
बोर्ड ने आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर एक करोड़ पाठ्यक्रम नामांकन और 1,000 से ज्यादा पाठ्यक्रमों के दोहरे मील के पत्थर को स्वीकार किया। बोर्ड ने महसूस किया कि ये मील के पत्थर सरकारी अधिकारियों के बीच योग्यता-आधारित शिक्षा के पोषण में मंच की भूमिका को रेखांकित करते हैं।
बैठक में आईजीओटी कर्मयोगी के साथ ई-एचआरएमएस मंच के एकीकरण की सराहना की गई, जो अधिकारियों की दक्षता एवं क्षमता के आधार पर उनकी तैनाती को सक्षम बनाते हुए भूमिका-आधारित शासन को सक्षम बनाएगा।
बोर्ड ने राज्यों के मंच के लिए नीति के साथ सहयोग की सराहना की, जिसमें ब्लॉक स्तर एवं जिला-स्तर पर क्षमता-निर्माण पहल का संचालन करने में समर्थ क्यूरेटेड कार्यक्रमों के महत्व पर बल दिया गया है।

संसद द्वारा पारित तीन नए आपराधिक कानूनों पर पाठ्यक्रमों का शुभारंभ- भारतीय न्याय संहिता, 2023; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023; और भारतीय साक्षी अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम की सराहना सभी लोगों ने की, जो जन-सामना, नागरिक-केंद्रित शासन में शामिल अधिकारियों को सर्वाधिक समकालीन मुद्दों पर प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु कर्मयोगी भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके अलावा बोर्ड ने प्रमुख विकास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने में क्षेत्रीय अधिकारियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जन कर्मयोगी पहल की भी सराहना की। आईजीओटी पर ज्ञान कर्मयोगी, जो कि लोक सेवकों के लिए एक व्यापक ज्ञान कोष के रूप में कार्य कर रहा है, को इस मंच पर एक स्वागत योग्य संयोजन के रूप में उल्लिखित किया गया।
इस बोर्ड के सदस्यों में श्रीमती एस. राधा चौहान (सचिव, डीओपीटी), डॉ. निर्मलजीत सिंह कलसी (अध्यक्ष, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद), श्री गोविंद अय्यर (निदेशक और अध्यक्ष, एसवीपी फिलैन्थ्रपी फाउंडेशन), श्री पंकज बंसल (सह-संस्थापक, पीपलस्ट्रांग), श्रीमती देबजानी घोष (अध्यक्ष, नैसकॉम), श्री एस. कृष्णन (सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय), श्री अभिषेक सिंह (सीईओ, कर्मयोगी भारत) और श्री एस.पी. रॉय (सचिव, क्षमता निर्माण आयोग) सहित कर्मयोगी भारत के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे।
इसके आगे बोर्ड ने कंटेंट मार्केटप्लेस को सक्रिय करने और शिक्षण के परिणामों को संवर्द्धित करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मूल्यांकन व सामग्री की सोर्सिंग के साथ-साथ प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में प्रभाव मूल्यांकन पर अपना ध्यान केंद्रित करने की पुष्टि की।
इसके अलावा कर्मयोगी भारत की टीम के प्रमुखों ने भविष्य के लिए व्यापक रणनीतिक लक्ष्यों पर अपनी व्यक्तिगत प्रस्तुतियां भी दीं और बोर्ड के सदस्यों ने इस पर प्रतिक्रिया भी दी।
यह बैठक नियम-आधारित से भूमिका-आधारित शासन की ओर बढ़ने में रूपांतरणकारी भूमिका निभाने के प्रयासों को दोगुना करने के संकल्प के साथ समाप्त हुई।

भारतीय स्वरुप दैनिक ई-पेपर
कानपुर भारतीय स्वरूप संवाददाता, डी जी कॉलेज, कानपुर के द्वारा उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन , कमिश्नर, कानपुर नगर तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, कानपुर मंडल, कानपुर नगर के निर्देशन में कानपुर नगर के ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक एवं शैक्षणिक पर्यटन को बढ़ावा देने एवं छात्र-छात्राओं के मध्य उसके व्यापक प्रचार प्रसार हेतु स्थापित किए गए युवा पर्यटन क्लब के सौजन्य से क्लब की कोऑर्डिनेटर डॉ संगीता सिरोही के कानपुर दर्शन यात्रा का आयोजन किया गया । जिसमें महाविद्यालय की 32 छात्राओं ने प्रतिभाग किया । इस यात्रा के दौरान छात्राओं ने अटल घाट पर स्वच्छता अभियान भी चलाया। कानपुर दर्शन यात्रा में मुख्य रूप से गंगा बैराज, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, इस्कॉन टेंपल, ब्रह्मव्रत घाट, ब्रह्मा जी की खूंटी, लव कुश जन्मस्थली, ध्रुव टीला, नाना राव पेशवा स्मारक पार्क, ग्रीन पार्क स्थित विजिटर्स गैलरी एवं म्यूजियम, मोतीझील स्थित कारगिल पार्क, ओपन जिम एवं सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एरेना पार्क तथा कानपुर विश्वविद्यालय का भ्रमण कराया गया। साथ में उपस्थित गाइड कार्तिकेय सिंह ने समस्त स्थानो के बारे में छात्राओं को विस्तार पूर्वक जानकारियां दी। कानपुर दर्शन यात्रा को सफलतापूर्वक संचालित करने में नगर निगम अधिकारी श्री शशांक दीक्षित जी एवं महाविद्यालय प्राचार्या प्रो अर्चना वर्मा तथा कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र श्रीवास्तव का सहयोग सराहनीय रहा।
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भारतीय स्वरूप संवाददाता, क्राइस्ट चर्च कॉलेज कानपुर, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग की आयोजना में वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस का अयोजन डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक और तकनीकी उद्देश्यों के लिए हिंदी शब्दावली के प्रयोग को छात्रों और समाज के लाभ के लिए शिक्षादाताओं, शोधकर्ताओं और उद्योगपतियों को एक मंच पर लाना है।