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कानपुर

मिन वात्सल्य के तहत, बच्चों को संस्थागत देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 2450 बाल देखभाल संस्थानों को सहायताश

मिशन वात्सल्य योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) द्वारा देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (सीएनसीपी) और कानूनी विवाद से जूझ रहे बच्चों (सीसीएल) की सहायता करने के उद्देश्य से लागू किया जाता है। मिशन वात्सल्य का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजनाओं तथा कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाते समय बच्चों के सर्वोत्तम हितों का हमेशा ध्यान रखा जाए। उद्देश्यों में बच्चों के लिए आवश्यक सेवाओं, आपातकालीन संपर्क सेवाओं की स्थापना और संस्थागत और गैर-संस्थागत देखभाल सेवाओं को बेहतर ढंग से लागू करना शामिल है। मिशन के तहत स्थापित बाल देखभाल संस्थान ( सीसीआई) अन्य बातों के साथ-साथ, आयु-उपयुक्त शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण तक पहुंच, मनोरंजन, स्वास्थ्य देखभाल और परामर्श सहयोग देते हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी राज्यों – हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित राज्य को छोड़कर सभी राज्यों और विधायी सदन वाले राज्य क्षेत्रों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में धनराशि साझा की जाती है, जहां लागत साझा करने का अनुपात 90:10 है। विधायी सदन रहित केंद्रशासित राज्यों में, 100 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की जाती है।

मिशन के तहत, बच्चों को संस्थागत देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 2450 सीसीआई को सहायता प्रदान की गई है। कुल 1,21,861 बच्चों को गैर-संस्थागत देखभाल सहायता प्रदान की गई। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान संस्थागत देखभाल के लिए 62,594 बच्चों को सहायता प्रदान की गई। वर्तमान में, राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 762 जिला बाल संरक्षण इकाइयां, 781 बाल कल्याण समितियां और 774 किशोर न्याय बोर्ड हैं।

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 3580 बच्चों को देश के भीतर और 449 बच्चों को विदेश में रहने वाले लोगों द्वारा गोद लिया गया।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय में “India’s Amrit Kaal:A Vision for dollar 5 trillion Economy” विषय पर गेस्ट लेक्चर कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर विद्या मंदिर महिला महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा “India’s Amrit Kaal:A Vision for dollar 5 trillion Economy” विषय पर गेस्ट लेक्चर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्त के रूप में Prof.Vandana Dwivedi,Head of Economics department,PPN PG College Kanpur विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सुशोभित किया एवं भारत की आर्थिक दृष्टि और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के मार्ग के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा की।

कार्यक्रम की शुरुआत गेस्ट स्पीकर प्रोफेसर वंदना द्विवेदी एवं महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर पूनम विज के द्वारा दीप प्रज्वान करके की गई।इसके पश्चात कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष,सुश्री नेहा सिंह के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने व्याख्यान के विषय का परिचय दिया और वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इसके बाद अतिथि वक्ता का परिचय कराया गया। व्याख्यान में,गेस्ट स्पीकर प्रोफेसर वंदना द्विवेदी ने भारत की आर्थिक नीतियों में परिकल्पित अमृत काल की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। वक्ता ने सरकार द्वारा किए जा रहे रणनीतिक उपायों पर चर्चा की, जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास, डिजिटल परिवर्तन, कौशल वृद्धि और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नीति सुधार शामिल हैं। उन्होंने इस दृष्टि को साकार करने में सतत विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के महत्व पर भी जोर दिया। व्याख्यान में शिक्षा ,निवेश,विनिर्माण, सेवा और कृषि जैसे विकास को गति देने वाले प्रमुख क्षेत्रों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। वक्ता ने भारत के आर्थिक भविष्य को आकार देने में युवाओं और महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों पर विचार किया गया और व्यावहारिक समाधान सुझाए गए। इसके बाद हुए संवादात्मक सत्र में छात्राओं और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक रुझानों के प्रभाव से लेकर $5 ट्रिलियन लक्ष्य को प्राप्त करने में स्टार्टअप और उद्यमिता की भूमिका तक के प्रश्न पूछे गए। वक्ता के जवाब व्यावहारिक और उत्साहवर्धक थे, जिससे श्रोता प्रेरित और सूचित हुए। कार्यक्रम का समापन डॉ० शोभा मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने अतिथि वक्ता को उनके ज्ञानवर्धक व्याख्यान के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संयोजन एवं संचालन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष  नेहा सिंह के द्वारा किया गया कार्यक्रम में महाविद्यालय की कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय की शिक्षिकाएं एवं कुल 67 छात्राएं उपस्थित रही।

