2030 तक 300 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।”

केंद्रीय बजट (2023-2024) में हरित वृद्धि पर जोर, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का भारत को ‘नेट जीरो’ कार्बन अर्थव्यवस्था बनाने का विजन और अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’, जैव सुरक्षा, नैतिकता और समावेशी विकास पर आधारभूत ध्यान के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक-इन इंडिया’ के दोहरे लक्ष्यों को भी सक्षम करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र ने डीबीटी की बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति को मंजूरी दे दी है। बायोई3 नीति जलवायु परिवर्तन, घटते गैर-नवीकरणीय संसाधनों और असंवहनीय अपशिष्ट उत्पादन की पृष्ठभूमि में सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, “भारत अब बायोटेक में दुनिया में 12वें और एशिया-प्रशांत में तीसरे स्थान पर है। हम सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता और तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम हैं , “ उन्होंने कहा कि देश में बायोटेक इकोसिस्टम 95 बायो इनक्यूबेटर की स्थापना और बायोटेक स्टार्टअप की बढ़ती संख्या के साथ तेजी से उभर रहा है। बायोटेक स्टार्टअप ने उल्लेखनीय वृद्धि का अनुभव किया है, जो 2014 में लगभग 50 से बढ़कर 2023 में 8,500 से अधिक हो गया है। बायोटेक स्टार्टअप का उदय हमारी भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। ये प्रयास भारत को वैश्विक बायोप्लास्टिक आंदोलन में सबसे आगे रखते हैं, जो विश्‍व को दिखाते हैं कि कैसे जैव प्रौद्योगिकी एक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ भविष्य में योगदान दे सकती है।

उद्योग, शिक्षा और सरकार के बीच साझेदारी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह अभिनव विचारों को वास्तविक दुनिया के समाधानों में बदलने और अनुसंधान और विकास के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सुविधा भारत की जैव अर्थव्यवस्था के लिए एक नए अध्याय का प्रतीक है। यह तकनीकी नवाचार में अग्रणी होने की हमारी क्षमता को प्रदर्शित करता है और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए एक स्थायी मार्ग प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “अगले 25 वर्षों में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति के लिए “अमृत काल” के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी व्यवसायों के बीच व्यापक तालमेल का समय आ गया है, जो इस क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में भारत की क्षमता को रेखांकित करता है।

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प्रधानमंत्री महाराष्ट्र में 7600 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे

प्रधानमंत्री मोदी 9 अक्टूबर को दोपहर करीब 1 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से महाराष्ट्र में 7600 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।

प्रधानमंत्री कुल 7000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, नागपुर के उन्नयन की परियोजना की आधारशिला रखेंगे। यह परियोजना विनिर्माण, विमानन, पर्यटन, रसद और स्वास्थ्य सेवा सहित कई क्षेत्रों में विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगी, जिससे नागपुर शहर और व्यापक विदर्भ क्षेत्र को लाभ होगा।

प्रधानमंत्री शिरडी हवाई अड्डे पर 645 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले नए एकीकृत टर्मिनल भवन की आधारशिला रखेंगे। इससे शिरडी आने वाले धार्मिक पर्यटकों के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं और सुख-सुविधाएं मिलेंगी। प्रस्तावित टर्मिनल के निर्माण की थीम साईं बाबा के आध्यात्मिक नीम के पेड़ पर आधारित है।

प्रधानमंत्री सभी के लिए किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, महाराष्ट्र में मुंबई, नासिक, जालना, अमरावती, गढ़चिरौली, बुलढाणा, वाशिम, भंडारा, हिंगोली और अंबरनाथ (ठाणे) में स्थित 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। ये कॉलेज स्नातक और स्नातकोत्तर सीटों को बढ़ाने के साथ-साथ, लोगों को विशेष तृतीयक स्वास्थ्य सेवा भी प्रदान करेंगे।

भारत को “विश्व की कौशल राजधानी” के रूप में स्थापित करने के अपने दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रधानमंत्री भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) मुंबई का भी उद्घाटन करेंगे, जिसका उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक और व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ उद्योग के लिए लायक कार्यबल तैयार करना है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत स्थापित, यह टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट और भारत सरकार के बीच एक सहयोग है। संस्थान मेक्ट्रोनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, औद्योगिक स्वचालन और रोबोटिक्स जैसे अत्यधिक विशिष्ट क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करने की योजना बना रहा है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री महाराष्ट्र के विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) का उद्घाटन करेंगे। वीएसके छात्रों, शिक्षकों और प्रशासकों को स्मार्ट उपस्थिती, स्वाध्याय जैसे लाइव चैटबॉट के माध्यम से महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक डेटा तक पहुंच प्रदान करेगा। यह स्कूलों को संसाधनों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने, अभिभावकों और राज्य के बीच संबंधों को मजबूत करने और उत्तरदायी सहायता प्रदान करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली जानकारियां प्रदान करेगा। यह शिक्षण के तौर तरीकों और छात्रों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए तैयार किए गए निर्देशात्मक संसाधन भी प्रदान करेगा।

 

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