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अंतर महाविद्यालय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 8 दिसंबर एस एन सेन बालिका विद्यालय पीजी कॉलेज द्वारा अंतर महाविद्यालय छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय महिला हैंडबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया यह प्रतियोगिता सेठ मोतीलाल खेड़िया स्कूल में आयोजित की गई जिसमें कानपुर नगर से पांच महाविद्यालयों ने ट्रायल में प्रतिभा किया। इस अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता में टीमों की संख्या की प्रतिभागिता कम होने के कारण ट्रायल करवाया गया जिसमें 21 खिलाड़ियों का चयन किया गया। रेफरी श्री अनुज , श्री हरप्रीत , एवंअनुराग को कानपुर हैंडबॉल एसोसिएशन से आमंत्रित किया गया था।ट्रायल में कुल 35 खिलाड़ियों ने प्रतिभा किया जिसमें से 21 खिलाड़ियों को चयनित किया गया यह सभी चयनित खिलाड़ी एक हफ्ते के कैंप के बाद छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की हैंडबॉल महिला टीम बनाकर नॉर्थ जोन अंतर विश्वविद्यालय ही प्रतियोगिता में प्रतिभा करेंगे प्राचार्य प्रोफेसर सुमन ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी और प्रोफेसर प्रीति पांडेय जो इस कार्यक्रम की आयोजन सचिव थी उनको सफल ट्रायल हेतु बधाई दी एवं टीम को आगे और मेहनत कर कानपुर विश्वविद्यालय टीम को को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
चयनित खिलाड़ियों के नाम निम्न वत हैं– आरती देवी, दिव्यांशी सिंह ,अनामिका कुमारी ,आरोही द्विवेदी ,दीक्षा कुमारी ,दिव्या सिंह, अंकित यादव, आराध्या यादव ,प्रीति सिंह , नित्या ,मुस्कान गौतम ,अंजलि छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से निशा विश्वकर्मा, रागिनी गिरी ,नैंसी वर्मा ,निशा, दीपिका कुमारी ए एन डी कॉलेज कानपुर से, स्वाति , प्रिया एस एन सेन बालिका विद्यालय, पीजी कॉलेज से , दीशिका सिंह VSSD कॉलेज कानपुर , जहान्वी DAV कॉलेज कानपुर इस प्रकार कुल 21 खिलाड़ियों का चयन किया गया। इन सभी खिलाड़ियों का छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय की तरफ से नॉर्थ जोन महिला हैंडबॉल अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में प्रतिभा करने वाली छात्रों के लिए चयन किया जाएगा इन सभी खिलाड़ियों के लिए एक हफ्ते का कैंप लगेगा उपरांत टीम हेतु 16 खिलाड़ियों का चयन करके विश्वविद्यालय को प्रतिनिधित्व करते हुए टीम का चयन किया जाएगा पूरे कार्यक्रम का आयोजन प्रोफेसर प्रीति पांडेय विभागध्यक्ष शारीरिक शिक्षाविभाग सेन कॉलेज के द्वारा किया गया प्राचार्य प्रोफेसर सुमन एवं शिक्षिकाओं ने आयोजन सचिव को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई दी। हैंडबॉल प्रतियोगिता का आयोजन सेठ मोतीलाल खेड़िया स्कूल में कराया गया जहां की प्राचार्य एवं खेल शिक्षक श्री शंकर जी ने पूर्ण सहयोग के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया ।आयोजन सचिव ने सेन प्राचार्य प्रोफेसर सुमन एवं सेठ मोतीलालविद्यालय के प्राचार्य एवं सहयोगियों को धन्यवाद प्रेषित किया।

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विकसित भारत क्विज मेगा इवेंट आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 5 दिसम्बर दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर की एनएसएस इकाई द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संगीता सिरोही के कुशल मार्गदर्शन में कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए विकसित भारत क्विज में भाग लेने के लिए एक मेगा इवेंट का आयोजन किया गया। यह क्विज युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा माय भारत पोर्टल के माध्यम से 25 नवंबर से 5 दिसंबर तक किया गया। इसमें विजेता छात्राओं को सेकंड राउंड में जाने का मौका मिलेगा। जो सेकंड राउंड में विजेता होंगे उन्हें जनवरी 2025 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले नेशनल यूथ फेस्टिवल में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से सीधे बात करने एवम् संपूर्ण देश के सम्मुख अपने विचार रखने का मौका मिलेगा। क्विज में आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और स्थिरता जैसे विषयों को शामिल करते हुए विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की प्रगति को समझने की चुनौती दी गई। 5G के लॉन्च से लेकर महत्वपूर्ण नीतिगत बदलावों तक, यह वैश्विक नेता के रूप में भारत के उदय पर एक व्यापक नज़र डालता है। कॉलेज की 500 से अधिक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक इस क्विज मे प्रतिभाग किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त वॉलिंटियर्स तथा प्राध्यापिकाओं का सहयोग सराहनीय रहा।

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कानपुर में बाल श्रमिकों को कार्य से हटाने, रेस्क्यू कर उनको पुनर्वासन कराये जाने हेतु जिला टास्क फोर्स की समिति का गठन

कानपुर 5 दिसम्बर उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग लखनऊ के अनुपालन में जनपद कानपुर नगर में बाल श्रमिकों को कार्य से हटाने, रेस्क्यू कर उनको पुनर्वासन कराये जाने हेतु जिला टास्क फोर्स की समिति का गठन जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में किया गया।

जिला टास्क फोर्स की समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष, डी०सी०पी० क्राइम सदस्य, जिला न्यायाधीश द्वारा नामित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के एक प्रतिनिधि शुभी गुप्ता सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदस्य, अपर जिलाधिकारी (नगर) सदस्य, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य, जिला प्रोबेशन अधिकारी सदस्य, सहायक श्रम आयुक्त सदस्य सचिव, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति सदस्य, प्रभारी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट सदस्य, सुखदेव प्रसाद मिश्रा, पूर्व राष्ट्रीय मंत्री, भारतीय मजदूर संघ सदस्य तथा दो एन०जी०ओ० (बालश्रम उन्मूलन में कार्यरत) कृष्ण श्रीवास्तव, सार्वजनिक शिक्षा संस्थान, वैश्नोई नगर, विनायकपुर सदस्य एवं कल्पना सिंह, प्रगति सेवा संस्थान सदस्य बनाये गये।

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“विज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नति ने स्वक्छ पर्यावरण के हमारे मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया” विषय पर अंतरमहाविद्यालयी वाद- विवाद प्रतियोगि आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 5 दिसम्बर, एस एन सेन बालिका विद्यालय पी जी कॉलेज कानपुर के रसायन विज्ञान विभाग ने “ विज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नति में स्वक्छ पर्यावरण के हमारे मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया है- विषय पर एक अंतरमहाविद्यालयी वाद- विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया । इस अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध ११महाविद्यालयों की ३२ टीमो के ६४ प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय प्रबंध तंत्र के सचिव पी के सेन संयुक्त सचिव शुभ्रो सेन प्राचार्या प्रोफेसर सुमन , निर्णायक मंडल  श्रद्धा मिश्रा ,डिप्टी डायरेक्टर ,डी एम एस आर डी तथा डॉ गोवर्धन लाल ,जॉइंट डायरेक्टर ,डी एम एस आर डी कानपुर तथा रसायन विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो गार्गी यादव ने माँ सरस्वती के माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलित करके किया ।सभी छात्र छात्राओं ने अपने अपने विचार पक्ष और विपक्ष में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया ।श्री शुभ्रो जी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अच्छे वाद विवाद करने के गुर बताए । प्राचार्या प्रो सुमन ने सभी प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाते हुए भूरि भूरी प्रशंसा की ।मंच संचालन बी एस सी तृतीय वर्ष की सृष्टि जायसवाल तथा माही तिवारी ने किया ।निर्णायकों के निर्णय लेने के अंतराल में महाविद्यालय की छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण पर एक लघु नाटिका और नृत्य का प्रदर्शन किया ।
विजयी टीमों को पुरस्कृत मंचासीनअतिथियों किया ने किया । प्रतियोगिता का निर्णय इस प्रकार रहा-
प्रथम -सिमोन तथा मौलश्री ए एन डी महाविद्यालय

द्वितीय -चित्रांशी शुक्ला तथा ग्वाँशी पटेल , ब्रह्मावर्त पी जी कॉलेज,मधना

तृतीय – माही तथा ख़ुशी ,डॉ वी एस ई सी

सांत्वना – निहारिका तथा सुहावनी कौर, जागरण कॉलेज
मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कार्यक्रम में डा अलका टंडन ,डॉ निशा वर्मा, डॉ रचना निगम डॉ शुभा बाजपेयी सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे ।

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आईआईटी कानपुर, में उपराष्ट्रपति का संबोधन

पहले भारत एक अलग देश था, लेकिन अब यह आशा और संभावनाओं वाला देश है। अब यह आर्थिक उन्नति करता हुआ एक देश है, एक अभूतपूर्व बुनियादी ढांचे वाला देश है,अब यह एक ऐसा देश है जिसके समुद्र, जमीन, आकाश या अंतरिक्ष में प्रदर्शन को वैश्विक प्रशंसा मिल रही है।

हमारे देश में जो परिवर्तन आया है, वह मोटे तौर पर इन संस्थानों के पूर्व छात्रों के कारण ही है। इतिहास गवाह है कि कोई भी राष्ट्र तकनीकी क्रांतियों के बगैर महानता हासिल नहीं कर सका है। पैक्स इंडिका को वास्तविकता बनाने के लिए, भारत को इसी तरह तकनीकी प्रगति का नेतृत्व करना होगा।

पिछले एक दशक में,भारत में उल्लेखनीय परिवर्तन और नवाचार देखा गया है। बेहतरी के लिए वातावरण में पूरी तरह से क्रांति ला दी गई है। हमारी पेटेंट फाइलिंग दोगुनी से भी अधिक हो गई है। कुछ लोगों के लिए यह आँकड़े हो सकते हैं, लेकिन आप इसका महत्व जानते हैं।

मैंने अक्सर संस्थानों पर इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि शोध केवल शोध के लिए नहीं होना चाहिए।

एक शोध पत्र सिर्फ अकादमिक प्रशंसा के लिए नहीं है। एक शोध पत्र का आधार ऐसा होना चाहिए, जो बड़े पैमाने पर जनता के लिए परिवर्तनकारी हो। वर्ष 2014-15 में 42,763 पेटेंट फाइलिंग थे, जो 2023-24 में 92,000 हो गए और ये इस प्रक्रिया में हम वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर हैं। लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं हो सकते। हमें शीर्ष पर पहुंचना है और इसके लिए पारिस्थितिकी तंत्र, सकारात्मक नीतियों, पहलों ने आपके लिए कार्य संस्कृति को और अधिक सुविधाजनक बना दिया है। 1,50,000 स्टार्टअप के साथ हमारे पास तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। लेकिन जो अधिक उल्लेखनीय बात है, कि उनमें से 118 यूनिकॉर्न की लागत 354 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।

मैं उद्योग, व्यापार, व्यवसाय और कॉरपोरेट्स तथा उनके संगठनों से अपील करूंगा, क्योंकि नवाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उचित परिप्रेक्ष्य में समझना ज़रुरी है। वे अपने वर्तमान में और अपने भविष्य में निवेश कर रहे हैं। उन्हें इसका अहसास करना होगा। मैंने वैश्विक स्तर पर देखा और शीर्ष 25 में मैं केवल दो भारतीय कॉरपोरेट्स को ही पाया। वास्तव में हमें उस बड़े बदलाव की ज़रूरत है, जिसकी देश को ज़रुरत है, एक ऐसा बदलाव जो वैश्विक स्थिरता और सद्भाव के लिए होगा, क्योंकि भारत की वृद्धि विश्व के लिए समृद्धि है। यही हमारी संस्कृति है।

नवाचार के प्रति कॉर्पोरेट प्रतिबद्धता मजबूत हो रही है, इसे आगे बढ़ने की जरूरत है। बीएसई 100 कंपनियां अभी से अपना आरएंडडी में निवेश बढ़ा रही हैं, इसे समझने के लिए बहुत साहस की जरूरत है। पिछले पांच वर्षों में राजस्व 0.89% से 1.32% तक पहुंच गया है। इसके लिए एक बड़ी छलांग की जरूरत है। मुझे यकीन है कि निदेशक और उनके जैसे लोग तथा आईआईटी के पूर्व छात्र, उन्हें एक मंच पर बातचीत करनी चाहिए। वे शायद इस ग्रह पर बेजोड़ प्रतिभा का भंडार हैं। वे भारत और उसके बाहर अच्छे फैसले लेने की स्थिति में है।

मैं लंबे समय से आईआईटी के पूर्व छात्र संघों के एक संघ के लिए प्रयास कर रहा हूं। वह वैश्विक थिंक टैंक न केवल कॉरपोरेट्स को प्रेरित कर सकता है, बल्कि एक बड़ा बदलाव भी ला सकता है। मुझे ख़ुशी होगी अगर निदेशक अन्य निदेशकों से संपर्क करके पहल करें कि हमारे पास आईआईटी के पूर्व छात्र संघों का एक संघ हो। एक बार जब वे लोग एक ही बात पर सहमत होंगे,तो मुझे यकीन है कि तकनीक की मदद से ऐसा हो सकेगा। इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से संस्थागत समर्थन आईआईटी कानपुर के साथ बढ़ रहा है, जिसने पहले 100 से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों सहित 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 250 स्टार्टअप को समर्थन दिया था। बाद की उपलब्धि खास ध्यान देने योग्य है। जब मैं यहाँ आया तो मैंने देखा कि ज्यादा छात्राएं नहीं थीं, लेकिन उनकी जो भी उपस्थिति है,आप बहुमत से अधिक हैं। बड़ा बदलाव पहले से ही हो रहा है।

भविष्य में नवाचार हमारे लिए ज़रुरी भूमिका निभाएगा और ये सिद्धांत मौलिक हैं। स्मार्ट, समाधान-उन्मुख, स्केलेबल और टिकाऊ। इन शब्दों का अर्थ बहुत सतत् है। मैं एक साधारण वजह से कहता हूं। हमारे ग्रह को वास्तव में ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है और हमारे पास कोई दूसरा ग्रह नहीं है। इसलिए विकास स्थिर होना चाहिए। क्रांतिकारी स्मार्टफोन या भारत की यूपीआई प्रणाली जैसे स्मार्ट नवाचार सरल, अनुकूलनीय और परिवर्तनकारी होने चाहिए। जब मैं इस अनुकूलनशीलता को देखता हूं, तो यह मेरे लिए गर्व का क्षण होता है। आज करोड़ों भारतीय किसानों को उनके खातों में सीधे धनराशि प्राप्त होती है। आज जो सरकार कर रही है, वह सबसे अलग है। सुविधाए प्राप्त करने वालों को देखिए,जिन्हें पहले इनकी उम्मीद नहीं थी। तकनीकी मदद के चलते आज धनराशि को लेकर कोई संशय नहीं है, कोई बिचौलिया नहीं, कोई भ्रष्ट तत्व नहीं, पारदर्शिता और जवाबदेही और सबसे खास बात प्रक्रियाओं में तेज़ी आ रही है।

समाधान-उन्मुख नवाचार के लिए कृषि से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक के क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया की समस्याओं को समझने की ज़रुरत है। मेरे युवा मित्रों, इसके लिए ज़रुरी है कि हम आरामदायक क्षेत्र से बाहर निकलें और पूरे भारत में विविध हितधारकों के साथ जुड़ें। मैं इसी पर ध्यान केंद्रित करूंगा, क्योंकि मैं आईआईटी कानपुर से एक उत्साही अपील करने आया हूं।

मुझे बेहद खुशी होगी, अगर आईआईटी कानपुर मिशन मोड में किसानों का कल्याण कर सके। कुछ समस्याएं तो बेहद साफ है जैसे पराली जलाने का मुद्दा। कृपया अपने विचारों से इसका कोई समाधान खोजें। हमारे किसान तनावग्रस्त है, क्योंकि उन्हें नवाचार के लाभों का अनुभव नहीं है। आप में से अधिकांश लोग, या आप में से बहुत से लोग किसान परिवारों से आते होंगे। यही बताया जाता है कि कृषि उपज होती है और किसान उसे बेचता है और बात ख़त्म।

किसान को अपने उत्पाद का मूल्य क्यों नहीं बढ़ाना चाहिए? किसान को इसकी मार्केटिंग क्यों नहीं करनी चाहिए? उद्योग के राजकोषीय आयाम की मात्रा की कल्पना करें, जो कृषि उपज के मूल्य में बढ़ोत्तरी करता है।

मैंने कई आईआईटी से निकले महानुभावों को इस क्षेत्र में जाते देखा है। लेकिन जो लोग इसे आसानी से कर सकते हैं, कृपया इस पर ध्यान दें। कहा जा रहा है कि अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है, इसकी जरूरत है। हमें भारत में डिजाइनिंग की जगह, भारत में विनिर्माण पर फोकस करना चाहिए। यह बहुत ही संवेदनशील क्षेत्र है। मैं बार-बार कहता रहा हूं, विनिर्माण का मतलब है कि हम मूल्यों में बढ़ोत्तरी करें, अपने कच्चे माल में वृद्धि करें। ये तो इसका एक छोटा सा पहलू है। लेकिन जब आप पारादीप जैसे बंदरगाह पर जाते हैं या जहां बिना मूल्यवर्धन के लोहा निर्यात किया जा रहा हो, तो युवा लड़के और लड़कियां उस परिदृश्य को किस तरह देखेंगे। कोई उस लौह अयस्क पर नियंत्रण रखता है, किसी को सौदे पर बातचीत करने के लिए कमरे में बैठना आरामदायक लगता है, किसी को विदेश में। लेकिन इस प्रक्रिया में हमारे हितों से समझौता किया जाता है। कोई राजकोषीय लाभ नहीं होता। आपको मूल्यांकन क्षेत्रों में अत्यंत नवोन्मेषी होना चाहिए। हालाँकि बहुत कुछ हो रहा है। यदि कचरे से धन बनाया जा रहा है, यदि कच्चा माल विभिन्न स्वरूपों में उभर कर आ रहा है, तो यह नवाचार के कारण ही है। युवाओं, स्थिरता को प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने की हमारी सभ्यता के लोकाचार के अनुरूप सभी नवाचारों को रेखांकित करना चाहिए। मुझे पता है कि इस प्रवृत्ति में कुछ गिरावट आ रही है। यह उन लोगों के लिए फैशन की बात है , जो संपन्न हैं और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। आप प्रतिभाशाली व्यक्तित्व हैं, प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग होना चाहिए, क्योंकि यही सतत् विकास का आधार है।

यदि हम प्रकृति के साथ सामंजस्य रखते हैं, तो हमें इस तरह से काम करना होगा, कि पारिस्थितिकी तंत्र के विकास से नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ सामान, जैविक खेती और कृषि वानिकी में अवसर पैदा हों। जैसा कि मैंने कहा, किसानों को नवाचार को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाते हुए पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को अपनाने में सक्षम बनाना चाहिए। असल में अब यह एक सपना नहीं है, यह 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की हमारी मंजिल है। हमें कृषि के कल्याण पर अधिक गंभीरता से ध्यान केंद्रित करने की ज़रूरत है। आपको इस बात पर विचार करना चाहिए कि घटती भूमि के आकार के साथ कृषि अर्थव्यवस्था को कैसे सुधारा जाए। सरकार की कई योजनाएं, हैंड-होल्डिंग योजनाएं, सहकारी समितियां हैं, जिन्हें अब हमारे संविधान में जगह मिली है। वह सब कुछ किया जा रहा है, जो हो सकता है। लेकिन नवीनता उत्पन्न होनी चाहिए। एक बार जब वह नवप्रवर्तन हो जाएगा, तो क्रियान्वयन भी अपने आप हो जाएगा।

हमारे जनसांख्यिकीय लाभांश को देखते हुए, 2047 तक भारत का विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करना ज़रुरी है। प्राकृतिक संसाधन, प्रतिभा पूल और सहायक नीतियां, सकारात्मक नीतियों जैसी सुविधाएं हमारे पास नहीं थी, जो आपके पास है। जैसे ही आप बाहरी दुनिया के लिए प्रवेश करेंगे,एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है जो आपकी मदद करेगा। आप पाएंगे कि यदि आपके पास कोई स्टार्टअप है, तो शीर्ष कॉर्पोरेट्स निवेश करेंगे। आप अखबार तो पढ़ते ही होंगे, वे उसमें दिलचस्पी लेते हैं। आपने देखा होगा कि कैसे आपके संस्थानों से लोग अरबपति बन गए हैं, क्योंकि उन्होंने नवाचार से एक तकनीकी दिग्गज संस्था बनाई है।

सामान्य आदमी का सरोकार नवाचारों से नहीं, बल्कि समाधान से है। इसलिए, समाधान प्रदान करने वाला कोई भी नवाचार हर किसी की कल्पना को आकर्षित करता है। क्या आप हमारे जैसे देश की कल्पना कर सकते हैं जहां लोग गांवों में रहते हों? प्रौद्योगिकी की अनुकूलनशीलता इतनी तेज रही है, जिससे हमें दुनिया में बढ़त मिली है । हमारी प्रति व्यक्ति इंटरनेट खपत अमेरिका और चीन की संयुक्त खपत की तुलना में अधिक है। अब आप पाएंगे कि हर व्यक्ति डिजिटल माध्यम से भुगतान करने लगा है। अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखिए, हमारी अर्थव्यवस्था औपचारिक होती जा रही है। एक औपचारिक अर्थव्यवस्था नैतिक मानकों, पारदर्शी शासन का अग्रदूत है। आपमें से जो लोग , जिनके माता-पिता से आयकर रिटर्न दाखिल करते थे, उनसे पता कर सकते हैं कि पहले यह काफी परेशानी भरा काम हुआ करता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। सभी लेन-देन सरल हो गए हैं। पूरे भारत में भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे का अभिसरण बाजार संबंधों के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा करता है।

मैं इनोवेटर्स से आग्रह करूंगा, यानी कि आप युवाओं से कि आपको स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के लिए इन फाउंडेशन का लाभ उठाना चाहिए, जैसे कि कानपुर के चमड़े के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना चाहिए। राष्ट्र की प्रगति, नवाचारों को तैयार करने की आपकी क्षमता पर निर्भर करती है, जो आर्थिक विकास को आगे बढ़ाते हुए वास्तविक चुनौतियों का समाधान भी करती है।

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सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों के दौरान फिजिकल वैलेट सिस्टम शुरू करने की मांग वाली जनहित याचिका को किया खारिज।

कानपुर नगर, 26 नवम्बर (सू.वि.)* आज सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चुनावों में पेपर वैलेट सिस्टम को फिर से लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता डॉ. के.ए. पाल के ईवीएम से छेड़छाड़ के दावों को खारिज कर दिया, जिसमें उन नेताओं की असंगतता को उजागर किया गया, जो ईवीएम की विश्वसनीयता पर तभी सवाल उठाते हैं, जब वे चुनाव हार जाते हैं। याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने टिप्पणी की अगर आप चुनाव जीतते हैं तो ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं होती है। जब आप चुनाव हारते हैं, तो ईवीएम से छेड़छाड़ होती है। इस प्रकार अतंतोगत्वा न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता डॉ. के.ए. पाल की दलीलों को खारिज करते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

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एस एन सेन बालिका महाविद्यालय में संविधान दिवस स्वतंत्रता के अमृत काल के अवसर कार्यक्रम आयोजित

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 नवम्बर एस एन सेन बालिका महाविद्यालय में संविधान दिवस स्वतंत्रता के अमृत काल के अवसर पर तीन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा इस दिवस का उद्घाटन महाविद्यालय की छात्राओं को शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें “संविधान की उपयोगिता” “हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए छात्राओं को संविधान के विषय में अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता अरमापुर पीजी कॉलेज के राजनीति शास्त्र विभाग में सहायक आचार्य डॉक्टर धीरेन्द्र कुमार दोहरे ने संविधान की भारतीय जनमानस के लिए उपयोगिता पर प्रकाश डाला था संविधान का गहन अध्ययन करने के लिए छात्राओं को प्रेरित किया। मीडिया प्रभारी डॉ प्रीति सिंह ने बताया कि इस अवसर पर मुख्य वक्ता द्वारा प्राचार्या प्रो सुमन को संविधान की प्रति भेंट की गई। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम प्रभारी राजनीति शास्त्र विभाग की प्रभारी डॉ रश्मि गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सभी शिक्षिकाएं व छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज में मनाया गया संविधान दिवस शपथ एवं अन्य गतिविधियों के साथ

भारतीय स्वरूप संवाददाता कानपुर 26 अक्टूबर, दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज, कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, राजनीति विज्ञान विभाग, इतिहास विभाग एवम् चित्रकला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संविधान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ संगीता सिरोही द्वारा संविधान शपथ दिलवाई गई। छात्राओं के मध्य संविधान के प्रति जानकारियां एवं जागरूकता लाने हेतु इस अवसर पर अन्य गतिविधियों में भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता तथा रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। समस्त कार्यक्रमों में 100 से अधिक छात्राओं ने प्रतिभाग किया। महाविद्यालय प्राचार्या प्रो वंदना निगम ने संविधान दिवस के अवसर पर छात्राओं के द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो पप्पी मिश्रा, प्रो अभिलाष गौर, प्रो शिखा पांडे, प्रो उपासना वर्मा, प्रो शुभम शिवा, डॉ पूजा श्रीवास्तव, डॉ आभा पांडे, डॉ ज्योत्सना पांडे, श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव आदि सभी का विशेष योगदान सराहनीय रहा।

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